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Adultery Teachers day par Madam ko chod diya
#1
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं और 18 वर्ष के आयु से अधिक हैं l


शिक्षक दिवस की सुबह थी। गुरुग्राम के ब्लू बेल्स मॉडल कॉलेज में हर साल की तरह इस दिन भी एक अलग ही रौनक थी। चैताली घोष, कॉलेज की रिसेप्शनिस्ट थीं, अपनी नीली होंडा एक्टिवा पर कॉलेज पहुंचीं। हवा में हल्की ठंडक घुली थी, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी। उन्होंने एक काला टॉप और घुटनों तक आने वाली काली स्कर्ट पहन रखी थी। गर्दन में मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर उनकी बंगाली पहचान को और निखार रहा था। उनकी चाल में एक सहज आत्मविश्वास था, जो उनकी भरी-पूरी काया को और भी आकर्षक बना रहा था।
 
जैसे ही उन्होंने एक्टिवा पार्क की, कुछ छात्र उनके पास आकर खड़े हो गए। "मैम, आप कितनी सुंदर लग रही हैं!" एक लड़के ने कहा।
 
"शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ, मैम!" दूसरे ने कहा, उसके साथी मुस्कुरा रहे थे।
 
चैताली ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। "धन्यवाद बच्चों। तुम सबको भी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।"
 
कॉरिडोर में चलते हुए, उन्हें कई और छात्रों से ऐसे ही बधाई और तारीफ़ें मिलीं। कुछ लड़के तो अपनी नज़रें उन पर से हटा ही नहीं पा रहे थे। उनकी वक्रताएँ, उनकी चाल, सब कुछ उन्हें आकर्षित कर रहा था। चैताली को यह ध्यान पसंद था, इसमें एक गर्व महसूस होता था, लेकिन साथ ही एक अजीब सी बेचैनी भी। आज वह कुछ ज़्यादा ही आकर्षक लग रही थीं, और उन्हें यह पता था।
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#2
Bahot mast update he, please hot gif and pics add karna sex scene ke time
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#3
"मैम, आज आप बिल्कुल फ़िल्मी हीरोइन लग रही हैं," अफ़ज़ल ने कहा, उसके साथ अब्राहम और सरबजीत भी थे। तीनों ही कॉलेज के सबसे बदमाश छात्रों में से थे, अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा परिपक्व और बेफिक्र। उनकी आँखों में एक अलग ही तरह की शरारत थी। चैताली ने उन्हें देखा, तीनों ही अपनी-अपनी क्लास में कई बार फेल हो चुके थे और अब 18 साल से ऊपर के थे। उनकी हरकतें अक्सर हद पार कर जाती थीं।

"अफ़ज़ल, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। ये सब बातें छोड़ो," चैताली ने थोड़ा कड़े स्वर में कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में वो दृढ़ता नहीं थी जो आमतौर पर होती थी।

अफ़ज़ल ने एक शरारती मुस्कान दी। "पढ़ाई तो होती रहेगी, मैम। पर आज आपकी तारीफ़ करना भी तो ज़रूरी है।"

अब्राहम और सरबजीत ने भी उसकी बात का समर्थन किया। चैताली ने मुस्कुराकर आगे बढ़ गईं, लेकिन उनके मन में एक अजीब सी हलचल थी। इन लड़कों की नज़रें कुछ ज़्यादा ही गहरी थीं।

पूरा दिन कॉलेज में उत्सव का माहौल रहा। छात्रों ने शिक्षकों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए। चैताली अपने रिसेप्शन पर बैठी, फोन उठाती रही, छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देती रही। लेकिन बीच-बीच में उनकी नज़रें उन तीनों लड़कों पर पड़ जाती थीं। वे कॉरिडोर में घूमते रहते, कभी-कभी उनकी ओर देखकर फुसफुसाते और मुस्कुराते। चैताली को लगा कि कुछ अजीब होने वाला है, लेकिन उन्होंने इस विचार को मन से झटक दिया।

शाम के चार बज चुके थे। कॉलेज ख़ाली होने लगा था। ज़्यादातर शिक्षक और छात्र जा चुके थे। चैताली ने अपना डेस्क समेटा। अपनी चाबियाँ उठाईं और पर्स कंधे पर टांग लिया। वह बाहर निकलने के लिए मुड़ीं, तभी उन्हें लगा कि कोई उनके पीछे है।

"मैम, आप जा रही हैं?" अफ़ज़ल की आवाज़ उनके कान के पास गूँजी।

चैताली चौंक गईं। "हाँ, अफ़ज़ल। तुम लोग अभी तक यहीं हो?"

अब्राहम और सरबजीत भी उसके पास आ गए। उनके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो चैताली को असहज कर रही थी।

"थोड़ा काम था, मैम," अब्राहम ने कहा, उसकी आँखें चैताली के शरीर पर टिक गईं।

"क्या काम?" चैताली ने थोड़ा घबराकर पूछा।

सरबजीत ने आगे बढ़कर दरवाज़े को अंदर से बंद कर दिया। "आपसे ही कुछ काम था, मैम।"

चैताली का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। "ये क्या बदतमीज़ी है? दरवाज़ा खोलो, मुझे जाना है।"

अफ़ज़ल ने उनके कंधे पर हाथ रखा। चैताली ने उसका हाथ झटक दिया। "अपनी हद में रहो अफ़ज़ल! मैं तुम्हारी टीचर हूँ!"

"टीचर? ओहो मैम," अफ़ज़ल ने उनका हाथ पकड़कर खींच लिया। "आज आप टीचर कम, कुछ और ज़्यादा लग रही हैं।"

चैताली ने चीखने की कोशिश की, लेकिन अफ़ज़ल ने तुरंत उनका मुँह अपने हाथ से दबा दिया। अब्राहम और सरबजीत ने उन्हें दोनों तरफ़ से पकड़ लिया। उनकी ताकत के आगे चैताली बेबस थीं। वे उन्हें खींचते हुए ऊपर की मंज़िल की ओर ले गए। चैताली ने संघर्ष किया, उनके पैर ज़मीन पर घिसट रहे थे, लेकिन उनकी चीखें अफ़ज़ल के हाथ में दबकर रह गईं।
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#4
Nice start update soon
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#5
Waiting
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