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Incest खेल ससुर बहु का
#41
चलिए कहानी में आगे बढ़ते है दोस्तों
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#42
जहाँ इस बात ने राजासाहब के दिल मे मेनका के लिए और इज़्ज़त भर दी वही मेनका भी राजासाहब की ईमानदारी से प्रभावित हुए बिना नही रह सकी।पूरे मामले मे उन्हे सिर्फ़ मेनका की चिंता थी,उनका बेटा गुनेहगर था और उसे बचाने के लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थे-उनका बस चलता तो विश्वा जैल मे होता।उसके पिता और डॉक्टर्स के समझने पर ही वो उसे जैल के बजाय रिहेब मे भेजने को तैय्यार हुए थे।

अब आगे......

जब राजासाहब बॅंगलुर से वापस आए तो मेनका की मा ने उसे अपने साथ ले जाने की इजाज़त माँगी,राजासाहब फ़ौरन तैय्यार हो गये पर मेनका अपने ससुर को अकेला छोड़ कर जाने को बिल्कुल तैय्यार नही हुई।लाख समझाने पर भी वो नही मानी और राजासाहब के कहेने पर उसने बोला,"अपने घर को छोड़कर मैं कही नही जाऊंगी।"


राजासाहब सवेरे नाश्ते की टेबल पर यही सब सोच रहे थे कि मेनका नौकर के हाथ से डिश लेकर उन्हे परोसने लगी,"पिताजी,एक बात पूछे?"

"हा,दुल्हन।"

"क्या हम ऑफीस आ सकते हैं?"

"बिल्कुल,दुल्हन।इसमे पूच्छने वाली क्या बात है?आपका अपना ऑफीस है।"

"आप समझे नही।हम ऑफीस जाय्न करने की बात कर रहे हैं।"


राजासाहब थोड़े परेशान दिखे,"दुल्हन महल और ऑफीस दोनो की ज़िम्मेदारी कहीं आप को।"

"-मुझे एक बार ट्राइ तो करने दीजिए,प्लीज़!"
मैत्री पटेल निर्मित[b][/b]

"ओके,कल से चलिए हमारे साथ।"

"कल से नही,आज से प्लीज़!",मेनका बच्चों की तरह मचलते हुए बोली।

"ठीक है,जाकर रेडी हो जाइए।",राजासाहब हंसते हुए बोले।

-------------------------------------------------------------------------------

"कल्लन,जल्दी पता लगाओ कि आख़िर राजा ने अपने लौंडे को कहा भेजा है।प्रेस रिलीस क्या अपने ऑफीस मे भी साले ने रिहेब सेंटर का नाम नही बताया है!",जब्बार बिस्तर पर अढ़लेता फोन पे बात कर रहा था,मलिका की चौड़ी गांड उसकी आँखों के सामने लहरा रही थी,वो घुटनो के बल बैठी थी और उसका मुँह जब्बार के लंड पे उपर-नीचे हो रहा था।

"डॉन'ट वरी,जब तक विश्वा का पता नही लगा लेता,मैं चैन से नही बैठूँगा।",और फोन कट गया।

जब्बार ने फोन किनारे रखा और हाथ बढ़कर मलिका की कमर जकड़ते हुए उसे अपने उपर ले लिया,अब उसकी चिकनी चूत उसकी आँखों के सामने थी और दोनो 69 पोज़िशन मे आ गये थे।

उसने अपने दाँत उसकी गांड की एक फाँक मे गाड़ाते हुए पूचछा,"बत्रा को भी कुछ नही पता चला?"

"
उउन्ण..हु..उँ",मलिका चिहुनकि और उसके लंड भरे मुँह से सिर्फ़ इतना ही निकला।जब्बार ज़ोर से उसकी चूत चाटने लगा।


जब्बार ने उसकी कमर पे अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी,"राजा की औलाद बर्बादी की कगार से वापस आ जाए,ऐसा मैं कभी नही होने दूँगा।",औरउसने अपना मुँह उसकी चूत मे घुसा दिया और अपनी जीभ से उसे चोदने लगा।मलिका ने भी अपनी चूसने की स्पीड बढ़ा दी और दोनो अपने क्लाइमॅक्स की ओर बढ़ने लगे।

-------------------------------------------------------------------------------

कुछ ही दीनो मे मेनका ने ऑफीस का सारा काम समझ लिया।विश्वा के जाने के बाद जो जगह खाली हुई थी,उसे उसने बखूबी भर दिया था।ज़िम्मेदारी बढ़ने के बावजूद महल के काम-काज पर उसने ज़रा भी असर नही पड़ने दिया था।अब वो पहले से ज़्यादा खुश नज़र आती थी। बस एक प्राब्लम थी,उस हादसे के बाद से रात को उसे बुरे सपने आने लगे थे और अक्सर बीच मे ही उसकी नींद टूट जाती थी।


उस सुबह भी वो सपने की वजह से जल्दी उठ गयी तो उसने सोचा की नौकरों से थोडा काम ही निपट वाया जाए।रात के खाने के बाद महल का सारा स्टाफ महल के कॉम्पोन्ड मे बने अपने क्वॉर्टर्स मे चला जाता था और सुबह महल के अंदर से हुक्म आने पर ही अंदर जाता था।मेनका ने इंटरकम से अंदर आने का ऑर्डर दिया और बटन दबा कर सारे एलेक्ट्रॉनिक लॉक्स खोल दिए।थोड़ी ही देर मे महल के अंदर रोज़मर्रा की चहल-पहल होने लगी।

ऐसे ही किसी काम से मेनका अकेली ही उस हिस्से मे पहुँची जहा जिम था,उसने जिम की सफाई कल ही करने का ऑर्डर दिया था और उसी का मुआयना करने आई थी।

जिम के अंदर कदम रखते ही उसका मुँह खुला रह गया। सामने राजासाहब उसकी तरफ पीठ करके वेट ट्रैनिंग कर रहे थे-केवल एक अंडरवेर मे।वो उनके गथिले बदन को देखने लगी।मज़बूत कंधे और विशाल बाहें जब वेट उपर उठाती थी तो एक-एक मसल का शेप साफ़ दिखाई देता था,नीचे बिल्कुल सीधी पीठ,पतली कमर और नीचे पुष्ट गांड। मेनका को टाँगों के बीच गीलापन महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे की पैरों मे जान ही ना हो।उसने दीवार को पकड़ कर सहारा लिया पर तभी राजासाहब पीछे घूमने लगे तो वो उसी दीवार की ओट मे हो गयी।


जारी रहेगा
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#43
साथिओ एक छोटा अपडेट दे दिया है

हो सके तो अपनी राय जुरूर देना
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#44
एक और अपडेट दे रही हूँ

जुड़े रहिये
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#45
थोड़ी देर बाद उसने वैसे ही ओट मे च्छुपकर फिर से अंदर झाँकना शुरू किया, अब उसके ससुर का मुँह उसकी तरफ था पर वो उसे देख नही सकते थे।अब उनके हाथों मे डमबेल थे जिन्हे वो बारी-2 से उपर नीचे कर रहे थे और उनके सीने की मछलीया पसीने से चमक रही थी।मेनका ने उनके चौड़े सीने को देखा और उसे वो सुबह याद आई जब उन्होने उसे गिरने से बचाया था और उसने इसी सीने मे पनाह ली थी।वो मर्दाना खुश्बू फिर उसे महसूस हुई और टांगो के बीच गीलापन बढ़ गया।उनके सीने पे काफ़ी बाल थे और मेनका की निगाहें बालों की लकीर को फॉलो करने लगी जो नीचे जा रही थी और उनके अंडरवेर मे गुम हो गयी थी।मेनका की नज़रे अंडरवेर पर टिक गयी।कितना फूला हुआ था,कितना बड़ा होगा,उसका हाथ साडी से उपर ही उसकी जाँघो के बीच के हिस्से को सहलाने लगा औरथोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

"
मालिकन!",कोई नौकर उसे ढूंढता उधर आ रहा था।वो वापस होश मे आई और अपने को सायंत करके आवाज़ की दिशा मे चली गयी।



"
कल सुबह ही हमे बॉमबे रवाना होना होगा।जर्मन पार्ट्नर्स से फाइनल राउंड की बात करके डील पे साइन करना है।",राजासाहब अपने चेंबर मे बैठे थे और सामने मेनका,सेशाद्री और 4 स्टाफ मेंबर्ज़ उन्हे सुन रहे थे।

"
कल सवेरे 5 बजे कार्स से हम शहर जाएँगे और 6:एक5-6:30 तक हमारा चार्टर्ड प्लेन बॉमबे के लिए तक-ऑफ करेगा जहा हम एक0 बजे तक पहुँचेंगे।मीटिंग एकएक बजे शुरू होगी।कल की रात हम सब वही रुकेंगे और परसों होप्फुली डील साइन कर के वापस आ जाएँगे।"

"
सर,मुझे और बाकी मेंबर्ज़ को तो कल ही वापस आना होगा क्यूकी परसो से ऑडिट शुरू होनी है।",सेशाद्री बोले।
मैत्री की पेशकश.

"
अरे,ये बात तो हमारे दिमाग़ से उतर ही गयी थी।तो ठीक है आप सब शाम को उसी प्लेन से वापस रवाना हो जाइएगा।हम परसों डील साइन कर के वापस आएँगे।दुल्हन हुमारे साथ ही वापस आएँगी"


सारे स्टाफ मेंबर्ज़ बाहर चले गये तो मेनका भी जाने लगी,"मैं महल जाकर अपनी पॅकिंग कर लेती हूँ।"

"
हा,ठीक है।",और राजासाहब अपने लॅपटॉप पे फाइल्स चेक करने लगे।


रात करीब एक0 बजे राजासाहब महल पहुँच कर सीढ़िया चढ़ कर अपने कमरे की तरफ जा रहे थे जब वाहा से कुछ आवाज़ें आती सुनाई दी।अंदर जाने पर उन्होने देखा की मेनका एक नौकर के साथ उनके वॉक-इन क्लॉज़ेट से कपड़े निकलवा कर पॅकिंग करवा रही है।

"
अरे आपने क्यू तकलीफ़ की दुल्हन?हुमारे नौकर को कह देती। बस 2 ही दीनो के लिए तो जाना है।"

"
हा,कह ही देना चाहिए था।सारे कपड़े तो आपके एक जैसे हैं।कोई फ़र्क ही नही है।"

"
तो इस उम्र मे हम तरह-2 के कपड़े पहन कर क्या करेंगे?",उन्होने हंसते हुए पूचछा।

"
काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे। अफ",एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया और राजासाहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा।वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी।उसका पेट भी नुमाया हो रहा था और राजासाहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी।उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था।



जय भारत
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#46
साथियो एक और अपडेट भी दे दिया है
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#47
"काम करने मे तो आप जवानो को भी मात देते हैं तो कपड़े क्यू बूढो जैसे पहनेंगे। अफ",एक गिरी हुई शर्ट को उठाने के लिए मेनका झुकी तो उसका पल्लू ढालक गया और राजासाहब के सामने उसका बड़ा,मस्त क्लीवेज छलक उठा।वो उनकी नज़रो से बेपरवाह उस शर्ट को तह करने लगी।उसका पेट भी नुमाया हो रहा था और राजासाहब की नज़रे उसके क्लीवेज से फिसल कर उसके चिकने,सपाट पेट के बीचोबीच उसकी गोल नाभि पर टिक गयी।उनका लंड पॅंट के अंदर हरकत मे आने लगा था।


अब आआगे........


तभी मेनका पलटी और क्लॉज़ेट के अंदर जाने लगी,जैसे ही राजासाहब ने साडी मे कसी अपनी बहू की टाइट गांड को देखा उनका लंड पूरा खड़ा हो गया और पॅंट से निकलने को च्चटपटाने लगा।

"
खाना तैय्यार है हुज़ूर।",एक नौकर ने दरवाज़े पे आके कहा।

"
हम अभी आते हैं", कह कर राजासाहब तेज़ी से मुड़े और बाथरूम मे चले गये।


खाने के टेबल पर दोनो मे कुछ खास बात नही हुई।थोड़ी देर बाद सारा स्टाफ भी अपने कमरों को चला गया।

"
गुड नाइट,पिताजी।आप भी जाकर सो जाइए।कल बहुत सवेरे उठना है",मेनका ने पहली सीढ़ी पर पैर रखा कि ना जाने कैसे उसका पैर मूड गया और वो गिर पड़ी।

"
अरे संभाल के दुल्हन,चलिए, उठिए",राजासाहब उसे सहारा देकर उठाने लगे पर मेनका दर्द से कराह उठी,"आउच”! पैर सीधा रखने मे दर्द होता है"

"
अच्छा,",राजासाहब उसके पैर को देखने लगे,टखने मे मोच आई थी,"हम, कमरे मे चल कर इसका इलाज करते हैं।खड़े होने की कोशिश कीजिए।"

"
नही हो रहा,बहुत दर्द है।"मेनका दर्द से परेशान हो बोली।
मैत्री की लेखनी

"
ओके",राजासाहब ने उसकी दाई बाँह अपने गले मे डाली और उसे अपनी गोद मे उठा लिया। शर्म के मारे मेनका के गाल और लाल हो गये।राजासाहब सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।वो उसकी तरफ नही देख रहे थे। पर वोही मर्दाना खुश्बू मेनका को महसूस हुई,अपने ससुर के गले मे बाँह डाले मेनका को बहुत अच्छा लग रहा था।उसे उन्होने ऐसे उठा रखा था जैसे उसका वजन ही ना हो।कमरे तक पहुँचने मे ना तो वो हांफे ना ही पसीने की एक भी बूँद उनके माथे पे छल्कि"।इस उम्र भी इतनी ताक़त",मेनका तो उनकी फिटनेस की कायल हो गयी।


कमरे मे पहुँच कर उन्होने मेनका को पलंग पे ऐसे लिटाया जैसे किसी फूल को रख रहे हैं।फिर उसके ड्रेसर से एक बॉम लेकर आए और उसकी तरफ पीठ करके उसके पाओं के पास बैठ गये।साडी थोड़ी सी उपर खिसका कर उसके टखने को देखने लगे,"।”उफ़फ्फ़, कितनी कोमल है।" राजासाहब उसके टखने को सहलाने लगे। मेनका की आँखें मूंद गयी।उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

"
जब हम फुटबॉल खेलते थे तो ऐसी चोट बड़ी आम थी।",उन्होने वैसे ही सहलाना जारी रखा।

"
ह्म्म।",मेनका बस इतना ही कह पाई।


और तभी राजासाहब ने उसके टखने को अपने दोनो हाथों मे पकड़ कर एक झटका दिया। मैत्री की पेशकश

"
औउउ,छ्च!",मेनका उठ कर बैठ गयी और दर्द से तड़प कर पीछे से उसने अपने ससुर को पकड़ लिया और उसका सर उनकी पीठ से जा लगा।"बस ठीक हो गया।",कह कर वो उसके टखने पर बॉम की मालिश करने लगे।मेनका वैसे ही अपने ससुर से सटी रही।राजासाहब भी मालिश करते-2 उसके पैर को सहलाने लगे।दोनो को एक दूसरे का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।राजासाहब का हाथ अपनी बहू के टखने से उपर आने लगा। मेनका भी आँखें बंद कर इस लम्हे का लुत्फ़ उठा रही थी।

"
टॅनन्न्न!",महल के बड़े घारियल मे एक2 बाज गये थे।दोनो चौंक कर अलग हो गये।

"
आराम कीजिए दुल्हन।सुबह तक दर्द ठीक हो जाएगा।",कहकर बिना उसकी तरफ़ देखे वो वापस अपने कमरे मे आ गये।उनका लंड पायजामा मे पूरा खड़ा था। उन्होने उसे उतार फेंका और अपना लंड तेज़ी से हिलाने लगे।


मेनका तो जल रही थी। राजासाहब ने उसके अंदर वो आग भड़काई थी जो आज से पहले उसने कभी महसूस ना की थी।उसने अपनी नाइटी अपने बदन से अलग की और बगल मे पड़े एक बड़े तकिये से चिपक कर अपनी चूत उस पे रगड़ने लगी।


आज के लिए बस इतना ही

 
फिर मिलते है एक नए अपडेट के साथ।
 
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से।
 
।। जय भारत ।।
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#48
दोस्तों एक और एपिसोड दिया है

आशा है की आज के सभी अपडेट्स आपको पसंद आयेंगे

आपकी राय और प्रतिक्रया अपेक्षित हैं
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#49
बेहद उम्दा प्रस्तुति।।
[+] 1 user Likes @@004's post
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#50
(09-02-2026, 11:19 AM)@@004 Wrote: बेहद उम्दा प्रस्तुति।।

शुक्रिया दोस्त
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#51
अगले अध्याय का इंतज़ार है
[+] 1 user Likes @@004's post
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#52
(09-02-2026, 03:00 PM)@@004 Wrote: अगले अध्याय का इंतज़ार है

जुरूर दोस्त
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#53
चलिए थोडा आगे चला जाये
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#54
अगली सुबह दोनो एक-दूसरे से नज़रें चुरा रहे थे,बातें भी बस कम भर हो रही थी।सभी लोग प्लेन मे बैठे और डील के बारे मे चर्चा होने लगी।मेनका अब राजपरिवार की ही नही बल्कि राजकुल ग्रूप की भी एक अहम सदस्य बन गयी थी।सारे ज़रूरी पायंट्स डिसकस किए जा रहे थे और मेनका का पैना दिमाग़ बारीक से बारीक ग़लती को पकड़ कर उसे सही कर रहा था।राजासाहब ने फिर से उसे एक ससुर की नज़रो से देखा।।।यह लड़की अगर ना होती तो शायद आज वो ये डील करने ना जा रहे होते।अपने दर्द को भूल कर मेनका ने केवल उनके परिवार के हित और मान का ध्यान रखा था।


फ्लाइट के बॉमबे पहुँचने तक दोनो बहुत हद तक नॉर्मल हो गये थे और नज़रें चुराना भी बंद कर दिया था।

एकएक बजे जर्मन पार्ट्नर्स एबेरहर्ट कॉरपोरेशन, के ऑफीस मे मीटिंग शुरू हो गयी।2 बजे लंच के लिए मीटिंग को रोका गया पर एक घंटे बाद सभी लोग वापस डील के पायंट्स फाइनल करने मे लग गये।शाम 7 बजे मीटिंग ख़तम हुई,"मिस्टर।सिंग।वी'वे आ डील।",जर्मन पार्ट्नर फ्रॅन्ज़ एबेरहर्ट ने राजासाहब से हाथ मिलाते हुए कहा,"।।और मिसेज़।सिंग,युवर फादर-इन-लॉ हॅज़ नोथिन्ग टू वरी अबौट एज लोंग एज यू आर विथ दा राजकुल ग्रूप।"

तारीफ सुन कर खुशी और शर्म से मेनका के गालों का रंग और गुलाबी हो गया।"लुकिंग फॉर्वर्ड टू वर्क विथ यू।",एबेरहर्ट ने झुकते हुए मेनका से हाथ मिलाया।राजासाहब को अपनी बहू पर बहुत गर्व और प्यार आ रहा था।

थोड़ी देर बाद ये डिसाइड हुआ कि सारे पेपर्स तैय्यार करके कल सवेरे एकएक बजे दोनो पार्टीस उन पर साइन कर ले।सेशाद्री साहब और बाकी स्टाफ के लोग वही से वापसी के लिए एरपोर्ट रवाना हो गये।अब मेनका अपने ससुर के साथ अकेली रह गयी।दोनो कार मे बैठ कर जुहू मे होटेल मेरियट की तरफ चल दिए।

कार की बॅक्सीट पे राजासाहब ने चुप्पी तोड़ी,"अगर आप हमारे साथ नही होती दुल्हन,तो शायद आज हम इस खुशी को महसूस नही कर रहे होते।"

"
अब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं।एक तरफ तो दुल्हन बोलते हैं और दूसरी तरफ ऐसी फॉरमॅलिटी भरी बातें करते हैं।"

"
नही,दुल्हन।हमे बोलने दीजिए।आपकी जगह कोई भी लड़की होती तो जो आपने झेला है,उसके बाद कभी भी राजपुरा मे नही रहती।हम आपके एहसानो का क़र्ज़।-"

"-
बस!अगर आपने ऐसी बातें की तो मैं ज़रूर राजपुरा छोड़ कर चली जाऊंगी।आप ऐसे क्यू कह रहे हैं,जैसे राजपुरा हमारा घर नही है।",उसने अपने ससुर का हाथ अपने हाथ से दबाया,"राजपुरा हमारा घर है और अपने घर के बारे मे सोचना कोई तारीफ की बात नही।"


जवाब मे राजासाहब बस प्यार भरी निगाहों से उसे देखते रहे।

तभी मेनका चिल्लाई,"ड्राइवर कार ज़रा साइड मे लो। हा..हा..इसी माल मे ले चलो।"

"
अभी शॉपिंग करनी है दुल्हन।हम कल करवा देंगे।अभी होटेल चल कर आराम करते हैं।"

"
नही,शॉपिंग तो अभी ही होगी,चलिए।",मेनका कार से उतरने लगी।

"
आप हो आइए हम यहा केफे मे बैठ कर आपका इंतेज़ार करते हैं।",
माल मे दाखिल होकर राजासाहब ने कहा।


अभी कहानी जारी है बने रहिये
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#55
दोस्तों एक छोटा सा अपडेट दे दिया है कृपया आपनी राय देते रहिये
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#56
"बिल्कुल नही,चलिए हमारे साथ।",मेनका ने उनका हाथ पकड़ा और खींचते हुए लिफ्ट मे ले गयी। मैत्री की रचना


दोनो वैसे ही एक दूसरे का हाथ थामे मेन'स सेक्षन मे दाखिल हुए।,"अरे,दुल्हन हमे कुछ नही चाहिए?",मेनका का मक़सद समझते हुए राजासाहब हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगे।

"बिल्कुल चुप।",मेनका ने और मज़बूती से अपने ससुर का हाथ पकड़ते हुए कहा।

"हाउ मे आइ हेल्प यू?",एक सेलेज़्गर्ल उनके पास आई।


मेनका उसके साथ राजासाहब के लिए कपड़े सेलेक्ट करने लगी।राजासाहब का हाथ अभी भी उसकी पकड़ मे था।वो उपर से तो मना कर रहे थे पर मन ही मन,उन्हे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था।इस तरह तो उनकी परवाह आज तक किसी औरत ने नही की थी।उनकी पत्नी उनका बहुत ख़याल रखती थी पर उस ख़याल मे अपनेपन से ज़्यादा ड्यूटी पूरी करने का एहसास था।और ऐसे सर्प्राइज़ देकर अचानक शॉपिंग करवाना।ये तो उन्होने सोचा भी नही था।दिल कर रहा था कि बस इसी तरह सारी उम्र उसका हाथ थामे खड़े रहें"।लीजिए ये सारे कपड़े ट्राइ करिए,जाइए"

जब राजासाहब ट्रायल रूम से बाहर निकले तो सेलेज़्गर्ल ने उनके हाथों से सारे कपड़े ले लिए,"युवर वाइफ लव्स यू ए लॉट सर और वॉट गुड टेस्ट हॅज़ शी गॉट!",राजासाहब एक पल को चौंक गये पर फिर तुरत उन्हे बात समझ मे आ गयी।।।ये मेनका को उनकी पत्नी समझ रही है।उन्होने बस हल्के से सर हिला दिया,वो लड़की भी कपड़े लेकर दूसरी ओर चली गयी।मेनका थोड़ी दूरी पर खड़ी कुछ कपड़े देख रही थी।"लगता है उसने ये बात नही सुनी।"

सारी शॉपिंग के बाद दोनो पेमेंट काउंटर पे पहुँचे।राजासाहब जेब से अपना वॉलेट निकालने लगे तो मेनका ने उन्हे रोक दिया,"नही।आप नही मैं पेमेंट करूँगी।ये आपको गिफ्ट है मेरी तरफ से।"

"पर दुल्हन।"
मैत्री की पेशकश

"श्ह,",उसने अपने होठों पे उंगली रखकर उन्हे चुप रहने का इशारा किया और अपने हॅंडबॅग से कार्ड निकाल कर काउंटर पे बैठे आदमी की तरफ बढ़ाया।

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आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ, तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत
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#57
बेहद खूबसूरत अपडेट भाई।।।

ऐसे ही धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ने दो।।।
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#58
(10-02-2026, 08:22 AM)@@004 Wrote: बेहद खूबसूरत अपडेट भाई।।।

ऐसे ही धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ने दो।।।

शुक्रिया दोस्त

बने रहिये कहानी के साथ
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#59
चलिए कहानी को थोडा आगे लेके जाते है
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#60
आशा है की आपको पसंद आएगी
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