14-07-2026, 10:49 PM
(This post was last modified: 15-07-2026, 03:48 PM by MohdIqbal. Edited 3 times in total. Edited 3 times in total.)
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं और 18 वर्ष के आयु से अधिक हैं l
शिक्षक दिवस की सुबह थी। गुरुग्राम के ब्लू बेल्स मॉडल कॉलेज में हर साल की तरह इस दिन भी एक अलग ही रौनक थी। चैताली घोष, कॉलेज की रिसेप्शनिस्ट थीं, अपनी नीली होंडा एक्टिवा पर कॉलेज पहुंचीं। हवा में हल्की ठंडक घुली थी, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी। उन्होंने एक काला टॉप और घुटनों तक आने वाली काली स्कर्ट पहन रखी थी। गर्दन में मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर उनकी बंगाली पहचान को और निखार रहा था। उनकी चाल में एक सहज आत्मविश्वास था, जो उनकी भरी-पूरी काया को और भी आकर्षक बना रहा था।
जैसे ही उन्होंने एक्टिवा पार्क की, कुछ छात्र उनके पास आकर खड़े हो गए। "मैम, आप कितनी सुंदर लग रही हैं!" एक लड़के ने कहा।
"शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ, मैम!" दूसरे ने कहा, उसके साथी मुस्कुरा रहे थे।
चैताली ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। "धन्यवाद बच्चों। तुम सबको भी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।"
कॉरिडोर में चलते हुए, उन्हें कई और छात्रों से ऐसे ही बधाई और तारीफ़ें मिलीं। कुछ लड़के तो अपनी नज़रें उन पर से हटा ही नहीं पा रहे थे। उनकी वक्रताएँ, उनकी चाल, सब कुछ उन्हें आकर्षित कर रहा था। चैताली को यह ध्यान पसंद था, इसमें एक गर्व महसूस होता था, लेकिन साथ ही एक अजीब सी बेचैनी भी। आज वह कुछ ज़्यादा ही आकर्षक लग रही थीं, और उन्हें यह पता था।


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