07-08-2026, 01:53 PM
रात चांदनी थी।
फरवरी की ठंडी रात में चाँद पूरा निकल आया था। गाँव के ऊपर सफेद चाँदनी बिखरी हुई थी। चाचा के घर पर तिलक का कार्यक्रम जोरों पर था। मंगल गीत बज रहे थे, डीजे पर गाँव के लड़के नाच रहे थे। पंडाल से लेकर आँगन तक भीड़ लगी हुई थी। मेहमान, रिश्तेदार, गाँव वाले—सब अपने मस्ती में मग्न। खाने की कतारें लगी थीं, हँसी-मज़ाक की आवाज़ें आ रही थीं।
इतनी भीड़ में भी विक्की की नज़र सिर्फ एक चेहरे पर टिकी हुई थी—रानी आंटी मेरी माँ गाँवके हर लड़को की सपनो की रानी गाँवके लड़के उनकी आटी कहते थे रानी आंटी।
रानी सिंह। गाँव की सबसे सुंदर और खूबसूरत औरत। चार जवान बच्चों की माँ होने के बावजूद जवानी अभी भी उसके जिस्म में कसी हुई थी। साड़ी में बँधा गठीला शरीर, गोल और भारी छातियाँ, लंबी गर्दन, और वो मुस्कान जो देखकर हर युवा का दिल धड़क उठता था। विक्की सालों से उसी के पीछे दीवाना था। रात-रात भर छत पर खड़ा रहता, गली में घूमता, कभी-कभी फोन पर अपना प्यार जताता। रानी हर बार डाँटती और फोन काट देती, पर विक्की नहीं मानता था।
आज भी वही हाल था। तिलक खत्म होने के बाद रानी थक चुकी थी। चाची से उसका ज्यादा बनता नहीं था, इसलिए उसने पति से कहा—
“मैं घर जा रही हूँ। तुम लोग बाद में आ जाना।”
पति ने सिर हिला दिया। रानी निकली।
रात करीब आठ-नौ बज रहे थे। गाँव के दूसरे छोर पर उनका घर था। रास्ता खेतों के बीच से होकर जाता था। चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था—रास्ते की मिट्टी, खेतों की मेड़, और दूर लहराते गेहूँ के सुनहरे पौधे।
रानी अकेली चल रही थी कि पीछे से कदमों की आहट आई। विक्की था।
कुछ दूर तक दोनों चुपचाप चले। फिर विक्की पास आकर बोला—
“रानी आंटी… आप मुझसे नाराज हो क्या? बात ही नहीं करतीं।”
रानी ने बिना रुके जवाब दिया—
“तुम पागल हो विक्की। मैं शादीशुदा औरत हूँ। चार जवान बच्चों की माँ। तुम्हारी उम्र का मेरा बेटा है। जाओ, कोई जवान लड़की ढूँढो।”
विक्की हँसा। चाँदनी में उसका चेहरा साफ दिख रहा था। आँखों में भूख और पागलपन दोनों थे।
“आप आज भी पूरी जवान हो। गाँव में कौन है जो आपके नाम से मूठ नहीं मारता? मैं तो रोज सपना देखता हूँ… आपकी ये छातियाँ दबाने का, चूसने का, और आपको चोदने का।”
रानी की चाल धीमी पड़ गई। वह शर्मा गई, पर सख्त आवाज़ में बोली—
“तो जाकर तुम भी मारो और खुश रहो । मेरा पीछा छोडो । अब मुझे मत छेड़ो जाओ यहाँ से ।”
विक्की ने अचानक पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“रानी आंटी… आज की रात मान जाओ। देखो, मन तो आपका भी है। डर रही हो बस। कोई नहीं देखेगा। एक बार ट्राई कर लो… मजा न आए तो फिर कभी नहीं पूछूँगा। चोद के खुश कर दूँगा।”
रानी ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, पर विक्की ने और कस लिया।
“छोड़ो… कोई देख लेगा तो…”
“कोई नहीं है इधर।” विक्की की आवाज़ नरम हो गई। “घर तक मुझे अपने शॉल में ले लो। सिर्फ तुम्हारे जिस्म की गर्मी महसूस करने दो।”
रानी कुछ देर चुप रही। ठंडी हवा चल रही थी। चाँद की रोशनी में विक्की की आँखें चमक रही थीं। आखिरकार वह मान गई। उसने शॉल खोला। विक्की अंदर आ गया। दोनों के जिस्म चिपक गए।
अब वे साथ-साथ चल रहे थे। विक्की की बाँह रानी की कमर पर थी। थोड़ी दूर जाने के बाद उसने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और शॉल के अंदर से उसकी एक छाती को पकड़ लिया। ब्लाउज़ के ऊपर से ही दबाया।
“ये क्या कर रहे हो… हटाओ…” रानी की आवाज़ काँप गई।
“दबाने दो ना रानी… कितने सपने देखे हैं इनको दबाने के। रोज सोचता हूँ जब मिलेंगी तो मन भर दबाऊँगा… दूध उतार दूँगा।”
रानी चुप रही। विक्की मौका पाकर और जोर से दबाने लगा। निप्पल को दो उँगलियों में लेकर मसलने लगा। रानी के मुँह से एक दबी हुई “अह्ह…” निकल गई। उसकी छातियाँ उम्र के बावजूद अभी भी कसी हुई और भारी थीं। बिना ब्रा के भी टाइट।
खेत के किनारे पहुँचते-पहुँचते विक्की ने ब्लाउज़ के दो हुक खोल दिए थे। नंगी गोल छातियाँ अब उसकी हथेलियों में थीं। चाँदनी में वे और भी सुंदर लग रही थीं—गोल, भारी, और सख्त निप्पलों वाली।
वहाँ पहुँचकर विक्की रुक गया।
“रानी आंटी… थोड़ी देर यहाँ बैठते हैं।”
“नहीं… घर चलो।”
पर विक्की नीचे बैठ चुका था। उसने रानी का हाथ पकड़कर धीरे से खींचा। गेहूँ के पौधे हवा में लहरा रहे थे। चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था—रानी का चेहरा, उसकी अधखुली छातियाँ, और विक्की की भूखी आँखें।
रानी झिझकी, फिर धीरे से बैठ गई।
विक्की तुरंत पास आ गया। उसने दोनों हाथों से उसका चेहरा थामा और आँखों में आँखें डालकर बोला—
“तुम कितनी खूबसूरत हो… चाँदनी में और भी।”
फिर उसने होंठ उसके गाल पर रख दिए। धीरे-धीरे गर्दन पर, फिर कान के पास। जीभ से चाटते हुए नीचे गया। रानी की साँसें तेज़ हो गईं। विक्की ने ब्लाउज़ के बाकी हुक भी खोल दिए। दोनों छातियाँ पूरी तरह नंगी हो गईं। ठंडी हवा लगते ही निप्पल सख्त हो उठे।
विक्की ने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया। पहले धीरे दबाया, फिर निप्पलों को मुँह में ले लिया। जीभ घुमाते हुए जोर-जोर से चूसने लगा। एक को चूसता, दूसरे को हाथ से मसलता। रानी का सिर पीछे की ओर झुक गया। एक हाथ विक्की के बालों में उलझ गया।
“उम्म्म… विक्की… धीरे… बहुत जोर से…”
“नहीं रानी… सालों से तड़प रहा हूँ। आज पूरा चूस लूँगा।”
वह लंबे समय तक सिर्फ उसकी छातियों पर टिका रहा। कभी धीरे चाटता, कभी जोर से चूसता, कभी दाँतों से हल्के से काटता। रानी की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। उसकी कमर अपने आप हिलने लगी थी।
फिर विक्की ने उसे धीरे से लिटा दिया। गेहूँ के पौधों पर लेटी रानी चाँद की रोशनी में जैसी लग रही थी, वैसी पहले कभी नहीं लगी थी। उसने साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर सरका दिए। जाँघें अलग कीं। चाँदनी में उसका गीला योनि द्वार चमक रहा था।
विक्की ने पहले उँगलियों से छुआ। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रानी की कमर उठने लगी।
“तुम कितनी गीली हो आंटी… शरीर तो बहुत पहले से तैयार था।”
फिर उसने मुँह नीचे किया। जीभ निकालकर उसके गीले भाग पर लगाया। ऊपर से नीचे तक चाटने लगा, फिर क्लिट पर घुमाने लगा। रानी के दोनों हाथ विक्की के बालों में उलझ गए। उसकी टाँगें काँप रही थीं।
“आह्ह्ह… विक्की… मत करो ऐसा… मैं… मैं…”
विक्की नहीं रुका। वह तब तक चाटता और चूसता रहा जब तक रानी का शरीर जोर से नहीं काँप गया। पहली बार वह चरम पर पहुँची। उसके मुँह से लंबी कराह निकली और जाँघें विक्की के सिर को जकड़ गईं।
विक्की उठकर बैठा। उसने अपनी पैंट पूरी तरह उतार दी। सख्त, गर्म और मोटा लंड बाहर निकल आया। चाँदनी में वह चमक रहा था। उसने रानी की हथेली पकड़कर उस पर रख दी।
“छू लो… देखो कितना तुम्हारे लिए तड़प रहा है।”
रानी की उँगलियाँ अपने आप मुड़ गईं। उसने पकड़ा और ऊपर-नीचे करने लगी। विक्की कराह उठा। फिर वह रानी के ऊपर आ गया। जाँघें और चौड़ी कीं। लंड का सिरा उसके गीले द्वार पर रख दिया और आँखों में आँखें डालकर पूछा—
“बोलो रानी… आज की रात तुम मेरी हो ना?”
रानी की आँखें शर्म और इच्छा से भरी थीं। वह कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सिर हिला दिया।
विक्की ने एक झटके में अंदर धकेल दिया।
“आह्ह्ह…!” रानी की चीख खेत में गूँज गई।
पूरा लंड एकदम अंदर तक समा गया। विक्की रुका नहीं। उसने तुरंत गति शुरू कर दी—पहले धीरे, फिर तेज़। हर धक्के के साथ रानी की भारी छातियाँ काँप रही थीं। विक्की एक हाथ से उन्हें मसलता, दूसरे से कमर पकड़कर और गहराई तक घुसाता।
“रानी… तुम कितनी टाइट हो… सालों से किसी ने इतनी गहराई तक नहीं छुआ होगा…”
वह लंबे समय तक उसी पोजीशन में चोदता रहा। कभी धीरे, कभी जोर से। रानी की कराहें अब साफ सुनाई दे रही थीं। उसकी टाँगें विक्की की कमर में लिपट चुकी थीं।
फिर विक्की ने उसे पलट दिया। अब रानी घुटनों और हाथों के बल थी। पीछे से उसने फिर से घुसा दिया। दोनों हाथों से उसकी छातियों को पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगा और नीचे से जोरदार धक्के लगाने लगा।
“देखो रानी… चाँदनी में तुम्हारा ये रूप… मैं पागल हो रहा हूँ।”
वह इस पोजीशन में भी देर तक चोदता रहा। कभी धीमा करके अंदर तक दबाए रखता, कभी तेज़ धक्के लगाता। रानी का शरीर बार-बार काँप रहा था। दूसरी बार वह फिर चरम पर पहुँची। उसके योनि से पानी की तरह तरल निकल रहा था।
विक्की अभी भी सख्त था। उसने रानी को फिर से सीधा लिटाया। इस बार उसने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी गहराई तक घुसने लगा। हर धक्के के साथ रानी की चीखें निकल रही थीं।
“आह्ह… विक्की… बहुत गहरा… रुक… थोड़ा…”
“नहीं रानी… आज रात भर चोदूँगा तुम्हें। सालों का हिसाब चुकता करना है।”
चाँद धीरे-धीरे आसमान में घूम रहा था। ठंडी हवा चल रही थी, पर दोनों के जिस्म पसीने से तर थे। विक्की ने रानी को अपनी गोद में बैठा लिया। अब रानी ऊपर थी। उसने खुद ही कमर हिलानी शुरू कर दी। विक्की नीचे से धक्के लगा रहा था और दोनों हाथों से उसकी छातियों को मुँह में ले-लेकर चूस रहा था।
इस तरह वे घंटों तक चोदते रहे। कभी रानी ऊपर, कभी विक्की। कभी साइड में लेटकर, कभी घुटनों के बल। विक्की बार-बार उसके अंदर पानी छोड़ता, थोड़ा आराम करता, फिर से सख्त होकर फिर से घुस जाता। रानी भी बार-बार भीगती और काँपती रही। उसकी आवाज़ अब पूरी तरह खुल चुकी थी—कभी कराह, कभी चीख, कभी विक्की का नाम।
रात के दो बज गए होंगे जब विक्की ने आखिरी बार उसे जोर से चोदा। दोनों एक साथ पहुँचे। विक्की ने गहराई तक धकेलकर अपना सारा गर्म तरल उसके अंदर छोड़ दिया। रानी का शरीर काँपता हुआ उसके नीचे पिघल गया।
लंबे समय तक दोनों वैसे ही पड़े रहे। साँसें भारी थीं। चाँद अभी भी चमक रहा था। गेहूँ के पौधे धीरे-धीरे लहरा रहे थे।
विक्की ने धीरे से रानी के बालों को सहलाया। उसके कान के पास मुँह लाकर फुसफुसाया—
“रानी… ये आखिरी बार नहीं होगा। जब भी मौका मिलेगा… मैं फिर आऊँगा। तुम्हें फिर चोदूँगा।”
रानी चुप थी। उसकी आँखें बंद थीं। लेकिन उसके थके और संतुष्ट जिस्म ने पहले ही जवाब दे दिया था।
वह जानती थी—ये सचमुच आखिरी बार नहीं था।
फरवरी की ठंडी रात में चाँद पूरा निकल आया था। गाँव के ऊपर सफेद चाँदनी बिखरी हुई थी। चाचा के घर पर तिलक का कार्यक्रम जोरों पर था। मंगल गीत बज रहे थे, डीजे पर गाँव के लड़के नाच रहे थे। पंडाल से लेकर आँगन तक भीड़ लगी हुई थी। मेहमान, रिश्तेदार, गाँव वाले—सब अपने मस्ती में मग्न। खाने की कतारें लगी थीं, हँसी-मज़ाक की आवाज़ें आ रही थीं।
इतनी भीड़ में भी विक्की की नज़र सिर्फ एक चेहरे पर टिकी हुई थी—रानी आंटी मेरी माँ गाँवके हर लड़को की सपनो की रानी गाँवके लड़के उनकी आटी कहते थे रानी आंटी।
रानी सिंह। गाँव की सबसे सुंदर और खूबसूरत औरत। चार जवान बच्चों की माँ होने के बावजूद जवानी अभी भी उसके जिस्म में कसी हुई थी। साड़ी में बँधा गठीला शरीर, गोल और भारी छातियाँ, लंबी गर्दन, और वो मुस्कान जो देखकर हर युवा का दिल धड़क उठता था। विक्की सालों से उसी के पीछे दीवाना था। रात-रात भर छत पर खड़ा रहता, गली में घूमता, कभी-कभी फोन पर अपना प्यार जताता। रानी हर बार डाँटती और फोन काट देती, पर विक्की नहीं मानता था।
आज भी वही हाल था। तिलक खत्म होने के बाद रानी थक चुकी थी। चाची से उसका ज्यादा बनता नहीं था, इसलिए उसने पति से कहा—
“मैं घर जा रही हूँ। तुम लोग बाद में आ जाना।”
पति ने सिर हिला दिया। रानी निकली।
रात करीब आठ-नौ बज रहे थे। गाँव के दूसरे छोर पर उनका घर था। रास्ता खेतों के बीच से होकर जाता था। चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था—रास्ते की मिट्टी, खेतों की मेड़, और दूर लहराते गेहूँ के सुनहरे पौधे।
रानी अकेली चल रही थी कि पीछे से कदमों की आहट आई। विक्की था।
कुछ दूर तक दोनों चुपचाप चले। फिर विक्की पास आकर बोला—
“रानी आंटी… आप मुझसे नाराज हो क्या? बात ही नहीं करतीं।”
रानी ने बिना रुके जवाब दिया—
“तुम पागल हो विक्की। मैं शादीशुदा औरत हूँ। चार जवान बच्चों की माँ। तुम्हारी उम्र का मेरा बेटा है। जाओ, कोई जवान लड़की ढूँढो।”
विक्की हँसा। चाँदनी में उसका चेहरा साफ दिख रहा था। आँखों में भूख और पागलपन दोनों थे।
“आप आज भी पूरी जवान हो। गाँव में कौन है जो आपके नाम से मूठ नहीं मारता? मैं तो रोज सपना देखता हूँ… आपकी ये छातियाँ दबाने का, चूसने का, और आपको चोदने का।”
रानी की चाल धीमी पड़ गई। वह शर्मा गई, पर सख्त आवाज़ में बोली—
“तो जाकर तुम भी मारो और खुश रहो । मेरा पीछा छोडो । अब मुझे मत छेड़ो जाओ यहाँ से ।”
विक्की ने अचानक पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“रानी आंटी… आज की रात मान जाओ। देखो, मन तो आपका भी है। डर रही हो बस। कोई नहीं देखेगा। एक बार ट्राई कर लो… मजा न आए तो फिर कभी नहीं पूछूँगा। चोद के खुश कर दूँगा।”
रानी ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, पर विक्की ने और कस लिया।
“छोड़ो… कोई देख लेगा तो…”
“कोई नहीं है इधर।” विक्की की आवाज़ नरम हो गई। “घर तक मुझे अपने शॉल में ले लो। सिर्फ तुम्हारे जिस्म की गर्मी महसूस करने दो।”
रानी कुछ देर चुप रही। ठंडी हवा चल रही थी। चाँद की रोशनी में विक्की की आँखें चमक रही थीं। आखिरकार वह मान गई। उसने शॉल खोला। विक्की अंदर आ गया। दोनों के जिस्म चिपक गए।
अब वे साथ-साथ चल रहे थे। विक्की की बाँह रानी की कमर पर थी। थोड़ी दूर जाने के बाद उसने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और शॉल के अंदर से उसकी एक छाती को पकड़ लिया। ब्लाउज़ के ऊपर से ही दबाया।
“ये क्या कर रहे हो… हटाओ…” रानी की आवाज़ काँप गई।
“दबाने दो ना रानी… कितने सपने देखे हैं इनको दबाने के। रोज सोचता हूँ जब मिलेंगी तो मन भर दबाऊँगा… दूध उतार दूँगा।”
रानी चुप रही। विक्की मौका पाकर और जोर से दबाने लगा। निप्पल को दो उँगलियों में लेकर मसलने लगा। रानी के मुँह से एक दबी हुई “अह्ह…” निकल गई। उसकी छातियाँ उम्र के बावजूद अभी भी कसी हुई और भारी थीं। बिना ब्रा के भी टाइट।
खेत के किनारे पहुँचते-पहुँचते विक्की ने ब्लाउज़ के दो हुक खोल दिए थे। नंगी गोल छातियाँ अब उसकी हथेलियों में थीं। चाँदनी में वे और भी सुंदर लग रही थीं—गोल, भारी, और सख्त निप्पलों वाली।
वहाँ पहुँचकर विक्की रुक गया।
“रानी आंटी… थोड़ी देर यहाँ बैठते हैं।”
“नहीं… घर चलो।”
पर विक्की नीचे बैठ चुका था। उसने रानी का हाथ पकड़कर धीरे से खींचा। गेहूँ के पौधे हवा में लहरा रहे थे। चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था—रानी का चेहरा, उसकी अधखुली छातियाँ, और विक्की की भूखी आँखें।
रानी झिझकी, फिर धीरे से बैठ गई।
विक्की तुरंत पास आ गया। उसने दोनों हाथों से उसका चेहरा थामा और आँखों में आँखें डालकर बोला—
“तुम कितनी खूबसूरत हो… चाँदनी में और भी।”
फिर उसने होंठ उसके गाल पर रख दिए। धीरे-धीरे गर्दन पर, फिर कान के पास। जीभ से चाटते हुए नीचे गया। रानी की साँसें तेज़ हो गईं। विक्की ने ब्लाउज़ के बाकी हुक भी खोल दिए। दोनों छातियाँ पूरी तरह नंगी हो गईं। ठंडी हवा लगते ही निप्पल सख्त हो उठे।
विक्की ने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया। पहले धीरे दबाया, फिर निप्पलों को मुँह में ले लिया। जीभ घुमाते हुए जोर-जोर से चूसने लगा। एक को चूसता, दूसरे को हाथ से मसलता। रानी का सिर पीछे की ओर झुक गया। एक हाथ विक्की के बालों में उलझ गया।
“उम्म्म… विक्की… धीरे… बहुत जोर से…”
“नहीं रानी… सालों से तड़प रहा हूँ। आज पूरा चूस लूँगा।”
वह लंबे समय तक सिर्फ उसकी छातियों पर टिका रहा। कभी धीरे चाटता, कभी जोर से चूसता, कभी दाँतों से हल्के से काटता। रानी की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। उसकी कमर अपने आप हिलने लगी थी।
फिर विक्की ने उसे धीरे से लिटा दिया। गेहूँ के पौधों पर लेटी रानी चाँद की रोशनी में जैसी लग रही थी, वैसी पहले कभी नहीं लगी थी। उसने साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर सरका दिए। जाँघें अलग कीं। चाँदनी में उसका गीला योनि द्वार चमक रहा था।
विक्की ने पहले उँगलियों से छुआ। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रानी की कमर उठने लगी।
“तुम कितनी गीली हो आंटी… शरीर तो बहुत पहले से तैयार था।”
फिर उसने मुँह नीचे किया। जीभ निकालकर उसके गीले भाग पर लगाया। ऊपर से नीचे तक चाटने लगा, फिर क्लिट पर घुमाने लगा। रानी के दोनों हाथ विक्की के बालों में उलझ गए। उसकी टाँगें काँप रही थीं।
“आह्ह्ह… विक्की… मत करो ऐसा… मैं… मैं…”
विक्की नहीं रुका। वह तब तक चाटता और चूसता रहा जब तक रानी का शरीर जोर से नहीं काँप गया। पहली बार वह चरम पर पहुँची। उसके मुँह से लंबी कराह निकली और जाँघें विक्की के सिर को जकड़ गईं।
विक्की उठकर बैठा। उसने अपनी पैंट पूरी तरह उतार दी। सख्त, गर्म और मोटा लंड बाहर निकल आया। चाँदनी में वह चमक रहा था। उसने रानी की हथेली पकड़कर उस पर रख दी।
“छू लो… देखो कितना तुम्हारे लिए तड़प रहा है।”
रानी की उँगलियाँ अपने आप मुड़ गईं। उसने पकड़ा और ऊपर-नीचे करने लगी। विक्की कराह उठा। फिर वह रानी के ऊपर आ गया। जाँघें और चौड़ी कीं। लंड का सिरा उसके गीले द्वार पर रख दिया और आँखों में आँखें डालकर पूछा—
“बोलो रानी… आज की रात तुम मेरी हो ना?”
रानी की आँखें शर्म और इच्छा से भरी थीं। वह कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सिर हिला दिया।
विक्की ने एक झटके में अंदर धकेल दिया।
“आह्ह्ह…!” रानी की चीख खेत में गूँज गई।
पूरा लंड एकदम अंदर तक समा गया। विक्की रुका नहीं। उसने तुरंत गति शुरू कर दी—पहले धीरे, फिर तेज़। हर धक्के के साथ रानी की भारी छातियाँ काँप रही थीं। विक्की एक हाथ से उन्हें मसलता, दूसरे से कमर पकड़कर और गहराई तक घुसाता।
“रानी… तुम कितनी टाइट हो… सालों से किसी ने इतनी गहराई तक नहीं छुआ होगा…”
वह लंबे समय तक उसी पोजीशन में चोदता रहा। कभी धीरे, कभी जोर से। रानी की कराहें अब साफ सुनाई दे रही थीं। उसकी टाँगें विक्की की कमर में लिपट चुकी थीं।
फिर विक्की ने उसे पलट दिया। अब रानी घुटनों और हाथों के बल थी। पीछे से उसने फिर से घुसा दिया। दोनों हाथों से उसकी छातियों को पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगा और नीचे से जोरदार धक्के लगाने लगा।
“देखो रानी… चाँदनी में तुम्हारा ये रूप… मैं पागल हो रहा हूँ।”
वह इस पोजीशन में भी देर तक चोदता रहा। कभी धीमा करके अंदर तक दबाए रखता, कभी तेज़ धक्के लगाता। रानी का शरीर बार-बार काँप रहा था। दूसरी बार वह फिर चरम पर पहुँची। उसके योनि से पानी की तरह तरल निकल रहा था।
विक्की अभी भी सख्त था। उसने रानी को फिर से सीधा लिटाया। इस बार उसने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी गहराई तक घुसने लगा। हर धक्के के साथ रानी की चीखें निकल रही थीं।
“आह्ह… विक्की… बहुत गहरा… रुक… थोड़ा…”
“नहीं रानी… आज रात भर चोदूँगा तुम्हें। सालों का हिसाब चुकता करना है।”
चाँद धीरे-धीरे आसमान में घूम रहा था। ठंडी हवा चल रही थी, पर दोनों के जिस्म पसीने से तर थे। विक्की ने रानी को अपनी गोद में बैठा लिया। अब रानी ऊपर थी। उसने खुद ही कमर हिलानी शुरू कर दी। विक्की नीचे से धक्के लगा रहा था और दोनों हाथों से उसकी छातियों को मुँह में ले-लेकर चूस रहा था।
इस तरह वे घंटों तक चोदते रहे। कभी रानी ऊपर, कभी विक्की। कभी साइड में लेटकर, कभी घुटनों के बल। विक्की बार-बार उसके अंदर पानी छोड़ता, थोड़ा आराम करता, फिर से सख्त होकर फिर से घुस जाता। रानी भी बार-बार भीगती और काँपती रही। उसकी आवाज़ अब पूरी तरह खुल चुकी थी—कभी कराह, कभी चीख, कभी विक्की का नाम।
रात के दो बज गए होंगे जब विक्की ने आखिरी बार उसे जोर से चोदा। दोनों एक साथ पहुँचे। विक्की ने गहराई तक धकेलकर अपना सारा गर्म तरल उसके अंदर छोड़ दिया। रानी का शरीर काँपता हुआ उसके नीचे पिघल गया।
लंबे समय तक दोनों वैसे ही पड़े रहे। साँसें भारी थीं। चाँद अभी भी चमक रहा था। गेहूँ के पौधे धीरे-धीरे लहरा रहे थे।
विक्की ने धीरे से रानी के बालों को सहलाया। उसके कान के पास मुँह लाकर फुसफुसाया—
“रानी… ये आखिरी बार नहीं होगा। जब भी मौका मिलेगा… मैं फिर आऊँगा। तुम्हें फिर चोदूँगा।”
रानी चुप थी। उसकी आँखें बंद थीं। लेकिन उसके थके और संतुष्ट जिस्म ने पहले ही जवाब दे दिया था।
वह जानती थी—ये सचमुच आखिरी बार नहीं था।


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