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बहुत ही सुंदर वर्णन। कहानी जारी रखें। yr):
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मस्त अपडेट। लगता है आज ही काम हो जाएगा दोनों का। जल्दी अपडेट दीजिये
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Bahut hi erotic story hai next update ka wait hai
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लौड़े ने मेरी लोअर से बाहर आने की बगावत शुरू कर दी थी।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
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Bahot badhiya updates the. Waiting for more
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दीपिका का ड्रिंक खत्म होता देख कर मैंने सोचा कि मैं उसके लिए और कोल्ड ड्रिंक ले आता हूं.
मैंने दीपिका से कहा- मैं आपके लिए कोल्डड्रिंक और लाता हूँ, और जैसे ही मैं उठने लगा तो दीपिका कहने लगी- कोल्डड्रिंक बहुत मीठी है, आप वाली कैसी है, जरा देखूँ तो?
यह कह कर उसने मेरा गिलास उठाया और उसमें से एक सिप कर लिया और बोली- इसका स्वाद भी बढ़िया है.
मैंने कहा- मैं आपका दूसरा पेग बना देता हूँ, यह तो मेरा झूठा है.
दीपिका पर आधे पैग का ही पूरा सरूर हो गया था.
वह बोली- क्या राज जी, आपने भी क्या हल्की बात कर दी? अपनों का भी कभी झूठा होता है?
यह कह कर उसने एक बड़ा सा सिप और ले लिया और कुछ ही मिनट के बाद वो झूमने लगी.
थोड़ी देर हम चुप बैठे रहे. फिर दीपिका अपना सिर पीछे लगाए लगाए बोली- राज, कोई बात करो न.
अब मैं समझ चुका था कि दीपिका चुदने के मूड में आ चुकी है.
मैंने कहा- दीपिका, आपके हाथ बहुत सुंदर हैं.
दीपिका ने अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ाये और बोली- पसंद हैं?
मैं- बहुत पसंद हैं.
दीपिका- तो चूम क्यों नहीं लेते?
मैंने दीपिका के दोनों हाथों को पकड़ा और कहा- इतनी दूर बैठी हो, मेरे पास आओ तभी तो कुछ करूंगा.
मैंने उसके हाथों को पकड़े पकड़े ऊपर उठने का इशारा किया और दीपिका जैसे ही उठी, मैंने उसे अपनी ओर खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया. दीपिका धम्म से मेरी गोदी में आ गई.
मुझे लगा जैसे मेरी गोदी में जन्नत आ बैठी हो. मेरा 8 इंच लंबा मोटा लौड़ा उसके चूतड़ों की खाई में धंस गया.
गोदी में बैठते ही मैंने दीपिका के होंठों को चूम लिया और उसे एक बाँह में संभालते हुए एक हाथ से पैग उठा कर उसके होंठों से लगा दिया.
दीपिका ने एक सिप ली और उसी गिलास को अपने हाथ से पकड़ कर मेरे होंठों से लगा दिया.
एक मिनट में ही दुनिया की सारी मस्ती हम दोनों में सिमट कर भर गई.
मैंने अपनी दोनों हथेलियों में दीपिका के बड़े बड़े चूचों को पकड़ लिया और उन्हें सहलाने लगा. दीपिका ने अपने गाल मेरे गालों से सटा दिए और लम्बी लम्बी सिसकारी लेने लगी- ऊह्ह … अम्म … राज … आह्ह … ओह्ह।
मैं धीरे धीरे उसके मखमली शरीर पर अपना हाथ घुमाने लगा. मेरा हाथ उसकी बाजुओं और चूचियों से होता हुआ उसके पेट और उसकी जांघों और पटों पर चलने लगा. दीपिका की सांसें लगातार तेज हो रही थीं.
फिर मैंने दीपिका के मुँह में एक पनीर का टुकड़ा डाला तो उसने दोबारा मेरे गिलास से एक बड़ा सिप ले लिया और मुड़ कर मेरी छाती से अपनी छाती लगा दी और मुझे ज़ोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया. मैंने दीपिका के टॉप में पीछे से हाथ डाला और उसकी कमर को सहलाने लगा.
कमर के बाद मैंने उसके पटों पर हाथ फिराते हुए उसकी स्कर्ट में हाथ डाल कर उसकी जांघों को सहला दिया. दीपिका ने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी. मेरे हाथ पर कहीं भी उसकी पैंटी का अहसास नहीं हुआ तो मुझे पता चल गया कि चूत नंगी है.
वासना में उत्तेजित हुई दीपिका ने एकदम पोजीशन बदली और उसने बैठे बैठे अपने दोनों घुटनों को चौड़ा करके मेरे दोनों पटों के बाहर से कर लिया और अपनी चूत को मेरे उल्टे मुड़े लौड़े पर टिका कर बैठ गई.
दीपिका मुझसे बुरी तरह से लिपट गई और अपनी जांघों को मेरे ऊपर दबाने लगी. शायद उसको अपनी चूत पर मेरे मोटे गर्म लौड़े का मदमस्त करने देने वाला अहसास मिल रहा था.
मैंने दीपिका के टॉप को ऊपर उठाया और उसके एक बड़े मम्मे को अपने मुँह में भर लिया. दीपिका आनन्द से उई … ईईईई … करने लगी. दीपिका बैठे बैठे मुड़ी और मेरा पैग उठा कर गटागट एक ही सांस में पी गई.
इस पर मैंने कहा- दीपिका, ये तुम्हारे लिए ज्यादा हो जाएगी.
दीपिका नशे में झूमती हुई बोली- आज सब कुछ ज्यादा ही तो करना है. आज मत रोको राज. तुम्हीं तो कह रहे थे कि इसे पीकर आदमी सब कुछ भूल जाता है.
यह कह कर दीपिका अपनी चूत को जोर जोर से मेरे उल्टे खड़े लण्ड पर रगड़ने लगी. मैं दीपिका की चूत का उभरा हुआ नर्म हिस्सा अपने लण्ड और पेट के नीचे वाले हिस्से पर स्पष्ट महसूस कर रहा था. उसने नीचे कुछ नहीं पहना था.
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मैंने भी दीपिका का साथ देते हुए उसे जगह जगह से चूमना और उसकी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियों को मसलना और पीना चालू रखा. मैंने अपने हाथों को दीपिका के दोनों कोमल और चिकने नितम्बों पर रखा और उन्हें अपनी ओर खींचते हुए नोंचने लगा.
धीरे धीरे मैंने दीपिका की स्कर्ट को पूरा ऊपर उठा कर उसके चूतड़ों को नंगा कर दिया. साथ ही मैं उसके टॉप को भी उसके गले तक उठा कर उसकी भारी और कठोर चूचियों का मर्दन करता रहा.
मौसम हल्की बारिश का हो रहा था और मेरे म्यूजिक सिस्टम से हल्की आवाज़ में प्यार भरे गाने चल रहे थे. हम दोनों उस बालकॉनी में लव बर्ड्स की तरह एक दूसरे की काम वासना को शाँत करने में लगे हुए थे.
बालकॉनी काफी बड़ी थी और दोनों तरफ आगे तक दीवारें होने के कारण पूरी प्राइवेसी थी. दीपिका की हरकतें तेजी पकड़ने लगीं और उसने अपनी चूत को मेरे ऊपर की तरफ खड़े उल्टे लौड़े पर जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया.
मैं भी दीपिका की एक चूची को अपने मुँह में भर कर, एक हाथ से उसकी कमर को संभालकर और दूसरे हाथ से उसके चूतड़ों को पकड़ कर अपनी ओर खींचता रहा.
दीपिका की स्पीड बढ़ गई और उसके नथुने तेज तेज चलने लगे. आनन्द के चलते दीपिका के मुँह से- आ.आ… आ … ईईई … ओह … ओह्हो … जैसी लगभग चिल्लाने की आवाजें निकलने लगीं और उसने पूरे जोर से अपनी चूत को रगड़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया और मेरे गले में दोनों बाहें डाल कर निढाल हो गई.
लगभग आधा घण्टे तक चले इस ओरल सेक्स के बाद दीपिका उठी और बोली- मुझे बाथरूम जाना है.
उठ कर दीपिका अपने बेडरूम में अंदर चली गई. मैं भी अपने बाथरूम में चल गया.
बाथरूम में मैंने देखा कि मेरा लोअर मेरी जाँघों की जगह पर दीपिका की चूत के रगड़ने और डिस्चार्ज से बिल्कुल गीला हो गया था.
दीपिका बाथरूम जाने के बाद बाहर बालकॉनी में नहीं आई और अन्दर बेड पर ही पसर गई.
मैं उसके पास अंदर गया और पूछा- दीपिका, खाना कब खाना है?
दीपिका नशे में बोली- ऊऊं … राज … पहले मुझे प्यार तो करो, खाना बाद में खाएंगे.
इतना कह कर उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
कमरे में पूरी लाइट थी. मैंने अपनी टीशर्ट निकाल दी और मेरी चौड़ी बालों वाली छाती नंगी हो गयी और मैं दीपिका के साथ अपनी नंगी छाती निकाल कर बेड पर लेट गया.
फिर उसके ऊपर झुक कर उसके होंठों को चूसने लगा. दीपिका ने अपनी बांहें मेरे गले में डाल दीं और अपने मुँह को मेरी छाती के बालों से रगड़ने लगी. मैंने दीपिका के टॉप को ऊपर उठा कर उसके गले में से निकाल दिया.
टॉप निकलते ही उसकी दोनों बड़ी बड़ी 38 साइज की सुडौल चूचियाँ बाहर निकल कर फड़फड़ाने लगीं. दोनों चूचियों की शेप, रंग और उन पर खड़े छोटे छोटे गुलाबी निप्पल कयामत ढहा रहे थे. मैंने उसके दोनों चूचों को अपने हाथों से पकड़ा और जोर जोर से मसलने लगा.
दीपिका के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैं एक एक करके दोनों चूचियों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और एक हाथ से उसके पेट और जांघों को मसलता रहा.
वो रह रहकर अपनी चूत को झटके देती रही और मेरी कमर को नोंचती खसोटती रही. मैंने चूचियाँ छोड़कर दीपिका की स्कर्ट में हाथ डाला और पकड़ कर स्कर्ट को नीचे खींच दिया.
दीपिका ने स्कर्ट निकालने के लिए अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर किया तो मैंने उसे उसकी टाँगों में से निकाल कर पास रखी चेयर पर फेंक दिया. स्कर्ट निकलने के बाद दीपिका मेरे सामने सेक्स की देवी की तरह पूरी नंगी पड़ी थी.
गज़ब की सुन्दर जाँघें, केले के तने के समान सेक्सी पट और टाँगें, उभरा हुआ सुंदर, चिकना, गोरा और मुलायम चूत के ऊपर का हिस्सा जिस पर कोई बाल नहीं थे.
मैंने दीपिका को उसके माथे से लेकर पांव के पंजे तक निहारा तो लगा कि भगवान ने उसके हर अंग को स्पेशल तरीके से बनाया था. दीपिका ने अपनी आंखें बंद कर रखी थीं और बार बार अपनी जांघों को भींच कर अपनी चूत की कामवासना को शांत करने की कोशिश कर रही थी.
अब मैंने दीपिका के सुंदर शरीर को ऊपर से चूमना शुरू किया. उसका माथा, आंखें, होंठ, ठुड्डी, गर्दन, चूचियों से होते हुए उसका सुंदर पेट, पेट के अंदर धंसी हुई सुंदर गोल नाभि को मैंने प्यार से चूम लिया. जिस भी अंग पर मेरे गर्म होंठ लगते तभी दीपिका के मुंह से गर्म आह्ह निकल जाती थी.
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मैंने दीपिका को तड़पाने के लिए उसकी चूत और जाँघों के भाग को छोड़ दिया और उसके पांव की उंगलियों और अंगूठे को अपने मुँह में ले कर चूस लिया. दीपिका तड़प गई.
मेरे होंठ उसके घुटनों से होते हुए उसके सुंदर चिकने पटों पर आ टिके. मैंने उसकी टाँगों को थोड़ा खोला और उनके बीच में आ गया. चूत के सुंदर हिस्से के ऊपर की दो मोटी फांकें उभर कर सामने आ गईं.
मैंने अपने सुलगते होंठ उसकी चूत के ऊपर और पेट के नीचे वाले हिस्से पर रख दिये और वहां थोड़ा दाँतों से काट लिया. इससे दीपिका सिहर उठी.
फिर जैसे ही मैंने अपने होंठों से उसकी चूत की बड़ी फांकों को छुआ तो दीपिका एकदम से जोर से ‘आह्ह्ह … आआ राज … स्सस … आईया …’ करके चिल्लाई और उसने अपने चूतड़ों के हिस्से को ऊपर उठा कर चूत को मेरे होठों से जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया.
दीपिका की चूत का नर्म और गुदाज़ हिस्सा मेरे मुँह और नाक पर इस कदर अड़ गया कि एक बार तो मेरी सांस बन्द हो गई थी. उस हिस्से को मैंने जितना आ सकता था, अपने मुँह में भर कर भींच लिया.
मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत के क्लिटोरिस को चाट लिया और जैसे ही मैंने दीपिका के क्लिटोरिस को अपने होंठों में दबाकर चूसा, उसने अपने हाथों से मेरे सिर को पकड़ा और जोर देकर उस पर दबा लिया और एकदम से ईईई … आआ … आआ … करके खल्लास हो गई.
कुछ देर बाद उसने मेरे सिर को छोड़ा और मुझसे एक बार के लिए अलग हो गई. अभी तक मैं केवल ऊपर से ही नंगा था. मैंने अभी तक अपना लोअर नहीं निकाला था और दीपिका ने मेरे लौड़े के दर्शन नहीं किये थे.
वो अभी बिना चुदे ही दो बार स्खलित हो चुकी थी.
वह बोली- राज, मेरा तो दो बार डिस्चार्ज हो चुका है. पता नहीं तुम्हारे पास क्या जादू है!
यह कह कर दीपिका करवट लेकर मेरे सीने से फिर से चिपक गई.
मेरा लौड़ा मेरे लोअर में तना हुआ था. दीपिका ने अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख ली. टांग ऊपर रखने से मेरा लण्ड उसकी चूत को छूने लगा. पहली बार आज उसने लोअर के बाहर से मेरे लौड़े को अपने हाथ से छू कर उसकी लंबाई और मोटाई का जायज़ा लिया.
लौड़ा हाथ में पकड़ते ही दीपिका उठ कर बैठ गई और बोली- कितना बड़ा और मोटा है आपका हथियार! इसे बाहर तो निकालो, क्यों छुपा रखा है?
मैं बेड से नीचे खड़ा हो गया और मैंने दीपिका से कहा- आपने आप निकालो, ये आज से आपकी चीज है.
दीपिका ने अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए बहुत ही सेक्सी स्माइल दी और बेड पर पाँव लटका कर बैठ गई. उसने अपनी उँगलियाँ मेरे लोअर के इलास्टिक में डाली और लोअर नीचे करने लगी.
मेरा लोअर मेरे हिप्स पर से तो नीचे हो गया लेकिन आगे से लण्ड खड़ा होने के कारण इलास्टिक में फंस गया. जैसे ही दीपिका ने आगे से जोर लगाकर लोअर नीचे खींचा, मेरा 8 इंच लंबा और मोटा लौड़ा झटके से उसकी ठुड्डी को छूता हुआ झूलकर पटाक की आवाज से मेरे पेट पर लगा.
दीपिका की चीख निकल गई और वो बोल पड़ी- उई माँ!! इत्ता बड़ा और मोटा!! असली है क्या?
मैंने कहा- छू कर देखो.
लण्ड अभी भी झटके और उत्तेजना के कारण थरथरा रहा था.
दीपिका ने धीरे से अपनी दो उंगलियों और अंगूठे से उसे छू कर देखा और बोली- यह तो बिल्कुल असली है.
फिर पूरी मस्ती से उसने लण्ड को अपनी दोनों मुट्ठियों में भींच कर अपनी ओर खींचा और अपनी गर्दन के नीचे लगा कर अपने दोनों हाथों से मुझे मेरे हिप्स से पकड़ कर अपनी ओर खींच कर मुझसे लिपट गई.
दीपिका पूछने लगी- राज, साइज क्या है?
मैंने कहा- पता नहीं, तुम्हीं नाप लो.
दीपिका ने अपना फोन उठाया तो मैंने पूछा- फोन से कैसे नापोगी?
वो बोली- नापने का ऐप है इसमें.
उसने फोन में इंस्टॉल्ड ऐप खोला जिसमें नापने वाला टेप लगा था. दीपिका ने ऊपर नीचे से तीन चार शॉट लिए और देखकर बोली- ओह माई गॉड ऊपर से 8.2 इंच और नीचे से 9 इंच.
मैंने पूछा- क्या अपने हस्बैंड का नापा है?
तो उसने एक फोटो दिखाया जिसमें एक मरियल सा काला लण्ड 4.6 इंच का दिखा रहा था.
फिर मैंने पूछा- ये ऐप तुम्हें कहाँ से मिला?
वो बोली- मेरी सहेली संजना ने दिया था. उसने अपने हस्बैंड का नापा था जो 5.3 इंच का था और उसने मुझे बड़े रौब से दिखाया था.
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दीपिका कहने लगी- लेकिन मेरे हस्बैंड का तो उसके हस्बैंड के लण्ड से भी छोटा है. अब मैं उसे दिखाऊंगी कि ये होता है लण्ड!
मैंने कहा- इसे डिलीट कर दो, नहीं तो कोई मुसीबत हो जाएगी.
वो बोली- कुछ नहीं होता, इस पर कौन सा आपका नाम लिखा हुआ है? आप चिंता मत करो.
मैं दीपिका की दिलेरी का कायल हो गया.
फिर दीपिका ने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
दीपिका ने अचानक लन्ड को बाहर निकाला और बोली- पता है राज, मेरे हस्बैंड के लाख कहने पर भी मैंने आज तक उनका मुँह में नहीं लिया है, मुझे अच्छा ही नहीं लगता. लेकिन आज तो दिल अपने आप ही चूसने का कर रहा है.
वो कहने लगी- आपकी तो गोलियाँ भी बहुत सख्त और टाइट हैं, मेरे हस्बैंड की तो लण्ड से भी नीचे लटकती हैं, मुझे उनका बिल्कुल अच्छा नहीं लगता.
मैंने दीपिका से कहा- चिंता मत करो, अब मैं तुम्हारी सभी इच्छायें पूरी कर दूँगा.
दीपिका कहने लगी- राज, आज से मुझे घोष से कोई शिकायत नहीं रही क्योंकि उसकी वजह से तुमसे मुलाकात हुई वरना मैं वहीं कोलकाता के आसपास ही घूमती रहती.
दीपिका बहुत ही खुश नजर आ रही थी.
वो बोली- आपके लण्ड का साइज देखकर एक पैग और पीने का दिल कर रहा है.
मैंने कहा- पहले ही दिन तुम्हारे लिए ज्यादा हो जाएगी.
वो बोली- प्लीज, एक बना लाओ ना राज … पिछली का तो अब असर खत्म हो गया है. मैं आज की रात को रंगीन बना कर जिंदगी भर याद रखना चाहती हूँ.
उसके कहने पर फिर मैं नँगा ही बालकॉनी में गया और ड्रिंक का सारा सामान अंदर ले आया. मैंने ड्रिंक बनाया और अपने लण्ड को ड्रिंक के गिलास में डुबोकर लण्ड को दीपिका की ओर कर दिया. उसने झट से लंड को मुँह में भरकर चूस लिया.
उसी वक्त दीपिका ने ड्रिंक में अपनी उंगलियां भिगोकर अपनी चूचियों पर लगा दीं. दीपिका का इशारा समझते ही मैंने दोनों चूचियों को बारी बारी से मुंह में भर कर चूसा और दोनों को ही चूस चूस कर साफ कर दिया.
फिर मैंने एक ड्रिंक का सिप लिया तो दीपिका ने भी एक बड़ा घूँट ले लिया और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी. मैं बेड पर आकर दीपिका के पांव की ओर गया और उसके घुटनों को फैला कर मोड़ दिया.
दीपिका की सुन्दर चूत मेरे सामने थी. बाहर पहरेदार की तरह खड़े दोनों भगोष्ठों को मैंने अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे से अलग किया तो अंदर दो कोमल पत्तियों के बीच पानी से चिकना हुआ गुलाबी छेद सामने दिखाई दिया.
मैंने अपनी एक उंगली दीपिका के गुलाबी छेद में डाली तो दीपिका के पूरे शरीर में सिरहन दौड़ गई. उसने मेरी उंगली डले हाथ को अपनी जांघों में भींच लिया. मैंने दीपिका के घुटनों को फिर खोला और उसके सुलगते हुए गुलाबी छेद पर फिर से अपने होंठ रख दिये.
होंठ रख कर मैंने चूत के ऊपर छोटे अँगूर के समान तने क्लिटोरिस को जीभ से कुरेद दिया.
दीपिका की सिसकारी निकल गई और वो ज़ोर से बोली- आईईई … आआह … राज … ये ना करो, ओह्ह … मेरी जान … तुम तो जान ही निकाल दो मेरी … उफ्फ … ओह्हह … आह्ह … बहुत मजा आ रहा है, मैं फिर झड़ जाउंगी यार।
दीपिका के सीत्कार सुन कर मेरा मन कर रहा था कि उसकी गुलाबी चूत में अपना तपता हुआ लंड झटके से घुसा कर उसे इतनी चोदूं ..इतनी चोदूं कि वो बेहोश हो जाये. मगर एक तरह से उसको तड़पाने में मुझे मजा भी उतना ही आ रहा था.
वो सिसकारते हुए मिन्नतें करने लगी- ओह्ह … राज … प्लीज … मुझे अपने हथियार से चोदो न, प्लीज … डार्लिंग। मैं तुम्हारे लंड का स्वाद चखने के लिए मरी जा रही हूं.
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बहुत सुंदर वर्णन, मजा आ गया। आगे के भाग जल्दी देवें।
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Umm khada hi rakhwaoge kya
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इतना कह कर दीपिका मेरे सिर को पकड़ लिया और चूत पर धकेलने लगी. फिर उसने मेरे कंधों से खींचा और फिर मुझे अपने ऊपर खींचने लगी जैसे मेरे लंड को खुद ही चूत में डलवाना चाह रही हो.
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