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हा तो भाई लोगों, क्या हाल चाल, आप सब की शानदार सच्ची कहानिया पढ़ पढ़ कर आखिर आज मैंने भी आप सब के साथ अपने जीवन के शानदार अनुभव शेयर करने की सोची, यह मैरा पहला प्रयास हे, लेकिन उम्मीद हे आप लोग निराश नहीं होने।
तो सबसे पहले मै अपने और अपने परिवार के बारे मे बताता चलू, मै अश्विन अभी उम्र कोई 40 साल, कहने को तो अधेड़ अवस्था, लेकिन मन से सचमुच सदा जवान, कमीनात मैरे अंदर कूट कूट कर भरी हुई हे, लेकिन उसके बारे मे मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता, बाकी दुनिया के लिए मै बहुत ही हेल्पफुल हूँ, सबकी मदद करना , महिलाओ की इज्जत करना, मतलब अपनी बाहरी छवि एक नंबर के शरीफ इंसान की हे, अब आगे, मैरी पत्नी निशा, उम्र 37 मै उसे प्यार से नीलू कहता हूँ, मुझ पर अंधा विश्वास करती हे, मैरी कही हर बात मानती हे ।
आज जीवन जितना सुलझा हुवा हे उतना शुरू से नहीं था, शादी के बाद सब सही चल रहा था, तीन साल बाद नीलू प्रेग्नन्ट हुई, मन मे बड़े अरमान जागे, लेकिन ना जाने किस की नजर लग गई, प्रेग्नन्सी के सातवे महीने मे नीलू के साथ अचनाक कुछ समस्या उत्पन्न हुई, शहर के सबसे बड़े डॉक्टर को दिखाया, पता चला की उसकी बचचेदानी के मुंह के वहा कोई समस्या हे, शुरू मे लगा सब सामान्य होगा, लेकिन बाद मे पता चला की कोई ट्यूब जिससे बच्चा बाहर आता हे, उसमे इन्फेक्शन के कारण सडाव हो गया हे, और आगे कही वह कैंसर के रूप मे ना बढ़ जावे, डॉक्टर ने सावधानी के लिए उसकी बच्चेदानी ही निकाल दी, इस सब मे हमारा बच्चा भी नहीं बचा, और भविष्य मे खुद का बच्चा होने की उम्मीद भी पूरी तरह खत्म हो गई ।
शुरू मे तीन साल नीलू बड़ी अप्सेट रही, लेकिन मैंने उसे कैसे भी समझाया, की यदि हमारी किस्मत मे बच्चा नहीं होगा तो हो भी जाता तो शायद हमे उसका सुख नहीं मिलता, खेर धीरे धीरे सब सामान्य हो गया, इस बिच जीवन आगे बढ़ता रहा, करोना के समय, मतलब आज से छह साल के लगभग पहले, जीवन मे सब सामान्य था, मै it हार्डवेयर लाइन का बंदा हूँ, लेकिन करोना मे नोकरी छोड़ कर खुद का फ्रीलैन्सर बिजनस शुरू कर दिया हे, और आज भगवान की दया से बहुत अच्छा बिजनस चल रहा हे, मै घर से ही ऑनलाइन ऑर्डर लेकर अपनी एक टीम द्वारा लोगों के घरों, ऑफिस और बिल्डिंग्स मे कमेरे वाईफाई, हिडन कैमरा आदि लगवाता हूँ, खुद उन सबका एक्सपर्ट हूँ, मैरे द्वारा लगाए हिडन कैमरा और माइक कोई ढूंढ नहीं सकता, इतना तो पकका हे । और आज तक मैंने जीतने हिडन कमेरे लगाए हे, उंन सभी का एक इक्सेस मैरे पास हमेशा रहता हे, जिसके बारे मे उस कस्टमर को कभी पता नहीं चलता, मै जब चाहे किसी भी कैमरा को ट्रैक कर सकता हूँ ।
हम दोनों हज़्बन्ड वाइफ बहुत फ़्रेंडली और हेल्पफुल हे, इधर मैरी बीबी बड़ी बिंदास हे, बच्चे नहीं होने का दुख अब नहीं रहा था उसे, उसने इस सब को अपनी नियति मान लिया था । अब हम अपने घर बाहर बहुत खुल कर सेक्स का मज़ा लेते थे, उसका गर्भाशय ना होने के कारण ना तो वह पिरियड्स से होती थी ना बच्चा ठहरने का कोई डर था, हम दोनों का शुक्र गृह बहुत बलवान था, इसलिए हम सेक्स से पीड़ित थे, बहुत मजे करते, मेरी पत्नी ने मुझे हमारी शादी के कुछ साल बाद ही बताया था की, शादी से पहले वह उसकी एक लेडिज फ्रेंड के साथ मस्ती करती थी, वो दोनो होमोसेक्शवल थी, क्योंकि हमारी शादी से पहले उसे सेक्स का कोई अनुभव नहीं था तो वो उसी मे संतुषट थी, लेकिन जब उसे पति पत्नी के संबंध से जो मज़ा मिला, उसके आगे अपनी सहेली की उंगली फालतु लगी, उन दिनों से उसकी एक खवाहिश थी की वो एक आधी बार अपने पति के साथ थ्रीसम करेगी, मतलब दो लेडिज एक जेन्ट्स, और मै उसे अभी तक छेड़ता रहता हूँ की चल बुला तेरी कोई सहेली या किसी महिला रिश्तेदार को, तुम दोनों के जाले साफ कर दूंगा। मै उससे मज़ाक मे कहता की यदि तु मुझे किसि और का मज़ा दिलवा दे तो मै भी तुझे किसि दूसरे लंड का स्वाद चखने दूंगा, लेकिन मैरे ऐसे बोलते ही मुझे मारने दोड़ती और नाराज हो जाती ।
मैरी बीबी का फिगर कुछ खास नहीं था, उसके बूब्स 32 के थे और गाँड 30 की दुबली पतली थी, मुझे उसके छोटे छोटे बूब्स मे मज़ा नहीं आता था, मेरी पसंद थी भारी कसे कसे कडक बूब्स और हिप्स, जो की मैरी किस्मत मे नहीं थे, यह बात मेरी वाइफ को अच्छी तरह से मालूम थी, एसलिए यदि हमारे कोई भी परिवार या मिलने जुलने वाली महिला मिलती जिसके स्तन और गाँड के उभार भारी या बड़े होते तो मैरी बीबी मुझे बोलती लो सेक लो अपनी आंखे, अच्छे से ताड़ लो लेकिन खालि मैरे मे ही होना बस। हम दोनों जब भी यानि लगभग रोज ही सेक्स करते, तो मैरी वाइफ को रोज कुछ अलग चाहिए होता, वह कभी नर्स बनती या टीचर, कभी काम वाली तो कभी डॉक्टर, और उसी की तरह बात करते हुवे सेक्स करती, इसमें उसे ज्यादा मज़ा आता, कई बार उसकी बहनों भाभियों और यहा तक की मैरे भी महिला रिश्तेदारो के नाम से चुदवाती । कहती आशु भैया हमको चोद दो, जियाजी मुझे चोद दो, इसमें हम दोनो को खूब मज़ा आता था ।
मै बाते चाहे जितनी कर लूँ, लेकिन घर के बाहर यानि अपनी पत्नी के अलावा कभी बाहर मुंह नहीं मारा था, लेकिन मैरे बिजनस के कारण मतलब मैरे हिडन केमरो की वजह से जमाने के रियल फुटेज मेरे पास रोज आते थे, कई सेकड़ों रियल महिलाओ लड़कियों, पति पत्नी को सेक्स करते मे देख सकता था, क्योंकि क्यों लोगों ने हमसे अपने घर मे हिडन केमरे लगवा रखे थे।
करोना के थोड़ा पहले ही हमने एक आधे घर को खरीदा था, जमीन के मकान के दोनों भाग बराबर बने थे, मतलब इक समान आधे भाग मे वह रहते थे, आधे मे हम । उनके घर मे उनकी पत्नी के अलावा एक बेटी थी, जो की तब * साल की होगी, उनकी वाइफ बड़ी मस्त थी, सावली थी लेकिन उसके आकर्षक नैन नक्श थे, 36 के बूब्स 38 की गाँड होगी, मस्त माल थी।
जब हम यहा रहने आए तभी से मैरी पत्नी और उनकी पत्नी की अच्छी बातचीत हो गई, हम दोनों के घर के पिछवाड़े एक समान ओपन स्पेस यानि वाश एरिया था, जो की बिच से लोहे की जाली से बटा हुवा था, दोनों महिलाये वही दिन भर बातचित करती रहती, थोड़ा जोर से बोलती तो किचन से भी काम करते करते बातचित हो जाया करती थी, भाभी जी तो कभी कभार ही हमारे घर आती थी, लेकिन उनकी छोटी बच्ची हमारे घर दिन भर आती जाती रहती थी ।
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अगले कुछ दिनों मे ही मुझे यह पक्का हो गया था की हमारे पड़ोसी पति पत्नी मे सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा था, उनके पती का काम धाम ठीक से नहीं चल रहा था, शायद काम की अधिकता के कारण या किसी और वजह से भाभी जी मे ज्यादा रुचि नहीं लेते थे, ना तो परिवार को समय देते थे, नाही घर के बाहरी काम निपटाते थे, भाभी जी अकेले ही परेशान हुवा करती थी, कई बार उन्हे कुछ काम समझ नहीं आता तो मेरी पत्नी को कहती की भाई साहब से पुछ कर बता देना । मैंने इक बात गौर की थी, भाभी जी मुझसे कभी सीधे बात नहीं करती थी, कुछ बात करनी होती तो अपनी छोटी बच्ची या मेरी पत्नी को बिच मे रख कर बात करती , और मै भी उसी तरह जवाब दे देता, धीरे धीरे मुझे यह समझ आने लगा था की वो यह दिखाना नहीं चाहती थी की वो मुझसे किसी तरह प्रभावित हे, लेकिन अकेले मे मैरी वाइफ से अपने पति की बुराई करती और मैरी तारीफ ।
घर के आँगन का मैंन गेट जो की हम दोनों घरों का एक ही था, भाभी जी अपनी खिड़की से आते जाते मुझे देखती रहती, कई बार मैंने गौर किया की मैरे बाहर आते ही वह भी किसी ना किसी बहाने से आँगन मे आकर मुझे प्यासी नज़रों से देखती रहती, अब मैंने उनके वेवाहीक जीवन को टटोलना शुरू कर दिया, और जलदी पता चल गया, हमारे पड़ोसी महाशय बचपन से भांग के शौकीन थे, सुबह होते ही भांग का बड़ा गोला मुंह मे दबाते और दिन भर उसी की पिनक मे रहते, भांग की आदत के कारण उनको भूख बहुत लगती, हमे बाद मे पता चला की भाई साहेब एक बार मे चौदह से पंद्रह रोटी और ढेर सारी सबजिया, मीठा दाल चावल पुलाव सब खा जाते हे, और उस खाने के बाद दबा कर सो जाते हे, तो अगले पंद्रह अठारह घंटे के बाद ही उठते हे, , उनकी इसी आदत के कारण उन पर बहुत कर्ज चड गया था, तो उन्होंने अपने ससुराल से मिले इस घर को आधा हमे बेच दिया, हमसे मिले पैसों से भाभीजी ने पहले तो बाजार का सारा कर्ज चुकाया, और बचे पैसों से बच्ची के नाम से डिपाज़ट कर उसकी पढ़ाई और घर खर्च की जुगाड़ जमाई थी, इधर भाई साहेब को ज्यादा खान से शुगर और बवासीर की भी समस्या हो गई, उनकी शिक्षा भी ज़्यादा नहीं थी, तो कही अच्छी नोकरी की भी जुगाड़ नहीं हो सकती थी, तो बस यूं ही मॉसमी बिजनस कर थोड़ा पैसों की जुगाड़ लगाते थे, करोना के बाद तो उनकी माली हालत बहुत खराब हो गई, अब तो भाभी के मायके वालों ने भी उनकी मदद करना बंद कर दी थी, करोना के बाद बचचो के कॉलेज ऑनलाइन मोड मे आ गए थे, उनकी बेटी को लैपटॉप की आवश्यकता थी, जो की बहुत महंगा था जब मुजसे उस बच्ची ने कहा की अंकल मै आपके लैपटॉप पर कभी कभी पढ़ लु क्या, तो मैंने उसे अपने पुराने लैपटॉप को सुधार कर दे दिया, अब उनकी बेटी भी लैपटॉप पर पड़ती थी, उसमे उसे कैसी भी समस्या आती तो दौड़ कर मैरे पास आती, और मे उसका हल तुरंत निकाल देता, अब दोनों घरों मे वह अकेली बच्ची थी, दिन भर एस घर से उस घर घूमती रहती, करोना के कारण बच्चों कि सोशल लाइफ भी डिस्टर्ब हो गई थी, गर्मी मे वह बहुत छोटे कपड़ों मे घूमती रहती, उसकी मां उसे मना करती तो, वह मैरी वाइफ से कहलवा देती की बच्ची हे, और यह उसका अपना घर हे, कैसे भी घूमे आए जाए, कोई तकलीफ नहीं, तब से वह बिना किसी शर्म या झिझक के आती जाती थी । वह अपनी मा की कार्बन कॉपी थी, वैसा ही सांवला गठीला शरीर, भरा भरा सीना फुगे हुवे हिप्स, मांसल चिकनी झानघे, मैरे अलावा दोनों घरों मे कोई लड़का या जेन्ट्स नहीं था तो उसे कोई शर्म नहीं थी, उस बच्ची का शरीर भारी था,एतनी कम उम्र मे ही उसके सिने के उभार दिखते थे, वह घर मे नहाने के बाद यूं ही केवल पेन्टी मे घूमती रहती, उसकी मा उससे रोज झगड़ती, कई बार वह हमारे घर ऐसे ही दोड़ती हुई आ जाती, तब मेरी पत्नी भाभी जी से उसके कपड़े ले कर उसे अपने हाथ से पहनाती । आधी बार वह हमारे घर ही खाना खाती, एक बार भाभी जी का मोबाईल उसने बिगाड़ दिया, मा की डाट के डर से मा के दोपहर की नींद से उठने से पहले वह मोबाईल मैरे पास लाई की अंकल इसे ठीक कर दो, मैरे लिए यही काफी था, मैंने उसे तुरंत चालू करते ही, उसका जीमेल आयडी पासवॉर्ड सब नोट कर लिया, और एक दो जरूरी हिडन एप इंस्टाल कर दिए, और तुरंत फोन चालू कर बच्ची को दे दिया, भाभी जी को पता ही नहीं चला, और अब उनके फोन का एक्सेस भी मैरे पास था, जब मैंने उसके सब डाटा को देखा तो सर्च हिस्ट्री को देख पता चला की भाभीजी रात मे ऐडल्ट साइट सर्च करती हे, लेकिन गूगल की सख्ती के कारण वह खुलती नहीं लेकिन फिर भी वो सॉफ्ट पॉर्न तो देखती ही हे, अब मैंने उनकी गूगल साइट पर जाकर कुछ अंतरंग सेक्सी कहानियों वाले पेज लोड कर दिए, अब उनकी फ़ीड मे वही कहानिया बार बार आती, जिन कहानियों मे पति के बाहर रहने या कमजोर रहने पर दूसरों से चुदवाने की कहानिया होती, और वो उन्हे पड़ती भी थी और रात मे पढ़ते समय अपनी बुर मे उंगली भी करती । यह सब बात राधिका भाभी ने ही मेरी पत्नी को बतलायी थी । उनकी बेटी खुशी शुरू से ही आधे दिन हमारे घर मे घूमती रहती, पूरे घर पर उसका हक था, छोटेपन से ही वह हम दोनों के सामने कपड़े बदल लिया करती थी, कई बार तो मेरी बीबी ही उसे कॉलेज के लिए तय्यार करती, दस्वी के बाद भी वो मैरे सामने ही छोटी सी चड्डी और समीज मे हमारे घर मे घूमती रहती थी, उसकी मा उसकी इस आदत से परेशान थी, हमेशा कहती थी की भाई साहेब क्या सोचते होंगे की केसी मा हे अपनी लड़की को कोई सलीका नहीं सिखाया, यह कैसे लड़की की तरह अध नंगी भाई साहेब के सामने घूमती रहती हे, वो क्या सोचते होंगे हमारे बारे मे । उनका पति संजय अभी भी भांग के नशे मे अपने बेडरूम मे घंटों सोया रहता था, उसका काम था, सोकर उठाना, नहा धोकर बाबू साहेब बन बाजार जाना, सट्टा लगाना, जिस दिन जीत जाए, उस दिन मजे से ढेर सारी भांग और मीठा नमकीन खाना , फिर घर आकार खूब खाना और फिर अगले पंद्रह से ज्यादा घंटों के लिए सो जाना। बस उसका जीवन यूं ही चल रहा था।
मेरी पत्नी से भाभी कई बार दुखी मन से बोलती थी की यह मतलब उसके पति अब बिस्तर मे कुछ मज़ा नहीं देते, शुगर की बीमारी ने उनको अंदर से खोखला कर दिया हे, महीनों बित जाते हे, बिना कुछ करे, यहा तक की पिछले चार पाँच साल से भाभी जी ने अपने गुप्तानगो के बाल भी नहीं हटाए हे, क्योंकि उनके पास पार्लर का खर्च के पैसे भी नहीं थे, इसी तरह सालों बित गए, अब वह बच्ची 18 साल की हो गई हे, और कालेज मे अड्मिशन हो गया है, लेकिन घर मे उसका पहनावा अभी भी वैसा ही ही, स्पोर्ट्स ब्रा और छोटी सी चड्डी जिसमे से उसका फिगर कपड़े फाड़ बाहर आने को होता, अब वह अपनी मा की तरह ही पूरी महिला बन गई थी लेकिन उसे हमारे घर मे इस तरह आने जाने मे कोई शरम नहीं थी, उसके 36 डी बूब्स मोटी गाँड सब देखने लायक थे, भाभी की बेटी अब बड़ी हो रही थी, उसके नए नए खर्चे थे, उसको भी अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ करना थे लेकिन मा की सख्ती के कारण वो भी चुप रहती । जब भी वो मैरे नजदीक आती मुझे उसकी अन्डर आर्म्स मेसे बाल दिखाई पड़ते । लेकिन मै क्या कर सकता था, थी तो वह मेरी बेटी की उम्र की ही, लेकिन अपने मा बाप से ज़्यादा मुज पर अपना ज़्यादा हक समजती थी, उसे कोई चीज चाहिए होती तो सबसे पहले मुझे बोलती थी, और मै कैसे भी उसकी मा की मर्जी के बिना उसकी मन की मर्जी पूरी करने की कोशिश करता था । लेकिन आज तक ऐक बात थी, ना तो मैरी पत्नी ने उसे कभी अपने बच्चे जैसा माना, ना ही मैंने । भले ही वह हमारे घर दिन रात आती जाती थी, लेकिन हमने उसे कभी अपने बच्चे वाली फीलिंग से नहीं देखा था ।
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कई बार वह अभी भी दौड़कर बचपन की तरह मैरी गौद मे आकार बेठ जाती, उसका मांसल और भारी शरीर छूते ही मुझे उत्तेजित कर देता, उम्र बढ़ने का उस पर कोई असर नहीं दिखता था, वही बचपना पागलपन अभी भी कूट कूट कर भरा था, वह जब पहले की तरह मैरे साथ मस्ती करती, तो मैरे ऊपर चड जाती, और मैरे कमर के हिस्से पर बेठ अपनी भारी भारी मोटी मोटी छातिया मैरे मुंह के ऊपर लहराती, मुझे उसके साथ मस्ती करते समय बहुत सावधान रहना पड़ता, की कही मैरी किसी गलत हरकत का वह बुरा ना मान जाए।
अभी एक दिन उनके बाथरूम मे सुबह सुबह कोई ड्रेनेज मे कोई समस्या आ गई, तो वह सुबह कालेज जाने के लिए उसकी मा के मना करने पर भी नहाने के लिए हमारे घर आ गई, मै अपने बेड रूम मे सो रहा था, और मैरी वाइफ किचन मे थी, तब वह हमारे बाथरूम मे से नहा कर केवल छोटी सी पेन्टी पहन बाहर आ गई, बाहर आते ही मुझे नींद से जगाकर मुझे बेड से खिच खड़ा कर दिया, और अपने हाथ मे पकड़ी ब्रा मुझे पकड़ा दी और बोली इसका पीछे का हुक मुझसे नहीं लगता, आप लगा दो अंकल प्लीज, मै बोला की रुक तेरी आंटी को बुला देता हूँ तो बोली एक सेकंड के काम के लिए उनको क्यों बुलवाना, आप को नहीं आता क्या, और मैरी और पीठ कर वो कांच के सामने अपने बड़े बड़े कडक पपीतों को दिखा रही थी, मैंने उसकी छोटी सी ब्रा आगे से ले जाकर पीछे हुक लगाने की कोशिश की, लेकिन वह ब्रा उसके साइज़ से बहुत छोटी थी, मैंने कहा की यह तेरे साइज़ की नहीं हे, तो बोली की मम्मी मुझे नई लाकर नहीं दे रही हे, और अब खुद की कोई पुरानी सी पकड़ा दी हे, अभी तो आप कैसे भी पहना दो, कालेज को लेट हो रहा हे, मैंने बड़ी मुश्किल से उसकी पीठ को पीछे की तरफ खिच ब्रा का हुक लगाने की कोशिश की, जिसके कारण उसके मांसल कूल्हे मेरे आगे लिंग से टच होने लगे, उसकी पेन्टी भी बहुत टाइट थी, उसकी फुली फुली चुत का आकार बाहर से साफ महसूस हो रहा था, उसके नीचे भी बहुत बाल दिखाई दे रहे थे , थोड़ी कोशिश के बाद मैंने उस ब्रा के हुक को लगा दिया, लेकिन सही मे ईस ब्रा मे वह सांस कैसे लेती होगी वही जानती हे, अब वह मैरी और पलटी क्योंकि अभी भी उसके बूब्स उसकी ब्रा के कप मे फिट नहीं हुवे थे, उसके बूब्स बड़े और कडक थे, पहले तो उसने कोशिश की लेकिन फिर जब उससे नहीं फिट हुवे तो मैरी तरफ देख अपने बोबे आगे बढ़ा दिया, मैंने अपनी तिरछी निगाह से कमरे के दरवाजे की तरफ देखा, की कही मेरी पत्नी तो नहीं आ रही, नहीं तो ना जाने क्या सोचती, और उसके पपीतों को पकड़ उसकी ब्रा के कप मे घुसाने की कोशिश की, एक तो आसानी से समा गया, लेकिन दूसरा बाहर ही रह गया, तब मैंने उसकी एक गुलाबी निप्पल को अपनी उनगलियों से सहारा देकर कप के अंदर बड़ी मुश्किल से घुसाया, अभी भी उसकी एक साइड की निप्पल का ऐरोला थोड़ा सा ब्रा के कप से बाहर दिख रहा था, जब सब ठीक हो गया तो कुछ पीछे हो वह मुझे अपना बदन दिखाती हुई बोली अब ठीक हे ना अंकल, मैंने उसे सही का अंगूठा दिखाया, तो वो खुस हो गई, फिर उसने वही रखी अपनी पैन्ट और शर्ट भी बेड पर बैठ मैरे सामने ही पहन ली , जब वह जाने लगी तो मैंने अपनी वार्डरोब से बहुत ही महंगे एक डीओ का स्प्रे उसकी बालों से भरी अन्डर आर्मस पर मार दिया, वो खुस हो मेरे गालों पर किस कर थेनक यू अंकल कह दौड़ पड़ी, और फिर अचानक से पलट वापिस आई और धीरे से मैरे कान मे बोली की मैरी मम्मी को मत बतलाना की मैंने आपसे अपनी ब्रा के हुक लगवाया, तो मैंने भी उसी अंदाज मै कहा की तु आंटी को मत बतलाना, यह हम दोनों का सीक्रेट हे, तो उसने अपनी एक आँख मारकर हस्ते हुवे कहा, प्रामिस, पक्का प्रामिस ।
आज तो मेरी सुबह ही रंगीन हो गई थी, जवान लड़की के अनछुवे स्तनों को देख छु मेरा दिमाग कंप्लीट फ्यूज़ हो गया था, बड़ी मुश्किल से काम काज से लगा, दोपहर मे उसने कालेज से आते ही बहाने से मैरे पास आकार बोली की अंकल आप ने सुबह कोन सा डीओ लगाया था, सब उसी की खुशबू से प्रभावित हो ईसका ब्रांड नाम पुछ रहे थे, मैंने कहा की यह हमारा दोनों का सीक्रेट हे, तो उसने अपना अंगूठा दिखा फिर वही कहा प्रामिस, पक्का प्रामिस । मैंने फिर उसे धीरे से कहा, की जब भी कालेज जाए, मैरे पास आ जाना, मैरे पास इससे भी अच्छे और महंगे डीओ और पर्फ्यूम हे, तुझे रोज बदल बदल कर लगाऊँगा । मेरी बात सुन वह खुश हो गई, फिर अपनी ब्रा का ईलास्टिक बाहर से ही खिच उसे अडजस्ट करने लगी, मैंने कहा की नई क्यों नहीं ले आती, तो बोली मेरी मम्मी नहीं दिलाती कहती घर मे मेरी पुरानी वाली ढेर सारी पड़ी हे, पहले उन्हे खतम करो, मैंने कहा की जब वह सब तेरे साइज़ की ही नहीं हे तो फिर कैसे पहन सकेगी तु, तो बोली अंकल दुकान से लाने मैरे पास पैसे नहीं हे, ऑनलाइन मँगा नहीं सकती, तो मैंने उसे धीरे से कहा की तु चिंता ना कर तु तो बस मोबाईल पर ऑनलाइन पसंद कर मै तुझे मँगवा दूंगा, तो बोली नहीं अंकल मेरी ममी लड़ेगी मुझसे, मैंने कहा तु बस पसंद कर बाकी मुझ पर छोड़ दे ।
रात सोते समय उसका मैसेज आ गया, उसने दो तीन ब्रा पेन्टी के सस्ते ओफर वाले सेट पसंद किए थे, मैंने उसी वेबसाईट पर उसके साइज़ 36 डी के और अच्छे से सेट ढूँढे, एक दो तो लैसी थे, बाकी स्पोर्ट्स ब्रा, पुशअप ब्रा, और टीशर्ट ब्रा के भी थे, उसे सब के फोटो भेज दिए, उसने उन्हे देख स्माइल दिया और लिखा की नहीं अंकल यह सब बहुत महंगे होंगे, मैंने लिखा की तु आम खा पेड़ मत गिन , इसके बाद मैंने लिखा की कल तेरी मा तुझसे इस्का पूछेगी तो तु बोल देना मँगवा लो । उसने हैरत से आश्चर्य का इमोजी भेजा।
अगले दिन मैंने अपनी बीबी को झूठ कहा की मै बहूत्त सा समान ऑनलाइन मँगवाता हूँ तो मैरे बहुत से पॉइंट्स इकठ्ठा हो गए हे, और अगले तीन दिन मे इक्स्पायर हो जाएंगे, मैंने बहुत कोशिश की की कुछ और मिल जाए, लेकिन लेकिन इसमें केवलब्रांडेड लेडिज अन्डर गार्मेंट्स ही आ रहे हे, लेकिन वह गार्मन्ट कंपनिया केवल 36 साइज़ से बड़े ही अन्डर गामेंट्स बनाती हे, लेकिन तुम्हारा साइज़ तो बहुत छोटा हे, मैंने दुखी हो कर कहा की क्या करे, साला सब पॉइंट्स बेकार चले जाएंगे, मेरी बात सुन बीबी तुरंत बोल पड़ी, मेरी भाभियों और बहनों के लिए मँगवा लेते हे, मैंने तुरंत उसकी बात काट कर कहा, फालतू बात मत कर तेरे पूरे खानदान को जानता हूँ मे, सब की सब औरते 32 के अंदर की साइज़ की हे, केवल तेरी भाभी ही 34 की होगी, वाइफ ने मेरी बात मे सहमति से सर हिलाया, फिर कुछ सोचते हुवे बोली की पास वाली राधिका भाभी और उनकी बेटी का साइज़ 36 ही होगा, लेकिन वो अपने को पैसे नहीं देंगी, मैंने कहा की पागल हे क्या, अपने पैसे तो यूं ही डूब रहे हे, और कोन सा अपने को पैसा केश मिल जाएगा, बोनस पॉइंट्स हे, और कही अडजस्ट कर लेंगे, अभी तो उनको मँगवा देते हे, नहीं तो पॉइंटस रीडीम करने की डेट निकल जाएगी, वो तुरंत मान गई, मैंने कहा की अभी बात कर भाभी से, और उनको समझाना की बड़ी कंपनी का माल हे, खुद से ज्यादा अपनी बेटी के लिए मँगवा ले, उसके काम आएंगे, थोड़ी देर बाद ही बीबी ने आकार बताया की खुशी, पास वाली भाभी की बेटी कब से उसकी मा से अपने लिए नए अन्डर गार्मेंट्स की जिद कर रही हे, लेकिन वो एन सब को खरीदने मे शर्म महसूस करती हे, इसलिए नहीं ला रही हे, मैंने कहा जल्दी बता आखिर क्या बोली जल्दी हो ऑर्डर भी डालना पड़ेगा, तो मैरी बीबी बोली पहले तो राधिका भाभी राजी नहीं थी, लेकिन मैंने जब बताया की पैसे नहीं लगेंगे, तो मान गई, बोली पैसे भी दे देती लेकिन अभी हाथ थोड़ा तंग हे, मैंने धीरे से मन ही मन फुसफुसाया की पैसे छोड़ सब वसूल लूँगा, ईन दोनो मा बेटी से, एसके बाद मैंने पुछा की साइज़ पुछ कर आई तो बोली की हा, भाभी का ब्रा 36 साइज़ हे लेकिन खुशी को उसके कप छोटे पड़ते हे, मैंने तुरंत ही कहा, एस्का मतलंब 36 डी होगा, मेरी बीबी ने हा मे सर हिलाया, और पेन्टी तो बोली वह नहीं पूछा, बोली रुको अभी पूछ कर बताती हूँ मैंने आँख मार कर कहा की रहने दे, जिसके बूब्स 36 होंगे उसकी गाँड औटोमेटिकली 38 होगी, मैंरी वाइफ ने मुझे एक मुक्का मार कहा बड़े हरामी हो सच मे ।
इसके बाद मैंने तुरंत ही तीन जोड़ 36 साइज़ नॉर्मल काटन की ब्रा पेन्टी के सेट ऑर्डर कर दिए ,जिसमे से दो सफेद और एक काली का सेट था, एसके अलावा और 36 डी मे दो स्पोर्ट्स, दो टी शर्ट, और दो पुशअप पेड़ेड ब्रा का ऑर्डर लगा दिया, फास्ट डेलीवेरी के अलग से 150 रुपये दिए, और सही मे एक दिन बाद ही मैरा ऑनलाइन ऑर्डर आ गया, किस्मत से मे बाहर खड़ा था, तो मैंने ही उसे रीसीव किया, घर मे अंदर बीबी किचन मे बिजी थी, मैंने उसे अपने रूम मे जाकर खोला तो देखा की सब चीजे पैसा वसूल थी, सॉफ्ट आरामदायक और एक नंबर आइटम थी सब के सब । मैंने बड़ी सावधानी से उस पैकेट को पैक कर दिया की कोई यह नहीं कह सकता था की इस पैकेट को किसि ने पहले ओपन किया हो , दूसरा मैंने उसे गिफ्ट के रूप मे मँगवाया था तो उसके साथ बाहर बिल पर अमाउन्ट नहीं लिखा आता हे, बस गिफ्ट ही स्पेशल गिफ्ट फॉर यू लिखा आता हे । रात मे दोनों पड़ोसने पीछे वाश एरिया मे फालतू बाते कर रही थी, मैंने अपनी बीबी को अंदर बुलाया और कहा की ले यह पैकेट आ गया हे, भाभी को दे दे, मैरी बीबी उसे खोलने लगी, तो मैंने कहा रहने दे उनके लिए ही मँगवाया हे तो वो हो खोले तो ज्यादा अच्छा रहेगा, मेरी बीबी अपना मन मार कर रह गई, और वो पैकेट तुरंत ही राधिका भाभी को दे दिया, भाभी बोली इतनी जल्दी कैसे आ गया, और उसे गौर से देखने लगी, फिर कुछ देर मे ही वह अपने घर मे चली गई, जब बहुत देर तक कुछ नहीं जवाब आया तो मैंने अपनी बीबी से कहा की भाभी ने कुछ नहीं बताया, कैसी हे, साइज़ ठीक भी हे या नहीं, यदि गलत साइज़ होगा या पसंद ना हो तो बता दे आज ही वापिस कर देंगे, कुछ देर मैरी बीबी ने उसके जवाब का इंतजार किया और फिर जब उससे रहा नहीं गया तो दौड़ कर उनके घर मे चली गई, वो खुद बहुत देर तक वही रुकी रही, फिर मैरे आवाज देने पर वापिस आ कर बोली की दोनों मा बेटी पागल हो रही हे, भाभी बोली हे की मैंने जीवन मे एतनी अच्छी ब्रा पेन्टी नहीं देखि, मैंने कहा की अभी तक उन दोनों ने वो सब पहन कर देखि भी या नहीं, तो मेरी बीबी बोल पड़ी की दोनो मा बेटी मे रेस लगी हे की कीस की ज्यादा अच्छी हे, दोनों बहुत खुस हे, खुशी को तो पहले लगा की मेरी मम्मी ने यह सब ऑनलाइन केसे मँगवा लिया, तो भाभी ने उसे बताया की नहीं अंकल ने ऑर्डर किया था, दोनों बार बार उनको उतारकर बदल बदल कर पहन रहे हे, मैंने कहा तेरे सामने ही तो मेरी बीवि बोली उसमे क्या हे, हम औरते एक दूसरे के सामने नंगी आराम से हो जाती हे, इसमें क्या हे, मैंने फिर मन ही मन सोचा की काश हमारी किस्मत एतनी अच्छी होती की वो दोनों मा बेटी हमे भी अपने हुस्न के दर्शन कराती ।
रात मै उनकी बेटी खुशी का इसमाएली का मैसेज आया, मैंने लिखा खुश , तो बोली अंकल आप कमाल हो मेरी मा को कैसे राजी कर लिया, एस सब के लिए, मैंने कहा तु बस बोल तेरे सब काम ऑटोमैटिक हो जाएंगे, तो उसने फिर अंगूठे का निशान भेजा, मैंने लिखा की सब साइज़ ठीक हे चेक कर लेना, एक बार नही तो अभी तो चेंज का ऑप्शन हे, उसने लिखा नहीं अंकल सब एक नंबर हे, मैंने लिखा की एक बार देख ले फिर से तो उसने लिखा की आप ही देख लेना मै पहन कर आ जाऊँगी आप को दिखाने।
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अगले दिन सुबह कालेज जाने से पहले खुशी चुपचाप सीधे मैरे बेडरूम मे घुस आई, और मै उसी का इंतजार कर रहा था, रोज की तरह मैरी वाइफ किचन मे ही थी, वह अपने शर्ट को खुला ही पहन कर आई थी, आते ही उसने अपना शर्ट ओपन कर मुझे अपने गदराए बूब्स नई ब्रा मे से दिखाए, मैंने कहा फिटिंग और मटेरीअल तो ठीक हे, तो खुशी बोली एक नंबर अंकल, और फिर मैरा हाथ पकड़ अपने बूब्स पर लगाया, और बोली, लो आप ही ईसका मटेरीअल चेक कर लो, मैंने बिना देर किए, उसकी ब्रा मे अपनी दो उँगलिया डाल कपड़े की क्वालिटी देखि, ब्रा के अंदर मैरी उँगलिया उसकी निप्पल को टच कर गई, लेकिन उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया, क्योंकि केवल दो दिन पहले ही एसी समय वो मैरे सामने बिना ब्रा के खड़ी थी, और मैंने ही उसको बोबे और निप्पल पकड़ कर ब्रा मे घुसाये थे । एसके बाद उसने अपने शर्ट के बटन लगाए और अपना पेन्ट कमर से थोड़ा नीचे खिच अपनी पेन्टी दिखाई, पेन्टी मे से उसके प्यूबिक हेयर दिख रहे थे, मैंने कहा की एनहे साफ कर ले, तो हस्ते हुवे बोली अब सब करूंगी अंकल, मैंने उसे कहा की मै तुझे एनहे साफ करने का सामान ला दूंगा, तो वो बोली ठीक हे अंकल। उसके जाने से पहले मैंने उसकी अन्डर आर्म्स पर एक नया डिओ का स्प्रे कर दिया, आज फिर उसने मैरे गालों पर एक पप्पी लगाई और भाग गई ।
शाम को जब मे मार्केट से आया तो उसके लिए एक हेयर रिमूवल क्रीम, और वेकसीग का सामान लेते आया, खुशी अपने घर के गेट पर ही खड़ी थी, मैंने वो सब सामान वही गाड़ी पर छोड़ दिया, और उसे इशारा कर दिया, उसने वो सामान अपने कमरे मे ले जाकर छुपा दिया, रात मे वो कोई सामान देनेके बहाने से हमारे घर आई, और एक पल के लिए, मैरे बेडरूम मे घुसी, और तेजी से अपनी स्कर्ट झाँघो तक उठा, अपनी बिना बालों वाली केले के तने के समान चिकनी टांगो की एक झलक दिखा तेजी से वापिस बाहर भाग गई ।
रात मै बेड मे सोते समय मैंने अपनी पत्नी के अन्डर आर्म्स मे हल्के हल्के बाल देखे, और जब उसकी पेन्टी मे भी हाथ डाला तो वहा भी हल्की रुवारिसी थी, मैंने कहा के आ अभी साफ कर दु, तो बोली नहीं कल नहाते समय कर लूँगी, लेकिन मै नहीं माना, और उसी समय उसके बॉडी के सभी बाल साफ कर दिए, लेकिन आज वो थोड़ी थकी हुई थी, एसलिए आगे का हमारा कोई प्रोग्राम नहीं बन पाया । मैंने बीबी को कहा की खुशी के भी बहुत अन्डर आर्म्स ग्रो कर रहे हे, उसकी मा को बोल जवान लड़की के अच्छे नहीं दिखते, तो बीबी बोली, मै तो पचासों बार बोल चुकी हूँ, लेकिन भाभी को ना जाने क्यों ये सब गंदगी पसंद हे, उसके तो बहुत बड़े बड़े अन्डर आर्म्स हो रहे हे, मैंने कहा की तूने कब देखे, तो बोली अभी परसों रात ही तुमने जो ब्रा सेट लाकर दिए थे, उनकी ट्रायल के समय मे उनके यहा चली गई थी, तभी देखे थे। मैंने धीरे से कहा तब तो नीचे भी जंगल हो रहा होगा, मैरी वाइफ ने मैरे सिने पर मुक्का मार कहा, सच मे जंगल हो रहा हे, बचपन से आज तक उसने अपने वहा के बाल साफ नहीं किए, और ना ही बेटी को करने देती हे, कहती हे, कट लग जाएगा, डर लगता हे । तब मैंने कहा की यदि भाभी नहीं करने दे रही तो, तु उस बच्ची के बाल साफ कर दे, मैरी वाइफ बोली की काहे की बच्ची, पूरी जवान औरत हो गई हे, उसका सीना देखा, कही से बच्ची लगती हे, पूरी अपनी मा पर गई हे। मै बोल उठा मै क्यों उसका सीना देखूँगा भला, तो वाइफ फिर चिढ़ कर बोली, देखना क्या हे, वह खुद ही दिखती फिरती हे, तो मै बोला, बच्ची हे, अभी घर मे जैसे चाहे रह सकती हे, बाद मे तो बड़ी हो जाएगी तो खुद ही शर्म करेगी, फिर मैरे ओर जोर देने पर वाइफ बोली की ठीक हे, बोलेगी तो देखूँगी, लेकिन मै केवल अन्डर आर्म्स साफ करने मे हेल्प कर सकती हूँ, नीचे के बाल तो उसे खुद ही साफ करने होंगे ।
अगले दिन शनिवार था, खुशी का कालेज ऑफ था, सुबह जब वो घर पर ही दिखी, वास्तव मे तो मै उसके बूब्स के दर्शन को उतावला था, तो मैंने उससे पूछा की आज कालेज नहीं गई, तो वो बोली नहीं अंकल आज ऑफ हे, मैंने उसे आहिस्ता से कहा की आज आंटी से अन्डर आर्म्स साफ करने की रीक्वेस्ट करना, मान जाए तो साफ करवा लेना, उसने खुश हो हा भरी, नहाने से थोड़ा पहले वो हमारे घर आई, और मेरी वाइफ से कुछ बात की, मेरी वाइफ उसे लेकर हमारे बेडरूम से अटैच बाथरूम मे ले आई, लेकिन बाथरूम छोटा होने से वहा एक साथ दो लोग नहीं रुक सकते थे, तो मैरी वाइफ ने मुझे थोड़ी देर के लिए रूम से बाहर जाने को कहा, मै अपने लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था, तो मैंने उसके कमेरे को रिकॉर्डिंग मोड पर लगा, कमरे से बाहर निकल गया, लगभग बीस मिनट के बाद दोनो बेड रूम से बाहर आ गई, खुशी पीछे थी, पीछे से ही उसने अपनी बाहे ऊंची कर अपनी चिकनी और साफ अन्डर आर्म्स दिखाई, मैंने भी एक नंबर का इशारा किया, जिसे मैरी वाइफ देख नहीं पाई ।
बाद मै मैंने अपने बेड रूम मे आकर सबसे पहले अपना लैपटॉप चेक किया तो देखा की बहुत ही बढ़िया रिकॉर्डिंग हुई थी, खुशी ने मैरे बाहर जाते ही अपनी टी शर्ट खोल अपनी बाहें ऊंची उठाई, और मेरी वाइफ ने सबसे पहले केची से पहले उसके बड़े बाल काटे, फिर हेर रिमूवल क्रीम लगा, कर उसके अन्डर आर्म्स के सब बाल साफ कर दिए थे, बाद मे नैप्किन से पोंछ, पाउडर लगा कर उसको टी शर्ट वापिस पहनवा दिया था । खुशी ने थोड़ी देर बाद ही बाथरूम मे से अपने कुछ अन्डर आर्म्स के बाल साफ किए कुछ फोटो मुझे व्हाट्सप्प पर भेजे, जिसमे वो बिना ब्रा के खड़ी थी, उसका आधा सीना फोटो मे दिखाई दे रहा था, तब मैंने लिखा की नीचे के भी साफ कर ले, तो उसने लिखा, की कोशिश की थी, लेकिन किसी की मदद लेनी पड़ेगी, तब मैंने लिखा की मैरी जब भी जरूरत हो बता देना, उसने smily का एमोजी भेजा । मै उससे हुई सभी चेट तुरंत ही डिलीट कर देता हूँ ।
दोपहर मे उनके घर से मा बेटी की बहस की आवाज आ रही थी, मैंने अपनी पत्नी से पूछा की क्या हुवा, तो वो बोली, की खुशी के कॉलेज से सब दोस्त कल वाटर पार्क जा रहे हे, लेकिन आने जाने टिकट और खाने के ढाई हजार लग रहे हे, एसलिए भाभी उसे नहीं जाने दे रही, मै बोला अभी नहीं जाएगी तो फिर कब जाएगी, लेकिन अपन उनके घर के मामले मे ज्यादा बोल नहीं सकते, थोड़ी देर बाद मैरी बीबी बोली की बेचारी खुशी कितने सालों से कह रही हे की मुझे कभी स्विमिंग पूल मे ले चलो, उसने कभी देखा भी नहीं हे, मेरा बस चलता तो मै उसे अपने खर्चे पर भेज देती, तब मै मन ही मन कुछ प्लान बनाने लगा, दोपहर मे संजय भाई साहेब मतलब खुशी के पापा नए कपड़े पहन बेग लेकर कही जाते नजर आए, मुझे देख रुक हाल चाल पूछा, और बोले की परिवार मे बहन के बेटे की सगाई हे, तो नासिक जा रहा हूँ, दो तीन दिन बाद लोटूँगा, उसके जाने के बाद मेरा दिमाग घोड़े की गति से दोड़ने लगा, बाजार आने के बाद मैंने अपनी बीबी को फोन पर कहा की आज शाम शहर के बड़े मंदिर मे महा आरती हे, दर्शन कर आओ वो बोली हा मै तो भूल ही गई थी, तुम मुझे ले चलना, तब तो मै चुप रहा लेकिन फिर मैंने शाम छह बजे बीबी को फोन लगा कर बोला की मुझे आने मे देर हो जाएगी, तुम राधिका भाभी के साथ मंदिर चले जाना, मैरी बीबी मान गई, थोड़ी देर बाद उसका मैसेज आया की वह राधिका भाभी के साथ निकल गई हे, और अपने घर की चाभी खुशी के पास हे, मै तो वही पास मे ही चोराहे पर खड़ा चाय पी रहा था, उन दोनों को ऑटो से जाते देख, तुरंत घर पहुचा, घर पहुचते ही खुशी बाहर आकार मुझे घर की चाभी दे कर बोली मम्मी और आंटी अभी घर से बड़े मंदिर गए हे, रात तक लोटेंगे, मै बोला हा मुझे पता हे, तु नहीं गई, तो वो बोली, मुझे मंदिर वंदिर नहीं जाना, एतनी गर्मी मे भीड़ मे मेरा दम घुटता हे,तब मैंने उसे कहा की फिर कहा जाना हे, तो बोली जाना तो वाटर पार्क हे, लेकिन मम्मी जाने नहीं दे रही हे, मै बोला की पता हे वाटर पार्क मे इतनी भीड़ और गंदगी होती हे की स्किन डीसीज पक्की हो जाती हे, फालतू के लोग तेरी जैसी सुन्दर लड़कियों को परेशान करते हे, वो अपने सुन्दर होने का बोलने पर खुश हो ब्लश हो गई, एसके बाद मे अपने घर मे आ गया, और उसके लिए कुछ विशेष करने की प्लैनिंग करने लगा, कुछ देर बाद खुशी मेरे कमरे मे आई, बोली अंकल आप यह सब केसे कर लेते हो, तो मैंने कहा की क्या, तो बोली पहले मैरे लिए ब्रा पेन्टी का सेट लाए, फिर हेर रिमूवल का सामान , यहा तक की आंटी से भी मैरे बाल साफ करवा दिए, मै हस कर बोला की मुझसे जुड़ के रहेगी तो फायदे मे रहेगी, फिर मैंने पुछा की तेरे नीचे के बाल का क्या हुवा, तो बोली की अंकल उसके लिए किसी फ्रेंड को बोलना पड़ेगा, मम्मी तो साफ करेगी नहीं, और किसी फ्रेंड के घर सेपरेट रूम नहीं हे, अभी तो शायद ही यह सब संभव होगा, तो मैंने तीर छोड़ा की फिर कल जब तु स्विमिंग पूल मे नहाने जाएगी तो फिर बिकनी मेसे तेरे नीचे के सब बाल दिखेंगे, तो बोली मम्मी कहा जाने दे रही हे, तो मै बोला की वाटर पार्क नहीं जाने दे रही हे, प्राइवेट स्विमिंग पूल मे तो खुद के साथ जाने देगी, वो आशचर्य से खुश हो जोर से बोली, क्या अंकल यह सब रात भर मे पॉसिबल हे, मैंने कहा, समज हो गया, बस तु अपने बिकनी एरिया को साफ कर ले, अब वो दुविधा मे थी बोली अब एतनी रात किस सहेली को बुलाऊ, कुछ देर सोचने के बाद बोली मेरी हर समस्या आप ही दूर करते हो, एस्का भी हल अब आप ही निकालो, मै तो बस उसकी हरी झंडी का इंतेजार ही कर रहा था, मै बोला की फिर नेक काम मे देरी कैसी, वो कुछ सेकंड सोच बोली की आपसे बाल साफ करवाऊ, मै बोला की बता अभी तक तेरी किसने मदद करी हे, उसने मेरी और इशारा किया, तो मै बोला की फिर बता की अब कोन आएगा तेरी एस समस्या के निवारण के लिए, लेकिन उसे शर्म आ रही थी, मै बोला की अभी चार दिन पहले ही मैंने तेरी ब्रा का हुक लगाया, तेरे बूब्स उसके अंदर किए, जब तुझे अपने फोटो भेजना होते हे तो तु किसे भेजती हे, तो हर बार उसने मेरी और अपनी उंगली दिखाई, मैंने कहा की फिर अब क्या परेशानई हे, कुछ सोच वो बोली ठीक हे अंकल, लेकिन कही मम्मी और आंटी आ गई तो बहुत बवाल मचेगा, मै बोला की उसकी जिम्मेदारी मेरी, तब वो तुरंत राजी हो गई, मैंने बेड पर एक पुराना तोलिया बिछाया, और उसे बेड पर लेटने का ईशारा किया, वो बिना देर किए बेड पर अपनी लोअर खोल लेट गई, मैंने उसे उसका टी शर्ट भी खोलने का इशारा किया, और वह बिना देर किए अपने कपड़े खोल ब्रा पेन्टी मे लेट गई, मैंने अपना फोन स्टैन्ड पर लगाया और अपनी वाइफ की लाइव लोकैशन चालू की, अभी उसकी लोकैशन मंदिर मे ही दिख रही थी, मैंने अपनी वाइफ के फोन मे उसकी लाइव लोकैशन की सेटिंग मुझे भेजने की सेटिंग ऑन कर रखी हे, एसलिए मुझे चोबीसों घंटे उसकी लाइव फ़ीड दिखती हे, खेर, अब भाभी और पत्नी के अचानक से घर आने का तो डर खत्म हो चुका था, इसके बाद मैंने अपने लैपटॉप पर घर के मैंन गेट के केमरे की लाइव फुटेज चालू कर दी की यदि कोई बाहरी व्यक्ति आए तो पहले ही पता चल जाए, अब बेफ़िकर होकर मै खुशी के पास आया, और उसकी पेन्टी के एलास्टिक मे उंगली डाल उसे नीचे की और खींचा, उसने बिना झिझक अपने कूल्हे हवा मे उठा दिए, उसकी पेन्टी पेरो से बाहर कर मैंने उसकी बुर की और देखा, तो मुझे गहने काले घुँघराले बालों के अलावा कुछ भी नहीं दिखा, सबसे पहले मैंने अपनी शैविंग कीट ले कर उसकी केनची से उसकी चुत के सब बड़े बड़े बाल साफ कर दिए, अब उसकी कसी हुई बुर के थोड़े दर्शन हुवे, फिर मैंने शैविंग क्रीम और ब्रश से उसकी बुर के पूरे भाग मे से खूब सारे झाग बना उसकी झांटों के बालों को तोड़ा नरम किया, शैविंग ब्रश की रगड से उसको हसी आ रही थी, लेकिन वो ज्यादा शर्म नहीं दिखा रही थी, अब मैंने शैविंग ब्लैड से बड़ी सावधानी से उसकी चुत के बालों की सफाई शुरू की, और बस कुछ देर मे ही उसकी छोटी सी पाव रोटी जैसी फुगी हुई मुनिया साफ दिखने लगी, उसका बदन भरा हुवा था, एसलिए उसके पेट के नीचे का हिस्सा भी बहुत ही मांसल और आकर्षक था, मेरी तो निगाह ही नहीं हट रही थी, उसकी चिकनी बुर से, इधर मेरा लँड़ लोअर फाड़ बाहर आने को बेताब था, लेकिन मै अभी किसी जलदी मे नहीं था, वास्तव मे जो आज हम दोनों के बिच यह सब जो घट रहा था, उसका सब प्लान यूं ही अचानक हो गया था, दूसरा मुझे कोई उम्मीद नहीं थी की खुशी भी इसमें एतनी बेझिझक मैरा साथ देगी, अब जब उसकी चुत की सब झान्टे साफ हो गई तो मैंने उसे घोड़ी बनाया, और उसकी गाँड़ के आसपास के भी सब बाल साफ कर दिए, वो फिर सीधी हो गई थी, अब वो नीचे से पूरी तरह से नंगी थी, जब मैंने उसकी बुर को अच्छे से साफ किया तो देखा की, उसकी चुत बिल्कुल टाइट थी, अंदर से पिंक कसी हुई, यदि अभी उसमे अपना लवडा डालता तो संभव था की बहुत ही खून खराबा हो जाता, और मै हमेशा ठंडी कर खाने वाला आदमी हूँ । उसकी बुर को बहुत सावधानी से साफ किया था की काही कोई कट वगेरह ना लग जाए ।
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अब मैंने वही बेड पर बेठ इक मॉइस्तरएजिंग क्रीम उसकी बुर पर रगड़ना शुरू किया, अपनी दो उनगलियों से मै उसकी बुर पर एक समान गति से लयबद्ध क्रीम मसलने लगा, पहले तो मैंने क्रीम उसकी बुर के साइड लिप्स पर ही लगाया, लेकिन जब मैरी उनगलियों को उसकी बुर की गर्माहट महसूस हुई तो मैंने थोड़ी और क्रीम उनगलियों मे लेकर उसकी भगनासा को भी रगड़ने लगा, अब मेरी उनगलियों का जादू शुरू हो चुका था, पहले तो उसने अपनी झाँघो को पूरा खोला, फिर अपने कूल्हे हवा मे हल्के से ऊपर उठाए, और फिर मैरी उनगलियों के कमाल से उसके मुंह से सिसकिया निकलने लगी, तभी उसने अपने एक हाथ से अपने मोटे मोटे स्तनों को ब्रा मे से ही दबाने निचोड़ने लगी, मैंने उसकी ब्रा पर निगाह मारी तो देखा के उसके एक बूब्स की निप्पल बाहर आने को हो रही हे, मैंने उसे इशारा किया तो उसने अपनी ब्रा भी खोल दी , साथ ही अपनी निप्पल की खिचने लगी , उसके पैर नीचे मचल रहे थे, उसकी बुर से तेजी से चिकना पानी सा काम रस बह निकला, और वो एक पल को धनुष के आकार की तरह अपनी कमर हवा मे उठा वही ढेर हो गई, यह सब इतनी तेजी से हुवा की मै अपने मोबाईल और लैपटॉप की स्क्रीन भी नहीं देख पाया, अब उसे रीलैक्स देख, मैंने सबसे पहले अपनी बीबी की जीपीएस लोकैशन देखी, वह अभी भी वही मंदिर मे ही दिख रही थी, फिर बाहर मैंन गेट का केमरा चेक किया, वहा भी सब सामान्य था, फिर संतुष हो, मैंने अपने का पर फोकस किया ।
कुछ देर उसके आराम करने के बाद मै उसे खड़ा कर बाथरूम मे ले आया, लेकिन मैंने अपना लोअर बाहर ही निकाल दिया, नहीं तो वो पानी से नीचे से भीग जाता, उसके नंगे बदन पर पानी डाल उसे पूरी तरह साफ कर दिया, अब मै वी शैप फ़्रेनची और बनियान मे था, मैंने उसके बदन पर बॉडी शावर जेल लगा कर उसके पूरे भरे पूरे मांसल बदन को हर इंच से नापा, उसकी बुर की अच्छी तरह से सफाई की, फिर उसके बूब्स, अन्डर आर्म्स सब जगह जेल फ़ोम मसल मसल कर उसको चमका दिया, वो मैरी किसी भी हरकत को रोक नहीं रही थी, जब मैंने उसकी चिकनी बुर पर फ़ोम रगड़ा, और अपनी दो उँगलिया उसकी चुत मे हल्के से घुसाई तो उसने तुरंत अपनी झाँघे चोंडी कर मारे काम को आसान कर दिया, एसके बाद मै उसे बढ़िया से शावर दे बाहर ले आया, नरम साफ टावेल से उसका पूरा बदन पोंछ उसे फिर बेड पर लेटा दिया, अब मैंने उसके पूरे नंगे बदन पर बॉडी लोशन लगाने लगा, एस बार फिर उसके शरीर के एक एक इंच भाग को छुवा, इसमें उसने मेरा भर पुर साथ दिया, मैंने जी भर कर उसके बदन को ऊपर नीचे, दाए बाये सब तरफ से छुवा, फिर मैंने एक बार फिर उसकी फुगी हुई पाव रोटी समान चुत पर हाथ फेरा, लेकिन मेरी एक निगाह मैरे दोनों डिवाएस पर थी, वहा से सब ठीक होने की संतुष्टि होने पर मै थोड़ा रीलैक्स हुवा, तभी खुशी ने बेड पर मेरे लिए थोड़ी जगह बनाई, और मुझे अपनी और खिच लिया, मैं अब उसके बिल्कुल बराबर मे लेता था, उसने हमेशा की तरह मैरे गाल पर एक किस किया, तो मैंने भी बदले मे उसे किस किया, और फिर उसने मेरा हाथ अपने भारी भरकम सिने पर रख दिया, अब मै उसके गालों होंठों को किस करते करते उसके उसके बूब्स को मसल रहा था, उसके स्तन बहुत कठोर हो चुके थे, गुलाबी निप्पल तन कर लंबे अंगूर के दाने जैसे लगने लगे थे, मैंने उसके चेहरे को छोड़ उसके बूब्स पर हमला बोला, और उसने उछल उछल कर अपने बूब्स मैरे मुंह मे भर दिए, मैने उसके बूब्स चूस चूस कर लाल कर दिए थे, हल्के से दांत से काट भी लिया था, तो वो हल्की सी चीखी भी, लेकिन उसने मैरा भरपुर साथ दिया, उसके बाद उसने मैरे लिंग को छुवा, मै एसके लिए तयार नहीं था, लेकिन मैंने भी विरोध नहीं किया, उसने अपने घुटनों पर बेठ मैरी फ़्रेनची मेरी टांगों से निकाल दी, और बिना किसी झिझक के मैरा लंड अपने मुंह मे ले लिया, मुझे उससे इस तरह की हरकत की उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं थी, मैरी बरसों का ख्वाब था की बड़े बोबे वाली लड़की हो , मेरा लंड चूसे, मे उसकी चुत चाटू, वो सब आज बिन मांगे नसीब हो रहा था, आज तो भगवान ने मैरी बरसों की मन की इच्छा पूरी कर दी थी ।
इसके बाद जब वह मैरा लंड चूसते चूसते थक गई, तब मै उसकी झाँघो के बिच चला आया, उसने अपनी झानघे पूरी चौड़ी कर दी, और मैंने अपनी जीभ का जादू चलाया, उसकी गुलाबी रस भारी चुत को चाटना शुरू किया, वो मैरा भरपूर सहयोग कर रही थी, पहले तो मेरी जीभ भी उसकी टाइट बुर मे नहीं जा पा रही थी, लेकिन फिर जलदी ही वो थोड़ी खुली, अंदर से गुलाबी रस भरी थी, उसके मुंह से भारी भारी आवाज़े निकलने लगी , लेंकीन मैंने भी उसे छोडा नहीं उसने जलदी ही तीन चार बार अपना काम रस फेक दिया, मैंने एक बार भी उसका काम रस नहीं बहने दिया, एक एक बूँद चाट गया, फिर मैंने अपने दोनों डीवाएस चेक कर उसे अपने ऊपर बिठा लिया, वो अपनी गाँड और चुत को मैरे लँड़ पर बेठ रगड़ने लगी, मैंने उसे आगे की और झुका लिया, बहुत देर तक उसके होंठों को चूस चूस लाल करने के बाद उसने अपने बूब्स को खूब चुसवाया, वो मुझसे अभी चुदवाना चाहती थी, लेकिन मुझे पता था की अभी एस्की चुत चोदना खतरे से भरी थी, उसकी चुत बहुत नाजुक थी, यदि ज्यादा ब्लडिंग वगेरह या कुछ और हो जाता तो लेने के देने पड जाते, उसे मैंने समझाया की समय आने पर हमेशा की तरह मुझसे सब मिलेगा तुझे, और वो अच्छे बच्चे की तरह मान भी गई, फिर वो खुद उठ कर मैरे चेहरे पर अपनी रसभरी चुत लेकर बेठ गई, मैने फिर उसे अपनी जीभ से कोई चार बार झड़वा दिया, अब वो थक गई थी, फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद हम दोनों कांच के सामने नंगे खड़े हुवे, और जी भर कर एक दूसरे को देखा, फिर हमने मिल कर सब सामान सही किया, और वह अपने कपड़े पहन मैरे साथ आँगन मे आ गई, क्योंकि अब मैरी वाइफ की लोकैशन मंदिर के बाहर टैक्सी स्टैन्ड की आ रही थी, कोई रात दस बजे, मेरी वाइफ और भाभी दोनों मंदिर से घर आ गए, सब सामान्य ही रहा ।
सुबह मेरी बीबी ने कहा था की खुशी को वाटर पार्क वो खुद के खर्चे पर ले जाना चाहती हे, तो मैंने अपने दिमाग के घोड़े को दौड़ाया था, और किस्मत से आज दोपहर मुझे संजय भी से बात करते समय याद आया की कुछ साल पहले मैंने अपने एक पुराने बिजनस मित्र के शहर के बाहर एक बड़े से सुनसान जगह फार्म होउस मे केमरे फिट किए थे, वहा बड़ा सा स्विमिंग पूल भी था, और मैंने उन्हे ऐसी ही फोन लगा दिया, और किस्मत देखो, मेरे हेलो बोलते ही वो बोल पड़े आश्विन भाई, तुम हजार साल जियोगे, मै तीन दिन से तुम्हारा नंबर ढूंढ रहा था, लेकिन मैंने कही मिस कर दिया था, और आज तुमहार फोन ही आ गया, क्या किस्मत हे, मैंने कहा क्यों याद कर रहे थे आप एस नाचीज को, तो वो बोले की भाई, पिछले पंद्रह दिनों से फार्म होउसे पर सिक्युरिटी केमरे बंद पड़े हे, वहा का चोकीदार भी अभी गाँव चला गया हे, कोई देखने वाला नहीं हे मैंने कहा, की आप बोलो तब सुधरवा दु, तो वो बोले भाई मै तो अभी शहर से बाहर हूँ, अगले हफ्ते ही शहर मे आ पाऊँगा लेकिन आप जलदी से जलदी केमरे चालू करवा दो भाई, और हा, अपनी फॅमिली को भी ले आओ किसी दिन अपना घर का फार्म होउस हे, खाना पीना कपड़े लत्ते सब भरा हुवा हे, अपने हाथ से लो पकाओ और खाओ, कोई पूछने वाला नहीं, और हा वहा की चाबिया मेरी दुकान पर पड़ी हे, मे अभी बोल देता हूँ, स्टाफ आपको दे देगा, सब बच्चे इंजाय कर लेंगे । मेरे तो दिमाग की बत्ती ही हिल गई, जो सोच था वो हो गया, और नया बिजनस मिला वो अलग, मै शाम को घर आते समय उनकी दुकान से फार्म हाउस कीचाबिया लेते आया, एसिलिए मैंने खुशी को शाम को मिलते ही कहा था की प्राइवेट स्विमिंग पूल मे चलेंगे, और तु अपनी बिकनी एरिया की सफाई करवा ले ।
रात मे मैंने अपनी वाइफ से कहा की सुबह तुने खुशी को वाटर पार्क ले जाने को कहा था ना, तो वो बोली की हा मेरी इच्छा तो बहुत हे, मगर पैसे बहुत लगते हे, फिर दूर भी बहुत हे, मैंने कहा को सब इंतजाम हो गया हे, कल सुबह जलदी ही, हम उसे ले चलेंगे, तो मेरी वाइफ ने खुश होकर कहा की एतनी जलदी केसे , मैंने कहा की तु बस कल सुबह उसको जलदी उठा लेना, तो मेरी बीबी बोल पड़ी, भाई साहब भी सगाई समारोह मे नासिक गए हे, तीन चार दिन मे आएंगे, क्यों ना राधिका को भी साथ ले ले, मैंने कहा की नहीं वो ज्यादा शर्म सोदा करती हे, बेटी को भी पानी मे रोकेगी टोकेगी, वहा सिर्फ हम ही रहेंगे, कोई और नहीं तो तो बच्ची खुल कर खेल कूद लेगी, उसकी मा वहा रहेगी तो हर चीज मे मना करती रहेगी, उसके कारण तु भी शर्म पालेगी, कपड़े ढंग के नहीं पहनेगी, उसे रहने दे, लेकिन मेरी बीबी नहीं मानी बोली नहीं हम उसे भी ले जाएंगे, जैसे मे बोलूँगी वो वैसे रहेगी, तुम बोलो तो सही मे उसे बिकनी पहना दूँगी । मुझे अच्छे से मेरी बीबी की एस आदत का पता था, की जब मे किसी काम का मना करूंगा तो वो उसे जरूर करेगी, और यहा मेरी यह चाल सही बेठी, मैंने संडे सुबह छः बजे का अलार्म लगा या था, जब मे उठा तब तक मेरी बीबी ने पड़ोसन को जगा सब बात समझा दी थी, उन्हे कहा बस फ्रेश होकर निकल जाएंगे, जल्दी से एक दो जोड़ कपड़े रख लो और निकलो ।
इसके बाद तुरंत खुशी मेरे कमरे मे भाग कर आई, मुजसे बोली क्या अंकल आंटी जो बोल रही हे वो सच मे सही हे, मैंने धीरे से कहा की मे तो तुझे कल ही बोला था की, कल स्विमिंग पूल मे चलना हे, और इसीलिए कल ईतनी मेहनत की तेरे ऊपर । खुशी जोश मे मेरे ऊपर कूद पड़ी, और मेरे गालों पर लगातार किस देने लगी, उसकी यह सब हरकते मेरी बीबी ने पीछे से रूम मे आते हुवे देख लिया, उसे यह सब स्वाभाविक ही लगा, क्योंकि खुशी बचपन से मुझ पर ऐसे ही चड़ती हे, किस करति हे, यह हम सब के लिए सामान्य था, लेकिन कुछ दिनों से केवल खुशी और मैरे लिए यह सब कुछ अलग था ।
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ठीक आठ बजे हम सब हमारी कार से निकल गए, खुशी मेरे साथ आगे पेसेंजर साइड बेठी थी, और उसकी मम्मी और मैरी बीबी पीछे, सब खूब धमाल मस्ती कर रहे थे, रास्ते मे हमने हाई वे पर नाश्ता किया, और फिर आराम से घूमते घामते एक होटल से लंच पैक करा आगे निकल गए, कोई चार घंटे बाद दोपहर के बारह बजे के लगभग हम जंगली रास्ते से होते हुवे पहाड़ियों के बिच घिरे फार्म होउस पर पहुच गए, मै पहले भी दो बार यहा आया हुवा था तो मुझे यहा के रास्तों का अच्छे से पता था, नया आदमी तो भटक सकता था, क्योंकि एस जंगल मे सही लोकैशन बताने वाला यहा कोई नहीं था, मोबाईल नेटवर्क भी आते जाते रहते थे, लेकिन फार्म होउस ऊंची पहाड़ी पर होने के कारण वहा नेटवर्क मिल जाता था, आस पास दूर दूर पर कुछ और रेसॉर्टस और फार्म हाउस भी थे लेकिन सब के जाने के रास्ते मैंन रोड से अलग अलग थे , जाते ही मैंने सबसे पहले जल्दी से पूरे फार्म होउस को चेक किया, की कही कोई समस्या तो नहीं कही कोई छुपा बेठा तो नहीं, क्योंकि यहा पिछले हफ्ते से चोकीदार भी नहीं था, सब कुछ फूल प्रूफ होने के बाद ही मैंने महिलाओ को कार से बाहर आने दिया, क्योंकि जंगली इलाका होने के कारण जंगली जानवरो का भी होने का अंदेशा रहता हे, फिर हमने कमरे अपने पास की चाबियों से खोले, हमने केवल दो रूम हो ओपन किए थे, क्योंकि हमे लगा था की कही रूम गंदे ना हो लेकिन अंदर से कमरे चकाचक थे, लाइट, ऐसी, कूलर, फ्रीज , किचन , सोलर पावर का बैकअप संब चालू हालत मे था, मैंने केमरे के मैं डिवीआर को देखा तो पता चला की उसका केवल एक केबल डैमिज था, एसलिए उसमे पावर सप्लाइ नहीं जा रहा था, लेकिन मैंने उसे दो मिनट मे अभी सुधारने के बाद भी चालू नहीं किया, क्योंकि चालू हो जाने के बाद उसका लाइव फुटेज मेरे कस्टमर के मोबाईल पर दिखता, और मै यह नहीं चाहता था, खेर फिर मै पिछे बने स्विमिंग पूल पर गया, वहा देखा तो वो बड़ा सा स्विमिंग पूल पूरा कवर से ढका था, कवर हटाने के बाद भी उसमे एक दो पत्ते तेर रहे थे, मैंने उन्हे भी साफ कर दिया, वही पानी फ़िल्टर की मशीन लागि थी मैंने उसे वहा लिखे बोर्ड के अनुसार चालू कर पानी साफ करना शुरू कर दिया ।
यह सब काम निपटा कर मै कमरे मे आया तो देखा भाभी और मेरी बीबी बेड पर साथ मे सुस्ता रही थी, लेकिन खुशी उदास हो मेरे वापिस आने का इंतजार कर रही थी, मैंने उसे इशारे से बाहर बुलवाया, और पुछा क्या हुवा, उदास क्यों हे तो बोली की हम यहा आ तो गए लेकिन हमारे पास यहा पहनने के लिए स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स नहीं हे, एनही कपड़ों मे मम्मी मुझे स्विमिंग करवाएगी, मैंने कहा तुझे यहा लाया कोन , उसने मेरी तरफ उंगली दिखाई, तेरे बदन को बिकनी पहनने के लिए साफ किसने किया, तो उसने फिर मेरी तरफ इशारा किया, फिर एक दूसरे रूम मे ले जाकर उसे एक अलमिरा दिखाई, उसमे ढेर सारे सभी साइज़ के नए नए स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स थे, खुशी उन्हे देख पागल हो गई, लेडिज मे कुछ बड़े साइज़ की फ़्राक टाइप थे तो कुछ बहुत छोटे बिकनी टाइप, लेकिन मैरा दिमाग बहुत आगे दोड़ता हे, मैंने खुशी को कहा की जल्दी से तेरे लिए एक मिडियम साइज़ तेरी मा के लिए थोड़ी सि बड़ी, और तेरी आंटी यानि मेरी वाइफ के लिए और छोटी बिकनी ढूंढ ले, क्योंकि जब वो दोनों देखेगी तो तुझे बड़ी वाली फ़्राक जेसी कास्टूम ही पहना देगी, मेरी बात को सही मान उसने फिर से मुझे एक किस किया, और फिर मैंने अपने लिए भी एक जेन्ट्स फ़्रेनची मिडियम साइज़ की निकाल लि, तभी मेरी निगाह वहा रखे शैविंग कीट , हेयर रिमूवल क्रीम, और शैविंग मशीन पर गया, मै अब समज गया की हमारे क्लाइंट जिसका यह आलीशान फार्म होउस हे वह हे तो शौकीन मिजाज बंदा, सब व्यवस्था कर रखी हे भाई ने, हमने लगभग समान कॉस्ट्यूम्स ही निकाले क्योंकि हम नहीं चाहते थे की खुशी की मम्मी की बड़ी कास्टूम दिखे और फिर वो कोई नया रायता फेलाये ।
वापिस आने पर हमने अपना लंच लिया , और फिर थोड़ी देर सुस्ताने के बाद दोपहर तीन बजे के लगभग खुशी बोल पड़ी की अंकल यहा सोने आए हे या स्विमिंग करने, मुझे तो अभी तक स्विमिग पूल ही नहीं दिखा, चलो चलते हे, तब हम सब उन्ही कपड़ों मे फार्म होउस के पिछे के रास्ते चल पड़े, रास्ते मे एक छोटा सा बच्चों के हिसाब का स्विमिंग पूल था, मैंने कहा की चल खुशी कूद जा, उसे लगा की यही असली स्विमिंग पूल हे, वो उस छोटे से पूल को देख निराश हो गई, और रुवासी हो बोली, अंकल क्या हम इसमें नहाने के लिए इतनी दूर से आए हे, मै बोला की मुझे तो स्विमिंग पूल का बोला था तेरी आंटी ने छोटा या बड़ा नहीं बोला था अब जो भी ईसी मे नहा ले, वो आँखों मे आसू लिए वापिस पीछे मूड गई, उसका मन दुखी हो गया, उसकी सब इच्छाहो पर पानी फिर गया, मै बोला की मुझे क्या पता था की यहा एतना छोटा स्विमिंग पूल होगा, अब स्विमिंग पूल तो एक ही होता हे । जब वो कुछ दूर चली गई तो मैंने देखा की मेरे पत्नी और भाभी दोनों भी खुशी को दुखी देख उदास हो गई, तब मैंने उसे कहा के यहा एक बड़ी पानी की टंकी हे, उसे देख ले, यदि लगे तो उसी मे तु कूद जाना, लेकिन वह नहीं पलटी, लेकिन मैरे बार बार बोलने पर वह वापिस आई, और फिर मे पेड़ों की पिछे चारों तरफ ऊंची दीवारों से कवर बड़े से भाग मे ले गया तो वहा के बड़े से साफ पानी के स्विमिंग पूल को देख खुशी जोर से चीख पड़ी, और वही दूर से दौड़ लगा, हमेशा की तरह मैरे ऊपर छलांग लगा मुजसे लिपट गई, और मैरे चेहरे पर दसियों किस कर दिए, उसकी यह हरकत देख राधिका भाभी सन्न रह गई लेकिन मेरी वाइफ की खुशी देख वह भी हसने लगी, खुशी उसी समय पानी मे कूदने के लिए अपने जूते उतारने लागि, तब मै बोला की जा कास्टूम चेंज कर आजा, वही पास मे दो कमरों का लेडिज जेन्ट्स अलग अलग चेंज रूम था, मैरे बोलते ही वह चैन्जिंग रूम की और भागी,मै पहले ही हम सभी के साइज़ के कॉस्ट्यूम्स के कुछ अलग अलग सेट वहा रख चुका था, और अगले दो मिनट मे ही खुशी एक छोटी सी बिकनी मे सब के सामने आ गई, उसे देखते ही राधिका भाभी जोर से बोली खुशी यह सब क्या पहना हे, तमीज हे, तो मेरी बीबी बिच मे बोल पड़ी, स्विमिंग पूल मे अब क्या साड़ी पहन कर जाएगी ? लेकिन भाभी चुप नहीं हुई तब खुशी बोली की हम घर से तो कोई कास्टूम नहीं लाए थे, और जो यहा हे, उसमे से जो मुझे आएंगे, वही तो पहनुगी ना मै।
मेरी बीबी भी अभी तो खुशी का पक्ष ले रही थी, क्योंकि यहा खुशी और उसकी मां को साथ लाने का प्लान उसी का था, और अब उसे ही सब सही करना था, लेकिन मुझे भी पता था की मन ही मन वह भी खुशी को मेरे सामने एतने छोटे कपड़ों मे देख नॉर्मल नही थी, खीर जब राधिका भाभी उसका हाथ पकड़ उसे वापिस चैन्जिंग रूम मे ले गई, लेकिन वहा हमने पहले से ही लिमिटेड कपड़े रखे थे, और अब तो वो उन कपड़ों मे यूं भी हमारे सामने आ चुकी थी, उसे बेटी के साथ समझोंता करना पड़ा की पानी से बाहर आते ही वो अपने बदन पर टावेल लपेटगी, यूं अधनंगी नहीं घूमेगी, फिर क्या था, खुशी तुरंत दोड़ती हुई बाहर आई और एक सेकंड मे पानी मे जम्प लगा गई, वो पानी को देख खूब शोर मचाने लगि, उसकी खुशी की कोई सिमा ही नहीं थी, जब वो बहुत छोटी थी तब उसने अपने नाना के शहर मे कुछ दिन स्विमिंग सिखा था, एसलिए उसे पानी का डर नहीं था, थोड़ी देर बाद फिर जब खुशी ने सबको पानी के अंदर आने के चिल्लाया तो मै भी अपनी कास्टूम पहन मे भी पानी मे कूद गया
अब खुशी और मै दोनों पूल मे खूब मस्ती करने लगे, मैंने अपनी पत्नी से कहा की वो दोनों भी कपड़े चेंज कर आए, और स्विमिंग पूल का मज़ा उठाए, मैरी बीबी तुरंत राजी हो गयी, लेकिन राधिका भाभी मेरे वहा होने से शर्म के कारण पूल मे नहीं उतरना चाहती थी, लेकिन मेरी वाइफ उसे जबरन अपने साथ चैन्जिंग रूम मे ले गई, और जब उसने वहा बड़े साइज़ की फ़्राक स्टाइल बड़ी बिकनी देखि तो उसे पहनने को राजी हो गई, कुछ देर मे ही मैरी पत्नी और राधिका भाभी दोनों पूल के पास आ गए, मेरी बीबी दुबली पतली हे , छोटी बिकनी मे भी उसका फिगर नहीं दिख रहा था, जबकि भाभी उस फ़्राक टाइप बिकनी मे मस्त माल लग रही थी, भाभी के बड़े बड़े बूब्स से मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी, भाभी की बुर वाला भाग बहुत ही फूला हुवा लग रहा था, भाभी के अन्डर आर्म्स मे बड़े ही कड़क काले बाल दिख रहे थे, जिन्हे महिलाओ के अन्डर आर्म्स के बाल पसंद हो उसङ्के लिए तो जन्नत ही थी, लेकिन मुझे पर्सोनलि बाल पसंद नहीं ।
थोड़ी देर तक तो दोनों महिलाये, पूल मे पैर डाल कर बेठी रही, फिर मैरे बार बार कहने पर पहले मेरी बीबी पानी मे कूदी और उसको मस्ती करते देख कुछ देर बाद भाभी भी कूद पड़ी, इधर मै खुशी को बार बार छेड रहा था, मेरी बीबी तो कुछ सामान्य ही लग रही थी बिकनी मे लेकिन राधिका भाभी जब पूरी गीली हुई तो बड़े गयाले की बिकनी मेसे उनका सीना बाहर आता दिख रहा था, बहुत मस्त लग रही थी, कुछ देर बाद खुशी पूल मे एक गेंद ले कर आ गई, हम चारों ने उसके साथ खूब मस्ती की, अब भाभी ने भी अपनी थोड़ी शर्म छोड़ दी, खुशी ने जान बुझकर दो तीन बार मैरे उत्तेजित लिंग को फ़्रेनची के ऊपर से टच किया, माना भी कहा की सांप को मत छेड़ डंस लेगा, तो वो जोर जोर से हसने लगी ।
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शाम को छः बजे तक हम सब बहुत थक चुके थे तो पानी से बाहर निकल आए, फिर अपने रूम मे आकार आराम करने लगे, रात मे हमने आगन मे आग लगा कर बहुत अंताक्षरी खेली, अब तक भाभी मैरे सामने अच्छे से खुल चुकी थी, फिर हम रात मे सभी एक ही बड़े से हाल मे साथ सो गए, स्विमिंग की थकान से सब गहरी नींद मे सो चुके थे, रात एक बजे मेरी नींद खुली, तब मै बाथरूम करके बाहर बालकनी मे आ गया, ठंडी ठंडी मस्त हवा चल रही थी, वापिस सोने की इच्छा नहीं हो रही थी, तभी खुशी वहा आ गई, उसने हमेशा की तरह एक छोटी सी नेकर और स्पोर्ट्स ब्रा पहन रखी थी, कुछ देर हवा खाने के बाद मैरे से सट कर खड़ी हो गयी, कुछ देर बाद मैंने बड़े से रूम के अंदर निगाह मारी तो देखा की दोनों महिलाये कमरे के आखरी छोर पर गहरी नींद मे सो रही थी बालकनी और कमरे के बिच कांच का पार्टीशन था, और परदे लगे थे, कमरे मे हल्की रोशनी थी, मैंने थोड़ा सा पर्दा हटा दिया, ताकि अंदर की गतिविधि देख सकु, , मैं वही चेयर पर बेठ गया, तो खुशी मैरी गोद मे बेठ गई, और कुछ मिनट बाद अपने सिने को मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी बाहर भी अंधेरा था, ना कोई कुछ देखने वाला था, खुशी मेरे लिंग पर अपनी नेकर रगड़ने लागि, और मुझे उत्तेजित करने का प्रयास करने लगी, उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से लीक करना शुरू किया उसकके बाद मैंने भी उसकी जीभ अपनी जीभ से चटनी शुरू कर दी, अब वो पूरी तरह गरम हो चूली थी उसने बिना देर किए अपनी स्पोर्ट्स ब्रा खोल कर फेक दी, और अपने मोटे ताजे कठोर स्तन मेरे मुंह मे देने लगी, मैंने भी बिना देरी किए उसके स्तनों की चूसना चाटना शुरू कर दिया, अब तक वो मेरी गोदी मे बेठी थी तbhi उसने खड़े होकर अपनी नेकर और पेन्टी खोल दी, और पूरी तरह नंगी हो गई, मेरी एक निगाह अंदर कमरे की स्थिति पर भी थी, लेकिन मुझे ज्यादा चिंता भाभी की थी, क्योंकि मेरी पत्नी रात मे बहुत ही गहरी नींद मे सोती हे, सुबह उसे उठाना पड़ता हे, कुक्षि बोली की मेरी मम्मी भी सैम ही हे, चोरी की पूरी बारात घर मे आ जाए लेकिन वो नहीं हिलती ।
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ईसके बाद मेने रूम मे जाकर एक चादर और दो तकिये ले आया, और फिर उन्हे बालकनी मे बिछाकर खुद भी नंगा हो गया, खुशी मेरे नीचे लेटते ही अपनी चुत को चोंडी कर मैरे मुंह पर बेठ गई, मैंने उसकी रस भरी चुत की चाटना शुरू किएए, और वो अपनी कमर हिला हिला कर अपनी बुर का पानी मेरे मुंह मे खालि करती जा रही थी, तीन बार खालि होने के बाद अब वो मेरे लिंग को अपने मुंह मे लेकर चूसने लगई, उसकी हरकते बता रही थी की वो बहुत खेली खाई हे, लेकिन उसने बताया की वो अपने मोबाईल पर बहुत सी गंदी फिल्मे देख यह सब सिख चुकी हे, दस मिनट बाद जब वो थक गई, तो उसने मेरे लंड को थोड़ा आराम दिया, अब मेने उसकी गाँड के नीचे इक टाकिया लगा कर उसे नीचे लेटा दिया, और उसकी पाव रोटी की तरह फुली रस भारी गुलाबी चुत के मुंह पर अपना कड़कनाथ सेट किया, बड़े आहिस्ता आहिस्ता उसकी बुर पर लंड रगड़ना शुरू किया, मेर इस हरकत पर वो फिर से खाली हो गई और उसकी कामरस से भरी चुत गीली हो गई, मैंने मौका देखते ही आहिस्ता से अपने लंड को उसकी अनचुदी बुर मे डालना शुरू किया, पहले प्रयास मे उसके मुंह से हल्की सी चिख निकलने लगी, लेकिन मैंने तुरंत ही उसके मुंह मे अपना मुंह दे उसकी आवाज को वही दबा दिया, और अब हल्के हल्के धक्के देना शुरू किया, थोड़े से प्रयास से ही मेरा पूरा लंड उसकी चुत मे फिट हो गया, उसकी चुत से लाल लाल खून की बुँदे बहने लगी, उसकी सील टूट चुकी थी, लेकिन मैरे अपनी कमर ऊपर नीचे करते ही वह चिखने लगती, लेकिन मै उसे हर बार उसके मुंह मे अपना मुंह दे चुप कर देता, कोई दस मिनट की कड़ी कोशिश के बाद आखिर मेरा लंड उसकी चुत मे फिट बेठ गया, अब उसे भी मजा आने लगा था, वो भी लयबद्ध तरीके से अपनी कमर नचा नचा कर मेरा साथ दे रही थी, मेरी निगाह लगातार रूम के अंदर अपनी बीबी और भाभी पर थी, आधे घंटे की चुदाई मे खुशी तीन बार स्खलित हो चुकी थी, अब मैंने भी चरम लाकर उसकी चुत से अपना लंड बाहर निकाल लिया, और उसके पेट पर ढेर सारा वीर्य उगल दिया, अब हम दोनों बहुत थक चुके थे, थोड़ी देर वही आराम करने के बाद मैंने खुशी को कपड़े पहना अंदर भेज दिया, खुशी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी, लेकिन मेरे पूछने पर बोली कोई ज़्यादा प्रोब्लेम नहीं हे । बाद मे मै भो अपने बेड पर आकार सो गया, सुबह पाँच बजे मैरी नींद फिर खुली, सब गहरी नींद मे सो रहे थे, इस बार राधिका भाभी अपने पैर चोड़े कर बेफ़िकर सो रही थी, उनकी मांसल पिंडलिया सारी ऊंची होने से दिखाई पड रही थी, ऊपर उनकी सारी का पल्लू भी सिने से थोड़ा हटा हुवा था, एस कारण उनके उभार साफ दिख रहे थे, अपनी पत्नी का चेहरा दूसरी तरफ देख मै भाभी के पाले को पूरीतरह से उनके सिने से हटाने मे कामयाब रहा, अब उनका उन्नत वक्षस्थल पूरी तरह दिख रहा था उनके ब्लाउस का ऊपरी पहला हुक खुला हुवा था, जिसमे से उनके स्तन ब्लाउस फाड़ बाहर आने को हो रहे थे, मैंने बडी सावधानी से उनके ब्लाउस के दूसरे हूक को, फिर तीसरे हुक को भी खोल दिया, अब भाभी के आधे से ज्यादा स्तान बाहर को आ गए थे, भाभी ने मेरे द्वारा लाई ब्रा ही पहन रखी थी, भाभी के शरीर मे किसी प्रकार की हरकत ना होती देख मेरी हिम्मत बढ़ गई, और अब मैंने अपना होसला दिखाते हुवे, उनके चोंथे हुक को भी खोल दिया, अब भाभी का बलोसे केवल एक हुक के सहारे था, उनके स्तन ब्रा फाड़ बाहर आने को हो रहे थे, तभी भाभी ने थोड़ी सी हरकत की और इस बार उनके हिलने से उनकी एक काली काली निप्पल ब्रा मे से दिखाई देने लगी, और उनका पेटीकोट उनकी झाँगहो पर चड गया, मैंने एस बार नीचे की और अपना होसल दिखाया, और उनके पेटीकोट के एक हिस्से को अपनी चिमटी मे पकड़ उठाना शुरू कर दिया, एक बार के प्रयास मे ही उनका पेटीकोट कमर तक चड गया, भाभी की मोटी झाँगहो पर बाल थे, पेन्टी भी नई वाली ही थी और उनकी पेन्टी मे संब तरफ से उनकी काली काली झानटे बाहर आ रही थी, मुझे बाल बिल्कुल पसंद नहीं, मन मे थोड़ा अफसोस हुवा, लेकिन अब भाभी की चुत लेने की प्लान भी बनाना था । अभी तो ज्यादा कुछ कर नहीं सकता था, एसलिए भाभी को अच्छे से निहार कर अपने बेड पर वापिस आकर सो गया, सुबह आठ बजे मेरी पत्नी और भाभी की आवाज से नींद खुली, वो दोनों भी अभी ही उठी थी, भाभी मेरी पत्नी से बोल रही थी की, उनके सारे कपड़े खुले मिले सुबह, उन्होंने खुद तो नहीं खोले, तो मैरी बीबी बोली की रात मे गर्मी बहुत थी, तुमने खुद ही नींद मे अपने कपड़े खोल लिए होंगे, याद नहीं रहा होगा, उन दोनों ने इस बात को ज्यादा सिरियस नहीं लिया, नाश्ते के बाद खुशी वापिस स्विमिंग पूल जाने की जिद कर रही थी, तब उसकी मा उसे लेकर पूल साइड चली गई, तब मैंने अपनी वाइफ से कहा की भाभी की भी अन्डर आर्म्स बहुत बढ़ रही हे, अच्छी नहीं दिखती, तब मैरी बीबी बोली की हा कल पूल मे उसे खुद अच्छा नहीं लग रहा था, एसलिए मैंने उसे सब बदन के बाल साफ करने को कहा हे, और यहा चैन्जिंग रूम मे सब शैविंग का सामान भी हे, मैंने उसे सब समझा दिया हे, इसीलिए वो अभी खुशी के साथ अकेली गई हे, थोड़ी देर बाद अपन दोनों भी चल चलेंगे पूल साइड तब तक वो अपनी बॉडी शैव करवा लेगी खुशी से ।
कोई एक घंटे बाद मै और मैरी बीबी पूल साइड गए, वहा आज का नजारा बड़ा ही रंगीन था, खुशी और उसकी मा दोनों पूल मे मस्ती कर रहे थे, लेकिन बड़ी बात यह थी की आज भाभी ने कुछ ज्यादा ही छोटी बिकनी पहन रखी थी, जिसमे उनका मांसल बदन छुप कम दिख ज्यादा रहा था, उन्हे ऐसे देख मैरे फ़्रेनची स्टाइल अन्डर्वेर मे मेरा लंड सलामी देने लगा, मेरी बीबी ने उसे उत्तेजित देख मुझे पानी मे धक्का दे दिया, ताकि मेरा उभार भाभी ना देख पाए, आज भाभी कल की तरह पूल के दूसरे कोने मे ना रह कर हमारे करीब ही मस्ती कर रही थी, उसकी भारी विशालकाय गाँड उसकी छोटी सी पेन्टी बड़ी मुश्किल से संभाले हुए थी, आगे बिना बालों वाली चुत का उभार मस्त दिख रहा था, अन्डर आर्म्स शैव हो जाने के कारण आज वो अपनी बाहे कुछ ज्यादा ही ऊपर उठाये अपने स्तनों की साइड की गोलाइयों का प्रदर्शन कर रही थी, उसके पेरो मे बाल अभी भी थे, क्योंकि खुशी ने उसकी मा के केवल बिकनी एरिया के ही बाल साफ किए थे ।
खुशी वापिस मुझसे छुड़वाने की कोशिश मे थी, जबकि मै खुद उसकी मा की लेने के चक्कर मे था, बहुर देर तक पूल मे मस्ती करने के बाद हम वापिस अपने रूम मे आ गए, दोपहर मे खाना खाने के बाद हम सब आराम करने लगे, मुझे दोपहर मे सोने की आदत नहीं हे, इसलिए मे मोबाईल चला रहा था, मेरी बीबी खर्राटे मार सो रही थी, खुशी ने मुझे मैसेज किया, अंकल क्या प्रोग्राम, मैंने लिखा अभी कुछ नहीं हो सकता, तेरी मा जाग रही हे, वास्तव मे भाभी भी मोबाईल चला रही थी, खुशी कुछ देर तक मोबाईल चला बोर हो गई और फिर वो भी सो गई, कुछ देर बाद भाभी ने अपनी पीठ मोड कर सब पर नजर मारी, और तभी मेरे मोबाईल पर उनका पहली बार एक मैसेज आया, उन्होंने लिखा, कल के लिए सॉरी, मै बिना उनकी और देखे कुछ देर चुप रहा, की शायद गलती से मुझे मैसेज भेज दिया हो, लेकिन फिर उसने लिखा की खुशी और मुझे इतना सब इन्जॉय करवाने के किए थैंक्स यू, मैंने इसमायली का मैसेज भेजा ।
कल के लिए सॉरी का मतलब यह था की कल रात जब मे उसकी ब्लाउस और पेटीकोट खोल रहा था, तब वह जागी हुई थी, मतलब कही उसे खुशी और मेरे बिच हुई चुदाई का भी तो पता नहीं चल गया, लेकिन यदि पता चल जाता तो उसी समय बवाल मच जाता ।
फिर मैंने लिखा की कल के लिए क्यों सॉरी, क्या हुवा ?
उसने लिखा की आपको शरीर पर ज्यादा बालों वाली लेडिज पसंद नहीं, और कल रात मे मैरे पूरे बदन पर सब जगह बाल ही बाल थे, मैंने लिखा की वह तो भगवान का दिया हे, शायद मेरी पसंद मे ही प्रॉब्लेम हे, जो मुझे कम बाल पसंद हे, फिर उसने लिखा की अब तो सब सफाचट हे, मैंने तुरंत लिखा क्या सबूत हे ? और एक ? की इमोजी भेज दी , उसने तुरंत ही अपनी बिना बालों वाली अन्डर आर्म्स का फोटो मुझे भेज दिया, जो शायद सुबह खुशी ने उसके बाल साफ करने के पहले खिचा होगा, मैंने फिर आगे लिखा, और बाकी का क्या ? उसने लिखा मौका मिलते ही सबूत भी दे दूँगी, मैंने लिखा मौका ढूँढना पड़ता हे, तो उसने लिखा की आप मौका ढूंढो, मै दिखा दूँगी, मैंने फिर शरारत से लिखा केवल दिखाओगी बस । उसने इसमायाली की इमोजी भेज दि । हम दोनों की एस बातचीत को वह भी तुरंत डिलीट करती जा रही थी, और मै भी, जैसे की खुशी करती हे ।
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अब कुछ देर बाद मैंने लिखा की अभी शाम को यहा से निकलना भी हे, उसने लिखा नींद भी नहीं आ रही, मै समान पैक कर लेती हूँ, मैंने लिखा की ठीक हे, तब तक मै भी यहा के केमरे ठीक कर देता हूँ, एसके बाद मै अपनी टूल कीट ले कर रूम से बाहर निकल गया, यहा केमरे मे केवल एक केबल कनेक्ट करनी थी जो की बस दो मिनट का काम था, मैंने उसे जोड़ा, और अब बस उसे इंटरनेट से जोड़ना भर बाकी था की तभी भाभी रूम से बाहर निकल आई, मुझे पास के कांच वाले रूम मे देख बिना बोले सीधी वही चली आई, और उस कमरे का गेट आधा बंद कर लिया, एस कमरे से हमारे रूम का लुक पूरा दिखता था, यदि खुशी या मेरी बीबी जागती तो हमे तुरंत दिखाई दे जाती, आते ही वह मैरे पास आ गई, और समर्पण की मुद्रा मे नीची निगाह कर खड़ी रही, मैंने उसकी बाहों को अपने हाथों से पकड़ थोड़ा पास किया और उसके चेहरे को ऊंचा उठा कर अपनी और किया, अब उसने भी अपनी निगाहे मेरे से मिलाई, और मैंने बिना देर किए उसके गाल पर एक किस कर दिया, उसके बाद तो जैसे उसे वह भरी बेठी थी, उसने खुद सारी शर्म हया छोड़, मेरा साथ देना शुरू कर दिया, मैंने बिना देर किए उसका ब्लाउस खोल दिया, तब मैंने कहा की कल रात को ही आ जाती तो बोली की नहीं कल मुझे डर था की आप मेरे बदन के बाल देख मुझे छोड़ दोगे, एसलिए मैंने आज सुबह ही सब जगह की सफाई करवा ली, फिर मैने उसे वही टेबल पर बीठा उसके मोटे ताजे उरोजों को ब्रा से बाहर निकाल चूसना शुरू कर दिया, अभी तो मुझे बेटी से ज्यादा मा के दूध स्वादिस्त लग रहे थे, यहा से मुझे हमारे कमरे का पूरा लुक दिखाई दे रहा था, भाभी के उरोजों को चूस चूस कर लाल करने के बाद मैंने उनका पेटीकोट ऊंचा कर दिया, और पेन्टी झाघो से निकाल चिकनी बुर पर हाथ फेरा, हाथ लगाते ही उनकी बुर बह निकली, मुझे बस इसी चीज का इंतजार था, मैंने वही नीचे घुटनों के बल बेठ उनकी गिली बुर को चाटना शुरू कर दिया, भाभी ने भी अपने पैर मोड टेबल पर रख लिए, और अपनि कसी हुई गीली चुत को आगे की और उठा दिया, दस मिनट की जीभ चटाई मे भाभी दो बार चिख चिख खालि हो गई, कमरे से अववाज़ हमारे कमरे तक जाने का प्रश्न ही नहीं था, उसकी चिख सुन मै और ज्यादा उत्तेजित हो गया, तभी उसने टेबल से नीचे कूद मैरे पेरो मे बेठ मैर पैन्ट खोल दिया और मेरा कड़कनाथ अपने मुंह मे पूरा ले लिया, उसके गले तक मेरा लँड जा रहा था, फिर जब उसके मुंह की लार से मेरा लंड पूरा चिकना हो गया तो मैंने उसे टेबल पर उल्टा कर झुका दिया, और पीछे से उसकी बुर मे एक शॉट मे ही लंड पेल दिया, एस्का कारण यह था की किसी के भी बाहर आने के पहले मे उसे जी भर कर चोदना चाहता था, मैरा लाँड़ उसकी बुर मे बहुत टाइट गया, उसकी बहुर तेज चिख निकल गई, लेकिन मै बिल्कुल भी दया दिखाने के मूड मे नहीं था, हो सकता हे की कई दिनों से चुदाई ना होने के कारण भाभी की चुत टाइट हो गई हो, शुरू मे तो मुझे धक्के लगाने मे जोर लगाना पड़ा, मुझे लगा की साली की इतनी टाइट बुर को छोड़ने के चक्कर मे मेरा लंड ना छील जाए या फिर मै जल्दी खालि ना हो जाऊ, लेकिन फिर आठ दस धक्कों के बाद भाभी की बुर ने अपना कामरस बहाना शुरू कर दिया, फिर तो मखखन की तरह मेरे लँड का पिस्टन भाभी की बुर के होल मे चलने लगा, कोई पंद्रह मीनट तक एक समान धक्कों के कारण भाभी तीन बार बह निकली, हर बार उसकी चिख बढ़ती जा रही थी, आखिर मे भी ज्यादा रिस्क नहीं ले सकता था, तो मैंने अपना ध्यान खालि होने मे लगाया, और फिर पाँच मिनट के बाद मै भी ढेर होने आया, भाभी बोली की अंदर ही माल छोड़ना, कोई रिस्क नहीं, मैंने जब अपने अंतिम कुछ धक्के लगाए तब एक बार भाभी फिर चीखती हुई खालि होने लागि और उसने अपने नाखून मैरी भुजाओ और पीठ पर गाड दिए, मेरी पीठ से नन्ही नन्ही खून की बुँदे बह निकली, हम दोनों एक दुसए मे समाए वही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे, फिर मैंने अपना लंड भाभी की बुर से निकाला, भाभी की बुर के साथ ही उसकी झनघे भी काम रस मे भरी हुई थी, खड़े खड़े पूरी चुदाई का यह मैरे भी पहला ही अनुभव था, लेकिन कुछ भी बोलो मज़ा बहुत आया, फिर भाभी और मैंने अपने कपड़े पहने, और भाभी को रूम मे भेज दिया, एसके बाद मैंने केमरे की लाइन को इंटरनेट से जोड़ कर अपने कस्टमर को चेक करवा दिया, उन्होंने बहुत बहुत धन्यवाद देकर बोला की आपका जो भी बिल हो दुकान भिजवा देना मैं तुरंत ही पेमेंट ट्रांसफेर कर दूंगा, एसके बाद मै भी रूम मे आ गया, और फिर सभी को उठा कर यहा से निकलने की तयारी करने लगे । लेकिन खुशी यहा से एतनी जल्दी जाना नहीं चाहती थी, मैंने उसे एक बार फिर से यहा वापिस लाने का वादा किया, तब वह फिर से नहाने का बोल पीछे भाग गई, कुछ देर बाद जब दोनों महिलाये, गाड़ी मे बेठ गई तो मै खुशी को बुलाने अकेला पीछे गया, खुशी लेडिज चैन्जिंग रूम मे नंगी अपने कपड़े पहनने जा ही रही थी की मुझे वहा देख फिर से अपनी पेन्टी खोल दी, मै तो अभी अभी कुछ देर पहले ही उसकी मा की बुर चोद आया था, तो मैं उसकी चुदाई के मूड मे नहीं था, लेकिन उसकी वासना देख उसकी बुर नंगी बुर को चाट चाट दो तीन बार खालि कर दिया, फिर उसके बोबो को जी भर चूस कर हम बाहर निकल आए।
लोटते समय एक होटल पर मेरी बीबी और खुशी बाथरूम जाने के लिए गाड़ी से उतरी, उस समय गाड़ी मे मै और राधिका भाभी ही थे, मैंने पुछा कैसा रहा, आज का दिन, तो बोली मैरी बरसों की तमन्ना पूरी हो गई, तो मै बोल पड़ा की वो कैसे, तो बोली की करोना के समय आपने हमारी कितनी सहायता की, और आज भी हमेशा की तरह हमारी सब जगह मदद करते हे, और मै तो शुरू से ही आपको पसंद करती हूँ, लेकिन कभी बोल नहीं पाई, आज मौका मिला तो मै आपके सामने आ गई ।
एसके बाद हम घर लॉट आए, इधर अब जब भी मौका मिलता हे, दोनों मा बेटी अपनी गर्मी निकलवाने मैरे पास आती रहती हे, और मै भी कोई मौका नहीं छोड़ता ।
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