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15-01-2026, 01:48 PM
(This post was last modified: 23-05-2026, 01:11 PM by razaraj2. Edited 7 times in total. Edited 7 times in total.)
Ye Story Ayesha ki hai jo ki ek conservative begum hai or uska jivan naukri karne k bad kaise badla wo aapko is story m pata chalega
1: नज़रों का पहला टकराव
अहमदाबाद की पुरानी हवेलियों और नई अपार्टमेंट्स के बीच बसा एक मोहल्ला था – जहां सुबह की अजान और शाम की घंटियां एक साथ गूंजती थीं। इसी मोहल्ले में एक छोटे से तीन कमरों वाले घर में रहती थी आयशा खान। उम्र 28 साल। गोरी चिट्टी रंगत, बड़ी-बड़ी काली आंखें जो के नीचे से भी चमकतीं, लंबे घने बाल जो हमेशा दुपट्टे या में छिपे रहते।
उसकी मुस्कान ऐसी थी कि पड़ोस की औरतें कहतीं, "आयशा की हंसी सुनकर दिल खुश हो जाता है।"लेकिन आयशा का दिल खुद खुश नहीं था।पांच साल पहले उसकी शादी इरफ़ान से हुई थी। इरफ़ान अच्छा इंसान था –
कंपनी में अच्छी पोस्ट, पांच वक्त की घर लौटकर आयशा से बात करता, कभी-कभी हाथ पकड़कर कहता, "तू मेरी ज़िंदगी है।" लेकिन वो प्यार जो रातों को नींद उड़ा दे, जो छूने पर शरीर में बिजली दौड़ा दे, वो कहीं गायब था।
इरफ़ान की ज़िंदगी एक रूटीन थी – सुबह ऑफिस, शाम घर, वीकेंड पर फैमिली विजिट। सेक्स भी वैसा ही था – हफ्ते में एक बार, अंधेरे में, जल्दी-जल्दी, बिना किसी बातचीत के। आयशा सोचती, "शायद यही शादी है। सब यही जीते हैं।"फिर भी उसके मन में एक खालीपन था।
वो 28 की थी – जवान, खूबसूरत, और महसूस करने की चाहत से भरी हुई। लेकिन वो चाहत कहीं दब गई थी।उसकी दो सबसे करीबी सहेलियां थीं – फातिमा और ज़ारा।
फातिमा – 29 साल, कॉलेज टीचर, शादीशुदा, लेकिन बच्चे नहीं। वो हमेशा आयशा को कहती, "तू इतनी खूबसूरत है आयशा, क्यों खुद को इतना बंद रखती है? ज़िंदगी एक बार मिलती है।"
ज़ारा – 27 साल, फैशन डिज़ाइनर, अनमैरिड, सबसे बोल्ड। वो कहती, "अगर दिल किसी पर लग जाए तो रोकना नहीं। मैं तो रोकूंगी नहीं।"
दोनों आयशा की सहेलियां जानती थीं कि आयशा के अंदर कुछ कमी है, लेकिन वो कभी ज़्यादा नहीं पूछतीं।
बस साथ देतीं।एक सामान्य दोपहर थी। तीनों ने फैसला किया कि आज पुराने कैफे की बजाय कुछ नया ट्राई करेंगे। ज़ारा ने सजेस्ट किया, "चलो 'The Brew Corner' चलते हैं। वो नया कैफे है, मिक्स्ड क्राउड आता है, म्यूजिक भी अच्छा चलता है।"
आयशा हिचकिचाई। "मिक्स्ड क्राउड? अच्छा रहेगा?"
फातिमा ने हंसकर कहा, "अरे, बस कॉफी पीने जा रहे हैं। क्या डर रही है?"
आयशा ने हां कहा। उसने काला पहना, नीचे सफेद कुर्ता और हल्की टाइट सलवार। वो जानती थी कि उसके कर्व्स हल्के से दिखते हैं, लेकिन वो खुद को कवर करके रखती थी।कैफे पहुंचते ही माहौल अलग था।
हल्का म्यूजिक, कॉफी की खुशबू, और लोग-लड़कियां सब मिक्स। तीनों ने एक कोने की टेबल पकड़ी।उसी कैफे के आयशा घर लौटी, उसके कदम भारी थे। अमेरिका की ट्रिप की बात अब तय हो चुकी थी
कोने में बैठा था राहुल शर्मा। 32 साल का राहुल – लंबा, चौड़ी छाती, अच्छा चेहरा, हल्की दाढ़ी। वो बिज़नेसमैन था, इवेंट मैनेजमेंट की कंपनी चलाता था।
साथ में उसके दोस्त थे – अजय (हमेशा पार्टी प्लान करने वाला), नीता (जर्नलिस्ट, बहुत बातूनी), और सोनिया (नीता की सहेली, फ्लर्टी टाइप)।अजय ने अचानक कोहनी मारी। "भाई, वो देख... वो लड़की में। क्या कमाल है!"
राहुल ने अनमने ढंग से मुड़कर देखा। और फिर... उसकी नज़र ठहर गई।
आयशा उस वक्त फातिमा से कुछ कह रही थी और हंस पड़ी। उसकी आंखें चमकीं। राहुल को लगा जैसे कोई करंट लगा हो। वो खुद को रोक नहीं पाया। उसकी आंखें आयशा पर अटक गईं।और ठीक उसी पल आयशा ने भी मुड़कर देखा। उनकी नज़रें मिलीं।
बस एक सेकंड।
लेकिन उस एक सेकंड में वक्त रुक गया।
आयशा की सांस थम गई। उसने जल्दी नज़रें हटा लीं, लेकिन दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
राहुल ने भी नज़रें नहीं हटाईं। वो सोच रहा था, "ये कौन है? इतनी खूबसूरत... और वो नज़र..."राहुल ने बहाना बनाया। "अरे, मेरे दोस्तों का ग्रुप बड़ा है, जगह कम पड़ रही है। चलो उस तरफ चलते हैं।" वो धीरे-धीरे आयशा वाली टेबल के पास पहुंचा।
"एक्सक्यूज़ मी," उसने मुस्कुराकर कहा, "क्या ये सीट खाली है? हम थोड़ा एडजस्ट कर लें?"ज़ारा ने तुरंत मुस्कुराकर कहा, "बिलकुल भाई, बैठ जाइए।"
फातिमा ने आयशा की तरफ देखा और आंख मारी। आयशा शरमा गई।राहुल बैठ गया। "हाय, मैं राहुल शर्मा। इवेंट प्लानर हूं।
"
आयशा ने हल्के से सिर झुकाकर कहा, "आयशा... खान।"
बातें शुरू हुईं – पहले साधारण। मौसम, कैफे का म्यूजिक, शहर की ट्रैफिक।
फिर धीरे-धीरे। राहुल ने पूछा, "आप लोग यहां पहली बार?"
ज़ारा ने हंसकर कहा, "हां, आज ट्राई कर रहे हैं। आयशा को बाहर कम निकलने देते हैं लोग।"
आयशा ने शरमाते हुए कहा, "ऐसा नहीं है..."राहुल की नज़रें बार-बार आयशा पर जा रही थीं। वो देख रहा था कैसे आयशा ठीक करती है, कैसे उंगलियां कॉफी कप पर रखती है।
आयशा को भी महसूस हो रहा था – ये नज़रें अलग हैं। गहरी हैं।नीता और सोनिया दूर से देख रही थीं। नीता ने अजय से कहा, "लगता है राहुल को कोई पसंद आ गई।"
अजय हंसा, "अरे, इंटरफेथ लग रहा है। मज़ा आएगा।"करीब आधा घंटा बात हुई। फिर राहुल उठा। "अच्छा लगा मिलकर। शायद फिर मिलें।"
उसने सबको गुडबाय कहा, लेकिन आखिरी नज़र आयशा पर ठहरी।
आयशा ने भी देखा। दिल फिर धड़का।घर लौटते वक्त आयशा चुप थी। फातिमा ने पूछा, "क्या हुआ? चुप क्यों है?"
आयशा ने कहा, "कुछ नहीं... बस..."
रात को बिस्तर पर लेटी वो सोच रही थी। राहुल का चेहरा आंखों के सामने। उसकी मुस्कान। उसकी आवाज़।
इरफ़ान सो रहा था। आयशा ने आंखें बंद कीं। लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
उसके मन में पहली बार किसी गैर-मर्द की तस्वीर इतनी साफ थी।और वो नहीं जानती थी कि ये सिर्फ शुरुआत है।
भाग 2: रात की बेचैनी और अधूरी तड़प
रात के करीब 11 बजे थे। आयशा बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद कहीं दूर भाग गई थी।
इरफ़ान उसके बगल में सो रहा था – उसकी सांसें नियमित, शांत, जैसे हर रात होती हैं। कमरे में सिर्फ़ पंखे की हल्की आवाज़ और बाहर से आती गाड़ियों की दूर की गूंज।
आयशा ने करवट बदली, लेकिन उसका मन कैफ़े की उस शाम में अटका हुआ था। राहुल... वो नाम बार-बार उसके दिमाग में घूम रहा था।वो सोचने लगी – राहुल की वो मुस्कान, वो गहरी आंखें जो उस पर ठहर गई थीं। "कितना कॉन्फिडेंट था वो... और वो तरीका बात करने का, जैसे वो मुझे जानता हो।"
आयशा की सांसें थोड़ी तेज़ हो गईं। वो कल्पना करने लगी – अगर वो फिर मिले तो क्या होगा? क्या वो उसका हाथ पकड़ेगा? क्या वो उसे गले लगाएगा? उसके मन में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई। उसके शरीर में गर्मी फैलने लगी, जैसे कोई आग सुलग रही हो।
Ayesha ने आंखें बंद कीं और राहुल की छवि को और गहरा किया। वो सोच रही थी, "उसकी छाती कितनी चौड़ी होगी... उसके हाथ कितने मजबूत। अगर वो मुझे छुए तो..." उसकी पाकीज़ा चूत में हल्की सी नमी महसूस हुई। वो बेचैन हो गई। इरफ़ान सो रहा था
, लेकिन आयशा का शरीर अब जग चुका था। वो धीरे-धीरे अपने कपड़ों पर हाथ फेरने लगी। पहले कुर्ते पर, जो उसके गोल-मटोल स्तनों को ढक रहा था। उसके स्तन – करीब 34C साइज़ के, मुलायम, गोल, गुलाबी निप्पल्स जो अब सख्त हो रहे थे।
वो उठकर बैठ गई, कमरे की लाइट बंद थी, सिर्फ़ बाहर से आती स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी। आयशा ने धीरे से अपना कुर्ता ऊपर किया और निकाल दिया। उसके नीचे ब्रा नहीं थी – घर पर वो अक्सर फ्री रहती। उसके स्तन आज़ाद हो गए, हल्की ठंडी हवा से निप्पल्स और सख्त हो गए।
वो अपने स्तनों पर हाथ फेरने लगी, धीरे-धीरे मसलते हुए। "ओह... राहुल," वो मन ही मन बड़बड़ाई। उसकी सांसें तेज़ हो गईं। फिर वो सलवार की नाड़ी खोलने लगी। धीरे-धीरे सलवार नीचे सरकाई, और उसे बिस्तर के किनारे फेंक दिया। अब वो पूरी नंगी थी –
उसका जवान जिस्म, गोरा रंग, पतली कमर (करीब 28 इंच), चौड़ी हिप्स (36 इंच), और वो पाकीज़ा चूत जो साफ-शेव्ड थी, गुलाबी, और अब गीली हो चुकी थी। उसके पैर लंबे, जांघें मुलायम, और वो जगह जहां अब आग लगी हुई थी।आयशा ने अपनी पाकीज़ा चूत पर हाथ रखा – गर्म, नम।
वो उंगली से क्लिटोरिस को सहलाने लगी, लेकिन रोक ली। "नहीं... ये गलत है," वो सोची, लेकिन तड़प बढ़ रही थी। वो इरफ़ान की तरफ मुड़ी। "शायद वो... वो मुझे संतुष्ट कर दे।"
वो धीरे से इरफ़ान को हिलाया। "इरफ़ान... जागो ना।"इरफ़ान आंखें मलते हुए उठा। "क्या हुआ आयशा?
नींद नहीं आ रही?" उसने पूछा, अभी भी आधा सोते हुए। आयशा ने उसे गले लगा लिया, उसके नंगे शरीर से इरफ़ान का शरीर छुआ। इरफ़ान चौंका, लेकिन मुस्कुराया। "ओह... आज मूड है?"
उसने कहा और आयशा को किस किया। आयशा ने जवाब दिया, लेकिन उसके मन में राहुल था। इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा। उसका लंड – होने की वजह से कटे हुए, – करीब 5 इंच लंबा, औसत मोटाई, सख्त हो रहा था। आयशा ने उसे हाथ में लिया, सहलाया, लेकिन तुलना करने लगी – "राहुल का कितना बड़ा होगा?
"इरफ़ान आयशा के ऊपर आ गया। उसने आयशा के स्तनों को मसला – ज़ोर से, लेकिन बिना पैशन के। आयशा मोअन की, "आह... इरफ़ान..." लेकिन वो नकली था।
इरफ़ान ने अपना लंड आयशा की पाकीज़ा चूत पर रगड़ा – वो पहले से गीली थी, राहुल की सोच से। फिर धक्का मारा – अंदर घुस गया। आयशा की चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से ले लिया। इरफ़ान ने धक्के शुरू किए –
पहले धीरे, फिर तेज़। आयशा की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी, उसके स्तन उछल रहे थे। वो सोच रही थी, "और जोर से... जैसे राहुल करेगा।"चुदाई शुरू हुई – इरफ़ान का लंड अंदर-बाहर, आयशा की मोअन्स कमरे में गूंज रही थीं।
"ओह इरफ़ान... हां..." लेकिन इरफ़ान का स्टैमिना कम था। धक्के तेज़ हुए, लेकिन सिर्फ़ 5 मिनट बाद वो सांस फूलने लगा। आयशा की पाकीज़ा चूत अभी गर्म थी, वो ऑर्गेज्म के करीब भी नहीं पहुंची थी। इरफ़ान ने ज़ोर से धक्का मारा, "आह... आयशा!" और 10 मिनट में ही झड़ गया –
उसका गर्म सीमेन आयशा के अंदर। वो थककर आयशा के बगल में लेट गया, सांस लेते हुए। "अच्छा था ना?" उसने पूछा।आयशा ने हां कहा, लेकिन अंदर से वो प्यासी रह गई। उसकी चूत अभी भी गीली थी, तड़प रही थी।
वो उठी, बाथरूम गई, खुद को साफ किया। आईने में देखा – उसका जिस्म अभी भी गर्म, निप्पल्स सख्त। "ये क्या कर रही हूं? राहुल की वजह से..." वो सोच रही थी। लेकिन अब वो तड़प और बढ़ गई थी।
रात भर वो जागती रही, राहुल के बारे में सोचते हुए।सुबह होने वाली थी, लेकिन आयशा का दिल अब बदल चुका था। वो जानती थी, ये सिर्फ शुरुआत है।
सुबह की पहली किरण कमरे में घुसी, लेकिन आयशा की आंखें पहले से खुली थीं। रात की वो बेचैनी अब एक भारी बोझ बन चुकी थी। वो बिस्तर पर बैठी, चादर से खुद को ढके, खुद से सवाल कर रही थी। "मैं कैसे एक गैर मर्द के बारे में ऐसा सोच सकती हूं? वो भी ... राहुल।
मैं शादीशुदा हूं, ये सब गलत है। मुझे माफ़ करे, मैंने खुद को इतना गिरा दिया।" गिल्ट की तेज़ लहर उसके सीने में उठी। आंसू उसके गालों पर बहने लगे। "कैसे मैं इरफ़ान के साथ रहते हुए किसी और के बारे में... वो भी ऐसे विचार।"आयशा ने फैसला किया कि अब बस। वो उठी, वुज़ू किया, और की चादर बिछाई। पढ़ते हुए वो बार-बार तौबा मांग रही थी। ", मुझे माफ़ कर दो। मैंने गलत सोचा, गलत महसूस किया। मुझे अपनी सही राह पर रखो, मुझे कमज़ोर मत होने दो।" वो बार-बार कर रही थी – "... ।" * खत्म होने के बाद वो थोड़ा शांत हुई।
"अब कभी राहुल के बारे में नहीं सोचूंगी। ये सब खत्म।" लेकिन दिल की गहराई में वो जानती थी कि ये इतना आसान नहीं।अब अगले दिन की रूटीन में लग जाना था। आयशा ने खुद को व्यस्त रखने का फैसला किया। सुबह 7:30 बजे वो किचन में पहुंची। इरफ़ान अभी सो रहा था। वो चाय बनाई – दो कप, एक उसके लिए, एक इरफ़ान के लिए। चाय उबालते हुए उसका मन पैरासान हो गया। "राहुल की मुस्कान... वो कैफ़े में कैसे देख रहा था।" वो चम्मच जोर से हिलाने लगी, लेकिन खयाल नहीं गया।
"नहीं, *!" वो खुद को डांटी और इरफ़ान को जगाने गई। "उठो, चाय तैयार है।" इरफ़ान उठा, उसे किस किया, लेकिन आयशा ने नज़रें झुका लीं।8 बजे इरफ़ान नाश्ता करके ऑफिस निकल गया।
आयशा अकेली रह गई। वो घर की सफ़ाई शुरू की – पहले बेडरूम से। बिस्तर ठीक करते हुए रात की याद आई। "राहुल अगर यहां होता तो..." वो रुक गई, सिर झटका। "पागल हो गई?" फिर वो झाड़ू लगाने लगी, हर कमरे में। लिविंग रूम में सोफा साफ करते हुए बार-बार ध्यान राहुल की तरफ गया।
"उसकी आवाज़... इतनी गहरी। क्या वो भी मेरे बारे में सोचता होगा?" मन पैरासान था, लेकिन वो जोर से झाड़ू चलाती रही।9:30 बजे वो कपड़े धोने लगी। वॉशिंग मशीन में कपड़े डालते हुए, पानी की आवाज़ में भी राहुल का नाम गूंज रहा था। "राहुल शर्मा... *, लेकिन इतना आकर्षक।"
वो मशीन चला दी और बालकनी में गई, जहां से शहर की गलियां दिखती थीं। "शायद वो कहीं इसी शहर में है।" खयाल आया, और वो वापस अंदर भागी। "बस कर आयशा, इरफ़ान तेरा पति है।"10:30 बजे खाना बनाने का वक्त। वो सब्जियां काटने लगी – आलू, टमाटर, प्याज़। चाकू चलाते हुए उंगली पर छोटा कट लग गया। "ओह!" खून देखकर राहुल का खयाल – "वो पट्टी बांधता।"
वो हंस पड़ी, फिर गिल्ट हुआ। "******, मुझे माफ़ करो!" वो नेक्स्ट आधा घंटा चिकन करी बनाती रही – मसाले डालते, हिलाते। लेकिन हर बार चम्मच हिलाने पर राहुल। "क्या वो मुझे मैसेज करेगा?" मन पैरासान था, सिर दर्द होने लगा। दोपहर 12 बजे वो नहाने गई। शावर के नीचे, पानी उसके जिस्म पर गिर रहा था। स्तनों पर साबुन लगाते हुए रात की तड़प याद आई।
"राहुल का स्पर्श..." वो रुक गई, पानी बंद किया। "नहीं!"1 बजे लंच किया – अकेले, टीवी पर न्यूज़ लगाया, लेकिन ध्यान नहीं। शाम 3 बजे वो सहेलियों से बात करने का फैसला किया। फोन लगाया फातिमा को। "आओ घर, बात करनी है। ज़ारा को भी बुला ले।" आधे घंटे बाद दोनों आईं। चाय बनाई, बिस्किट रखे। आयशा ने सब बता दिया – गिल्ट, *****, पैरासान मन, बार-बार राहुल के खयाल। "मैं कैसे ऐसा सोच सकती हूं?
ये गुनाह है।"फातिमा और ज़ारा ने पहले गंभीरता से सुना, फिर मज़ा लेना शुरू किया। ज़ारा हंस पड़ी, "अरे वाह, भाभी! तू तो राहुल के जाल में फंस गई। वो कितना हैंडसम था ना? उसकी आंखें... अगर मैं होती तो ज़रूर फ्लर्ट करती।"
फातिमा ने उकसाया, "हां आयशा, थोड़ा मज़ा ले ले। इरफ़ान अच्छा है, लेकिन तू हमेशा घर में क्यों कैद? बाहर निकल, नौकरी कर। नए लोग मिलेंगे, राहुल जैसा कोई मिल जाए तो क्या बात!" ज़ारा ने जोड़ा, "हां, नौकरी कर ले। तू पढ़ी-लिखी है, फैशन स्टोर में या कॉलेज में। घर से बाहर निकलेगी तो ऐसे खयाल आएंगे, लेकिन मज़ेदार होंगे।
राहुल से मिलने का चांस भी मिलेगा!"आयशा ने कहा, "नहीं, मैं नहीं करूंगी।" लेकिन सहेलियों की बातें उसके मन में घर कर गईं। "नौकरी... बाहर निकलना... राहुल से मिलना।
" शाम हो गई, सहेलियां चली गईं। आयशा ने इरफ़ान के लिए डिनर तैयार किया, लेकिन मन में नौकरी का खयाल घूम रहा था। गिल्ट कम हुआ, लेकिन उत्सुकता बढ़ गई। अब वो सोच रही थी, "शायद नौकरी करके ज़िंदगी बदल जाए।"
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15-01-2026, 06:58 PM
(This post was last modified: 23-05-2026, 01:08 PM by razaraj2. Edited 5 times in total. Edited 5 times in total.)
अनुमति की जंग और रात की आग
Sham का वक्त था, सूरज डूब चुका था और घर में हल्की-हल्की रोशनी जल रही थी। आयशा किचन में खड़ी थी, रोटियां सेंक रही थी। गर्म तवे पर रोटी रखते हुए उसकी उंगलियां थोड़ी जल रही थीं, लेकिन उसका मन कहीं और था। सहेलियों की बातें उसके कानों में गूंज रही थीं
नौकरी कर ले, बाहर निकल, नए लोग मिलेंगे।" वो सोच रही थी, "हां, मैं क्यों हमेशा घर की चार दीवारों में कैद रहूं? मैं भी पढ़ी-लिखी हूं, कुछ कर सकती हूं। बोरियत से तो मर ही जाती हूं रोज।" लेकिन इरफ़ान को मनाना आसान नहीं था।
वो जानती थी कि इरफ़ान पुराने ख्यालात का आदमी है – औरत घर संभाले, बाहर की दुनिया मर्दों के लिए। फिर भी, आयशा ने फैसला कर लिया था कि आज बात करेगी।इरफ़ान घर लौटा, उसके कंधे झुके हुए थे, ऑफिस की थकान चेहरे पर साफ दिख रही थी। वो सोफे पर बैठ गया, जूते उतारे। आयशा ने उसे पानी का ग्लास दिया, फिर चाय बनाकर लाई। "
कैसा रहा दिन?" आयशा ने पूछा, हल्की मुस्कान के साथ। इरफ़ान ने चाय का घूंट लिया, "बस, वही रूटीन। मीटिंग्स, काम। तू बताना, क्या किया आज?" आयशा ने छोटी-मोटी बातें बताईं – घर की सफाई, खाना बनाना, सहेलियों से मिलना। लेकिन उसके मन में वो सवाल घूम रहा था।
Dinner टेबल पर दोनों बैठे। आयशा ने चिकन करी परोसी, रोटियां, सलाद। इरफ़ान खाने लगा, लेकिन आयशा की प्लेट में ज्यादा कुछ नहीं था – वो नर्वस थी। आखिरकार, वो बोली, "इरफ़ान... मैं कुछ कहूं?"
उसकी आवाज हल्की कांप रही थी। इरफ़ान ने सिर उठाया, भौंहें चढ़ाईं। "हां, बोलो। क्या बात है?" आयशा ने गहरी सांस ली। "मैं... नौकरी करना चाहती हूं। घर में अकेली रहती हूं, बहुत बोर होती हूं। बाहर निकलूं, कुछ काम करूं। तू तो ऑफिस जाता है, मैं यहां क्या करूं सारा दिन?"
वो धीरे-धीरे बोली, आंखें झुकाकर, जैसे डर रही हो इरफ़ान के गुस्से से।इरफ़ान का चेहरा बदल गया। वो रोटी का टुकड़ा मुंह में रखकर रुक गया। "
नौकरी? क्यों? घर में क्या कमी है आयशा? मैं अच्छा कमाता हूं, तुझे क्या जरूरत बाहर जाने की? बाहर की दुनिया में क्या-क्या लोग हैं, तुझे पता नहीं। औरत का काम घर संभालना है। मैं नहीं मानूंगा।"
उसकी आवाज सख्त थी, जैसे कोई अंतिम फैसला सुना रहा हो। आयशा का दिल डूब गया। वो चुप हो गई, लेकिन अंदर से जल रही थी। "क्यों नहीं? मैं भी इंसान हूं, मेरी भी चाहतें हैं।"
लेकिन वो कुछ नहीं बोली, बस खाना खत्म किया। इरफ़ान उठा, टीवी ऑन किया, और न्यूज देखने लगा। आयशा बर्तन साफ करने लगी, लेकिन उसके मन में प्लान बन रहा था। वो जानती थी इरफ़ान की कमजोरी –
वो उसे खुश रखना चाहता था, खासकर रात के समय। अगर वो उसे संतुष्ट कर दे, तो शायद मान जाए।रात के 10 बजे हो चुके थे। कमरे की लाइट हल्की थी, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। इरफ़ान बिस्तर पर लेटा था, फोन स्क्रॉल कर रहा था। आयशा बाथरूम से नहाकर आई। आज वो एक पतली, सिल्की नाइट गाउन पहनी थी
– गुलाबी रंग की, जो उसके गोरे जिस्म पर चिपक रही थी। गाउन का फैब्रिक इतना पतला था कि उसके कर्व्स हल्के से नजर आ रहे थे – उसकी पतली कमर, चौड़ी हिप्स, और स्तनों का उभार। आयशा शर्मीली थी, हमेशा से। वो कभी बोल्ड नहीं होती, लेकिन आज जरूरत थी। वो धीरे से बिस्तर पर आई, इरफ़ान के बगल में लेट गई।
इरफ़ान ने फोन रखा, उसे देखा। "आज कुछ अलग लग रही हो," उसने मुस्कुराकर कहा, हाथ आयशा की कमर पर रखा।आयशा शरमाई, लेकिन पीछे नहीं हटी। वो जानती थी कि ये मौका है। इरफ़ान ने उसे अपनी तरफ खींचा, गले लगाया। उसके होंठ आयशा के होंठों पर रखे – पहले हल्का किस, फिर गहरा। आयशा ने आंखें बंद कीं, जवाब दिया। उसके मन में राहुल का खयाल आया, लेकिन वो दबा दिया।
"आज इरफ़ान को खुश करना है," वो सोची। इरफ़ान का हाथ उसके गाउन पर सरका, धीरे-धीरे ऊपर किया। आयशा की सांसें तेज हो गईं। वो शर्मीली थी, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कहती, बस महसूस करती। इरफ़ान ने गाउन की स्ट्रिंग खोली, गाउन नीचे सरका दिया।
आयशा के स्तन नंगे हो गए – गोल, मुलायम, 34C साइज़ के, गुलाबी निप्पल्स जो ठंडी हवा से सख्त हो रहे थे। इरफ़ान ने एक स्तन पर हाथ रखा, धीरे से दबाया। आयशा की सिसकी निकली,
"ओह... इरफ़ान।"इरफ़ान ने स्तन मसला – पहले हल्के से, उंगलियों से निप्पल को सहलाया। आयशा को एक अजीब सा सुख महसूस हुआ – गर्मी उसके शरीर में फैल रही थी। वो शर्मीली थी,
इसलिए ज्यादा मोअन नहीं कर रही, लेकिन उसका शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को मुंह में लिया, चूसा – जीभ से निप्पल को घुमाया। आयशा की कमर थोड़ी ऊपर उठी, "आह... धीरे..." वो बड़बड़ाई। इरफ़ान ने जारी रखा – एक स्तन दबाता, दूसरे को चूसता। आयशा के निप्पल्स अब लाल हो गए थे, सख्त और संवेदनशील। हर चूसने पर वो महसूस कर रही थी – जैसे बिजली की लहर दौड़ रही हो उसके स्तनों से नीचे तक।
"ये कैसा फील है... इतना गर्म," वो सोच रही थी। इरफ़ान ने दोनों स्तनों को साथ में मसला – हाथों से दबाया, जैसे आटा गूंथ रहा हो। आयशा की सांसें तेज़, वो इरफ़ान के बालों में उंगलियां फेरने लगी।करीब 10 मिनट तक इरफ़ान आयशा के स्तनों से खेलता रहा – दबाता, चूसता, काटता हल्के से। आयशा शर्म से लाल हो गई थी, लेकिन रोक नहीं रही थी। उसके नीचे पाकीज़ा चूत में हल्की नमी आ गई थी। इरफ़ान का हाथ अब नीचे सरका – आयशा की जांघों पर।
वो गाउन पूरी तरह उतार दिया। आयशा नंगी हो गई – उसका गोरा जिस्म, चिकनी त्वचा, पतली कमर (28 इंच), चौड़ी हिप्स (36 इंच), और पैर लंबे, मुलायम। इरफ़ान ने उसकी जांघों को सहलाया – अंदर की तरफ, जहां त्वचा सबसे नरम थी। आयशा की सिसकी निकली, वो पैर सिकोड़ने लगी। "इरफ़ान... शर्म आ रही है।" लेकिन इरफ़ान ने नहीं रुका। उसका हाथ आयशा की पाकीज़ा चूत पर पहुंचा – गुलाबी, साफ, अब गीली। वो उंगली से सहलाया – क्लिटोरिस पर हल्के से दबाया। आयशा की कमर उछली,
"ohhhh ishhhhhhhhh... क्या कर रहे हो?"इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे-धीरे, अंदर-बाहर। आयशा को दर्द और सुख दोनों महसूस हुए – जैसे कोई आग जल रही हो अंदर। वो शर्मीली थी, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कह रही, लेकिन उसके मोअन्स बढ़ रहे थे।
इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां डालीं, घुमाईं। आयशा की चूत गीली हो गई, आवाज़ आने लगी – चप-चप। "आह... इरफ़ान... बस..." वो बड़बड़ाई, लेकिन शरीर साथ दे रहा था। करीब 15 मिनट तक इरफ़ान आयशा के नीचे के हिस्से से खेलता रहा – उंगलियां, सहलाना, दबाना। आयशा अब गर्म हो चुकी थी, उसकी सांसें तेज़, पसीना चेहरे पर। लेकिन वो शर्मीली थी, इसलिए इरफ़ान के लंड को मुंह में नहीं लेना चाहती थी।
Wo हाथ से संतुष्ट करने का सोच रही थी।इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा। उसका लंड बाहर आया – कटा हुआ, 5 इंच लंबा, मोटाई औसत, अब पूरी तरह सख्त। आयशा ने शरमाते हुए देखा, फिर हाथ बढ़ाया। वो लंड को पकड़ा – गर्म, सख्त, जैसे लोहे की रॉड। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी –
पहले हल्के से, फिर थोड़ा तेज़। इरफ़ान सिसकारी, "आह... आयशा... अच्छा लग रहा है।" आयशा शर्म से आंखें बंद कर लीं, लेकिन जारी रखी। वो लंड के सिर को उंगली से सहलाती, फिर पूरे को मसलती। इरफ़ान का शरीर कांप रहा था। आयशा ने धीरे से कहा, "इरफ़ान... नौकरी की बात...
प्लीज मान जाओ ना।" इरफ़ान ने कहा, "नहीं... आयशा... आह..." लेकिन उसकी आवाज कमजोर हो रही थी। आयशा ने स्पीड बढ़ाई – हाथ तेज़ चलाया, लंड को मरोड़ा हल्के से। इरफ़ान अब चरम के करीब था। "प्लीज... हां कहो," आयशा ने फिर कहा, हाथ नहीं रोका।इरफ़ान ने सांस फूलते हुए कहा, "ठीक है... हां... कर ले नौकरी।"
आयशा मुस्कुराई, लेकिन रुकी नहीं। वो जारी रखी – हाथ ऊपर-नीचे, तेज़। इरफ़ान झड़ गया – गर्म सीमेन आयशा के हाथ पर। वो थककर लेट गया, सांस लेते हुए। आयशा ने हाथ साफ किया, फिर इरफ़ान को गले लगा लिया। वो बहुत खुश थी – अनुमति मिल गई। "थैंक यू इरफ़ान," वो बोली। इरफ़ान ने हंसकर कहा, "तू मानती नहीं है ना। लेकिन सावधानी से।"
आयशा ने हां कहा, लेकिन उसके मन में उत्साह था। रात भर वो सोचती रही – नौकरी, बाहर की दुनिया, नए लोग। शायद राहुल जैसा कोई। उसकी पाकीज़ा चूत अभी भी गर्म थी, लेकिन वो संतुष्ट थी।अगले दिन सुबह आयशा जल्दी उठी। इरफ़ान ऑफिस चला गया। आयशा ने सहेलियों को फोन किया। "आओ घर, अच्छी खबर है।
" फातिमा और ज़ारा आधे घंटे में आईं। तीनों ड्रॉइंग रूम में बैठीं, चाय पीते हुए। आयशा ने सब बताया – इरफ़ान से कैसे मांगा, रात की बात (हल्के से, बिना ज्यादा डिटेल्स), और अनुमति मिलना। "मैं बहुत खुश हूं! अब नौकरी ढूंढूंगी।"फातिमा ने ताली बजाई, "वाह आयशा, तूने तो कमाल कर दिया! इरफ़ान को मना लिया। अब जल्दी ढूंढ।" ज़ारा ने हंसकर कहा, "अगर नौकरी ढूंढनी है तो ऑनलाइन ढूंढो। Net पर रेज्यूमे अपलोड कर। फैशन स्टोर या कॉलेज टीचर की जॉब मिल जाएगी। और हां, वहां कोई हैंडसम लड़का मिल जाए तो बताना!"आयशा शरमाई, लेकिन हंस पड़ी। "ठीक है, ऑनलाइन ट्राई करूंगी।" सहेलियां चली गईं, आयशा ने लैपटॉप ऑन किया। अब जॉब सर्च शुरू होने वाला था।
Part 4,5,6
नई शुरुआत और रात की तपिशअगली सुबह आयशा जल्दी उठी। इरफ़ान अभी सो रहा था, लेकिन आयशा का मन उत्साह से भरा था। अनुमति मिल चुकी थी, अब नौकरी ढूंढने का वक्त था। वो किचन में गई, चाय बनाई, और लैपटॉप ऑन किया। इरफ़ान उठा, चाय पी, और ऑफिस चला गया।
"सावधानी से रहना," उसने जाते हुए कहा। आयशा ने हां में सिर हिलाया, लेकिन उसके मन में नई दुनिया का ख्वाब था। वो ऑनलाइन गई – Net पर अकाउंट बनाया। उसने अपना रेज्यूमे तैयार किया: नाम – आयशा खान, उम्र 28, एजुकेशन – बी.ए. इन आर्ट्स, एक्सपीरियंस – होममेकर, लेकिन स्किल्स में लिखा – कम्युनिकेशन, ऑर्गनाइजेशन, क्रिएटिविटी। वो फैशन डिजाइन या इवेंट असिस्टेंट जैसी जॉब्स ढूंढ रही थी।
"कुछ आसान, जहां बाहर निकल सकूं," वो सोच रही थी।कई जॉब्स देखीं – कुछ रिटेल स्टोर की, कुछ कॉलेज टीचर की। उसने 5-6 जॉब्स पर अप्लाई किया, रेज्यूमे अपलोड किया। "अब इंतजार," वो बोली और लैपटॉप बंद किया।
दिन गुजरा – घर के काम, सहेलियों से फोन पर बात। "ट्राई कर रही हूं," उसने ज़ारा को बताया। शाम को इरफ़ान लौटा, लेकिन आयशा का फोन चुप था। रात को सोते हुए वो सोच रही थी, "कुछ मिलेगा ना?"
अगले दिन सुबह 10 बजे आयशा की रूटीन चल रही थी – झाड़ू लगाना, कपड़े धोना। तभी फोन बजा। अननोन नंबर। वो उठाई। "हैलो, आयशा खान?" दूसरी तरफ एक प्रोफेशनल आवाज। "हां, बोलिए।"
"हम 'EventMasters India' से बोल रहे हैं। आपका रेज्यूमे देखा। इवेंट असिस्टेंट की पोजीशन के लिए इंटरव्यू के लिए आ सकती हैं? कल 11 बजे?" आयशा की आंखें चमक उठीं। "हां... हां, जरूर। एड्रेस क्या है?" उन्होंने एड्रेस दिया – अहमदाबाद के बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में। आयशा ने थैंक यू कहा और फोन रखा।
वो उछल पड़ी – "मिल गई! ऑफर नहीं, लेकिन इंटरव्यू!" लेकिन उसे क्या पता था कि ये कंपनी EventMasters India थी – एक बड़ी इवेंट मैनेजमेंट फर्म। और इसमें राहुल शर्मा काम करता था। राहुल की अपनी छोटी कंपनी 'Sharma Events' इस बड़ी कंपनी से सब-कॉन्ट्रैक्ट लेती थी – छोटे इवेंट्स हैंडल करने के लिए। राहुल ने आयशा का रेज्यूमे देखा था – नाम देखकर लगा कोई रैंडम कैंडिडेट, लेकिन उसे क्या पता कि ये वही आयशा है जिसकी आंखें कैफे में उससे टकराई थीं। उसने HR को कहा था, "इंटरव्यू बुलाओ, लगती है फिट।"
आयशा दौड़ी, इरफ़ान को फोन लगाया। इरफ़ान मीटिंग में था, लेकिन कॉल बैक किया। "क्या हुआ आयशा?" आयशा ने बताया, "इरफ़ान, एक कंपनी से कॉल आया। इंटरव्यू के लिए बुलाया है कल। EventMasters India – इवेंट असिस्टेंट की जॉब।"
इरफ़ान की आवाज उदास हो गई। "अच्छा... लेकिन इतनी जल्दी? तुझे एक्सपीरियंस नहीं है। और बाहर जाना... ठीक रहेगा?" वो चिंतित था, घर की औरत बाहर काम करे, ये उसे पसंद नहीं था। आयशा ने कहा, "प्लीज, ट्राई करने दो। और हां, अगर कन्फर्म हुई तो सैलरी 50,000 रुपये महीना।" इरफ़ान के होष उड़ गए। "क्या? 50,000? वो तो मेरी सैलरी से आधी है! घर का खर्चा आसान हो जाएगा।"
वो अंदर-अंदर खुश हो गया – पैसे की बात ने उसका मन बदल दिया। "ठीक है, जा इंटरव्यू दे। लेकिन सावधानी से।" आयशा खुश हो गई। शाम को इरफ़ान घर लौटा, तो वो मुस्कुरा रहा था। "अच्छा है, एक्स्ट्रा इनकम आएगी।"रात हो गई। कमरे में हल्की रोशनी, पंखे की ठंडी हवा। इरफ़ान बिस्तर पर लेटा था, आयशा बाथरूम से नहाकर आई।
आज वो एक सेक्सी नाइटड्रेस पहनी थी – काली, लेस वाली, जो उसके कर्व्स को हाइलाइट कर रही थी। इरफ़ान ने देखा, उसकी आंखें चमकीं। "आज क्या बात है? खुशी में हो?" आयशा शरमाई, लेकिन पास आई। "हां, तुम्हारी वजह से।" इरफ़ान ने उसे खींचा, गले लगा लिया। उसके होंठ आयशा के गले पर – हल्के किस। आयशा की सांसें तेज हो गईं। इरफ़ान का हाथ उसके पीठ पर, फिर कमर पर। वो नाइटड्रेस की स्ट्रिंग खोलने लगा। धीरे-धीरे ड्रेस नीचे सरकी।
आयशा के स्तन नंगे – गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल्स। इरफ़ान ने एक पर हाथ रखा, दबाया – मुलायम मांस उसके हाथ में दबा, आयशा को एक मीठा दर्द हुआ। "ओह... इरफ़ान," वो सिसकारी। इरफ़ान ने निप्पल को उंगलियों से मसला – घुमाया, खींचा हल्के से। आयशा की कमर थोड़ी मुड़ी, सुख की लहर दौड़ी। वो शर्मीली थी, लेकिन आज खुशी में शामिल हो रही थी।इरफ़ान ने आयशा को बिस्तर पर लिटाया। उसके स्तनों पर झुका, एक को मुंह में लिया। जीभ से निप्पल चाटा – गोल-गोल, फिर चूसा जोर से।
आयशा की सिसकी निकली, "आह... धीरे..." लेकिन उसका हाथ इरफ़ान के सिर पर, दबा रही थी। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को हाथ से मसला – दबाया, निप्पल को पिंच किया। हर दबाव पर आयशा महसूस कर रही थी – गर्मी, उत्तेजना, जैसे उसके स्तन जल रहे हों। 10 मिनट तक इरफ़ान स्तनों से खेलता रहा – चूसता, काटता हल्के से, मसलता।
आयशा की सांसें तेज, पसीना माथे पर। उसकी पाकीज़ा चूत में हलचल शुरू हो गई – गीली हो रही थी। इरफ़ान का हाथ नीचे सरका – आयशा की जांघों पर। वो जांघें सहलाया – अंदर की मुलायम त्वचा, जहां हर स्पर्श से आयशा कांप उठती। "इरफ़ान... वहां..." वो शरमाई। इरफ़ान ने उंगली आयशा की चूत पर रखी – गुलाबी, गीली, गर्म। वो क्लिटोरिस को सहलाया – हल्के से दबाया, घुमाया। आयशा की कमर उछली, "ओह... क्या कर रहे हो?" सुख की लहर उसके पूरे शरीर में।इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे, क्योंकि आयशा टाइट थी। अंदर-बाहर किया, धीमे-धीमे।
आयशा मोअन कर रही थी, "आह... इरफ़ान... अच्छा लग रहा है।" इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां, घुमाईं, दबाया। आयशा की चूत से पानी बह रहा था, चप-चप की आवाज। 15 मिनट तक इरफ़ान ने foreplay किया – चूत सहलाना, उंगलियां, जांघें चूमना। आयशा अब तैयार थी, उसका शरीर गर्म, तड़प रहा था। इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा – उसका लंड बाहर – 5 इंच, सख्त, लाल सिर। आयशा ने देखा, शरमाई। वो शर्मीली थी, मुंह में नहीं लेती, लेकिन आज मनाने के लिए हाथ बढ़ाया। लंड पकड़ा – गर्म, पल्सेटिंग। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे किया। इरफ़ान सिसकारी,
"आह... आयशा... जारी रखो।"आयशा ने स्पीड बढ़ाई – हाथ से मसला, सिर सहलाया। इरफ़ान का शरीर कांप रहा था। "ओह... अच्छा... और तेज़।" आयशा ने किया – मरोड़ा हल्के से, ऊपर-नीचे तेज़। इरफ़ान चरम पर। आयशा ने कहा, "इरफ़ान... नौकरी के लिए शुक्रिया।"
इरफ़ान झड़ गया – सीमेन आयशा के हाथ पर। वो थककर लेट गया। लेकिन आयशा अभी प्यासी थी। वो इरफ़ान के ऊपर आई, लंड पकड़ा, जो अभी सॉफ्ट था। हाथ से सहलाया, फिर अपनी चूत पर रगड़ा। इरफ़ान फिर सख्त हो गया। आयशा ने धक्का मारा – लंड अंदर। "आह..." दोनों की सिसकी। आयशा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे, फिर तेज़। उसके स्तन उछल रहे थे, इरफ़ान ने पकड़े, मसले।
20 मिनट तक सेक्स चला – पोजीशन्स बदले, डॉगी, मिशनरी। आयशा ऑर्गेज्म पर पहुंची – चीखी, "ओह इरफ़ान!" इरफ़ान भी झड़ गया। वे थककर लेटे, आयशा खुश hui thi lekin chudai se nahi Balki naukari Milne ki khusi m
भाग 7: इंटरव्यू की घड़ी और पार्टी की
रौनकसुबह की पहली किरण आयशा के कमरे में घुसी, लेकिन वो पहले से तैयार थी।
आज इंटरव्यू का दिन था।
वो उठी, बाथरूम गई, नहाई, और फिर ***** की चादर बिछाई।
***** पढ़ते हुए वो ***** मांग रही थी – "******, मुझे सफलता दे। मुझे सही राह दिखा।"***** खत्म होने के बाद वो थोड़ा शांत हुई।
फिर वो तैयार होने लगी।
आज वो फुल हिजाब और बुर्का पहनी – काला बुर्का, जो उसके पूरे शरीर को ढक रहा था, लेकिन चेहरा दिख रहा था।
वो आईने में खुद को देखी – "इरफ़ान ने इजाजत दी है, तो मैं अपनी इज्जत से खिलवाड़ नहीं करूंगी।हमेशा वफादार रहूंगी अपने शौहर के प्रति।"
उसके मन में एक दृढ़ संकल्प था।
वो जानती थी कि बाहर की दुनिया अलग है, लेकिन वो खुद को संभाल लेगी।
रूटीन पूरी की – इरफ़ान के लिए नाश्ता बनाया, चाय दी।इरफ़ान ने कहा, "सफल हो जा, लेकिन याद रखना, घर की जिम्मेदारी भी है।"
आयशा ने मुस्कुराकर हां कहा।
इरफ़ान ऑफिस चला गया।
आयशा ने अपना पर्स लिया – रेज्यूमे की कॉपी, आईडी, और कुछ पैसे।वो घर से निकली, ऑटो लिया, और एड्रेस की तरफ चली।
रास्ते में वो सोच रही थी – "कैसी होगी कंपनी? लोग कैसे होंगे? लेकिन मैं तैयार हूं।"
ऑटो शहर की व्यस्त सड़कों से गुजरा – ट्रैफिक, हॉर्न, लोग भागते-दौड़ते।
आयशा की आंखें बाहर देख रही थीं, लेकिन मन में उत्तेजना थी।ऑफिस पहुंची – EventMasters India का बड़ा बिल्डिंग, ग्लास का फेसाड, मॉडर्न लुक।
वो अंदर गई, सिक्योरिटी से बात की।
"इंटरव्यू के लिए आई हूं, आयशा खान।"
सिक्योरिटी ने चेक किया, फिर लॉबी में बैठने को कहा।लॉबी बड़ी थी – सोफे, मैगजीन्स, कॉफी मशीन।
आयशा एक कोने में बैठ गई, बुर्का संभालते हुए।
वो इधर-उधर देखने लगी।
लॉबी में कई लोग थे – कर्मचारी आ-जा रहे थे।उसकी नजरें लड़कों पर पड़ीं।
वहां कई हैंडसम लड़के थे – ज्यादातर लग रहे थे, क्योंकि उनके नाम या लुक से।
वो ऑफिस ड्रेस में थे – शर्ट, पैंट, टाई, कुछ जींस में।
एक लड़का पास से गुजरा – लंबा, फिट, मुस्कुराता हुआ।आयशा ने नजरें झुका लीं, लेकिन मन में सोचा, "कितने स्मार्ट लगते हैं। लेकिन मैं क्यों देख रही हूं?"
फिर और लड़के दिखे – एक ग्रुप में बात कर रहे थे, हंसते हुए।
ज्यादातर नाम वाले – राहुल, अजय, विक्रम जैसे।
सिर्फ एक-दो *****, वो भी मॉडर्न।आयशा सोचने लगी, "यहां मिक्स्ड क्राउड है। लेकिन लड़के इतने कॉन्फिडेंट।"
फिर उसकी नजर लड़कियों पर गई।
वहां कई लड़कियां थीं – ज्यादातर मॉडर्न कपड़ों में।
शॉर्ट स्कर्ट, टॉप, कुछ ट्रांसपेरेंट ब्लाउज।एक लड़की पास से गुजरी – उसका टॉप पारदर्शी था, ब्रा की स्ट्रैप दिख रही थी, और क्लिवेज झलक रहा था।
आयशा की आंखें फैल गईं।
"ये क्या? इतना खुला? नौकरी के बहाने शरीर दिखाना?"
दूसरी लड़की – शॉर्ट ड्रेस, जांघें नंगी, हाई हील्स।उसका ब्लाउज टाइट, स्तन उभरे हुए, क्लिवेज साफ।
आयशा मन ही मन बोली, "कितनी बेशर्म हैं ये लड़कियां। अपना जिस्म दिखाकर क्या हासिल कर रही हैं?
मैं तो कभी ऐसा नहीं करूंगी। मैं बुर्का में हूं, सुरक्षित।"
लेकिन उसे क्या पता था कि आगे चलकर वो खुद बदल जाएगी – मॉडर्न कपड़े, खुले विचार।लेकिन अभी वो पवित्र थी, बुर्का में लिपटी, अपने शौहर की वफादार।
वो सोच रही थी, "ये दुनिया अलग है, लेकिन मैं नहीं बदलूंगी।"
करीब 15 मिनट बाद HR ने बुलाया।
"आयशा खान, इंटरव्यू के लिए आइए।"वो उठी, बुर्का ठीक किया, और रूम में गई।
इंटरव्यू रूम – बड़ा टेबल, कुर्सियां, कंप्यूटर।
इंटरव्यूअर बैठा था – राहुल शर्मा।
आयशा अंदर गई, सलाम किया। "Good Morning Sir Rahul ne kaha। बैठिए।
आयशा बैठी, लेकिन बुर्का में उसका फिगर हल्का सा नजर आ रहा था – कर्व्स, हाइट।
राहुल की नजरें उस पर ठहर गईं।
वो सोचने लगा, "ये फिगर... इतना परफेक्ट। क्या बॉडी होगी इसके अंदर।"उसके मन में गर्मी दौड़ गई – वो कल्पना करने लगा, बुर्के के नीचे का जिस्म।
लेकिन वो प्रोफेशनल रहा।
"आपका रेज्यूमे देखा। होममेकर हैं, लेकिन स्किल्स अच्छे लगते हैं।
हमारी कंपनी इवेंट्स ऑर्गनाइज करती है – वेडिंग्स, कॉर्पोरेट, पार्टीज।असिस्टेंट के रूप में क्या कर सकती हैं?"
आयशा ने जवाब दिया, लेकिन बातचीत के दौरान गर्मी लगी।
वो धीरे से अपना नकाब (फेस कवर) हटाया – चेहरा दिखा।
गोरा रंग, बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ।राहुल की नजरें उस पर पड़ीं – और वो चौंक गया।
"ये तो वही लड़की... कैफे वाली!"
उसका दिल जोर से धड़का।
"इतना खूबसूरत चेहरा... अगर चेहरा ऐसा है तो जिस्म कितना खूबसूरत होगा?"वो कल्पना करने लगा –
आयशा के स्तन, कमर, जांघें।
उसके अनकट लंड में हलचल हुई, लेकिन वो कंट्रोल किया।
"आपकी क्वालिफिकेशन अच्छी है।
जॉइन कब कर सकती हैं?"
आयशा ने कहा, "मंडे से।"राहुल ने कहा, "आपकी जॉब पक्की। मंडे आइए।"
आयशा खुश हो गई, शुक्रिया कहा, और निकल गई।
घर लौटी, सबसे पहले इरफ़ान को फोन किया।
"इरफ़ान, जॉब मिल गई! मंडे से जॉइनिंग।"इरफ़ान खुश हुआ, "वाह, बधाई। लेकिन सावधानी से।"
फिर सहेलियों को बताया।
फातिमा और ज़ारा आईं – "वाह आयशा, कमाल कर दिया!"
वो खुश थीं। "पार्टी चाहिए!" ज़ारा ने कहा।"सैटरडे नाइट?" आयशा ने हां कहा।
सहेलियां चली गईं।
सैETDEडे नाइट पार्टी – आयशा ने तैयारी की।
खाना बनाया – चिकन बिरयानी, कबाब, सलाद, स्वीट में गुलाब जामुन, जूस।घर सजाया – बैलून्स, लाइट्स।
सहेलियां आईं – फातिमा, ज़ारा, और दो और।
सबने बधाई दी।
पार्टी शुरू – खाना खाया, हंसी-मजाक।दौरान में ज़ारा ने कहा, "आयशा, नौकरी में कोई हैंडसम मर्द मिले तो नजदीकी बढ़ा ले।"
आयशा ने कहा, "नहीं, मैं पाकीज़ा बेगम हूं। ऐसा नहीं करूंगी।
अपने शौहर के प्रति वफादार रहूंगी।"
फातिमा ने हंसकर कहा, "देखना, समय बताएगा।हमारी एक दोस्त थी – हिजाबी, पवित्र।
उसका नाम रुबीना था।
वो भी तेरी तरह शादीशुदा थी, ***** gharane से।
हमेशा हिजाब पहनती, घर संभालती, पढ़ती।लेकिन एक दिन नौकरी शुरू की – एक बड़ी कंपनी में असिस्टेंट।
वहां एक लड़का मिला – नाम था अमित।
पहले तो सिर्फ काम की बातें, लेकिन धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं।
अमित स्मार्ट था, केयरिंग, और रुबीना को स्पेशल फील करवाता।रुबीना पहले विरोध करती, लेकिन अमित की बातें, उसकी मुस्कान – सबने उसे बदल दिया।
वो हिजाब कम पहनने लगी
, मॉडर्न कपड़े ट्राई करने लगी।
एक दिन अमित ने प्रपोज किया, रुबीना ने हां कह दी।
उसने अपने शौहर को धोखा दिया – तलाक लिया, और अमित से शादी कर ली।अब वो पूरी मॉडर्न है – शॉर्ट ड्रेस, पार्टीज, सब कुछ।
पुराना जीवन भूल गई।"
आयशा ने कहा, "मैं नहीं बदलूंगी। इज्जत से समझौता नहीं।"
सहेलियां हंसीं, "वक्त बताएगा।"पार्टी खत्म हुई, लेकिन वो स्टोरी आयशा के मन में चिपक गई।
रात को सोच रही थी, "क्या लोग सच में बदल जाते हैं lekin mai nhi badlungi
भाग 8: पहला दिन ऑफिस और रात की अधूरी चाहतें
रात का सन्नाटा घर पर छाया हुआ था। आयशा बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। इंटरव्यू की सफलता की खुशी उसके मन में थी – जॉब मिल गई, मंडे से जॉइनिंग।
लेकिन वो स्टोरी जो सहेलियों ने सुनाई थी, वो उसके दिमाग में घूम रही थी। "क्या मैं भी बदल जाऊंगी? नहीं, मैं पाकीज़ा हूं, वफादार रहूंगी।" इरफ़ान उसके बगल में सो रहा था, लेकिन आयशा का शरीर अभी भी उत्तेजित था। पार्टी की थकान थी, लेकिन मन में एक तड़प।
वो करवट बदली, इरफ़ान की तरफ मुड़ी। "शायद आज फिर..." वो सोची। इरफ़ान की सांसें नियमित थीं, लेकिन आयशा ने धीरे से अपना हाथ उसकी छाती पर रखा। इरफ़ान की आंखें खुलीं। "क्या हुआ आयशा? नींद नहीं आ रही?" उसने पूछा। आयशा शरमाते हुए बोली, "हां... थोड़ा... तुम्हारे पास आना चाहती हूं।"
इरफ़ान मुस्कुराया, उसे अपनी बाहों में खींच लिया।इरफ़ान ने आयशा को गले लगाया, उसके बालों में उंगलियां फेरने लगा। आयशा की सांसें तेज हो गईं। वो शर्मीली थी, लेकिन आज खुशी में वो ज्यादा खुल रही थी। इरफ़ान के होंठ उसके गले पर – हल्का किस, फिर चूमते हुए नीचे सरका। आयशा की नाइट गाउन पतली थी, उसके नीचे कुछ नहीं।
इरफ़ान ने गाउन ऊपर किया, आयशा के स्तनों को छुआ। उसके स्तन –
गोल, भरे हुए, मुलायम जैसे रुई के गोले। इरफ़ान ने एक पर हाथ रखा, धीरे से दबाया। आयशा को एक मीठी सी सिहरन हुई – जैसे कोई गर्म लहर उसके शरीर में दौड़ गई हो। "ओह इरफ़ान... धीरे," वो बड़बड़ाई। इरफ़ान ने निप्पल को उंगलियों से सहलाया –
गुलाबी निप्पल सख्त हो गया, जैसे कोई बटन दबा हो। हर सहलाने पर आयशा महसूस कर रही थी – सुख की छोटी-छोटी लहरें, जो उसके स्तन से नीचे की तरफ जा रही थीं। इरफ़ान ने दूसरे स्तन को मुंह में लिया, जीभ से चाटा – गोल-गोल, फिर चूसा। आयशा की कमर थोड़ी ऊपर उठी, "आह... अच्छा लग रहा है।"
इरफ़ान ने चूसना जारी रखा – जोर से, फिर हल्के से काटा। आयशा को दर्द और सुख का मिश्रण – जैसे कोई आग सुलग रही हो उसके निप्पल्स में। वो इरफ़ान के सिर को दबा रही थी, उंगलियां उसके बालों में।करीब 10 मिनट तक इरफ़ान आयशा के स्तनों से खेलता रहा – एक को चूसता, दूसरे को मसलता। हर चूसने पर आयशा की मोअन्स बढ़ रही थीं – "ओह... इरफ़ान... और..." उसके स्तन अब लाल हो गए थे, निप्पल्स सूजे हुए, संवेदनशील। हर स्पर्श पर वो कांप उठती। इरफ़ान का हाथ नीचे सरका – आयशा की कमर पर, फिर जांघों पर।
वो जांघें सहलाने लगा – बाहर की तरफ, फिर अंदर। आयशा की जांघें मुलायम, गोरी, जैसे रेशम। हर सहलाने पर वो पैर सिकोड़ती, "इरफ़ान... शर्म आ रही है।" लेकिन इरफ़ान नहीं रुका। उसका हाथ आयशा की ***** चूत पर पहुंचा –
गुलाबी, साफ, अब हल्की गीली। वो क्लिटोरिस को सहलाया – हल्के से दबाया। आयशा की चीख निकली, "आह... वहां..." सुख की तेज लहर दौड़ी, उसके पूरे शरीर में।
इरफ़ान ने उंगली अंदर डाली – धीरे, क्योंकि चूत टाइट थी। अंदर-बाहर किया, धीमे-धीमे। आयशा की सांसें रुक-रुक कर आ रही थीं, "ओह... इरफ़ान... क्या कर रहे हो?" वो महसूस कर रही थी –
उंगली की हर मूवमेंट, गर्मी, दबाव। इरफ़ान ने स्पीड बढ़ाई – दो उंगलियां, घुमाईं। आयशा की चूत से पानी बहने लगा, चप-चप की आवाज। वो कमर हिला रही थी, सुख में डूबी। 20 मिनट तक इरफ़ान ने foreplay किया –
चूत सहलाना, उंगलियां डालना, जांघें चूमना। आयशा अब पूरी गर्म थी, तड़प रही थी।इरफ़ान ने अपना पजामा उतारा
– उसका लंड बाहर आया, 5 इंच, सख्त, लाल सिर। आयशा ने देखा, शरमाई। वो शर्मीली थी, मुंह में नहीं लेती, लेकिन हाथ बढ़ाया।
लंड पकड़ा – गर्म, सख्त, जैसे जलती लकड़ी। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी – पहले हल्के से, फिर थोड़ा तेज़। इरफ़ान सिसकारी, "आह... आयशा... अच्छा है।"
आयशा ने सिर को सहलाया, मसला। हर मूवमेंट में इरफ़ान कांप रहा था। वो स्पीड बढ़ाई – हाथ तेज़, मरोड़ा। इरफ़ान चरम पर, "ओह... और..." आयशा ने जारी रखा – 10 मिनट तक हैंडजॉब, हर स्ट्रोक डिटेल्ड। आखिर इरफ़ान झड़ गया –
गर्म सीमेन आयशा के हाथ पर। लेकिन आयशा अभी प्यासी थी। वो इरफ़ान के ऊपर आई, लंड पकड़ा, सहलाया। फिर अपनी चूत पर रगड़ा – गीली, गर्म। लंड फिर सख्त हुआ। आयशा ने धक्का मारा – अंदर। "आह..." दोनों की चीख। आयशा ऊपर-नीचे होने लगी – धीरे, फिर तेज़।
उसके स्तन उछल रहे, इरफ़ान ने पकड़े, मसले। हर धक्के पर आयशा महसूस कर रही थी – लंड का दबाव, भरा हुआ फील, सुख की लहरें। लेकिन इरफ़ान जल्दी थक गया – 10 मिनट में झड़ गया। आयशा ऑर्गेज्म के करीब थी, लेकिन पहुंची नहीं। वो प्यासी रह गई, लेकिन खुश थी – जॉब की वजह से। "कल ऑफिस," वो सोचकर सो गई।
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भाग 9: ऑफिस की पहली झलक और बढ़ती उत्तेजनाआयशा सुबह उठी, उसका मन उत्तेजना से भरा हुआ था।
पहला दिन ऑफिस का – नई जिंदगी की शुरुआत।
वो बाथरूम गई, नहाई, और फिर ***** मांग रही थी – मुझे सही राह पर रखो।" ***** खत्म होने के बाद वो तैयार होने लगी।
अंदर एंटी-ब्रा पहनी – पसीना सोखने वाली, कंफर्टेबल।
फिर सलवार सूट – सफेद कुर्ता, ब्लैक सलवार, जो उसके कर्व्स को हल्का सा हाइलाइट कर रहा था।
उपर से फुल बुर्का डाला – काला, पूरा ढकने वाला। "सुरक्षित रहूंगी, इज्जत नहीं खोऊंगी," वो आईने में देखकर सोची।
इरफ़ान को नाश्ता दिया, चाय दी।
इरफ़ान ने कहा, "अच्छा दिन हो। लेकिन याद रखना, घर जल्दी लौटना।"
आयशा ने मुस्कुराकर हां कहा, और घर से निकल गई। ऑटो लिया, ऑफिस की तरफ।
रास्ते में वो सोच रही थी – "कैसा होगा दिन? लोग कैसे होंगे?"
ऑफिस पहुंची – EventMasters India का बड़ा बिल्डिंग।
वो अंदर गई, सिक्योरिटी से आईडी दिखाई। HR ने वेलकम किया – "आयशा, वेलकम टू द टीम।"
वो आयशा को इंडक्शन रूम ले गई।
वहां कुछ नए लोग थे – ट्रेनिंग सेशन।
HR ने काम समझाया – इवेंट प्लानिंग, क्लाइंट कॉल्स, कोऑर्डिनेशन। आयशा नोट्स लेती रही, ध्यान से सुनती।
लेकिन बुर्का की वजह से लोग जज कर रहे थे – कुछ हंसते, कुछ अजीब देखते।
"ये क्या बुर्का में?" एक लड़की ने फुसफुसाया।
आयशा को बुरा लगा, लेकिन चुप रही। ट्रेनिंग के बाद आयशा को डेस्क असाइन किया गया – ओपन क्यूबिकल, कंप्यूटर, फोन।
वो बैठी, ईमेल चेक करने लगी।
पास के क्यूबिकल से एक लड़का आया – नाम अजय, राहुल का दोस्त।
"हाय, न्यू जोइनी? मैं अजय, इवेंट कोऑर्डिनेटर।" आयशा ने सिर झुकाकर जवाब दिया, "हां, आयशा।"
अजय ने मुस्कुराकर कहा, "बुर्का अच्छा है, लेकिन यहां गर्मी है। कंफर्टेबल हो?"
आयशा शरमाई, "हां, ठीक हूं।"
लेकिन अंदर से असहज – लोग देख रहे थे। दोपहर का वक्त – लंच टाइम।
आयशा कैंटीन गई, बुर्का संभालते।
वहां भीड़ थी – लड़के-लड़कियां, हंसते-खाते।
वो एक कोने में बैठी, अपना टिफिन खोला – घर का खाना। तभी कुछ लड़कियां आईं – सुनैना, प्रिया, नेहा।
सब *, मॉडर्न ड्रेस में – शॉर्ट टॉप, जींस।
सुनैना ने कहा, "हाय, न्यू है? साथ खाएं?"
आयशा ने हां कहा, खुश हुई। खाना खाते हुए बातें हुईं – "कहां से हो? क्या काम?"
सुनैना ने आयशा का बुर्का देखा, "तुम्हारी तरह पाकीज़ा औरत आज तक नहीं देखी।
बुर्का पहनकर आई हो, कम से कम चेहरे से नकाब हटा दिया करो।"
प्रिया ने जोड़ा, "हां, यहां सब ओपन हैं। बुर्का में असहज लगती हो।" आयशा को ठीक लगा – ऑफिस था, लोग जज कर रहे थे।
"हां, शायद अगले दिन से," वो बोली।
दोस्ती हो गई – सुनैना ने नंबर एक्सचेंज किया।
"कुछ प्रॉब्लम हो तो बताना।" लंच बाद आयशा राहुल के केबिन गई – असाइनमेंट लेने।
राहुल बैठा था, कंप्यूटर पर।
आयशा अंदर गई, "सर, आयशा। न्यू जोइनी।"
राहुल ने सिर उठाया, चेहरा देखा – दिल में हलचल। "ये... वही," वो सोचा।
उसका दिल धड़का, गर्मी दौड़ी।
लंड में हलचल – खड़ा होने लगा, लेकिन टेबल के नीचे छिपा।
आयशा नहीं देख पाई। राहुल ने कंट्रोल किया, "हां, बैठो। काम है – ये इवेंट प्लान।"
वो समझाने लगा, लेकिन आंखें आयशा के चेहरे पर।
"इतनी खूबसूरत... बुर्का में भी आकर्षक।"
उसका लंड पूरी तरह सख्त – पैंट में तंबू। आयशा ध्यान से सुन रही थी, नोट्स लेती।
लेकिन राहुल के मन में कल्पना – बुर्का उतारना, आयशा का जिस्म देखना।
दिन खत्म – आयशा बाहर आई।
सुनैना आदि चिढ़ातीं – "बुर्का गर्ल, कल बिना बुर्के आना!" आयशा घर लौटी।
इरफ़ान ने पूछा, "दिन कैसा रहा?"
आयशा ने सब बताया – लोग, काम, लड़कियां, जजमेंट।
इरफ़ान ने कहा, "सावधानी से। बुर्का पहनती रहो।" रूटीन – डिनर, टीवी।
रात सेक्स – इरफ़ान ने शुरू किया।
आयशा के मन में राहुल – "उसकी आंखें..."
सेक्स खत्म, आयशा प्यासी रही। Usse apne shauhar pr gussa aaya lekin wo man marker so gyi
भाग 10: दिन बीतते गए और चाहत की आगसमय की रफ्तार कभी-कभी इतनी तेज होती है कि पता ही नहीं चलता कब हफ्ते महीनों में बदल जाते हैं।
आयशा के लिए भी यही हुआ।
ऑफिस जॉइन करने के बाद पहले दिन की घबराहट अब एक रूटीन में बदल चुकी थी।
हर सुबह वो उठती, ***** पढ़ती, इरफ़ान के लिए नाश्ता बनाती, और फिर तैयार होकर ऑफिस निकल जाती। बुर्का अब उसकी आदत बन गया था – अंदर सूट, ऊपर बुर्का, चेहरा दिखता लेकिन नकाब हटा हुआ।
ऑफिस में लोग अब उसे जानने लगे थे – "बुर्का वाली आयशा" से "आयशा मैम" तक का सफर।
लेकिन इन दो महीनों में बहुत कुछ बदला था, खासकर राहुल के मन में।
राहुल की नजरें आयशा पर टिकी रहतीं – हर मीटिंग में, हर कॉरिडोर में। पहले हफ्ते की बात है।
आयशा अपने डेस्क पर बैठी ईमेल चेक कर रही थी।
राहुल पास से गुजरा, रुक गया।
"आयशा, वो प्रोजेक्ट का अपडेट?" उसने पूछा, लेकिन आंखें आयशा के चेहरे पर। आयशा ने सिर उठाया, "हां सर, मैं मेल कर रही हूं।"
राहुल मुस्कुराया, "गुड। अगर हेल्प चाहिए तो बताना।"
लेकिन उसके मन में – "ये चेहरा... इतना सुंदर। बुर्का के नीचे क्या होगा?"
उसकी प्यास बढ़ रही थी, हर दिन। दूसरे हफ्ते एक मीटिंग हुई – टीम मीटिंग, इवेंट प्लानिंग की।
राहुल प्रेजेंट कर रहा था, आयशा नोट्स ले रही थी।
राहुल की नजरें बार-बार आयशा पर – उसकी उंगलियां पेन पर, होंठ हल्के से काटते हुए।
मीटिंग के बाद राहुल ने कहा, "आयशा, स्टे बैक। डिटेल्स डिसकस करें।" आयशा रुकी, दोनों अकेले।
राहुल करीब आया, टेबल पर झुका।
"तुम्हारा आइडिया अच्छा था।" उसका हाथ गलती से आयशा की उंगली छू गया।
आयशा की सिहरन – "क्या था ये?" लेकिन वो चुप रही। राहुल के मन में आग – "ये स्पर्श... और चाहता हूं।"
घर लौटकर आयशा ने इरफ़ान से बात की, लेकिन मन में वो स्पर्श।
रात सेक्स हुआ – इरफ़ान के साथ, लेकिन आयशा के मन में राहुल।
वो प्यासी रही, जैसे हर रात। तीसरे हफ्ते एक इवेंट साइट विजिट – बाहर, एक हॉल में।
राहुल और आयशा साथ गए।
कार में – राहुल ड्राइव कर रहा, आयशा बगल में।
बातें हुईं – "तुम्हारी फैमिली कैसी है?" राहुल ने पूछा। आयशा ने बताया, "शादी हो चुकी है, पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर।"
राहुल का दिल जला – "शादीशुदा? लेकिन मैं तो चाहता हूं इसे।"
साइट पर – राहुल आयशा को दिखा रहा था, करीब खड़े।
उसका कंधा आयशा के कंधे से छू गया। आयशा का दिल धड़का, "ये क्या?" लेकिन काम पर फोकस।
राहुल की प्यास बढ़ी – "ये खुशबू... ये बॉडी।"
घर लौटकर आयशा थक गई, लेकिन रात इरफ़ान के साथ – फिर राहुल का खयाल।
प्यास बनी रही।
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17-01-2026, 08:28 PM
(This post was last modified: 23-05-2026, 01:07 PM by razaraj2. Edited 4 times in total. Edited 4 times in total.)
# भाग 11: देर रात की मीटिंग्स और बढ़ती चाहतेंसमय की धारा में दिन बहते चले गए।
आयशा की जिंदगी अब एक नए रूटीन में ढल चुकी थी – सुबह उठना, घर के काम, ऑफिस जाना, शाम को लौटना, और रात को इरफ़ान के साथ वक्त बिताना।
लेकिन इन दिनों घर की आर्थिक हालत खराब होती जा रही थी।
इरफ़ान की कंपनी में कटौती हो रही थी, सैलरी लेट आ रही थी, और घर का खर्चा बढ़ता जा रहा था। आयशा की सैलरी अब घर के लिए जरूरी हो गई थी – किराया, बिजली बिल, राशन, सब कुछ उस पर निर्भर।
इरफ़ान अक्सर कहता, "तुम्हारी जॉब अच्छी है, जारी रखो। हमारी हालत सुधरेगी।"
आयशा हां कहती, लेकिन मन में चिंता रहती।
ऑफिस में भी चीजें बदल रही थीं – राहुल की नजरें अब और तेज हो गई थीं। पिछले दो महीनों में राहुल की प्यास आयशा को लेकर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी।
हर मीटिंग में वो आयशा को घूरता, उसके चेहरे की हर मुस्कान को नोटिस करता, उसके बुर्के के नीचे के कर्व्स को इमेजिन करता।
"ये औरत... मेरी होनी चाहिए," वो मन ही मन कहता।
आयशा सबके साथ घुलमिल गई थी – सुनैना से दोस्ती, नेहा से मजाक, प्रिया से गॉसिप। लेकिन राहुल उसे पाना चाहता था, किसी भी कीमत पर।
एक दिन राहुल के बॉस विक्रम ने फिर बुलाया।
"राहुल, प्रोग्रेस?" विक्रम ने पूछा।
राहुल ने कहा, "बढ़ रही है सर, लेकिन धीरे।" विक्रम ने मुस्कुराकर कहा, "फिर बड़ा कदम उठाओ। एक बड़ा प्रोजेक्ट है – वेडिंग इवेंट, क्लाइंट बड़ा। आयशा को लीड दो।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर, वो लेट नाइट्स होंगी।"
विक्रम ने कहा, "बिलकुल। उसे घर से दूर रखो, काम में डुबाओ।"
राहुल ने प्लान बनाया – आयशा को प्रोजेक्ट असाइन किया। अगले दिन ऑफिस में राहुल ने आयशा को केबिन बुलाया।
"आयशा, ये नया प्रोजेक्ट – बड़ा वेडिंग इवेंट। तुम लीड करोगी।"
आयशा खुश हुई, "थैंक यू सर, लेकिन मैं नई हूं..."
राहुल ने कहा, "तुम कर सकती हो। लेकिन लेट नाइट्स होंगी, प्लानिंग के लिए।" आयशा ने हां कहा, "ठीक है, घर को मैनेज कर लूंगी।"
लेकिन घर की हालत खराब थी – इरफ़ान ने कहा, "कर लो, पैसे की जरूरत है।"
पहली लेट नाइट – शाम 7 बजे से शुरू।
आयशा और राहुल केबिन में – प्लानिंग, डिस्कशन्स। राहुल करीब बैठा, आयशा की तरफ झुका।
"ये डेकोरेशन कैसा?" उसने स्क्रीन दिखाई, हाथ आयशा के कंधे से सटा।
आयशा की हल्की सिहरन, लेकिन काम पर फोकस।
राहुल की प्यास – "ये खुशबू... इतनी करीब।" रात 10 बजे खत्म – आयशा उठी, "सर, घर जाना है।"
राहुल ने कहा, "रात हो गई, मैं ड्रॉप कर दूं?"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, ऑटो ले लूंगी।"
राहुल ने जोर दिया, "खतरा है, आओ।" आयशा मानी नहीं, घर चली गई।
अगले दिन फिर लेट नाइट – वही रूटीन।
राहुल फिर पूछा, "ड्रॉप?"
आयशा फिर मना। लेकिन तीसरे दिन बारिश – रात 11 बजे।
ऑटो नहीं मिला।
राहुल ने कहा, "अब तो आओ, भीग जाओगी।"
आयशा मानी, कार में बैठी। कार में – राहुल ड्राइव, आयशा बगल।
राहुल की नजरें – आयशा के बुर्के पर, कर्व्स इमेजिन।
"तुम्हारी कमर... स्तन... जांघें," वो सोचता।
आयशा चुप, लेकिन असहज। घर पहुंची, थैंक यू कहा।
ये रूटीन बन गया – हर लेट नाइट राहुल ड्रॉप करता।
कार में बातें – पर्सनल।
राहुल आयशा को घूरता, उसके ज ISM की बनावट इमेजिन – "गोरा जिस्म, मुलायम त्वचा।" एक दिन राहुल ने प्लान बनाया – गिफ्ट।
कार में बैठते वक्त, "आयशा, ये तुम्हारे लिए।"
एक पैकेट दिया।
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, क्यों?" राहुल ने कहा, "बस, प्रोजेक्ट की सक्सेस के लिए। खोलो।"
आयशा ने मना किया, लेकिन जिज्ञासा से ले लिया।
घर जाकर खोला – एक खूबसूरत साड़ी, लाल रंग, सिल्की।
आयशा को बहुत अच्छी लगी – "कितनी सुंदर।" अगले दिन राहुल ने पूछा, "गिफ्ट कैसा?"
आयशा ने कहा, "अच्छा, थैंक यू।"
राहुल ने कहा, "पहनकर ऑफिस आओ।"
आयशा ने मना किया, "नहीं सर, मैं बुर्का..." राहुल ने जोर दिया, "प्लीज, एक दिन।"
आयशा मानी, "ठीक है।"
अगले दिन – आयशा साड़ी पहनी, ऊपर बुर्का।
ऑफिस पहुंची, बुर्का उतारा – सब देखते रह गए। साड़ी में आयशा – कर्व्स उभरे, कमर दिखती, स्तन का उभार।
सब तारीफ – "वाह आयशा, स्टनिंग!"
राहुल की प्यास बढ़ी – "ये जिस्म... मेरा।"
उसने केबिन बुलाया, "तुम बहुत सुंदर लग रही हो।" आयशा शरमाई, "थैंक यू सर।"
राहुल करीब आया, कंधे पर हाथ रखा – गर्म स्पर्श।
फिर चूमने की कोशिश – होंठ करीब।
आयशा पीछे हटी, "नहीं सर!" घर चली गई। घर पर गिल्ट – "ये क्या?" ***** की, तौबा।
सहेलियों की स्टोरी याद – "कहीं मैं भी..."
इरफ़ान से कहा, "जॉब छोड़ दूं?"
इरफ़ान ने मना किया, "हालत खराब है, जारी रखो।" रात सेक्स – इरफ़ान के साथ, लेकिन राहुल का खयाल – प्यास बनी रही।
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17-01-2026, 08:32 PM
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भाग 13: बढ़ती प्यास और गुप्त योजनाराहुल के मन में आयशा की छवि अब हर पल घूमती रहती थी।
हर सुबह वो ऑफिस आता, अपनी डेस्क पर बैठता, लेकिन उसकी आंखें आयशा के केबिन की तरफ जातीं।
उसका दिल कहता, "वो... वो मेरी होनी चाहिए।"
पिछले हफ्तों की लेट नाइट्स, कार ड्रॉप्स, हल्के स्पर्श – सबने उसकी प्यास को और भड़का दिया था। राहुल अब हर मीटिंग में आयशा को घूरता – उसके चेहरे की मुस्कान, होंठों की हल्की हरकत, बुर्के के नीचे छिपे कर्व्स।
"ये स्तन... कितने भरे होंगे, दबाने पर कैसा फील होगा," वो कल्पना करता, उसके अनकट लंड में हलचल होती, सख्त हो जाता।
ऑफिस में वो आयशा के पास जाता, बहाना बनाकर – "ये फाइल देखो," कहकर करीब आता, उसकी खुशबू सूंघता।
आयशा की खुशबू – हल्की, मिट्टी सी, जो राहुल को पागल कर देती। एक दिन मीटिंग में – राहुल प्रेजेंट कर रहा था, आयशा नोट्स ले रही थी।
राहुल की नजरें आयशा के गले पर – वो हल्का सा नकाब हटाकर बैठी थी, गोरा गला चमक रहा था।
"ये गला... चूमकर काटना है," वो सोचता, लंड सख्त, पैंट में दबाव।
मीटिंग के बाद राहुल ने आयशा को रोका, "आयशा, थोड़ा डिस्कस।" आयशा रुकी, राहुल करीब आया – उसका शरीर आयशा से कुछ इंच दूर।
"ये पॉइंट... समझो," कहकर राहुल ने आयशा के कंधे पर हाथ रखा – हल्का दबाव, गर्म स्पर्श।
आयशा की सिहरन – "ये क्या?" लेकिन वो चुप रही, काम पर फोकस।
राहुल के मन में – "ये कंधा... नीचे कमर तक हाथ फेरना है, बुर्का उतारकर जिस्म देखना।" उसका लंड पूरी तरह सख्त – अनकट, मोटा, फोरस्किन पीछे खिंचती, सिर लाल, सीट से रगड़ता।
लेकिन वो कंट्रोल करता, "ठीक है, जाओ।"
शाम को लेट नाइट – आयशा और राहुल अकेले।
राहुल की प्यास – वो आयशा को देखता, उसके होंठों पर, फिर नीचे। "ये होंठ... चूसना है, गहरा किस," वो सोचता, लंड थ्रोब करता।
रात 10 बजे, राहुल ने कहा, "ड्रॉप?"
आयशा मानी, कार में।
ड्राइव – राहुल की नजरें आयशा के चेहरे पर, गले पर, उभार पर। "ये उभार... स्तन दबाकर चूसना है," वो इमेजिन करता, लंड पैंट में तंबू बनाता।
घर पहुंची, आयशा चली गई, लेकिन राहुल की तड़प – घर जाकर मास्टरबेट – आयशा की कल्पना में, लंड सहलाता, झड़ता।
अगले दिन फिर वही – ऑफिस में राहुल आयशा के पास आता, बात करता, स्पर्श की कोशिश।
एक दिन लंच में – राहुल आयशा के टेबल पर आया, "खाना साथ?" आयशा ने हां कहा, दोनों कैंटीन में।
राहुल की नजरें – आयशा के होंठों पर खाना खाते हुए।
"ये होंठ... मेरे लंड पर," वो सोचता, लंड हल्का सख्त।
बातें – "तुम्हारी लाइफ कैसी?" राहुल पूछता। आयशा बताती, "अच्छी, शौहर अच्छा है।"
राहुल का दिल जलता – "शौहर... उसे छोड़ देगी मेरे लिए।"
लेकिन प्यास बढ़ती – "उसे पाना है, जिस्म से, दिल से।"
शाम लेट नाइट – राहुल आयशा के करीब, कंधे सटाकर। उसकी सांस आयशा के कान पर – "ये अच्छा है ना?"
आयशा की गर्मी – "ये सांस... इतनी गर्म।"
राहुल का लंड सख्त – "ये कान... चूमना है, कान में फुसफुसाना।"
रात ड्रॉप – कार में राहुल की नजरें आयशा के जांघों पर। "ये जांघें... फैलाकर चूत चाटना है," वो इमेजिन, लंड रगड़ता स्टीयरिंग से।
घर जाकर राहुल की तड़प – प्रिया से सेक्स, लेकिन आयशा की कल्पना – "प्रिया नहीं, आयशा," सोचकर धक्के मारता, लेकिन संतुष्ट नहीं।
ये तड़प अब और बढ़ गई – राहुल नींद में आयशा का सपना देखता, जागकर मास्टरबेट।
ऑफिस में वो आयशा को देखकर कल्पना करता – बुर्का उतारना, स्तन दबाना, चूत में लंड डालना। उसका अनकट लंड हर दिन सख्त – ऑफिस में, घर में।
ये तड़प राहुल के बॉस गजेंद्र को पता चल गई।
गजेंद्र – एक सीनियर, चालाक, राहुल का मेंटर।
गजेंद्र ने नोटिस किया – राहुल का डिस्ट्रैक्शन, आयशा की तरफ देखना। एक दिन गजेंद्र ने राहुल को केबिन बुलाया।
"राहुल, बैठो। क्या बात है? तुम डिस्ट्रैक्ट लग रहे हो।"
राहुल ने टाला, "कुछ नहीं सर।"
गजेंद्र ने सीधे कहा, "आयशा? क्या तुम उसे पाना चाहते हो?" राहुल चौंका, लेकिन मान गया, "हां सर... वो... मुझे पसंद है।"
गजेंद्र ने कहा, "लेकिन तुम शादीशुदा हो – प्रिया से।"
राहुल ने कहा, "प्रिया मेरी बीवी है, लेकिन आयशा... मैं उसे पाना चाहता हूं। वो अलग है, उसकी सुंदरता, शरम... सब।"
गजेंद्र ने मुस्कुराकर कहा, "तो प्लान बनाओ। अगर पाना है तो उसके शौहर से अलग करो।" राहुल ने पूछा, "कैसे सर?"
गजेंद्र ने कहा, "दूर ले जाओ – यहां से। दो दिन बाद एक ट्रिप – अमेरिका, इवेंट मैनेजमेंट सीखने के लिए। तुम जाओ, और पार्टनर आयशा।"
राहुल की आंखें चमकीं, "हां सर... और रहना?"
गजेंद्र ने कहा, "एक ही अपार्टमेंट में – अकेले, दिन-रात साथ। मत बताना उसे, कहना जरूरी ट्रिप है।" राहुल ने कहा, "प्लान मस्त है सर... प्लीज।"
गजेंद्र ने हंसकर कहा, "करो, लेकिन सावधानी से।"
राहुल बाहर आया, मन में खुशी – "अमेरिका... अकेले आयशा के साथ। उसका जिस्म... पा लूंगा।"
उसका लंड सख्त – कल्पना में आयशा नंगी, उसके नीचे। अगले दो दिन – राहुल आयशा को प्रोजेक्ट में बिजी रखता, लेट नाइट्स।
आयशा थकती, लेकिन घर की हालत के लिए सहती।
ट्रिप की तैयारी – राहुल ने आयशा को बताया, "एक ट्रिप है, अमेरिका, लर्निंग के लिए। तुम मेरे साथ जाओगी।"
आयशा चौंकी, "सर, घर..." राहुल ने कहा, "जरूरी है, प्रोजेक्ट के लिए।"
आयशा ने इरफ़ान से बात की – "ट्रिप है, अमेरिका।"
इरफ़ान ने कहा, "जा, पैसे की जरूरत है।"
आयशा तैयार हुई, लेकिन मन में डर – "अकेले राहुल के साथ..." ट्रिप का दिन – एयरपोर्ट, फ्लाइट, अमेरिका पहुंच।
अपार्टमेंट – एक ही, दो बेडरूम, लेकिन कॉमन एरिया।
राहुल की प्यास – "अब... उसे पाऊंगा।"
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