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Incest खेल ससुर बहु का
(27-02-2026, 01:52 AM)@@004 Wrote: प्रतीक्षा में

Shukriyaa dost


bas bane rahiye
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(27-02-2026, 10:42 PM)@@004 Wrote: हम इंतजार करेंगे

शुक्रिया दोस्त सहकार देने के लिए


बने रहिये
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(28-02-2026, 10:19 AM)rangeeladesi Wrote: वाह! बहुत सुन्दर.

आपका बहोत बहोत धन्यावाद जी.....
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चलिए कहानी में थोडा आगे बढ़ा जाए
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थोड़ी देर पहले मैने आपको बताया था कि जब्बार एक छोटी मछली के बारे मे बात कर रहा था जिसे वो फाँसना चाहता था। आइए जानते हैं आख़िर उस छोटी मछली के बारे मे उसे पता कैसे चला। इसके लिए हमे समय मे थोडा पीछे जाना पड़ेगा। तो चलें!!!


जब्बार अभी तक इस बात पे कॉन्सेंट्रेट कर रहा था कि, विश्वा इलाज के लिए कहा जा सकता है  और  इसमे उसका समय भी बर्बाद हो रहा था, उपर से नाकामयाबी  झेलनी पड़ रही थी। पर फिर उसके शैतानी दिमाग़ ने थोडा दूसरी तरह से सोचना शुरू किया। उसने सोचा कि जहा भी गया हो राजा जाएगा तो प्लेन से ही  और  प्लेन या तो एरलाइन्स के पास होता है या फिर चार्टर कंपनी के पास। जब उसे दुनिया से ये बात छुपनो थी की उसका बेटा इलाज के लिए कहा जा रहा है तो वो एरलाइन्स तो कभी नही इस्तेमाल करेगा।

और फिर चार्टर को। का नाम पता लगा कर वहा पहुँचना तो उसके बाए हाथ का खेल था। जब शाम को दफ़्तर खाली हो गया तो वो एक दूप्लिकेट चाबी (जिनका एक गुच्छा हुमेशा उसकी जेब मे रहता था),की मदद से अंदर घुस गया। ये चाबियाँ वो क्यू  रखता था, आगे आपको ज़रूर पता चलेगा। नहीं चलेगा तो मै बता दूंगी। मैत्री की पेशकश

आइए अभी अंदर चल कर देखते हैं वो क्या कर रहा है। अंदर जब्बार कंप्यूटर के सामने बैठा था पर पासवर्ड ना मालूम होने के कारण वो फाइल्स खोल नही पा रहा था। झल्ला कर उसने मशीन बंद की और उठ कर गुस्से से एक फाइलिंग कॅबिनेट पर हाथ मारा। कॅबिनेट खुल गया और  उसमे से कुछ कागज़ात गिर गये। उसने जल्दी से दरवाज़े की तरफ देखा-कहीं किसी ने कुछ सुना तो नही था।

वो पेपर्स उठा कर वापस रखने लगा की एक फाइल पर उसकी नज़र गयी। उसने उसे खोला तो उसकी बाँछें खिल गयी।

पाइलट: माजिद सुलेमान

लास्ट चार्टर: मुंबई

करेंट स्टेटस: ऑन रेस्ट

लास्ट चार्टर क्लाइंट्स: राजकुल ग्रूप

नेक्स्ट चार्टर: न्यू देल्ही. मैत्री की लेखनी

ये राजकुल ग्रूप के चार्ट्स की फाइल थी, उसने पलटते हुए वो डेट खोजनी शुरू की जब राजा अपने बेटे को लेकर गया होगा, पर उस दिन की एंट्री थी ही नही। कहीं राजा ने दूसरी चार्टर सर्विस तो नही उसे की। नही, वो हुमेशा इसी को उसे करता है। तो फिर जानबुझ कर उस फ्लाइट की एंट्री नही की गयी है। उसने फिर से फाइल को स्टडी करना शुरू किया  और  पिछले 3 महीनो मे राजा की फ्लाइट्स उड़ाने वाले पाइलट्स का नाम,पता और फोन नंबर नोट कर लिया। सबसे ज़्यादा बार इसी माजिद सुलेमान ने फ्लाइट्स पाइलट की थी, उस मिस्सिंग एंट्री के पहले वाली फ्लाइट और उस मिस्सिंग एंट्री के बाद वाली फ्लाइट जो की आखरी फ्लाइट भी थी, भी उसी ने पाइलट की थी। उसे अंधेरे मे रोशनी की बस एक किरण नज़र आ गयी और ये उस हैवान के लिए काफ़ी था।

अब अतीत से वापस वर्तमान मे आ जाते हैं  और  महल चलते हैं जहा 2 बेचैन दिल बस इस बात का इंतेज़ार कर रहे हैं की कब नौकर-चाकर बाहर जाएँ और वो फिर से एक-दूसरे मे खो जाएँ। रात के 10:30 बज गये हैं  और  नौकर बस दिन के काम निपटाने वाले हैं,मेनका अपने कमरे मे है और राजासाहब नीचे बेचैनी से चहल कदमी कर रहे हैं।

जैसे ही नौकर काम ख़तम कर के बाहर निकले, राजासाहब ने बटन दबा कर सारे दरवाज़े बंद कर दिए  और  सारी लाइट्स भी बुझा दी, सिर्फ़ 2 हल्की रोशनी वाले लॅंप्स जलने दिए। वो उपर जाने के लिए मुड़े तो देखा मेनका सीढ़ियों से उतर रही है। राजासाहब तो उसे देखते ही रह गये। वो साक्षात स्वर्ग की अप्सरा मेनका लग रही थी।
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एक छोटा सा अपडेट दिया है दोस्त

आगे लिख रही हूँ
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मेनका ने लाल रंग की स्लीव्लेस नाइटी पहनी थी जिसमे स्ट्रॅप्स की जगह कंधों पे 2 पतले स्ट्रिंग्स थे। नाइटी का गला भी गहरा था जिसमे उसका क्लीवेज इस मध्यम रोशनी मे भी चमक रहा था, बाई टाँग पर एक स्लिट था जो की उसके घुटने के उपर जाँघ तक चला गया था और जब वो सीढ़ियाँ उतर रही थी तो उसमे से उसकी गोरी टाँग और जाँघ का हिस्सा झलक रहा था। उसके लंबे बाल खुले थे और कमर पर लहरा रहा थे।


राजासाहब की नज़रों की गर्मी ने मेनका के दिल मे हलचल मचा दी और उसके चेहरे पर हया की लाली च्छा गयी पर उसे ये भी अच्छा लग रहा था कि उसके प्रेमी को उसका ये रूप बहुत भा रहा था। राजासाहब आगे बढ़े और मेनका को अपनी बाहों मे भर लिया  और  अपने तपते होठों से उसे चूमने लगे, मेनका ने भी अपनी बाहें उनके गले मे दल दी  और  किस का जवाब देने लगी। दोनो थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे से चिपके अपने होठों और जीभ से खेलते रहे। मैत्री की पेशकश

फिर राजासाहब ने चूमना छोड़ उसे अपनी गोद मे उठा लिया, मेनका ने अपनी बाहें उनके गले मे डाल दी और फिर से उन्हे चूमने लगी। राजासाहब वैसे ही चूमते हुए उसे उठा कर सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। उपर पहुँच कर वो अपने कमरे की तरफ  मुड़े तो मेनका ने चूमना छोड़ शरमाते हुए कहा,
"मेरे कमरे मे चलिए ना।"

"अरे,कमरा क्या पूरा का पूरा महल आपका है। फिर क्या आपका क्या मेरा। आज अपने इस कमरे, जिसे नाचीज़ अपना कहता है, चल कर इसे भी स्वर्ग बना दीजिए।" और दोनो हंस पड़े।

 
राजासाहब उसे अपने कमरे मे ले आए और अपने बिस्तर पर लिटा दिया और उसके उपर झुक कर उसे चूमने लगे। मेनका के हाथ उनके सर के बालों से खेलने लगे। राजासाहब ने उसके होठों को छोड़ एक बार पूरे चेहरे को चूमा और फिर नीचे उसकी गर्दन पर पहुँच गये। मेनका ने अपने हाथ उनके कुर्ते के अंदर घुसा दिए और उनकी पीठ सहलाने लगी।
 
राजासाहब थोड़ा उपर हुए और अपना कुर्ता उतार फेंका  और  फिर से अपनी बहू की गर्दन पर झुक गये। अपने हाथों से उन्होने उसके कंधों से दोनो स्ट्रिंग्स नीचे सरका दी  और  उसके नंगे कंधों को चूमने लगे, मेनका की चूत गीली होने लगी थी  और  उसने अपनी जांघे बेचैनी से रगड़ना शुरू कर दिया। उसके नाख़ून अभी भी अपने ससुर की पीठ पर फिर रहे थे। राजासाहब मेनका के क्लीवेज पर आ गये  और दीवानो की तरह चूमने लगे। उनसे बर्दाश्त करने मुश्किल हो रहा था, वो जल्द से जल्द अपनी बहू के नंगे जिस्म का दीदार करना चाहते थे।

अपने हाथ पीछे ले जाकर उन्होने उसकी नाइटी का ज़िप खोल दिया, फिर उठे  और  एक  झटके मे उसे उसके शरीर से अलग कर दिया। नीचे मेनका ने कुछ नही पहना था। राजासाहब उसके उपर झुक गये तो मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली और सर एक तरफ घुमा लिया।

"
मेनका।" राजासाहब ने अपने हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरे को सीधा किया। मेनका ने अधखुली आँखों से उन्हे देखा।

"
अपने होठों से हमारा नाम लो ना।" सुनकर मेनका और शर्मा गयी  और  फिर से मुस्कुराते हुए अपने चेहरे को अपने हाथों से छुपा लिया।

"
प्लीज़,मेनका। बस एक बार। हमारा नाम लो। प्लीज़।"
मैत्री लिखित
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एक और दिया है दोस्तों
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दोस्तों होली की शुभकामनाये के साथ

एक और एपिसोड पोस्ट कर रही हूँ
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मेनका ने वैसे ही मुँह छुपाए हुए सर हिला कर मना कर दिया।

"
प्लीज़, तुम्हे हमारी कसम।" उन्होने उसके हाथ उसके चेहरे से हटा दिए।


मेनका ने बहुत धीरे से कहा,"यश।" मैत्री की पेशकश

"एक बार और, मेरी जान,प्लीज़।" राजासाहब ने बेताबी से उसके गाल चूम लिए।


इस बार मेनका ने अपनी आँखें खोल अपने प्रेमी की आँखों मे देखा,"आइ लव यू,,,,यश।"

इस बात ने तो राजासाहब को खुशी से पागल कर दिया  और  वो उसके जिस्म पर टूट पड़े। उसके गुलाबी निपल्स अब उनकी जीभ और होठों की रहम पर थे। "एयेए...ह...ह्ह्म्म" मेनका का बदन कमान की तरह मूड गया और छाती बिस्तर से उपर उठ गयी।
उसने अपने ससुर के सर को अपने सीने पर कस के भींच लिया। राजासाहब ने एक चूची मुँह मे ली और दूसरी को हाथ मे और लगे उन्हे चूसने और दबाने। मेनका का जिस्म पूरी तरह से जोश मे डूब गया था और अब तो वो झड़ने ही वाली थी। राजासाहब ने चूचियो की पोज़िशन बदल दी, पहले बाई मुँह मे थी, अब दाई आ गयी, पर उनका चूसा जाना  और  दबाया जाना वैसे ही जारी रहा। मेनका ने हाथ नीचे ले जाकर पायजामा के उपर से ही अपने ससुर के खड़े लंड को पकड़ लिया  और  मसलने लगी। थोड़ी ही देर बाद मेनका का जिस्म अकड़ा  और  उसने अपनी जीभ दांतो तले दबा ली- उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था।

राजासाहब पलंग पर खड़े हो गये और अपना पायजामा भी उतार दिया  और  अपनी बहू के सामने पूरे नंगे हो गये। वो झुक कर घुटनो पर खड़े हुए- उनका इरादा फिर से अपनी बहू के उपर चढ़ने का था, पर तभी मेनका की नज़र अपने ससुर के लंड पर पड़ी जिसने उसे पागल कर दिया था।

वो झट से उठी और अपने ससुर के लंड को अपने मुँह मे ले लिया  और  चूसने लगी। अब राजासाहब बिस्तर पर अपने घुटनो पे खड़े थे और  मेनका बैठ कर उनके लंड को चूस रही थी, साथ-साथ उसके हाथ लंड  और  नीचे लटक रहे अंडो को सहला  और  हिला रहे थे। राजासाहब ने अपने हाथ उसके सर पर रख दिए  और  खुद भी  हौले-हौले कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगे। मेनका ने अपने हाथ उनके लंड पर से हटा लिए और पिछे ले जाकर उनकी गांड को पकड़ लिया। अपने नाखूनओ से वो हल्के-हलके उनकी गांड सहलाने लगी। राजासाहब को बहुत मज़ा आ रहा था। उनकी पकड़ अपनी बहू के सर पर और मज़बूत हो गयी  और  वो थोड़ी और तेज़ी के साथ उसके मुँह को चोदने लगे। मेनका को तो ये लंड वैसे ही बहुत प्यारा लगता था। उसका तो दिल करता था की बस हर वक़्त वो इस से खेलती रहे। उसने भी राजासाहब की गांड  और  मज़बूती से पकड़ अपना मुँह उनकी जाँघो के बीच थोड़ा और घुसा दिया। राजासाहब झड़ने ही वाले थे पर उनका इरादा आज मेनका के मुँह मे अपना पानी छोड़ने का नही था।

उन्होने अपना लंड मेनका के मुँह से बाहर खींच लिया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा। राजासाहब ने उसकी बाँहे पकड़ उसे उपर उठा लिया, अब वो  भी अपने ससुर जैसे उनके सामने घुटनो पे खड़े थी। राजासाहब ने अपने हाथ उसकी कमर पे लपेट दिए  और उसे चूमने लगे। जवाब मे मेनका ने भी अपने ससुर की कमर के गिर्द अपने हाथ कस दिए। राजासाहब का प्री-कम से गीला लंड, दोनो के जिस्मो के बीच उसके पेट पे दबा हुआ था। चूमते हुए दोनो के हाथ एक-दूसरे की कमर से फिसल कर नीचे एक-दूसरे की गांडो से खेलने लगे। जहा राजासाहब अपनी बहू की गांड के फांको को जम के मसल रहे थे वही मेनका उनकी गांड पे अपने नाखूनओ के निशान छोड़ रही थी। मैत्री की लेखनी

राजासाहब वैसे ही घुटनो पे खड़ी मेनका के होठों को छोड़ नीचे आ उसकी चुचियों को चूसने लगे। थोड़ी देर चूसने के बाद वो और नीचे आए, उसके पेट को चूमा  और  फिर उस से भी नीचे उसकी चूत पे एक किस ठोक दी। मेनका नीचे हो कर  बैठने ही वाली थी की राजासाहब झट से उसके घुटनो के बीच लेट गये  और  उसकी कमर पकड़ उसे अपने मुँह पर बिठा लिया।

अब राजासाहब चित लेते थे  और  मेनका उनके मुँह पर बैठी थी। राजासाहब ने आँखे उठा कर अपनी बहू को देखा, उसके चेहरे पर हैरत और जोश की मिलीजुली  मुस्कान थी। हाथ आयेज ला उन्होने उसकी चुत की फांको को फैलाया  और  अपनी  जीभ उसके अंदर डाल दी और चाटने लगे।"...ऊओ...ऊओह...।",
 
मेनका की आँखे बंद हो गयी, उसने अपने ससुर के सर को सहारे के लिए पकड़ लिया  और  अपनी कमर हिलाने लगी। राजासाहब उसकी चूत चाट ते हुए अपने हाथ उसकी कमर से हटा उपर ले जा उसकी चुचियाँ दबाने लगे। मेनका के लिए ये बहुत ज़्यादा था और वो दुबारा झड़ गयी पर राजासाहब ने उसकी चूत चाटना नही छोड़ा। वो उसी तरह अपने हाथों से उसकी चूचिया दबाते रहे, उसके निपल्स मसलते रहे। उन्होने अपनी बहू की चूत मे से जीभ तब तक नही निकाली जब तक की वो दो बार  और  नही झड़ गयी।

आखरी बार झड़ते ही मेनका निढाल हो आगे गिर गयी तो राजासाहब उसकी जांघों मे से सर निकाल उठ बैठे। मेनका पेट के बल लेट गहरी साँसे ले रही थी। राजासाहब अपने हाथों से उसकी पीठ  और  गांड सहलाने लगे। थोड़ी देर सहलाने के बाद उन्होने अपने होठ उसकी गांड पर रख दिए और वहाँ पर जम कर चूमा, चटा  और  चूसा। चूस-चूस कर उसकी गांड की फांको  और  जांघों के पिछले हिस्से पर  उन्होने लव बाइट्स छोड़ दिए।

फिर उन्होने ने उसे कमर से पलट कर सीधा किया  और  उसकी जांघों पे चूमने  और  चूसने लगे। मेनका के बदन पर कल की लव बाइट्स के निशान अभी भी ताज़ा थे, राजासाहब ने उन मे कुछ और निशान जोड़ दिए। उसकी जांघों से उनके होठ  उसकी चूत पर आए और जितना भी पानी अभी उसकी चूत ने छोड़ा था, उसे पी गये। राजासाहब का अगला निशाना मेनका की नाभि थी। उनकी जीभ उसकी नही की गहराई  नापने कागी तो मेनका फिर से गरम होने लगी। उसका दिल कर रहा था कि बस अब उसके ससुर उसकी चूत मे अपना लंड डाल दे। उसने हाथ बढ़ा कर अपने ससुर के बाल पकड़ कर खींचे,"इधर आइए ना..."।

राजासाहब उपर आकर उस पर लेट गये और उसकी चूचिया चूसने लगे। थोड़ी देर बाद उठे कर मेनका की जांघों पे हाथ रखा तो उसने खुद ही उन्हे फैला दिया। राजासाहब ने अपना लंड एक झटके मे ही उसकी चूत मे दाखिल कर दिया।
"ऊओ...ऊव्ववव!।" मेनका का सर पीछे मूड गया,छाती हवा मे उठ गयी  और  कमर खुद बा खुद झटके खाने लगी। राजासाहब ने भी बहुत देर तक अपने उपर काबू रखा था। अब उन्होने भी जम कर उसकी चुदाई शुरू कर दी।

"आ...न्न्ह...आ...आन्न्न्नह! कमरे मे मेनका की आनहें गूंजने लगी तो राजासाहब के धक्कों की रफ़्तार और भी बढ़ गयी।

उन्होने अपने होठ उसकी छाती पे और कस दिए और ज़ोर से चूसने लगे, फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर ज़ोर के धक्कों के साथ फिर अंदर पेलने लगे। मैत्री की रचना

हर धक्के के साथ मेनका उनके लंड के टोपे को अपनी कोख पे लगता महसूस कर रही  थी  और  उसे इतना मज़ा आ रहा था की पुछो मत। तभी राजासाहब ने वैसे ही उसकी चूची चूस्ते हुए फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, वो उचक कर अपने ससुर से चिपक गयी उनका जिस्म भी झटके खाने लगा  और  उसने उनके लंड से च्छूटता पानी अपनी चूत मे भरता महसूस किया।

दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ

तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
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दोस्तों आपके मनोरंजन के लिए किछ अपडेट्स दिए है

कृपया आपनी राय देना ना भूले


शुक्रिया
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आप सब को होली की शुभकामनाये

मैत्री......
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गज़ब का प्रेम और मिलन हो रहा हैं ससुर और बहु में जैसे दोनों अपनी अपनी बेचैनी दूर कर रहे हों
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