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काफी लोग इस कहानी में अगले अपडेट का इन्तजार कर रहे है?
कई सारे सवाल है इस कहानी में ?
क्या जितेश सूर्यदेव से रीमा का सौदा करने जाएगा ?
क्या जितेश पैसा चुनेगा या रीमा ?
क्या गिरधारी की मुराद पूरी हो पाएगी? क्या वह कभी रीमा के जिस्म की झलक पा सकेगा? क्या वो रीमा को दुबारा चोदने की ख्वाइश पूरी कर पायेगा, क्या रीमा उसको ऐसा दुबारा करने देगी या गिरधारी उसके साथ जबरदस्ती करेगा ?क्या अनिल और रोहित रीमा को ढूंढ पाएंगे?
कब रीमा इस कस्बे से निकल कर वापस अपने घर जा पाएगी? कभी जा पाएगी या फिर यही गंदी बस्ती ही उसका भविष्य है? क्या सूर्यदेव विराज से छुटकारा पायेगा? क्या वो रीमा को दुबारा हासिल कर विराज से अपनी जान बचा पायेगा ?
और अंत मे सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्या प्रियम को उसकी चाची दुबारा मिलेगी, क्या वो अपनी चाची को कभी हकीकत में चोद पायेगा या सपने में ही उसकी पिचकारियां छूटती रहेगी ।
रोहित अनिल प्रियम और ढेर सारे मर्दों की हर रात की हसरत रीमा का क्या होगा? रीमा अपनी बेचैन वासना में यु ही अनजाने गोते लगाकर अपना नैतिक पतन जारी रखेगी या उसके लिए वापसी का कोई रास्ता बचा है?
इन सारे सवालों के जवाब आपके साथ साथ लेखक को भी ढूढ़ने है । इतने सारे सवालों से आपको समझ आ गया होगा अभी पिक्चर बाकी ही, अब सिर्फ सेक्स ही नही रोमांच का भी भरपूर तड़का लगेगा ।
जल्द ही पहला ड्राफ्ट फाइनल करके आपको नया अपडेट मिलेगा ........
सुरक्षित रहे स्वस्थ रहे ।
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जितेश सोचने लगा | गिरधारी दरवाजे को ओट से रीमा की झलक पाने की असफल कोशिश करने लगा |
जितेश गिरधारी की आदत जानता था | उसकी आँखों में देख कर ही लगता था की रीमा के जिस्म की वासना बजबजा रही है | अपना पालतू था इसलिए जितेश ने इग्नोर किया |
जितेश - ठीक है ये फ़ोन रख मैं तुझे कुछ देर बाद फ़ोन करूंगा | याद रखना इस फ़ोन से और किसी से गप्पे मत मारना | निकल यहाँ से | गिरधारी रीमा को देखने की आखिरी कोशिश करता हुआ मुहँ ढक कर वहां से निकल गया |
जितेश ने दरवाजा बंद किया और तेजी से कपड़े पहने |
जितेश - मै कुछ काम से निकल रहा हूँ | ये दरवाजा बिलकुल मत खोलना | मै बाहर से ताला लगाकर जाऊंगा | मैंने अपना फ़ोन गिरधारी को दे दिया है और तुम्हे कोई जरुरत हो तो उसे फ़ोन कर लेना | वो आसपास ही मंडराता रहेगा |
रीमा - ठीक है |
जितेश कुछ सोचकर बेड के सिरहाने से एक चाकू उठाकर - ये तुमारी सुरक्षा के लिए है अपने पास ही रखना, मुझे लौटने में आधी रात हो सकती है | और गिरधारी को ज्यादा मुहँ मत लगाना, बहुत लीचड़ इंसान है | तुम्हें देखकर उसकी लार टपकने लगती है |
रीमा - तुम कहाँ जा रहे हो, यू समझो तुमारी आजादी का टिकट लेने | इसके बाद तुम यहाँ से सीधे अपने घर |
रीमा खुद हो गयी | उसको घर की याद आने लगी | इधर जितेश उसे क्या क्या समझा रहा था उसने सुना ही नहीं | बस हूँ हाँ करती रही | जितेश ने एक बैग उठाया अपने सारे हथियार लिए और तेजी से सामने के दरवाजे से निकल गया | बाहर जाते वक्त ताला लटका गया ताकि किसी को ये शक न हो की कोई अन्दर है |
रीमा घर की यादों में खो गयी, रोहित प्रियम उसका आलीशान घर, वो सारी सुख सुविधाए | हाय कहाँ इस नरक में फंस गयी | नाश्ता कर ही चुकी थी इसलिए जितेश के जाते ही बिस्तर पर लुढ़क गयी | अपने बारे में सोचने लगी | हाय रीमा तुमने ये क्या कर डाला, जो कुछ भी उसके साथ पिछले कुछ दिन में हुआ सब कुछ | कौन है जितेश, क्या लगता है तेरा जो उससे सारा जिस्म नुचवा लिया और वो उसका गन्दा सा नौकर ....... छी रीमा छी तुम्हे अपने आप से घिन नहीं आ रही है | क्या इसी दिन के अपने जिस्म को हर मर्द की परछाई से बचाती फिरती थी ताकि यहाँ दो जंगली जानवरों के खूंटो से अपना पूरा जिस्म नुचवा लो | ऐसे तो रंडियां भी अपना जिस्म नहीं नुचवाती | उनके अन्दर भी तोडा बहुत लिहाज होता है | आगे पीछे दोनों तरफ से दोनों छेदों की दुर्गति करवा ली | नासूर की तरह दुःख रहे है दोनों अब | रीमा की आँखों में आंसू थे और मन में बहुत गहरा डिप्रेसन | रीमा उठी और एक लोशन को अपने पिछली सुरंग में भरकर फिर से बिस्तर पर लेट गयी |
आपने अतीत और वर्तमान की तुलना करते करते कब उसकी नीद लग गयी उसे पता ही नहीं चला |
जब आँख खुली तो ४ बज रहे थे | भूख लगी थी नूडल्स बनाये | बस खाने जा रही थी तब दरवाजे पर दस्तक हुई |
बाहर गिरधारी था - साईकिल का पंचर बनवा लो |
ये कोड वार्ड था | रीमा समझ गयी | दरवाजे के पास आकर - क्या चाहिए ?
मैडम सुबह से मालिक ड्यूटी पर लगा गए, पंचर तो एक नहीं बनवाने कोई आया लेकिन मै भूख के मारे पंचर हो गया हूँ |
रीमा - आगे तो ताला पड़ा है |
गिरधारी - कोई नहीं मैडम जो भी हो तैयार रखो बस मै पीछे से लेकर आ लूँगा |
रीमा - यहाँ अभी बस नुडल ही है, वो भी मेरे जरुरत भर का, उसमे तो बस मेरा पेट भरेगा|
गिरधारी - क्या ? आपने खाना नहीं बनाया क्या ?
रीमा - बनाने को कुछ है ही नहीं, तुम कही बाहर ही जाकर कुछ खा लो |
गिरधारी - मैडम दुश्मन के आदमी सुबह से मुझे ही दूंढ रहे है मेरे हुलिया के कारन मुझे अब तक नहीं पहचान पाए है वरना कब का दबोच लिया होता |
रीमा - तो मै क्या करू ?
गिरधारी - कुछ तोड़ा बहुत दे दो, पेट में कुछ पड़ जाए बस |
रीमा - अभी तो बस यही है |
उधर से कोई आवाज नहीं आई | असल में गली में किसी को आता देख गिरधारी आगे बढ़ गया था |
रीमा ने एक दो बार आवाज दी फिर लौट कर नूडल्स खाने लगी |
कोई १० मिनट बाद पीछे की तरफ से दस्तक हुई |
रीमा चौंक गयी | वो कुछ बोली नहीं डर के मारे उसका दिल धकधक करने लगा |
उधर से आवाज आई - मैडम मै पंचर वाला |
रीमा थोड़ा सा जोर डालने पर गिरधारी की आवाज पहचान गयी | वो झोपड़ी के दक्षिण पश्चिम कोने से आवाज दे रहा था | ये कोना मुख्य दरवाजे के ठीक उलट है | रीमा उस कोने के पास आई |
गिरधारी - बाहर बहुत गर्मी है पूरा हलक सुख गया है कुछ पानी और खाने को दे दो | रीमा नूडल्स चट कर चुकी थी |
रीमा - खाने के लिए कुछ नहीं है |
गिरधारी - अरे मैडम देख लो |कुछ फल फलारी काजू मेवा कुछ तो पड़ा होगा | बॉस ने कही न कही कुछ तो रखा होगा |
रीमा को ड्राई फ्रूट याद आ गए | वो एक बोतल में पानी और एक कटोरी में खजूर लेकर आई |
रीमा - लेकिन तुम लोगे कैसे ?
गिरधारी - मैडम बाथरूम में जिस तरह पानी निकलता है उस छेद से बोतल और खजूर पास कर दीजिये | मै कूड़े वाला हूँ कूड़ा समझ बीन लूँगा |
रीमा गिरधारी का जवाब सुनकर हैरान रह गयी | मन ही मन सोचा कैसे जीते है ये लोग |
रीमा वापस आई खजूर को अच्छे से तीन बार पन्नी में पैक किया फिर पानी की बोतल और खजूर एक बड़ी पन्नी में पैक करके उस पर रबर लगा दी | लेकिन जब बाथरूम गयी तो वहां बम्मुश्किल पानी की बोतल भर का छेद था | रीमा ने सारी पैकिंग वापस खोली और फिर एक एक कर खजूर बोतल में डाल दिए | बमुश्किल १०-१२ खजूर ही उसमे भर पाई | बाकि उसमे पानी भरा था | इसके बाद उसके ऊपर पन्नी की एक परत चिपकाकर नाली के जरिये बाहर की तरह खिसका दी | फिर दक्षिण पश्चिम कोने में आकर बोली - जाकर बोतल उठा लो |
गिरधारी - ठीक है मैडम, वैसे कुछ सब्जी वगैरह लाना हो तो बता दो, अँधेरा ढलते ही दे जाऊंगा |
रीमा - नहीं मैंने नूडल्स खा लिए है | अभी तो भूख नहीं है, अब मै नहाने जा रही हूँ | तुमारे पास नंबर तो है न, मै फ़ोन कर दूँगी |
गिरधारी - मुझे बेड के बायीं ततरफ एक सिगरेट की डिब्बी रखी है वो भी उधर ही फेंक देना छेद से | मैडम एक बात पूछु बुरा मत मानना, |
रीमा - बोलो |
गिरधारी - अभी शाम होने जा रही अभी तक आप नहाई नहीं है |
रीमा - नहीं, थोडा सुस्ती लग रही थी, शरीर भी दुःख रहा था इसलिए लेट गयी थी तो नीद आ गयी |
रीमा को सिगरेट की डिब्बी ढूढ़ने में कुछ टाइम लगा | सिगरेट की डिब्बी भी पन्नी में लपेटकर रीमा ने बाथरूम की तरफ से बाहर खिसका दी | हालाँकि जब वो उसके ऊपर पन्नी लपेट रही थी तब उसमे से लोहे की आवाज आ रही थी |
रीमा वापस उसी कोने में आकर - क्या था उस डिब्बी |
गिरधारी - कुछ नहीं मैडम बस हमारे गोला बारूद भण्डार की चाभी है | बॉस का फ़ोन आया था कुछ हथियार ले जाने है अँधेरा होते ही |
रीमा - कोई खतरे की बात तो नहीं |
गिरधारी - नहीं मैडम ये तो हमारा रोज का काम है | अब आप नहा लो | आपका जिस्म का सारा दुःख दर्द दूर हो जायेगा | वैसे मैडम इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद बदन तो दुखेगा ही, ऊपर से दो तरफा ठुकाई के बाद तो और भी हालत ख़राब हो जाती होगी | पता नहीं कैसे आप तो घंटे घंटे भर दो लंड आगे पीछे घोट लेती हो वो भी एक साथ | कमाल हो आप, यहाँ तो ससुरी औरते लंड चूत को छुवा नहीं की साली आसमान सर पर उठा लेती है इतना चीखती चिल्लाती है |
रीमा गिरधारी की बात सुनकर सन्न रह गयी, कुछ बोली नहीं | कुछ देर वही खड़ी रही | गिरधारी ने दो बार मैडम मैडम आवाज दी और फिर उसके जाने की आहट रीमा को सुनाई दी |
रीमा ने गिरधारी के जाने के बाद अपना बिस्तर सही किया फिर बर्तन धुले और फिर नहाने चली गयी | जितेश ने बोला था गिरधारी के मुहँ मत लगना इसलिए गिरधारी की बातो की रीमा ने इग्नोर करने की कोशिश की | रीमा ने बाथरूम में जाकर कपड़े उतारे और नहाने लगी | उसने दरवाजा भी ओट नहीं किया | रीमा ने खुद को खूब मल मल कर रगड़ कर साफ़ करना शुरू किया | ऊपर से नीचे तक | अपने छेदों में भी पानी भर भर कर साफ़ करने लगी | जितेश उसको बोल गया था की वो उसकी आजादी का टिकट लेने गया है | अब वो इस वासना के काले अध्याय को यही छोड़कर एक नयी शुरआत करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ने को प्रतिबद्ध थी |
तभी रीमा को सामने वाले दरवाजे पर कुछ आहट हुई | जब तक वो अपनी विचरण करती तन्द्रा को भंग कर दरवाजे की तरफ ध्यान ले जाती तब तक दरवाजा खुल चूका था | रीमा के दिमाग में जितेश का नाम आया | शायद जल्दी आ गया होगा | रीमा ने बाथरूम का दरवाजा ओट कर लिया, और दराज से झांक कर देखने लगी |
दरवाजा जिस तेजी से खुला था उसी तेजी से बंद हो गया | उस आदमी के हाथ में दो थैले थी मुहँ ढका था, एक में सब्जी और एक में फल | रीमा सतर्क हो गयी, सुबह जितेश उसे एक तेज धार वाला चाकू देकर गया था | वो सुबह से ही उसे अपने लोअर के जेब में रखे हुए थी | लेकिन चूँकि इस वक्त वो नहा रही थी इसलिए उसकी शर्ट लोअर पैंटी तीनो बाथरूम में टंगे थे | रीमा ने अपने जिस्म पर तौलिया खीच के लपेटने की कोशिश की | लेकिन जल्दबाजी में तौलिया फर्श पर जा गिरी | रीमा जब तक तौलिया उठाकर अपने जिस्म को ढकती, वो शख्स सामने खड़ा था और उसने बाथरूम के मुड़े दरवाजा पूरा खोलते हुए , अपने दोनों हाथ के थैले रीमा को दिखाते हुए |
शख्स - ये देखो मैडम जी मै ढेर सारी सब्जी और फल ले आया हूँ, आप जल्दी सी कुछ न कुछ बना दो | अरे आप तो अभी तक नहा ही रही हो, वो भी बिलकुल नंगी होकर | कोई बात नहीं मुझसे कैसी शर्म, मैने आपके जिस्म को ऊपर से ही नहीं अन्दर घुस महसूस कर लिया | मुझसे काहे की हया शर्म |
रीमा अपनी तौलिया समेटती हुई, अपनी हडबडाहट छिपाने की असफल कोशिश करती हुई - तुम कौन गिरधारी ...... सामने से कैसे आ गए ..... ऊ ऊ धर तो ताला पड़ा था |
रीमा ने तपाक से जोर से बाथरूम का दरवाजा भिड़ा लिया | उसकी सांसे तेज तेज चलने लगी | कितना निश्चिन्त होकर नहा रही थी | ये कैसे अन्दर आ गया | रीमा की हालत काटो तो खून नहीं | गिरधारी ने उसे फिर से नंगा देख लिया | क्या सोचता होगा उसके बारे में | छी छी ........................... | उसे तो लगता होगा मै .................... (कुछ सोच नहीं पाई) |
गिरधारी बिलकुल नार्मल दिखने की कोशिश कर रहा था, हालाँकि रीमा को नंगा देखकर उसके दबे अरमान जाग गए |
गिरधारी - मैडम जी ये थैले कहाँ रख दू |
रीमा को अभी भी समझ नहीं आ रहा था आखिर ये अन्दर आया कैसे ?
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Was eagerly waiting for you to come back......
A great story.......!
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WELCOME BACK SIR
नशीली आँखें
वो प्यार क्या जो लफ्ज़ो में बयाँ हो
प्यार वो है जो आँखों में नज़र आए!!
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Welcome, one of the best stories of this forum
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NEXT UPDATE KAB AAYEGA??
नशीली आँखें
वो प्यार क्या जो लफ्ज़ो में बयाँ हो
प्यार वो है जो आँखों में नज़र आए!!
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Not soon probably next month