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कंचन
#21
ठीक है भाभी पीठ पर ही मालिश कर देता हूँ." मैं भाभी की टाँगों के बीच में थोड़ा आगे खिसक कर उनकी पीठ पर मालिश करने लगा. ऐसा करने से मेरा तना हुआ लॅव्डा भाभी की चूत से जा टकराया. अब मेरे तने हुए लंड और भाभी की चूत के बीच छ्होटी सी कछि थी. भाभी की चूत का रस जालीदार कछि से निकाल कर मेरे लंड के सुपारे को गीला कर रहा था. मैं भाभी की चुचिओ को दबाने लगा और अपने लंड से भाभी की चूत पर ज़ोर डालने लगा. लंड के दबाव के कारण कछि भाभी की चूत में घुसने लगी. बारे बारे नितंबों से सिमट कर अब वो बेचारी कछि उनके बीच की दरार में धँस गयी थी. भाभी के मुँह से उत्तेजना भरी सिसकारियाँ निकलने लगी. मुझसे ना रहा गया और मैने एक ज़ोरदार धक्का लगाया. मेरे लंड का सुपरा भाभी की जालीदार कछि को फाड़ता हुआ उनकी चूत में समा गया.

"आआआः…….ऊवू….उई माआ. ऊऊफ़.. यह क्या कर दिया रामू. तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. छोड़ मुझे, मैं तेरी भाभी हूँ. मुझे नहीं मालिश करवानी" लेकिन भाभी ने हटने की कोई कोशिश नहीं की. मैने थोड़ा सा दबाव डाल कर आधा इंच लंड और भाभी की चूत में सरका दिया.

" अया …ऊवू तेरे लवदे ने मेरी कछि तो फाड़ ही दी, अब मेरी चूत भी फाड़ डालेगा." मेरे मोटे लवदे ने भाभी की चूत के छेद को बुरी तरह फैला दिया था.

" भाभी आप तो कुँवारी नहीं हैं. आपको तो लंड की आदत है?"[Image: 9hrorp.gif]




" अया… मुझे आदमी के लंड की आदत है घोड़े के लंड की नहीं. चल निकाल उसे बाहर." लेकिन भाभी को दर्द के साथ मज़ा आ रहा था. उसने अपने चूतरो को हल्का सा उचकाया तो मेरा लंड आधा इंच और भाभी की चूत में सरक गया. अब मैने भाभी की कमर पकड़ के एक और धक्का लगाया. मेरा लंड कछि के छेद में से भाभी की चूत को दो भागों में चीरता होता हुआ 5 इंच अंडर घुस गया.

" आआआआआः… आ….आ. मर गयी ! छोड़ दे रामू फॅट जाएगी. ऊवू…धीरे राजा. अभी और कितना बाकी है? निकाल ले रामू, अपनी ही भाभी को चोद रहा है."

मैं भाभी की चुचिओ को मसल्ते हुए बोला" अभी तो आधा ही गया है भाभी, एक बार पूरा डालने दो फिर निकाल लूँगा."



[Image: 9hrow2.gif]
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



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#22
आगे ......

" हे राम! तू घोड़ा था क्या पिछले जनम में. मेरी चूत तेरे मूसल के लिए बहुत छ्होटी है" मैने धीरे धीरे दबाव डाल कर तीन इंच और अंडर पेल दिया.

" भाभी, मेरी जान थोड़े से चूतर और उँचे करो ना." भाभी ने अपने भारी नितंब और उँचे कर दिए. अब उनकी छाती चटाई पर टिकी हुई थी. इस मुद्रा में भाभी की चूत मेरा लंड पूरा निगलने के लिए तैयार थी. अब मैने भाभी के चूतरो को पकड़ के बहुत ज़बरदस्त धक्का लगाया. पूरा 10 इंच का लवदा भाभी की चूत में जड़ तक समा गया.[Image: 9hrp2n.gif]

" आआआआआआआः………. मार डाला…….ऊवू .…अया…..अघ….उई…सी….आ… अया….. ओईइ….. माआ……कितना जालिम है रे..आह….ऐसे चोदा जाता है अपनी भाभी को? पूरा 10 इंच का मूसल घुसेड दिया?" भाभी की चूत में से थोड़ा सा खून भी निकल आया. अब मैं धीरे धीरे लंड को थोड़ा सा अंडर बाहर करने लगा. भाभी का दर्द कम हो गया था और वो भी चूतरो को पीछे की ओर उचका कर लंड को अंडर ले रही थी. अब मैने भी लंड को सुपारे तक बाहर निकाल कर जड़ तक अंडर पेलना शुरू कर दिया. भाभी की चूत इतनी गीली थी की उसमे से फ़च फ़च की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज़्ने लगी.

" तू तो उस सांड़ की तरह चढ़ कर चोद रहा है रे अपनी भाभी को. ज़िंदगी में पहली बार किसी ने ऐसे चोदा है. अया…..आ..एयेए.ह…..ऊवू..ओह."

अब मैने लंड को बिना बाहर निकाले भाभी की फटी हुई कछि को पूरी तरह फाड़ कर उनके जिस्म से अलग कर दिया ओर छल्ले की तरह कमर से लटकते हुए पेटिकोट को उतार दिया. भाभी अब बिल्कुल नंगी थी. चूटर उठाए उनके चौड़े नितंब और बीच में से मुँह खोले निमंत्रण देती, काली लंबी झाटों से भरी चूत बहुत ही सुन्दर लगा रही थी. भारी भारी चूतरो के बीच गुलाबी गांद के छेद को देख कर तो मैने निश्चय कर लिया कि एक दिन भाभी की गांद ज़रूर लूँगा. बिल्कुल नंगी करने के बाद मैने फिर अपना 10 इंच का लवदा भाभी की चूत में जड़ तक पेलना शुरू कर दिया. भाभी की चूत के रस से मेरा लंड सना हुआ था. मैने चूत के रस में उंगली गीली करके भाभी की गांद में सरका दी.

" उई मा…… आ …क्या कर रहा है रामू?"[Image: 9hrp5g.gif]

" कुच्छ नहीं भाभी आपका ये वाला छेद दुखी था कि उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा. मैने सोचा इसकी भी सेवा कर दूं." ये कह कर मैने पूरी उंगली भाभी की गांद में घुसा दी.

"आआआः…ऊवू…अघ… धीरे राजा, एक छेद से तेरा दिल नहीं भरा जो दूसरे के पीछे पड़ा है." भाभी को गांद में उंगली डलवाने में मज़ा आ रहा था. मैने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए. भाभी शायद दो तीन बार झाड़ चुकी थी क्योंकि उनकी चूत का रस बह कर मेरे अमरूदों को भी गीला कर रहा था. 15- 20 धक्कों के बाद मैं भी झाड़ गया और ढेर सारा वीर्य भाभी की चूत में उंड़ेल दिया. भाभी भी इस भयंकर चुदाई के बाद पसीने से तर हो गयी थी. वीर्य उनकी चूत में से बाहर निकल कर टाँगों पर बहने लगा. भाभी निढाल हो कर चटाई पर लेट गयी.

" रामू आज तीन महीने तड़पाने के बाद तूने मेरी चूत की आग को ठंडा किया है. एक दिन मैं ग़लती से तेरा ये मूसल देख बैठी थी बस उसी दिन से तेरे लंड के लिए तडप रही थी. काश मुझे पता होता कि खड़ा हो कर तो ये 10 इंच लंबा हो जाता है."

" तो भाभी आपने पहले क्यों नहीं कहा. आपको तो अच्छी तरह मालूम था की मैं आपकी चूत का दीवाना हूँ. औरत तो ऐसी बातें बहुत जल्दी भाँप जाती है."

" लेकिन मेरे राजा, औरत ये तो नहीं कह सकती कि आओ मुझे चोदो. पहल तो मर्द को ही करनी पड़ती है.और फिर मैं तेरी भाभी हूँ."

" ठीक है भाभी अब तो मैं आपको रोज़ चोदुन्गा."

" मैं कब मना कर रही हूँ? एक बार तो तूने चोद हिदिया है. अब क्या शरमाना?इतना मोटा लंबा लंड तो बहुत ही किस्मत से नसीब होता है. जब तक तेरी शादी नहीं हो जाती तेरे लंड का मैं ख्याल करूँगी. इसको मोटा ताज़ा बनाए रखने के लिए मैं तेरे लंड की रोज़ मालिश कर दूँगी. अच्छा अब मुझे जाने दे मेरे राजा, तूने तो मेरी चूत का बॅंड बजा दिया है." उसके बाद भाभी उठ कर नंगी ही अपने कमरे में चली गयी. जाते समय उनके चौड़े भारी नितंब मस्ती में बल खा रहे थे. उनके मटकते हुए चूतर देख दिल किया कि भाभी को वहीं लिटा कर उनकी गांद में अपना लवदा पेल दूं.

अगले दिन मेरा बॉडीबिल्डिंग कॉंपिटेशन था. मैने ये प्रतियोगिता इस साल फिर से जीत ली. अब मैं दूसरी बार कॉलेज का बॉडी बिल्डिंग चॅंपियन हो गया. मैं बहुत खुश था. घर आ कर मैने जब भाभी को यह खबर सुनाई तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा.
03 Nov 2014

" आज तो जश्न मनाने का दिन है. आज मैं तेरे लिए बहुत अच्छी अच्छी चीज़ें बनाउन्गि. बोल तुझे क्या इनाम चाहिए?"

" भाभी आप जानती हैं मैं तो सिर्फ़ इसका दीवाना हूँ, ये ही दे दीजिए"मैं भाभी की चूत पर हाथ रखता हुआ बोला.

" अरे वो तो तेरी ही है जब मर्ज़ी आए ले लेना. आज तू जो कहेगा वही करूँगी."

" सच भाभी ! आप कितनी अच्छी हो." यह कह कर मैने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ भाभी के रसीले होंठों पर रख दिए. मैं दोनो हाथों से भाभी के मोटे मोटे चूतर सहलाने लगा और उनके मुँह में अपनी जीभ डाल कर उनके होठों का रस पीने लगा. ज़िंदगी में पहली बार किसी औरत को इस तरह चूमा था. भाभी की साँसें तेज़ हो गयी. अब मैने धीरे से भाभी की सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार सरक कर नीचे गिर गयी.

" रामू, तू इतना उतावला क्यों हो रहा है ? मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही. पहले खाना तो खा ले फिर जो चाहे कर लेना. चल अब छोड़ मुझे." यह कह कर भाभी ने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की. मैने कुर्ते के नीचे हाथ डाल कर भाभी के छूटरो को उनकी सॅटिन की कछि के उपर से दबाते हुए कहा,

" ठीक है भाभी जान, छोड़ देता हूँ, मगर एक शर्त आपको माननी पड़ेगी."

" बोल क्या शर्त है ?"

" शर्त यह है की आप अपने सारे कपड़े उतार दीजिए, फिर हम खाना खा लेंगे." मैं भाभी के होंठ चूमता हुआ बोला.

" क्यों तू किसी ज़माने में कौरव था जो अपनी भाभी को द्रौपदी की तरह नंगी करना चाहता है?" भाभी मुस्कुराते हुए बोली. मैं भाभी की कछि में हाथ डाल कर उनके चूतरो को मसल्ते हुए बोला,

" नहीं भाभी आप तो द्रौपदी से कहीं ज़्यादा खूबसूरत हैं, और मैने अपनी प्यारी भाभी को आज तक जी भर के नंगी नहीं देखा."

" झूट बोलना तो कोई तुझसे सीखे. कल तूने क्या किया था मेरे साथ? बाप रे ! सांड़ की तरह ……. ……..भूल गया?"

" कैसे भूल सकता हूँ मेरी जान, अब उतार भी दो ना." यह कहते हुए मैने भाभी का कुर्ता भी उपर करके उतार दिया. अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और छ्होटी सी कछि में थी.

"अच्छा तेरी शर्त मान लेती हूँ लेकिन तुझे भी अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे." और भाभी ने मेरी शर्ट के बटन खोल कर उतार दिया. इसके बाद उन्होने मेरी पॅंट भी नीचे खींच दी. मेरा लौदा अंडरवेर को फाड़ने की कोशिश कर रहा था. भाभी मेरे लौदे को अंडरवेर के उपर से सहलाते हुए बोली,

" रामू, ये महाशय क्यों नाराज़ हो रहे हैं?"

" भाभी नाराज़ नहीं हो रहे बल्कि आपको इज़्ज़त देने के लिए खड़े हो रहे हैं."

" सच ! बहुत समझदार हैं." यह कहते हुए भाभी ने मेरा अंडरवेर भी नीचे खींच दिया. मेरा 10 इंच का लौदा फंफना कर खड़ा हो गया. भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गयी और वो बारे प्यार से लौदे को सहलाने लगी. मैने भी भाभी की ब्रा का हुक खोल कर भाभी की चुचिओ को आज़ाद कर दिया. फिर मैने दोनो निपल्स को बारी बारी से चूमा और भाभी की कछि को नीचे सरका दिया. गोरी गोरी जांघों के बीच में झांतों से भरी भाभी की चूत बहुत ही सुन्दर लग रही थी.

" अब तो मैने तेरी शर्त मान ली. अब मुझे खाना बनाने दे." ये कह कर वो किचन की ओर चल पड़ी. ऊफ़ ! क्या नज़ारा था ! गोरा बदन, घने चूतरो तक लटकते बाल, पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितूंब, सुडोल जंघें और उन मांसल जांघों के बीच घनी लंबी झांतों से भरी फूली हुई चूत. चलते वक़्त मटकते हुए चूतर और झूलती हुई चूचियाँ बिल्कुल जान लेवा हो रही थी. भाभी किचन में खाना बनाने लगी. मैं भी किचन में जा कर भाभी के चूतरो से चिपक कर खड़ा हो गया. मेरा 10 इंच का लौदा भाभी के चूतरो की दरार में फँसने की कोशिश करने लगा. मैं भाभी की चूचिओ को पीछे से हाथ डाल कर मसल्ने लगा.

" छोड़ ना मुझे, खाना तो बनाने दे." भाभी झूठ मूठ का गुस्सा करते हुए बोली और साथ ही में अपने चूतरो को इस प्रकार पीछे की ओर उचकाया की मेरा लौदा उनके चूतरो की दरार में अच्छी तरह समा गया और चूत को भी छ्छूने लगा. भाभी की चूत इतनी गीली थी की मेरा लौदे के आगे का भाग भी भाभी की चूत के रस में सन गया. इतने में भाभी कुच्छ उठाने के लिए नीचे झुकी तो मेरे होश ही उड़ गये. भाभी के भारी चूतरो के बीच से भाभी की फूली हुई चूत मुँह खोले निहार रही थी. मैने झट से अपने मोटे लौदे का सुपरा चूत के मुँह पर रख कर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. मेरा लौदा चूत को चीरता हुआ 3 इंच अंडर घुस गया.
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#23
आआ…….ह. क्या कर रहा है रामू? तुझे तो बिल्कुल भी सबर नहीं. निकाल ले ना." लेकिन भाभी ने उठने की कोई कोशिश नहीं की. मैने भाभी की कमर पकड़ के तोड़ा लंड को बाहर खींचा और फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया. इस बार तो करीब 8 इंच लौदा भाभी की चूत में समा गया.

"आ…आ..आ…आ..आ ..वी मया..आआ.. मर गयी, छोड़ ना मुझे. पहले खाना तो खा ले." भाभी सीधी हुई पर लौदा अब भी चूत में धंसा हुआ था. मैने पीछे से हाथ डाल कर भाभी की चूचिया पकड़ ली.[Image: 9hrpjg.gif]

" भाभी, आप खाना बनाइए ना आपको किसने रोका है?" उसके बाद भाभी उसी मुद्रा में खाना बनाती रही और मैं भी भाभी की चूत में पीछे से लौदा फँसा कर भाभी की पीठ और चूतरो को सहलाता रहा.

" चल रामू खाना तैयार है, निकाल अपने मूसल को." भाभी अपने चूतर पीछे की ओर उचकते हुए बोली. मैने भाभी के चूतर पकड़ के दो तीन धक्के और लगाए और लौदे को बाहर निकाल लिया. मेरा पूरा लंड भाभी की चूत के रस से सना हुआ था. भाभी ने टेबल पर खाना रखा और मैं कुर्सी खैंच कर बैठ गया.

" आओ भाभी, आज आप मेरी गोद में बैठ कर खाना खा लो."

" हाई राम तेरी गोद में जगह कहाँ है? एक लंबी सी तलवार निकली हुई है." भाभी मेरे खड़े हुए लंड को देखती हुई मुस्कुरा कर बोली.
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#24
आगे ......

" भाभी आपके पास म्यान है ना इस तलवार के लिए." यह कहते हुए मैने भाभी को अपनी गोद में खींच लिया. भाभी की चूत बुरी तरह से गीली थी और मेरा लौदा भी चूत के रस में सना हुआ था. जैसे ही भाभी मेरी गोद में बैठी मेरा खड़ा लंड भाभी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया.

" एयाया…..आआहह..ऊऊहह …..अया .. कितना जंगली है रे तू. 10 इंच लंबा मूसल इतनी बेरहमी से घुसेड़ा जाता है क्या ?"

" सॉरी भाभी चलो अब खाना खा लेते हैं." हमने इसी मुद्रा में खाना खाया. खाना खाने के बाद जब भाभी झूठे बर्तन रखने के लिए उठी तो मेरा लंड फ़च की आवाज़ के साथ उनकी चूत में से बाहर आ गया. बर्तन समेटने के बाद भाभी आई और बोली,

" हां तो देवर्जी अब क्या इरादा है ?"

" अपना इरादा तो अपनी प्यारी भाभी को जी भर के चोदने का है." मैने कहा.[Image: 9hrq8v.gif]

" तो अभी तक क्या हो रहा था ?"

" अभी तक तो सिर्फ़ ट्रैलोर था. असली पिक्चर तो अब स्टार्ट होगी." ये कहते हुए मैने नंगी भाभी को अपनी बाहों में भर के चूम लिया और अपनी गोद में उठा लिया. मैं खड़ा हुआ था , मेरा विशाल लंड तना हुआ था और भाभी की टाँगें मेरी कमर से लिपटी हुई थी. भाभी की चूत मेरे पैट से चिपकी हुई थी और मेरा पैट भाभी की चूत के रस से गीला हो गया था. मैने खड़े खड़े ही भाभी को थोड़ा नीचे की ओर सरकाया जिससे मेरा तना हुआ लंड भाभी की चूत में प्रविष्ट हो गया. इसी प्रकार मैं भाभी को उठा कर उनके कमरे में ले गया और बिस्तेर पर पीठ के बल लिटा दिया. भाभी की टाँगों के बीच में बैठ कर मैने उनकी टाँगों को चौड़ा किया और अपने लंड का सुपरा उनकी चूत के मुँह पर टीका दिया. अब भाभी से ना रहा गया,

" रामू, तंग मत कर. अब और नहीं सहा जाता. जल्दी से पेल. जी भर के चोद मेरे राजा. फाड़ दे मेरी चूत को." मैने एक ज़बरदस्त धक्का लगाया और आधा लंड भाभी की चूत में पेल दिया.

" आआआअ………….आाऐययइ…….ह…अघ… मर गयी मेरी मा…. आह.. फॅट जाएगी मेरी चूत… आ.. इश्स…इससस्स….ऊवू…. आआआः… खूब जम के चोद मेरे राजा. कितना मोटा है रे तेरा लंड. इतना मज़ा तो ज़िंदगी भर नहीं आया. आ…आआआः." भाभी इतनी ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी कि अब बिल्कुल रंडी की तरह बातें कर रही थी. मैने थोड़ा सा लंड को बाहर खींचा और फिर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा जड़ तक भाभी की चूत में पेल दिया. मेरे अमरूद भाभी के चूतरो से टकराने लगे. मैं भाभी की सुंदर चूचिओ को मसल्ने और चूसने लगा और उनके रसीले होठों को भी चूसने लगा. भाभी चूतर उच्छल उच्छल कर मेरे धक्कों का जबाब दे रही थी. पाँच मिनिट की भयंकर चुदाई के बाद भाभी पसीने से तर हो गयी थी और उनकी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी. फ़च….. फ़च…. फ़च… की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज़ रहा था. भाभी की चूत में से इतना रस निकला कि मेरे अमरूद तक गीले हो गये. मैने भाभी के होंठ चूमते हुए कहा,

" भाभी मज़ा आ रहा है ना ? नहीं आ रहा तो नकाल लूँ."

" चुप बदमाश ! खबरदार जो निकाला. अब तो मैं इसको हमेशा अपनी चूत में ही रखूँगी."

" भाभी आपने कभी भैया का लंड चूसा है ?"

" नहीं रे, कहा ना तेरे भैया को तो सिर्फ़ टाँगें उठा कर चोदना आता है. काम कला तो उन्होने सीखी ही नहीं."

" आपका दिल तो करता होगा मर्द का लौदा चूसने का?"

" किस औरत का नहीं करेगा? औरत तो ये भी चाहती है की मर्द भी उसकी चूत चाते."

" भाभी मेरी तो आपकी चूत चूमने की बहुत तमन्ना है." मैने अपना लंड भाभी की चूत में से निकाल लिया और मैं पीठ के बल लेट गया.
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#25
भाभी आप मेरे उपर आ जाओ और अपनी प्यारी चूत का स्वाद चखने दो." मैने भाभी को अपने उपर खैंच लिया. भाभी का सिर मेरी टाँगों की तरफ था. भाभी की टाँगें मेरे सिर के दोनो तरफ थी और उनकी चूत ठीक मेरे मुँह के उपर. मैने भाभी के चूतरो को पकड़ के उनकी चूत को अपने मुँह की ओर खींच लिया. मैने कुत्ते की तरह भाभी की झांतों से भरी चूत को चाटना शुरू कर दिया. भाभी के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी. भाभी की चूत की सुगंध मुझे पागल बना रही थी. चूत इतना पानी छोड़ रही थी कि मेरा मुँह भाभी की चूत के रस से सुन गया. इस मुद्रा में भाभी की आँखों के सामने मेरा विशाल लंड था. भाभी ने भी मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया. मेरा लंड तो भाभी के ही रस से सना हुआ था. भाभी को मेरे वीर्य के साथ अपनी चूत के रस के मिश्रण को चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था. अब भाभी ने मेरे लंड को मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया. इतना मोटा लंड बड़ी मुश्किल से उनके मुँह में जा रहा था. जी भर के लंड चूसने के बाद भाभी उठी और मेरे मुँह की तरफ मुँह करके मेरे लंड के उपर बैठ गयी. चूत इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के पूरा 10 इंच का लौदा भाभी की चूत में जड़ तक घुस गया. भाभी ने मुझे चूमना शुरू कर दिया और ज़ोर ज़ोर से अपने चूतर उपर नीचे करके लौदा अपनी चूत में पेलने लगी. मैं भाभी की चूचिओ को चूसने लगा. पाँच मिनिट के बाद तक के मेरे उपर लेट गयी और बोली,

" रामू, तू आदमी है कि जानवर. इतनी देर से चोद रहा है लेकिन अभी तक झाड़ा नहीं.मैं अब तक तीन बार झाड़ चुकी हूँ."

" मेरी प्यारी भाभी मेरे लंड को आपकी चूत इतनी अच्छी लगती है कि जब तक इसकी प्यास नहीं बुझ जाती ये नहीं झरेगा. आपने मुझे जानवर कहा ही है तो अब मैं आपको जानवर की तरह ही चोदुन्गा."

" हे भगवान ! कल ही तो तूने सांड़ की तरह चोदा था. अब और कैसे चोदेगा ?"

" कल आपको गाय बना कर सांड़ की तरह चोदा था आज आपको कुतिया की तरह चोदुन्गा."

" चोद मेरे राजा जैसे चाहता है वैसे चोद. अपनी भाभी को कुतिया बना के चोद. लेकिन ज़रा मुझे बाथरूम जाने दे." इतनी देर चुदाई के बाद भाभी को पेशाब आ गया था. वो उठ कर बाथरूम में गयी लेकिन दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया. इतना चुदवाने के बाद भाभी की शर्म बिल्कुल ख़तम हो गयी थी. बाथरूम से प्सस्सस्सस्स……… की आवाज़ आने लगी. मैं समझ गया भाभी ने मूतना शुरू कर दिया है. भाभी के मूतने की आवाज़ सुन कर मैं भाभी को चोदने की लिए तडप उठा. भाभी वापस आई और मुस्कुराते हुए कुतिया बन कर बोली,

" आ मेरे राजा तेरी कुतिया चुदवाने के लिए हाज़िर है." भाभी ने अपने चूतर उपर उठा रखे थे और उनका सीना बिस्तर पर टीका हुआ था. उनके विशाल चूतरो के बीच से झँकति हुई चूत को देख कर मेरा लौदा फंफनाने लगा. मैं भाभी के पीछे बैठ कर भाभी की चूत को कुत्ते की तरह सूंघने और चाटने लगा.

" अया…. ऊऊओ .. क्या कर रहा है. तू तो सचमुच कुत्ता बन गया है."

" भाभी अगर आप कुतिया हैं तो मैं तो कुत्ता हुआ ना. कुतिया कोतो कुत्ता ही चोद सकता है." मैं पीछे से भाभी की चूत चाटने लगा. मेरे मुँह में नमकीन स्वाद आ रहा था, क्योंकि भाभी अभी मूत कर आई थी. इस मुद्रा में चूत चाटने से मेरी नाक भाभी की गांद में लग रही थी. अब मैने भाभी के दोनो चूतर फैला दिए. भाभी की गांद का गुलाबी छेद बहुत ही सुन्दर लग रहा था. मैने अपनी जीभ से उस गुलाबी छेद हो भी चाटना शुरू कर दिया और एक दो बार जीभ गांद के छेद में भी डाल दी.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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#26
[Image: 9hrru6.gif]




























एयाया…ह …एयाया ऊऊऊः रामू बहुत अच्छा लग रहा है." काफ़ी देर तक मैने भाभी की चूत और गांद चॅटी. मैं भाभी को कुतिया की तरह चोदने के लिए तैयार था. अब मैने उठ कर अपने लौदे का सुपरा भाभी की चूत के मुँह पर रखा और उनकी कमर पकड़ के ज़ोरदार धक्का लगाया. चूत बहुत ही गीली थी और इतनी देर से हो रही चुदाई के कारण चौड़ी हो गयी थी. एक ही धक्के में पूरा 10 इंच लौदा भाभी की चूत में समा गया. अब मैने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. फ़च….फ़च….फ़च….फ़च .. का मधुर संगीत कमरे में गूंज़ने लगा.

" भाभी मज़ा आ रहा है मेरी जान ?"

" ऊहह…अयाया बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा. अयाया…. फाड़ डालो मेरी चूत को आज. मार डालो मुझे… औइ मा….. मैं मर जाउन्गी."

" भाभी मेरा इनाम कब दोगि?"








N

















[Image: 9hrrlx.gif]




B





"…अया….. ऊवू…. जब मर्ज़ी लेले. ऊवू बोल …अया … क्या चाहिए?"

" भाभी मैं आपकी गांद में अपना लंड डालना चाहता हूँ."

" नहीं रे तेरा मूसल तो मेरी गांद फाड़ देगा. ना बाबा ना. कुच्छ और माँग ले."

" भाभी मेरी जान जब से आप इस घर में आई हो आपकी मोटी गांद देख कर ही मेरा लंड फंफना जाता है. एक बार तो इस लौदे को अपनी गांद का स्वाद लेने दो"

" तू तो बहुत ही ज़िद्दी है. ठीक है अगर तुझे मेरी गांद इतनी पसंद है तो लेले. लेकिन मेरे राजा बहुत धीरे से डालना, तेरा लंड बहुत ही मोटा है."

" हां भाभी बिल्कुल धीरे से डालूँगा." मैं जल्दी से वॅसलीन ले आया. भाभी के पीछे बैठ कर उनके चूतर दोनो हाथों से फैला दिए और उस गुलाबी छेद को कुत्ते की तरह चाटने लगा. जीभ को भी गांद के अंडर घुसेड दिया.मैने ढेर सारी वॅसलीन अपने लौदे पर लगाई और फिर ढेर सारी अपनी उंगली पर ले कर भाभी की गांद में लगाई. अब मैने अपने लंड का सुपरा भाभी की गांद के छेद पर रखा और धीरे से दबाव डाल कर सुपादे को भाभी की गांद में सरका दिया. भाभी की गांद का छेद मेरे मोटे लंड के घुसने से बुरी तरह फैल गया.

"आआआआआईयईईईईईईईईईईई…………….आआआहहा…वी माआआआ………. मर गयी . बस कर रामू आआआः…..निकाल ले बहुत दर्द हो रहा है" भाभी बहुत ज़ोर से चीखी. थोरी देर में जब भाभी का दर्द कम हुआ तो मैने तोरा और दबाव डाल कर करीब तीन इंच लंड भाभी की गांद में पेल दिया. भाभी को पसीने छ्छूट गये थे. मैने और थोड़ा इंतज़ार किया और भाभी की चुचियाँ और चूतरो को सहलाता रहा. फिर मैने भाभी की कमर पकड़ के एक हल्का सा धक्का लगाया और 5 इंच लंड भाभी की गांद में पेल दिया.

"आआआः …… ऊऊओ…….आआआः…..इसस्सस्स और कितना बाकी है रामू? फॅट जाएगी मेरी गांद."

" बस मेरी जान थोड़ा सा और" ये कहते हुए मैने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. अब तो करीब करीब 9 इंच लंड भाभी की गांद में समा गया.

"आआआआअ………..आआआआआआआ….ओईईईईईईईईईई…..छोड़ दे मुझे ज़ालिम

कहीनका.आआआआआआ……………. मुझे नहीं चुदवाना. प्लीज़ रामू मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ निकाल ले. मैं नही सहन कर सकती.वी माआ……. आआहह." मैं थोड़ी देर तक बिना हीले लंड गांद में डाले हुए पड़ा रहा. जब भाभी का दर्द कम हुआ तो मैने बहुत ही धीरे धीरे अपना लंड भाभी की गांद में अंडर बाहर करना शुरू किया. भाभी का दर्द अब काफ़ी कम हो गया था. मैने अब पूरा लंड बाहर निकाल कर जड़ तक पेलना शुरू किया.मैने देखा कि भाभी भी अब अपने चूतर पीछे उचका कर मेरा लंड अपनी गांद में ले रही थी.

" भाभी कैसा लग रहा है ?" मैने भाभी की चूचियाँ दबाते हुए पूछा.

" आअहह…… अब अच्छा लग रहा है मेरे राजा. थोड़ा और ज़ोर से चोद." अब तो मैं भाभी के चूतर पकड़ कर अपने 10 इंच के लौदे को भाभी की गांद में जड़ तक पेलने लगा. धीरे धीरे मेरे धक्के तेज़ होते गये.

" अया….. ऊवू एयेए……ह….ऊऊऊओ …आऐईयईईई, बहुत मज़ा आ रहा है. फाड़ दे अपने लौदे से मेरी गांद. अया….. पीछे से तो अब मैं तेरी बीवी हो गयी हूँ ….एयाया……एयाया…सुहाग रात को तेरे भैया ने मेरी कुँवारी चूत चोदि थी और आज तू मेरी कुँवारी गांद मार रहा है. वी मया…..आआ….चोद मेरे राजा चोद मुझे. जी भर के चोद."


















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मेरे धक्के और भी भयंकर होते जा रहे थे. भाभी की जिस गांद ने मेरी नींद उड़ा दी थी, आज उसी गांद में मेरा 10 इंच का लौदा जड़ तक घुसा हुआ था. भाभी को चोद्ते हुए अब करीब दो घंटे हो चले थे. मैं भी अब झरने वाला था. 15 – 20 धक्कों के बाद मैने ढेर सारा वीर्य भाभी की गांद में उंड़ेल दिया. मेरा वीर्य भाभी की गांद में से निकल कर चूत की ओर बहने लगा. मैने अपना लंड भाभी की गांद में से बाहर निकाल लिया. भाभी ने उठ कर बारे प्यार से लंड को अपने मुँह में ले कर चाटना और चूसना शुरू कर दिया. भाभी ने पूरे लंड और मेरे अमरूदों को चाट कर ऐसे सॉफ कर दिया मानों मेरे लंड ने कभी चुदाई ही ना की हो.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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#27
भाभी दर्द तो नहीं हो रहा?”

“10 इंच का मूसल मेरी गांद में डालने के बाद पूछ रहा है दर्द तो नहीं हो रहा. लगता है एक महीने तक ठीक से चल भी नहीं पाउन्गि”

“तो फिर आपको मज़ा नहीं आया?”

“कैसी बातें कर रहा है? इससे चुदवाने के बाद किस औरत को मज़ा नहीं आएगा? लेकिन तेरे दिल की तमन्ना पूरी हुई कि नहीं?” भाभी मेरे लॉड को प्यार से सहलाते हुए बोली.

“ हां मेरी प्यारी भाभी.आपके भारी नितंबों को मटकाते देख कर मेरे दिल पर छुरी चल जाती थी. मेरा लंड फंफना उठता था और आपके चूतरो के बीच में घुसने को बेकरार हो जाता था.आज तो मैं नहाल हो गया.”

“ सच ! मुझे नहीं पता था कि मेरे नितंब तुझे इतना तड़पाते हैं. मैं बहुत खुश हूँ कि तेरे दिल की तमन्ना पूरी हुई. अब तो तू एक बार मेरी गांद मार ही चुका है. जब भी तेरा दिल करेगा तुझे कभी मना नहीं करूँगी. तेरी ही चीज़ है.”

“ आप कितनी अच्छी हो भाभी.देखना अब आपके नितंबों में कितना निखर आएगा. राह चलते लोगों का लंड आपके चूतरो को देख कर खड़ा हो जाएगा.”

“ मुझे किसी का लंड नहीं खड़ा करना. तेरा खड़ा होता रहे उतना ही काफ़ी है. अभी तो मेरी गांद का छेद फटा सा जा रहा है.”

“ एक बात पूछूँ भाभी? भैया आपको कॉन कॉन सी मुद्राओं में चोदते हैं?”

“ अरे ! तेरे भैया तो अनारी हैं. उन्हें तो सिर्फ़ मेरी टाँगों के बीच बैठ कर ही चोदना आता है. अक्सर तो पूरी तरह नंगी भी नहीं करते. सारी उठाई और पेल दिया. 15-20 मिनिट में ही काम ख़तम!”

“आपको नंगी हो कर चुदवाने में मज़ा आता है?”

“हां मेरे राजा. किस औरत को नहीं आएगा? और फिर मरद को भी तो औरत को पूरी तरह नंगी करके चोदने में मज़ा आता है. तू बता तुझे किस मुद्रा में चोदना अच्छा लगता है?”

“भाभी आपके जैसी खूबसूरत औरत को तो किसी भी मुद्रा में चोदने में मज़ा आता है, लेकिन सबसे ज़्यादा मज़ा तो आपको गाय बना कर, आपके मोटे मोटे चूतर फैला कर सांड़ की तरह चोदने में आता है. इस मुद्रा में आपकी फूली हुई रस भरी चूत और गुलाबी गांद, दोनो के दर्शन हो जाते हैं और दोनो को ही आसानी से चोदा जा सकता है.”

“ अच्छा तो तू अब काफ़ी माहिर हो गया है.”

अब तो मैं और भाभी घर में हमेशा नंगे ही रहते थे और मैं दिन में तीन चार बार भाभी को चोद्ता था और गांद भी मारता था. एक दिन भैया वापस आ गये. वापस आने के बाद तीन चार दिन तो भैया ने भाभी को जम कर चोदा, लेकिन उसके बाद फिर वोही पुराना सिलसिला शुरू हो गया. भाभी की चूत की प्यास को मिटाने की ज़िम्मेदारी फिर मेरे 10 इंच के लौदे पर आ पड़ी. अब तो भाभी को गांद मरवाने का इतना शौक हो गया कि हफ्ते में दो तीन बार मुझे उनकी गांद भी मारनी पड़ती थी. तो दोस्तो ये तो हुई मेरी देवर रामू से चुदाई की कहानी जिसे आपने मेरे देवर की ज़ुबानी सुना








CM




































Punk 








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V
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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#28
Good story
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