Posts: 93
Threads: 1
Likes Received: 52 in 31 posts
Likes Given: 2
Joined: Feb 2019
Reputation:
9
ऊषा भाभी अपनी झूठ पकरी जाती देख,अपनी माथे को नीची कर पैर के नाखून से जमीन कुरेदने लगी।उधर रमेश भैया भी शर झुकाए घचाघच ऊषाभाभी कि मांमी कि गांड में अपना लौरा पेले जा रहे थे।
ऊधर पुआल पर एक गंदी सी तेल मसाले के दाग से भरी गद्दी ,चादर पर माथुर बाद के आए तीनो व्यक्ति के साथ बैठ कर बाते करते हुए सिसे के चाय के ग्लास में दारू ढाल रहे थे।
Posts: 93
Threads: 1
Likes Received: 52 in 31 posts
Likes Given: 2
Joined: Feb 2019
Reputation:
9
ऊषा भाभी अपनी झूठ पकरी जाती देख,अपनी माथे को नीची कर पैर के नाखून से जमीन कुरेदने लगी।उधर रमेश भैया भी शर झुकाए घचाघच ऊषाभाभी कि मांमी कि गांड में अपना लौरा पेले जा रहे थे।ऊईइईई माईईईरी फा्फठ गईईईईल.ऊषाभाभी कि मामी चिल्ला रही थी और महंथ बार बार बोले जा रहा था,बहानचोद आपन सासे के गांड फारत नइखे साला हमरी बुरमरौनी चाचीओ के गांड फारत बा।
तभी मंगल माथुर से बोला,सर,डेढ बाज गईल तीन बजे रिपोर्ट करे के बा।यह सुनकर सहसा सभी हरबरा गए और माथुर,महंथ नामक आदमी ईधर ऊधर नजर दौराने के बाद बोला ओ माथुर साहेब ईहां त कौनो दूसर जगहे ना लऊकाता,कहीं त ईकट्ठे एही गद्दीए पर सबनी के बाजा बजा दि हमनी के काहे जे अब टाईम नईखे।कौनो बात नही है महंथ जी,बस कमपिटिशन ना करल जाई एक अश्लिल ठहाके के साथ माथुर बोला।कुछ हि मिनटो में फर्श पर बिछे गद्दे को सिधा कर कुछ पुआल बाहर से मंगवाया गया और ऊसपर उषाभाभी के मामी कि सारी बिछाकर एक बरी गद्दी बना दि गई।
ईधर हमलोग अर्थात ऊषाभाभी, सीमा और मैं सभी एक दूसरे को देख कर अनजाने भय से सिमटी जा रही थी हालांकि डर सिर्फ अनजान होने का हि था और अकुलाहट सिर्फ इतनी थी कि जो होनी है हो ले और यहाँ से जल्द निकल ली जाए।
(This post was last modified: 28-08-2022, 11:13 PM by
Meerachatwani111. Edited 8 times in total.)
Posts: 35
Threads: 0
Likes Received: 4 in 4 posts
Likes Given: 1
Joined: Sep 2019
Reputation:
-1
बेहतरीन कल्पना एवं साफ सुथरी लिखाई
Posts: 93
Threads: 1
Likes Received: 52 in 31 posts
Likes Given: 2
Joined: Feb 2019
Reputation:
9
कुछ मिनटों मे ही महंथ,ऊसके साथ आए दोनो व्यक्ति और माथुर,चारों व्यक्ति आसन जमा चुके थे।एक कतार में।सबों के हाथ में दारू का ग्लास था जिसका वो बार बार चुस्की लगा रहे थे।ऊधर रमेश भैयाऔर बलवंत उषा भाभी की मामी कि गांड और मुंह में पुर्ववत अपने अपने लौड़े से ठुकाई करते जा रहे थे,बिच बिच में महंथ भद्दी भद्दी गालियां भी देता जा रहा था.कभी कहता का रे बलवंत देखत वाटे कैसे सासूमां आपन दामाद के लौरा घचाघच ले रहलीस।का हो का नाम बा सासुचोद के,जी रमेस माथुर ने बताया।हां रमेसवा कइसन लागता सासूमाँ के गांड फारे में।भैया केया जबाब देते,पर उनकी चुप्पी से महंथ डपट भरे स्वर में गाली के साथ बोला,बहानचोद तहरा मुंह में अपन माई के चुंची बा कि बहिन के बुर दाबले बाटे जे जबाब नइखे देत हरामी।
(This post was last modified: 04-11-2022, 04:53 PM by
Meerachatwani111. Edited 1 time in total.)
Posts: 93
Threads: 1
Likes Received: 52 in 31 posts
Likes Given: 2
Joined: Feb 2019
Reputation:
9
आगे...चारो पुआल पर बिछा गद्दे पर बैठ कर माथुर से बोले तब जी प्रोग्राम चालू किया जाए।माथुर ने उषा भाभी कि गांड में खचाखच लंड पेलते रमेश भैया के तरफ ईशारा करते हुए हल्की आवाज में महंथ से कुछ कहा,जिसे सुनकर महंथ रमेश भैया के तरफ देखते हुए कहा ओए मादरचोद छोर अपन सास के हेने आब आआपन माल के दिखा।का हो माथुर जी आपन के देखल गइल ह कौन माल चौकस बा वैसे त सब बिहाहल बा ,एमे कउनो बिन बियाइल बा कि ना।का बे दल्ला रमेव भैया के तरफ देखते हुए कहा हे मे कौन बिनबियाइल बा.।जीई जी अभी किसी का गर्भ नही ठहरा है,वैसे मीरा के बारे में मै नही कह सकता।महंथ मेरी तरफ देख कर बोला चल बुरचोदी का नाम बा जे मीरा हेने आब आ बता तहार बुर कबे खून फेकले रहे,मैंअटकती हुइ बोली जिइइ पिछले सप्ताह बारह तेरह तारिख के और बोलकर शर्म से आंखे निचे कर अंगुठे से गद्दी कुरेदने लगी।हम त मीरारानी के ठुकाइ करब आ तोहनी के जे पसंद बा ले के पेलाई शुरु कर ,जगह जास्ती नइखे एंही निबट लेल जाए,ऐसा कहके महंथ अपने बांए से ममेरी दांहाथ के पंजे को पकर कर अपने गोद में खींचा।मैंअचानक के ईस झटके से संभलने हेतु बांए हाथ का सहारा लेने के कोशिश में ठिक महंथ केजांघो केबीच परी ठिक ऊसके लंड के ऊपर।मेरी हथेली केबिच महंथ का बमपिलाट गर्म लौड़ा और टनटना गया था।महंथ यह देखकर अपने दूसरे हाथ से मेरी हथेली को दाबते हुए माथुरके तरफ देखते हुए बोला,देखिये माथुर साहेब कितना बेकरार बा इ बुरचोदी मीरा,साली रंडी सिधे हथियारे पकरलिहलिस.हांओ महंथ जी सब खेलल खाएल रंडी बारे।मौज करी आपन लोग,तब तक हम इ भोंषरी के हाल चाल देखते हैं कह कर माथुर मामी,ऊषा भाभी की, को जिस के मुंह में अभी तक बलवंत का लंड घुसा हुआ धकापेल कर रहा था के पास जा पहुंचा।उसके हाथ में दारू वाली ग्लास थी जिससे वह घुंट घुंट कर पि भी रहा था,बलवंत से बोला रे कितना टाईम लगाएगा, जल्दी खाली कर ,अपनी मलाई खिला दे ,आ तनी ई गंरचोदी के गांर चिआर ,पहिले एकरा शुद्ध करी,रंडी छिनार आपन दामाद से गांड मरवइलस।ईधर हम तीनों यानी मैं महंथ कि जांघ पर बैठी हुई थी। मेरी बाएं हाथ कि हथेली पुर्ववत महंथ के फनफनाए लौरे को धोती कै ऊपर से ही पकरे हुइ थी,जब भी हाथ हटाने कि कोशिश करती ,कमीना महंथ मेरी चूंची को चोली के ऊपर से ही ईस तरह खिंचता जैसे उसमे से दूध निकाल रहा हो,मैं चिल्लाती तो वह बोलता,खबरदार जे हाथ हटइलू,मैं भी दोबारा प्रयास करने कि कोशिश नही कि।,मेरे बगल में उषा भाभी सिंहजी के गोद में लगभग नंगी बैठी कसमसा रही थी,उषा भाभी कि चूंचियों को सिंह जी लगातार मसले जा रहा था।मेरे ठिक सामने सीमा के कपरे खुल चुके थे वो फुलपैंट और शर्ट वाले के गोद में बैठी थी,और वह आदमी उसके होठों कि चुम्मी ले रहा था।हम तीनो लगातार सिसकी या लगभग चिख निकाल देती।अचानक मामी कि तेज चीख नीकली माई रे माईईईई ।आवाज सुनते ही महंथ अपनी दोनो पंजे से मेरी चूंचियों को कसकर पकरते हुए बोला का करनी ह माथुर जी हमार चाची के साथ,सताई नत,बेचारी आपके लिए गांड फैला के स्वागत निमंत्रण दे रहलिस ह।अरे कुछो नाही महंथ जी,ईनकर गांर दमाद के लौरा ले के अशुद्ध हो गइल रहे त तनिक व्हिसकी डालके शुद्ध कइनीं ह।
(This post was last modified: 09-11-2022, 07:31 AM by
Meerachatwani111. Edited 1 time in total.)