Yesterday, 05:00 PM
नमस्ते सभी पाठकों को। मैं चीकू (परिवर्तित नाम) आप सभी का स्वागत करता हूं अपनी जीवन की सबसे प्रिय कहानी में।
ये कहानी है मेरी ओर मेरी दोस्त सदफ ( परिवर्तित नाम) की । कहानी सत्य घटना पर आधारित है।
ये बात उस समय की है जब मैंने ग्रेजुएशन मैं प्रवेश लिया था तो कॉमर्स की तैयारी के लिए कोचिंग ज्वाइन की। मेरा व्यवहार शुरू से ही लड़कियों के प्रति काफ़ी उदासीन था किन्तु उस दिन वहां एक स्वर्ग से उतरी उस लड़की ने अपने कदम रखे जिसको देखते ही सारे लड़के उसको अपना बनाने के चक्कर मैं लग गये। उसका जिस्म का एक एक हिस्सा तराशा हुआ था 34-28-36 और रंग दूध से भी सफ़ेद। पहली नजर में वो मुझे अच्छी लगी थी पर मैने खुद को संयमित रखने के लिए उस पर ध्यान कम देना शुरू किया पर कमीनें दोस्तों के चक्कर में आकर कुछ दिनों मैं हमारे नंबर आपस मैं एक्सचेंज हो गये। धीरे-धीरे हम आपस में बातें करने लगे। हमे बाते करते हुए दो महीने बीत गए।
एक दिन मैं उससे मिलने गया। हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चल रहे थे कि मेरे दिमाग में उसको चूमने का विचार आया मैंने जैसे ही उसको एक सुनसान गली मैं ले गया तो उसने भी इस बात का अंदाज़ा लगा लिया कि मैं उसको क्यों ऐसी गली मैं लाया हूं मेरे एक बार कहने पर उसने मना किया पर मेरे पास आने पर उसने कुछ नहीं कहा और मैने उसके होठों को चूम लिया। मैं शब्दों में भी बयान नहीं कर सकता कि क्या फीलिंग थी । घर आकर मैंने उसके नाम पर मुट्ठी मारी। उस दिन के बाद से हमारे बीच सब बदल गया । मैं पंसारी की दुकान पर काम करता था दिन में वो रोज मुझसे मिलने आया करती थी। जब भी मौका मिलता दुकान के बने कमरे में मैं उसको चूम लेता था दिन में , हम अपनी कोचिंग की सीढ़ियों पर जब भी मौका मिलता एक दूसरे को जम कर चूमते थे।
धीरे धीरे हम कब सेक्स की बात करने लगे पता ही नहीं चला। एक दिन मेरे बहुत कहने पर उसने कोचिंग मैं अपनी चुन्नी उतार दी और मुझे उसकी चूचियों को छुने के लिए हामी भर दी। उसकी दूध जैसी गोरी चूचियों को देख कर मैं पागल हो गया और उसको वही दीवार के पास सटा जोर जोर से चूमने लगा हमारा पागल पन यही नहीं रुका मैने उसको सूट के ऊपर से ही चोदना शुरू कर दिया ना उसने मना किया न मैं रुका जब तक मैं झड़ नहीं गया। झड़ने के बाद अहसास हुआ कि जोश जोश मैं ये क्या कर दिया मैने उसके साथ। उसी शाम को मैने टेक्स्ट कर उसको आज के लिए माफी मांगी पर उसके कुछ न कहने पर मेरी हिम्मत बढ़ गई अब मैं उसको चोदने के सपने देखने लगा।
बातचीत का सिलिसला ऐसे ही चल रहा था कि एक दिन उसके लिए एक रिश्ता आया जैसे ही मैने ये सुना मुझे अंदाज़ा लग गया था कि यदि अब भी इसकी चूत नहीं मारी तो कभी नहीं। पर वो चुदने को तैयार ही नहीं हो रही थी।
मैने इमोशनल होकर मैसेज किया कि अब तो एक बार मुझे अपने जिस्म का दीदार करने दो मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं मुझे पता था कि आग दोनों तरफ लगी है पर उसने मुझे मना कर दिया। लेकिन हम जब भी मिलते वो मुझे अपनी चूचियों को मसलने ओर पीने देती थी।
ऐसे करते करते दो महीने बीत गए, हम जब भी मिलते खूब चूमते एक दूसरे को। इन दो महीने मे मैने उसकी चूचियों को दबा दबा कर 34 से 36 कर दिया था। हमे सेक्स चैट करते करते छः महीने से ज्यादा समय हो चुका था,लेकिन इन सब के बाद भी सदफ चुदने को तैयार नहीं थी फिर एक दिन मैने उसको घर पर बहाना बना कर मसूरी चलने को कहा, वो तैयार हो गई।
उसने घर पर पेपर देने जाने का बहाना बनाया और मैंने उसे सुबह चार बजे कार से पिक कर लिया।
काले सूट में वो उस दिन बवाल लग रही थी। हमने देहरादून पहुंच कर नाश्ता किया और आगे बढ़ गए। मसूरी पहुंच कर शाम घूमने में ही हो गई रात तक घर भी पहुंचना था । तो मैने सदफ़ को होटल बुक करने को बोला वो तैयार हो गई। मैंने जानपूछ कर उसके सामने ही मेडिकल स्टोर से कंडोम ओर वायग्रा लेकर आ गया। होटल जाते ही मैने सदफ को अपने आगोश मे ले लिया। मेरे होंठ सदफ के होंठों को चूम रहे थे वो भी खुल कर मेरा साथ दे रही थी। मेरे हाथ सदफ की कमर पर फिर रहे थे। करीब पांच मिनट तक चूमने के बाद हम अलग हुए। मेरा लन्ड जींस फाड़ने को तैयार था ये देख सदफ़ हंसने लगी और बोली इसे खड़े होने के अलावा कोई काम नहीं है क्या।
मैं भी भोला बनते हुए बोला जब तू इसको प्यार ही नहीं करती तो बता क्या करेगा ये बेचारा। और इतना कहकर मैने अपना लण्ङ उसके सामने निकाल दिया। फांफनाते हुए लन्ड को बाहर देखकर सदफ चौंक गई और बोली कितने गंदे हो तुम अंदर करो इसको। हाय अल्लाह कितना बड़ा है ये।
मैं भी मासूम बनते हुए बोला सिर्फ तुझे देखकर खड़ा होता है ये, वरना तो दिन भर सोया रहता है। एक पप्पी तो इसकी भी बनती हैं, सदफ गुस्सा होते हुए बोली पागल हो क्या तुम । पर उसके मुंह पर लिखा था कि वो करना चाहती हैं बस मना करने का दिखावा कर रही है।
मैने भी गुस्सा होने का नाटक करते हुए अपने लन्ड को अंदर कर लिया । ओर सदफ को अपनी तरफ खींच कर उसकी चूचियों को मसलने लगा।
उसकी सिसकारियां मुझे ओर उत्तेजित कर रही थी। मैने सदफ के सूट को उतार दिया और उसकी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। सदफ मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर मुझे मदद कर रही थी। पाँच मिनट तक उसको चूसने के बाद मेरे हाथ उसकी सलवार के नाडे को खोल रहे थे पर उसने हाथ हटा दिए।
मैं सदफ़ को चूमता चूमता बिस्तर पर ले गया और उसको लिटाकर चूमने लगा, मेरे होंठ उसके जिस्म को चूम रहे थे, उसकी गर्दन को चूमते चूमते मैने उसकी सलवार के नाडे को खोल दिया, और उसकी सलवार उतार दी।
उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था उसकी मखमली चूत देखकर में पागल हो गया , उसे पता था कि आज वो चुदेगी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैं पागलों की तरह उसकी चूत को चाटने लगा, सदफ का पूरा जिस्म कांप रहा था। करीब पांच मिनट बाद सदफ ने अपनी चूत पर मेरे सिर को दबा दिया, और झड़ गई। उसके नमकीन पानी को मैं पूरा चाट गया।
मैने भी देर नहीं करते हुए अपना लण्ङ निकाल उसकी चूत पर लगा दिया और एक झटका मारा, और मेरा लन्ड का सुपारा उसकी चूत में जा घुसा, उसकी चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू निकल आये।
मैने उसके माथे को चूमा और धीरे धीरे झटके लगाने लगा। लेकिन दो ही मिनट में उसने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और रोने लगी। मैं उसको मना रहा था कि अन्दर तक नहीं सिर्फ ऊपर ऊपर से करूँगा। लेकिन मन ही मन में मैं उसके अंदर पूरा समा जाना चाहता था। तीन महीनों से सिर्फ चूचियां ही चूस रहा था, और इतंजार करना मुश्किल था तो मैने उसको समझाते हुए कहा चल अच्छा नहीं कर रहा बस तुझे चूमूंगा। उसने हाँ में सिर हिलाया और बस मैने उसको अपनी बाहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया , मेरे होंठ उसके होंठों को चूम रहे थे, और मेरे हाथ उसकी कमर पर फिर रहे थे।
करीब पांच मिनट बाद मैने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके साथ लेट गया। उसकी चूचियां मेरे मुंह में थी जिसे मैं एक नवजात शिशु की तरह पीने में मस्त था। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी उसके मुँह से सिसकारियां माहौल बना रही थी। मैंने जानपूछ कर अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और हल्का सा मसल कर उसकी कमर पर रख दिया मेरी हरकत से सदफ तड़प उठी आह.... आह...।
उसने नाख़ून मेरी कमर में गाढ़ दिए, मैं रुका नहीं और उसके पेट पर अपने होंठों को रख दिया, और अपनी एक ऊंगली उसकी चूत में हल्की सी घुसा दी। उसके मुँह से हल्की सी आह निकली लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया । तो मैने भी उसकी दोनों टांगों को मोड़ कर उसके पेट से मिला दिया और अपने होंठों को उसकी चूत की फांकों पर रख दिया और अपनी जीभ उसकी चूत चाटने लगा सदफ का जिस्म पूरी तरह से कंपकपा रहा था।
इधर मैंने सदफ की चूत में अपनी जीभ घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा, सदफ की सिसकारियां मुझमें जोश भर रही थी। तभी सदफ़ बोली आह और जोर से करो ना । मैंने तुंरत एक ऊंगली उसकी चूत में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा, सदफ की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी मैने एक ऊंगली से कब दो ऊंगली उसकी चूत में घुसा दी थी उसे पता ही नहीं चला। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
मैने तीन उंगलियों को जैसे ही उसकी चूत में घुसाया वो उछल गई और बोली आ… आह… उम्म्म… आराम से… ।
मैने उसको घोड़ी बनने को बोला और उसकी चूत को चाटने लगा, और अपनी उंगलियों को उसकी चूत में घुसा दिया, सदफ को अब धीरे धीरे मज़ा आ रहा था। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया ओर मैने अपनी उँगलियों की जगह अपना लण्ङ का सुपारा उसकी चूत में घुसा दिया और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, सदफ को अभी तक कुछ पता नहीं लगा था। करीब दो मिनट तक में दो इंच लन्ड अंदर डाल उसको चोद रहा था। सदफ कहराते हुए बोली करते रहो बहुत अच्छा लग रहा हैं, बस आहिस्ता आहिस्ता करो आह... आह ...। कहते कहते उसका जिस्म अकड़ गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
मैंने भी देर नहीं करते हुए अपना लण्ङ सदफ की चूत में पूरा घुसा दिया , चूत गीली होने की वजह से जब तक सदफ संभालती पूरा लन्ड एक ही बार में चूत के अंदर समा गया। वो दर्द में तड़प रही थीं पर उसने इस बार मुझे मना नहीं किया । मैं लन्ड सदफ की चूत में अन्दर बाहर करने लगा । मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। थोड़ी देर में ही सदफ़ को मजा आने लगा था मेरे हर झटके पर सदफ को मजा आ रहा था। करीब पंद्रह मिनट तक सदफ की चूत में मैने अपना सारा वीर्य निकाल दिया। हमने फटाफट एक दूसरे को साफ किया और शॉवर लेकर होटल से चेकआउट कर दिया। हमे घर जल्दी जाना था पर हम दोनों ही तड़प रहे थे। एक बार की चुदाई ने हमें ठंडा करने की जगह और गर्म कर दिया था। मैने कार स्टार्ट की और हम वापस दिल्ली की तरफ चल दिये। शाम के सात बज चुके थे अभी घर पहुंचने में और दो घंटे थे सदफ़ अपनी अम्मी को नौ बजे तक पहुंचने का बोल चुकी थी।
हम दोनों ही भूखे भेड़ियों की तरह एक दूसरे को खाने के लिए तैयार थे। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया मैने कार को हाईवे पर किनारे लगाया और अपना लन्ड निकाल सदफ को चूसने के लिए बोला सदफ ने भी मना न करते हुए मेरे लण्ङ को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया ओर मैने कार स्टार्ट की और सुनसान जगह देखनी शुरू कर दी। सदफ समझ तो चुकी थी कि मैं क्या चाहता हूं पर फिर भी मैने उसको अपने प्लान के बारे में बताया, कि मैं सुनसान जगह पर कार रोकूंगा और हम दोनों जो भी खेत होगा उसमें चलेंगे और फटा फट सेक्स करके वापस अंदर आ जाएंगे। उसने मना करने की जगह बड़ी मासूमियत से पूछा सेफ तो होगा ना करना कही किसी ने देख लिया तो।
मैं जानता था कि तड़प वो भी रही है, तो मैंने उसको बड़े प्यार से समझाया कि चिन्ता ना ही करे सब देखकर यदि सेफ हुआ तो ही करेंगे वरना नहीं। ऐसा कहकर मैने उसकी चूचियों को दबा दिया और मुस्कुरा दिया। वो नखरे दिखाते हुए बोली ड्राइविंग पर ध्यान दो इधर उधर नहीं। करीब पांच मिनट बाद मेरठ टोल से पहले सारी स्ट्रीट लाइट ऑफ थी और एक साइड पूरे खेत ही थे।
मैने ध्यान से गाड़ी को साइड लगाया और जगह को अच्छे से देखने लगा, लगभग सभी लड़कों की जंगल में चुदाई करने की फैंटेसी होती है ओर इससे अच्छा मौका मुझे नहीं मिलने वाला था तो मैं गाड़ी लॉक कर मूतने के लिए खेत में घुस गया ओर जगह देखने लगा। खेत के आस पास कोई नहीं था और हाईवे भी नहीं नज़र आ रहा था ।
यह ही सबसे सही टाईम था तो मैने जाकर सदफ़ को खेत में चलने को बोला । उसके खेत में घुसते ही मैने सदफ को दबोच लिया और चूमने लगा अभी हमे हाईवे दिख रहा था इसलिए हमे और अन्दर जाना था। खेत की मिट्टी गीली थी इसलिए हमने अपने सारे कपड़े उतार दिए और गीली मिट्टी में ही सदफ़ को लिटा दिया और उसको चूमने लगा। मैने बिना समय बर्बाद किए अपना सात ईंच लंबा मूसल सदफ की चूत में घुसा दिया सदफ की चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए एक ही बार में आधा लन्ड उसकी चूत में घुस गया उसकी चीख किसी को न सुनाई दे इसलिए मैने उसके मुँह को दबा दिया था। थोड़ी ही देर में सदफ खुल कर लन्ड ले रही थी हम दोनों ही डरे हुए थे इसलिए दो ही मिनिट में हम दोनों ही झड़ गये । मैने तुंरत उसको घोड़ी बनाया और अपने लन्ड को मसल कर खड़ा करने लगा और पीछे से अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और सदफ की चूत को चोदने लगा सदफ जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी, की आधा किलोमीटर तक आवाज सुनाई दे वासना की आग में हम दोनों डूबे हुए थे। करीब पंद्रह मिनट तक चुदाई करने के बाद हमे किसी के आने की आहट हुए तो हमने फटा फट कपड़े पहने और गाड़ी में बैठकर दिल्ली की तरफ चल दिये।
ये कहानी है मेरी ओर मेरी दोस्त सदफ ( परिवर्तित नाम) की । कहानी सत्य घटना पर आधारित है।
ये बात उस समय की है जब मैंने ग्रेजुएशन मैं प्रवेश लिया था तो कॉमर्स की तैयारी के लिए कोचिंग ज्वाइन की। मेरा व्यवहार शुरू से ही लड़कियों के प्रति काफ़ी उदासीन था किन्तु उस दिन वहां एक स्वर्ग से उतरी उस लड़की ने अपने कदम रखे जिसको देखते ही सारे लड़के उसको अपना बनाने के चक्कर मैं लग गये। उसका जिस्म का एक एक हिस्सा तराशा हुआ था 34-28-36 और रंग दूध से भी सफ़ेद। पहली नजर में वो मुझे अच्छी लगी थी पर मैने खुद को संयमित रखने के लिए उस पर ध्यान कम देना शुरू किया पर कमीनें दोस्तों के चक्कर में आकर कुछ दिनों मैं हमारे नंबर आपस मैं एक्सचेंज हो गये। धीरे-धीरे हम आपस में बातें करने लगे। हमे बाते करते हुए दो महीने बीत गए।
एक दिन मैं उससे मिलने गया। हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चल रहे थे कि मेरे दिमाग में उसको चूमने का विचार आया मैंने जैसे ही उसको एक सुनसान गली मैं ले गया तो उसने भी इस बात का अंदाज़ा लगा लिया कि मैं उसको क्यों ऐसी गली मैं लाया हूं मेरे एक बार कहने पर उसने मना किया पर मेरे पास आने पर उसने कुछ नहीं कहा और मैने उसके होठों को चूम लिया। मैं शब्दों में भी बयान नहीं कर सकता कि क्या फीलिंग थी । घर आकर मैंने उसके नाम पर मुट्ठी मारी। उस दिन के बाद से हमारे बीच सब बदल गया । मैं पंसारी की दुकान पर काम करता था दिन में वो रोज मुझसे मिलने आया करती थी। जब भी मौका मिलता दुकान के बने कमरे में मैं उसको चूम लेता था दिन में , हम अपनी कोचिंग की सीढ़ियों पर जब भी मौका मिलता एक दूसरे को जम कर चूमते थे।
धीरे धीरे हम कब सेक्स की बात करने लगे पता ही नहीं चला। एक दिन मेरे बहुत कहने पर उसने कोचिंग मैं अपनी चुन्नी उतार दी और मुझे उसकी चूचियों को छुने के लिए हामी भर दी। उसकी दूध जैसी गोरी चूचियों को देख कर मैं पागल हो गया और उसको वही दीवार के पास सटा जोर जोर से चूमने लगा हमारा पागल पन यही नहीं रुका मैने उसको सूट के ऊपर से ही चोदना शुरू कर दिया ना उसने मना किया न मैं रुका जब तक मैं झड़ नहीं गया। झड़ने के बाद अहसास हुआ कि जोश जोश मैं ये क्या कर दिया मैने उसके साथ। उसी शाम को मैने टेक्स्ट कर उसको आज के लिए माफी मांगी पर उसके कुछ न कहने पर मेरी हिम्मत बढ़ गई अब मैं उसको चोदने के सपने देखने लगा।
बातचीत का सिलिसला ऐसे ही चल रहा था कि एक दिन उसके लिए एक रिश्ता आया जैसे ही मैने ये सुना मुझे अंदाज़ा लग गया था कि यदि अब भी इसकी चूत नहीं मारी तो कभी नहीं। पर वो चुदने को तैयार ही नहीं हो रही थी।
मैने इमोशनल होकर मैसेज किया कि अब तो एक बार मुझे अपने जिस्म का दीदार करने दो मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं मुझे पता था कि आग दोनों तरफ लगी है पर उसने मुझे मना कर दिया। लेकिन हम जब भी मिलते वो मुझे अपनी चूचियों को मसलने ओर पीने देती थी।
ऐसे करते करते दो महीने बीत गए, हम जब भी मिलते खूब चूमते एक दूसरे को। इन दो महीने मे मैने उसकी चूचियों को दबा दबा कर 34 से 36 कर दिया था। हमे सेक्स चैट करते करते छः महीने से ज्यादा समय हो चुका था,लेकिन इन सब के बाद भी सदफ चुदने को तैयार नहीं थी फिर एक दिन मैने उसको घर पर बहाना बना कर मसूरी चलने को कहा, वो तैयार हो गई।
उसने घर पर पेपर देने जाने का बहाना बनाया और मैंने उसे सुबह चार बजे कार से पिक कर लिया।
काले सूट में वो उस दिन बवाल लग रही थी। हमने देहरादून पहुंच कर नाश्ता किया और आगे बढ़ गए। मसूरी पहुंच कर शाम घूमने में ही हो गई रात तक घर भी पहुंचना था । तो मैने सदफ़ को होटल बुक करने को बोला वो तैयार हो गई। मैंने जानपूछ कर उसके सामने ही मेडिकल स्टोर से कंडोम ओर वायग्रा लेकर आ गया। होटल जाते ही मैने सदफ को अपने आगोश मे ले लिया। मेरे होंठ सदफ के होंठों को चूम रहे थे वो भी खुल कर मेरा साथ दे रही थी। मेरे हाथ सदफ की कमर पर फिर रहे थे। करीब पांच मिनट तक चूमने के बाद हम अलग हुए। मेरा लन्ड जींस फाड़ने को तैयार था ये देख सदफ़ हंसने लगी और बोली इसे खड़े होने के अलावा कोई काम नहीं है क्या।
मैं भी भोला बनते हुए बोला जब तू इसको प्यार ही नहीं करती तो बता क्या करेगा ये बेचारा। और इतना कहकर मैने अपना लण्ङ उसके सामने निकाल दिया। फांफनाते हुए लन्ड को बाहर देखकर सदफ चौंक गई और बोली कितने गंदे हो तुम अंदर करो इसको। हाय अल्लाह कितना बड़ा है ये।
मैं भी मासूम बनते हुए बोला सिर्फ तुझे देखकर खड़ा होता है ये, वरना तो दिन भर सोया रहता है। एक पप्पी तो इसकी भी बनती हैं, सदफ गुस्सा होते हुए बोली पागल हो क्या तुम । पर उसके मुंह पर लिखा था कि वो करना चाहती हैं बस मना करने का दिखावा कर रही है।
मैने भी गुस्सा होने का नाटक करते हुए अपने लन्ड को अंदर कर लिया । ओर सदफ को अपनी तरफ खींच कर उसकी चूचियों को मसलने लगा।
उसकी सिसकारियां मुझे ओर उत्तेजित कर रही थी। मैने सदफ के सूट को उतार दिया और उसकी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। सदफ मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर मुझे मदद कर रही थी। पाँच मिनट तक उसको चूसने के बाद मेरे हाथ उसकी सलवार के नाडे को खोल रहे थे पर उसने हाथ हटा दिए।
मैं सदफ़ को चूमता चूमता बिस्तर पर ले गया और उसको लिटाकर चूमने लगा, मेरे होंठ उसके जिस्म को चूम रहे थे, उसकी गर्दन को चूमते चूमते मैने उसकी सलवार के नाडे को खोल दिया, और उसकी सलवार उतार दी।
उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था उसकी मखमली चूत देखकर में पागल हो गया , उसे पता था कि आज वो चुदेगी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैं पागलों की तरह उसकी चूत को चाटने लगा, सदफ का पूरा जिस्म कांप रहा था। करीब पांच मिनट बाद सदफ ने अपनी चूत पर मेरे सिर को दबा दिया, और झड़ गई। उसके नमकीन पानी को मैं पूरा चाट गया।
मैने भी देर नहीं करते हुए अपना लण्ङ निकाल उसकी चूत पर लगा दिया और एक झटका मारा, और मेरा लन्ड का सुपारा उसकी चूत में जा घुसा, उसकी चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू निकल आये।
मैने उसके माथे को चूमा और धीरे धीरे झटके लगाने लगा। लेकिन दो ही मिनट में उसने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और रोने लगी। मैं उसको मना रहा था कि अन्दर तक नहीं सिर्फ ऊपर ऊपर से करूँगा। लेकिन मन ही मन में मैं उसके अंदर पूरा समा जाना चाहता था। तीन महीनों से सिर्फ चूचियां ही चूस रहा था, और इतंजार करना मुश्किल था तो मैने उसको समझाते हुए कहा चल अच्छा नहीं कर रहा बस तुझे चूमूंगा। उसने हाँ में सिर हिलाया और बस मैने उसको अपनी बाहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया , मेरे होंठ उसके होंठों को चूम रहे थे, और मेरे हाथ उसकी कमर पर फिर रहे थे।
करीब पांच मिनट बाद मैने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके साथ लेट गया। उसकी चूचियां मेरे मुंह में थी जिसे मैं एक नवजात शिशु की तरह पीने में मस्त था। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी उसके मुँह से सिसकारियां माहौल बना रही थी। मैंने जानपूछ कर अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और हल्का सा मसल कर उसकी कमर पर रख दिया मेरी हरकत से सदफ तड़प उठी आह.... आह...।
उसने नाख़ून मेरी कमर में गाढ़ दिए, मैं रुका नहीं और उसके पेट पर अपने होंठों को रख दिया, और अपनी एक ऊंगली उसकी चूत में हल्की सी घुसा दी। उसके मुँह से हल्की सी आह निकली लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया । तो मैने भी उसकी दोनों टांगों को मोड़ कर उसके पेट से मिला दिया और अपने होंठों को उसकी चूत की फांकों पर रख दिया और अपनी जीभ उसकी चूत चाटने लगा सदफ का जिस्म पूरी तरह से कंपकपा रहा था।
इधर मैंने सदफ की चूत में अपनी जीभ घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा, सदफ की सिसकारियां मुझमें जोश भर रही थी। तभी सदफ़ बोली आह और जोर से करो ना । मैंने तुंरत एक ऊंगली उसकी चूत में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा, सदफ की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी मैने एक ऊंगली से कब दो ऊंगली उसकी चूत में घुसा दी थी उसे पता ही नहीं चला। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी।
मैने तीन उंगलियों को जैसे ही उसकी चूत में घुसाया वो उछल गई और बोली आ… आह… उम्म्म… आराम से… ।
मैने उसको घोड़ी बनने को बोला और उसकी चूत को चाटने लगा, और अपनी उंगलियों को उसकी चूत में घुसा दिया, सदफ को अब धीरे धीरे मज़ा आ रहा था। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया ओर मैने अपनी उँगलियों की जगह अपना लण्ङ का सुपारा उसकी चूत में घुसा दिया और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, सदफ को अभी तक कुछ पता नहीं लगा था। करीब दो मिनट तक में दो इंच लन्ड अंदर डाल उसको चोद रहा था। सदफ कहराते हुए बोली करते रहो बहुत अच्छा लग रहा हैं, बस आहिस्ता आहिस्ता करो आह... आह ...। कहते कहते उसका जिस्म अकड़ गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
मैंने भी देर नहीं करते हुए अपना लण्ङ सदफ की चूत में पूरा घुसा दिया , चूत गीली होने की वजह से जब तक सदफ संभालती पूरा लन्ड एक ही बार में चूत के अंदर समा गया। वो दर्द में तड़प रही थीं पर उसने इस बार मुझे मना नहीं किया । मैं लन्ड सदफ की चूत में अन्दर बाहर करने लगा । मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। थोड़ी देर में ही सदफ़ को मजा आने लगा था मेरे हर झटके पर सदफ को मजा आ रहा था। करीब पंद्रह मिनट तक सदफ की चूत में मैने अपना सारा वीर्य निकाल दिया। हमने फटाफट एक दूसरे को साफ किया और शॉवर लेकर होटल से चेकआउट कर दिया। हमे घर जल्दी जाना था पर हम दोनों ही तड़प रहे थे। एक बार की चुदाई ने हमें ठंडा करने की जगह और गर्म कर दिया था। मैने कार स्टार्ट की और हम वापस दिल्ली की तरफ चल दिये। शाम के सात बज चुके थे अभी घर पहुंचने में और दो घंटे थे सदफ़ अपनी अम्मी को नौ बजे तक पहुंचने का बोल चुकी थी।
हम दोनों ही भूखे भेड़ियों की तरह एक दूसरे को खाने के लिए तैयार थे। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया मैने कार को हाईवे पर किनारे लगाया और अपना लन्ड निकाल सदफ को चूसने के लिए बोला सदफ ने भी मना न करते हुए मेरे लण्ङ को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया ओर मैने कार स्टार्ट की और सुनसान जगह देखनी शुरू कर दी। सदफ समझ तो चुकी थी कि मैं क्या चाहता हूं पर फिर भी मैने उसको अपने प्लान के बारे में बताया, कि मैं सुनसान जगह पर कार रोकूंगा और हम दोनों जो भी खेत होगा उसमें चलेंगे और फटा फट सेक्स करके वापस अंदर आ जाएंगे। उसने मना करने की जगह बड़ी मासूमियत से पूछा सेफ तो होगा ना करना कही किसी ने देख लिया तो।
मैं जानता था कि तड़प वो भी रही है, तो मैंने उसको बड़े प्यार से समझाया कि चिन्ता ना ही करे सब देखकर यदि सेफ हुआ तो ही करेंगे वरना नहीं। ऐसा कहकर मैने उसकी चूचियों को दबा दिया और मुस्कुरा दिया। वो नखरे दिखाते हुए बोली ड्राइविंग पर ध्यान दो इधर उधर नहीं। करीब पांच मिनट बाद मेरठ टोल से पहले सारी स्ट्रीट लाइट ऑफ थी और एक साइड पूरे खेत ही थे।
मैने ध्यान से गाड़ी को साइड लगाया और जगह को अच्छे से देखने लगा, लगभग सभी लड़कों की जंगल में चुदाई करने की फैंटेसी होती है ओर इससे अच्छा मौका मुझे नहीं मिलने वाला था तो मैं गाड़ी लॉक कर मूतने के लिए खेत में घुस गया ओर जगह देखने लगा। खेत के आस पास कोई नहीं था और हाईवे भी नहीं नज़र आ रहा था ।
यह ही सबसे सही टाईम था तो मैने जाकर सदफ़ को खेत में चलने को बोला । उसके खेत में घुसते ही मैने सदफ को दबोच लिया और चूमने लगा अभी हमे हाईवे दिख रहा था इसलिए हमे और अन्दर जाना था। खेत की मिट्टी गीली थी इसलिए हमने अपने सारे कपड़े उतार दिए और गीली मिट्टी में ही सदफ़ को लिटा दिया और उसको चूमने लगा। मैने बिना समय बर्बाद किए अपना सात ईंच लंबा मूसल सदफ की चूत में घुसा दिया सदफ की चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए एक ही बार में आधा लन्ड उसकी चूत में घुस गया उसकी चीख किसी को न सुनाई दे इसलिए मैने उसके मुँह को दबा दिया था। थोड़ी ही देर में सदफ खुल कर लन्ड ले रही थी हम दोनों ही डरे हुए थे इसलिए दो ही मिनिट में हम दोनों ही झड़ गये । मैने तुंरत उसको घोड़ी बनाया और अपने लन्ड को मसल कर खड़ा करने लगा और पीछे से अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और सदफ की चूत को चोदने लगा सदफ जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी, की आधा किलोमीटर तक आवाज सुनाई दे वासना की आग में हम दोनों डूबे हुए थे। करीब पंद्रह मिनट तक चुदाई करने के बाद हमे किसी के आने की आहट हुए तो हमने फटा फट कपड़े पहने और गाड़ी में बैठकर दिल्ली की तरफ चल दिये।


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