02-04-2026, 10:59 PM
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यह कहानी काल्पनिक है।
इस कहानी के सभी पात्र 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
हॉल के भीतर प्रवेश करते ही चैताली का ध्यान तेज संगीत और चहल-पहल भरे माहौल पर गया। ऑफिस की यह सालाना पार्टी अपने चरम पर थी - लोग डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे, कॉकटेल ग्लास हाथों में लिए हुए गपशप कर रहे थे, और कुछ कोने में खड़े होकर जोरदार हँसी का आदान-प्रदान कर रहे थे।
चैताली ने आज अपने वार्डरोब से सबसे खास पोशाक चुनी थी - एक नीले शिफॉन की साड़ी जो उसकी शरीर पर दूसरी त्वचा की तरह फिट हो रही थी। उसने इसे पारंपरिक तरीके से न पहनकर थोड़ा आधुनिक अंदाज दिया था, पल्लू को कमर से नीचे की ओर स्टाइलिश तरीके से अरेंज किया था, जिससे उसका सुडोल पेट साफ झलक रहा था।
उसका ब्लाउज स्लीवलेस डिजाइन का था, जिसकी गहरी नेकलाइन उसकी चूचियों को आकर्षक ढंग से उभार रही थी। चार इंच की स्टिलेटो हील्स ने न केवल उनकी हाइट को बढ़ाया था बल्कि उनके पोस्चर को भी राजसी बना दिया था।
उसका कंधे तक के बाल, जिन्हें आज उसने स्ट्रेटनर से निखारा था, खुले हुए थे और हर कदम के साथ लहराने लगते थे। मेकअप में न्यूट्रल शेड्स के बावजूद, उसका आँखों में काजल की मोटी लकीर और होंठों पर गहरा लाल लिपस्टिक ने उनके फीचर्स को और भी निखार दिया था।
जैसे ही वह हॉल में पूरी तरह दाखिल हुईं, कमरे के कई नजरें उन पर टिक गईं। चैताली ने आत्मविश्वास से कमर को हल्का सा झटका देते हुए अपने बालों को पीछे फेंका, और पार्टी के शोर में समा गई।
"अरे भाई... देखो ज़रा उधर," आर्यन ने अपनी व्हिस्की के गिलास को हवा में हिलाते हुए कहा, उसकी आँखें हॉल के दूसरे छोर पर खड़ी चैताली के भरावन शरीर पर चिपकी हुई थीं। उसकी नशीली आवाज़ में एक अजीब सी गंदी उत्तेजना थी। "यार... वो नीली चिफ़ॉन साड़ी में... सच कहूँ तो मेरा तो खड़ा हो गया है। देखो कैसे उसके बूब्स उस कटी हुई ब्लाउज से बाहर निकलने को हो रहे हैं। मैं तो उन्हें अपने हाथों में लेकर नचाना चाहता हूँ... पूरी रात भर।"
अशोक ने अपना गिलास मेज़ पर पटक दिया, एक अश्लील हँसी के साथ। "साले... तू तो आजकल बहुत ही गरम हो रहा है!" उसने अपनी जीभ निकालकर होठों को चाटा, "पर मेरा ध्यान तो उसकी चाल पर है। देख कैसे वो अपने चुत्तड़ हिला रही है... जैसे कोई मंच पर नाच रही हो। सोचो अगर बिस्तर पर ऐसे ही हिले तो?" उसने अपनी जाँघों को हवा में धकेलते हुए एक अश्लील इशारा किया।
राघव, जो अब तक चुपचाप अपना पेग पी रहा था, अचानक अपनी कुर्सी पर आगे झुका। उसकी आँखों में एक खतरनाक चमक थी। "तुम दोनों बचकानी बातें कर रहे हो," उसने धीमी पर गंदी आवाज़ में कहा, "मैं तो सोच रहा हूँ कि कैसे उसकी चूत को अपने लंड से फाड़ूँ... इतनी जोर से कि वो चीख़े... मेरा नाम लेते हुए रोए... और फिर भी मुझसे और माँगे।" उसके शब्दों के साथ ही तीनों की हँसी पूरे बार में गूँज उठी।
पार्टी का शोर उनकी बातों को डूबा दे रहा था, लेकिन तीनों की नज़रें अभी भी चैताली पर टिकी हुई थीं। उसकी साड़ी का पतला कपड़ा हर मोड़ पर उसके शरीर के आकर्षक कर्व्स को उभार रहा था, जबकि उसका अत्यधिक कटा हुआ ब्लाउज़ हर झुकाव पर उसके भरे हुए चूचियों को बाहर निकलने का संकेत दे रहा था।


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