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02-04-2026, 10:59 PM
(This post was last modified: Yesterday, 08:14 PM by MohdIqbal. Edited 6 times in total. Edited 6 times in total.)
यह कहानी काल्पनिक है।
इस कहानी के सभी पात्र 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
हॉल के भीतर प्रवेश करते ही चैताली का ध्यान तेज संगीत और चहल-पहल भरे माहौल पर गया। ऑफिस की यह सालाना पार्टी अपने चरम पर थी - लोग डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे, कॉकटेल ग्लास हाथों में लिए हुए गपशप कर रहे थे, और कुछ कोने में खड़े होकर जोरदार हँसी का आदान-प्रदान कर रहे थे।
चैताली ने आज अपने वार्डरोब से सबसे खास पोशाक चुनी थी - एक नीले शिफॉन की साड़ी जो उसकी शरीर पर दूसरी त्वचा की तरह फिट हो रही थी। उसने इसे पारंपरिक तरीके से न पहनकर थोड़ा आधुनिक अंदाज दिया था, पल्लू को कमर से नीचे की ओर स्टाइलिश तरीके से अरेंज किया था, जिससे उसका सुडोल पेट साफ झलक रहा था।
उसका ब्लाउज स्लीवलेस डिजाइन का था, जिसकी गहरी नेकलाइन उसकी चूचियों को आकर्षक ढंग से उभार रही थी। चार इंच की स्टिलेटो हील्स ने न केवल उनकी हाइट को बढ़ाया था बल्कि उनके पोस्चर को भी राजसी बना दिया था।
उसका कंधे तक के बाल, जिन्हें आज उसने स्ट्रेटनर से निखारा था, खुले हुए थे और हर कदम के साथ लहराने लगते थे। मेकअप में न्यूट्रल शेड्स के बावजूद, उसका आँखों में काजल की मोटी लकीर और होंठों पर गहरा लाल लिपस्टिक ने उनके फीचर्स को और भी निखार दिया था।
जैसे ही वह हॉल में पूरी तरह दाखिल हुईं, कमरे के कई नजरें उन पर टिक गईं। चैताली ने आत्मविश्वास से कमर को हल्का सा झटका देते हुए अपने बालों को पीछे फेंका, और पार्टी के शोर में समा गई।
"अरे भाई... देखो ज़रा उधर," आर्यन ने अपनी व्हिस्की के गिलास को हवा में हिलाते हुए कहा, उसकी आँखें हॉल के दूसरे छोर पर खड़ी चैताली के भरावन शरीर पर चिपकी हुई थीं। उसकी नशीली आवाज़ में एक अजीब सी गंदी उत्तेजना थी। "यार... वो नीली चिफ़ॉन साड़ी में... सच कहूँ तो मेरा तो खड़ा हो गया है। देखो कैसे उसके बूब्स उस कटी हुई ब्लाउज से बाहर निकलने को हो रहे हैं। मैं तो उन्हें अपने हाथों में लेकर नचाना चाहता हूँ... पूरी रात भर।"
अशोक ने अपना गिलास मेज़ पर पटक दिया, एक अश्लील हँसी के साथ। "साले... तू तो आजकल बहुत ही गरम हो रहा है!" उसने अपनी जीभ निकालकर होठों को चाटा, "पर मेरा ध्यान तो उसकी चाल पर है। देख कैसे वो अपने चुत्तड़ हिला रही है... जैसे कोई मंच पर नाच रही हो। सोचो अगर बिस्तर पर ऐसे ही हिले तो?" उसने अपनी जाँघों को हवा में धकेलते हुए एक अश्लील इशारा किया।
राघव, जो अब तक चुपचाप अपना पेग पी रहा था, अचानक अपनी कुर्सी पर आगे झुका। उसकी आँखों में एक खतरनाक चमक थी। "तुम दोनों बचकानी बातें कर रहे हो," उसने धीमी पर गंदी आवाज़ में कहा, "मैं तो सोच रहा हूँ कि कैसे उसकी चूत को अपने लंड से फाड़ूँ... इतनी जोर से कि वो चीख़े... मेरा नाम लेते हुए रोए... और फिर भी मुझसे और माँगे।" उसके शब्दों के साथ ही तीनों की हँसी पूरे बार में गूँज उठी।
पार्टी का शोर उनकी बातों को डूबा दे रहा था, लेकिन तीनों की नज़रें अभी भी चैताली पर टिकी हुई थीं। उसकी साड़ी का पतला कपड़ा हर मोड़ पर उसके शरीर के आकर्षक कर्व्स को उभार रहा था, जबकि उसका अत्यधिक कटा हुआ ब्लाउज़ हर झुकाव पर उसके भरे हुए चूचियों को बाहर निकलने का संकेत दे रहा था।
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कोने में खड़ी चैताली की आँखों में एक अजीब सी खोई-खोई सी चमक थी। वह अपने हाथ में पकड़े व्हिस्की के गिलास को घूमा रही थी, जिसमें बर्फ के टुकड़े टकराने की आवाज़ हल्के से गूंज रही थी। उसके चुस्त फिटिंग वाले ब्लाउज ने उसके सुडोल मम्मों को इतनी बखूबी से उभारा था कि नीचे पहनी हुई काली ब्रा का आउटलाइन साफ-साफ नजर आ रहा था। उसकी साड़ी का पल्लू भी कंधे से थोड़ा सरक चुका था, जो उसकी गोरी रंगत और नाजुक कलाई को और भी आकर्षक बना रहा था।
"ओये देखो, चैताली मैडम तो अकेली खड़ी हैं," आर्यन ने अपने दोस्तों अशोक और राघव की तरफ मुड़कर कहा, उसकी आँखों में एक शरारत भरी चमक थी, "चलो मौका है, बात करते हैं। शायद आज हमारा दिन हो।"
वे तीनों धीरे-धीरे उसके पास पहुंचे, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार के पास चुपके से जा रहा हो। "हेलो मैम, कैसी चल रही पार्टी?" अशोक ने चापलूसी भरे अंदाज में पूछा, उसकी नजरें बार-बार चैताली के नीचे झुके हुए ब्लाउज के नेकलाइन पर जा रुक रही थीं।
"हम्म.. बढ़िया.." चैताली ने धीमे से जवाब दिया, उसकी आवाज़ में शराब की हल्की सी धुंधलाहट थी। उसने गिलास को होठों से लगाया और एक लंबा घूंट लेते हुए आँखें बंद कर लीं, जैसे वो पल का आनंद ले रही हो। उसकी गर्दन की नसें थोड़ी उभर आईं, और व्हिस्की के घूंट को निगलते हुए उसके होठ गीले हो गए।
"वाह! मैम तो पूरी ही मूड में हैं!" राघव ने गर्मजोशी से कहा, उसकी नजरें चैताली के चेहरे से होते हुए उसके सुडौल मम्मों पर टिक गईं। तीनों लड़के एक दूसरे को अर्थपूर्ण निगाहों से देखने लगे, जैसे कोई गुप्त संकेत दे रहे हों।
आर्यन ने मौके का फायदा उठाते हुए उसके हाथ में एक नया गिलास व्हिस्की थमा दी, जिसमें बर्फ के साथ सोडा भी मिला हुआ था, "लो मैम, थोड़ा और एन्जॉय करो। आजकल तो आप हमें ऑफिस में इतना स्ट्रेस देती हैं, आज हम आपको रिलैक्स कराएंगे।"
"अरे.. धन्यवाद.." चैताली ने मुस्कुराते हुए गिलास ले लिया और एक ही बार में सारी व्हिस्की गटक गई। उसके गालों पर शराब की लालिमा और भी गहरी हो गई थी। "तुम लोग तो बहुत अच्छे हो.. पर ऑफिस में ऐसे ही ध्यान दो तो और भी अच्छा लगेगा," उसने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा।
"वाह! खतरनाक लुक है मैम का!" राघव ने जोश से कहा, उसकी आँखें चैताली के ब्लाउज के नीचे से झाँक रही काली ब्रा के स्ट्रैप्स पर टिक गईं। "मैम आपका ड्रेस सेंस तो वाह.. बस ब्लाउज थोड़ा टाइट नहीं लग रहा?" अशोक ने झिझकते हुए पूछा, जैसे वो खुद भी अपनी हिम्मत पर हैरान हो।
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चैताली हंस पड़ी, उसका सिर पीछे की तरफ झुक गया और उसके बाल हवा में लहरा गए, "अरे यार, तुम लोग.. मुझे शरमा रहे हो.." पर उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उसने अनजाने में अपनी साड़ी के पल्लू को संभालने की कोशिश की, जो उसके कंधे से फिसलकर नीचे लटक गया था। इससे उसका ब्लाउज और भी उभर आया, और उसके भरे हुए गोल मम्मों के बीच की क्लीवेज पूरी तरह दिखने लगी।
"अरे यार.. ऐसे नहीं.." चैताली ने शरमाते हुए कहा, पर उसने जल्दी से पल्लू नहीं संभाला, जैसे वो उन्हें देखने का मौका देना चाह रही हो। उसकी आँखों में एक चुभती हुई चमक थी, जो शायद शराब और तारीफों के कारण और भी बढ़ गई थी।
"मैम आपके.. एह.. एसेट्स तो बहुत इम्प्रेसिव हैं," राघव ने उसके मम्मों की तरफ इशारा करते हुए कहा, उसकी आवाज़ थोड़ी लड़खड़ा गई थी। "हम तो बस आपके फैन हैं मैम," अशोक ने चापलूसी की, उसकी नजरें चैताली के ब्लाउज के पीछे के हिस्से पर टिक गईं, जहाँ से उसकी कमर का सुडौल कर्व साफ दिख रहा था।
चैताली नशे और तारीफों के घेरे में खो सी गई थी। उसने बस मुस्कुरा कर जवाब दिया, "तुम लोग बहुत शैतान हो.." जबकि उसके चेहरे पर संतुष्टि की चमक साफ दिख रही थी। उसने एक और घूंट लिया और उन तीनों को देखकर मुस्कुरा दी, जैसे वो इस पूरे खेल का आनंद ले रही हो।
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ऑफिस के पार्टी का माहौल पूरे जोरों पर था। डीजे के तेज़ संगीत के बीच कर्मचारी नाच-गा रहे थे, शराब के गिलास टकरा रहे थे। एक शांत कोने में, जहाँ लाइट्स थोड़ी मद्धिम थीं, चैताली अपने तीन युवा सहकर्मियों - आर्यन, अशोक और राघव - के साथ बैठी थी। व्हिस्की के कुछ पैगों ने उसके व्यवहार को पूरी तरह निडर बना दिया था। वह जोर-जोर से हंस रही थी, कभी राघव के कंधे पर हाथ रखकर, तो कभी अशोक की बांह को हल्के से थपथपाकर। उसकी इस बढ़ती हुई छेड़खानी से तीनों युवकों ने भी अपना संकोच छोड़ दिया था।
राघव ने अपनी सीट पर आगे झुकते हुए, चैताली की ओर देखकर पूछा, "अरे यार चैताली, सच-सच बताना, तुम्हारी उम्र क्या है? तुम तो हम तीनों से भी ज्यादा एनर्जेटिक लग रही हो। तुम्हारी एनर्जी देखकर कोई भी यकीन नहीं करेगा कि तुम..." उसकी बात अधूरी छोड़कर वह मुस्कुराया।
चैताली के गालों पर गुलाबी लाली फैल गई। वह अपने बाल पीछे करते हुए झिझकी, "अरे... मैं... मैं 38 की हूँ।" यह सुनते ही राघव ने आश्चर्य से सीटी बजाई, "अच्छा?! वाह! सच में? तुम तो..." उसने चैताली के पूरे बदन को निहारा, "तुम तो किसी कॉलेज की लड़की लगती हो!"
अशोक ने भी इस मौके को न छोड़ते हुए कहा, "सच कहूँ यार, तुम्हारी बॉडी तो किसी 25 साल की लड़की जैसी है। तुम्हारी कमर का ये कर्व..." उसने हवा में हाथ से कर्व बनाया, "...और... उम्म... तुम्हारे बूब्स..." वह थोड़ा रुका, फिर बोला, "मतलब तुम्हारा पूरा फिज़िक तो बिल्कुल फैशन मॉडल वाला है। कोई बता ही नहीं सकता कि तुम हमारी सीनियर हो।"
चैताली और ज्यादा शरमा गई। उसने अपनी साड़ी का पल्लू खींचते हुए मुंह ढकने की कोशिश की, पर उसकी चमकती आँखें अभी भी उन तीनों की ओर देख रही थीं। "अरे छोड़ो यार... तुम लोग आज कुछ ज्यादा ही..."
तभी आर्यन ने धीमी, पर गहरी आवाज़ में पूछा, "अच्छा चैताली, एक बात बताओ... तुम्हारे... माप क्या हैं?" वह देखता रहा कि उसके इस सीधे सवाल का चैताली पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
चैताली की आँखें तुरंत नीची हो गईं। उसकी गर्दन और कान तक लाल हो गए। वह अपनी साड़ी के पल्लू से मुंह ढकने लगी, पर उसके होंठों पर एक शरारती मुस्कान थी। "अरे भई... ये कैसा सवाल पूछ रहे हो..." वह हंसी, पर उसकी आवाज़ में एक खास तरह की लचक थी।
आर्यन ने बात को और आगे बढ़ाते हुए कहा, "नहीं यार, मेरा मतलब... तुम्हारा ड्रेस साइज क्या है? क्योंकि मुझे तो लगता है..." उसने चैताली के शरीर को देखा, "...तुम्हारी फिगर तो बिल्कुल..." वह रुका, फिर बोला, "...परफेक्ट है।"
चैताली ने उन तीनों की ओर देखा, जहाँ हर एक की आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसने सोचा - आज इन लड़कों ने शराब के नशे में कुछ ज्यादा ही बोल्डनेस दिखा दी है. पर उसे यह भी एहसास हुआ कि उसे यह सब बुरा नहीं लग रहा.. बल्कि..
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चैताली ने अपनी आँखें झपकाईं और शराब के नशे में थोड़ी बेबाक होकर जवाब दिया, "अरे ठीक है... 36-24-36" उसने नकली आत्मविश्वास से कहा, जानते हुए कि यह संख्या उसके असली मापों से काफी अलग थी।
"वाह!" अशोक ने सीटी बजाई, जबकि आर्यन और राघव एक दूसरे को कोहनी मारकर हँसने लगे।
चैताली ने उनकी ओर एक नखरीली नज़र से देखते हुए कहा, "अब तो बता दिया ना? अब और क्या जानना चाहते हो तुम लोग?" उसकी इस चुनौती भरी बात ने तीनों लड़कों के चेहरे पर और भी ज़्यादा शरारत भर दी।
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पार्टी अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। पूरा हॉल डिस्को लाइट्स की रंगीन रोशनी से नहाया हुआ था, जिसमें एलईडी बल्बों की चमकीली किरणें सभी दीवारों पर नाच रही थीं। बीयर और व्हिस्की की महक हवा में घुल चुकी थी, और बैंड के जोरदार ड्रम बीट्स पर कई कर्मचारी नशे में डूबकर डांस फ्लोर पर मस्ती कर रहे थे। इसी भीड़ के बीच चैताली, अपने तीन जूनियर सहकर्मियों - राघव, आर्यन और अशोक - के साथ खुलकर डांस कर रही थी।
वह जानबूझकर उनके पास आती, अपने घुमावदार शरीर को उनकी तरफ झुकाती, कभी कंधे से टकराती तो कभी अपने नर्म हाथों से उनकी बाँहों को सहलाती। उसकी फिगर तीनों युवकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। वो अपनी टांगों को स्टिलेटो हील्स पर लहराते हुए उनके बीच घूम रही थी, जिससे तीनों का खून गर्म हो रहा था। "क्या तुम लोग अभी भी शर्मा रहे हो?" चैताली ने शराब से सुर्ख हुए होठों से मुस्कुराते हुए कहा, "इस पार्टी का मतलब है मस्ती करना!"
तभी अचानक चैताली को तीव्र पेशाब का अहसास हुआ। उसने पूरी शाम अब तक कम से कम चार व्हिस्की के पैग लिए थे, जिससे उसकी मूत्राशय की मांसपेशियाँ पूरी तरह ढीली पड़ चुकी थीं। वह खुद को रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पेशाब का दबाव बढ़ता जा रहा था। "अभी आती हूँ," उसने एक लुभावनी मुस्कान के साथ कहा और अपने लाल रंग के पर्स को संभालते हुए डांस फ्लोर से निकलने लगी। उसकी चाल थोड़ी डगमगा रही थी, और वह दीवार को थामते हुए संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी।
"कहाँ जा रही हो चैताली?" राघव ने उसकी कमर पर हाथ रखते हुए पूछा, अपनी उंगलियों को उसके पीछे से स्लिट में सरकाते हुए। उसने महसूस किया कि चैताली की ड्रेस काफी पतली थी और उसकी गर्माहट उसकी उंगलियों तक आ रही थी।
"वॉशरूम, बेबी," वह झटके से उसका हाथ हटाते हुए बोली, "थोड़ी देर में वापस आऊँगी। तब तक तुम लोग अपने ड्रिंक्स खत्म कर लो।" उसकी आवाज़ में शराब की मदहोशी साफ झलक रही थी। उसने अपने पैरों को सँभाला और धीरे-धीरे वॉशरूम की ओर बढ़ने लगी, अपने लंबे बालों को पीछे फेंकते हुए।
जैसे ही चैताली दरवाज़े के बाहर नज़रों से ओझल हुई, तीनों युवक एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुराए।
"सुनो यार," अशोक ने चैताली के कर्व्स की तरफ इशारा करते हुए कहा, अपने ग्लास में बर्फ के टुकड़ों को हिलाते हुए, "ये 36-24-36 वाली बात तो बकवास है। मेरा अनुमान है कि ये कम से कम 38-26-38 है। उसके ऊपरी हिस्से को देखो, वो ब्रा से बाहर निकलने को तैयार है!"
"हाँ भाई," आर्यन हँसते हुए बोला, अपनी बीयर की बोतल से एक लंबा घूँट लेते हुए, "और वो गांड! जैसे दो पके हुए आम लटक रहे हों! जब वह डांस करते हुए घूमती है तो मेरी आँखें उससे हट नहीं पातीं।"
राघव ने अपनी व्हिस्की का एक बड़ा घूँट भरते हुए कहा, "काश आज रात हम तीनों उसके साथ... तुम समझ रहे हो न?" उसने अपनी आँखों से एक अश्लील इशारा किया, "वो इतनी मस्त है कि शायद मना भी न करे।"
इस पर तीनों ज़ोर से हँस पड़े और फिर से अपने ड्रिंक्स की ओर मुड़ गए, जबकि उनकी निगाहें अभी भी वॉशरूम के रास्ते पर टिकी हुई थीं, चैताली के लौटने का इंतज़ार कर रही थीं।
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पार्टी हॉल के कोने में खड़े दो युवा स्टाफ सदस्य - संजय और विवेक - जो पिछले एक घंटे से चैताली को उसके सहकर्मियों के साथ शराब पीते और खुलेआम फ्लर्ट करते देख रहे थे, अचानक सतर्क हो गए। संजय ने विवेक की कोहनी पर हल्का सा टैप किया और फुसफुसाया, "अरे देख, मैडम चैताली अभी वॉशरूम जा रही है... पूरी तरह नशे में लग रही है।" विवेक ने चैताली के लड़खड़ाते कदमों को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "चलो भाई, हम भी चलते हैं.. शायद मदद की जरूरत पड़े।"
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चैताली जब वॉशरूम के दरवाजे तक पहुँची तो उसका नशा इतना बढ़ चुका था कि वह दरवाजे का हैंडल ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी। उसकी उंगलियाँ लकड़ी के हैंडल पर फिसल रही थीं, और वह बार-बार अपना संतुलन खो रही थी। संजय और विवेक ने इस मौके का फायदा उठाया और तेजी से उसके पास पहुँच गए।
"मैडम, क्या आपको मदद चाहिए?" संजय ने नकली चिंता से भरे स्वर में पूछा, जबकि विवेक पीछे से चैताली के करीब आकर खड़ा हो गया। चैताली ने अपनी धुंधली आँखों से उन्हें देखा और हकलाते हुए कहा, "हाँ... मैं... दरवाजा... खोल नहीं पा रही..." उसकी आवाज़ में साफ नशा झलक रहा था।
संजय ने तुरंत आगे बढ़कर दरवाजा खोला और चैताली को अंदर जाने दिया, लेकिन उसके अंदर जाते ही वे दोनों भी चुपके से उसके पीछे हो लिए। वॉशरूम का अंदरूनी हिस्सा काफी बड़ा था, जिसमें एक तरफ वाश बेसिन और दूसरी तरफ भारतीय शैली के टॉयलेट थे। चैताली ने जैसे ही टॉयलेट की ओर कदम बढ़ाया, उसके पैर फिसल गए और वह जोर से गिर पड़ी। उसकी साड़ी का पल्लू बिखर गया, जिससे उसकी मोटी जांघें और छोटी काली लेस वाली पैंटी साफ दिखाई देने लगी।
"अरे मैडम! आप ठीक हैं?" संजय ने झट से आगे बढ़कर चैताली का हाथ पकड़ने की कोशिश की, जबकि विवेक उसके दूसरी तरफ घुटने के बल बैठ गया। चैताली ने अपनी धुंधली आँखों से उन्हें देखा और हकलाते हुए कहा, "मुझे... पेशाब... बहुत ज़ोर से आ रहा है..." उसकी आवाज़ में तीव्र इच्छा साफ झलक रही थी।
दोनों युवकों ने उसे सावधानी से उठाया और टॉयलेट की ओर ले गए। चैताली ने अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर उठाया और उसे अपनी कमर के चारों ओर लपेट लिया, जिससे उसकी मोटी जांघें और छोटी काली लेस वाली पैंटी पूरी तरह स्पष्ट हो गई। संजय ने चैताली के पीछे से उसे सहारा देते हुए बैठने में मदद की जबकि विवेक आगे खड़ा होकर उसके मोटे शरीर को निहार रहा था।
चैताली को अपनी पैंटी नीचे करने में काफी संघर्ष करना पड़ा क्योंकि नशे के कारण उसकी उंगलियाँ सही से काम नहीं कर रही थीं। विवेक ने अचानक अपना फोन निकाला और संजय को इशारा किया। चैताली को पेशाब करते हुए फिल्माने के लिए विवेक ने अपने फोन को सावधानी से पोजिशन किया।
"संजय, उसे थोड़ा और सहारा दो," विवेक ने कहा, जबकि उसकी उंगलियाँ फोन के कैमरा बटन पर थीं। पेशाब की धार शुरू होते ही विवेक ने अपने फोन को चैताली के चेहरे से लेकर उसकी साफ-सुथरी योनि तक फोकस किया, जहाँ से पेशाब की धार बाहर आ रही थी।
"मैडम, आराम से करें," संजय ने चैताली के कंधे पर हाथ रखकर उसे संतुलन बनाए रखने में मदद की जबकि चैताली ने अपनी आँखें बंद कर ली थी। पेशाब करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दोनों लड़कों ने चैताली को सावधानी से खड़ा किया और उसकी पैंटी ऊपर चढ़ाने में मदद की। विवेक ने चुपके से अपने फोन में रिकॉर्ड किया वीडियो सेव कर लिया और संजय की ओर मुस्कुराते हुए देखा।
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ऑफिस की वार्षिक पार्टी का माहौल गर्मजोशी से भरा हुआ था। डीजे के तेज संगीत पर कुछ लोग डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे तो कुछ बार काउंटर पर अपने पसंदीदा ड्रिंक्स के साथ गपशप में मशगूल थे। मुख्य हॉल का वातावरण उत्साह और मस्ती से सराबोर था। इसी हॉल के एक कोने में आर्यन, अशोक और राघव चैताली के वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। चैताली, जो उनकी लेडी मैनेजर थी, कुछ देर पहले वॉशरूम गई थी और अभी तक लौटी नहीं थी।
रात के करीब 11 बज चुके थे। पार्टी अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। हर तरफ हँसी-मजाक, गपशप और ड्रिंक्स का दौर चल रहा था। अशोक बेचैन होकर खड़ा हुआ, "यार चैताली को देखने जाऊँ क्या? इतनी देर से वॉशरूम में क्या कर रही है?" उसने पूछा। तभी अचानक हॉल के दरवाज़े से चैताली ने प्रवेश किया। वह उसी पारदर्शी नीली साड़ी में थी जो उसके सुडौल शरीर के कर्व्स को बखूबी उभार रही थी। स्लीवलेस ब्लाउज उसके कंधों और गर्दन को नंगा कर रहा था, जिससे उसकी त्वचा की सुनहरी चमक और भी ज़्यादा निखर आई थी।
शाम को पी गई व्हिस्की का नशा अब उतर चुका था, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वही चमक थी जो शराब पीने के बाद आती है। "अरे यार लोग! क्या चल रहा है?" चैताली ने मुस्कुराते हुए पूछा। सभी लोग तुरंत खड़े हो गए और उसका अभिवादन करने लगे। "अरे मैडम आ गईं! हम तो बेचैन हो रहे थे," राघव ने चुटकी ली। चैताली ने अपनी हंसी को रोकते हुए कहा, "चलो छोड़ो यार, अब और ड्रिंक्स का ऑर्डर करते हैं।"
आर्यन ने तुरंत वेटर को इशारा किया और एक और राउंड ऑर्डर किया। जब ड्रिंक्स आए तो आर्यन ने खास तौर पर ध्यान दिया कि चैताली को डबल पेग मिले। "ये लो मैडम, आपके लिए स्पेशल," उसने मुस्कुराते हुए कहा। चैताली ने शराब का पहला घूँट लिया और सभी ने एक साथ अपने ड्रिंक्स पी लिए। अशोक ने तेजी से अपना पेग खत्म करते हुए कहा, "अब तो पार्टी और भी जोश में आ गई है।"
थोड़ी देर बाद राघव ने अपनी नाक सिकोड़ी, "यार हॉल में हवा बासी हो गई है। चलो बाहर बगीचे में चलते हैं।" चैताली ने सहमति में सिर हिलाया और वे सभी बाहर निकल पड़े। राघव और अशोक चैताली के दोनों तरफ से उसके हाथों को पकड़कर चलने लगे। आर्यन उनके पीछे-पीछे चल रहा था, उसकी नज़रें बार-बार चैताली की सुडौल कमर और उसकी साड़ी से झांकते हुए कर्व्स पर टिकी हुई थीं।
बाहर बगीचे में ताजी हवा का झोंका सभी के चेहरे पर महसूस हुआ। चाँदनी रात में बगीचे का नज़ारा और भी खूबसूरत लग रहा था। चैताली ने अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सा सहलाते हुए कहा, "कितनी अच्छी हवा चल रही है यार।" राघव ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "हाँ, लेकिन तुमसे ज्यादा खूबसूरत तो यहाँ कोई नहीं है।"
तभी अशोक ने अपना फोन निकाला, "चलो यार सेल्फी ले लेते हैं।" सभी ने पोज़ देना शुरू किया। राघव उसके बाईं ओर खड़ा होकर उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था, आर्यन दाईं ओर से उसकी कमर पर हाथ डाले हुए था, और अशोक सामने से फोन लेकर तस्वीरें खींच रहा था। कुछ तस्वीरें लेने के बाद बाकी लोगों ने भी अलग-अलग एंगल से तस्वीरें लेने की जिद की।
चैताली ने थोड़ी हिम्मत जुटाई और सबको कुछ सेक्सी पोज़ देने लगी। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सा हटाकर अपने कर्व्स को और भी ज्यादा उभार दिया। आर्यन ने उसकी तरफ देखकर कहा, "चैताली, तुम तो आज बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। थोड़ा और पोज़ दो ना।" चैताली ने शर्माते हुए कहा, "अरे यार, मैं क्या करूँ?" लेकिन फिर भी वह मान गई। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को और भी ज्यादा हटाकर अपने बड़े-बड़े स्तनों को दिखाया। सभी लोग उसके स्तनों की बनावट और आकार की तारीफ करने लगे। "वाह, क्या फिगर है!" राघव ने कहा। अशोक ने अपना फोन उठाकर और भी तस्वीरें लीं। चैताली ने थोड़ा और उत्तेजक पोज़ देते हुए कहा, "बस यार, अब और नहीं।"
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ऑफिस की वार्षिक पार्टी का माहौल गर्मजोशी से भरा हुआ था। डीजे के तेज संगीत पर कुछ लोग डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे तो कुछ बार काउंटर पर अपने पसंदीदा ड्रिंक्स के साथ गपशप में मशगूल थे। मुख्य हॉल का वातावरण उत्साह और मस्ती से सराबोर था। इसी हॉल के एक कोने में आर्यन, अशोक और राघव चैताली के वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। चैताली, जो उनकी लेडी मैनेजर थी, कुछ देर पहले वॉशरूम गई थी और अभी तक लौटी नहीं थी।
रात के करीब 11 बज चुके थे। पार्टी अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। हर तरफ हँसी-मजाक, गपशप और ड्रिंक्स का दौर चल रहा था। अशोक बेचैन होकर खड़ा हुआ, "यार चैताली को देखने जाऊँ क्या? इतनी देर से वॉशरूम में क्या कर रही है?" उसने पूछा। तभी अचानक हॉल के दरवाज़े से चैताली ने प्रवेश किया। वह उसी पारदर्शी नीली साड़ी में थी जो उसके सुडौल शरीर के कर्व्स को बखूबी उभार रही थी। स्लीवलेस ब्लाउज उसके कंधों और गर्दन को नंगा कर रहा था, जिससे उसकी त्वचा की सुनहरी चमक और भी ज़्यादा निखर आई थी।
शाम को पी गई व्हिस्की का नशा अब उतर चुका था, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वही चमक थी जो शराब पीने के बाद आती है। "अरे यार लोग! क्या चल रहा है?" चैताली ने मुस्कुराते हुए पूछा। सभी लोग तुरंत खड़े हो गए और उसका अभिवादन करने लगे। "अरे मैडम आ गईं! हम तो बेचैन हो रहे थे," राघव ने चुटकी ली। चैताली ने अपनी हंसी को रोकते हुए कहा, "चलो छोड़ो यार, अब और ड्रिंक्स का ऑर्डर करते हैं।"
आर्यन ने तुरंत वेटर को इशारा किया और एक और राउंड ऑर्डर किया। जब ड्रिंक्स आए तो आर्यन ने खास तौर पर ध्यान दिया कि चैताली को डबल पेग मिले। "ये लो मैडम, आपके लिए स्पेशल," उसने मुस्कुराते हुए कहा। चैताली ने शराब का पहला घूँट लिया और सभी ने एक साथ अपने ड्रिंक्स पी लिए। अशोक ने तेजी से अपना पेग खत्म करते हुए कहा, "अब तो पार्टी और भी जोश में आ गई है।"
थोड़ी देर बाद राघव ने अपनी नाक सिकोड़ी, "यार हॉल में हवा बासी हो गई है। चलो बाहर बगीचे में चलते हैं।" चैताली ने सहमति में सिर हिलाया और वे सभी बाहर निकल पड़े। राघव और अशोक चैताली के दोनों तरफ से उसके हाथों को पकड़कर चलने लगे। आर्यन उनके पीछे-पीछे चल रहा था, उसकी नज़रें बार-बार चैताली की सुडौल कमर और उसकी साड़ी से झांकते हुए कर्व्स पर टिकी हुई थीं।
बाहर बगीचे में ताजी हवा का झोंका सभी के चेहरे पर महसूस हुआ। चाँदनी रात में बगीचे का नज़ारा और भी खूबसूरत लग रहा था। चैताली ने अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सा सहलाते हुए कहा, "कितनी अच्छी हवा चल रही है यार।" राघव ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "हाँ, लेकिन तुमसे ज्यादा खूबसूरत तो यहाँ कोई नहीं है।"
तभी अशोक ने अपना फोन निकाला, "चलो यार सेल्फी ले लेते हैं।" सभी ने पोज़ देना शुरू किया। राघव उसके बाईं ओर खड़ा होकर उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था, आर्यन दाईं ओर से उसकी कमर पर हाथ डाले हुए था, और अशोक सामने से फोन लेकर तस्वीरें खींच रहा था। कुछ तस्वीरें लेने के बाद बाकी लोगों ने भी अलग-अलग एंगल से तस्वीरें लेने की जिद की।
चैताली ने थोड़ी हिम्मत जुटाई और सबको कुछ सेक्सी पोज़ देने लगी। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सा हटाकर अपने कर्व्स को और भी ज्यादा उभार दिया। आर्यन ने उसकी तरफ देखकर कहा, "चैताली, तुम तो आज बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। थोड़ा और पोज़ दो ना।" चैताली ने शर्माते हुए कहा, "अरे यार, मैं क्या करूँ?" लेकिन फिर भी वह मान गई। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को और भी ज्यादा हटाकर अपने बड़े-बड़े स्तनों को दिखाया। सभी लोग उसके स्तनों की बनावट और आकार की तारीफ करने लगे। "वाह, क्या फिगर है!" राघव ने कहा। अशोक ने अपना फोन उठाकर और भी तस्वीरें लीं। चैताली ने थोड़ा और उत्तेजक पोज़ देते हुए कहा, "बस यार, अब और नहीं।"
इसके बाद चारों वापस पार्टी हॉल में वापस चले गए।
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चैतली अपनी साड़ी के पल्लू को उंगलियों से मरोड़ रही थी, जबकि उसके कानों में अशोक, आर्यन और राघव की हंसी किसी भारी शोर की तरह गूंज रही थी। उनके शब्दों में सम्मान था, लेकिन उनकी नज़रों में एक ऐसी भूख थी जो चैतली को अंदर तक सिहरा रही थी—एक ऐसा डर जो उसे डरा नहीं रहा था, बल्कि उत्तेजित कर रहा था।
"मैम, आप आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हैं," राघव ने फुसफुसाते हुए कहा, और उसका हाथ गलती से—या शायद जानबूझकर—चैतली की कमर के निचले हिस्से को छू गया। वह स्पर्श बिजली की तरह उसकी रीढ़ की हड्डी से होता हुआ नीचे उतरा, जिससे उसके पेट के निचले हिस्से में एक हल्की सी ऐंठन हुई। चैतली ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उसकी जीभ भारी हो चुकी थी और उसका शरीर किसी नरम मोम की तरह पिघलकर सोफे में धंसता जा रहा था।
तभी कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और आसिफ खान अंदर दाखिल हुआ। असिग उन्ही के साथ कंपनी में काम करता था। उसकी चौड़ी छाती और कसरती बाहें उसके फिटेड सफेद शर्ट के बटन को चुनौती दे रही थीं, और उसकी गहरी, शिकारी नजरें कमरे में कदम रखते ही सीधे चैतली पर ठहर गईं। आसिफ की मौजूदगी ने कमरे के तापमान को अचानक बढ़ा दिया था; उसके चलने की आहट में एक ऐसा अधिकार था जिसने चैतली की सांसों की लय को पूरी तरह बिगाड़ दिया।
उसने अशोक और राघव की ओर एक संक्षिप्त, समझदारी भरी नजर डाली, जिससे बिना एक शब्द बोले यह तय हो गया कि वह भी इसी खेल का हिस्सा बनने आया है। जब वह चैतली के करीब आया, तो उसके महंगे परफ्यूम की तीखी खुशबू और उसके शरीर से निकलने वाली गर्मी ने चैतली को पूरी तरह घेर लिया, जिससे उसका सिर और भी ज्यादा घूमने लगा।
उसने झुककर चैतली के कान के ठीक पास फुसफुसाते हुए कहा, "पार्टी अभी तो शुरू हुई है, मैम," और उसकी गर्म सांसें चैतली की गर्दन की संवेदनशील त्वचा से टकराईं, जिससे उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। आसिफ का एक मजबूत हाथ धीरे से उसके कंधे पर टिका, जिसकी पकड़ में एक अजीब सा दबाव था—एक ऐसा दबाव जो उसे यह अहसास दिला रहा था कि अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। चैतली ने महसूस किया कि उसका दिल उसकी पसलियों के खिलाफ तेजी से धड़क रहा है, और उसके निचले हिस्से में एक भारीपन सा महसूस होने लगा।
तभी सन्नाटे को चीरते हुए आर्यन के फोन की तीखी रिंगटोन बजी। उसने झिझकते हुए फोन निकाला और स्क्रीन पर 'घर' लिखा देख उसका चेहरा एक पल के लिए तनावग्रस्त हो गया। "शिट, घर से कॉल है, मुझे अभी निकलना होगा," उसने अपनी टीम के साथियों की ओर एक अधूरी, हताश नजर डालते हुए कहा। उसके शब्दों में एक झुंझलाहट थी, क्योंकि वह उस चरम बिंदु पर था जहाँ उत्तेजना अपने शिखर पर थी, लेकिन पारिवारिक मजबूरी ने उसे इस शिकारी समूह से अलग कर दिया।
आर्यन के जाते ही कमरे की हवा और भी गाढ़ी और भारी हो गई। अब केवल तीन पुरुष और एक मदहोश महिला बची थी।
आसिफ ने अपने एक हाथ में ठंडे पानी से भरा हुआ एक लंबा गिलास पकड़ा हुआ था, जिसमें बर्फ के टुकड़े टकरा रहे थे। उसने चैताली की ओर बढ़ते हुए अपनी मुस्कुराहट को थोड़ा और चौड़ा करते हुए कहा, "मैडम, आप पिछले तीन घंटे से लगातार काम कर रही हैं। आपको थोड़ा ब्रेक लेना चाहिए। यह लीजिए, ताज़ा हो जाइए।" चैताली ने थकान भरी मुस्कुराहट के साथ गिलास को अपने हाथों में ले लिया। उसने गिलास को होंठों से लगाया और धीरे-धीरे पीना शुरू किया, बिना यह जानते हुए कि उनके पीछे खड़े उनके दो सहकर्मी एक-दूसरे की ओर मायावी नज़रों से देख रहे थे - उन्होंने चैताली के ड्रिंक में कुछ ऐसा मिला दिया था जो उनकी योजना का हिस्सा था।
कुछ ही मिनटों में, चैताली ने अपने सिर में एक अजीब सी भारीपन महसूस करना शुरू कर दिया। उनकी आँखों के सामने धुंधलापन छाने लगा, जैसे कोई धुंआ उनकी दृष्टि को ढक रहा हो। उन्होंने अपने कुर्सी के हत्थे को मजबूती से पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी उंगलियों में ताकत नहीं रह गई थी। "मुझे... मुझे बहुत चक्कर आ रहा है," उन्होंने धीमी, डगमगाती आवाज में कहा। उनके सहकर्मी तुरंत आगे बढ़े, उनके चेहरे पर चिंता का भाव नाटक करते हुए। "मैडम, क्या हुआ? आप ठीक तो हैं?" एक ने पूछा, जबकि दूसरा पहले से ही उनकी बाँह पकड़ चुका था। चैताली ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन उनकी जीभ लड़खड़ा गई। अंतिम बात जो उन्होंने देखी, वह थी उनके सहकर्मियों की चालाक मुस्कुराहट, इससे पहले कि अंधेरा उन्हें पूरी तरह से निगल लेता। वह बेहोश होकर गिरने ही वाली थीं कि उनके पीछे खड़े सहकर्मियों ने उन्हें सहारा देकर पकड़ लिया।
"जल्दी करो," एक ने फुसफुसाते हुए कहा, "कोई देख न ले।" उन्होंने चैताली के बेजान शरीर को सहारा देते हुए के एक सुनसान कोने की ओर देखा, जहाँ एक खाली मीटिंग रूम था। एक ने दरवाजा खोला जबकि दूसरा चैताली को उठाकर अंदर ले गया। दरवाजा धीरे से बंद हो गया, उनकी योजना का अगला चरण शुरू होने वाला था।
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Yesterday, 11:12 PM
(This post was last modified: Yesterday, 11:16 PM by MohdIqbal. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
आसिफ ने चैताली की कमर को मजबूती से पकड़ा और उसे धीरे से कमरे की तरफ धकेल दिया। वह थोड़ी लड़खड़ाती हुई आगे बढ़ी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। राघव ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। आसिफ ने चैताली को सोफे पर धीरे से लिटा दिया, उसकी साड़ी का पल्लू बिखर गया और उसका ब्लाउज थोड़ा खिसक गया, जिससे उसकी काली लेस वाली ब्रा साफ दिखाई देने लगी। ब्रा के कप्स उसके भरे हुए मम्मों को बाहर निकलने से रोक रहे थे, लेकिन उनका आकर्षक आकार स्पष्ट था।
तीनों लड़कों की नज़रें चैताली के शरीर पर टिक गईं। राघव का गला सूख गया, जबकि अशोक के हाथ कांपने लगे। आसिफ की आँखों में एक जंगली चमक थी, जैसे वह अभी उस पर झपट पड़ेगा। चैताली की छाती तेजी से उठ रही थी, उसकी नसें तन गई थीं। वे सभी उसके नरम, गर्म शरीर को छूने के लिए बेताब हो रहे थे, हर पल उनकी इच्छा और तीव्र होती जा रही थी।
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आसिफ की साँसें तेज हो चुकी थीं और उसकी उंगलियाँ चैताली के बेहोश शरीर पर धीरे-धीरे खिसक रही थीं। उसने चैताली की साड़ी के पल्लू को और ऊपर खींचा, जिससे उसकी कोमल जांघों का अधिकांश हिस्सा उजागर हो गया। हवा का ठंडा स्पर्श भी चैताली के शरीर को नहीं जगा सका, क्योंकि वह अभी भी गहरी बेहोशी में डूबी हुई थी।
आसिफ की नजरें अब चैताली के ब्लाउज पर टिक गईं, जो उसके उभरे हुए स्तनों को ढके हुए था। उसने धीरे से अपने हाथ ब्लाउज के ऊपर से चैताली के स्तनों पर रख दिए। वे नर्म और भरे हुए थे, जैसे पके हुए आमों की तरह मुलायम और गोल। आसिफ ने अपनी उंगलियों से उन्हें महसूस किया—हर दबाव के साथ चैताली के स्तन उसकी हथेलियों में समा जाते और फिर वापस अपनी जगह ले लेते।
चैताली की निप्पल्स, जो अब तक ब्लाउज और ब्रा की कैद में दबी हुई थीं, आसिफ के स्पर्श से और भी सख्त हो गईं। वे कपड़े के अंदर से ही स्पष्ट रूप से उभर आई थीं, जैसे छोटे-छोटे कंकड़ जो त्वचा के नीचे दबे हों। आसिफ ने अपने अंगूठे से उन्हें दबाया, पहले हल्के से, फिर धीरे-धीरे जोर देकर। उसने महसूस किया कि कैसे चैताली की निप्पल्स उसकी मर्जी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही थीं, जैसे वे उसके नियंत्रण में हों।
फिर उसने अपनी पूरी हथेली से चैताली के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी गोलाई को नापने लगीं, कभी हल्के से दबाते हुए, तो कभी जोर से मलते हुए। चैताली की साँसें, जो पहले धीमी और अनियमित थीं, अब और भी अधिक तेज हो गईं, जैसे उसका शरीर बेहोशी में भी आसिफ के स्पर्श को महसूस कर रहा हो।
आसिफ ने अपना सिर झुकाकर चैताली के कान के पास अपने होठों को रखा और धीमी आवाज में कुछ फुसफुसाया, हालांकि वह जानता था कि वह उसे सुन नहीं पाएगी। फिर भी, उसके शब्दों की गर्मी ने चैताली की त्वचा पर एक सिहरन पैदा कर दी। उसकी उंगलियाँ अब और भी अधिक दृढ़ता से चैताली के स्तनों पर चलने लगीं, जैसे वह उन्हें अपने नियंत्रण में पूरी तरह से लेना चाहता हो।
हर स्पर्श, हर दबाव, हर मसलने के साथ, आसिफ चैताली के शरीर को और भी अधिक अपना बना रहा था, जबकि वह अभी भी गहरी बेहोशी में डूबी हुई थी।
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