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मां- तू पहले नहा ले और अब .
मैं- क्यों मां ग़ुस्सा हो क्या?
मां- गुस्सा नहीं, तुम पहले नहा लो. मैं तेरे लिए नाश्ता और चाय बना देती हूं.
मैं बाथरूम में नहाने घुस गया.
मैंने बाथरूम में जाकर देखा कि मां के रात के कपड़े वहां पड़े हुए थे. उनकी गीली पैंट ब्रा के साथ नाइटी भी पड़ी थी.
मैं नहाकर बाहर आ गया और कपड़े पहन कर हॉल में आ गया.
मां- आ गया … बैठ मैं नाश्ता लगाती हूँ.
मेरी मां दोनों के लिए चाय नाश्ता ले आईं.
हम दोनों नीचे फर्श पर बैठ कर चाय नाश्ता करने लगे.
मां- ये लो कचौड़ी खाओ.
मैं- मां आप कुछ बात करने वाली थीं.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
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ये बोलकर मां रसोई में चली गईं.
मैं थोड़ी देर बाद उनके पास आया तो देखा, वो मुझे नजरअंदाज करके रसोई में काम करती रहीं.
मैं- रज्जी मेरी तरफ देखो न!
रज्जी- हां बोलो?
मैंने उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उंगलियों में उंगली फंसाते हुए कहा- मुझे सब मंजूर है शोना … आई लव यू जान!
रज्जी मुस्कुराती हुई बोलीं- पक्का न!
मैं- तेरी कसम जान एकदम पक्का.
रज्जी- आई लव यू टू जान … लेकिन किसी को हमारे प्यार के बारे में पता नहीं चलना चाहिए. वरना दुनिया हमारा प्यार परवान नहीं चढ़ने देगी.
मैं- तुम चिंता मत करो जान, हम ये रिश्ता अच्छे से निभाएंगे.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.