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हाँ में सिर हिलाकर आरोही चल देती है।
राहुल के घर से निकलकर आरोही भारी कदमों से अपने फ्लैट में आई। जहाँ इंद्रावती और परिधि एक ओर सिर झुकाएँ बैठी थीं। उन्होंने आहट पर आरोही की ओर देखा तो, लेकिन आरोही ने उनकी आंखों में अपने लिए सहानुभूति ना देखते हुए। और वैसे भी उसका मन भारी था।
इसीलिए पैसे मिलने की बात भी उन दोनों से बता पाने की हिम्मत, वह नहीं जुटा पाई।
वह सीधे अपने कमरे में चली गई। और वहाँ वह बिस्तर पर लेटकर बीते दिनों की घटनाओं को याद करने लगी।
वह सोचती, “काश पहले जैसा सब होता, अब कल क्या होगा।”
साथ ही वह और भी बातें सोचने लगी। और बहुत कुछ उसके दिमाग में कल सुबह को लेकर चलने लगा था कि कैसे होगा, वह कैसे राहुल का सामना करेगा। और राहुल उसके साथ क्या-क्या कर सकता है।
राहुल के फ्लैट में सुबह आठ बजे आरोही ने धड़कते दिल से चाबी लगाई और फ्लैट खोला। आरोही घबरा रही थी कि राहुल ने छह बजे बोला था और अब आठ बज रहे हैं।
वह भीतर पहुँचती है और किसी सकुचाई हिरणी के जैसे राहुल को देखने की कोशिश करती है। राहुल उसे हाल में नहीं दिखता है। दरवाजा बंद करके आरोही आगे बढ़ने का सोच रही थी कि राहुल की आवाज आई,
“कहाँ रह गई थी, सुबह छह बजे बोला था ना?”
राहुल की कड़क आवाज से आरोही सिहर गई और बोली, “वो....वो... मैं... आज पहला दिन था तो थोड़ा डर.......”
“अच्छा तो इनको डर लग रहा था। डर काहें रही थी यहाँ कौन सा तुम्हें मारने या खाने वाला हूँ। वही तो करना है जो तुम करती हो। चोदी ही तो जाओगी। और शादी-शुदा हो तो चुदती तो रही ही होगी। या तुम्हारा पति नल्ला था। तुम्हें चोदा नहीं?” राहुल ने सीधा आरोही को तीखे लहजे में बिना उसके ओर देखे बोला।
राहुल के मुँह से चुदाई, और अपने पति के साथ सेक्स संबंधों की बात सुनकर। आरोही सन्न रह गई। उसके दिमाग में चल रहा था, “उफ्फ यह कितना गंदा बोलता है। यह तो हैवान ना बन जाए।” दूसरा उसे बहुत बुरा और डर भी लगा।
आरोही ने एक बार अपने पति के साथ ब्लू फिल्म देखा था। जिसमें बीडीएसएम और और रफ सेक्स था। आरोही को अब राहुल से थोड़ा डर लगने लगा। लेकिन वह कर भी क्या सकती थी। कौन सा वह अपने खुशी से यहाँ आई थी।
“यहाँ आओगी या वहीं खड़ी रहोगी। और तुमने बताया नहीं क्या तुम्हारा पति तुम्हें नहीं चोदता था क्या?” राहुल ने उसे पास बुलाया और उसकी ओर देखते हुए बोला।
राहुल हाल वाले गलियारे में था जहाँ उसके कमरे का दरवाजा था। राहुल ट्रैक पैंट और टी-शर्ट पहने हुए कुछ पी रहा था। पहले वह आरोही की ओर नहीं देख रहा था। लेकिन इस बार देखते हुए बुलाया।
आरोही बिना कुछ बोले धीरे-धीरे कदमों से उसकी ओर बढ़ रही थी। राहुल एकटक उसे देख रहा था। आरोही उसकी आंखों में ना देखते हुए इधर उधर देख रही थी। जैसे उसकी निगाहों से बच रही हो। शर्माई हुई कच्ची कली के जैसे।
आरोही राहुल से लगभग एक फुट की दूरी पर आकर रूक गई। और खड़ी हो गई।
“तुम देर से आई हो, अब इसके लिए तुम्हें सजा तो आज मिलेगी ही। अब इधर यहाँ मेरे पास आओ। वहाँ क्यों खड़ी हो? इतनी दूर से वहाँ खड़े-खड़े थोड़े चोद दूँगा। इधर आ मेरे पास।” राहुल ने आरोही को बोला।
राहुल की बात सुनकर आरोही शर्मा गई, और शर्म से अधिक अपमान और डर से एक सिहरन सी दौड़। वह आंखें झुकाए हुए और पास आ गई। लेकिन वह ऐसे कैसे राहुल से सट जाए। उसकी शर्म के कारण वह थोड़ा सा ही आगे बढ़ी।
अब राहुल ने अपने हाथ में पकड़े सिपर को डाइनिंग टेबल पर रखा और आरोही को हाथ पकड़कर आपनी ओर खींचा और आरोही गिरती हुई सी सीधे राहुल के सीने से आ लगी। और राहुल का एक हाथ आरोही को संभालने में और दूसरे हाथ से उसने आरोही के उभरे हुए नितंब को कसकर दबाया।
“आऽऽऽऽऽहहहहहहह...........उहहहहहहहहऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ…….” आरोही के मुँह से एक कराह निकली।
“बड़ी कड़क माल हो यार, इतने में ही कराहने लगी। गांड़ मरवाने में तो पूरा घर सिर पर उठा लोगी।” राहुल ने आरोही के नितंबों और कसकर मसलते हुए बोला।
“क्या यह मेरी गांड़.........” सोचते ही आरोही का दिमाग भन्ना गया। आरोही जैसी सिंपल लड़की जिसने शादी से पहले किसी का लिंग तक नहीं देखा था। और किस भी केवल फिल्मों में देखा था। सेक्स पहली बार पति के साथ ही किया था।
वह गुदा मैथुन जैसी टैबू चीज को सुनकर हिल गई। लेकिन बोली नहीं। और बोलती भी क्या।
राहुल ने आरोही को पकड़ा और सोफे पर बैठा लेकिन आरोही को खड़ा रखते हुए बोला, “घूम जाओ।” आरोही घूम गई और राहुल ने आरोही के नितंबों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा।
और जोर से मसलते ही एक बार फिर आरोही की हल्की चीख निकली, “आहहहहहहहह....”
“ज्यादा जोर दबा दिया। लगता है पहले किसी ने अच्छे से मसला नहीं है। अच्छा ही है पूरा मजा मुझे मिलेगा। सॉरी हाँ, जोर से दबा दिया। कंट्रोल नहीं हो रहा है बड़ी परफेक्ट कसी हुई गाँड़ है। अब आराम से करूँगा।”
यह बोलने के साथ ही राहुल ने, “पुच्चचचचच.......” करके आरोही के नितंब पर कपड़ों के ऊपर से एक चुंबन ले लिया।
और यह चूमना वैसे नहीं था। जैसे कोई पुच्ची हो। बल्कि यह वैसा था जैसा कभी चोट लगने पर लोग मुँह से सिकाई करते हैं। तो राहुल के मुँह से भाप की गर्माहट आरोही को अपनी गोलाईयों पर महसूस हुई।
और ऐसा करते ही ना चाहते हुए भी। आरोही, जिसे दर्द तो हो रहा था, लेकिन फिर भी एक गहरी सिसकारी निकल गई, “उँहहहहहहहहह........”
“सूँसूँसूँ..........” करते हुए राहुल ने आरोही के नितंबों को सूँघते हुए कहा, “यार खुशबू तो अच्छी है क्या गांड़ में भी साबुन लगाती है। बस देखना पादना नहीं।”
राहुल के द्वारा पादने कहने पर आरोही शर्माहट के साथ गनगनाहट में भर गई और अनजाने में एक मुस्कुराहट उसके चेहरे पर आ गई, “यह कितना गंदा बोलता है। मैं क्यों ऐसा करूँगी।
साथ ही आरोही को अपनी योनि में गीलापन भी महसूस होने लगा। अपने आप को कोसती हुई आरोही सोचती है कि यह ऐसा क्यों हो रहा है।
तभी राहुल आरोही को अपनी जाँघों पर बैठा लेता है और उसके गालों को अपने मुँह में भर लेता है और जोर से चूसने लगता है।
आरोही सिसियाने लगती है, “आऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ.....हाहाहा”
राहुल का दूसरा हाथ आरोही के सीने को मसलने लगता है। राहुल आरोही के गालों को काटता है। और कानों के पास जाकर बोलता है, “तेरी चूचियाँ और गांड़ बड़ी मस्त है जानेमन। तू तो पूरी तरह से रस से भरी है। लगता है तेरे नल्ले पति ने तुझे निचोड़ा नहीं।”
ऐसे बोलते हुए राहुल आरोही की कानों की लौ को चूसते हुए काटता है।
यह ऐसा तीसरी बार है की राहुल ने आरोही और उसके पति की सेक्स लाइफ पर कमेंट किया है। लेकिन राहुल की बातों को इस बार आरोही सुन कहाँ रही थी। उसका ध्यान कहीं और था।
वैसे भी कान की लर आरोही के लिए बहुत संवेदनशील जगह थी, आरोही के मुँह से सिसकारी छूटने लगी, “आम्म्हहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह................नहींहींहींहींहींहींहींहींहींहींहींहींहींहीं...”
फिर राहुल ने आरोही को घुमा लिया यानी अपनी गोद में उल्टा बिठा लिया आरोही का सीना राहुल के सीने पर लग रहा था। और तुंरत ही देर ना करते हुए राहुल ने आरोही के ओठों को चूसना शुरु कर दिया।
आरोही केवल गूँगूँगूँगूँ गूँ...... करती रही।
आज राहुल के दोनों हाथ एकदम बेकाबू होकर आरोही के नितंबों को ऐसे मसल रहे थे मानों वह उसका खिलौना हों। और हो भी क्यों ना इस समय राहुल, इस खूबसूर कली आरोही के नाजुक मखमली बदन का मालिक भी था।
राहुल ने लगभग पाँच मिनट बाद आरोही को ओठों को छोड़ने के बाद बोला, “चल नंगी हो जा, अपने संतरे दिखा। कुर्ती उतार।”
आरोही जो एक घरेलू महिला थी। उसके लिए यूँ ही किसी के लिए कुर्ती उतार देना आसान नहीं था। वह चुपचाप वैसे ही बैठी रही।
“उतार” राहुल ने थोड़ी तेज आवाज में बोला।
बिखरे हुए बाल और ओठों पर लगी थूक के साथ राहुल की गोद में बैठी आरोही जिसके नितंबों पर अभी राहुल का हाथ था। वह बहुत कामुक लग रही थी लेकिन एकदम शर्म और झिझक में सिकुड़ी भी थी, “जी....मैं....नहीं....”
राहुल ने इतना सुना और फिर बोला, “यह दूसरी गलती तूने की है। अब तो तेरी सजा पक्की। पहले तो तुझे छोड़ भी देता।”
और यह बोलने के साथ राहुल ने जोर लगाकर कुर्ती को आरोही के जिस्म से नोंचकर फेंक दिया। कुर्ती फट भी गई थी। और फिर उसने ब्रा खींचकर तोड़ दिया। आरोही के सुडौल स्तन राहुल के सामने आ गए। राहुल ने दोनों हाथों से स्तनों को भरा और जोर से दबा दिया।
“आऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽह...... मम्मी।” आरोही इतना ही बोली की राहुल ने दोबारा उसके ओंठ अपने मुँह में दबा लिए। और दोनों हाथों से आरोही के नितंबों पर थप्पड़ चलाने लगा।
आरोही जिसकी अपनी पति के साथ सेक्स लाइफ सामान्य थी। वह इस रफ सेक्स को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। उसकी आंखों से पानी आने लगा। वह रो रही थी। लेकिन एक और बात थी कि इसके साथ ही उसकी योनि भी गीली होती जा रही है।
आरोही का शरीर उसकी बात नहीं मान रहा था। और उधर राहुल का जुल्म बढ़ता जा रहा था।
“तू मेरी बात नहीं ना मानेगी। अब तुझे अच्छे से बताता हूँ।” यह बोलते हुए राहुल ने आरोही के मुँह पर थूका और फिर उसने आरोही के स्तनों को चूसना और काटना शुरु कर दिया। एक को चूसता काटता और दूसरे पर थप्पड़ मारता।
“आह.....आह..... मत करो दर्द होता है.....” आरोही इतना ही बोल पा रही थी। उसके आँखों से आंसू निकल रहे थे।
लेकिन फिर भी आरोही का शरीर हल्का पड़ता जा रहा था। जाने क्यों उसे सिहरन सी हो रही थी।
उधर राहुल ने उसकी बात अनसुनी करके अपना काम जारी रखा। राहुल को महसूस हो रहा था कि आरोही के स्तन के निपल कड़े हो रहे थे।
मन ही मन व्यंग भरी मुस्कुराहट के साथ राहुल ने आरोही के स्तनों से मुँह उठाया और बोला, “साली नखड़ा कर रही है, चूची कड़ी हो रही हैं। और कह रही है दर्द हो रहा है।”
और इसी के साथ उसने कपड़े के उपर से आरोही की योनि को मुट्ठी में पकड़ा तो उसमें गीलापन महसूस हुआ।
इस पर राहुल गुर्राते हुए बोला, “पूरा मजा ले रही है। और बोल रही है। दर्द हो रहा है। अभी तुझे बताता हूँ बात ना मानने का नतीजा।”
और उसने आरोही को उठाया और खड़ा करके के साथ एक झटके में लैंगिग और पैंटी उतार दी। और आरोही अब पुरी तरह से नंगी थी। और इसी के साथ बोला, “तू बहुत कमाल की चीज है। लेकिन आज तुझे सजा देना है। आगे तुझे और अच्छे से चखूँगा अब तो तू मेरी माल है। लेकिन आज तुझे सबक सिखाना है।”
“चल झुक जा। और अपनी टांगे चौड़ी कर।” राहुल ने कसकर आरोही के नंगे नितंब पर एक झापड़ मारते हुए बोला। और आरोही इस बार डर के मारे या फिर अनजाने वश झुक जाती है। और वह सोचती है कि राहुल अब क्या करेगा।
अचानक आरोही को अपने पिछवाड़े यानी गुदा द्वार पर कोई मोटी सी चीज महसूस होती है। और वह अचानक उछलना चाहती है, लेकिन राहुल ने उसे जकड़ा था।
“नहीं राहुल यह मत करो। प्लीज मान जाओ। मैंने वहाँ से कभी नहीं किया है। तुम.... आप जो कहेंगे वह मैं करूँगी” आरोही आने वाले दर्द और अपमान के भय से घबराई।
“घबरा मत, और उछल मत। तेरी गाँड़ तो मारनी ही है। तो आज तुझे सजा भी मिल जाएगी तो तुझे याद रहेगा। जितना उछलेगी उतना दिक्कत होगी।” राहुल ने गुर्राते हुए बोला।
आरोही की घबराहट के मारे हालत खराब थी। और जैसे ही राहुल ने अपना लिंग आगे करके तेज धक्का मारा वैसे ही आरोही की तेज चीख गूँजी,
“आऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ.................”
और तैसे ही आरोही की आंख खुल जाती है।
क्योंकि आरोही अपने कमरे में आकर सोचते-सोचते सो गई थी। और यह सारी घटना उसका एक सपना था।
“यह मैं कैसा सपना देख रही थी। और राहुल सीधे मेरी गाँड़.......” सपने के बारे में सोचते हुए भी गांड़ शब्द आते ही आरोही चौंक गई।
और खुद से बोलने लगी, “अरे यह मुझे क्या हो गया है। मैं गांड़ जैसे गंदे शब्द कैसे सोच ले रही हूँ। यह क्या हो रहा है। और यह क्या मेरे नीचे गीलापन कैसे?
छी, यानी मैं सपने राहुल के हाथो इतने गंदे तरीके से भोगी जा रही थी। और उल्टे मेरी योनि गीली हो रही है। जबकि पहले तो कभी मेरे पति के बारे में सोचकर भी इतनी गीली नहीं हुई। यह मुझे क्या हो रहा है।” आरोही खुद से शर्मिंदा थी।
यही सोचते हुए वह उठती है और उसे अपने शरीर से घिन्न सी आने लगती है। इसीलिए वह नहाने जाती है। और नहाते समय अपने नितंब और गुदा को ऐसे साफ करती है मानों राहुल का लिंग वहीं हो। और जाने क्यों ऐसा करते हुए उसे फिर हल्की सी उत्तेजना होने लगती है और उसी योनि गीली होने लगती है।
नहाकर निकलने पर आरोही। सोचती है कि वह अब परिधि दीदी और मम्मी से बात करे। आखिर कल तो वहाँ जाना ही है, बाकी जो होगा उसे भुगतना होगा।
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आगे क्या मोड़ आएगा, और क्या राहुल ऐसे ही रफ तरीके से पेश आएगा? देखते हैं।
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अपडेट आने में थोड़ा समय लग गया इसके लिए आप सब पाठकों से क्षमा प्रार्थी हैं। शेष अपने अमूल्य सुझाव अवश्य दें।
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नहाकर और दिमाग व मन को शांत आरोही परिधि और इंद्रावती के पास जाती है, और पूरी बात बताती है। ऐसे में इंद्रावती रोते हुए मना कर देती है। वहीं गुस्से में ही सही परिधि साथ चलने को तैयार हो जाती है।
मॉल से पहले दोनों बैंक पहुंचती हैं और सबसे पहले कर्जे की ईएमआई का चेक जमा करती हैं। और फिर मॉल पहुँचकर कपड़े खरीदती हैं। इसी बीच राहुल आरोही को फोन करके कुछ कपड़ों और ब्रा-पैंटी के बारे में बताता है।
पूरी शॉपिंग के बाद करीब पाँच हजार से अधिक रूपए बच जाते हैं। तो आरोही कहती है दीदी आपको कुछ लेना है। तो परिधि बोलती है, “देख आरोही मुझे देंह बेचकर नहीं सजना है। मुझे कुछ नहीं लेना है।”
आरोही कहती है, “दीदी बेघर होकर देंह बेचने से तो घर में रहते हुए बेच लेते हैं। आपके पास तो एक भी ठीक पैंटी तक नहीं बची है। क्या कहा जाए, हम तो इस हाल में हैं कि हम दोनों की चड्ढियाँ तक फटी हुई हैं। बस बाहरी कपड़ों का पर्दा ही है। उसी को फटने से बचाने की कोशिश कर रही हूँ।
नाराज मत होइए। बाबू के लिए कुछ ले लेते हैं, आइए।”
परिधि के ना चाहने के बावजूद भी आरोही उसके बच्चे के लिए कपड़े और कुछ खिलौने खरीद लेती है।
दोनों घर लौटती हैं और घर में कोई किसी से बात नहीं करता है। शाम को आरोही हॉस्पिटल भी जाती है अपने पति को देखती है। और कुछ पैसे जमा करती है। आरोही अमित को राहुल के यहाँ नौकरी की बात बताती है। लेकिन जाहिर है बाकी बातें छिपा जाती है।
अगले दिन सुबह का इंतजार करते-करते आरोही को नींद ही नहीं आती है। उसके दिमाग में वह सपना भी चल रहा था कि कहीं लेट हो जाने पर राहुल उसकी गांड़............ नहीं, नहीं याद करते हुए आरोही सहम सी जाती। लेकिन फिर भी एक सनसनी महसूस होती।
खैर सुबह करेक्ट छह बजे आरोही राहुल के घर की घंटी बजा देती है। और आरोही को दिमाग में चल रहे तमाम ख्यालों के कारण नींद ही नहीं आई। तो कुछ थकी-थकी सी थी ही।
“अरे तुम्हारे पास चाबी तो थी, घंटी बजाने की क्या जरूरत थी?” दरवाजा खोलते हुए राहुल ने पूछा।
“वो, अजीब सा लग रहा था। इसलिए घंटी बजा दी। आपको जगा दिया क्या?” आरोही ने अंदर आते हुए पूछा।
“नहीं, मैं तो पांच बजे ही जाग जाता हूँ। आओ तुम्हें लॉग बुक दिखाता हूँ।” कहते हुए अपने कमरे में जाता है पीछे-पीछे आरोही भी आती है। और वहाँ एक रजिस्टर होता है जिस राहुल टाइम डालता है और साइन करता है। और आरोही से भी यही करने के लिए कहता है।
उसके बाद उसे अगले कमरे में ले जाता है, और कहता है, “देखो यहाँ अलमारी तो तुम्हें पता ही होगी। घर ही तुम लोगों का है। तो इसी में तुम्हारे कपड़े रहेंगे। आकर यहीं बदल लेना। और हाँ दरवाजा बंद कर सकती हो लेकिन लॉक नहीं करोगी।”
बाहर निकलता हुआ राहुल बोल पड़ता है, “सुनो बाथरूम मेरे कमरे का ही इस्तेमाल करोगी। लेकिन बिना पूछे नहीं चाहें कुछ भी हो जाए। नहाई हो ना?” राहुल ने पूछा।
आरोही ने हाँ में सिर हिलाया। तब राहुल ने कहा, “गुड” और चला गया। थोड़ी देर में आरोही कपड़े बदलकर आती है। उसने मैरून रंग का ड्रेस पहना था उसकी चूचियाँ एकदम बाहर निकली हुई गजब ढा रही थीं।
“उधर झाड़ू, वैक्यूम क्लीनर और मॉप पड़ा है। शुरू हो जाओ। साथ ही किचन में भी देख और समझ लो। मैं अभी आता हूँ।” कहता हुआ राहुल बाथरूम में चला गया।
आरोही किचन का सामान देखने लगती है। राहुल ने घर को बहुत व्यवस्थित रखा हुआ था। किचन में हर नई मशीन मौजूद थी। टोस्टर से लेकर नए स्टाइल के चूल्हे तक जिनको उठाकर साफ किया जा सकता था।
आरोही फ्रिज में देख रही थी कि तभी पीछे से राहुल की आवाज आती है, “मुझे पता है तुम लोग शुद्ध शाकाहारी हो इसीलिए मैंने अंडे नहीं रखे हैं और फ्रिज की कल ही सफाई करके गंगाजल छिड़क दिया है।”
गंगाजल की बात पर आरोही को हंसी आ गई।
राहुल बोला है, “हंस लो, लेकिन हमें तो सबका ख्याल रखना ही पड़ता है।”
आरोही थोड़ी हैरान थी कि कल तक जो मुझे सेक्स स्लेव बनाने के लिए आमादा था। और सारे तमाशे रचे वह इतना नॉर्मल कैसे।
आरोही ने मन में कहा, “गिरगिट के जैसा है अभी देखो और दो दिन पहले देखो कैसा था।”
खैर राहुल के पास जैसे हर काम के लिए टेक्निकल साधन थे, उससे काम फटाफट हो गया। अभी बस पौने सात हुए थे और काम हो गया।
राहुल ने आरोही से कहा, “कुछ खाना-पीना हो तो पी सकती हो अभी तो मेरे एक्सरसाइज का टाइम है। मैं इसके बाद ही कुछ खाता हूँ।”
आरोही न कहा, “नहीं, इतनी जल्दी मैं भी कुछ नहीं खाती चाय तो पीती नहीं हूँ। ”
“हाँ, खूबसूरत लड़कियाँ चाय कहाँ पीती हैं, गैस जो हो जाती है,” राहुल ने कहा।
और बोला, “ठीक है, चाहो तो आराम करो या टीवी देखो। मुझे तो अभी यहाँ एक घंटा लगेगा।”
इतना कहकर उसने कान में लीड लगा ली और ट्रेडमिल पर दौड़ने लगा। आरोही के समझ में नहीं आया कि वह क्या करे। उसने तो सोचा था अभी उसके साथ राहुल जानवरों के जैसा सेक्स करेगा।
या जैसा उसके सपने हुआ था वैसे कुछ बलात्कार करेगा। लेकिन राहुल तो बहुत सामान्य था।
थोड़ी देर वहीं बैठने के बाद आरोही धीरे से पेपर उठाकर पढ़ने लगती है। और फिर धीरे-धीरे वहीं उंघने लगती है। उसकी झपकी तब टूटती है जब राहुल अपना एक्सरसाइज और योग पूरा करके आता है।
और उसे जगाता है, “आरोही, नींद आ रही थी तो पूछकर अंदर जाकर सो लेती। चलो उठो।”
राहुल उसे उठाता है। करीब सवा आठ बज गए होते हैं। “आओ कुछ देर ड्राइंगरूम में आराम करते हैं” यह कहकर वह ड्राइंगरूम में चल देता है।
पीछे-पीछे आरोही भी चलते हुए सोचती है, “ओह, तो अब यह कमीना वहाँ मुझे नोचने के लिए सोचकर ले जा रहा है।”
वहाँ चार रेक्लाइनर सोफे पड़े होते हैं। एक पर आरोही को बैठने के लिए कहकर राहुल दूसरे पर बैठ जाता है और टीवी चालू कर देता है। और आरोही से चैनल बदलते हुए टीवी पर चल रहे शो और न्यूज के बारे में बातें करने लगता है।
राहुल, आरोही से उसके परिवार और मायके की बातें करता है। और धीरे-धीरे उसकी बातों को सुनता रहता है। आरोही को भी अच्छा लगने लगता है।
बातें करते हुए आरोही को पेशाब लगने लगती है वह सोचती है, “अरे यार, बाथरूम जाना है। लेकिन इसने कहा था बिना इसके पूछे नहीं जाना है। कैसे पूछूँ शर्म लग रही है।
लेकिन बिना पूछे तो जा नहीं सकती हूँ।” आरोही ने सकुचाते हुए पूछा, “सर, मुझे बाथरूम जाना है।”
“अच्छा ठीक है चली जाओ लेकिन दरवाजा बंद मत करना, समझी?” राहुल ने कहा।
आरोही चुपचाप वहाँ से बाथरूम चली जाती है। और राहुल के कहे अनुसार बिना दरवाजा बंद किए पेशाब करती है। उसे अजीब सा डर और रोमांच तो लगता है। लेकिन उसे पेशाब तो करना ही था। फिर जब वह वापस आती है तो राहुल उसे किचन में चलने को कहता है।
और वहाँ राहुल वहाँ नाश्ता बनाने में आरोही की मदद करता है और दोनों फिर नाश्ता करते हैं। उसके बाद राहुल अपना कुछ काम करता है। और आरोही से सफाई करने के लिए बोल देता है।
करीब एक दो घंटे घर की सफाई में लगे और फिर राहुल ने उसे अपने पास बुला लिया। आरोही डर रही थी कि अब राहुल कुछ करेगा, लेकिन उसने कुछ भी नहीं किया।
वह कोई एनर्जी ड्रिंक पी रहा था। हर्बल जूस था उसने पूछा और आरोही को एक मग दे दिया। फिर वह आरोही के पास बैठकर उससे बातें करने लगा। राहुल के शांत होकर सुनते रहने से धीरे-धीरे आरोही अपने मन की गांठें खोलने लगी।
फिर इसी तरह से दोपहर के खाने का समय हो गया। और दोनों ने खाना बनाया और खाना खाया फिर बर्तन साफ करके लगा दिए। इतने में दो बज गए और आरोही के जाने का टाइम हो गया।
घर पर पहुँचते ही इंद्रावती और परिधि की सवालिया निगाहें आरोही को देख रही थीं। लेकिन आरोही ने कुछ नहीं कहा और उन लोगों ने भी कुछ पूछा नहीं। क्योंकि अब आरोही ने अपनी नियति से समझौता कर लिया था वे सब कुछ हार ही चुके थे।
ऐसे ही चार दिन बीत गए। आरोही आती और काम करती, राहुल भी साथ देता और दोनों बातें करते। धीरे-धीरे आरोही राहुल से बातों में खुलती जा रही थी। अपने मन के गुबार को वह बात करके निकाल रही थी।
पिछले चार दिनों से वह आती कुछ ऐसा ही रूटीन फॉलो होता। राहुल उससे बातें करता और उसकी बातों को सुनता। धीरे-धीरे आरोही अपने मन की बातें उससे कहने लगी।
ऐसे ही एकदिन आरोही आई और अपना काम करने लगी। बाद में नाश्ते के बाद और उसे पेशाब लगी। उसने राहुल से पूछा तो राहुल ने कहा अभी बाद में जाना पहले काम करो।
“राहुल ने उसे रोका क्यों? क्या कोई कारण है?” आरोही सोचती है।
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क्या कुछ नया घटने वाला है?
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Shandaar update and awesome story and waiting for next update
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(07-01-2026, 12:08 PM)BHOG LO Wrote: Update please
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आरोही के मन में वह सवाल बार-बार घूम रहा था—"राहुल ने रोका क्यों? क्या कोई कारण है?"
वह किचन में खड़ी थी, हाथ में सब्जी का चाकू पकड़े, लेकिन ध्यान कहीं और था। पेशाब की जरूरत अभी हल्की थी, लेकिन राहुल की बात ने उसे असहज कर दिया। वह सोच रही थी कि शायद राहुल भूल गया होगा, या फिर कोई मजाक कर रहा है।
आज आरोही ने नाश्ते में राहुल के कहने पर दो ग्लास जूस भी पी लिया था।
और राहुल ने एक बोतल बोतल स्प्रिंग वॉटर भी पिला दी थी। आरोही ने भी सोचा नहीं कि आज राहुल कुछ अधिक लिक्विड पिला रहा है। इसीलिए प्रेशर भी अधिक था।
लेकिन कोई भी पेशाब कितनी रोक पाएगा इसीलिए आरोही फिर पूछ पड़ती है, “मुझे बाथरूम जाना है?”
“क्या करने जाना है?” राहुल ने पूछा।
थोड़ा खीझते हुए लेकिन कंट्रोल करते हुए बोलती है, “पेशाब करना है।”
राहुल बिना उसकी ओर देखे हुए बोला, “बाद में............ बाद में...........”
आरोही को थोड़ा अजीब तो लगा, लेकिन फिर भी वह काम करने लगी कुछ देर बाद जब पेशाब का जोर बढ़ा तो उसने फिर राहुल से पूछने का सोचा,लेकिन राहुल का चेहरा याद आया—वह सख्त मुस्कान, जो कह रही थी कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
आरोही ने काम जारी रखा, सब्जियां काटती रही, लेकिन हर मिनट के साथ दबाव बढ़ता जा रहा था। उसके पेट में एक हल्की सी मरोड़ उठी, जैसे कोई गांठ बंध रही हो। "अभी तो बस थोड़ी सी लगी है, थोड़ी देर रुक सकती हूं," उसने खुद को तसल्ली दी।
लेकिन राहुल की आवाज कानों में गूंज रही थी—"अभी बाद में जाना, पहले काम करो।"
राहुल कमरे से बाहर आया, उसके हाथ में एक ग्लास था। वह हर्बल जूस था, वही जो वह रोज पिलाता था—हरे रंग का, थोड़ा कड़वा लेकिन एनर्जी देने वाला। वह आरोही के पास आया और ग्लास उसकी ओर बढ़ाया। "पी लो, काम में मदद मिलेगी। तुम थकी लग रही हो।"
आरोही ने ग्लास लिया, लेकिन मन में संकोच था। "सर, मुझे... पेशाब..." वह हकलाते हुए बोली, लेकिन राहुल ने बीच में ही काट दिया। "पी लो पहले। बात बाद में।"
आरोही ने जूस पी लिया, एक घूंट में आधा खत्म कर दिया। जूस का स्वाद मुंह में फैल गया, लेकिन उसके साथ ही पेट में तरल का एहसास हुआ।
"अब तो और जरूरत बढ़ जाएगी," वह सोच रही थी। राहुल मुस्कुराया—"अच्छी लड़की। अब काम खत्म करो।"
आरोही ने सब्जियां काटीं, लेकिन अब दबाव बढ़ रहा था। उसके पैर हल्के से हिल रहे थे, जैसे रोकने की कोशिश कर रही हो। राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "क्या हुआ? पैर क्यों हिला रही हो? कहीं मूत नहीं निकलने लगा?" राहुल ने हंसते हुए कहा, आवाज में एक ताना था।
आरोही का चेहरा लाल हो गया। "सर... ऐसी बातें...ना करें" वह शर्म, और परेशानी से बोली। लेकिन राहुल ने करीब आकर उसकी कमर पकड़ ली। "क्यों, मूतने में क्या शर्म? सब मूतते हैं। लेकिन तुम्हें तो रोकना है ना? देखते हैं कितनी देर रोक सकती हो। अभी थोड़ी देर में, मैं भी चल रहा हूँ तब मूत लेना।”
इतना सुनकर आरोही को थोड़ा सा डर लगा। क्योंकि राहुल के शब्दों से उसे थोड़ा सा भय लगा। “क्या यह मेरे को अपने साथ ले जाएगा।”
उसके शब्दों ने उसे और असहज कर दिया। तभी राहुल ने आरोही को घुमाया और उसके होंठों पर एक हल्का सा किस किया। आरोही की सांस रुक गई, लेकिन वह पीछे नहीं हटी। हट ही नहीं सकती थी, राहुल का डर भी तो था। राहुल के होंठ नरम थे, लेकिन किस में एक दबाव था।
"तुम्हारी आंखें कह रही हैं कि दबाव बढ़ रहा है। मूतने का मन कर रहा है ना?" राहुल ने किस तोड़कर कहा, और हंस दिया। आरोही ने सिर झुका लिया—"सर, प्लीज... जाने दो।" लेकिन राहुल ने मना कर दिया—"नहीं, अभी नहीं। पहले एक और ग्लास पी लो।" उसने दूसरा ग्लास भरकर दिया—इस बार पानी का, ठंडा और साफ। "पी लो, गर्मी तू तो अंदर से भी गर्म है, तभी ना गीली हो जाती है।"
आरोही ने मना करने की कोशिश की, लेकिन राहुल की आंखों में वह सख्ती थी। वह पी गई, हर घूंट के साथ पेट में तरल का बोझ बढ़ता जा रहा था। अब दबाव साफ महसूस हो रहा था—पेट फूल रहा था, और नीचे की मांसपेशियां कस रही थीं। राहुल आरोही को ड्राइंग रूम में ले गया। "बैठो, थोड़ी देर बातें करते हैं।"
आरोही बैठी, लेकिन पैर जोड़कर। राहुल उसके बगल में बैठा और उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। "क्या हुआ? परेशान लग रही हो। कहीं मूत तो नहीं दिया?" उसने फिर ताना मारा, और आरोही की जांघ को दबाया। आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, प्लीज। बहुत तोज लगी है।" राहुल हंसा—"लगी है? क्या लगी है? बोलो ना साफ-साफ।
आरोही, बोलो—मुझे पेशाब लगी है।" आरोही शर्म से मर गई। वह जानती थी किर राहुल चाहता है वह मूतना शब्द बोले लेकिन वह एक घरेलू औरत थी, पति के सामने भी ऐसी बातें नहीं करती थी।
"सर... मैं... नहीं कह सकती।" लेकिन पेशाब के जोर में बोल देती है, “सर, मुझे मूतना है।
ठीक है, अब जाऊं, बता दिया ना” आरोही ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
“अरे, इतनी भी क्या जल्दी मैंने तो सुना है कि लड़कियाँ घंटों मूतना रोक सकती हैं। तुम्हारी ही टंकी इतनी कमजोर क्यों है?” राहुल ने फिर सवाल किया।
“प्लीज जाने दो ना।।।” अनसुना सा करते हुए आरोही अपनी दोनों टांगों को भींचते हुए बोलती है।
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया और फिर से किस किया, इस बार गहरा। उसके होंठ आरोही के होंठों को चूस रहे थे, और हाथ उसकी कमर पर सरक रहा था। किस के बीच में वह बोला—"पूरा बोलो, नहीं तो जाने नहीं दूंगा।"
आरोही की आंखों में बेबसी दिखने लगी—"सर, मुझे... मूतने का जोर लगी है। लेकिन योनि से पेशाब निकल जाएगा।"
राहुल संतुष्ट होकर हंसा—"अच्छी लड़की। लेकिन अभी नहीं। थोड़ी देर और रोको। देखते हैं तुम्हारी कैपेसिटी।" वह आरोही को फिर से जूस पिलाने लगा—इस बार एक छोटा ग्लास, लेकिन आरोही के लिए वह जहर जैसा था। "पी लो, हेल्दी है।" आरोही ने पी लिया, लेकिन अब दबाव असहनीय होने लगा था। उसके पैर कांप रहे थे, और वह बार-बार स्थिति बदल रही थी।
राहुल उसे टीज कर रहा था—"देखो, तुम्हारी जांघें कस रही हैं। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो? कितनी क्यूट लग रही हो। अगर लीक हो गया तो? तुम्हें ही पोंछा लगाना होगा।"
उसने आरोही को गोद में बिठा लिया और उसके नितंबों को मसलने लगा। "तुम्हारी गांड कितनी टाइट है। मूत रोकने से और कस गई है।" आरोही की हालत खराब हो रही थी। दबाव अब पीक पर था—पेट फूल चुका था, और नीचे की मांसपेशियां थक रही थीं। वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... जाने दो। मैं नहीं रोक सकती। दर्द हो रहा है।"
राहुल ने उसे किस किया, गहरा और लंबा। उसके होंठ आरोही के गले पर सरक गए, और वह काटने लगा। "थोड़ी देर और। तुम्हें सिखाना है कंट्रोल।"
आरोही रोने को हो गई—"सर, बहुत ज्यादा है। लीक हो जाएगा। प्लीज, मिन्नत करती हूँ।"
राहुल ने आखिरकार मान गया “ओफ्फोह........... तेरी टंकी वाकई खराब है। चल तुझे मूता कर लाता है” कहते हुए राहुल ने आरोही का हाथ थामा और लेकर बाथरूम ले जाने लगा।
“तुझे पेशाब रोकना भी सिखाना होगा। तेरे पति ने केवल तेरी मारी ही है। तुझे ढंग से मूताया भी नहीं।”
आरोही राहुल की भाषा और साथ चलने पर चौंक गई—"क्या? सामने? नहीं सर... मैं नहीं कर सकती। शर्म आती है।"
राहुल की आंखें सख्त हो गईं—"या तो सामने, या वापस कमरे में। और अगर लीक हुआ तो सजा मिलेगी।"
आरोही की आंखों में शर्म और परेशानी थी, लेकिन दबाव इतना था कि वह मान गई। राहुल उसे बाथरूम में ले गया। दरवाजा खुला रखा। और बोला "चलो, उतारो सलवार।"
आरोही हिचकिचाई—"सर... प्लीज, अकेले..." लेकिन राहुल ने धमकी दी—"वापस ले जाऊँ? बाहर बैठकर रोको?"
“वैसे तेरा मूतना है, मूतना है सुनकर मुझे भी पेशाब लग आई है। ऐसा कर तू तब तक सलवार खोल और कच्छी नीचे कर तब तक मैं मूत लेता हूँ।”
यह बोलकर राहुल अपना लोअर नीचे करके पेशाब करने लगा। और वहीं आरोही भौंचक्की सी खड़ी रह गई। एक मिनट के लिए तो वह पेशाब का जोर भूल गई। राहुल का लिंक उसके सामने था। उसने आँखें घुमा ली, लेकिन एक नजर में उसे वह बड़ा लगा।
तभी राहुल अपना पेशाब करना खत्म करके आता है। और आरोही को वैसे ही खड़े देखकर बोलता है, “मुझे पता था तुम्हें मूतना नहीं था। फर्जी बहाना कर रही थी। चलो यहाँ से।”
तभी आरोही को मानो होश आता है, “नहीं, मुझे बहुत जोर से प्रेशर आ रहा है। लेकिन आप जाएंगे तभी ना करूँगी।”
“क्यों मैंने कौन से तेरे छेद में कुछ डाल रखा है कि मेरे रहते नहीं मूत पाओगी। वैसे कुछ डलवाने का मन है क्या?” राहुल ने मुस्कुराते हुए पूछा।
आरोही ने सिर झुका लिया। वह कभी पति के सामने भी पूरी नंगी नहीं हुई थी, लेकिन अब मजबूरी थी। उसने धीरे से सलवार का नाड़ा खोला, और नीचे सरकाया। फिर पैंटी—सफेद, बढ़िया ब्रांड की राहुल के पैसों की।
राहुल देख रहा था, मुस्कुराते हुए। "कितनी प्यारी पैंटी लाई हो।” आरोही ने पैंटी उतारी, और टॉयलेट पर बैठने जा रही थी। लेकिन राहुल ने कड़क आवाज में रोका, “फर्श पर मूतना है। मेरे सामने मुँह करके।" आरोही चौंक गई लेकिन और क्या कर सकती थी। वह राहुल के सामने मुँह करके बैठ गई।
लेकिन मूत नहीं पा रही थी—शर्म से। राहुल ने ताना मारा—"क्या हुआ? मूत नहीं आ रही? या मेरे सामने शर्म आ रही है?”
खुलक बोलो बोलो, 'सर, मुझे मूतना है आपके सामने।'"
आरोही रोने लगी थी—"सर... प्लीज।" लेकिन दबाव ने जीत ली। उसने वह कहा, और फिर मूतना शुरू किया। आवाज गूंजी—सर्रर्रर्र,........................।
राहुल मुस्कुरा रहा था,"देखो, कितना सुरीला मूतती हो। पूरी बाढ़ ला दी है। अरे मूतकर मजा भी आ रहा होगा।"
आरोही शर्म से मर गई, क्योंकि एक चैन की सांस या आराम का अहसास तो पेशाब करने के साथ हो ही रहा था। क्योंकि काफी देर से रोकी हुई थी। पेशाब के बाद राहुल ने कहा—"पूरी फर्श भर मूत मारा चल अब साफ करो खुद को। दिखाओ कैसे करती हो।"
आरोही बिना पानी के कैसे अपनी योनि धोती? और राहुल के सामने कैसे उठे? आरोही कोई ट्रेंड कॉल गर्ल तो थी नहीं जो फैंटेसी पूरी करने के लिए कुछ भी कर दे।
वह झिझकते हुए राहुल से फिर मिन्नत करती है, “सर, पानी चाहिए, आप चले जाइए मैं साफ करके आती हूँ करके।”
लेकिन राहुल नहीं माना, और डांटते हुए कहा, “आज नहीं तो कल मुझसे गांड़ मरवानी है, और बड़ी शर्मिली बन रही हो?” राहुल की बात सुनकर आरोही की बची खुची हिम्मत भी टूट गई और वह उठी और पानी लाकर पहले अपनी योनि धुली और फिर उठी और पहले पैंटी फिर सलवार ऊपर करने लगी।
राहुल देखता रहा। और आरोही को पास बुलाया, और उसकी योनि पर हाथ रख दिया और बोला, “चेक कर रहा हूँ कि साफ है या नहीं। लेकिन यह तो गीली है चिपचिपी सी? यह क्यों?” आरोही इस पर क्या बोलती लेकिन राहुल की हरकत के कारण वह गीली हो ही गई थी।
लेकिन राहुल ने और ह्यूमिलिएट किया "कोई नहीं जानेमान एक दिन चिकनी करके लेंगे तेरी।"
आरोही ने कपड़े पहने, और बाहर आई। राहुल ने उसे गोद में बिठाया थोड़ा सहलाया—"अच्छी लड़की हो। अब काम करो।"
लेकिन आरोही आज की इस घटना से बहुत थक गई थी। वह सोच रही थी कि अभी आगे क्या होना है? आगे क्या करेगा?
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O bhai, Gazab hone wala hai aage to...
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bahanchodd,gazab likha hai yaar
itni achi hindi or story ,umeed nahi thi
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अब आखिरकार, आरोही बाथरूम से बाहर निकली, उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। शर्म और थकान से उसका शरीर भारी हो गया था। अभी-अभी जो हुआ था, वह उसके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पेशाब रोकने की वह लंबी जद्दोजहद, और राहुल की टीजिंग, और फिर उसके सामने विवशता में पेशाब करना—सब कुछ उसके मन में घूम रहा था।
इस पूरी घटना ने आरोही को तोड़ दिया था। लेकिन एक सवाल जो उसे खाए जा रहा था कि वह गीली क्यों हो गई? यह सोचते हुए,उसकी आंखें अभी भी नम थीं, और चेहरा लाल। लेकिन कहीं अंदर एक अजीब सी राहत भी थी। दबाव खत्म हो गया था, पेट का निचला हिस्सा और योनि के आस-पास क्षेत्र हल्का लग रहा था।
वह चुपचाप किचन की ओर बढ़ी, लेकिन राहुल, जो उसे किसी शिकार की तरह देख रहा था। उसने कड़क आवाज में उसे रोक लिया। "इधर आओ, आरोही। थोड़ी देर आराम कर लो।" लेकिन उसकी आवाज में अब पहले जैसी कठोरता नहीं थी, बल्कि एक हल्की सी नम्रता थी। वह चाहें दिखावे की ही रही हो। आरोही ने सिर झुका लिया और उसके पास गई। क्योंकि विरोध तो पहले ही क्या करती, उसने तो जानबूझकर कांट्रैक्ट किया था कि वह नोंची जाएगी। लेकिन आज की घटना से उसके मन में शर्म की जगह टूटे हुए डर ने ले ली। तो चली गई।
राहुल सोफे पर बैठा था, उसने आराम से आरोही का हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया। जैसा स्पष्ट है कि आरोही विरोध करने की हालत में नहीं थी, लेकिन शर्म कैसे रोक ले। तो थोड़ी असहज थी लेकिन वह हिली नहीं। वह चुपचाप बैठ गई। उसके नितंब राहुल की जांघों पर टिक गए, और राहुल का हाथ उसकी कमर पर सरक गया।
"अब बताओ, कैसा लगा?" राहुल ने कान के पास फुसफुसाते हुए पूछा। आरोही की सांस तेज हो गई। उसने बोला “क्या?”
“अरे वही मूतना और धार मारते हुए मेरे सामने मूतना। वैसे मूतती बड़ा सुरीला हो। कभी अमित ने तुम्हें मुतवाया है।” राहुल बोला
आरोही कहती है "सर... प्लीज, मत पूछो।"
लेकिन राहुल ने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर किया। "नहीं, बताओ। पूरा डिटेल से। कैसे मूता तुम? शुरू से बताओ। और फिर बताना कि तुम्हारे पति ने तुम्हारी सुरीली मूताई कितनी बार देखी सुनी है।"
आरोही की आंखें चौड़ी हो गईं। वह एक सिंपल घरेलू औरत थी, ऐसी बातें तो कभी सोची भी नहीं थीं। एक आध बार पेशाब को लेकर पति के साथ हंसी मजाक हुआ है। लेकिन ऐसे सामने पेशाब करना और पति का उसको अपने सामने मूतने के लिए कहना तो सोचा भी नहीं था। लेकिन, इस समय आरोही, राहुल की गोद में बैठी, उसकी मजबूत बाहों में कैद, वह अपनी स्थिति और राहुल के वर्चस्व से विवश थी।
"सर... मैं... नहीं बोल पाउँगी..... बहुत शर्म आती है।"
राहुल ने हंसकर कहा, "शर्म? अभी तो मेरे सामने धार मारकर मूती हो, एकदम सरसराते हुए। बोलो, नहीं तो फिर सोच लेना। अभी यहीं सजा मिलेगी। गांड़ खोलकर खड़ी रहना पड़ेगा। क्या ज्यादा शर्म भरा होगा?"
राहुल के डोमिनेंस से पहले ही टूट चुकी आरोही इस धमकी के बाद तो कुछ कह ही नहीं पाई। और आरोही ने आंखें बंद कर लीं और हकलाते हुए शुरू किया।
"मुझे... बहुत जोर लगी थी।”
“क्या लगी थी? टट्टी लगी थी? चुदाई या गांड़ मराई की चुल्ल लगी थी, क्या लगा था? ठीक बोल।” राहुल थोड़ा भारीपन से बोला।
आरोही की तो गांड़ ही फट गई।
“जी पेशाब लगी थी। बहुत....जोर से लगी थी... पेट फूल रहा था। मैं... बाथरूम में गई। आपने कहा था... सलवार उतारो। मैंने... नाड़ा खोला, सलवार नीचे सरकाई। फिर... पैंटी।"
राहुल की आंखें चमक रही थीं।
"और?” चूँकि आरोही थम गई थी तो राहुल ने बोला।
“फिर आपने कहा की मेरे सामने पेशाब करो। तो मैंने किया।”
“मैंने पेशाब का कब बोला था? और तूने कैसे मूता यह तो बताया ही नहीं। ठीक से बता?” राहुल ने आरोही के नितंब के एक भाग को गोल-गोल मसलते हुए कसकर दबाया और पूछा।
“आआआआआआआ...............उचचचचचच...... इइइइइससससससससस.......। सर आपने मूतने को बोला था। तो मैंने मूता।” आरोही सिसकते हुए, घबराते हुए सारा बोल गई। जो शायद होश में कभी सोच नहीं पाती। वह आज एक दूसरे पुरुष के सामने बोलना पड़ रहा है।
“चूत में कैसा लग रहा था?"
आरोही का चेहरा और लाल हो गया।
"टाइट... टाइट थी। दबाव से... कस गई थी। मैं... आपके सामने बैठी फर्श पर। आप डांट रहे थे... जल्दी करो। फिर... मैंने... मूतना शुरू किया। छर-छर की आवाज आई। बहुत... राहत मिली। लेकिन शर्म... बहुत शर्म आई। आपने कहा सुरीला मूतती हूँ।"
राहुल संतुष्ट होकर मुस्कुराया। "गुड गर्ल। बहुत अच्छे पूरा बताया। देखो, कितना आसान था। चूत है मूतने और चुदने के लिए ही।"
और उसने आरोही के होंठों पर अपना होंठ रख दिया—एक लंबा, गहरा किस। उसके होंठ आरोही को चूस रहे थे, जीभ अंदर सरक रही थी। आरोही की सांसें रूक रहीं थीं, लेकिन वह हिली नहीं। किस पांच मिनट तक चला, राहुल के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे।
फिर वह रुका और बोला, "चलो अब खाना बनाओ।"
आरोही उठी, उसके पैर अभी भी कमजोर थे। लेकिन वह किचन में गई। थकान थी, लेकिन राहत भी। "कम से कम पति के सामने मूतने का भूल गया," वह सोच रही थी, और सोचने में मूत जैसे शब्द आने पर वह चौंक गई।
वह सब्जियां काटने लगी, चूल्हा जलाया। राहुल अंदर से देख रहा था। थोड़ी देर बाद वह आया, हाथ में फिर एक ग्लास जूस। "पी लो, थकान उतरेगी।"
आरोही ने देखा—वही हर्बल जूस, लेकिन इस बार ज्यादा।
"सर... अभी-अभी तो..." लेकिन राहुल ने ग्लास थमा दिया।
"पी लो। काम में मदद मिलेगी।" आरोही ने पी लिया, तीन घूंट में पूरा खत्म। जूस का तरल पेट में गया, और वह जानती थी कि इससे क्या होगा। लेकिन अभी तो सब ठीक था। वह खाना बनाती रही—दाल, सब्जी, रोटी।
राहुल पास में खड़ा था, उसे देखते हुए। "तुम्हारी कमर कितनी पतली है। काम करते हुए अच्छी लग रही हो।"
वह आरोही की कमर छूने लगा, लेकिन आरोही ने हल्के से हटाया। "सर... काम करने में परेशानी होगी।"
राहुल हंसा—"ठीक है। लेकिन एक और ग्लास पी लो। गर्मी है।" उसने जूस का ग्लास दिया, ठंडा। आरोही ने पी लिया, लेकिन अब पेट में तरल का एहसास होने लगा।
"फिर से?" वह सोच रही थी।खाना बनाते-बनाते आधा घंटा बीत गया। आरोही ने दाल बनाई, सब्जी भुनी। लेकिन अब पेशाब की हल्की सी जरूरत महसूस हो रही थी।
"अभी नहीं, रुक सकती हूं," वह खुद से बोली। राहुल फिर आया, इस बार एक छोटा ग्लास जूस का। "पी लो, लास्ट वाला।" आरोही ने मना किया—"सर, बस। पेट भरा है।" लेकिन राहुल ने जोर दिया—"पी लो, नहीं तो सजा मिलेगी।"
आरोही डर गई और पी लिया। अब दबाव बढ़ने लगा। पेट फूल रहा था, और नीचे, योनि और मूत्रग्रंथी की मांसपेशियां कस रही थीं। वह काम तेज करने लगी, लेकिन राहुल उसे परेशान करने लगा।
"क्या हुआ? फिर पैर हिला रही हो? कहीं फिर से मूतने का जोर तो नहीं लगी?"
उसने चिढ़ाते मारते हुए आरोही के निचले पेट पर हाथ रखा और हल्के से दबाया।
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत करो। हां, लगी है।"
राहुल हंसा—"फिर से? कितनी जल्दी लग जाती है तुम्हें। रोक लो। खाना पहले बनाओ।"
आरोही ने काम जारी रखा, लेकिन अब पैर जोड़कर खड़ी थी। राहुल उसके पीछे आया, कमर पकड़ी—"देखो, तुम्हारी गांड हिल रही है। मूत रोकने की कोशिश कर रही हो क्या?" वह नितंबों को दबाया और मसलने लगा।
आरोही—"आह... सर, प्लीज।" इसी खाना बन गया। आरोही ने प्लेट लगाई, लेकिन अब दबाव अपने चरम पर था।
वह मिन्नत करने लगी—"सर, प्लीज... बाथरूम जाने दो। बहुत जोर की लगी है।"
राहुल ने मुस्कुराकर कहा—"तू इतना मूतती हो? चलो आज कुछ तूफानी करते हैं।"
यह कहकर राहुल ने किनार पड़े स्टूल की ओर इशारा किया। और बोला—“इस पर पैर रखकर सिंक में चढ़ जा और मूत।”
आरोही चौंक गई—"क्या? सिंक में? नहीं सर... गंदा हो जाएगा।"
लेकिन राहुल ने डांट दिया—"करो वही। नहीं तो सजा।" आरोही की आंखों में विवशता साफ दिखती थी। मजबूरी में वह सिंक के पास गई, सिंक काउंटर वाला था। वैसे पेशाब का दबाव इतना था कि लीक होने वाला था। उसने एक बार मिन्नत की दृष्टि से राहुल की ओर देखा। लेकिन राहुल के तेवर कड़े थे। आरोही ने राहुल के तेवर देखकर डरते हुए अपने पैर स्टूल पर रखकर सिंक के टॉप पर चढ़ गई। फिर राहुल ने सलवार खोलने का इशारा पूरी सख्ती के साथ किया।
"जल्दी करो!" राहुल डांटा। आरोही ने सलवार का नाड़ा खोला, नीचे सरकाया। फिर पैंटी। राहुल देख रहा था—"अच्छे से नीचे गांड़ दिखनी चाहिए? ऐसे कैसे मूतेगी।"
आरोही झुकी, निशाना बनाया। क्योंकि उसके मन में कहीं पेशाब बाहर ना गिरे। और सिंक में पेशाब करना वह भी लड़की के लिए कितना मुश्किल है। भले ही सिंक काउंटर वाली हो। आरोही कैसे करके अपने घुटने मोड़ती है, गांड़ पीछे की तरफ निकलती है। उसे डर भी लग रहा था कि सिंक टूट ना जाए या वह पीछे गिर ना जाए। जगह बहुत थोड़ी सी थी।
तभी राहुल पीछे आया, उसकी नितंब सहलाने लगा—"कितनी कसी हुई है।"
आरोही की सिसकारी निकली—"उंह... सर, मत..."
लेकिन तभी राहुल ने उसके एक नितंब एक थप्पड़ मारा। और थप्पड़ पड़ते ही आरोही—आहहहह..............सीसीसीसीसीसी..........।
जोर से सिसकारी भरती है और उसकी योनि से पेशाब—छर्र-छर्र........ सुर्रर्रर्रर्र.......... की संगीत से सिंक में गिर रहा था।
आरोही की सेक्स लाइफ भी समान्य से कम थी। लाइट बंद करके लेट जाना और टांग उठाकर धक्के खा लेना। आरोही को याद भी नहीं थी कि कभी उसके पति ने उसे पूरा नंगा किया भी था या नहीं। यहाँ तो वह इस समय दूसरे पुरुष के सामने नितंब लटकाए हुए सिंक में पेशाब कर रही थी। और अपने को शीशे में देख रही थी।
राहुल टीज कर रहा था—"देखो, कितना मूत रही है। जानेमन तुम्हारी मूत तो शराब जैसी है। अगर शराब पीता तो तेरी मूत मिलाकर पीता। चूत से कितना मूत निकाल रही है। गंदी लड़की।"
राहुल के शब्द आरोही को जाने क्यों उत्तेजक से लग रहे थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्यों उसके स्तन हल्के से कड़े हो गए जबकि उसे गुस्सा होना चाहिए था। वह अपने लाल चेहरे को शीशे में देखकर और जोर से सिसकारी भरती है—आहहहहहहहह......
राहुल उसके नितंब पर हाथ रखे-रखे ही पेशाब की धार की ओर देखते हुए, मुस्कुराता है। और बोलता—“वाह बड़ी तेज धार मारती हो। देखो कहीं सिंक में छेद ना कर देना। नहीं तो पैसे काट लूँगा।”
बहुत देर से रूके हुए पेशाब, और इस छेड़-छाड़ के कारण आरोही को दोहरा आनंद और चैन आता है जिससे उसकी आंखें हल्की सी मुंद जाती हैं। और वह राहुल की बात सुनकर चौंककर नीचे देखती है। फिर शर्मा सी जाती है।
“वाह बड़ा विश्वास है अपनी धार पर। वैसे बड़ा अच्छा मूतती हो। लेकिन लगता है तुम्हारे पति ने तुम्हारी ठुकाई ठीक से नहीं की है। नहीं तो छेद और चौड़ा होता। क्यों क्या कहती हो?” राहुल ने आरोही के नितंब को सहलाते हुए पूछा।
आरोही एकदम चुप्प थी।
तभी आरोही—“आह नहीं............... सीसीसीसीसीससीसी..................” अचानक से आरोही जोर से आह और सिसकारी लेते हुए हल्का सा डगमगाई और उसकी पेशाब की थोड़ी सी धार जमीन और राहुल के पैर पर गिरी।
असल में हुआ यह था कि आरोही से पूछते हुए राहुल ने नितंब सहलाते हुए पता नहीं कब अपनी एक उंगली आरोही के पिछले छेद यानी गुदा में घुसा दी।
इसी के चलते आरोही डगमगा गई और पेशाब की धार नीचे गिर गई। अब आरोही जैसी लड़की जिसकी सेक्स लाइफ यूँ ही थी। उसे एक ही दिन में किसी दूसरे के सामने पेशाब करना और फिर अब गुदा में ऊँगली। बहुत ज्यादा था। इसीलिए रोकते-रोकते यह हो गया। वैसे राहुल ने संभाल लिया था नहीं तो आरोही गिर भी सकती थी।
राहुल—“अरे जानेमन, मेरे ऊपर ही मूत दिया। गांड़ में उंगली से यह हाल है, लंड डालने पर तो पूरे घर में कूदती फिरोगी।” और राहुल ने यह बोलते हुए भी गुदा से उंगली निकाली नहीं बल्कि घुमाना शुरू कर दिया।
आरोही की हालत तो इतनी खराब हो गई थी कि वह पैरों में गिरी सलवार और पैंटी तक नहीं उठा पाई। फिर राहुल ने आरोही की गांड़ से ऊँगली निकाली और बोला—”अपनी चूत तो धो लो। या मूत टपकाती रहोगी।”
आरोही गुदा में ऊँगली की इस घटना से इतना हड़बड़ा गई कि वह फौरन सिंक पर चढ़कर अपनी योनि धोती है। और फिर आकर बिना किसी शर्म के पैंटी सही करके पहनती है। राहुल कपड़ा लाकर पैर और जमीन पोंछने के लिए कहा।
आरोही चुपचाप सफाई कर देती है। आरोही जब जाने लगती है तो राहुल—“अरे जानेमन तेरी गांड़ में मेरी ऊँगली गई थी। इसे भी धुल दे।” आरोही—उफ यह कितना गंदा बोलता है। क्या जरूरत थी ऊंगली करने की—यह सोचते हुए आरोही की योनि गीली भी हो जाती है।
फिर हाथ धुलवा देने के बाद राहुल आरोही को कहता है कि बाथरूम जाना चाहे तो जा सकती है। राहुल अपना काम करने लगता है।
आरोही—“अब बाथरूम भेज रहा है। सारी गंदगी करने के बाद। इसके दिमाग में ऐसे ख्याल कैसे आते हैं किसी लड़की को परेशान करने के।”
फिर आरोही पहले सिंक और फिर बाथरूम की फर्श साफ करती है। और अपनी गुदा को भी साफ करती है, लेकिन ऊंगली की बात सोचकर उसे झुरझुरी सी आने लगती और फिर एक वर्जित उत्तेजना उसमें संचार होने लगता है। जिसे आरोही झटकना चाहती है।
फिर आगे और कुछ नहीं होता है। जिससे इन घटनाओं से थकी आरोही को चैन मिलता है।
लेकिन आगे क्या हो सकता है यह उधेड़-बुन उसके दिमाग में चलती है। क्योंक राहुल तो फेटिश और यौन मामलों का एक्सपर्ट था और आरोही एकदम कुछ नहीं जानने वाली। अब आरोही जैसे फल का कितना रस राहुल कैसे-कैसे निकालेगा और चखेगा यही शायद कहानी है।
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(09-01-2026, 08:41 AM)momass Wrote: bahanchodd,gazab likha hai yaar
itni achi hindi or story ,umeed nahi thi
Thanks Dear, I hope you like the story, and new update, too.
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very nice story , hindi gazab ki likhte ho yaar ,bina mistake
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ऽऽऽअगले दिन की सुबह आरोही के लिए एक नई शुरुआत जैसी लग रही थी, लेकिन उसके मन में कल की घटनाएं अभी भी घूम रही थीं।
पेशाब की वह विवशता, राहुल की टीजिंग, सिंक में वह अपमानजनक पल—और सबसे बढ़कर उसकी गुदा में ऊँगली डालना। यह सब कुछ उसे रात भर सोने नहीं दिया था। लेकिन साथ ही जब भी वह गुदा में ऊँगली डालने को याद करती उसकी योनि में चिकनाई सी बढ़ने लगती। सच कहें तो वह मन ही मन राहुल से कम अपने शरीर से अधिक व्यथित थी।
वह सुबह छह बजे राहुल के फ्लैट पर पहुँची, चाबी से दरवाजा खोला, और लॉग बुक में एंट्री की। राहुल पहले से ही उठा हुआ था, लेकिन आज उसका मूड अलग लग रहा था। वह ट्रेडमिल पर नहीं था, बल्कि किचन में कॉफी बना रहा था।
आरोही को देखते ही उसने मुस्कुराकर कहा, "आ गई मैडम जी। आज थोड़ा लेट हो गई? कोई बात नहीं, आओ, कॉफी पियो।"
उसकी आवाज में एक नरमी थी, जो आरोही को चौंका गई। वह आमतौर पर सख्त या टीज करने वाला होता था, लेकिन आज जैसे कोई दोस्त बात कर रहा हो। नहीं तो जैसे ही लेट सुना तो आरोही को लगा की आज तो गई। आरोही ने हल्के से सिर हिलाया और पास गई। राहुल ने उसे कॉफी का मग थमाया और उसके कंधे पर हाथ रखा।
"कैसी हो आज? कल थक गई थी ना? सिंक में मूतना आसान थोड़े होता है। बैठो, थोड़ी देर बातें करते हैं।" मुस्कुराते हुए राहुल ने कहा। और सहलाते हुए उसे बैठाया।
आरोही सोफे पर बैठ गई, थोड़ा सा बनावटी मुस्कान बिखेरी लेकिन उसके मन में संदेह था। "क्या आज कुछ अलग होगा?" वह सोच रही थी।
राहुल उसके बगल में बैठा और बोला, "तुम्हारी आंखों में थकान दिख रही है। घर पर सब ठीक है? अमित कैसा है? सब ठीक चल रहा है ना?" उसकी बातों में एक असली चिंता लग रही थी। एक हाथ आरोही को कंधे को थामे हुए थे।
आरोही ने कॉफी का कप पकड़ा था और बोली, "जी, ठीक हैं। डॉक्टर कह रहे हैं कि आशा तो है लेकन बाकी तो आप जानते ही हैं। लेकिन... पैसे की टेंशन है। जो आपको पता ही है।"
राहुल ने उसका हाथ पकड़ लिया, नरमी से। और चूमते हुए बोला "अब चिंता क्यों करनी है। मैं हूँ ना। तुम बस ऐसे ही गुड गर्ल बनी रहो। तुम्हारे परिवार को कुछ नहीं होने दूँगा। चाची जी, अमित सबको संभाल लेंगे। तुम बस मेरा कहना मानती रहो, सब ठीक हो जाएगा।"
उसके शब्द आरोही के दिल को छू गए। इतने दिनों से वह जो संघर्ष कर रही थी, उस पर राहुल के शब्द मानों किसी बांध को तोड़ दिए हों। राहुल की यह बातें उसे भावुक कर रही थीं। आंखे छलछला आईं "धन्यवाद सर... आपने बहुत मदद की है।"
राहुल ने उसे गले लगा लिया, जैसे कोई प्रेमी हो। "जानेमन, रो मत। मैं हूँ ना। बस उस परिधि की गांड़ में बहुत चर्बी है। एक दिन उतारेंगे अच्छे से।" परिधि के बारे में यह अच्छा तो नहीं लगा लेकिन जैसी हिकारत से परिधि उसे देखती थी उसे बहुत बुरा नहीं लगा।
वह राहुल के गले लगी थी राहुल का सहारा उसे महसूस हो रहा था। और राहुल भी पूरे हक से उसे चिपकाए हुए था। अब धीरे-धीरे उसका हाथ नीचे सरक गया—आरोही के गुदाज से कसे हुए नितंबों पर।
प्यार भरे व्यवहार से गदगद आरोही इस हमले से हल्की सी सिहर उठी। "सर..." वह बहुत हल्के से बोली, लेकिन राहुल ने अनसुना कर दिया। वैसे भी आरोही रोकने के लिए शायद कह भी नहीं रही थी।
उसने आरोही को उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया, और उसके चेहरे को और बालों को सहलाते हुए बातें जारी रखी।
"तुम्हारा परिवार कितना अच्छा रहता अगर अमित-सुमित दोनों मूर्खता ना करते। उनको कितना समझाया था। और परिधि का बच्चा कैसा है? उसे चीजें मिल गईं थीं?"
उसके शब्द प्यार भरे थे, लेकिन उसके हाथ अब फिर से आरोही के नितंबों को मसल रहे थे, लेकिन हल्के-हल्के, हौले-हौले। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार, एक प्यार की गर्माहट जैसे। आरोही को अच्छा लग रहा और नहीं भी लग रहा था—जहाँ दिमाग कहता कि यह अपमानजनक है। लेकिन साथ ही एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। उसके शरीर में एक गर्माहट फैलने लगी, जो वह रोक नहीं पा रही थी।
"सर... मत करो," वह धीरे से बोली, लेकिन राहुल ने हंसकर कहा, "क्यों? तुम्हारी गांड कितनी सॉफ्ट है। एकदम शेप में मुझे पसंद है। अमित ने लगता है अच्छे से रगड़ा नहीं है।"
और फिर एक हल्का सा थप्पड़ मारा। चटऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ...............
आरोही की सिसकारी जोर से निकली, लेकिन जैसे किसी मस्ती में हो—"उंहऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ..."
लेकिन वह कुछ नहीं बोली। राहुल की बातें जारी थीं—"तुम्हारी सास भी अच्छी हैं। तुम्हें बचाने के लिए लड़ने आ गईं थीं। इस मामले में भाग्यशाली हो। घर के मर्द नालायक निकले। कोई नहीं मर्द की सारी जरूरत के लिए मैं हूँ ना।"
उसके शब्द आरोही को अच्छा अहसास दे रहे थे, जैसे कोई अपना हो। लेकिन वह सुन नहीं रही थी। लेकिन साथ ही थप्पड़ जारी थे—हल्के, लेकिन बार-बार। हर थप्पड़ के साथ आरोही का शरीर सिहरता, और नीचे एक गीलापन महसूस होने लगा।
"यह क्या हो रहा है? अच्छा क्यों लग रहा है?" वह खुद से लड़ रही थी, लेकिन योनि गीली हो रही थी।
अब राहुल ने आरोही को गोद से उतारा। तो आरोही को कुछ समय तक अजीब सा लगा मानों कोई मस्ती छूट गई हो। उसे होश ही नहीं आया। राहुल ने चुटकी बजाई और बोला, "चलो, आज साथ में ब्रेकफास्ट बनाते हैं। तुम बताओ, क्या बनाओ?" वह प्यार से पूछ रहा था, लेकिन आरोही के नितंबों पर हाथ फिरा रहा था।
आरोही ने कहा, "परांठे?" राहुल ने हाँ में सिर हिलाया कहा, और आरोही काम करने लगी। राहुल वहीं खड़ा होकर उससे बातें करता रहा। लेकिन बीच-बीच में आरोही की गांड सहलाता और हल्के से थप्पड़ मारता।
"तुम कितनी क्यूट हो, आरोही। तुम्हारे हर अंग में नशा है। तुम्हारे चूतर सहलाने और गांड़ का नशा ही अलग है। तुम्हारे जैसे लड़की मिली, तो जिंदगी बन जाए।"
उसके शब्द आरोही के दिल को छू रहे थे, लेकिन नितंब और उसकी गोलाइयों को सहलाते, कुचलते दबाते और थप्पड़ मारते हाथ उसे असहज कर रहे थे। हर छुअन के साथ एक झनझनाहट होती, और योनि में गीलापन बढ़ता।
आरोही को अच्छा भी लग रहा था—लेकिन यह गलत था, लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था। वह काम करती रही, लेकिन मन में गिल्ट था।
"अमित अगर होश में आया और उसे पता चलेगा तो क्या कहेगा?" लेकिन वह कर भी क्या सकती थी। वह बंधन में तो थी ही। नाश्ता बन गया और दोनों वापस हॉल में आ गए।
थोड़ी देर बाद राहुल का फोन बजा। वह बात करने लगा—किसी बिजनेस कॉल था।
"हां, भाई, डील फाइनल है। आज शाम मीटिंग रख लो।"
वह फोन पर बात करता रहा, लेकिन आरोही को देखकर इशारा किया—पास आओ। आरोही पास गई, और राहुल ने उसे अपनी ओर खींच लिया। लेकिन गोद में नहीं बैठाया बल्किल खड़ा रखा। फोन कान पर लगाए, वह आरोही की लैगिंग को नीचे सरकाने लगा।
आरोही एकदम से चौंक गई—"सर... क्या कर रहे हो?" वह धीरे से डरते हुए बोली।
लेकिन राहुल ने आंख से इशारा किया—चुप। आरोही एकदम चुप। लैगिंग नीचे सरक गई, और गोरे चिकने नितंब नंगे हो गए। राहुल ने उन उभारों को सहलाना शुरू कर दिया—धीरे-धीरे, उंगलियां गोलाई पर घुमाते हुए।
आरोही की सांस तेज हो गई। "आहऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ... ऊँहहहहऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ..."
लेकिन वह हिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाई, या क्या पता आरोही के पैर इस आनंद से रूक गए?
राहुल बात करता रहा—"हाँ, प्रॉफिट मार्जिन 20% रखेंगे।"
लेकिन हाथ नितंब पर था, सहला रहा था। कुछ देर बाद आरोही की सिसकारी निकलने लगी—"उंह... आह..." हल्की, लेकिन अनकंट्रोल।
राहुल ने एक बार देखा, मुस्कुराया, और सहलाना जारी रखा। आरोही की योनि अब पूरी गीली हो गई थी, वह बहने लगी। वह महसूस कर रही थी। शर्म से उसका चेहरा लाल था, लेकिन सनसनी रोक नहीं पा रही थी। और वैसे भी अब उसकी योनि भी नंगी थी।
फोन खत्म होने के बाद राहुल ने आरोही को झुकाया। "झुको तो जरा, देखूं तेरे इस मस्त खजाने को।"
आरोही हिचकिचाई—"सर... प्लीज, शर्म आती है।"
लेकिन राहुल ने जोर दिया—"झुको।"
आरोही कमर से झुक गई, अब नितंब खुलकर ऊपर की ओर आ गए। राहुल ने दोनों भागों को दोनों हाथों में संभाला और दबाया—जोर से।
आरोही की चीख निकली—"आऽऽह..." लेकिन साथ ही एक सुखद सिहरन। राहुल ने देखा—"कितनी परफेक्ट है। लगता है तेरी पति ने तेरी गांड़ का स्वाद नहीं लिया है।"
आरोही को झुककर गांड दिखाने में बहुत शर्म महसूस हो रही थी—और ऊपर से उसके पति का नाम और स्वाद लेना। उसको अजीब लग रहा था, लेकिन उत्तेजना भी थी।
"यह क्या हो रहा है? मैं क्यों एंजॉय कर रही हूं?" गिल्ट बढ़ रहा था। राहुल ने उसे सीधा किया और गले लगा लिया।
"जानेमन, घबराओ। मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं होने दूँगा। बस ऐसे ही गुड गर्ल बनी रहना।"
फिर राहुल ने जैसे कुछ हुआ ही नहीं, बातें शुरू कीं। "तुम्हारे घर की समस्या सॉल्व कर दूंगा।" उसके शब्द प्यार भरे थे, भावनात्मक सहारा दे रहे थे।
आरोही अब भावुकता में रो पड़ी—"सर, आप बहुत अच्छे हो। लेकिन... यह सब..." राहुल ने चुप कराया—"शशश... चिंता मत करो। मैं तुम्हारा हूं। परिवार जैसा।"
आरोही को अच्छा लग रहा था—किसी ने इतना सहारा दिया था। लेकिन गीली योनि उसे याद दिला रही थी। शाम हुई, आरोही घर गई—गीली योनि, भावनात्मक अहसास, और गिल्ट के साथ। "अमित, माफ करना। लेकिन राहुल... क्या वह वाकई अच्छा है?" वह सोच रही थी, रात भर नींद नहीं आई।
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