10-05-2026, 05:28 PM
शहर के एक सरकारी कॉलेज में राहुल और माही दोनों पढ़ते थे।
राहुल 21 साल का था और कई साल फेल होने की वजह से अभी भी उसी कॉलेज में था। पूरे कॉलेज में उसकी पहचान एक गुस्सैल और गुँडा किस्म के लड़के के रूप में थी।
वह अक्सर कॉलेज के गेट पर अपने दोस्तों के साथ खड़ा रहता, सबसे ऊँची आवाज़ में बात करता और बाकी लड़के उससे थोड़ा डरते थे।
लेकिन एक बात थी — राहुल का दिल उतना बुरा नहीं था, जितना लोग समझते थे।
माही उसी कॉलेज की सबसे शांत और होशियार लड़की थी। वह हमेशा समय पर आती, कॉलेज ड्रेस साफ-सुथरी पहनती और पढ़ाई में सबसे आगे रहती।
एक दिन कॉलेज की छुट्टी के समय तेज बारिश शुरू हो गई।
सब बच्चे बरामदे में खड़े होकर बारिश रुकने का इंतज़ार कर रहे थे।
माही के पास छाता नहीं था।
राहुल अपने दोस्तों के साथ वहीं खड़ा था। तभी उसकी नज़र माही पर पड़ी। सफेद-नीली सरकारी कॉलेज ड्रेस में, बारिश की बूंदों को देखते हुए, वह थोड़ी परेशान लग रही थी।
पहली बार राहुल का ध्यान किसी पर इस तरह गया।
उसने अपने दोस्तों से कहा,
“तुम लोग जाओ… मैं आता हूँ।”
फिर वह माही के पास गया और बोला,
“घर जाना है? मेरा छाता ले लो।”
माही ने हैरानी से उसकी ओर देखा। पूरे कॉलेज में जिसे सब गुँडा कहते थे, वही आज उसकी मदद कर रहा था।
“और तुम?” माही ने पूछा।
राहुल हल्का सा मुस्कुराया,
“मैं भीग जाऊँगा… कोई बात नहीं।”
माही ने धीरे से कहा,
“तो फिर साथ चलते हैं।”
दोनों एक ही छाते के नीचे कॉलेज से बाहर निकले।
बारिश की बूंदें सड़क पर गिर रही थीं, और राहुल पहली बार बिना किसी लड़ाई-झगड़े के चुपचाप किसी के साथ चल रहा था।
उस दिन के बाद राहुल बदलने लगा।
अब वह कॉलेज में बेवजह लड़ाई नहीं करता था। माही की वजह से उसके अंदर का अच्छा इंसान धीरे-धीरे बाहर आने लगा।
लोग कहते थे,
“जिस राहुल से पूरा कॉलेज डरता था, उसे माही की मुस्कान ने बदल दिया।” ❤️?️
असल में राहुल जितना बदलता हुआ दिख रहा था, उसके पीछे एक सच्चाई छुपी हुई थी।
उस दिन कॉलेज के पीछे वाले मैदान में राहुल अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू पूरे माहौल में फैली हुई थी।
उसका दोस्त विक्की हँसते हुए बोला,
“राहुल, तू तो बड़ा गुँडा बनता है… अगर दम है तो उस होशियार माही को पटाकर दिखा।”
बाकी लड़के भी हँसने लगे।
राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“बस इतनी सी बात? एक हफ्ते में माही खुद मेरे साथ घूमेगी।”
फिर दोस्तों में शर्त लग गई।
शर्त यह थी कि अगर राहुल माही को इंप्रेस कर लेता है, तो सारे दोस्त उसे पार्टी देंगे। और अगर नहीं कर पाया, तो पूरे महीने सबकी ट्रीट उसी को देनी होगी।
उसी शर्त को जीतने के लिए राहुल ने माही के पास जाना शुरू किया।
कभी वह उसकी किताबें उठाने में मदद करता,
कभी बारिश में छाता शेयर करता,
कभी क्लास के बाहर उसका इंतज़ार करता।
माही को लगा कि राहुल सच में बदल रहा है।
धीरे-धीरे दोनों की बातें बढ़ने लगीं।
राहुल भी पहले इसे सिर्फ शर्त समझकर कर रहा था, लेकिन माही की सादगी, उसकी मुस्कान और उसकी साफ दिल वाली बातें राहुल के दिल को सच में छूने लगीं।
एक दिन राहुल के दोस्तों ने उसे घेर लिया।
“क्या बात है भाई, शर्त जीतने वाला है क्या?”
विक्की ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा।
राहुल चुप हो गया।
पहली बार उसे लगा कि यह सब खेल अब सिर्फ शर्त नहीं रहा।
उसे सच में माही पसंद आने लगी थी।
लेकिन उसी समय माही ने दूर से यह बात सुन ली।
उसकी आँखें भर आईं।
उसे समझ आ गया कि राहुल जो कुछ भी कर रहा था, वह सिर्फ उसे इंप्रेस करने और दोस्तों से शर्त जीतने के लिए था।
माही बिना कुछ बोले वहाँ से चली गई।
राहुल उसे जाते हुए बस देखता रह गया।
अब शर्त जीतना आसान था…
लेकिन शायद उसने माही का भरोसा हार दिया था। ??️
दिन धीरे-धीरे बीतने लगे।
अब राहुल हर दिन कॉलेज समय से पहले आने लगा था।
उसके दोस्त भी हैरान थे कि जो लड़का पहले क्लास बंक करता था, वही अब रोज़ कॉलेज में सबसे पहले पहुँचता है।
लेकिन सच्चाई कुछ और थी।
राहुल अभी भी अपने दोस्तों से लगी हुई शर्त को जीतना चाहता था।
उसका दोस्त विक्की रोज़ मुस्कुराकर पूछता,
“क्या हुआ भाई, माही पट गई क्या?”
राहुल हल्की हँसी के साथ कहता,
“बस थोड़ा और इंतज़ार… जीत तो मेरी ही होगी।”
दूसरी तरफ, माही को इन सब बातों की कोई खबर नहीं थी।
उसे सच में लगने लगा था कि राहुल उसके लिए बदल गया है।
बारिश वाले दिन के बाद दोनों अक्सर साथ घर जाते थे।
कभी एक ही छाते के नीचे,
कभी कॉलेज की कैंटीन में चाय पीते हुए,
कभी लाइब्रेरी में एक ही टेबल पर बैठकर।
धीरे-धीरे माही भी राहुल को पसंद करने लगी।
एक दिन क्लास खत्म होने के बाद तेज बारिश शुरू हो गई।
माही बरामदे में खड़ी थी।
राहुल उसके पास आया और बोला,
“चलो, आज भी मैं छोड़ देता हूँ।”
दोनों एक ही छाते के नीचे चलने लगे।
माही ने मुस्कुराकर कहा,
“तुम पहले जैसे बिल्कुल नहीं रहे राहुल।”
राहुल ने उसकी तरफ देखा।
उस पल पहली बार उसके दिल में हल्की सी कसक हुई।
शुरू में जो सब कुछ सिर्फ शर्त था, अब उसमें कुछ सच्ची भावनाएँ भी जुड़ने लगी थीं।
लेकिन दोस्तों के सामने वह अभी भी यही दिखा रहा था कि वह बस शर्त जीतना चाहता है।
माही को कुछ भी पता नहीं था।
उसके दिल में राहुल के लिए प्यार धीरे-धीरे बढ़ रहा था…
और राहुल दो रास्तों के बीच फँस चुका था —
शर्त जीतना या सच में माही को खो देना। ❤️?️
अगले दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद फिर से हल्की बारिश शुरू हो गई।
कॉलेज के गेट के पास खड़ी माही को देखकर राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
आज उसने ठान लिया था कि वह अपने दिल की बात कहेगा।
राहुल धीरे-धीरे माही के पास गया और बोला,
“माही… मुझे तुमसे कुछ कहना है।”
माही ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
राहुल ने गहरी सांस ली और कहा,
“मुझे तुम अच्छी लगती हो… बहुत। शायद मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।”
माही कुछ पल चुप रही। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
उसने धीरे से कहा,
“राहुल… मुझे भी तुम्हारे साथ अच्छा लगता है।”
राहुल के चेहरे पर जीत वाली मुस्कान आ गई।
उसके मन में एक तरफ दोस्तों की शर्त थी, और दूसरी तरफ माही का भरोसा।
शाम को राहुल ने कहा,
“अगर तुम चाहो तो घर चलो, माँ भी घर पर होंगी। थोड़ी देर बैठकर बात करेंगे।”
माही ने कुछ सोचकर हाँ कर दी।
दोनों राहुल के घर पहुँचे।
घर के ड्रॉइंग रूम में चाय रखी गई, और दोनों बैठकर बातें करने लगे।
यहीं से असली खेल शुरू हुआ —
यह कोई गलत बात नहीं थी, बल्कि राहुल के मन का खेल था।
एक तरफ वह शर्त जीतने की खुशी महसूस कर रहा था,
दूसरी तरफ माही की मासूमियत और भरोसा उसे अंदर ही अंदर परेशान करने लगा।
माही ने मुस्कुराकर कहा,
“मुझे लगता है तुम सच में बदल गए हो।”
यह सुनकर राहुल कुछ पल के लिए चुप हो गया।
उसके मन में सवाल चल रहा था —
क्या वह सिर्फ शर्त जीत रहा है, या सच में माही से प्यार करने लगा है?
कमरे में बाहर की बारिश की आवाज़ गूंज रही थी,
और राहुल के अंदर असली संघर्ष शुरू हो चुका था। ??️❤️
राहुल के घर में बाहर बारिश की बूंदों की आवाज़ लगातार सुनाई दे रही थी।
कमरे में हल्की सी खामोशी थी।
माही सोफ़े पर बैठी थी और राहुल उसके सामने।
कुछ देर तक दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
माही ने धीरे से पूछा,
“इतने चुप क्यों हो?”
राहुल मुस्कुराया और उसके थोड़ा करीब आ गया।
उसकी आँखों में एक अजीब सा mix था —
शर्त जीतने की खुशी और दिल में उठती नई भावनाएँ।
राहुल ने धीरे से माही का हाथ पकड़ा।
माही थोड़ा शर्माई, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया।
बाहर बिजली चमकी और बारिश तेज़ हो गई।
उसी पल राहुल ने धीरे से माही के माथे पर एक हल्का सा प्यार भरा kiss किया।
माही की साँसें तेज़ हो गईं।
वह कुछ पल के लिए चुप रही, फिर हल्का सा मुस्कुराकर नीचे देखने लगी।
उसके लिए यह पल बहुत खास था, क्योंकि अब उसे लगने लगा था कि राहुल सच में उससे प्यार करता है।
लेकिन राहुल के मन में अभी भी दोस्तों की शर्त घूम रही थी।
उसे लग रहा था कि वह जीत के बहुत करीब है।
फिर भी, जैसे-जैसे वह माही के करीब आ रहा था, उसके दिल में guilt भी बढ़ रहा था।
क्या यह सब सिर्फ शर्त है…
या सच में प्यार?
यही सवाल अब राहुल को अंदर से परेशान करने लगा था। ?️❤️
फिर धीरे धीरे राहुल माही के करीब आता गया और एक दिन राहुल ने माही को कॉलेज मे पेरपोसे कर दिया माही को व रहुल पसंद आने लगा था और उसने राहुल को हा कर दिया फिर कुछ दिनो के राहुल ने माही को अपने घर पे मिलने के लिए बुलाया माही ने पहले मन कर दिया फिर राहुल के जीद के कारण उसके हा कर दिया और अगले ही दिन उन्होंने मिलने का प्लान किया
माही ने कॉलेज का बहाना बना कर घर से निकाल गई राहुल ने माही को लेने कॉलेज के गली तक आया माही ने फिर माही को लेकर अपने घर ले गया
माही ने ट्रांसपेरेंट ब्लैक कुर्ती पहनी थी माही ने ब्लैक बर पहना था वो जैसे ही राहुल का नजर उसके ब्लैक बर पर गया वो बहुत खुश हुआ और उसका lund खड़ा हो गया |
और उसको लेकर अपने घर आ गया माही को अंदर ही अंदर बहुत डर रही थी लेकिन वो कुछ बोल नही पा रही थी कि वो राहुल को क्या बोले फिर राहुल माही को अपने बरांडे मी बेठया फिर माही को चाय पीने के लिए दिया और कुछ देर साथ बेठ कर उसके साथ कुछ बात की
लेकिन राहुल का मकसद माही से बात करना नही माही को चोदना था फिर राहुल अपने प्लान के अनुसार माही को अपने रूम मे ले गया और गेट बंद करके उसके करीब आने लगा अचानक से लाइट वी चली गई माही काफी डर गई थी बारिश भी तेज होने लगी थी
राहुल के लिए ये पल बहुत खास था क्युकी वो अपने दोस्तो से लगाया हुआ सर्त जीतने वाला था धीरे राहुल माही के करीब आया और उसके माथे को चूमा और फिर उसके होंठ को अपने मुह से चूसा
माही को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या बोले वो सांत थी राहुल अपने जोश में था फिर राहुल ने धीरे धीरे माही के सारे के कापरे खोलने लग और उसके बदन को चूमने लगा
फिर उसे किस करते हुए उसके मम्मों को दबाने लगा |
अब राहुल पूरी तरह से गरम हो चुका था धीरे माही भी राहुल के प्यार मे डूबते जा रही थी माही भी जोश में आ गई फिर माही के मम्मो को अपने मुह मे लेकर चूसने लगा
अब राहुल को सिर्फ एक ही चीज दिख रहा था और वो था माही का chut राहुल ने माही की मम्मो को चूसते हुए उसके छूट में अपना हाथ फेरने
लगा अब राहुल का लैंड काफी मोटा और लम्बा हो चुका था और माही के छूट मे जाने को बेकाबू होने लगा उसके माही के chut को अपने ओठ से चूसा
और माही के लिए ये बहुत अजीब पल था लेकिन फिर वी वो राहुल का साथ दे रही थी क्युकी वो राहुल से काफी ज्यादा प्यार करने लगी थी अब राहुल माही के टांगो को फैलाया और उसके छूट में अपना मोटा काला,लंड डालने ही वाला था
कि माही का फोन बजने लगा माही डर गई और फोन रिसाइव कि माही की मम्मी का काल था माही को राहुल के घर पे आये काफी हो गया था इसलिए उसके घर से उसकी मा ने कॉल किया और पूछा कहा हो माही ने कहा आ रही हू इतना बोल कर कॉल काट दिया और अपने कापरे पहन कर वहा से निकल गई अब राहुल पूरे गुस्से मे था और उसका लंड वी खरा था उसने बाथरूम मे जाकर अपने लंड को अपने हाथ से हिलाया और अपना स्पर्म निकला जब जाकर उसे कुछ संती मिली
राहुल 21 साल का था और कई साल फेल होने की वजह से अभी भी उसी कॉलेज में था। पूरे कॉलेज में उसकी पहचान एक गुस्सैल और गुँडा किस्म के लड़के के रूप में थी।
वह अक्सर कॉलेज के गेट पर अपने दोस्तों के साथ खड़ा रहता, सबसे ऊँची आवाज़ में बात करता और बाकी लड़के उससे थोड़ा डरते थे।
लेकिन एक बात थी — राहुल का दिल उतना बुरा नहीं था, जितना लोग समझते थे।
माही उसी कॉलेज की सबसे शांत और होशियार लड़की थी। वह हमेशा समय पर आती, कॉलेज ड्रेस साफ-सुथरी पहनती और पढ़ाई में सबसे आगे रहती।
एक दिन कॉलेज की छुट्टी के समय तेज बारिश शुरू हो गई।
सब बच्चे बरामदे में खड़े होकर बारिश रुकने का इंतज़ार कर रहे थे।
माही के पास छाता नहीं था।
राहुल अपने दोस्तों के साथ वहीं खड़ा था। तभी उसकी नज़र माही पर पड़ी। सफेद-नीली सरकारी कॉलेज ड्रेस में, बारिश की बूंदों को देखते हुए, वह थोड़ी परेशान लग रही थी।
पहली बार राहुल का ध्यान किसी पर इस तरह गया।
उसने अपने दोस्तों से कहा,
“तुम लोग जाओ… मैं आता हूँ।”
फिर वह माही के पास गया और बोला,
“घर जाना है? मेरा छाता ले लो।”
माही ने हैरानी से उसकी ओर देखा। पूरे कॉलेज में जिसे सब गुँडा कहते थे, वही आज उसकी मदद कर रहा था।
“और तुम?” माही ने पूछा।
राहुल हल्का सा मुस्कुराया,
“मैं भीग जाऊँगा… कोई बात नहीं।”
माही ने धीरे से कहा,
“तो फिर साथ चलते हैं।”
दोनों एक ही छाते के नीचे कॉलेज से बाहर निकले।
बारिश की बूंदें सड़क पर गिर रही थीं, और राहुल पहली बार बिना किसी लड़ाई-झगड़े के चुपचाप किसी के साथ चल रहा था।
उस दिन के बाद राहुल बदलने लगा।
अब वह कॉलेज में बेवजह लड़ाई नहीं करता था। माही की वजह से उसके अंदर का अच्छा इंसान धीरे-धीरे बाहर आने लगा।
लोग कहते थे,
“जिस राहुल से पूरा कॉलेज डरता था, उसे माही की मुस्कान ने बदल दिया।” ❤️?️
असल में राहुल जितना बदलता हुआ दिख रहा था, उसके पीछे एक सच्चाई छुपी हुई थी।
उस दिन कॉलेज के पीछे वाले मैदान में राहुल अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू पूरे माहौल में फैली हुई थी।
उसका दोस्त विक्की हँसते हुए बोला,
“राहुल, तू तो बड़ा गुँडा बनता है… अगर दम है तो उस होशियार माही को पटाकर दिखा।”
बाकी लड़के भी हँसने लगे।
राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“बस इतनी सी बात? एक हफ्ते में माही खुद मेरे साथ घूमेगी।”
फिर दोस्तों में शर्त लग गई।
शर्त यह थी कि अगर राहुल माही को इंप्रेस कर लेता है, तो सारे दोस्त उसे पार्टी देंगे। और अगर नहीं कर पाया, तो पूरे महीने सबकी ट्रीट उसी को देनी होगी।
उसी शर्त को जीतने के लिए राहुल ने माही के पास जाना शुरू किया।
कभी वह उसकी किताबें उठाने में मदद करता,
कभी बारिश में छाता शेयर करता,
कभी क्लास के बाहर उसका इंतज़ार करता।
माही को लगा कि राहुल सच में बदल रहा है।
धीरे-धीरे दोनों की बातें बढ़ने लगीं।
राहुल भी पहले इसे सिर्फ शर्त समझकर कर रहा था, लेकिन माही की सादगी, उसकी मुस्कान और उसकी साफ दिल वाली बातें राहुल के दिल को सच में छूने लगीं।
एक दिन राहुल के दोस्तों ने उसे घेर लिया।
“क्या बात है भाई, शर्त जीतने वाला है क्या?”
विक्की ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा।
राहुल चुप हो गया।
पहली बार उसे लगा कि यह सब खेल अब सिर्फ शर्त नहीं रहा।
उसे सच में माही पसंद आने लगी थी।
लेकिन उसी समय माही ने दूर से यह बात सुन ली।
उसकी आँखें भर आईं।
उसे समझ आ गया कि राहुल जो कुछ भी कर रहा था, वह सिर्फ उसे इंप्रेस करने और दोस्तों से शर्त जीतने के लिए था।
माही बिना कुछ बोले वहाँ से चली गई।
राहुल उसे जाते हुए बस देखता रह गया।
अब शर्त जीतना आसान था…
लेकिन शायद उसने माही का भरोसा हार दिया था। ??️
दिन धीरे-धीरे बीतने लगे।
अब राहुल हर दिन कॉलेज समय से पहले आने लगा था।
उसके दोस्त भी हैरान थे कि जो लड़का पहले क्लास बंक करता था, वही अब रोज़ कॉलेज में सबसे पहले पहुँचता है।
लेकिन सच्चाई कुछ और थी।
राहुल अभी भी अपने दोस्तों से लगी हुई शर्त को जीतना चाहता था।
उसका दोस्त विक्की रोज़ मुस्कुराकर पूछता,
“क्या हुआ भाई, माही पट गई क्या?”
राहुल हल्की हँसी के साथ कहता,
“बस थोड़ा और इंतज़ार… जीत तो मेरी ही होगी।”
दूसरी तरफ, माही को इन सब बातों की कोई खबर नहीं थी।
उसे सच में लगने लगा था कि राहुल उसके लिए बदल गया है।
बारिश वाले दिन के बाद दोनों अक्सर साथ घर जाते थे।
कभी एक ही छाते के नीचे,
कभी कॉलेज की कैंटीन में चाय पीते हुए,
कभी लाइब्रेरी में एक ही टेबल पर बैठकर।
धीरे-धीरे माही भी राहुल को पसंद करने लगी।
एक दिन क्लास खत्म होने के बाद तेज बारिश शुरू हो गई।
माही बरामदे में खड़ी थी।
राहुल उसके पास आया और बोला,
“चलो, आज भी मैं छोड़ देता हूँ।”
दोनों एक ही छाते के नीचे चलने लगे।
माही ने मुस्कुराकर कहा,
“तुम पहले जैसे बिल्कुल नहीं रहे राहुल।”
राहुल ने उसकी तरफ देखा।
उस पल पहली बार उसके दिल में हल्की सी कसक हुई।
शुरू में जो सब कुछ सिर्फ शर्त था, अब उसमें कुछ सच्ची भावनाएँ भी जुड़ने लगी थीं।
लेकिन दोस्तों के सामने वह अभी भी यही दिखा रहा था कि वह बस शर्त जीतना चाहता है।
माही को कुछ भी पता नहीं था।
उसके दिल में राहुल के लिए प्यार धीरे-धीरे बढ़ रहा था…
और राहुल दो रास्तों के बीच फँस चुका था —
शर्त जीतना या सच में माही को खो देना। ❤️?️
अगले दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद फिर से हल्की बारिश शुरू हो गई।
कॉलेज के गेट के पास खड़ी माही को देखकर राहुल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
आज उसने ठान लिया था कि वह अपने दिल की बात कहेगा।
राहुल धीरे-धीरे माही के पास गया और बोला,
“माही… मुझे तुमसे कुछ कहना है।”
माही ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
राहुल ने गहरी सांस ली और कहा,
“मुझे तुम अच्छी लगती हो… बहुत। शायद मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।”
माही कुछ पल चुप रही। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
उसने धीरे से कहा,
“राहुल… मुझे भी तुम्हारे साथ अच्छा लगता है।”
राहुल के चेहरे पर जीत वाली मुस्कान आ गई।
उसके मन में एक तरफ दोस्तों की शर्त थी, और दूसरी तरफ माही का भरोसा।
शाम को राहुल ने कहा,
“अगर तुम चाहो तो घर चलो, माँ भी घर पर होंगी। थोड़ी देर बैठकर बात करेंगे।”
माही ने कुछ सोचकर हाँ कर दी।
दोनों राहुल के घर पहुँचे।
घर के ड्रॉइंग रूम में चाय रखी गई, और दोनों बैठकर बातें करने लगे।
यहीं से असली खेल शुरू हुआ —
यह कोई गलत बात नहीं थी, बल्कि राहुल के मन का खेल था।
एक तरफ वह शर्त जीतने की खुशी महसूस कर रहा था,
दूसरी तरफ माही की मासूमियत और भरोसा उसे अंदर ही अंदर परेशान करने लगा।
माही ने मुस्कुराकर कहा,
“मुझे लगता है तुम सच में बदल गए हो।”
यह सुनकर राहुल कुछ पल के लिए चुप हो गया।
उसके मन में सवाल चल रहा था —
क्या वह सिर्फ शर्त जीत रहा है, या सच में माही से प्यार करने लगा है?
कमरे में बाहर की बारिश की आवाज़ गूंज रही थी,
और राहुल के अंदर असली संघर्ष शुरू हो चुका था। ??️❤️
राहुल के घर में बाहर बारिश की बूंदों की आवाज़ लगातार सुनाई दे रही थी।
कमरे में हल्की सी खामोशी थी।
माही सोफ़े पर बैठी थी और राहुल उसके सामने।
कुछ देर तक दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
माही ने धीरे से पूछा,
“इतने चुप क्यों हो?”
राहुल मुस्कुराया और उसके थोड़ा करीब आ गया।
उसकी आँखों में एक अजीब सा mix था —
शर्त जीतने की खुशी और दिल में उठती नई भावनाएँ।
राहुल ने धीरे से माही का हाथ पकड़ा।
माही थोड़ा शर्माई, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया।
बाहर बिजली चमकी और बारिश तेज़ हो गई।
उसी पल राहुल ने धीरे से माही के माथे पर एक हल्का सा प्यार भरा kiss किया।
माही की साँसें तेज़ हो गईं।
वह कुछ पल के लिए चुप रही, फिर हल्का सा मुस्कुराकर नीचे देखने लगी।
उसके लिए यह पल बहुत खास था, क्योंकि अब उसे लगने लगा था कि राहुल सच में उससे प्यार करता है।
लेकिन राहुल के मन में अभी भी दोस्तों की शर्त घूम रही थी।
उसे लग रहा था कि वह जीत के बहुत करीब है।
फिर भी, जैसे-जैसे वह माही के करीब आ रहा था, उसके दिल में guilt भी बढ़ रहा था।
क्या यह सब सिर्फ शर्त है…
या सच में प्यार?
यही सवाल अब राहुल को अंदर से परेशान करने लगा था। ?️❤️
फिर धीरे धीरे राहुल माही के करीब आता गया और एक दिन राहुल ने माही को कॉलेज मे पेरपोसे कर दिया माही को व रहुल पसंद आने लगा था और उसने राहुल को हा कर दिया फिर कुछ दिनो के राहुल ने माही को अपने घर पे मिलने के लिए बुलाया माही ने पहले मन कर दिया फिर राहुल के जीद के कारण उसके हा कर दिया और अगले ही दिन उन्होंने मिलने का प्लान किया
माही ने कॉलेज का बहाना बना कर घर से निकाल गई राहुल ने माही को लेने कॉलेज के गली तक आया माही ने फिर माही को लेकर अपने घर ले गया
माही ने ट्रांसपेरेंट ब्लैक कुर्ती पहनी थी माही ने ब्लैक बर पहना था वो जैसे ही राहुल का नजर उसके ब्लैक बर पर गया वो बहुत खुश हुआ और उसका lund खड़ा हो गया |
और उसको लेकर अपने घर आ गया माही को अंदर ही अंदर बहुत डर रही थी लेकिन वो कुछ बोल नही पा रही थी कि वो राहुल को क्या बोले फिर राहुल माही को अपने बरांडे मी बेठया फिर माही को चाय पीने के लिए दिया और कुछ देर साथ बेठ कर उसके साथ कुछ बात की
लेकिन राहुल का मकसद माही से बात करना नही माही को चोदना था फिर राहुल अपने प्लान के अनुसार माही को अपने रूम मे ले गया और गेट बंद करके उसके करीब आने लगा अचानक से लाइट वी चली गई माही काफी डर गई थी बारिश भी तेज होने लगी थी
राहुल के लिए ये पल बहुत खास था क्युकी वो अपने दोस्तो से लगाया हुआ सर्त जीतने वाला था धीरे राहुल माही के करीब आया और उसके माथे को चूमा और फिर उसके होंठ को अपने मुह से चूसा
माही को कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या बोले वो सांत थी राहुल अपने जोश में था फिर राहुल ने धीरे धीरे माही के सारे के कापरे खोलने लग और उसके बदन को चूमने लगा
फिर उसे किस करते हुए उसके मम्मों को दबाने लगा |
अब राहुल पूरी तरह से गरम हो चुका था धीरे माही भी राहुल के प्यार मे डूबते जा रही थी माही भी जोश में आ गई फिर माही के मम्मो को अपने मुह मे लेकर चूसने लगा
अब राहुल को सिर्फ एक ही चीज दिख रहा था और वो था माही का chut राहुल ने माही की मम्मो को चूसते हुए उसके छूट में अपना हाथ फेरने
लगा अब राहुल का लैंड काफी मोटा और लम्बा हो चुका था और माही के छूट मे जाने को बेकाबू होने लगा उसके माही के chut को अपने ओठ से चूसा
और माही के लिए ये बहुत अजीब पल था लेकिन फिर वी वो राहुल का साथ दे रही थी क्युकी वो राहुल से काफी ज्यादा प्यार करने लगी थी अब राहुल माही के टांगो को फैलाया और उसके छूट में अपना मोटा काला,लंड डालने ही वाला था
कि माही का फोन बजने लगा माही डर गई और फोन रिसाइव कि माही की मम्मी का काल था माही को राहुल के घर पे आये काफी हो गया था इसलिए उसके घर से उसकी मा ने कॉल किया और पूछा कहा हो माही ने कहा आ रही हू इतना बोल कर कॉल काट दिया और अपने कापरे पहन कर वहा से निकल गई अब राहुल पूरे गुस्से मे था और उसका लंड वी खरा था उसने बाथरूम मे जाकर अपने लंड को अपने हाथ से हिलाया और अपना स्पर्म निकला जब जाकर उसे कुछ संती मिली


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