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"श्ह,",उसने अपने होठों पे उंगली रखकर उन्हे चुप रहने का इशारा किया और अपने हॅंडबॅग से कार्ड निकाल कर काउंटर पे बैठे आदमी की तरफ बढ़ाया।
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अब आगे..................
मोल से होटेल जाते वक़्त कार मे बैठे-बैठे राजा साहेब ने अपने मोबाइल से फ़ोन मिलाया,"डॉक्टर पुरन्दरे, हम, यशवीरसिंग बोल रहे हैं।"
मेनका खिड़की से बाहर देखने लगी,उसके ससुर उसके पति का हाल पूच्छ रहे थे।इतने दीनो मे उसने एक बार भी विश्वा के बारे मे नही सोचा था।अगर मन मे ख़याल आता भी तो जल्दी से अपना ध्यान दूसरी ओर कर उस ख़याल को दिमाग़ से निकाल फेंकती थी।"कैसा आदमी था उसका 'सो-कॉल्ड पति'।जब वो हॉस्पिटल मे थी तो एक बार भी उसे देखने नही आया। ना कभी उस से माफी माँगने की कोशिश की और क्यू करता वो तो उसके लिए बस एक खिलोना थी। हवस मिटाने की चीज़,उसने उसे कभी पत्नी थोड़े ही समझा था।",मेनका सोच रही थी,"जब वो ठीक होकर वापस आ जाएगा तो वो कैसे करेगी उसका सामना। फिर से उस हैवान के साथ रहना पड़ेगा।",उसने अपने सर को झटका,जब आएगा तब सोचेंगे। आज तो इतनी खुशी का दिन है। डील फाइनल हो गयी है। आज कोई बुरा ख़याल मन मे नही लाऊंगी",अपने ससुर की तरफ देखा तो वो मोबाइल बंद करके जेब मे डाल रहे थे। वो उसे कभी भी विश्वा के बारे मे नही बताते थे। शायद जानते थे कि उसका ज़िक्र उसे फिर से वो दर्द याद दिला देगा।वो उनकी ओर देख कर मुस्कुराइ और फिर खिड़की से बाहर देखने लगी।
आइए अब हम बॅंगलुर चलते हैं,डॉक्टर पुरन्दारे के रिहेब सेंटर मे,विश्वा को देखने। वो देखिए बाकी पेशेंट्स के साथ बैठ कर खा रहा है,और डॉक्टर पुरन्दारे कहाँ है? हाँ,वहाँ अपने चेंबर मे कंप्यूटर पर कुछ देख रहे हैं। क्या देख रहें है आख़िर? अच्छा, विश्वा के थेरपी सेशन्स के टेप हैं। डॉक्टरसाहब अपने सारे पेशेंट्स से जो भी बात करते हैं उसे वीडियो रेकॉर्ड कर लेते हैं,इस से उन्हे बाद मे मरीज़ को अनल्ये करने मे आसानी होती है।चलिए,हम भी उनके साथ ये वीडियोस देखते हैं।
पेशेंट नंबर.45681,विश्वजीत सिंग
सेशन एक
डॉक्टर: हेलो,विश्वजीत।
विश्वा बस सिर हिलाता है।
डॉक्टर "देखो,विश्वा-आइ कॅन कॉल यू विश्वा। ओके,देखो,मेरा मानना है कि हर आदमी जो किसी बुरी लत का शिकार है खुद अपने को सुधार सकता है अगर वो खुद के अंदर झाँक कर अपने आप को समझने की कोशिश करे। मैं चाहता हू कि तुम भी यही करो।
विश्वा एक तरफ सर घुमा कर दीवार की ओर देख रहा है।पता नही डॉक्टर की बातों पर ध्यान दे भी रहा है या नही। मैत्री की पेशकश
डॉक्टर: इंसान नशे का सहारा लेता है किसी चीज़ से भागने के लिए और ये नही सोचता कि कुछ समय बाद वो उस नशे का गुलाम हो जाता है। उस के हाथ की कठपुतली बन कर रह जाता है बस। मेरी बात के बारे मे सोचना। यू मे गो नाउ।
डॉक्टर कुछ फाइल्स स्किप कर आगे बढ़ते हैं।
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दोस्तों एक छोटा अपडेट दिया है............
आगे लिख रही हूँ
बने रहिये........
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सेशन 4
डॉक्टर: “हेलो,विश्वा”।
विश्वा: “हाई,डॉक्टर।“
डॉक्टर: “कैसा लग रहा है यहा?” मैत्री की लेखनी।
विश्वा:”अच्छी जगह है डॉक्टर,पर जब तलब लगती है तो ये जगह जैल लगने लगती है।“
डॉक्टर: “तुम चाहो तो कल ही यहा से जा सकते हो। तुम्हारी मर्ज़ी के खिलाफ ,अगर तुम्हारे परिवार वाले बोले, तो भी मैं तुम्हे यहा नही रोकुंगा।“
विश्वा(खड़ा होकर खिड़की से बाहर देखते हुए): “नही डॉक्टर,मैं ठीक होना चाहता हू। मैं किसी और चीज़ को अपनी लाइफ कंट्रोल करने नही दे सकता।“
डॉक्टर: “धेट'स ध स्पिरिट! मैं समझता हू,विश्वा, जब तलब लगती है तो बहुत मुश्किल होती है पर मैं जानता हु कि तुम इस से ज़रूर उबर जाओगे।“
डॉक्टर और आगे बढ़ते हैं,एक वीडियो देखना शुरू करते हैं और फास्ट फॉर्वर्ड कर वहा से देखते हैं, जहाँ से विश्वा बोलता है,
विश्वा: “मेरे मा-पिता बहुत अच्छे हैं और हम दोनो भाइयों को कँहि भी बिगड़ने नही दिया और ना ही कभी हमारी कोई जायज़ माँग को ठुकराया । और मेरा भाई तो मेरा दोस्त था। डॉक्टर,हम राजपरिवार के लड़को से कुछ खास उम्मीदें रखी जाती हैं-हमे अपने परिवार की मर्यादा का हर वक़्त ख़याल रखना पड़ता है-हर वक़्त,मुझ से ये सब उतना नही होता था,वैसे भी मेरा भाई भावी राजा था। उसे बिज़नेस संभालना था और परिवार के मान की रखवाली करनी थी।
डॉक्टर: “तो तुम परिवार की इज़्ज़त का ख़याल नही करते?”
विश्वा: “करता हू,पर मैं राजपुरा मे नही रहना चाहता था, मैं तो अमेरिका मे अपने फ्रेंड्स के साथ अप्पर-एंड गॅडजेट्स का बिज़नेस करना चाहता था। मेरे भाई को मेरे प्लान्स के बारे मे पता था और वो हमेशा कहता था कि फॅमिली बिज़नेस और ट्रेडिशन्स की देखभाल के लिए वो है,मैं तो बस वो करू जो मैं चाहता हू। मेरा भाई मेरा बहुत ख़याल रखता था डॉक्टर,पर भगवान ने उसे छीन लिया और मुझे मजबूरन वापस आना पड़ा। पिता जी बिल्कुल अकेले थे और मा भी स्वर्ग सिधर गयी थी। मैं आया था अपना फ़र्ज़ निभाने पर इधर कुछ महीनों से ये फ़र्ज़ मुझे बोझ लगने लगा था।“
डॉक्टर और आगे बढ़ते हैं।
सेशन 8
विश्वा:”मुझे अपने पिता से कोई शिकायत नही डॉकटर, पर शायद हम दोनो के रास्ते अलग हैं,राजपुरा उनकी ज़िंदगी है और मैं अब राजपुरा जाना नही चाहता। मेरा दम घुट ता है अब वहाँ।“
सेशन 15
डॉक्टर: “सेक्स के बारे मे तुम्हारे क्या ख़याल हैं?”
विश्वा; “इंसानी ज़रूरत है जैसे खाना,पानी,हवा।“
डॉक्टर: “और शादी?” मैत्री की पेशकश
विश्वा:”बिल्कुल ज़रूरी नही है, अगर आप बच्चा पालना चाहते हैं तो अलग बात है वरना किसी लड़की के साथ आप शादी के बगैर भी वैसे ही रह सकते हैं।“
डॉक्टर:”तो फिर तुमने शादी क्यू की?”
............................
आज के लिए बस यही तक कल फिर एक नए अपडेट के साथ मिलेंगे।
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।
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दोस्तों कहानी को थोडा आगे लेके आई हूँ
आपके मंतव्यो की प्रतीक्षा सह...................
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उत्तम प्रस्तुति।।
राजा जी को भी विश्वा के ये इलाज के वीडियो देखना चाहिए जिससे उनसे समझ में आये और वो उसको अपने हिसाब से जीने के लिए।।।
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अगली प्रस्तुति का इंतजार है भाई
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(10-02-2026, 08:54 PM)@@004 Wrote: उत्तम प्रस्तुति।।
राजा जी को भी विश्वा के ये इलाज के वीडियो देखना चाहिए जिससे उनसे समझ में आये और वो उसको अपने हिसाब से जीने के लिए।।।
शुक्रिया दोस्त
जी आपकी बात तो सही है लेकिन राजाजी अपना रास्ता शायद खुद ही चुन लेंगे
देखते है आगे क्या क्या होता है .................
जबार भी तो है............
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(11-02-2026, 08:08 AM)@@004 Wrote: अगली प्रस्तुति का इंतजार है भाई
जी बिलकुल
लिख रही हूँ
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चलिए कहानी में थोडा आगे बढ़ते है
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विश्वा:”क्यूकी, राजकुवर होने के नाते, धेट वाज़ एक्सपेक्टेड ऑफ मी।“
डॉक्टर: “तुमने अपनी बीवी के साथ जो किया।“
विश्वा: “मैं उसके लिए शर्मिंदा हू। यहा से जाते ही मैं मेनका से माफी माँगूंगा पर शायद हमारी शादी अब मैं निभा नही पाऊँगा। (हंसता है)। मैं भी क्या कह रहा हू! जो उस रात हुआ उसके बाद तो वो ही मेरे साथ नही रहना चाहेगी। मैने बहुत कोशिश की उसके साथ एक एमोशनल रिश्ता बने,डॉक्टर,पर ऐसा कभी हो नही पाया।“
डॉक्टर: “तो तुमने उसी से शादी क्यू की? किसी और राजकुमारी से भी कर सकते थे?”
थोड़ी देर चुप रहने के बाद विश्वा बोला,"डॉक्टर,वो बहुत खूबसूरत है। मैं बस,मैं बस उसके साथ हम बिस्तर होना चाहता था। उसे देखते ही मेरे दिल मे उसके जिस्म को हासिल करने का ख़याल आया था। शुरू मे मैने सोचा था कि इसी तरह हुमारे बीच प्यार भी हो जाएगा। वो बहुत अच्छी लड़की है। बहुत समझदार भी ,पर पता नही मेरे लिए वो कभी भी एक एक हसीन जिस्म से ज़्यादा क्यू नही बन पाई! मुझे कभी उस से प्यार नही हुआ।“
तभी डॉक्टर का फोन बजता है यह राजासाहब का है,होटेल को जाते हुए कार से कर रहे हैं।
"नमस्कार,राजा साब! हा,हा, विश्वा मे काफ़ी इंप्रूव्मेंट है। अभी मैं उसी की फाइल देख रहा था। सबसे बड़ी बात है कि वो खुद भी ठीक होना चाहता है। मैं कल आपको उसके बारे मे एक डीटेल्ड ई-मैल भेजता हू,फिर हम बात करेंगे। अच्छा राजासाहब,नमस्ते।"
चलिए वापस मुंबई चलते हैं, मेनका और राजा यशवीर होटेल मेरियट पहुँच गये हैं और राजासाहब रिसेप्षन पर अपना परिचय दे रहे हैं।
"हम,यशवीरसिंग हैं।हुमारे सेक्रेटरी ने राजपुरा से फोन पर यहा हुमारे नाम से 2 स्यूयीट्स बुक किए होंगे।"
"वेलकम सर,आपकी बुकिंग है पर एक सूयीट की।मैने ही राजपुरा से कॉल रिसीव की थी और मुझे कहा गया था कि राजा ।यशवीरसिंग और मिसेज़।सिंग के लिए सूयीट बुक करना है और हमने लोटस सूयीट आपके लिए रेडी कर दिया है।"
"ये कैसे हो सकता है।हमने साफ़ कहा था कि 2।-"
"इट'स ओके।हमारा सूयीट हमे दिखा दीजिए।",मेनका राजासाहब की बाँह पकड़ते हुए बोली,"चलिए।" मैत्री की पेशकश।
"शुवर मॅ'म।",कह कर रिसेप्षनिस्ट ने एक बेल बॉय को बुला कर उनके साथ कर दिया।
"आपने हमे बात क्यू नही करने दी?ऐसी ग़लती कोई कैसे कर सकता है।।",राजासाहब लिफ्ट मे घुसते हुए बोले।
"फोन पे अक्सर ऐसी ग़लत फहमी हो जाती है।सेक्रेटरी ने राजासाहब और मिसेज़।सिंग बोला होगा और इन्हे लगा होगा कि हम पति-पत्नी हैं।",जवाब देते हुए शर्म से मेनका के गाल लाल हो गये।
"अरे,जब आप बात समझ गयी थी तो उस रिसेप्षनिस्ट को बताया क्यू नही?"
"आपने भी तो माल मे सेलेज़्गर्ल को नही बताया था।",बेल्लबोय के पीछे सूयीट मे घुसते हुए मेनका बोली।
राजासाहब की बोलती बंद हो गयी,"। तो इसने सुन लिया था।",उन्होने सोचा।
सूयीट मे दाखिल होते ही एक लाउंज था जहा एक सोफा सेट लगा था और उसके बाद बड़ा सा बेडरूम जिसमे एक तरफ 4 चेर्स और एक टेबल थी और एक स्टडी डेस्क था जिसपे कंप्यूटर और फोन थे और दूसरी तरफ था एक विशाल पलंग जिसे देख कर बस यही ख़याल आता था कि यह तो चुदाइ के लिए ही बना है। मैत्री निर्मित।
बने रहिये कहानी के साथ आगे और भी लिख रही हूँ।
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रीडर्स मित्रो
एक छोटा सा अपडेट दे दिया है आप पढ़े तब तक मैं कुछ ओर भी लिख रही हूँ
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चलिए कुछ और भी जानकारी लेते है
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राजासाहब फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चले गये,तब तक मेनका ने भी कपड़े बदल कर खाने का ऑर्डर दे दिया।
थोड़ी देर मे राजासाहब के आने के बाद दोनो ने साथ मे खाना खाया।अब मेनका काले रंग का ड्रेसिंग गाउन पहने थी और राजासाहब कुर्ते-पायजामा मे थे।
"हम यहा लाउंज मे सो जाएँगे,आप बेड पर सो जाइए।",राजासाहब ने अपनी बहू को कहा।
"जी नही,पलंग बहुत बड़ा है।एक तरफ आप सो जाइए,मैं दूसरी तरफ सो जाऊंगी।"
"पर।" मैत्री की पेशकश
"पर-वॉर कुछ नही।चलिए सो जाइए।दिन भर ज़रा भी आराम नही किया है आपने और यहा लाउंज मे तो आपको बड़ी अच्छी नींद आएगी!।",मेनका बाँह पकड़ कर अपने ससुर को ले गयी और पलंग पर बिठा दिया।,"चलिए,लेट जाइए।",और उनके लेट ते ही उपर से चादर ओढ़ा दी।फिर फ्रिड्ज से एक बॉटल निकाली और ग्लास के साथ उसे राजासाहब के तरफ की साइड टेबल पर रख दिया।,"गुड नाइट।"
"गुड नाइट।",राजासाहब ने अपनी आँखे बंद कर ली।मेनका बाथरूम चली गयी थी।आँखें तो बंद कर ली पर राजासाहब की आँखों मे नींद थी कहा।उन्हे कल रात का वाक़या याद आया जिसके बाद उन्होने अपनी बहू को सोच कर मूठ मारी थी।उन्हे अपने उपर आश्चर्य हो रहा था।जब से उनका बेटा मरा था,सेक्स की ओर उनका ध्यान कभी नही गया था।।।और वो शहर की रखाइलों वाला किस्सा तो उन्होने यूधवीर के विदेश से पढ़ कर लौटने से पहले ही ख़तम कर दिया था।पर इस लड़की ने उनमे फिर वो भूख जगा दी थी।
तभी मेनका बाथरूम से बाहर आई और ड्रेसिंग टेबल के सामने चली गयी,राजासाहब की ओर उसकी पीठ थी और वो उसे देख रहे थे।मनका ने सॅश खोल कर गाउन उतार दिया,नीचे काले रंग की नाइटी थी।
"उफ़फ्फ़,काले लिबास मे तो इसका गोरा रंग और निखर रहा है।।",मेनका ने अपने बाल सवार,बत्ती बुझाई और आकर पलंग पर लेट कर अपने उपर चादर डाल दी।
कमरे मे अंधेरा हो गया और बिल्कुल सन्नाटा च्छा गया।दोनो एक दूसरे की तरफ पीठ कर करवट से लेते हुए थे।बाहर सब शांत था पर दोनो के दिलों मे तूफान मचा हुआ था।राजासाहब का लंड पायजामा मे हरकते कर रहा था और बड़ी मुश्किल से उन्होने उसे काबू मे किया था।मेनका की भी हालत बुरी थी,उसे तो ये हल्की-फुल्की नाइटी भी बहुत ज़्यादा तंग लग रही थी,वो चाह रही थी कि इसे भी उतार दे। उसकी चूत मे खुजली सी होने लगी थी।।
पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा और सोने की कोशिश करने लगे।बहुत सवेरे से जागे होने के कारण और दिन भर की थकान ने असर दिखाया और थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
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आज के लिए बस यही तक
फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत
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अत्यंत सुंदर प्रस्तुति भाई।।।
लेकिन ये रात बिना कुछ हुए निकल जाये तो मज़ा नहीं आयेगा। जब दोनों ससुर और बहु एक ही बिस्तर पर है तो थोड़ी बहुत छेड़छाड़ तो होना लाजमी है जो नींद में हुई हो।।
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(11-02-2026, 06:43 PM)@@004 Wrote: अत्यंत सुंदर प्रस्तुति भाई।।।
लेकिन ये रात बिना कुछ हुए निकल जाये तो मज़ा नहीं आयेगा। जब दोनों ससुर और बहु एक ही बिस्तर पर है तो थोड़ी बहुत छेड़छाड़ तो होना लाजमी है जो नींद में हुई हो।।
शुक्रिया दोस्त
आपकी बात तो सही है रात बिना कुछ किये..........
होगा होगा पर धीरे धीरे कहानी को थोडा रियल आगे ऐसा करते है...........
कुछ ऐसा करती हूँ की आपको मजा आये एक्स्ट अपडेट में............
बने रहिये
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(12-02-2026, 02:15 PM)maitripatel Wrote: शुक्रिया दोस्त
आपकी बात तो सही है रात बिना कुछ किये..........
होगा होगा पर धीरे धीरे कहानी को थोडा रियल आगे ऐसा करते है...........
कुछ ऐसा करती हूँ की आपको मजा आये एक्स्ट अपडेट में............
बने रहिये
अपडेट का बेसब्री से इंतजार है
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(12-02-2026, 06:41 PM)@@004 Wrote: अपडेट का बेसब्री से इंतजार है
आपका बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त.
जानकार बहोत ख़ुशी हुई की चलो एक रीडर तो है जिनको आगे की कहानी में रूचि है.
दोस्त आज एक उपडेट दे दूंगी
शुक्रिया
बने रहिये
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चलिए कहानी को थोडा और जान ने की कोशिश करते है
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पर किसी तरह दोनो ने अपने दिलों को काबू मे रखा और सोने की कोशिश करने लगे।बहुत सवेरे से जागे होने के कारण और दिन भर की थकान ने असर दिखाया और थोड़ी देर बाद दोनो नींद की गोद मे थे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
अब आगे..............
मस्त मेनका पार्ट 4
गतान्क से आगे।
रात अचानक राजासाहब को गर्मी महसूस हुई तो वो उठ बैठे, अपने बदन से चादर हटा दी, और साइड टेबल पे रखा लॅंप ऑन कर दिया। फिर अपना कुर्ता उतार कर किनारे रख दिया और टेबल से बॉटल उठा कर पानी पीने लगे।घड़ी मे देखा तो एक बज रहा था। उन्हे मेनका का ध्यान आया तो घूम कर उसकी ओर देखा, वो उनकी तरफ ही करवट कर लेटी हुई थी। मैत्री की भेंट.
अपनी बहू को देखते ही राजासाहब के होठ फिर सूख गये, नाइटी के गले से मेनका की चूचियो का काफ़ी हिस्सा नज़र आ रहा था, बाहों के दबाव के कारण चूचियो का कटाव और बड़ा हो कर उभर रहा था। नींद मे चादर भी उसके शरीर से हट गयी थी, और नाइटी उठ कर घुटनो के उपर तक आ गयी थी। उसकी गोरी टांगे और जांघों का थोड़ा सा हिस्सा लॅंप की रोशनी मे चमक रहे थे। राजासाहब का लंड पायजामा मे सुगबुगाने लगा। उनकी नज़रे मेनका के जिस्म से हट ही नही रही थी। उनकी आँखों ने उसके पैरों से उसका मुआयना करना शुरू किया और जैसे ही उसके चेहरे तक पहुँची तो उनके माथे पर सलवटें पड़ गयी। मेनका नींद मे थी पर कुछ बुदबुदा रही थी,चेहरे पर घबराहट भी झलक रही थी।
चारों तरफ घोर अंधेरा था और मेनका उस वीराने मे अकेली पूरी नंगी भाग रही थी। वो दैत्याकार आदमी काला लिबास पहने था और चेहरे पर भी काला मुखौटा था। वो हाथों मे तलवार ले उसका पीचछा कर रहा था। मेनका बदहवास सी बहुत तेज़ी से दौड़ रही थी पर तब भी उस हैवान को पीछे नही छोड़ पा रही थी। तभी उसका पैर कही फँसता है, और वो गिर जाती है। वो काला इंसान उसके पास पहुँच कर तलवार उठाता है,मेनका ज़ोर से चिल्लती है,"बचाओ!बचाओ!"
"दुल्हन...दुल्हन...आँखे खोलो",कही दूर से उसके कानो मे आवाज़ आती है। वो अपनी आँखे खोलती है और वो इंसान जिसे वो ज़रूरत के वक़्त हमेशा अपने पास पाती है-उसका ससुर, उसे अपने उपर झुका पाती है,"आ गये आप।"
राजासाहब मेनका के उपर झुके हुए उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे। मेनका ने उचक कर उनके गले मे बाँहें डाल दी और उनसे चिपक गयी,"मेरे पास रहिए।प्लीज़,मुझे छोड़ कर मत जाइए।" मैत्री की पेशकश
राजासाहब संभाल नही पाए और उसे पकड़ते हुए उसके उपर गिर गये। मेनका उनके गले से लगी हुई थी और उनका नंगा सीना मेनका की छातियो पे दबा हुआ था। राजासाहब का चेहरा उसके बालों मे था, और उसकी खुश्बू उन्हे मदहोश कर रही थी। मेनका को भी बहुत भला लग रहा था। जिस इंसान के सपने वो देखने लगी थी,आज वो उसकी बाहों मे था। उसने अपना गाल हौले से राजासाहब के गाल पे रगड़ा। उसकी इस हरकत से राजासाहब और नशे मे आ गये और उसे वैसे ही थामे हुए अपना सर उठा कर मेनका को देखा।
मेनका की नशीली आंखें और अधखुले होंठ उसे बुला रहे थे। जिसे उन्होने खुशी के साथ कबूल किया ,और अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए और अपनी बहू को चूमने लगे। मेनका भी उनकी किस का जवाब देने लगी , और दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे के होठों का मज़ा उठाते रहे। फिर राजासाहब ने धीरे से अपनी जीभ मेनका के मुँह मे डाल दी,वो तो जैसे इसी इंतेज़ार मे थी ,और उसने भी अपनी जीभ उनकी जीभ से टकरा दी। अब दोनो पूरे जोश के साथ एक-दूसरे को चूमने लगे। राजासाहब का लंड पायजामा मे पूरा तन चुका था, और नीचे मेनका उसे अपनी कमर की साइड मे महसूस कर रही थी। उसकी चूत भी गीली हो गयी थी। दोनो की टांगे भी नीचे मिल रही थी और राजासाहब अपने पैर से उसके पैरों को सहला रहे थे।
जय भारत
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