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Incest खेल ससुर बहु का
#81
दोस्तों आप पढ़ते जाए तब तक मैं और एक उओदेत लिख रही हूँ

आप अपनी राय देना ना भिले बस...............
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#82
अब आगे............

राजासाहब ने अपनी बहू के होठों को छोड़ दिया और उसके गाल चूमते हुए उसकी लंबी गर्दन पर आ गये। वहा से उनके होठ मेनका के क्लीवेज पर पहुँच गये और राजासाहब ने उस पर किसिज की झड़ी लगा दी। अपना हाथ पीछे ले जाते हुए उन्होने मेनका की नाइटी का ज़िप खोला, और उसे उसके कंधों से नीचे सरकाते हुए उसके सीने से हटा दिया। काले रंग के स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे कसा उसका सीना उसकी तेज़ साँसों के साथ उपर-नीचे हो रहा था। छातियो का उपरी हिस्सा खुला था और निपल्स और नीचे का हिस्सा ब्रा ने छुपा रखा था। राजासाहब ने उसकी चूचियों के उस खुले उपरी हिस्से को चूमना शुरू कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति

"
एयेए..आहह..!",मेनका कराही, उसका बदन एक कमान की तरह उपर उठ गया, उसके हाथ अपने ससुर के सर को कस के पकड़े हुए थे। राजासाहब अब उसी जगह पर चूसने लगे थे,मेनका की हालत बुरी हो गयी,चूत तो पहले से ही गीली थी और राजासाहब की इस हरकत ने उसे और पागल कर दिया। राजासाहब वैसे ही चूस्ते रहे और मेनका की चूत ने पानी छोड़ दिया। वो झड़ गयी थी और अभी तक उसके ससुर ने उसकी चूत को तो छुआ तक नही था। राजासाहब ने उसकी नाइटी को ओर नीचे सरका कर कमर तक कर दिया।


अब वो उसके पेट को चूम रहे थे,मेनका वैसे ही उनके सर पर हाथ रखे हुए थी। चूमते-2 वो उसके सपाट पेट के बीचो-बीच गोल,गहरी नाभि तक पहुँच गये, और अपनी जीभ उसमे फिराने लगे। मेनका फिर से मज़े मे कसमसने लगी। उसके ससुर अपनी जीभ से उसकी नाभि ऐसे चाट रहे थे जैसे वो उसकी चूत हो। यह ख़याल आते ही वो फिर गरम होने लगी। राजासाहब की जीभ उसकी नाभि से निकल कर नाभि और पेंटी के बीच के हिस्से पर थी ,और तभी राजासाहब ने पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर चुंबन ठोक दिया। मेनका ने लाज के मारे करवट ले अपने चेहरे को हाथों मे छुपा लिया।

अब राजासाहब के सामने उसकी पीठ थी। वो थोड़ी देर तक उसकी पतली कमर और चौड़ी गांड को निहारते रहे। फिर उन्होने अपना दाया हाथ उसकी कमर पर रख दिया और पीछे से उस से चिपक गये। उनका पायजामा मे क़ैद लंड मेनका की गांड से सटा था, और उनका सीना मेनका की पीठ से। उनका हाथ उसकी कमर से फिसलता हुआ उसके पेट पे पहुँचा और उस हाथ की एक उंगली उसकी नाभि को कुरेदने लगी। मेनका अपनी गांड पे राजासाहब के लंड को महसूस कर रही थी और उसने अपनी गांड पीछे कर के उस दबाव का जवाब दिया। राजासाहब उसकी गर्दन चूम रहे थे ,और उनका हाथ अब नाभि छोड़ मेनका की ब्रा मे कसी चूचियों को दबा रहा था। मेनका ने अपना दाया हाथ पीछे ले जाकर अपने ससुर के सर को पकड़ लिया। तब राजासाहब ने अपना हाथ उसके सीने से हटा लिया और उसमे उसके प्यारे चेहरे को भर कर अपनी तरफ घुमाया और उसे चूमने लगे। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही अपनी बहू के होठों का रसपान करते रहे और नीचे से अपना लंड उसकी गांड पे रगड़ते रहे। मैत्री की लिखनी

राजासाहब ने उसके होठों को आज़ाद किया और उसे पेट के बल लिटा दिया और उसकी पीठ के एक-एक हिस्से को चूमने लगे। अपने दातों से उन्होने उसके ब्रा के हुक को खोल दिया और चूमते हुए नीचे उसकी गांड तक पहुँच गये। फिर उन्होने उसकी कमर पकड़ कर उसे घुमा कर सीधा पीठ के बल लिटा दिया। मेनका का खुला ब्रा उसके सीने पर अब भी पड़ा था,राजासाहब ने उसे किनारे फेंक दिया। मेनका की दूधिया रंग की बड़ी-2 सुडोल चूचिया और उन पर बने हल्के गुलाबी निपल्स अब उनके सामने थे। मेनका की आँखें शर्म के मारे बंद थी और साँसें और तेज़ हो गयी थी,जिसके कारण उसके उरोज़ उपर-नीचे हो रहे थे और राजासाहब को पागल किए दे रहे थे।


आज के लिए बस यही तक

मीर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ

तब तक के लिए मैत्री पटेल की तरफ से जय भारत
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#83
दोस्तों मैंने उपडेट दे दिए है

प्लीज़ आप अपनी राय देना ना भूले..........

फिर मिलते है दोस्तों..........
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#84
अत्यंत कामुक प्रस्तुति भाई।।

लेकिन ऐसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।।।
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#85
(13-02-2026, 02:30 PM)maitripatel Wrote: दोस्तों मैंने उपडेट दे दिए है

प्लीज़ आप अपनी राय देना ना भूले..........

फिर मिलते है दोस्तों..........

Bhai just ek feed back hai...
Aap ki story me bohot mazaa aa raha hai..

Lekin Agar aap at least ek scene start se end tak pura ek baar me post karo....

Because wise to mazaa nahi aayega....
Ham pichhale 3 for se benglore ke hotel me abhi chumma chatti take hi ooh he hai....

At least ek complete sex scene litho fir hi post karo....

Lund ko baar baar khaali pili khana nahi karte sakte ... hai....
Mutt maarni ho to complete sex scene chahiye.... 
Chaahe week me 1 hi post karo but complete karo
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#86
(13-02-2026, 03:20 PM)@@004 Wrote: अत्यंत कामुक प्रस्तुति भाई।।

लेकिन ऐसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।।।

शुक्रिया दोस्त

और माफ़ी भी चाहती हूँ Iex 

समय के अभाव से ऐसा हो रहा है...........आगे से बिलकुल ध्यान रखूंगी

जुड़े रहे...............
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#87
(13-02-2026, 11:07 PM)chutkipyass18 Wrote: Bhai just ek feed back hai...
Aap ki story me bohot mazaa aa raha hai..

Lekin Agar aap at least ek scene start se end tak pura ek baar me post karo....

Because wise to mazaa nahi aayega....
Ham pichhale 3 for se benglore ke hotel me abhi chumma chatti take hi ooh he hai....

At least ek complete sex scene litho fir hi post karo....

Lund ko baar baar khaali pili khana nahi karte sakte ... hai....
Mutt maarni ho to complete sex scene chahiye.... 
Chaahe week me 1 hi post karo but complete karo

शुक्रिया दोस्त

आपका सुझाव अच्छा है

आगे से ख्याल रखूंगी


माफ़ी चाहती हु की आपको असुविधा हुई............

बने रहिये................
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#88
चलिए अब आगे बढ़ते हैं और अधुरा प्रसंग को पूरा करते है
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#89
राजासाहब अपनी बहू की चूचियों पर टूट पड़े।वो कभी अपने हाथों से उन्हे दबाते ,मसलते तो कभी अपने होठों से चूमते और चूस्ते।उनकी इन हरकतों ने मेनका के सीने को लव बाइट्स से भर दिया। मेनका ने भी उन्हे अपनी बाहों मे कस लिया और उचक कर मानो अपना सीना उनके मुँह मे और घुसाने की कोशिश करने लगी। जब राजासाहब का मुँह उसके सीने से हट ता तो उनकी उंगलियाँ उसके निपल्स को मसालने लगती जो कि अब पूरे कड़े हो गये थे। मेनका अब बहुत गरम हो गयी थी और अपनी जांघें एक साथ रगड़ रही थी। उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी जब राजासाहब ने उसकी एक चूची को अपने हाथ मे भरा और दूसरी को अपने मुँह मे और इतनी ज़ोर से चूस्सा और दबाया कि वो दूसरी बार झड़ गयी। उसके ससुर ने बिना उसकी चूत छुए उसे 2 बार झाड़वा दिया था। वो अब पस्त हो गयी थी। उसने अद्खुलि आँखों से प्यार से अपनी ससुर को देखा।


राजासाहब उसके सीने को छोड़ अपने घुटनो पर उसकी साइड मे बैठ गये। अपने दोनो हाथ की इंडेक्स फिंगर्स को उसकी सीने के बगलों से बहुत हल्के- हल्के फिराते हुए उसकी कमर तक ले आए, और उन्हे उसकी पेंटी के वेयैस्टबंड मे फँसा दिया और फिर हौले से उसे उसकी जांघों से सरकाने लगे। मेनका ने शर्म से आँखें बंद कर ली। अब वो अपने ससुर के सामने पूरी नंगी होने वाली थी। उसकी धड़कने तेज़ हो गयी। उसने महसूस किया कि पेंटी उसकी गांड के नीचे फँस सी रही है तो उसने धीरे से अपनी कमर उठा दी और राजासाहब ने पेंटी उसके जिस्म से अलग कर दी। मैत्री की प्रस्तुति.

राजासाहब मेनका की खूबसूरती निहार रहे थे। मूठ मारते वक़्त जैसी कल्पना की थी मेनका उस से भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी और उसकी छोटी सी,गुलाबी,बिना बालों की चूत कितनी प्यारी लग रही थी। उन्होने उसके पैर को उठा कर अपने होठों से लगा लिया और चूमते हुए उसकी जाँघ तक पहुँच गये। मेनका कसमसा रही थी। अब उसे बर्दाश्त नही हो रहा था।वो चाहती थी कि बस अब वो उसकी चूत को अपने मुँह से जी भर कर प्यार करे।
 
राजासाहब ने उसकी दोनो जांघों को जम कर चूमा और चूसा और उसकी चूचियो की तरह भी यहा भी लव नाइट्स के रूप मे अपने होठों के दस्तख़त छोड़ दिए। मेनका की चूत बस गीली हुए चली जा रही थी। राजासाहब उसकी जांघों को फैला कर उनके बीच लेट गये और अपना मुँह उसकी चूत के आस-पास एक दायरे मे फिराने लगे। धीरे- धीरे वो दायरा छोटा होने लगा और उनके होठ पहली बार उसकी चूत से जा लगे। मेनका ने अपनी टांगे उनके कंधे पर रख दी थी। अब वो नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी। राजासाहब ने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पे फिराई और धीरे से उसे अंदर सरका दिया।

"
उउंम...उन्न्ञनह..!,"मेनका पागल हो गयी, और अपनी कमर और उचकाने लगी अपने हाथों से अपने ससुर के सर को अपनी जांघों मे भींचने लगी। राजासाहब अब पूरे जोश से उसकी चूत चाटने लगे और उसके दाने पे अपनी जीभ फिराने लगे। ऐसा करते ही मेनका फिर झड़ गयी पर राजासाहब ने चाटना नही छोड़ा। मेनका की तो हालत अब बिल्कुल ही खराब हो गयी थी। राजासाहब ने उसकी चूत के थोडा अंदर उसके जी स्पॉट को खोज लिया था और वही कभी जीभ से तो कभी उंगली से उसे रगड़ रहे थे। मेनका की चूत तो पानी छोडती ही जा रही थी, और उसे होश भी नही था, कि अब तक वो कितनी बार झड़ गयी थी। आखरी बार झड़ने के बाद उसने देखा कि राजासाहब उसकी टाँगों के बीच खड़े अपना पायजामा उतार रहे हैं। जैसे ही वो नंगे हुए उसकी आँखें जो अभी तक अधखुली थी आश्चर्य से फैल गयी।
मैत्री की रचना.

राजासाहब का 7 एक/2इंच लंबा और काफ़ी मोटा लंड उसके सामने था। राजासाहब घुटनो के बल उसकी टाँगों के बीच बैठे थे। मेनका सोचने लगी कि वो कैसे इतने बड़े लंड को अपने अंदर लेगी। राजासाहब ने उसकी टांगे फैला कर उसके घुटनो को मोड़ दिया और अपना लंड उसकी चूत की दरार पर फिराया तो मेनका ने अपना निचला होठ अपने दातों तले दबा लिया।
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#90
राजासाहब के लंड का सुपारा बहुत मोटा था, और अब वो उसे हल्के से उसकी चूत मे घुसा रहे थे। दर्द से मेनका की आँखें बंद हो गयी,"आ...हह...",पर राजासाहब ने बड़ी कोमलता से अपने मत्थे को उसके अंदर घुसा दिया।धीरे-2 करके 4 एक/2 इंच लंड अंदर चला गया और वो वैसे ही घुटनो पर बैठे उतने लंड को अंदर बाहर करने लगे। अब मेनका का भी दर्द कम हो गया और उसे मज़ा आने लगा। वो अपने ससुर को देखने लगी और दोनो हाथ बढ़ा कर उनकी कलाईयों को पकड़ लिया। राजासाहब ने हल्के धक्कों के साथ अब अपना लंड और अंदर डालना शुरू किया।

मेनका आज तक केवल अपने पति से चूदी थी और इस से ज़्यादा अंदर उसका लंड कभी गया नही था। उसे फिर दर्द होने लगा। राजासाहब उसके उपर लेट गये और उसे चूमने लगे और बहुत धीमे-धीरे धक्कों के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया। थोड़ी देर वो स्थिर रहे और बस कभी उसके होठों तो काफ़ी चूचियो को चूमते रहे। मेनका का दर्द जब ख़तम हो गया तो वो नीचे से हल्के से अपनी कमर हिलाने लगी।

राजासाहब ने अपने बहू के इशारे को समझा और अपनी बाहों पे अपने वजन को लेते हुए उसके बदन से उठ गये।उसकी आँखों मे झाँकते हुए अपना पूरा लंड उन्होने ने बाहर खीच लिया और फिर एक झटके मे अंदर पेल दिया।

"
आ...ईईयईए...",मेनका चिल्लाई, और अपने ससुर को अपने उपर खींच उनसे लिपट गयी, और अपनी टांगे भी उनकी कमर के गिर्द लपेट दी। अब राजासाहब ने धक्के लगा कर उसकी चुदाई शुरू कर दी। मेनका को बहुत मज़ा आ रहा था। उसे बहुत खुशी हो रही थी कि उसने अपने ससुर का इतना बड़ा लंड अपने अंदर ले लिया था। वो उन्हे चूमने लगी। उसकी चूत आज पूरी भरी थी,राजासाहब का लंड उसकी चूत की आनच्छुई गहराइयों को माप रहा था और ये एहसास उसे और भी पागल किए दे रहा था। उसने अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया,राजासाहब ने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। तभी मेनका उचक कर उनको पागलों की तरह चूमने लगी,उसकी कमर भी तेज़ी से हिलने लगी और वो फिर झड़ गयी पर राजासाहब अभी भी लगे हुए थे।

मेनका की कसी चूत उनके लंड को पूरा लपेटे हुए थी। अपने पूरे जीवन मे उन्होने ऐसी टाइट चूत नही चोदि थी। उनकी पत्नी की कुँवारी चूत भी ऐसी ना थी।

कमरे मे मेनका की आह और राजासाहब की साँसों का शोर था। मेनका फिर से गरम हो रही थी। इस लंड ने तो उसे पागल कर दिया था। लगता था जैसे उसकी चूत से होता हुआ सीधे उसकी कोख पे धक्के मार रहा है। उसने फिर अपनी कमर नीचे से हिलाना शुरू कर दिया। अपने ससुर के बदन को उसने अपनी बाहों और टाँगों मे क़ैद कर रखा था। वो अब बहुत तेज़ धक्के लगा रहे थे। उसने जोश मे अपने नाख़ून उनकी पीठ मे गाड़ा दिए,उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने वाली थी। नीचे से अपनी कमर और तेज़ी से हिलाते हुए,पलंग से उठ कर वो अपने ससुर के होठों को चूमने लगी। बस, वो झड़ने ही वाली थी। राजासाहब को भी अब अपने उपर काबू रखना मुश्किल हो रहा था और वो भी अपनी बहू के चुंबन का जवाब देते हुए और तेज़ी से धक्के लगाने लगे। तभी मेनका का मज़ा चरम सीमा पर पहुँच गया और वो अपने ससुर से चिपक सी गयी,उसके नाख़ून उनकी पीठ मे और धँस गये और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। तभी उसने महसूस किया कि उसके ससुर ने उसके होठों को अपने होठों मे बुरी तरह कस लिया है और उनका बदन भी झटके खाने लगा और उसे अपनी चूत मे कुछ गरम सा महसूस किया। उसके झड़ने के साथ ही उसके ससुर भी झड़ गये थे, और उसकी चूत को अपने वीर्या से लबालब भर दिया था।

थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े अपनी साँस संभालते रहे। फिर राजासाहब उसके उपर से, धीरे से अपना लंड उसकी चूत मे से खीचते हुए उठ गये और बाथरूम चले गये। लंड निकलते ही मेनका को एक ख़ालीपन का एहसास हुआ।

पर आज वो बहुत खुश थी। चुदाई मे इतना मज़ा मिलता है,उसने तो सपने मे भी नही सोचा था।जितनी बार वो आज झड़ी थी उतनी बार तो वो अपनी पूरी शादीशुदा ज़िंदगी मे भी नही झड़ी थी। विश्वा तो उसे बस मज़े के समुंदर के किनारे पे ला कर छोड़ देता था,पर आज पहली बार अपने ससुर के साथ इस समुंदर की गहराई मे कई बार डूब कर उसने पूरा लुफ्त उठाया था।

वो वैसे ही नंगी पड़ी इन ख़यालों मे खोई थी कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला और राजासाहब बातरोब पहने बाहर आए। उसने मुस्कुरा कर उन्हे देखा पर वो उसे अनदेखा करते हुए लाउंज की ओर जाने लगे।

बस आज के लिए यही तक कल फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ


तब तक के लिए मैत्री ओर से जय भारत
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#91
दोस्तों

मैंने एक प्रसंग पूरा पोस्ट कर दिया है


आशा है की आपको पसंद आएगा


आपके मंतव्यो की प्रतीक्षा सह......................
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#92
बेहद अदभुत मिलन।।

लेकिन इस मिलन में थोड़ी गर्म बातें होती तो ओर भी मज़ा आता। जैसे मेनका कहती कि ऐसे हो अपनी बहु को चोदिए बाबूजी।।
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#93
अगली प्रस्तुति के इंतजार है
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#94
(13-02-2026, 03:20 PM)@@004 Wrote: अत्यंत कामुक प्रस्तुति भाई।।

लेकिन ऐसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।।।

बिलकुल ठीक कहा.
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#95
(14-02-2026, 04:04 PM)@@004 Wrote: बेहद अदभुत मिलन।।

लेकिन इस मिलन में थोड़ी गर्म बातें होती तो ओर भी मज़ा आता। जैसे मेनका कहती कि ऐसे हो अपनी बहु को चोदिए बाबूजी।।

यह लेखक पर छोड़ दीजिये.
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#96
Hot hai bhai
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#97
(14-02-2026, 04:04 PM)@@004 Wrote: बेहद अदभुत मिलन।।

लेकिन इस मिलन में थोड़ी गर्म बातें होती तो ओर भी मज़ा आता। जैसे मेनका कहती कि ऐसे हो अपनी बहु को चोदिए बाबूजी।।

जी शुक्रिया दोस्त

आपके अनुरोध को ध्यान में रखूंगी हो सकेगा तो उपयोग करुँगी

वैसे अभी शुरुआत है और एक स्त्री खास कर बहु उतनी नहीं खुलती ऐसा मेरा मानना है. मैंने इसे वास्तविकता के नजदीक रखने की कोशिश की है

एक बार शरम टूट जायेगी फिर हो सकता है आगे यह सब मिलेगा जो आपकी चाह है
शुक्रिया बने रहिये
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#98
(15-02-2026, 11:41 PM)rangeeladesi Wrote: यह लेखक पर छोड़ दीजिये.

शुक्रिया दोस्त

मैं आपके विचार से बिलकुल सहमत हूँ
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#99
चलिए कहानी में कुछ आगे जान ने की कोशिश करते है


आशा है की आप सब को पसंद आएगी
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पर आज वो बहुत खुश थी। चुदाई मे इतना मज़ा मिलता है,उसने तो सपने मे भी नही सोचा था।जितनी बार वो आज झड़ी थी उतनी बार तो वो अपनी पूरी शादीशुदा ज़िंदगी मे भी नही झड़ी थी। विश्वा तो उसे बस मज़े के समुंदर के किनारे पे ला कर छोड़ देता था,पर आज पहली बार अपने ससुर के साथ इस समुंदर की गहराई मे कई बार डूब कर उसने पूरा लुफ्त उठाया था।

वो वैसे ही नंगी पड़ी इन ख़यालों मे खोई थी कि बाथरूम का दरवाज़ा खुला और राजासाहब बातरोब पहने बाहर आए। उसने मुस्कुरा कर उन्हे देखा पर वो उसे अनदेखा करते हुए लाउंज की ओर जाने लगे।

यहाँ तक आपने पढ़ा अब आगे.....................



"सुनिए",वो उठने लगी पर राजासाहब नही रुके। वो दौड़ती हुई उनके सामने जा कर खड़ी हो गयी। "क्या हुआ?कहाँ जा रहे हैं?"

"हमसे ग़लती हो गयी है। हमे जाने दीजिए।"

"कैसी ग़लती?क्या कह रहे हैं आप?अभी जो भी हुआ उसमे आपके साथ-साथ मेरी भी मर्ज़ी शामिल थी। फिर ग़लती कैसी?"

"समझने की कोशिश कीजिए!"
मैत्री की पेशकश

"क्या समझने की कोशिश करू? यही कि जितना मैं आपको प्यार करती हू उतना ही आप भी मुझ से करते हैं?"

"होश मे आइए। अभी जो हुआ वो नही होना चाहिए था।"

"मैं पूरे होश मे हू बल्कि अब ही तो मैं होश मे आई हू। अभी जो हुआ उसमे वासना से कही ज़्यादा प्यार था। मैने आपकी आँखों मे मेरे लिए चाहत साफ़ देखी है। क्या ये सच नही हैं या मैं ग़लत हू? आप को भी बस मेरे बदन की भूख थी।"

"आप जानती हैं कि हम आपको चाह-..."राजासाहब की अधूरी बात मे दर्द और गुस्सा था।

"तो फिर क्यू जा रहें है हमसे दूर?",मेनका ने उनके कंधों पे अपने हाथ दिए।

"आप...आप..हमारे बेटे की पत्नी हैं। समाज के भी कुछ नियम हैं। ये रिश्ता हम कैसे निभा सकते हैं?"

"समाज के नियम,पत्नी,हुन्ह! क्या है समाज के नियम! यही कि आग के चारो तरफ घूम के 7 फेरे ले,सिंदूर लगा कर किसी को भी अपनी पत्नी के शरीर को जब जी चाहे,जैसे चाहे रौंदने का मौका मिल जाता है! मैं नही मानती ऐसे नियम।"

"आप समझ नही रही है।"
मैत्रिकी लेखनी

"मैं सब समझ रही हू पर आप नही समझ रहे हैं। आपको समाज का डर है ना। मुझे भी राजकुल की मर्यादा का ख़याल है। आपको वचन देती हू कभी भी उस पर आँच नही आने दूँगी। कल को आपका बेटा ठीक होकर वापस आ जाएगा तो इस मर्यादा के लिए, समाज के लिए मैं उसकी ब्यहता बन जाऊंगी। पर राजासाहब,एक लड़की क्या चाहती है अपने पति से। बस प्यार,विश्वास और इज़्ज़त जोकि आपके बेटे ने मुझे कभी नही दिया। ये सब मुझे आपने दिया है और मैने तन और मन दोनो से आपको अपना पति मान लिया है। कल आपका बेटा वापस आएगा तो दुनिया के लिए मैं उसकी बीवी हूँगी पर मेरी आत्मा पर अगर किसी का अधिकार होगा तो वो बस आपका होगा। आज जो खुशी मैने पाई है वो पहले कभी किसी ने मुझे नही दी। प्लीज़...ये खुशी मुझ से मत छिनिये। चाहे थोड़े दीनो के लिए ही सही-ये...ये एक सपना ही सही। मुझे इस सपने मे अपने साथ जी लेने दीजिए, प्लीज़!",मेनका की आँखें छल्छला आई और गला भर गया।


"क्या ग़लत कह रही है? क्या हमे हक़ नही है खुश रहने का और इसने तो हमारे घर मे कदम रखने के बाद बस दुख ही झेले हैं, और उसके कुछ ज़िम्मेदार तो हम भी हैं। क्या हमारा फ़र्ज़ नही बनता इसकी इच्छाओं का मान रखने का।",राजासाहब के मन मे सवाल उठ रहे थे।

मेनका उनसे अलग हो उनकी तरफ पीठ कर सूबक रही थी। राजासाहब ने उसे अपनी तरफ घुमाया और ठुड्डी पकड़ कर उसके झुके चेहरे को उपर किया,"हम भी आपको वचन देते हैं जब तक इस शरीर मे जान है तब तक आपकी हर खुशी का ख़याल रखेंगे और इन आँखों मे आज के बाद हुमारी वजह से आँसू नही आएँगे।",राजासाहब ने उसके चेहरे पर बनी आँसू की लकीरों को अपने होठों से मिटा दिया और उसे अपनी बाहों मे भर लिया। मेनका उनके सीने मे मुँह छुपा फिर सुबकने लगी मगर इस बार आँसू खुशी के थे।

थोड़ी देर बाद जब वो चुप हो गयी तो उसने अपने ससुर की आँखों मे झाँका और अपने लिए सिर्फ़ प्यार पाया,"आइ लव यू।",कह कर उसने उनके होठ हल्के से चूम लिए। फिर उनका बातरोब साष खोल कर उतार दिया और उन्हे बेड पे ले गयी।

राजासाहब लेट गये तो वो भी उनकी बगल मे लेट गयी।

राजासाहब पीठ के बल लेट गये और मेनका उनकी बगल मे करवट ले कर लेट गयी। दोनो के होठ एक बार फिर जुड़ गये। राजासाहब की एक बाँह मेनका की कमर के गिर्द थी और उनका एक हाथ उसकी कमर और गांड को सहला रहा था और दूसरा उसकी छातियो को। मेनका की उंगलियाँ उसके ससुर के सीने के बालों से खेल रही थी। काफ़ी देर तक दोनो एक दूसरे को ऐसे ही चूमते रहे।

फिर मेनका ने उनके होठों को छोड़ उनके चेहरे को चूमना शुरू किया और चूमते हुए नीचे उनके सीने तक आ पहुँची। उसके होठ पहले तो हल्के से राजासाहब के काले निपल्स को छेड़ते रहे पर फिर अचानक उन्होने उन काले निपल्स को अपनी रेशमी गिरफ़्त मे भींच लिया। मेनका अपने ससुर के निपल्स चूसने लगी और वो अपने हाथ उसकी गांड और छाती से हटा उसके सर पर ले आए। उन्हे बहुत मज़ा आ रहा था। मैत्री की रचना

मेनका उनके सीने को चूमते हुए उनके सीने के बालों का पीछा करते हुए नीचे जाने लगी और उनके लंड तक पहुँच गयी। लंड फिर से पूरा तना हुआ था। मेनका उसे एक तक निहारने लगी। कुछ देर पहले राजासाहब ने इसी लंड के सहारे उसे जन्नत की सैर कराई थी। उसने एक हाथ बढ़ा कर उसे अपनी गिरफ़्त मे ले लिया। राजासाहब उसे देख रहे थे। लंड इतना मोटा था कि उसका छ्होटा सा हाथ उसे पूरा नही घेर पा रहा था।

मेनका को अपने ससुर का लंड बहुत प्यारा लग रहा था। वो उसे अपने मुलायम हाथों से पकड़ धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसका चेहरा धीरे-2 करके लंड की ओर झुकता जा रहा था। उसने और झुक कर लंड के टोपे को बहुत हल्के से चूम लिया। उसे खुद पर बहुत हैरानी हुई। उसका पति यही चाहता था पर उसे इतनी घिन आती थी,सोचने भर से ही उसे उबकाई आती थी। वो अपने पति से उलझ भी पड़ी थी और साफ़ इनकार कर दिया था उसके लंड को अपने मुँह मे लेने से। (याद है ना!)



आज के लिए बस यही तक...............


मैत्री की ओर से जय भारत
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