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Fantasy Maria ki yatra erotic sex story
#1
मेरा नाम मारिया है। 37 साल की उम्र में, एक पति और बेटे के साथ, मेरी जिंदगी दिल्ली की उसी चक्की में पिस रही थी, जिसे हम सुविधा और दायित्व कहते हैं। रोज़ का अकेलापन, उस शोर में खोया हुआ जो मैंने खुद बनाया था, मुझे अंदर से खोखला कर रहा था। तभी एक दिन, मैंने कांवड़ यात्रा के बारे में सुना। शायद ये भक्त, अपनी दुनिया में इतने खोए हुए, मुझे खुद से मिलने में मदद कर सकते थे।

मैंने अपनी सबसे अच्छी साड़ी निकाली - एक चमकदार पीली साड़ी, जो मेरे गोरे शरीर पर आग की तरह चमकती थी। मैं तैयार होकर उस शोर और भीड़ में शामिल हो गई। शुरुआत में मुझे अजीब लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जत्था आगे बढ़ता गया, मैं उस ऊर्जा का हिस्सा बनती गई। कुछ देर बाद, एक बूढ़े साधु ने मुझे एक कटोरा भांग थमा दी। मैंने संकोच किया, लेकिन फिर सोचा, 'अब और क्या बिगाड़ना है?'

पहला घूँट कड़वा था, लेकिन उसके बाद का स्वाद मीठा और भारी था। मेरे सिर में एक अजीब सी गुंजाइश शुरू हो गई। फिर कुछ युवाओं ने चरस का एक चिलम पास किया। मैंने पहले तो मना किया, लेकिन एक लड़के ने कहा, "दीदी, भोले की यात्रा में रोक-टोक क्या?" मैं हँस पड़ी और उसे ले लिया। धुएँ के पहले कश ने मेरे फेफड़ों को जलाया, लेकिन उसके बाद आई वह लहर, उस भांग के मिलन से, मुझे एक दूसरी दुनिया में ले गई।

मेरे शरीर के हर अंग में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई। डमरू की थाप और 'बम बम भोले' के जयकारे, मेरी धड़कनों से टकरा रहे थे। मेरे पैर अपने आप थिरकने लगे। मैं उस भीड़ में घूमती रही, एक अजीब सी आज़ादी महसूस करते हुए। मेरी पीली साड़ी उड़ते हुए एक आकर्षक दृश्य बना रही थी। जल्द ही, कुछ युवा लड़के मेरे चारों ओर नाचने लगे। शुरुआत में उनका स्पर्श आकस्मिक था, लेकिन जब मैंने उन्हें रोका नहीं, तो वे बोल्ड होते गए। एक हाथ मेरी कमर पर आ गया, दूसरा मेरे कंधे पर। मैं झिझकी नहीं, बल्कि उस स्पर्श को महसूस करते हुए और ज़ोर से नाचने लगी। वह भारी स्पर्श मुझे जीवंत कर रहा था।

भीड़ में, मेरी नज़र एक लड़के पर पड़ी। वह बाकियों से अलथा था। उसका रंग घना काला था, जैसे काले मोती का टुकड़ा। उसकी आँखें चमक रही थीं और उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी। वह मुझे देख रहा था, बिना किसी झिझक के। मैं उसकी ओर आकर्षित होने लगी, जैसे कोई चिड़िया दूसरे रंग के पंखों की ओर मोहित हो जाती है। 

उसने धीरे-धीरे मेरी ओर कदम बढ़ाए। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, न कि डर से, बल्कि किसी नई शुरुआत की बेचैनी से। वह मेरे सामने आकर खड़ा हो गया, उसकी आँखों में एक आग थी जो मेरी बस में नहीं थी। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और मेरे कमर के करीब लाकर धीरे से छुआ। मैंने उसे रोका नहीं। मेरे शरीर ने अनुमति दे दी थी।

उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया। उसका छूता हुआ हाथ मेरी साड़ी के पतले कपड़े के नीचे जलती हुई त्वचा को महसूस कर रहा था। हम दोनों थिरकने लगे, पहले सामने से सामने। उसकी आँखें मेरी आँखों में थीं। उसकी साँसें मेरी साँसों से टकरा रही थीं। मैंने महसूस किया कि मैं कितनी सालों बाद इतनी ज़िंदा महसूस कर रही हूँ।

फिर अचानक, वह पीछे मुड़ा और मुझे अपनी ओर खींच लिया। अब मेरी पीठ उसके सीने से चिपकी थी। उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रख दिए और मुझे अपने साथ झुला दिया। डीजे की धुन तेज़ हो गई थी। हमारा ड्राई हम्पिंग डांस शुरू हो गया था। उसका कठोर शरीर मेरी नरम पीठ से रगड़ खा रहा था। मैं महसूस कर सकती थी कि वह कितना उत्तेजित हो रहा था। मैं भी उसी आग में जल रही थी।

मैंने अपना सिर पीछे करके उसके कंधे पर टिका दिया। उसने मेरे गाल पर एक गहरी, लंबी साँस छोड़ी। मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर उसके बालों में फेर दिया। हमारी इस तरह की नाचते हुए बदतमीज़ी देखकर कुछ लोग हमें घूर रहे थे, लेकिन हम दोनों को फर्क नहीं पड़ रहा था। हम अपनी दुनिया में खोए हुए थे।

उसने धीरे से मेरे कान में कहा, "तुम बहुत खूबसूरत हो।" मेरे शरीर में एक करंट दौड़ गया। उसकी आवाज़ में एक जादू था। फिर उसने मेरे गले पर एक नरम चुम्मा लिया। मैं सिहर उठी।

उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे भीड़ से बाहर खींच लिया। हम एक खड़ी हुई वैन की ओर बढ़े, जहाँ से कांवड़ का डीजे बज रहा था। उसने वैन का दरवाज़ा खोला और मुझे अंदर खींच लिया। अंदर अंधेरा था, सिवाय उन रंगीन लाइटों के जो डीजे सेट के पास बज रही थीं। बाहर का शोर धुआँ हो गया था।

वैन के अंदर, उसने मुझे दीवार से चिपका लिया। फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुम्मा नहीं था। यह एक भूख की तरह था। उसकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी। मैं भी उसका साथ दे रही थी। हम एक-दूसरे को चूस रहे थे, जैसे हमें एक-दूसरे का रस पीना हो।

उसके हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे। 


उसके हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे। उसने मेरी साड़ी के पल्ले को खींचकर अलग कर दिया। मेरा ब्लाउज उसकी आग के सामने बेबस लग रहा था। उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए, एक-एक करके, धीरे-धीरे, जैसे कोई अपना सबसे कीमती तोहफा खोल रहा हो। जैसे ही आखिरी हुक खुला, मेरी चूचियाँ आज़ाद होकर उसके सामने लहरा गईं। उसने एक गहरी साँस ली और उन्हें अपने हाथों में ले लिया। उसके खुरदरे हाथ मेरी नरम त्वचा को छूते हुए एक नई आग पैदा कर रहे थे।

वह मेरी चूचियों को दबा रहा था, मसल रहा था। मैं सिसक रही थी, आनंद से मेरी आँखों से आँसू आ रहे थे। फिर वह झुककर उन्हें चूसने लगा। पहले एक को, फिर दूसरे को। उसके दाँत धीरे-धीरे मेरी निपल को काट रहे थे, जिससे मुझे एक सुखद दर्द हो रहा था। मेरे हाथ उसके बालों में उलझे हुए थे। मैं उसे और अपने शरीर से चिपका रही थी।

कुछ देर बाद, वह सीधा हुआ और अपनी पैंट का बटन खोला। उसका लंड कड़क कर बाहर आया। यह देखकर मैं एक पल के लिए घबरा गई, लेकिन फिर मैंने उसे देखा। उसके चेहरे पर वही वासना थी, जो मेरे अंदर भी थी। मैं धीरे से घुटनों के बल बैठ गई और उसके लंड को अपने हाथ में ले लिया। यह गर्म और कठोर था। मैंने उसे धीरे से आगे-पीछे करना शुरू किया।

फिर मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया। यह मेरे लिए पहली बार था। मैंने उसे चूसना शुरू किया, जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप चूसता है। उसके मुँह से आह निकली। उसने मेरे सिर को पकड़ लिया और मुझे अपने लंड पर धकेलने लगा। मैं गले तक उसे ले रही थी। मुझे उसका स्वाद अच्छा लग रहा था।

हम इसी में खोए हुए थे कि अचानक वैन का दरवाज़ा खटकाया गया। हम दोनों डर के मारे सिहर गए। उसने जल्दी से अपनी पैंट ठीक की और मैंने अपना ब्लाउज। जब तक हम संभलते, दरवाज़ा खुल गया। बाहर एक और लड़का था, जो उसका दोस्त लग रहा था। उसने हमें देखकर एक शैतानी मुस्कान दी और कहा, "क्या बात है राजा, अंदर ही मज़ा लुट रहा है?"

मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया, लेकिन वह लड़का बिल्कुल घबराया नहीं। उसने कहा, "आओ बाहर, यात्रा शुरू होने वाली है।" फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे वैन से बाहर निकाला। हम फिर से उस भीड़ में शामिल हो गए।

अब हम तीनों साथ-साथ चल रहे थे। वह काला लड़का मेरे बिल्कुल करीब था। उसका हाथ फिर से मेरी बेली पर था। इस बार वह साड़ी के ऊपर से ही नहीं, बल्कि साड़ी और ब्लाउज के बीच में घुसा हुआ था। 


उसकी उंगलियां मेरी बेली की नरम त्वचा पर नाच रही थीं। हम चल रहे थे, और हर कदम के साथ उसका हाथ मेरी त्वचा पर एक नई आग लगा रहा था। उसका दोस्त भी हमारे करीब ही चल रहा था, और वह भी मुझे घूर रहा था। मैं उसकी नज़रों से घबरा नहीं रही थी, बल्कि उसकी इस बेशर्मी से और उत्तेजित हो रही थी।

रास्ते में, जब भी कोई गाना बजता, तो हम थोड़ी देर रुक जाते। वह काला लड़का मुझे अपने साथ नाचने के लिए खींच लेता। उसका हाथ मेरी कमर पर होता, और कभी-कभी वह नीचे उतरकर मेरी गांड पर थप्पड़ मार देता। मैं चौंक जाती, लेकिन फिर हँस पड़ती। वह मेरी गांड को दबाता, उसे मसलता। मैं महसूस कर सकती थी कि मेरी पैंटी गीली होने वाली थी।

उसका दोस्त भी अब मेरे करीब आ गया था। वह मेरे दूसरी तरफ खड़ा होता और उसका हाथ मेरी पीठ पर घूमने लगता। मुझे दो हाथों का स्पर्श एक साथ मिल रहा था। मैं उन दोनों के बीच फँसी हुई थी, और मुझे यह बहुत अच्छा लग रहा था। मैं एक रानी की तरह महसूस कर रही थी, जिसके दो दास उसकी सेवा में लगे हुए थे।

आखिरकार, हम गंतव्य पर पहुँच गए। वहाँ एक विशाल मैदान था, जहाँ हज़ारों लोग इकट्ठा थे। कुछ महिलाएं और पुरुष जश्न में खोए हुए थे। कुछ महिलाएं इतनी उत्तेजित थीं कि उन्होंने अपनी साड़ियाँ उतार दी थीं और सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में नाच रही थीं। उनके शरीर पर पसीना चमक रहा था, और वे बिना किसी परवाह के झूम रही थीं।

मेरा साथी और उसका दोस्त भी उसी ऊर्जा में आ गए। उन्होंने मुझे भी नाचने के लिए कहा। मैंने झिझक नहीं। मैं भी उनके साथ झूमने लगी। डीजे की धुन तेज़ थी, और हम सब एक हुए हुए थे।

अचानक, उस काले लड़के ने मेरी साड़ी का पल्ला पकड़कर खींच दिया। मेरी साड़ी ढीली होकर मेरे पैरों पर गिर गई। मैं सिर्फ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में थी। भीड़ ने तालियाँ बजाईं। मैं शर्म से पानी में नहीं रही, बल्कि और ज़ोर से नाचने लगी।

अब वे दोनों मेरे दोनों तरफ आ गए। मैं उनके बीच सैंडविच हो गई थी। एक का हाथ मेरी कमर पर था, तो दूसरे का मेरी पीठ पर। वे मुझे अपने साथ झुला रहे थे। उनके शरीर मेरे शरीर से चिपके हुए थे। मैं उनकी गर्मी महसूस कर सकती थी।

वह काला लड़का मेरे पीछे आ गया। उसने मेरे गले पर चुम्मा लिया। फिर वह मेरे कंधे पर। उसकी साँसें मेरी त्वचा पर गर्म लग रही थीं। उसका दोस्त मेरे सामने था। वह मेरी चूचियों को घूर रहा था। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर उन्हें छुआ। 


मैं सिसक रही थी, आनंद और बेसब्री से मेरा पूरा शरीर कांप रहा था। उसके दोस्त ने अपना हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। मैं उसके स्पर्श के नीचे पिघल रही थी। पीछे से वह काला शैतान मेरी पीठ पर चुम्बनों की बौछार कर रहा था और उसका एक हाथ मेरे पेटीकोट के ऊपर से मेरी चूत को सहला रहा था। मेरा पेटीकोट गीला हो चुका था, मेरी चूत पानी छोड़ रही थी।

"अब और रुका नहीं जाता," वह काला लड़का मेरे कान में फुसफुसाया। "चलो यहाँ से।"

उसने अपने दोस्त को इशारा किया। उन्होंने मेरी साड़ी उठाई और मेरे कंधे पर डाल दी। फिर एक ने मेरा हाथ, दूसरे ने दूसरा हाथ पकड़ लिया और वे मुझे उस भीड़ से बाहर एक सुनसान रास्ते पर ले गए। थोड़ी दूर चलने के बाद उन्होंने एक छोटे से होटल के सामने रुक लिया। वह काला लड़का अंदर गया और दो मिनट में एक कुंजी लेकर आया।

हम एक कमरे में घुसे। दरवाज़ा बंद होते ही, उन्होंने मुझे फर्श पर नहीं खड़े होने दिया। वह काला लड़का मेरे पीछे आया, उसने मेरा ब्लाउज फाड़ दिया। बटन उड़कर दीवार पर लग गए। मेरी चूचियाँ आज़ाद होकर हवा में लहरा गईं। उसका दोस्त मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गया और उसने मेरे पेटीकोट की नाड़ खींच दी। पेटीकोट मेरे पैरों के पास गिर गया। अब मैं सिर्फ अपनी गीली पैंटी में थी।

"आज तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेंगे, मारिया," वह काला लड़का कहते हुए मेरी चूत पर अपना हाथ रख दिया। पैंटी के कपड़े के ऊपर से ही उसने मेरी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। मैं 'आह...' की आवाज़ निकालते हुए पीछे उसकी छाती से चिपक गई।

उसका दोस्त उठा और उसने मेरी पैंटी को भी खींचकर उतार दिया। अब मैं पूरी तरह से नंगी थी, दो अजनबी, दो युवा लड़कों के सामने। और मुझे इसमें कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ एक जंगली बेचैनी।

वे मुझे बिस्तर पर ले गए। वह काला लड़का मेरे सिर के पास बैठ गया और उसने अपना लंड मेरे मुँह के पास ले आया। मैंने उसे फिर से अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। इस बार मैं और भी जोश में थी। मैं उसके लंड को अपने गले तक उतार रही थी। उसके मुँह से 'आह... आह...' की आवाज़ें निकल रही थीं।

इसी बीच, उसका दोस्त मेरी टाँगों के बीच में आ गया। उसने मेरी चूत को अपनी उंगलियों से फैला दिया और अपनी जीभ मेरी चूत में घुला दी। जैसे ही उसकी जीभ मेरी क्लिटोरिस को छुई, मैं एक बिजली की तरह काँप उठी। मेरे पूरे शरीर में एक सनसनी फैल गई 
उसकी जीभ मेरी चूत की गहराइयों में खोई जा रही थी। मैंने कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया था। मेरे पति ने कभी मुझे इस तरह से नहीं चाटा था। यह एक नया, अपराधमय आनंद था। मैं उसके बालों को अपनी उंगलियों में उलझा रही थी और उसका सिर अपनी चूत पर दबा रही थी। मेरे मुँह से 'आह... और जोर से... प्लीज़...' जैसी गंदी बातें निकल रही थीं।

मेरे मुँह में उस काले लड़के का लंड था, जो अब और भी कड़क हो गया था। वह अपना कूल्हा आगे-पीछे करके मेरे मुँह को चोद रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं गले तक उसका मांस महसूस कर सकती हूँ। मेरी आँखों से आँसू आ रहे थे, लेकिन वे दर्द के नहीं, बल्कि उस आनंद के थे, जिसकी मैं कई सालों से तलाश में थी।

कुछ देर बाद, वह काला लड़का उठा। उसका दोस्त भी उठा। उन्होंने मुझे पलट दिया। अब मैं घोड़ी की स्थिति में थी। मेरी गांड ऊपर उठी हुई थी। वह काला लड़का मेरे पीछे आया और उसने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया। मैंने अपनी टाँगें और फैला दीं।

उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मैं 'आह...' की आवाज़ के साथ चिल्ला उठी। यह दर्दनाक था, लेकिन एक सुखद दर्द था। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर जा रहा था। मैं महसूस कर सकती थी कि मेरी चूत उसके लंड को अपने अंदर खींच रही थी।

"तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है, मारिया," वह पीछे से कहते हुए झटके मारने लगा। "तुम्हारे पति ने तुम्हें अच्छी तरह नहीं चोदा है।"

उसकी बातें सुनकर मुझे और जोश आ रहा था। मैं कहने लगी, "आह... तुम तो माहिर हो... और जोर से चोदो मुझे... फाड़ दो आज मेरी चूत..."

उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। वह मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहा था। उसका दोस्त मेरे सामने आया और उसने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। अब मुझे दोनों तरफ से चोदा जा रहा था। मेरा शरीर एक लय में झूम रहा था। मैं एक रंडी की तरह चुद रही थी, और मुझे इसमें बहुत आनंद आ रहा था।

मैंने महसूस किया कि मेरा पहला ऑर्गाज़्द आने वाला है। मेरे शरीर में एक अजीब सी घुट्टी सी उठी। मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं जोर से चिल्लाई, "आह... मैं झड़ रही हूँ... आह..."

मेरा शरीर कांपने लगा। मेरे पैर कमज़ोर हो गए। लेकिन वे दोनों रुके नहीं। वे मुझे चोदते रहे।

थोड़ी देर बाद, वह काला लड़का बोला, "अब मेरी बारी।"

उसने मुझे पलट दिया। अब मैं उसके ऊपर थी। उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मैं ऊपर-नीचे होने लगी।
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