19-02-2026, 02:01 PM
एक ओर छोटा अपडेट आपके समक्ष रखा है...............
आनंद लीजिये..........
आनंद लीजिये..........
|
Incest खेल ससुर बहु का
|
|
19-02-2026, 02:01 PM
एक ओर छोटा अपडेट आपके समक्ष रखा है...............
आनंद लीजिये..........
19-02-2026, 02:04 PM
"देख रहें हैं कि आपको धरती पर भेज कर भगवान आज कितना पछ्ता रहा होगा।"
"धत! कैसी बातें करते हैं।" राजासाहब ने हल्के से उसके होठों को चूम लिया। तभी नीचे उसके पेट पे कुछ चुबा तो उसने देखा कि राजासाहब के तौलिए के अंदर उनका लंड खड़ा हो गया था और उसे छेड़ रहा था। मेनका ने हाथ बढ़ा कर तौलिए को राजासाहब के बदन से अलग कर दिया। फिर वो झुक कर बैठ गयी,लंड उसकी आँखों के सामने था। राजासाहब सोच रहे थे कि फिर वो उन्हे मुँह मे लेगी पर मेनका ने ऐसा कुछ ना किया,हाथ बढ़ा कर वॉशबेसिन के बगल मे रखे शेविंग फोम के कॅन को उठा लिया और उस से फोम निकाल कर राजासाहब के लंड और टट्टों के आस-पास के बालों पर लगा दिया। फिर उनके हाथ से उनका रेज़र लिया और बड़ी सावधानी से राजासाहब की सारी झाटों को साफ़ कर दिया। राजासाहब की धड़कन तेज़ हो गयी थी। काम पूरा कर मेनका उठी और उनके गालों पे बची शेव पूरी करने लगी,"कल रात प्यार करते वक़्त आपके इन बालों हमे बहुत तंग किया।",उसने एक हाथ से उनके लंड के पास की जगह को छुते हुए कहा। राजासाहब तो जोश से पागल हो गये। उन्होने उसके हाथों से रेज़र छीन कर फेंक दिया और उसे उठा कर वॉशबेसिन के बगल मे बने पलटफ़ॉर्म पे बिठा दिया,उसके घुटने मोड़ उसकी टांगो को चौड़ा किया और अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया,"आ...अहह..."मेनका उनके सीने से लग गयी और दोनो फिर चुदाई का मज़ा उठाने लगे। वॉशबेसिन के उपर बने शीशे मे मेनका की नंगी पीठ की परछाई देख कर राजासाहब और गरम हो गये,उन्होने अपने हाथों मे उसकी चूचियाँ भींच ली। मेनका दर्द से तड़प कर उनसे चिपक गयी,"औ....च!",अपने नाख़ून उनकी पीठ मे गाड़ा दिए और टांगे कमर पर कस दी। राजासाहब ने हाथ चूचियो से हटा उसकी गांड की फांकों पर कस दिए और काफ़ी ज़ोर के झटके मारने लगे। इस पोज़िशन मे उनका लंड मेनका की चूत की दीवारों से ही नही रगड़ खा रहा था बल्कि उसकी चूत के दाने को भी रगड़ रहा था। मेनका भी अब अपनी कमर हिलाने लगी। वो सातवे आसमान मे पहुँच गयी थी। अपने ससुर की मर्दानगी की तो वो कायल हो गयी।कल रात ये शख्स 3 बार झाड़ा था पर अभी भी उसे ऐसे चोद रहा था जैसे पहली बार कर रहा हो। उसकी कमर और झटके खाने लगी और वो अपने ससुर से और चिपक गयी। उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था। वो झड़ चुकी थी। राजासाहब को पता चल गया कि उनकी बहू झड़ गयी है तो उन्होने भी 3-4 ज़ोर के धक्के मारे और एक बार फिर से अपनी बहू की चूत मे अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर दोनो वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे,एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे। फिर राजासाहब ने उसकी चूत से अपना लंड खींचना शुरू किया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा,"डील साइन करने भी तो जाना है",उन्होने अपना लंड बाहर निकाल लिया,"जल्दी तैयार हो जाइए",उसके होठों को चूमा और बाथरूम से बाहर चले गये। मेनका थोड़ी देर तक वैसे ही बैठी रही,वो इस एहसास से बाहर ही नही आना चाहती थी। पर डील के लिए भी तो जाना था। वो उठी और नहाने की तैयारी करने लगी। ************* तो बताइए ये पार्ट आपको कैसा लगा मेरे ख्याल से तो मैने इस पार्ट मे आपका मनोरंजन करने की पूरी कोशिश की है आगे करती रहूंगी.....कोमेंट करते रहे... क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। जय भारत
19-02-2026, 02:06 PM
आज के लिए बस यही तक दोस्तों
फिर जल्द ही मिलेंगे एक बेहतरीन अपडेट के साथ तब तक आप अपनी राय देना ना भूले.............
19-02-2026, 03:35 PM
अत्यंत कामुक प्रस्तुति और मेनका को अब सही मायने में वो प्यार मिल रहा है जिसकी वो हकदार हैं।।
20-02-2026, 06:20 PM
20-02-2026, 06:41 PM
20-02-2026, 06:43 PM
20-02-2026, 06:46 PM
चलिए कहानी में थोडा आगे बढ़ते है।
शायद आज छोटा सा और एक ही अपडेट रहेगा...........विक एंड जो है........................
20-02-2026, 06:57 PM
थोड़ी देर दोनो वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे,एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे। फिर राजासाहब ने उसकी चूत से अपना लंड खींचना शुरू किया तो मेनका ने सवालिया नज़रो से उन्हे देखा,"डील साइन करने भी तो जाना है",उन्होने अपना लंड बाहर निकाल लिया,"जल्दी तैयार हो जाइए",उसके होठों को चूमा और बाथरूम से बाहर चले गये।
मेनका थोड़ी देर तक वैसे ही बैठी रही,वो इस एहसास से बाहर ही नही आना चाहती थी। पर डील के लिए भी तो जाना था। वो उठी और नहाने की तैयारी करने लगी। यहाँ से आगे................... पार्ट 5 गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।। थोड़ी देर बाद राजासाहब और मेनका नाश्ते के लिए, होटेल के रेस्टोरेंट की तरफ जा रहे थे। होटेल के शॉपिंग एरिया से गुज़रते हुए मेनका को एक ख़याल आया, "आप चलिए, हम अभी आते हैं।" "अरे,क्या बात हो गयी? पहले नाश्ता तो कर लें, फिर शॉपिंग कर लेना।" "प्लीज़! आप चलिए ना। हम बस यूँ गये और यू आए।" "ओके,जैसी आपकी मर्ज़ी।" राजासाहब रेस्टोरेंट मे एक टेबल पर बैठ गये और नाश्ते का ऑर्डर कर दिया। वो थोड़ी देर पहले होटेल स्यूट के कंप्यूटर पे पढ़े डॉक्टर.पुरन्दारे के ई-मैल के बारे मे सोचने लगे। उन्हे इस बात की तसल्ली थी कि विश्वा भी ठीक होना चाहता है पर शादी मे उसका विश्वास ना होने वाली बात से वो थोड़े चिंतित थे। वो मेनका को प्यार नही करता था, ये जान कर उनके मन के किसी कोने मे बहुत खुशी पैदा हुई थी पर वो जानते थे कि मेनका और उनका रिश्ता विश्वा के लौटने तक ही रह सकता है। "खैर, जब विश्वा आएगा तो देखेंगे।" उन्होने एक ठंडी आह भरी। अभी तक दुष्यंत ने भी कोई खबर नही दी है। वो सोच रहे थे। मैत्री की रचना[b]।[/b] अब आप सोचेंगे कि ये दुष्यंत कौन है? दुष्यंत वर्मा उन गिने-चुने लोगों मे से है जो राजासाहब को उनके नाम से पुकार सकते हैं। दोनो बोर्डिंग कॉलेज और कॉलेज मे साथ पढ़े थे और पक्के दोस्त थे। दुष्यंत वेर्मा एक सेक्यूरिटी और डीटेक्टिव एजेन्सी चलाते थे, जिसके क्लाइंट्स हिन्दुस्तान की जानी-मानी हस्तियाँ थी। राजासाहब ने उनसे उस इंसान का पता लगाने को कहा था, जो उनके बेटे को ड्रग्स सप्लाइ करता था। उनकी सख़्त हिदायत थी कि इस पूरी जाँच को सीक्रेट रखा जाए और दुष्यंत, उनके इस काम पे लगे स्टाफ और राजासाहब के अलावा किसी को भी इस बात की भनक ना लगने पाए। ऐसा वो, इसलिए चाहते थे क्यूकी उन्हे पूरा यकीन था कि इसके पीछे जब्बार का हाथ है और इस बार वो उसे आखरी सबक सिखाना चाहते थे। "अरे, क्या सोच रहें है? खाते क्यू नही?" मेनका उनके सामने बैठी उनकी आँखों के आगे हाथ फिरा रही थी। वो अपने ख़यालों मे इतना खोए थे कि वो कब आई और वेटर कब खाना सर्व कर गया, उन्हे पता ही ना चला। "कुछ खास नही, बस ऐसे ही। चलिए शुरू कीजिए।" दोनो नाश्ता करने लगे। ------------------------------------------------------------------------------- जहा राजासाहब अपने दुश्मन को सबक सिखाने के ख़यालों मे डूबे थे वही उनका दुश्मन भी उनकी बर्बादी के इरादे से शहर आ पहुँचा था। आइए चल कर देखते हैं कि वो क्या कर रहा है। शहर के बाहरी हिस्से मे जहा रोज़ नये फ्लॅट्स बन रहे हैं, वही एक अपार्टमेंट कॉंप्लेक्स है जो कि अभी तक पूरी तरह से बसा नही है, उस कॉंप्लेक्स का एक फ्लॅट जब्बार का शहर का अड्डा है। उसका फ्लॅट ग्राउंड फ्लोर पर है और उस बिल्डिंग के बाकी फ्लोर्स अभी खाली पड़े हैं। अभी दोपहर के वक़्त भी यहा वीरानी छाई है। बस एक लंबा-चौड़ा शख्स चलता हुआ उस फ्लॅट की ओर आ रहा है। मैत्री की पेशकश[b]।[/b] आप उस इंसान के बगल से भी गुज़र जाएँ तो आप कुछ खास बात नही नोटीस कर पाएँगे पर जब मैं आपसे पूछूंगी कि उसकी शक्ल कैसी थी तब आपका ध्यान जाएगा कि आप पास से गुज़रते हुए भी उसका चेहरा साफ़-साफ़ नही देख पाए थे। जी, हाँ ये कल्लन है। सर पर कॅप, आँखों पे काला चश्मा, बदन पे जॅकेट जिसका कॉलर उठा हुआ है ताकि कोई भी उसका हुलिया ना जान पाए। देखिए वो कॉल बेल बजा रहा है। चलिए देखते हैं क्या होता है। बेल सुन मलिका ने दरवाज़ा खोला, "ओह, तुम हो", एक कातिल मुस्कान उसने कल्लन की तरफ फेंकी। "जब्बार तो बाहर गया है।" "मैं वेट करूँगा।" कल्लन ने अंदर आकर जॅकेट, चश्मा और कॅप उतार दिया । उसके बाल फिर से बढ़ गये थे और चेहरे पर दाढ़ी भी वापस आ गयी थी। "ड्रिंक लोगे?" मलिका अपनी गांड मटकाते हुए, बार की तरफ बढ़ी, कल्लन की तरफ उसकी पीठ थी और वो जान बुझ कर अपनी गांड थोड़ी ज़्यादा लचका रही थी। उसने एक टॉप पहना था जो कि उसकी छातियो के बड़े साइज़ के कारण बहुत कसा हुआ था और उसके निपल्स का आकर साफ़ दिख रहा था, नीचे एक मिनी स्कर्ट थी और जब वो चल रही थी तो, तो उसमे से उसकी नंगी गांड का थोड़ा सा हिस्सा झलक रहा था। ।। जय भारत ।।
20-02-2026, 07:00 PM
दोस्तों एक छोटा सा अपडेट दे दिया है
आशा है की आपको पसंद आएगा हो सकेगा तो अगला अपडेट भी दे दुंगी sat-sun का भी...............
20-02-2026, 07:07 PM
(This post was last modified: 20-02-2026, 07:09 PM by maitripatel. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
बिना उसके जवाब का इंतेज़ार किए, वो बार पर आके ड्रिंक तैयार करने लगी। तभी कल्लन ने उसे पीछे से अपने मज़बूत बाज़ुओं मे जाकड़ लिया और टॉप के उपर से ही उसकी छातिया मसलने लगा। मैत्री की रचना
"औच्च!...आ....ज़ालिम ज़रा आराम से। तो तुझमे भी आग है। मैने तो सोचा था कि तू तो बर्फ की तरह ठंडा है। एयेए....अहह।" कल्लन ने उसके गले मे काट लिया। अब उसके हाथ मलिका के टॉप के अंदर उसकी बूब्स और उन पर बने कड़े हो चुके निपल्स को मसल रहे थे। मलिका ने एक हाथ पीछे ले जाकर कल्लन के गले मे डाल दिया और अपना चेहरे घुमा कर उसे चूमने लगी, दूसरा हाथ उसने उस की पॅंट की ज़िप पर रख दिया। "उफ़फ्फ़...बहुत बड़ा लगता है तेरा।" उसके होठों को छोड़ते हुए मलिका बोली और पॅंट की ज़िप खोल लंड को बाहर निकाल लिया। उसने सर नीचे कर देखा, सचमुच कल्लन का लंड बहुत बड़ा था। बड़े लंड मलिका की कमज़ोरी थी। जब्बार का लंड बहुत मोटा था पर लंबाई कुछ खास नही थी। जब्बार की ख़ासियत थी उसका स्टॅमिना, जो कि मलिका जैसी हर वक़्त गरम रहने वाली लड़की की प्यास बुझाने मे बहुत काम आता था। पर मलिका की नज़रों मे बड़े लड की बात ही कुछ और थी और वो कभी भी ऐसे लंडो को अपनी चूत मे लेने से नही चूकती थी। उसे एक लंड से संतोष भी कहा मिलता था| उसने अपने हाथ से कल्लन के लंड को रगड़ना शुरू कर दिया, लंड देख ते ही उसकी चूत गीली हो गयी थी। कल्लन अब आपे से बाहर हो गया। उसने मलिका के दाये घुटने को मोडते हुए, उसकी जाँघ उठा कर बार पर रख दिया और वैसे ही खड़े-खड़े अपना लंड उसकी चिकनी चूत मे पेल दिया। "आआ.....ईिईययईईए! फाड़ देगा क्या? थोड़ा धीरे घुसा ना। ऊओवव्व!" उसकी बातें कल्लन को और दीवाना कर रही थी और उसने अपना पूरा लंड उसके अंदर घुसा दिया और धक्के मारने लगा। "हा....अन्न....ऐसे ..ही....ज़ोर से....है....और...ज़ोर से मेरी चूत को मार...ना।" मलिका भी अपनी गांड हिला कर उसका पूरा साथ दे रही थी, उसकी एक बाँह कल्लन की गर्दन को घेरे थी और दूसरी बाँह पर उसके बदन को सहारा दे रही थी। कल्लन का एक हाथ उसकी चूचिया मसल रहा था और दूसरे की उंगलिया चूत के दाने को रगड़ रही थी, होठ कभी उसके चेहरे, कभी होठ चूचियों पे घूम रहे थे। बहुत ज़ोर की चुदाई चल रही थी। "ट्र्न्न्न!", कॉल बेल चीख उठी तो दोनो चौंक गये और मलिका की चूत ने पानी छोड़ दिया। कल्लन की कमर ने भी 2-3 झटके खाए और उसका लंड मलिका की चूत मे पिचकारी मार के झड़ गया। मलिक ने बार से एक नॅपकिन उठाया और कल्लन से अलग हो गई। दरवाज़े तक जाते हुए उसने अपनी जांघों पर बह आए कल्लन के और अपने पानी को साफ़ कर लिया। दरवाज़े पर जब्बार था। अंदर आया तो उसने देखा की कल्लन सोफे पर बैठा ड्रिंक कर रहा था। थोड़ी देर पहले मचे वासना के तूफान का नाम ओ निशान उसके चेहरे पर नही था। "क्यू बुलाया था?" उसने जब्बार से पूछा। मैत्री की पेशकश "एक छोटी-सी मछली हाथ लगी है जिसके ज़रिए हम बड़ी मछली तक पहुँच सकते हैं।" उसने मलिका के हाथ से ड्रिंक लेते हुए जवाब दिया।, "हमे बहुत शॉर्ट नोटीस पर भी काम करने को तैय्यार रहना होगा। आज से तुम यही रहो पर ध्यान रहे, किसी को इस बात का पता नही चलना चाहिए कि तुम यहा हो।" जब्बार कह तो कल्लन से रहा था पर उसकी नज़रे मलिका पर थी जो कि बड़े सोफे पर लेट कर उनकी बातें सुन रही थी। "अब क्या करना है?" कल्लन अपना खाली ग्लास फिर भरने के लिए उठा। "उस छोटी मछली को चारा डालना है।" जब्बार मलिका की तरफ देख कर कुटिलता से मुस्कुराया। ------------------------------------------------------------------------------- आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे...............एक्नाये एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत
20-02-2026, 07:10 PM
दोस्तों एक और छोटा सा अपडेट दिया है आपके मनोरंजन के लिए
अपनी राय देना ना भूले
21-02-2026, 07:11 PM
(This post was last modified: 22-02-2026, 04:42 PM by rangeeladesi. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
वाह! अगले भाग की प्रतीक्षा है.
22-02-2026, 01:15 PM
22-02-2026, 01:18 PM
|
|
« Next Oldest | Next Newest »
|