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Romance MADMAST JAWANIYAN - COLLEGE LIFE KI ROMANCHAK SEX KAHANIYAN
#1
Namaskar Dosto, Mera Naam Pawan Hai Aur Main Shuru Karne Ja Raha Hoon Pyar, Janoon, Kaam-Vasna Aur Vilasita Bhari Kahaniyon Ka Ek Naya Silsila. Umeed Karta Hoon Ke Aap Sabko Meri Ye Koshish Pasand Aayegi. Aapke Bahumulya Likes Aur Comments Ka Intezar Rahega. 
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#2
(06-04-2026, 04:46 PM)Pawan13569 Wrote: Namaskar Dosto, Mera Naam Pawan Hai Aur Main Shuru Karne Ja Raha Hoon Pyar, Janoon, Kaam-Vasna Aur Vilasita Bhari Kahaniyon Ka Ek Naya Silsila. Umeed Karta Hoon Ke Aap Sabko Meri Ye Koshish Pasand Aayegi. Aapke Bahumulya Likes Aur Comments Ka Intezar Rahega. 

Hello
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#3
Kya ab hum Pictures Upload Nahi Kar Saktey?
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#4
(07-04-2026, 07:56 AM)Pawan13569 Wrote: Kya ab hum Pictures Upload Nahi Kar Saktey?

Kyon nahin kar sakte?
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#5
Pehli Kahani - Meri Tenent Student Jab Meri Premika Ban Gayi.

Characters;- Mayuri Chinappa Goswami (Tenent Student) Aur Professor Pawan Kumar - (Main).

Baaki Ke Characters Kahani Mein Introduce Hotey Rahengey. 

Kahani Ka Pehla Update Kal Raat Tak Aayega.
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#6
[Image: IMG-20260407-074245.jpg]
Professor Pawan Kumar Yaani Ke Main.
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Pawan 
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#7
पहली कहानी - किराएदार कॉलेज स्टूडेंट और उसके मकानमालिक साइंस प्रोफेसर की प्रेम कहानी 
सितंबर महीने के दूसरे सोमवार की सुहावनी सुबह थी। समय सुबह के सात बज रहे थे। मुंबई के विले पारले (वेस्ट) की गुलमोहर कॉलोनी की गली नंबर तीन में अपने स्मृति कुंज नाम के दो मंज़िला घर के बेडरूम में पैंतीस वर्षीय STM कॉलेज का साइंस का प्रोफेसर, प्रोफेसर पवन कुमार अपने बिस्तर में सो रहा था कि तभी उसके कानों में पायल की हल्की छनकार की आवाज़ पड़ती है और गुलाब और मोगरे के सेंट की भीनी भीनी पूरे कमरे को महकाती हुई उसकी सांसों में घुल जाती है।

फ़िर उसे अपने बगल में किसी के होने का एहसास हुआ और अगले ही पल उसके चेहरे पर कोलगेट की ताज़गी से भरी हुई किसी की गर्म सांसें टकरा रही थी। इससे पहले कि पवन अपनी आँखें खोल कर कुछ देख पाता अचानक उसके अपने होंठों पर किसी के नर्म होठों की छुअन महसूस हुई और उस एक पल के स्पर्श से पवन के पूरे जिस्म में जैसे बिजली सी दौड़ गई हो। और अगले ही पल, एक हल्के से चुंबन के साथ शहद जैसी मीठी और शरारत से भरी एक जनाना आवाज़ उनके कानों में किसी संगीत की तरह गूँजी—

"Good Morning, Sir..."

पवन के चेहरे पर एक बेसाख्ता मुस्कान फैल गई और उसने अधखुली नींद में ही अपनी छाती के ऊपर झुकी हुई उस युवती को अपनी बाहों में भरते हुए कहा, “Unbelievable... I just don't understand how you can look so fresh after fucking all night long?”

पवन की ये बात सुनकर वह युवती शर्मा गई और हस्ते हुए कहने लगी, “Hot Shower is the main reason behind this freshness.”

युवती की ये बात सुनकर पवन ने आँखें खोली और अपने ऊपर झुकी हुईं पिस्ता हरा रंग की सलवार सूट पहनी उस युवती की खूबसूरती को निहारते हुए कहने लगा, “You are looking incredibly pretty,”

“Thanks” उस युवती ने मुस्कुराते हुए कहा।

“Did you enjoy last night?” पवन ने युवती की गालों को सहलाते हुए कहा।

“Yes” युवती ने नखरे से आँखें मटकाते हुए कहा।

“By the way how many times did you get an orgasm?” पवन ने युवती के होंठों को सहलाते हुए कहा।

“Chhii... You are such a shameless, Professor!” युवती ने शर्माते हुए पवन की छाती पर एक हल्का सा मुक्का मारते हुए कहा।

“Shameless? Me? How? You rode my cock all night and I am shameless! This is sheer injustice, Mayuri Chinappa Goswami ji!” पवन ने नकली गुस्सा दिखाते हुए यूवती जिसका नाम मयूरी चिनप्पा गोस्वामी था की नाक खींचते हुए कहा।

“Aaah... Don't Pull my nose, Professor! मयूरी ने नकली गुस्सा दिखाते हुए अपनी नाक को सहलाते कहा। और खुद को पवन की पकड़ से छुड़ाते हुए नखरे से कहा, “Don't know what's your obsession with my body parts? Wasn't spreading my legs all night enough for you that you have started pulling my nose inthe morning?”

पवन ने मयूरी को दोबारा अपनी ऊपर खींचते हुए कहा, “Didn't you surrender yourself to me? Listen to me very carefully Miss. Mayuri Chinappa Goswami, You, Your Body, Your Mind, Your Soul everything is mine. I can spread , pull and grop whatever I want. Don't you ever dare to stop me.”

पवन की बात सुनकर मयूरी ने मुस्कुराते हुए प्यार से उसके होंठों को चूमते हुए कहा,

“I know, Professor... and I am not stopping you. But I think you've forgotten that our 'lover's time' is over and 'college time' has begun. From now until Saturday night, we are just a student and a professor. Your 'Lover Mayuri' has surrendered herself, not your 'Student Mayuri'. You can do whatever you want only with your lover, not with your student—and it’s 'Student Mayuri's' time now. You can meet your lover again only on the weekend. Now get up and take a shower!”

उसने मुस्कुराते हुए अपनी बात पूरी की, “Your breakfast is ready and your clothes are ironed. You'll find your files, wristwatch, and wallet right there with your dress.”

और जैसे ही वो उठने को हुई, पवन ने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया।

“Professor What are you doing?” मयूरी ने पवन की बाहों में कसमसाते हुए कहा।

“I think you are forgetting something” पवन ने मयूरी को अपनी बाहों में भींचते हुए कहा।

“What?” मयूरी ने थोड़ा सा चिढ़ते हुए कहा।

पवन ने मयूरी के होंठों को सहलाते हुए कहा, “I appreciate your lip kisses but who will kiss my cock?”

पवन की बात सुनकर मयूरी शर्मा गई और मुस्कुराते हुए कहा, “I thought you have forgotten but I should appreciate you have quite a good memory!”

पवन ने मुस्कुराते हुए कहा, “That's why I'm your Professor. Remembering things is my biggest strength. Now go down and finish your Job before I slap you.”

मयूरी ने पवन की आंखों में झांकते हुए कहा, “Will you let me go after that?”

“Sure” पवन ने आत्मविश्वास से कहा।

“Okay” मयूरी ने आत्मसमर्पण करते हुए कहा और अपनी बात को पूरा करते हुए बोली, “Leave me let me go down.”

पवन ने अपनी पकड़ ढीली की और मयूरी उसके ऊपर से उठकर उसकी जांघों के पास जा कर बैठ गई। उसने धीरे से कंबल को जांघों के ऊपर से हटाया और पवन के मुरझाए हुए लन्ड को अपनी बाईं हथेली में भर लिया। मयूरी का हाथ लगते ही पवन के मुरझाए हुए लन्ड में जैसे जान आ गई हो और वो एकदम से अकड़ कर सख़्त हो गया और सीधा तन कर खड़ा हो गया। ये देखकर मयूरी की हसी निकल गई और हस्ते हुए पवन से कहने लगी,

“I must say, your cock is just like you... always ready to fuck me. Like father, like son. Ever-ready! But this readiness is totally wasted because both you and your 'Master Chhotu' will have to wait until Saturday night to fuck me.”

इतना कहकर वह नीचे झुकी और अपने होंठ पवन के लन्ड के सुपाडे पर टिका दिए। पवन के जिस्म में तो जैसे बिजली ही दौड़ गई। उसका पूरा शरीर झनझना उठा और उसके हाथ अपने आप ही मयूरी के सर पर पहुंच गए। मयूरी ने अपने होंठ खोले और पवन के लन्ड के सुपाडे को अपने होंठों में भींचते हुए उसे चूम लिया और फिर धीरे धीरे उसके पूरे लन्ड को चूमते हुए उसके अंडकोष पर पहुंची और उसे भी अच्छी तरह से चूमती हुई वापिस सुपाडे पर पहुंची और एक अंतिम बार चूमकर सीधी हो गई। और पवन की और देखते हुए अपने दुपट्टे को संवारते हुए बोली,

पवन की ओर देखते हुए उसने अपना दुपट्टा सँवारा और बोली, “Okay Professor, I'm leaving now. You get up and get ready. See you at college.”

इतना कहकर मयूरी एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ कमरे से बाहर निकल गई, और पवन भी एक गहरी संतुष्टि के साथ मुस्कुराते हुए शावर लेने के लिए बाथरूम की ओर बढ़ गए।
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Pawan 
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#8
Views 700+ Aur Likes Aur Comments Abhi tak ek bhi nahi, Kya Hua Dosto Kahani ki Shuruaat pasand nahi aayi? Dekhiye main ek new writer hoon aur ye writing mein mera pehla experience hai mujhe grow karne ke liye aapke Bahumulya Likes Aur Comments ki bahut zarurat hai. Kripya like aur comment kijiye aur mujhe bataiye ki aapko kahani kaisi lagi. Aur agar aapko koi kami nazar aati hai toh usey bhi point out kijiye aur mujhe guide kijiye ke main us kami ko kaise Sudha sakta hoon.
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#9
Kaun Kaun Sehmat Hai Ki Mujhe Apni Kahani Ki Shuruat Badal Deni Chahiye?
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#10
पहले तो आप tenent को बदल कर tenant कर दीजिये.
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#11
(09-04-2026, 07:43 PM)Glenlivet Wrote: पहले तो आप tenent को बदल कर tenant कर दीजिये.

शुक्रिया दोस्त, असल में मैं कहानी की शुरुआत को ही एडिट करके कहानी हिंदी की लिपि में ही लिखूंगा। English सिर्फ ज़रूरत के समय ही इस्तेमाल करूंगा। गलती निकालने के लिए शुक्रिया। आगे से ध्यान रखूंगा।
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Pawan 
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#12
STM कॉलेज का लेक्चर हॉल नंबर 402 खचाखच भरा हुआ था। बाहर मुंबई की उमस भरी दोपहर अपनी चरम पर थी, लेकिन हॉल के भीतर का तापमान प्रोफेसर पवन कुमार के कड़े अनुशासन ने जैसे किसी बर्फ की तरह जमा रखा था। अपनी दूधिया सफेद शर्ट की आस्तीनें कोहनियों तक सलीके से चढ़ाए, पवन हाथ में चॉक थामे ब्लैकबोर्ड पर 'मॉलिक्यूलर फिजिक्स' के जटिल समीकरण उकेर रहे थे। पूरे कमरे में सिर्फ चॉक के चलने की 'खटर-पटर' ही सुनाई दे रही थी, जो वहां मौजूद सन्नाटे को और गहरा बना रही थी।

पवन की चौड़ी कमर और गठीली कद-काठी उनके व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक अधिकार (Authority) पैदा करती थी। उनके मुड़ने के अंदाज़ और चाल-ढाल में एक ऐसी पेशेवर गंभीरता थी, जो बिना एक शब्द कहे यह साफ़ कर देती थी कि वे अपने काम और सिद्धांतों के प्रति कितने निष्ठावान हैं। चॉक को स्टैंड पर रखते हुए वे पलटे और अपनी तीखी, पारखी नजरों से पूरी क्लास का जायजा लिया—जैसे वे छात्रों के चेहरों पर लिखे उनके संदेह पढ़ रहे हों।

समीकरणों की जटिल व्याख्या समाप्त कर, पवन ने अपनी भारी और गूँजती आवाज़ में सवाल किया:

“Any doubts regarding the 'Dipole-Dipole' interactions? Raise your hands if you have understood the core concept.”

अगले ही पल, हॉल में एक हल्की सी सरसराहट हुई और लगभग हर छात्र का हाथ हवा में लहराने लगा। पवन की नजरें एक-एक कर सभी चेहरों को स्कैन कर रही थीं, लेकिन तभी उनकी निगाहें क्लास के एक सुदूर कोने में क्लास के एक कोने में तीसरे बेंच पर पिस्ता हरा रंग के सलवार सूट में नज़रें झुकाए अपने होंठों में पेन का पिछला हिस्सा दबाए किताब के पन्नों को बेतरतीब ढंग से सहला रही अपने ही ख्यालों के भंवर में डूबी हुई एक छात्रा पर पड़ी। वह छात्रा मयूरी थी जो दुनिया जहान और क्लास के अनुशासन को भूलकर अपने ही ख्यालों की गहराई में कहीं डूबी हुई थी। 

मयूरी को इस तरह अपने होंठों में पेन दबाए और उँगलियों से किताब के पन्नों को सहलाते हुए देख, पवन के भीतर जैसे कुछ फट पड़ा। वह दृश्य इतना मोहक था कि एक पल के लिए पवन का पूरा वजूद झनझना उठा। मयूरी के उन रसीले होंठों के बीच फंसे उस बेजान पेन और पन्नों पर रेंगती उसकी रेशमी उँगलियों ने पवन की रगों में दौड़ते खून की रफ्तार बढ़ा दी।

उसके अंदर की कामाग्नि अचानक ही भड़क उठी और उसकी पतलून के भीतर उसका लन्ड सख़्त होकर तनाव पैदा करने लगा। पवन का मन हुआ कि वह मर्यादा की सारी बेड़ियाँ तोड़ दे, सीधा मयूरी के पास जाकर उसे अपनी फौलादी बाहों में भर ले और उसके उन सुर्ख गुलाबी होंठों का सारा रस पी जाए। वह ऐसा कर भी देता, अगर उस वक्त वे दोनों कमरे की तन्हाई में होते।

लेकिन यह 'स्मृति कुंज' का बेडरूम नहीं, बल्कि कॉलेज का लेक्चर हॉल था। पवन ने एक गहरी और भारी सांस ली, अपनी मुट्ठियाँ भींचीं और अपनी उभरती हुई उत्तेजना को जैसे-तैसे काबू में किया। खुद को संभालते हुए, उसने अपनी भावनाओं पर अनुशासन की चादर ओढ़ी और सन्नाटे को चीरती हुई एक गरजती आवाज़ में पुकारा:

“Miss Mayuri Chinappa Goswami!”

पवन की वह बुलंद और अधिकारपूर्ण आवाज़ हॉल की दीवारों से टकराकर जब मयूरी के कानों में पड़ी, तो वह किसी गहरे ख़्वाब से झटके के साथ हकीकत में लौट आई। उस पुकार में इतनी शक्ति थी कि मयूरी का पूरा शरीर भीतर तक सिहर गया। उसके होठों के बीच दबा पेन फर्श पर जा गिरा और किताब के पन्नों को सहलाती उसकी उंगलियां जैसे सुन्न पड़ गईं।

उसके गालों पर अचानक ही शर्म और घबराहट की एक लाली उभर आई। उसकी धड़कनें तेज़ हो गईं और उसने डरते-डरते अपनी पलकें उठाकर सामने खड़े उस 'शख्स' की ओर देखा, जो सुबह तक उसका प्रेमी था, पर इस वक्त उसका सबसे सख्त और बेरहम प्रोफेसर नज़र आ रहा था।

पवन ने अपनी तीखी निगाहें मयूरी के चेहरे पर गड़ा दी थीं। वह अपनी उत्तेजना को गुस्से का मुखौटा पहनाते हुए मयूरी की ओर दो कदम बढ़ा और एक गहरी, भारी आवाज़ में बोला:

"Miss Goswami, I believe my lecture is on 'Molecular Physics', not on whatever 'dreamland' you have been wandering in for the last ten minutes. Is the concept of Dipole interaction so simple for you that you've decided to ignore it entirely?"

मयूरी ने कुछ बोलना चाहा, पर पवन की आँखों में छिपी वह खास चमक—जो सिर्फ वही समझ सकती थी—उसे और भी बेचैन कर रही थी। पवन ने रुकते हुए आगे कहा:

"Since you are so engrossed in your 'thoughts', I assume you've mastered the derivation. Come to the board and solve the next part... right 

now!"

पवन की उस आदेशात्मक चुनौती ने मयूरी के भीतर एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। उसने अपनी कांपती उंगलियों से डेस्क पर गिरा अपना पेन उठाया और बेंच के नीचे अपनी पिस्ता हरी सलवार को थोड़ा सलीके से ठीक करते हुए खड़ी हो गई। पूरी क्लास की निगाहें उस पर टिकी थीं, लेकिन उसे सिर्फ पवन की उन आँखों की तपिश महसूस हो रही थी, जो उसे भस्म कर देने को आमादा थीं।

मयूरी ने गहरी सांस ली और धीरे-धीरे चलकर ब्लैकबोर्ड की ओर बढ़ने लगी। उसके सैंडल की 'टिक-टिक' की आवाज़ उस सन्नाटे में पवन के दिल की धड़कनों से तालमेल बिठा रही थी। जैसे ही वह पवन के करीब पहुंची, सुबह की वह मोगरे और गुलाब की महक पवन के नथुनों से टकराई। पवन ने खुद को बेहद सख्त बनाए रखा, लेकिन मयूरी के करीब आते ही उसकी कामअग्नि ने फिर से जोर मारना शुरू कर दिया।

मयूरी ने पवन के हाथ से चॉक लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया। जैसे ही उसकी उंगलियां पवन की हथेलियों से छुईं, दोनों के जिस्म में एक बार फिर वही बिजली दौड़ गई जो सुबह बिस्तर पर दौड़ी थी। मयूरी ने पवन की आँखों में एक पल के लिए देखा—उन आँखों में गुस्सा कम और अपनी प्रियसी के लिए बेइंतहा भूख ज्यादा थी।

मयूरी ने बोर्ड की तरफ रुख किया और चॉक से समीकरण हल करना शुरू किया। उसकी राइटिंग एकदम साफ और सधी हुई थी। लिखते वक्त उसका दुपट्टा बार-बार उसके कंधे से फिसल रहा था, जिसे वह बार-बार झटक कर ठीक कर रही थी। मयूरी की यह अदा पवन को पागल करने के लिए काफी थी। पवन उसके ठीक पीछे खड़ा था, इतना करीब कि वह मयूरी की गर्दन पर मौजूद छोटे-छोटे रोएँ और उसकी सांसों की गति को महसूस कर सकता था।

मयूरी ने बीच में रुककर, बोर्ड की तरफ पीठ किए हुए ही, अपनी गर्दन थोड़ी तिरछी की और पवन की ओर देख कर धीमी लेकिन स्पष्ट अंग्रेजी में कहा:

“Is this ‘bond’ strong enough for you, Professor... or should I deepen the interaction?”

मयूरी का यह दोहरा मतलब (Double Meaning) वाला सवाल सुनकर पवन की मुट्ठियाँ भिंच गईं। क्लास को लगा कि वह फिजिक्स की बात कर रही है, लेकिन पवन जानता था कि यह सीधी चुनौती उसके उन जज्बातों को थी जिन्हें वह दबाने की कोशिश कर रहा था।

मयूरी ने जैसे ही समीकरण हल किया, पवन ने एक गहरी और सख़्त नज़र उस पर डाली। मयूरी की वह चुनौती भरी मुस्कान पवन के संयम की आख़िरी दीवार को भी ढहाने पर आमादा थी। पवन ने अपनी आवाज़ को जितना हो सके उतना औपचारिक (Formal) रखते हुए कहा:

"Correct. Go back to your seat, Miss Goswami."

मयूरी एक सधी हुई चाल चलते हुए अपनी बेंच की ओर लौट गई। ठीक उसी पल कॉलेज की घंटी बजी और पीरियड ख़त्म होने का ऐलान हुआ। पवन ने बिना एक पल गँवाए अपना रजिस्टर उठाया और तेज़ी से क्लास के बाहर निकल गए। उन्हें डर था कि अगर वे एक पल और वहाँ रुके, तो शायद सबका सामने ही मयूरी पर अपना हक़ न जता बैठें।

जैसे ही पवन अपने केबिन के गलियारे में पहुँचे, उन्होंने अपनी जेब से फोन निकाला। उनके हाथ अभी भी उस उत्तेजना से हलके से काँप रहे थे। उन्होंने वॉट्सएप खोला और मयूरी को वह संदेश भेजा जिसने आने वाले तूफ़ान की दस्तक दे दी थी:

“How many times do I have to remind you not to keep your pen between your lips during my lecture? You have awakened the Devil inside me, Mayuri. Come to my cabin immediately after the next period.”

STM कॉलेज की तीसरी मंज़िल का वह कोना अमूमन शांत ही रहता था। साइंस लैब के ठीक बगल में स्थित प्रोफेसर पवन कुमार का केबिन अपनी गोपनीयता के लिए मशहूर था। यहाँ लैब असिस्टेंट्स या सफाई कर्मचारियों के अलावा किसी का आना-जाना नहीं था। पवन अपने केबिन में पहुँच चुके थे, लेकिन उनके भीतर एक अजीब सी कसमसाहट और बेसब्री थी।

उन्होंने अपनी मेज पर रखी पानी की बोतल से दो घूँट भरे, लेकिन प्यास गले की नहीं, बल्कि जिस्म के उस हिस्से की थी जिसे मयूरी ने क्लास में अपने अंदाज़ से जगा दिया था। पवन अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर टिक कर बैठ गए, लेकिन कामुकता का आलम यह था कि वे एक पल के लिए भी स्थिर नहीं रह पा रहे थे। उनकी नज़र दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयों पर टिक गई।

'टिक... टिक... टिक...'

घड़ी की हर आवाज़ पवन के दिमाग पर किसी भारी हथौड़े की तरह पड़ रही थी। समय जैसे थम सा गया था। वह एक घंटा, जो मयूरी के अगले पीरियड का था, पवन के लिए एक सदी से भी लंबा महसूस हो रहा था। उनकी आँखों के सामने रह-रहकर मयूरी के वे गुलाबी होंठ और पेन को दबाने का वह अंदाज़ घूम रहा था। पवन ने अपनी आँखें मूँद लीं और एक ठंडी आह भरी। उनके मन में बस एक ही ख्याल था—कि कब वह दरवाज़ा खुलेगा और वह पिस्ता हरे सूट वाली आफत उनके सामने होगी।

तभी, गलियारे में सैंडल की आहट हुई। पवन फौरन सतर्क होकर सीधे बैठ गए और सामने रखी एक फाइल खोल ली, जैसे वे किसी गहरे शोध में डूबे हों।

दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई और मयूरी अंदर दाखिल हुई। लेकिन वह अकेली नहीं थी। उसके पीछे उसकी सहेली मधुमिता भी थी। मधुमिता को साथ देखकर पवन के माथे पर हल्की सी शिकन उभरी, जिसे उन्होंने तुरंत प्रोफेशनल मुखौटे के पीछे छिपा लिया।

मयूरी के चेहरे पर वही मासूमियत थी, लेकिन उसकी आँखों में एक छिपी हुई शरारत चमक रही थी, जैसे वह जानती हो कि पवन पिछले एक घंटे से किस कदर तड़प रहे थे।

पवन ने अपनी कुर्सी पर खुद को संभालते हुए एक गहरी और गंभीर आवाज़ में पूछा, "May I know the reason for this visit, Miss Goswami?"

मयूरी ने एक सधी हुई मुस्कान के साथ जवाब दिया, "Actually Sir, Madhumita had some doubts regarding the 'Quantum Electrodynamics' topic. She was a bit hesitant to come alone, so I thought I should accompany her to get it cleared by you."

पवन को मयूरी की इस चाल पर अंदर ही अंदर जबरदस्त गुस्सा आया। वह अच्छी तरह जानता था कि मयूरी जानबूझकर मधुमिता को ढाल बनाकर लाई है ताकि वह पवन की बेताबी का मज़ा ले सके। लेकिन एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह पवन ने अपने चेहरे पर कोई भाव आने नहीं दिया। उसने मधुमिता की ओर रुख किया और बेहद प्रोफेशनल अंदाज़ में उसके संदेहों को दूर करने लगा। लगभग पंद्रह मिनट तक पवन ने फिजिक्स के उस जटिल टॉपिक को समझाया, जबकि उसका पूरा ध्यान सामने खड़ी मयूरी पर था, जो बड़े इत्मीनान से पवन को 'प्रोफेसर' की भूमिका निभाते देख रही थी।

जैसे ही मधुमिता संतुष्ट हुई, मयूरी ने अपने हाथ में पकड़ी एक नीली फाइल पवन की ओर बढ़ाते हुए कहा, "Sir, Miss D'costa has sent this file for you. She requested you to specifically check the thesis on page number 9 and record it in the official register before leaving."

पवन ने फाइल थाम ली। मयूरी ने एक बार मधुमिता की ओर देखा और फिर पवन की आँखों में अपनी शरारती नज़रें गड़ाते हुए कहा, "We should leave now. Thank you for your time, Professor."

दोनों लड़कियाँ केबिन से बाहर निकल गईं। उनके जाते ही पवन ने गुस्से और झुंझलाहट में फाइल को टेबल पर पटका, लेकिन तभी उसे 'पेज नंबर 9' वाली बात याद आई। उसने जैसे ही फाइल खोलकर नौवां पन्ना पलटा, उसकी नज़रें वहाँ रखी एक छोटी सी सफ़ेद चिट पर ठहर गईं।

पवन ने उस चिट को उठाया, जिस पर मयूरी की खूबसूरत लिखावट में बस एक ही लाइन लिखी थी:

“Bring your 'Devil' under the table.”

पवन को मयूरी की इस बात का कोई मतलब समझ नहीं आया। 'डेविल को मेज़ के नीचे लाओ?'—इस पहेली ने उसे और भी उलझा दिया। उसने तुरंत अपना फोन निकाला और मयूरी का नंबर डायल किया, यह जानने के लिए कि आखिर वह कहना क्या चाहती है।

तभी, उसके कानों में मयूरी के फोन की रिंगटोन गूँजी। पवन चौंक गया—आवाज़ केबिन के बाहर से नहीं, बल्कि केबिन के अंदर से ही आ रही थी। उसने ध्यान दिया तो पता चला कि आवाज़ उसके अपने टेबल के नीचे से आ रही है।

उसने झुककर मेज़ के नीचे एक कोने में देखा, तो वहाँ उसे एक मोबाइल फोन पड़ा दिखाई दिया। यह मयूरी का फोन था। पवन के चेहरे पर एक साथ कई भाव आए—हैरानी, गुस्सा और फिर एक कुटिल मुस्कान। वह समझ गया कि मयूरी ने जानबूझकर अपना फोन यहाँ छोड़ा है ताकि उसे वापस लेने के बहाने वह दोबारा अकेले में उससे मिलने आ सके। मयूरी ने खेल बहुत सलीके से खेला था।

पवन मयूरी की इस सोची-समझी चालाकी से दंग रह गया। वह नीचे झुककर मयूरी का फोन उठाने ही वाला था कि तभी उसके केबिन के दरवाजे पर एक हल्की दस्तक हुई और मयूरी की वही जानी-पहचानी मधुर आवाज कानों में पड़ी—

“May I come in, Sir?”

पवन ने अपनी आवाज में प्रोफेसर वाला भारीपन लाते हुए कहा, 

“Yes, come in.”

दरवाजा खुला और मयूरी अंदर दाखिल हुई। इस बार वह अकेली थी और थोड़ा घबराई हुई लग रही थी। उसने चिंतित स्वर में कहा, 

“Sorry to bother you Sir, but I think I forgot my phone here.”

पवन ने अपनी एक भौंह चढ़ाते हुए उसे तिरछी नजर से देखा और शरारत भरी आवाज़ में पूछा, 

“Forgot... or left, Miss Goswami?”

पवन की इस बात पर मयूरी का वह मासूमियत भरा नकाब उतर गया और उसके चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कान दौड़ गई। अगले ही पल, वह तेजी से पवन के करीब आई और बिना वक्त गंवाए नीचे झुककर मेज के नीचे वाले उस तंग अंधेरे हिस्से में जा बैठी। उसने मेज के नीचे से अपना फोन उठाया, उसे स्विच ऑफ किया और फिर पवन की रिवॉल्विंग चेयर को अपनी ओर खींचकर अपने चेहरे के नज़दीक कर लिया।

पवन भी थोड़ा आगे खिसका और अपनी दोनों टांगें खोलकर टेबल से बिल्कुल सटकर बैठ गया। पवन के पैरों के बीच अपने घुटनों के बल बैठते हुए मयूरी ने उसकी पतलून की ज़िप पकड़ी और उसे धीरे-धीरे नीचे सरकाते हुए चेतावनी भरे स्वर में फुसफुसाई—

“If someone comes asking for me, I've left the cabin.”

“Got it,” पवन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, हालांकि उसका दिल अब सीने में जोर-जोर से धड़क रहा था।

मयूरी ने अपना कोमल हाथ पवन की पतलून के भीतर डाला और उसकी अंडरवियर की जाली में से उसके मुरझाए हुए लन्ड को बाहर निकाला जो उसके हाथ की छुअन से फिर से सख़्त होने लगा था। उसे अपनी हथेलियों में प्यार से सहलाते हुए वह दबी आवाज में बोली—

“You are impossible, Professor! Couldn't you wait until the night? You always keep creating problems for me!”

पवन ने उसे चिढ़ाते हुए जवाब दिया—

“Well, it's all your fault. If you didn't keep your pen between your lips during my lecture, this wouldn't have happened.”

मयूरी ने मेज के नीचे से ऊपर की ओर एक तीखी और शरारती नज़र डाली और मुस्कुराते हुए कहा—

“In that case, I think I should stop using a pen. Now, please do me a favour—keep reading that file and try not to moan too loud!”

“Copy that,” पवन ने एक गहरी सांस ली और सामने रखी फाइल को खोलकर पढ़ने का नाटक करने लगा।
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Pawan 
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#13
[Image: IMG-20260409-102949.png]
मयूरी चिनप्पा गोस्वामी
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Pawan 
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#14
(10-04-2026, 06:56 AM)Pawan13569 Wrote: शुक्रिया दोस्त, असल में मैं कहानी की शुरुआत को ही एडिट करके कहानी हिंदी की लिपि में ही लिखूंगा। English सिर्फ ज़रूरत के समय ही इस्तेमाल करूंगा। गलती निकालने के लिए शुक्रिया। आगे से ध्यान रखूंगा।

thanks
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#15
क्या कोई मुझे updates में photo insert करने का तरीका बता सकता है?
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Pawan 
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