रात को मैंने एक नया सिम लिया, और अपने मोबाइल में वॉयस चेंज करके दीदी को उनकी दोस्त अंजलि बन कर मैसेज किया।
अंजलि और दीदी कॉलेज में अच्छी दोस्त थीं। फिर अंजलि देश से बाहर चली गई, तो दोनो में बातचीत खत्म हो गयी थी।
दीदी ने फोन पिक किया और बोली-
दीदी: हेलो, कौन ?
अंजलि (मैं): मैं तेरी दोस्त अंजलि, भूल गयी क्या मुझे?
दीदी: अंजलि? सच में? तेरी आवाज को क्या हुआ?
अंजलि (मैं): बस समय के साथ आवाज भी बदलती है।
फिर दीदी मुझे अंजलि समझ कर काफी बातें करती रही। 5 मिनट के बाद मैं अपनी बात पर आया।
अंजलि (मैं): फिर अदिति, तलाक के बाद कोई और इंसान तेरी जिंदगी में नहीं आया?
दीदी: इंसान तो काफ़ी आए है. लेकिन कोई अच्छा इंसान नहीं आया।
अंजलि (मैं): फिर भी कोई तो होगा कोई जिससे मुलाकात होती होगी ।
दीदी: हा, एक वकील हैं - नादिर नाम है उनका, मैं उनके पास काम के सिलसिले में जाती रहती हूँ ।
अंजलि (मैं): फिर तो प्रॉब्लम ही सॉल्व हो गई। नादिर जी से ही चुदवा ले, बड़ा मजा आएगा।
दीदी: क्या बात करती है तू भी।
अंजलि (मैं):क्यों, क्या हुआ?
दीदी:अरे,वो तो 75 साल के बुड्ढे है। मुझसे करीब 43 साल बड़े हैं। .
अंजलि (मैं): तू जानती नहीं आज कल के बूढ़ों को, वो जवानों से भी ज्यादा मजे देते है।
दीदी: वो शरीफ है, और मैं भी शरीफ हूं.
अंजलि (मैं): तू सोच तेरी जैसी खूबसूरत औरत उस बूढ़े के बिस्तर पर हो, तो कैसा सीन होगा। और बुड्ढे के तो मजे हो जायेंगे।
दीदी: हाहाहाहाहा, वो बुड्ढा शरीफ है. तू क्यों उसको ख़राब करवाना चाहती है ?
अंजलि (मैं): कोई शरीफ नहीं होता। यह तुझे तब पता चलेगा जब वो जब वो तुझे चोदेगा और तेरी चूत का बाज़ा बजायेगा।
दीदी: चल, कुछ भी बोलती है।
अंजलि (मैं):अरे ट्राई तो कर, क्या ही हो जायेगा। और क्या पता तेरी चूत पे उस बुड्ढे के लंड की मुहर लग जाए?
दीदी: चल कुछ सोचती हो बुड्ढे का.
फिर फोन कट हो गया तो मैंने उसी नंबर से नादिर साहब को कॉल मिलाई।
नादिर साब: जी कोन?
लड़की (मैं): क्या ये अंजलि का नंबर है ?
नादिर साब: नहीं, इधर कोई अंजलि नहीं।
लड़की (मैं): मैं तो अपने दोस्त से बात करना चाह रही थी।
नादिर साहब: अब आपके दोस्त का तो पता नहीं, मैं क्या कर सकता हूँ?
लड़की (मैं): चलो आप ही करलो बात मेरे दोस्त बन कर।
नादिर साहब: अच्छा, इतनी जल्दी दोस्त बना लिया आपने।
फिर नादिर साहब और लड़की (यानी मैं) में काफी देर तक बातें होती रहीं। नादिर साहब मुझे लड़की समझ कर काफी देर तक मुझसे बातें करते रहे। थोड़ी देर के बाद मैंने नादिर साहब से पूछा-
लड़की (मैं): तो आपकी पत्नी के बाद कोई लड़की आपको पसंद नहीं आयी?
नादिर साहब: एक लड़की है जो मुझको काफी अच्छी लगती है और वो बहुत खूबसूरत है। पर मेरी और उसकी उम्र में काफी अंतर है।
लड़की (मैं): ऐसी कौन सी लड़की है जो आपको इतनी अच्छी लगती है?
नादिर साब: अभी कुछ दिन पहले ही मुझे ज्वाइन किया है उस लड़की ने।अदिति नाम है। मैंने लिखावट के काम के लिए रखा है। वो काफ़ी ख़ूबसूरत है.
लड़की (मैं): तो उसे ही पकड़ लो किसी दिन।
नादिर साब: मार पड़वाएगी तू उससे. वो काफ़ी ख़ूबसूरत है, और मैं उसके सामने काफ़ी बदसूरत हूँ।कहाँ वो हूर और कहाँ में काला राक्षस।
लड़की (मैं): अच्छा बताओ अगर वो मिल जाए तो क्या करोगे उसके साथ? तुम तो बूढ़े हो गए हो।
नादिर साहब: अगर वो एक दफा मुझको मिल जाए, तो मैं ऐसा उसको चोदूंगा के उसकी चीखें पूरे घर में गूंजेगी।
लड़की (मैं): तुम तो बहुत ज़ालिम हो।
नादिर साहब: ज़ुल्म नहीं, मैं तो प्यार करूंगा उसको।
लड़की (मैं): ऐसी बात है, फिर तुम मेरी बातों पर अमल करो। वो खुद तुम्हारे पास आ जाएगी .
नादिर साहब: अच्छा जी.
लड़की (मैं): हा, कल जब वो आये तो मुझको बताना।
नादिर साहब: ठीक है.