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ट्यूशन में मेरी पहली चुदाई
मेरा नाम अभिषेक है और मेरी हाइट 5′ 11” है मैं दिल्ली से हूँ ,
उस समय तक मुझे चुदाई का कोई अनुभव नहीं हुआ था.
ये कहानी ट्यूशन में मिली पहली चूत 2015 की है, जब मैंने कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई को शुरू किया था.
मेरे दिमाग में लड़कियों के बूब्स देखने की बहुत ज्यादा ललक होती थी तो मेरा लंड खड़ा हो जाता था.
शुरुआत ऐसे हुई कि 2015 में वह लड़की मेरी क्लास में थी. सदफ दिखने में बहुत सेक्सी थीं
उसकी हाइट 5′ 5” थी पर उसके बूब्स 34, कमर 28 और गांड 34 की थी, जो उसे बहुत सुंदर बनाती थी.
वो जब भी ट्यूशन आती थी उसके सूट से उसके बूब्स बाहर आने को तैयार रहते थे सूट का गला लंबा होने के कारण ट्यूशन के सारे लड़के यहाँ तक सर का भी ध्यान रहता था की चुन्नी जरा सी हटे और जन्नत के दीदार हो ।
ये बात वो भी जानती थी इसलिए सारे लड़के उसके आगे पीछे घूमते थे। किसी दिन विजिबल ब्रा और किसी दिन डीप कट सूट पहन कर आना ट्यूशंस की अटेंडेंस पूरी रहने लगी थी ।
एक दिन ट्यूशन में मज़ाक मज़ाक में मैने उसका बैग गिरा दिया उसका सारा सामान मेज़ पर था सबने उसके मेकअप का सामान देखकर उसका खूब मजाक बनाया ।
वो गुस्से में आकर मेरा फोन लेकर भागी मैं उसके पीछे भगा हम दोनों सीढ़ियों पर थे मैं उससे अपना फोन छीन रहा था की मेरे हाथ उसकी कमर पर थे गुस्से गुस्से में मैने फोन वापस ले लिया।
मैने आज तक किसी को नहीं छुआ था ये अहसास मेरे लिए जन्नत से कम नहीं था। उसने मुझे कुछ नहीं कहा और मैं घर आ गया।
घर आकर मैंने वो पल याद कर मुट्ठी मारी। रात में मेरे फोन पर अज्ञात नंबर से फोन आया मैंने जैसे ही फोन उठाया उस तरफ से सदफ बात कर रही थी। उसने थोड़ी देर पढ़ाई की बात करने के बाद कहा कि मुझे उसको इस तरह नहीं छुना चाहिए था।
मैने अंजान बनते हुए कहा मैं तो फोन छीनने का प्रयास कर रहा था जो हुआ अंजाने मैं हुआ पर अच्छा बहुत लगा। क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लगा क्या।
उधर से कोई जवाब नहीं आया मेरे फिर से पूछने पर उसने बहुत धीमे आवाज में कहा बहुत अच्छा लगा। और उसने फोन काट दिया।
पर में समझ चुका था कि थोड़े से प्रयास से मैं उसको घोड़ी बना सकता हूं।
उसी दिन करीब रात के बारह बजे मैने उसको पढ़ाई का कुछ डाउट समझने के लिए मेसेज किया और हमारी इसी तरह बात होने लगी।
15 दिनों बाद मैने मजाक में बताया कि कैसे उसको छूने से मेरे रोंगटे खड़े हो गये थे । वो बोली की जब मेरे हाथ उसकी कमर पर थे उसका पूरा शरीर कांप गया था।
धीरे धीरे कब हम एक दूसरे से सेक्स चैट करने लगे पता ही नहीं चला। जब वो अपनी बहन के घर जाती तो चुप कर अपने जीजा को अपनी बहन चोदते हुए देखती और मुझे बताती।
पहला साल ग्रेजुएशन का ऐसे ही निकल गया न अब तक मैने उसे नंगा देखा था और न ही उसको चोद पाया था। जब भी ये बात होती शादी से पहले कुछ नहीं कहकर टाल देती थी मैं भी उसका दिल नहीं तोड़ना चाहता था इसलिए रुक जाता था।
पर अब रहा नहीं जा रहा था, तो मैंने उसको सीधे ही बोल दिया कि मुझे तुम्हें प्यार करना है और तुम्हारे अंदर समा जाना है। शादी से पहले कुछ नहीं करेंगे, उसने फिर ऐसे ही कहा।
मैंने उसके मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया। 2 ईयर की क्लास जब शुरू हुई, उससे बोला भी नहीं ।
घर आकर खूब लड़ने के बाद यह निर्धारित हुआ कि कल टयूशन में वो मुझे खुद को चूमने देगी । हम दोनों ने 15 मिनट पहले ट्यूशन जाना निर्धारित किया।
अगले दिन जैसे ही मैने उसको ट्यूशन में देखा में देखता ही रह गया क्या हुस्न मल्लिका लग रही थी वो उसकी चूचियां सूट से बाहर आने को तैयार थी। मेरा लन्ड उसको देख कर ही खड़ा हो गया था।
जैसे ही वो आई मै उसको लेकर तीसरी मंजिल की सीढ़ियों पर ले गया जहां कोई नहीं आता था मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए.
यह मेरा पहली बार था तो मुझे अलग ही अहसास हुआ.
हम दोनों का ये किस करीब 30 सेकंड चला.
इसके बाद वह अलग हुई और बोली- तुम बहुत गंदे हो, मैंने गाल पर किस करने को कहा था.
मैंने कहा- अब तो हो गया.
उस वक्त मेरा लंड तब बहुत ज्यादा कड़क हो गया था. मैं रुका नहीं और उसको बेहताशा चूमने लगा।
अब ये हमारा रोजाना का रूटीन हो गया था.अब मैंने इसके आगे बढ़ने की सोची.
एक दिन मैने उसको चूमते चूमते उसका सूट ऊपर किया और उसके चूचियों को मसलने लगा उसने मुझे रोकने का प्रयास भी नहीं किया ये देख मेरी हिम्मत और बढ़ गई और में उसकी ब्रा ऊपर करके बूब्स पर किस करने लग गया. उसके संगमरमर से बने दूधिया बूब्स देखकर मैं पागल सा हो गया और उसके निप्पलों को बारी बारी से अपने दांतों से पकड़ कर खींचते हुए चूमने लगा।
वह मादक आवाज में सिसकारने लगी. वह आह आह करती रही और मुझसे अपने दूध चुसवाती रही.
लेकिन उस वक्त क्लास जाने में देरी हो रही थी, तो हम दोनों जल्दी से अलग हुए । हवस मेरे दिमाग पर इस तरह चढ़ चुकी थी की मुझे किसी भी तरह आज उसकी चूत मारनी थी।
जैसे ही क्लास पूरी हुई मैने उसको कॉल कर कहा मुझे तुमसे मिलना है अभी समझ तो वो भी चुकी थी उसने मुझे मना नहीं किया।
मैने उसको बाइक पर बिठा अभिनव के कमरे पर ले गया।
हम दोनों वासना में इतने पागल हो चुके थे कि जाते ही मैने उसको होठों को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा वो भी पूरी तरह मेरा साथ दे रही थी। मेरे हाथ उसके बूब्स मसल रहे थे। उसकी आंखे बंद थी और मुंह से आह आह की आवाजे निकल रही थी। ये ही मौका था मैने उसकी सलवार उतार दी उसने मुझे रोका भी नहीं। उसने नीचे कुछ नहीं पहना था उसकी मखमली चूत जिसको उसने आज ही शेव किया था देखकर और पागल हो गया।
तभी मुझे एक और मस्ती सूझी.
मैंने ब्लू फिल्म में देखा था कि बर्फ का टुकड़ा यूज़ करते हैं.
मैंने भी उसके किचन में जाकर फ्रिज से एक बर्फ का टुकड़ा लिया और उसकी चूचियों के निप्पलों के चारों तरफ गोल-गोल घुमाने लगा.अब तो उसकी तड़प देखने लायक थी.गर्म औरत के बदन पर ठंडी बर्फ का टुकड़ा एकदम मस्त कर देने वाला अहसास था.
उसके दोनों निप्पलों पर बहुत देर तक बर्फ के टुकड़े को घुमाने के बाद मुझे एक और चीज़ याद आई कि मैं डेयरी मिल्क चॉकलेट भी उधर रखी देख कर आया हूँ.
मैं गया तो देखा कि वह एकदम पिघली हुई चॉकलेट थी. मैंने जल्दी से चॉकलेट के रैपर को फाड़ा और उसे उसके बूब्स के निप्पलों के चारों ओर घुमा-घुमा कर लगाने लगा.
मैं उसके दोनों निप्पलों को अपनी जीभ से चाटने लगा.
उसे चॉकलेट चुसवाने में इतना मज़ा आ रहा था कि वह बस ‘इस्स आ …’ कर रही थी.
फिर मैं धीरे-धीरे नीचे आया और उसकी चूत पर वह चॉकलेट लगाने लगा और अपनी जीभ फेरने लगा.और मैंने अपनी ऊंगली उसकी चूत में घुसा दी सदफ इतनी जोर से उछली उसका शरीर कांप रहा था उसको ऐसा देखकर मेरा जोश और बढ रहा था। मैं उसकी चूत को चाटने लगा उसका पूरा शरीर कांप रहा था।मैं भी पहली बार चुदाई कर रहा था मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और घुसाने की कोशिश करने लगा पर लंड मोटा था तो उसकी चुत के अन्दर नहीं जा रहा था मैने अपना लण्ङ उसकी चूत पर रखकर घुसाने की कोशिश की सदफ की चूत इतनी टाइट थी कि लन्ड जरा सा ही घुस पाया उसकी चीख पूरे कमरे में गूंज गई उसकी आंखों में आंसू थे। मैंने झट से उसके मुँह पर हाथ रखा जिससे कि आवाज बाहर ना जा पाए.
मगर वो जोर से चिल्लाने लगी थी- बाहर निकालो. मुझे बहुत दर्द हो रहा है. प्लीज़ बाबू निकलो न बाहर। आह....
फिर जब मेरा लंड चुत में पूरा नहीं घुस सका तो मैंने तेल मंगवाया और लंड पर लगाकर मैंने फिर से उसकी चूत पर लंड रखा और घुसाने की कोशिश की इस बार लंड सरकते हुए चूत के अन्दर थोड़ा सा घुस गया. उसकी चूत अंदर से भट्टी के सामान गरम थी। मुझे ऐसा लगने लगा कि मैंने आग की भट्टी में अपना लंड घुसा दिया है.वह आह आह करके मजा लेने लगी. लन्ड पूरा न जाने के कारण मैने उसको अपने ऊपर आने को कहा उसने मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट किया और धीरे-धीरे बैठती चली गई. उसकी सिसकारियां आह आह आह पूरे कमरे में गूंज रही थी।
मैं धीरे-धीरे पुश करने लगा, तो उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर चुभा दिए.वह दर्द से कराहती हुई बोली- आह जरा रुक जाओ ना। वह ऐसे ही एक मिनट रुकी रही.
फिर धीरे-धीरे हिलना शुरू हुई.
वह कामुक सिसकारियां लेने लगी- आह … आह … ओह … और ज़ोर से चोदो और ज़ोर से!
मैं उसके बूब्स को चूसता हुआ उसे मजा दे रहा था। करीब पांच मिनट बाद वह भी जोर-जोर से हिलना शुरू हो गई, एकदम से लौड़े के ऊपर-नीचे उसने अपनी चुत को रगड़ना चालू कर दिया था.
मैं भी नीचे से जोर-जोर से धक्के लगाने लगा और मैं उसके अन्दर ही झड़ने वाला था, तो उसे अपने लौड़े के ऊपर से हटा दिया.
उसी वक्त उसके बूब्स पर मेरा पानी जा गिरा.
मैंने नीचे देखा तो वह भी गीली हो चुकी थी. उसकी चूत से ख़ून निकला हुआ था।
हम दोनों ऐसे ही 2 मिनट एक-दूसरे से चिपके रहे.
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फिर उसको साफ किया ।
उसकी आंखों में दर्द और आनन्द महसूस किया जा सकता था। उसने प्यार में मेरे पूरे शरीर को चूमना शुरू किया। हम करीब पंद्रह मिनट तक एक दूसरे की चूमते रहे ।
मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो चुका था। उसकी कामुक आवाजों में एक अजीब सा नशा था .
उसकी मदभरी सिसकारियों से मुझे और जोश आ रहा था.मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में पूरा घुसाकर चाटे जा रहा था.
कुछ देर बाद उसका पानी निकल गया तो मैंने उसकी चूत का रस चाट लिया.
उसकी चूत का रस मस्त नमकीन और खट्टा था.
यह मेरा पहली बार था जब मैंने किसी की चुत का रस चाटा था.
मैं उसकी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा.
उससे यह हुआ कि वह वापस चुदास से तड़पने लगी थी.
उसे लंड के लिए यूं तड़पते हुए देख मुझे मज़ा आ रहा था.
मैं अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबा रहा था. उसकी चूचियां बहुत ही सॉफ्ट थी, ऐसा लग रहा था जैसे मैं रुई के गोलों को दबा रहा हूँ. मैने उसको घोड़ी बनने को कहा और उसकी चूत में लन्ड को घुसा दिया उसकी चूत इतनी गीली थी कि लन्ड आराम से उसकी चूत में जा रहा था।
मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मैने उसको बीस मिनट तक चोदता रहा। वो हर झटके में साथ दे रही थी। जैसे ही मेरा वीर्य निकलने वाला था मैने अपना लण्ङ उसकी कमर पर रख सारा वीर्य निकल दिया। फिर हमने कपड़े पहने हमे बहुत भुख लगी थी तो खाना खाया और उसको घर छोड़ दिया।
कुछ दिनों बाद वो हरियाणा अपनी बहन के यहाँ रहने चली गई। अब हम फोन पर ही बात करते थे। एग्जाम देने वो वापस आई हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे। हमने सर से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने के लिए टाइम ले लिया। मैने उसको कहा था कि तू बुर्का पहन कर आना और अंदर कुछ मत पहना। हमे प्यार करने में आसानी होगी। जनवरी के महीने में उस दिन सुबह छः बजे बहुत कोहरा था वो ओर मैं ठीक 5.45 पर ट्यूशन पहुंच गए थे । अभिनव को मैने गेट ड्यूटी पर लगा दिया और अन्दर से गेट बंद कर दिया।
मैने तुरंत सदफ को अपनी बाहों में भर लिया और उसको चूमने लगा वो मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैं जनता था कि हमारे पास टाइम कम है तो मैने सदफ के बुर्के को उठा उसको मेज़ पर झुका दिया और पिछे से उसकी चूत में लन्ड डाल दिया सेक्स करे काफी टाईम होने की वजह से उसकी जान निकल गई। उसकी आवाज सुनकर अभिनव बोला बाहर तक आवाज आ रही हैं दरिद्रो धीरे धीरे करो।
सदफ अपने दांत भींच कर मेरे लंड से होने वाले दर्द को सहन कर रही थीं.
मैं भी उनकी चूचियों को सहलाते हुए पेलता जा रहा था.
सदफ की सिसकारियां निकल रही थी आह आह । उसकी सिसकारिया मुझमें जोश भर रही थी मैने अपनी स्पीड तेज कर दी । करीब 10 मिनट तक मैने उसको चोदकर खूब मजे लिए।
तभी अभिनव ने गेट नॉक किया हम दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने। सर के आने तक सब कुछ नॉर्मल था हमने अपने डाउट्स पूछे और पेपर देने चले गए । अब हम जिस दिन भी पेपर होता उस दिन ट्यूशन जाते और खूब चुदाई करते। अभिनव भी बाहर खड़े खड़े थक गया था।
आखिरी पेपर के दिन भी हमें सुबह 6 बजे जाना था। मैं ओर अभिनव पहुंच चुके थे पर सदफ अभी तक नहीं आई थी। मैं ओर अभिनव खड़े बाते कर रहे थे तभी अभिनव बोला साले इतने दिनों से बाहर खड़े होकर चौकीदारी कर रहा हूं मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए। ये सुनकर मैं जोर जोर से हंसने लगा और कहा भोसड़िके जाकर लन्ड हिला ले अपना।
वो दरिंदे की तरह बोला तू साले दिखा तो उसे नंगा मैं तो हिला भी लूंगा।
मैने सोचा इतने दिन से हमारा राज इसके पास है इसने कभी गद्दारी नहीं की है सदफ का बदन तो इसे दिखा ही सकता हूँ।
पहले सोचा कि सदफ से बात करता हूं फिर ख्याल आया बाद मैं बता दुंगा आज चुप चाप कर लेते हैं।
मैने अभिनव को पर्दे के पीछे छुपा दिया। थोड़ी देर में सदफ आईं उसने पीले कलर का सूट पहना हुआ था उस पर काली जैकेट पहनी थी,उसने आते ही पूछा अभिनव कहा है बाहर कौन खड़ा होगा मैने कहा आता ही होगा।
मैने फटा फट गेट बंद किया और उसको बाहों में भर लिया और उसको बेहताशा चूमने लगा । वो भी मेरे होठों को चूम रही थी। मै जैसे ही उसकी जैकेट उतरने लगा उसने मुझे रोक दिया और बोली आज नहीं कही कोई आ ना जाए। डर मुझे भी लग रहा था पर अभिनव को भी दिखाना था तो मैने उसको कहा की सिर्फ बूब्स को प्यार करूंगा इससे ज्यादा नहीं।
और उसकी जैकेट को उतार दिया, मुझे पता था जब भी मैं उसकी गर्दन चूमता हूं वो अपनी आँखें बंद कर लेती हैं तो मैने उसको पर्दे की तरफ कर उसका सूट उतार दिया वो अब सिर्फ ब्रा में थी काली रंग की ब्रा में सफेद दूध जैसी चूचियों को देखकर मेरा लन्ड खड़ा हो गया। मैं उसकी गर्दन को चूम रहा था और मेरे हाथ उसके बूब्स को मसल रहे थे, अभिनव सदफ की संगमरमर से बनी चूचियों को देखकर अपने लन्ड को मसल रहा था । तब ही किसी के आने की आहट सुनकर हम अलग हो गये।
पेपर देकर घर आने के बाद मैने सदफ को सब सच बता दिया की पर्दे के पीछे अभिनव था आज , वो कुछ नहीं बोली मैने उसको समझाया कि क्यों जरूरी था ये सब। इधर अभिनव सदफ को चोदने की फिराक में था। पेपर देने के कुछ दिनों बाद ही वो हरियाणा चली गई। अब हमारी बातें सिर्फ फोन पर ही होती थी।
हमारा रिजल्ट आया और हम सभी पास हो गये थे सर ने थर्ड ईयर के ट्यूशन की भी शुरू कर दिया था मैंने ओर अभिनव ने ज्वॉइन भी कर लिया था पर सदफ अभी तक नहीं आई थी।
अभिनव रोज मुझे सदफ को चोदने का एक नया तरीका बताता था।
बीस दिन हो गये थे सदफ ने अभी तक भी ट्यूशन ज्वाइन नहीं किया था मैने सर को कहा कि उसको फोन करके बुला लो सर ने उसको फोन कर जल्दी आने के लिए कहा। दो दिन बाद ही वो वापस आ गई मैने उसे मिलने को कहा तो उसने मना कर दिया।
कहते है न जो होना है वो होकर रहेगा अगले दिन एक ऐसी घटना हुई जिसने हम तीनों की जिंदगी ही बदल दी।
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सदफ सुबह 6 बजे ट्यूशन जा रही थी उस दिन कोहरा थोड़ा ज्यादा था । गली सुनसान थी इसका फायदा उठा दो लड़कों ने उसको कोने में खींचने की कोशिश की लेकिन वो वहां से भाग गई वो घबराई हुई ट्यूशन पहुंची, मैं उस दिन छुट्टी पर था। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और वो घबराई हुई थी।
अभिनव ने उसको रोता देख अपने गले लगा लिया और उसके आंसू पूछ दिलासा देने लगा कमरे में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था अभिनव ने उसकी आंखों को बारी बारी से चूमने लगा उसके जो भी आंसू निकलते अभिनव उनको पी लेता वो अभी भी एक दूसरे के गले लगे हुए थे उनकी सांसे तेज़ हो चुकी थी।
अभिनव ने अपने होंठों को उसके होठों पर रख दिया सदफ को कोई भी विरोध नहीं करता देख अभिनव ने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया। अभिनव का लण्ङ पूरा तन चुका था। उसके हाथ सदफ की चूचियों को दबा रहे थे सदफ के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी।
वो दोनों अपने जज़्बातों में बह चुके थे। अभिनव ने टाइम न बर्बाद करते हुए उसकी सलवार उतार दी और और अपने लन्ड को सदफ की चूत में घुसा दिया उसकी चीख उसके मुंह में ही दब गई उसने अपने नाखून अभिनव की कमर में गड़ा दिए ये देख उसने जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। सदफ हर झटके को महसूस कर रही थी और अभिनव के जिस्म को चूम रही थी। उसकी सिसकारिया निकल रही थी “आई … उईई … हाय अल्लाह …धीरे धीरे करो....... आह आह!”
अभिनव जगह जगह उसके जिस्म पर अपने दांतो को गाड़ रहा था। उसके झटके ओर तेज हो रहे थे। उसके लन्ड ने सदफ की चूत को बुरी तरह से फ़ाड दिया था करीब पांच मिनट बाद अभिनव ने अपना वीर्य सदफ की चूत में निकाल दिया। दोनों ने फटाफट कपड़े पहने ओर खुद को नॉर्मल किया।
उस दिन सदफ बिना पढ़े ही घर चली गई। अभिनव ने मुझे फोन कर बताया आज उसके साथ क्या हुआ पर उसकी अपनी चुदाई के बारे में कुछ नहीं बताया ।
मैने सदफ से बात की उसको दिलासा दिया साथ ही आश्वासन दिया की अब से मैं उसके साथ जाया करूंगा।
अभिनव ने सदफ का जन्नत महसूस कराने के लिए धन्यवाद किया। उसने उसे बताया कि वो उसको कितना प्यार करता हैं। मैं नहीं जानता था कि दोनों के बीच मैं क्या खिचड़ी पक रही थी ।
हमारी बातें धीरे धीरे कम होती जा रही थी। ट्यूशन में भी वो अब मेरे पास नहीं बैठती थी।
सदफ का अजीब व्यवहार मुझे बेचैन कर रहा था। एक दिन मैने उसको टयूशन में ही रोक लिया मुझे जानना था कि उसका व्यवहार इतना अजीब क्यों हो गया है मेरे बहुत बार पूछने पर भी उसने मुझे कुछ नहीं कहा और मुझसे बात करने को मना कर चली गई।
मैंने भी उससे बात करना बंद कर दिया और ट्यूशन में एक और लड़की थी उससे हंसने बोलने लगा। जो सदफ को पसंद नहीं आ रहा था। एक दिन उसने मुझे फोन कर मिलने बुलाया और मुझे सारी बातें बता दी। की कैसे अभिनव ने उसको चोदा और भावनाओं में उसने उसे रोका भी नहीं।
उस दिन मैने उसको कुछ नहीं कहा उसके अनुसार उससे गलती हुई थी। मैने उसके माथे को चूम कर उसे गले लगा लिया। उसके गले लगते ही मेरा लन्ड तुरंत खड़ा हो गया था पर मैने उस दिन कुछ नहीं किया। अब हम अभिनव को बाहर भी नहीं खड़ा कर सकते थे।
हम दोनों ही तड़प रहे थे कमरा भी खाली नहीं मिल रहा था कोई, कुछ ओर दिन बाद जब उसके जाने का समय आ रहा था हमने डिसीजन लिया की अभिनव को बाहर खड़ा करने को बोला जाए और अगर उसने कुछ मांगा तो उसको देखने को बोल देंगे। पर शेर के मुंह जब खून लग चुका हो तो वो बिना शिकार करे कैसा रहेगा । उसने सीधे कहा मेरा कमरा चाहिए तो मुझे भी चाहिए।
सदफ हरियाणा जाने से पहले मेरे साथ सेक्स करने को बेताब थी मैने सदफ को कहा की अभिनव तेरे साथ घर पर मूवी देखना चाहता है एक दो किस करना चाहे तो मना मत करना । सदफ खुद अभिनव से चुदना चाहती थी इसलिए वो अभिनव से मिलने के लिए तैयार हो गई मैं जानता था वो दरिन्दा आज उसकी बहुत गंदी चुदाई करेगा । सदफ को सुबह 10 बजे मैने कार से पिक कर लिया और अभिनव के रूम पर ले आया । सदफ ने आज हरे रंग का सूट और टाइट फिट लेगिंग पहन रखी थी। और ऐसी बला की खूबसूरत लग रही थी कि मेरा मन उसको गाड़ी में ही चोदने का कर गया था।
इधर अभिनव भी पूरा तैयार था उसने अपना कमरा फूलों से सजाया हुआ था । हमने नाश्ता किया और आपस मे बातें करने लगे। अभिनव ने दो पैग लगाए और सिगरेट के कश लेता हुआ बोला क्या प्रोग्राम है अब। मैने सदफ को इशारा किया कि मैं कमरे से बाहर जाता हूँ । अभिनव ने सिगरेट का कश मारते हुए बोला हां तू आराम से आ।
मैं अभी बाहर भी नहीं निकला था कि अभिनव ने सदफ को बाहों में भर लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए। सदफ की आँखें बंद हो चुकी थी और वो उसका खुल कर साथ दे रही थी। मैं भी मौका पाकर सोफे के पीछे छुप कर बैठ गया। अभिनव ने सदफ की आंखों को चूमते हुए पेग बनाने का इशारा किया और बोला बहुत तड़पा हूँ तुझे प्यार करने के लिए जब से तुझे चोदा है उस दिन से हर रात तुझे प्यार कर रहा हूं आज मिली है खूब पेलूंगा आज तुझे।
शराब पीने के बाद अभिनव ने अपने लन्ड को निकाल कर सदफ को उसको चूसने को कहा पहले तो उसने मना कर दिया पर उसके बार बार कहने पर सदफ ने उसके लन्ड को अपने मुंह में ले लिया और उसके लन्ड को चूसने लगी अभिनव ने सदफ के बालों को पकड़ कर मुंह में ही झटके मारने शुरू कर दिया करीब पांच छः झटके मार कर उसने सदफ को फिर से चूमना शुरू कर दिया उसके हाथ उसकी चूचियों को दबा रहे थे। सोफे के पीछे मेरी हालत खराब हो रही थी।
सदफ की सिसकारियां अभिनव को ओर उत्तेजित कर रही थी उसने सदफ की सलवार उतार दी और उसकी चूत को चाटने लगा उसकी जीभ अपनी चूत पर लगने से सदफ का शरीर कांप रहा था अभिनव ने अपनी जीभ को सदफ की चूत के अंदर बाहर कर रहा था। उसने अपनी दो उंगलियां सदफ की चूत में घुसा दी। सदफ ने अभिनव के सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और अपना सारा पानी उसके मुंह पर निकाल दिया। उसकी सिसकारिया पूरे कमरे में गूंज रही थी। अभिनव ने अपने लन्ड को सदफ की चूत में घुसा दिया चूत इतनी गीली थी कि पूरा लन्ड आराम से अन्दर चला गया।
अभिनव जोर जोर से झटके मार रहा था और सदफ हर झटके में उसका साथ दे रही थी। अब मैं उसे जोर से चूमने लगा और अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को दबाने लगा और जोर जोर से चोदने लगा.
मेरे लंड के धक्कों से सदफ के मुंह से आवाजें निकल रही थी - आह … आह … ओह … उम … फ … क… फक… मी… बेबी… ओह… यह… यह!
उसकी आवाज को सुनकर अभिनव और भी जोश से भर गया और जोर से चोदने लगा.फिर उसने सदफ के दोनों पैरों को मोड़कर उसके घुटनों को छाती से सटा दिया और चूत में लंड को घुसा कर दनादन चोदना शुरू कर दिया।
ख़च ख़च की आवाज से पूरा कमरा चहक रहा था। करीब पंद्रह मिनट बाद अभिनव ने सदफ के पेट पर सारा वीर्य निकल दिया। उसने सदफ के माथे को चूमा और उसके ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा। उसका लन्ड फिर से खड़ा हो चुका था उसके हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे ।
फिर कुछ ही देर बाद अभिनव उठा और सदफ के पैरों के पास अपने घुटने के बल बैठ गया।
उसने सदफ के दोनों पैरों को अपने काँधे पर रखा और अपने दोनों हाथ गर्दन के पास रखे।
इस बीच सदफ ने अपने हाथों से उसका लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद में सेट किया।
फिर अभिनव ने ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर चला गया दे टपाटप लगातार सदफ की चूत को चोदने लगा।
उसके लंड के रगड़ से सदफ के चूत से सफेद पानी निकल रहा था। अब मेरे आने का समय हो रहा था तो मैं चुप चाप घर के बाहर चला गया और खिड़की से अंदर झांकने लगा।
सदफ उसके लंड पर पक्की रंडी जैसी उछल रही थी और बोल रही थी, “आज आया चुदाई का मजा, ओह मेरे अभिनव, आज से जब चाहो अपनी इस बीबी को चोदने चले आना, बस अभिषेक के सामने नहीं । ”
अभिनव हंस के बोला, “बोल तो उसके सामने भी चोद दूँ तुझे, मेरी रखैल! साली तू है बड़ी चुदक्कड़ लेकिन दिखती नहीं है!”
“आई … उईई … हाय अल्लाह …और जोर से चोदो मुझे आह..... ओर जोर से .... !” सदफ पूरे मजे ले रही थी।
लगभग 15 मिनट अभिनव ने सदफ की चुदाई की, फिर दोनों झड़ गए।
अब मैंने गेट खटखटाया।
लेकिन फिर भी अभिनव ने 10 मिनट बाद दरवाजा खोला।
सदफ के पूरे कपड़े पसीने से गीले थे । मैं जानता था आज क्या हुआ है मैने सदफ को चलने को कहा और अभिनव को बोला शाम में आते हैं।
अभिनव बोला, “ तैयार रहना , अब सदफ चुदेगी रोज और तू भी चोद लेना आज ही , मैं रात को आता हूँ यहीं सोने!”
मैं सदफ को कार में बैठा कर घर ले जा रहा था मैंने अनजान बनते हुए कहा और कौन सी मूवी देखी तुम दोनों ने मिलकर, उसने कुछ किया तो नहीं था। पहले तो उसने कुछ नहीं कहा, पर जोर देने पर वो बोली कुछ ज्यादा नहीं उसने एक दो पप्पी ली बस। मैं भी मन ही मन कह रहा था खूब मजा लेकर चुदाई की ओर कुछ खास नहीं।
हमने होटल जाकर खाना खाया और फिर शाम के लिए मैने उसको ड्रेस खरीद कर दी और उसको घर छोड़ आया । शाम में उसकी अम्मी की तबियत खराब हो गई जिस कारण उसने मिलने को मना कर दिया। अगले दिन सुबह ही वो हरियाणा फिर से चली गई मेरा उसके साथ थ्रीसम करने का सपना, सपना ही रह गया। हमारी बातें रोज हुआ करती थी ऐसे थर्ड ईयर के एग्जाम आ गए मेरे और अभिनव दोनों के लण्ङ ही उसको चोदने के लिए तैयार थे।
हम दोनों फोन पर ही सेक्सी बाते करते, ऐसे करते करते दो महीने बीत गए। इस बीच हमने मिलने के बहुत प्रोग्राम बनाए पर कोई भी प्रोग्राम नहीं बना। हमारे थर्ड ईयर के पेपर आने वाले थे हमने तभी मिलने का प्रोग्राम फिक्स किया। इधर अभिनव भी सदफ को चोदने की फिराक में लगा था शेर के मुंह खून लग चुका था। दो बार धुंआधार चुदाई पसंद सदफ को भी आई थी। मुझे कोई इल्म नहीं था कि वो दोनों भी सेक्स चैट कर रहे हैं।
रविवार के दिन सुबह अभिनव का व्हाट्सएप स्टेट्स हरियाणा लोकेशन का था उस टाइम तो मुझे कोई शक नहीं हुआ पर जब शाम तक सदफ का नंबर स्विच ऑफ़ होने से मेरा दिमाग ख़राब हो गया। दोनों ही मेरा फोन नहीं उठा रहे थे। रात को मेरे फोन पर मैसेज आया मैंने जैसे ही देखा मेरे होश उड़ गए अभिनव ने एक वीडियो भेजा जिसमें उसने सदफ को घोड़ी बनाया हुआ था और पीछे से उसको पेल रहा था उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी और वो पूरी निर्दयता के साथ उसको चोद रहा था। दो घंटे की उस वीडियो में उसने सदफ को जम कर चोदा। साली रांड़ की तरह चूद रही थी, अभिनव का लण्ङ उसकी चूत को अच्छे से पेल रहा था।
सदफ की चीख निकल रही थीं- उई अम्मी … तेरा बहुत बड़ा है साले … आह..... हाय अल्लाह.....धीरे धीरे चोदो आह.
अभिनव धकापेल चुदाई में लगा रहा.
कुछ ही देर बाद सदफ मस्ती में सिसकारती हुई कह रही थीं- आह्ह … मुझे रोज़ ऐसे शांत किया कर … मैं तेरे लंड से ऐसे ही चुदा करूँगी … आई लव यू! बस ऐसे ही चोदता रह मुझे।
अभिनव भी जोर-जोर से चूत में लंड दे रहा था.
करीब 20 मिनट तक चुत चोदने के बाद अभिनव सदफ की चूत में झड़ गया.
‘आह शिट यार … मेरी चूत में माल क्यों डाल दिया? अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो?’
अभिनव बोला- अब तो तू मेरे बच्चे की माँ बन ही जा । बहनचोद ।
सदफ बोलीं- अभी नहीं!
अभिनव भी कुछ नहीं बोला और बूब्स पीना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद सदफ फिर से गर्म हो गईं. और बोली
‘एक बार और करते हैं अभिनव!’
सदफ के बोलते ही अभिनव वापस लंड सहलाने लगा.उसने सदफ को जांघें चौड़ी करने को कहा.
सदफ ने अपने पैर दाएं-बाएं फैला कर अपनी जांघें खोल दीं और अभिनव के लंड को पकड़ कर उसका टोपा अपनी चूत के छेद में सैट कर लिया,नीचे से अपने चूतड़ उचकाए कि लंड अन्दर घुस जाए लेकिन ऐसे कैसे लंड अन्दर घुस जाता.
अभिनव ने ऊपर से एक झटका अन्दर को मारा तो सदफ की गीली चूत में मेरा लंड ऐसे घुस गया, जैसे मक्खन में गर्म छुरी.
सदफ के मुख से निकला- उम्म्ह … अहह … हाय अल्लाह......हय … ओह!
बस इसके बाद फिर से सदफ की चूत की दमदार चुदाई शुरू हो गई.वो भी अपने दोनों हाथों से सदफ की चूचियों को मसलने लगा।अब सदफ की कमर धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रही थी।
अभिनव सदफ के चूतड़ों पर अपने दोनों हाथों से चटाक-चटाक मारने लगा।
सदफ ने भी तेज़ झटका देना शुरू कर दिया।सदफ के चूतड़ लाल-लाल हो चुके थे।
सदफ अभिनव की छाती पर अपने दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर कूदने लगी।
पूरा कमरा थप-थप की आवाज़ से गूँज रहा था। सदफ ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रही थी और साथ में उसके लंड पर कूद भी रही थी।
करीब 10 मिनट में सदफ की चूत से पानी की बौछार निकली। सदफ थक चुकी थी, वो बेड पर चित होकर लेट गई।
कुछ देर बाद अभिनव सदफ के करीब आया और सदफ के गालों को पर किस करने लगा। सदफ भी अभिनव के जिस्म को चूम रही थी। फिर कुछ ही देर बाद अभिनव उठा और सदफ के पैरों के पास अपने घुटने के बल बैठ गया और सदफ के दोनों पैरों को अपने काँधे पर रखकर लंड सदफ की चूत के छेद में सेट किया।फिर उसने ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर! फिर तो दे टपाटप लगातार सदफ की चूत को चोदने लगा।उसके लंड के रगड़ से सदफ के चूत से सफेद पानी जैसा निकल रहा था।
पाँच मिनट बाद उसने पोज़िशन बदला, सदफ को फिर से डॉगी बना कर पीछे से पेलने लगा।उसने सदफ की चूत को रुई की तरह धुन के रख दिया था।पाँच मिनट बाद वो पलंग से नीचे उतरा और सदफ को चित करके लिटा दिया और उसके दोनों पैरों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। सदफ बेड के एकदम किनारे पर आ गई।फिर उसने सदफ के दोनों पैरों को मोड़कर उसके घुटनों को छाती से सटा उसकी चूत में लंड को घुसा कर दनादन पेलाई शुरू कर दी।
सदफ के मुँह से सिर्फ़ “आह! ऊह! आह! ऊह! उई माँ, मर गई रे.... और जोर से !” की आवाज़ निकल रही थी।
अभिनव भी हाँफ रहा था।करीब पाँच मिनट बाद दोनों एक-दूसरे से ऐसे चिपक गए जैसे एक-दूसरे में समा जाना चाहते हों।
दोनों बुरी तरह हाँफ रहे थे।कुछ देर बाद दोनों नॉर्मल हुए तो सच में सदफ के चेहरे और आँखों में गज़ब की चमक थी।
शायद इसी को तो यौन संतुष्टि कहते थे।
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उनकी वीडियो को देख मैने भी उस रात तीन बार मुट्ठी मारी। अगले दिन सुबह उठते ही मैने सदफ को कॉल की ओर अनजान बनते हुए कल के हाल चाल पूछे, उसने बड़े प्यार से झूठ बोला और कहा कि कल उसकी तबियत ज्यादा खराब थी इसलिए वो बात नहीं कर पाई।
अभिनव खुश था इसलिए वो हरियाणा से वापस ही नहीं आया उसका और सदफ का आज भी मिलने का प्रोग्राम था
दोनों के जिस्म में बेतहाशा आग लगी थी कल 4 बार चुदने के बाद भी सदफ आज उससे चुदने को तैयार थी। एग्जाम आने वाले थे सदफ वापस आ गई थी। हमारी बातें लगभग रोज ही होती थी मैने कभी भी उसको नहीं बताया कि मुझे पता है कि वो अभिनव से हरियाणा में चूद चुकी थी। वो बड़ी चालाकी से हम दोनों से बाते कर रही थी, और हम दोनों जानते हुए मजे ले रहे थे। हमे थ्रीसम करना था अब उसके साथ , सपने में हम दोनों मिल कर उसे चोद भी चुके थे। पर एक चीज हम दोनों ही नहीं समझ पा रहे थे की सदफ हम दोनों से क्यों चूद रही थी । पर हमें क्या करना था हमे हुस्न मल्लिका चोदने को मिल रही थी तो हम लगे पड़े थे ।
उसके आते ही मैने उसको मिलने बुलाया और वो अभिनव के घर आने को मान भी गई। शाम को मैने उसको घर से पिक कर लिया। जल्दी जल्दी में वो बुर्के में ही आ गई थी तो रास्ते से उसको कपड़े दिलाए और सीधा गाड़ी अभिनव के रूम पर लगा दी। तीनों ने खाना खाया और सदफ कपड़े बदलने चली गई मैने अभिनव को कमरे में ही छुपा दिया।
सदफ बाथरूम से जैसे ही बाहर आई काले सूट में ऐसा लगा कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। काले सूट में से उसकी चूचियां बाहर झाक रही थी उसको देखते ही मेरा खड़ा हो गया था। मैने तुरन्त उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको बेहताशा चूमने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मुझे उसे चोदे दो महीने बीत चुके थे मैं और देरी नहीं करने वाला था। मैने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और उसके कपड़े उतार दिए।अब सदफ के शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी थी। काली ब्रा में सफेद दूध जैसी चूचिया कहर ढा रही थी।
मैं बिस्तर पर लेट गया सदफ मेरी छाती के ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूमने लगी। मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था।
कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ की पीठ पर फिरने लगे और सदफ की ब्रा की हुक खोल दी। उसकी चूचियां मेरे हाथ में थी दूध जैसी सदफ और रुई से भी मुलायम उसकी चूचियो को में मुंह में भर कर पीने लगा। थोड़ी देर में मैने सदफ के बालों को पकड़कर उसको नीचे कर दिया और खुद ऊपर आ गया।
हम दोनों के होंठ अब भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे, और अपने हाथों से सदफ की गोल-गोल चूचियों को बारी-बारी से मसल रहा था।कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ के पेट और जाँघ पर फिरने लगे। फिर मेरा हाथ सदफ की पैंटी के अंदर जाकर अपनी अँगुलियों से उसकी चूत को मसलने लगा।
कुछ देर बाद सदफ मेरे सिर को धक्का देकर अपनी चूत के पास ले आई। मैं उसकी पैंटी को नीचे करने लगा तो सदफ ने भी अपने चूतड़ों को उठा दिया।पैंटी सरक कर घुटने के पास आ गई।सदफ ने अपने पैरों की मदद से पैंटी को उतार फेंका।
अब उसकी गोरी चिकनी चूत मुझे दिखाई दे रही थी। जिसे उसने कुछ देर पहले ही शेव किया था। बहनचोद अभिनव ने कुछ ही चुदाई मैं चूत को भोसड़ा बनाने की पूरी कोशिश की थी। बहन के लोड़े ने इतनी प्यारी चूत की फांके बना दी थी चार बार की चुदाई में ही। में सदफ की चूत की फाँकों को फैला-फैला कर देख रहा था, की कितना नुकसान किया है भोसडीके ने।
कुछ ही देर में मैने अपना मुँह चूत में लगा कर चूसने लगा और सदफ भी चूतड़ उठा-उठा कर चूत चुसवा रही थी।
ये सब देखते-देखते मेरी उँगली कब उसकी चूत में घुस चुकी, पता ही नहीं चला!
8 मिनट की चूत चुसाई में सदफ की चूत ने मेरे मुंह पर ही पानी छोड़ दिया।
वो हाँफने लगी।मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से अच्छे से साफ़ करके सदफ के बगल में आकर लेट गया।
कुछ देर तक हम दोनों लेटकर एक-दूसरे को चूमते-चाटते रहे।
फिर सदफ ने अपने हाथ मेरे जाँघिया के अंदर डाल कर मेरे लंड को मसलने लगी।
कुछ ही देर में सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को बाहर निकाला सदफ ने जब अपने हाथों से उसके लंड को नीचे दबाया तो मेरे लंड का लाल सुपाड़ा बाहर निकल गया।फिर वो उठी और अपना मुँह मेरे लंड के पास ले जाकर जीभ से उसके लंड को चाटने लगी। लंड के चारों तरफ जीभ फिरा-फिरा के उसके लंड को चाट रही थी।फिर सदफ लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
वो ज़बरदस्ती अपने मुँह में मेरे मोटे लंड को किसी अजगर के जैसे निगलने की प्रयास कर रही थी।इसके चलते कई बार लगा कि वो उल्टी कर देगी। मेरे लण्ङ का सारा वीर्य उसके मुंह में ही निकल गया।
वो मेरे लण्ङ को खड़ा करने के लिए फिर से चूसने लगी।
सदफ अपने मुँह से थूक उसके लंड पर गिरा के जोर-जोर से मूठ मार रही थी।
उसके भी मुँह से सिसकारी निकल रही थी।
कुछ देर बाद सदफ उठी और अपने पैरों को उसके शरीर के दोनों तरफ करके उसके लंड के पास बैठ गई और सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के सामने किया।
मैने झट से मोटा-तगड़ा लंड सदफ की चूत में घुसा दिया।
सदफ मेरे ऊपर लेटकर मेरी छाती को,तो कभी मेरे होठों को चूमने लगी। मैं भी अपने दोनों हाथों से सदफ की चूचियों को मसलने लगा।
अब सदफ की कमर धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रही थी। मैं पूरे जोश में आकर तेजी से झटके लगा रहा था
सदफ ने भी तेज़ झटका देना शुरू कर दिया। मैं जोश जोश में उसके चूतड़ों पर चाटे मार रहा था सदफ के चूतड़ लाल हो चुके थे।
सदफ मेरी छाती पर अपने दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर कूदने लगी थी।
पूरा कमरा थप-थप की आवाज़ से गूँज रहा था।
सदफ ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रही थी और साथ में मेरे लंड पर कूद भी रही थी। करीब पांच मिनट बाद मैने सदफ के दोनों पैरों को अपने काँधे पर रखकर अपना लंड उसकी चूत के छेद में सेट किया।
फिर ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर! फिर तो दे टपाटप उसकी चूत चोदने लगा उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी। ह! ऊह! आह! ऊह! अम्मी....., मर गई रे! धीरे......... आह..... या अल्लाह रहम...... आह । ” दस मिनट तक में उसको ऐसे ही चोदता रहा उसकी सिसकारियां बता रही थी कि मेरा लन्ड उसको बेहताशा मजा दे रहा है।
मैने सदफ को घोड़ी बना कर पीछे से अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और झटके मारने लगा। मैने उसके बालों को पकड़ कर पीछे खींचा वो संभली भी नहीं थी कि लन्ड का जोरदार झटका मैने मार दिया उसकी चीख निकल गई पर मैं रुका नहीं, और थोड़ा उसकी तरफ झुका उसके कान में जाकर कहा क्यों बहुत घोड़ी बनने का शौक है न अभिनव के सामने, उसका शरीर सुन्न हो गया ये सुनते ही, उसने अपने आप को छुटाने की कोशिश की पर मैने उसको चोदना जारी रखा। उसकी पोल खुल चुकी थी तो अभिनव भी सोफे के पीछे से बाहर आ गया हम दोनों जानते थे आज थ्रीसम पक्का है।
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अभिनव को देखते ही सदफ का चेहरा सफेद पड़ गया, मैं लगातार झटके दे रहा था इतने मैं मेरी पिचकारी निकल गई उसकी चूत में। मेरे बाल छोड़ते ही उसने अपने आप को साफ करते हुए कपड़े पहनने को लपकी। हम दोनों ने मिलकर सदफ को सारी कहानी शुरू से समझाई।
करीब आधे घंटे तक चली हमारी बातचीत में लगभग सब कुछ नॉर्मल हो गया। लेकिन सदफ ने स्पष्ट कह दिया था कि वो दोनों से एक साथ नहीं चुदेगी दोनों अलग अलग कर सकते हो पर साथ नहीं। और आज मैं दो बार कर चुकी हूं तो जो होना है बाद में होगा , मैने तो एक बार भी नहीं किया तुंरत अभिनव बोला। इस पर सदफ उसके माथे को चूम कर बोली बाद में करेंगे अच्छे से। फिर सदफ को मैने घर छोड़ दिया। दो दिन बाद हमारा पेपर था तो हमने कोई प्रोग्राम नहीं बनाया सीधा पेपर दिया। पेपर देकर लौटते समय अभिनव बोला तीन दिन हो गए हैं आज बुला लेते है उसको शाम में। घर आते ही मैने सदफ को कॉल किया और शाम में मिलने को कहा। वो जानती थी हम क्यों बुला रहे हैं तो उसने पीरियड्स का बहाना बना कर मना कर दिया। थोड़ी देर बाद उसका मैसेज आया और उसने मुझे अकेले मिलने को कहा। मैने उसके लिए तुरंत एक होटल बुक करवाया। और शाम में उसको होटल में खूब बजाया। सदफ पूरी गर्म हो गई थीं, जोर-जोर से “आहहह… उउउउ… इस्स” की आवाज़ें निकाल रही थी।
उसके पीरियड्स का तीसरा दिन था तो मैने कंडोम लगाया, ज्यादा गीली होने के कारण जैसे ही मैंने धक्का दिया, मेरा लंड सदफ की गीली बुर को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।
ऐसा लग रहा था मानो किसी आग की भट्टी में लंड रख दिया हो।
मैंने इतना गर्मी महसूस की, क्या बताऊँ! उस वक्त लग रहा था जैसे मैं जन्नत में दाखिल हो गया।
“ओहह हह!” एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड सदफ की चूत ने खा लिया।
फिर मैं अंदर-बाहर करने लगा।
“आहह हह… ईइइ इइइइ!” की आवाज़ें निकलने लगीं।
चूत गीली होने से फच-फच की आवाज़ के साथ झटके चलने लगे।
सदफ ने दोनों टांगें ऊपर उठा लीं और अपनी गांड उछाल-उछालकर पूरा लंड लेने लगीं।
मैंने झटके तेज कर दिए। और सदफ की चूत को रुई की तरह धुन के रख दिया।वो “ऊय माँ… आह हहह… ईइइ इइइइ… ऊउउउ उउउ… ऊय ययय” करती गईं।
मैं फच-फच चोदता गया।
सर्दी होने के बाद पंखा भी काम नहीं आ रहा था।
पसीने से लथपथ हम दोनों फिर भी घपाघप चोदते रहे।
करीब पंद्रह मिनट बाद सदफ और मैं दोनों झड़ गए।
थक कर हम दोनों लेट गए और एक दूसरे को चूमने लगें। करीब पंद्रह मिनट हमने एक दूसरे को चूमा और फिर मैने उसकी चूत को साफ किया और उसको चूमना चाहता ही था कि उसने मेरा सिर पकड़ लिया पर मैं रुका नहीं और उसकी चूत को चूम लिया मेरे एक मिनट तक चूमने से सदफ उत्तेजित हो गई और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा कर अपनी टांगें भींच दी। और नमकीन पानी की धार मेरे मुंह पर मार दी। हमने फिर एक दूसरे को साफ किया और फिर एक दूसरे को अपने हाथों से खाना खिलाकर हम वापस आ गए। ऐसे करते करते सारे पेपर खत्म हो गए मुझे और सदफ को जब भी टाइम मिलता हम एक दूसरे को खूब प्यार करते।
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इधर सदफ 21 साल की हो गई थी और लण्ङ लेने की वजह से उसकी सुंदरता में और निखार आ रहा था उसकी चूचियां अब 34 से 36 हो चुकी थी। सब कुछ नॉर्मल चल रहा था कि एक दिन एक ऐसी घटना हुई कि हमारी लाइफ बदल गई। सदफ के घर पर रिश्तेदार आए हुए थे उसमें उसका चेचेरा भाई यूसुफ भी आया हुआ था। उसकी गलत नजर सदफ पर थी। वो जब भी मौका मिलता उसकी चूचियो की गहराई को देखता रहता है। सदफ जानते हुए भी कुछ नहीं कह सकती थी। एक दिन उसने सदफ से सीधे सीधे उसका साइज पूछ लिया, सदफ को गुस्सा तो आया लेकिन घर का मैटर होने की वजह से उसने उसे कुछ नहीं कहा। लेकिन ये उसकी गलती थी उसका हौसला और भड़ गया। एक दिन शाम में वो सदफ की पैंटी पर अपना लण्ङ रगड़ रहा था सदफ को देखते ही वो घबरा गया और रूम से चला गया। सदफ ने गुस्से में ये बात सबसे बताने का बोल दिया उसने सॉरी बोला और आगे से ऐसा नहीं करेगा। सदफ ने उसको माफ भी कर दिया। उसने उस दिन गुस्से में फोन पर मुझे सब बताया। उसका मूड ठीक करने के लिए हम डिनर करने रेस्टोरेंट चले गए थोड़ा क्वालिटी टाइम बिताया। उसके बाद थोड़ी देर पार्क में घूम कर उसे उसके घर छोड़ दिया। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए एक दिन मजाक मजाक में मैने सदफ से पूछा कि यूसुफ का लन्ड कैसा था। उसका मूड अच्छा था तो हंसते हुए बोली लन्ड थोड़े था वो बहनचोद मिसाइल थी वो कम से कम 8 इंच और तीन इंच चौड़ा होगा। मैने भी हंसते हंसते बोला साला जिसकी चूत में गुसेगा फाड़ देगा। ऐसे ही वक्त बीतता रहा दस दिन से ज्यादा हो गया थे हमे सेक्स करे हुए। अभिनव के घर जा नहीं सकते थे क्योंकि सदफ उसके साथ नहीं करना चाहती थी।
उस दिन हम दोनों फोन सेक्स कर रहे थे वीडियो कॉल पर वो नंगी होकर अपनी चूत में ऊंगली कर रही थी इधर मैं अपने लन्ड को मसल रहा था। हम दोनों एक दूसरे के नशे में डूबे हुए थे की यूसुफ रोशनदान से उसको नंगा देख रहा था। सदफ ने सकपका कर कॉल कट की और कपड़े पहने। वो तुरंत यूसुफ से मिलने पहुंची उसको डर था कि वो पूरे परिवार में न बता दे। इधर यूसुफ अपने लन्ड को मसल रहा था।
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30-12-2025, 03:50 PM
सदफ जानती थी कि यूसुफ कैसे रुकेगा उसने उसके लन्ड को अपने मुंह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया यूसुफ का लन्ड इतना बड़ा था की आधा ही उसकी मुंह में जा रहा था। करीब पांच मिनट तक सदफ ने उसके लन्ड को चूस चूस कर उसका सारा पानी निकाल दिया। सदफ ने उसको समझा दिया कि वो किसी से कुछ नहीं कहेगा। पर वो सदफ को नंगी देख कर पागल हो चुका था। उसने सदफ को चूमना शुरू किया सदफ जानती थी इसलिए उसने उसको रोका नहीं। कुछ ही देर में सदफ के कपड़े उसके शरीर से उतर चुके थे। यूसुफ के हाथ सदफ की चूचियों को मसल रहे थे। यूसुफ ने सदफ को बिस्तर पर लिटाया और अपने लन्ड का सुपारा उसकी चूत पर सटा दिया। सदफ ने उसके लन्ड को पकड़ कर बोली ये पहली और आखिरी बार है, यूसुफ ने हामी भरते हुए एक जोरदार झटका मारा, सदफ की चूत गीली होने के बाद भी उसके लन्ड का सुपारा ही अंदर जा पाया ओर सदफ की चीख निकल गई, उसकी आंखों में आंसू निकल आये। उसने उसको लन्ड पर तेल लगाने को बोला पर उसने अपने लन्ड पर थूक लगाया और लन्ड को सदफ की चूत पर रखकर रगड़ने लगा सदफ की सिसकारियां निकल रही थी आह-आह....
उसकी रगड़ से सदफ का शरीर काप रहा था जैसे ही उसने अपनी टांगो को ऊपर किया यूसुफ ने सदफ के मुंह पर हाथ रख जोरदार झटका मार एक बार में ही अपना पूरा लन्ड उसकी चूत में डाल दिया सदफ की चीख उसके गले में ही रह गई। सदफ ने अपने नाखून यूसुफ की कमर पर गाढ़ दिए। वो जानवरों की तरह सदफ की चूत मार रहा था सदफ की आखों से लगातार आंसू बह रहे थे। करीब दो मिनट बाद यूसुफ का लन्ड सदफ की चूत में पूरी तरह सेट हो चुका था। रोने की जगह सदफ की सिसकारियां निकल रही थी जो यूसुफ को ओर दीवाना बना रही थी । करीब पंद्रह मिनट तक उसने सदफ को जमकर चोदा।
फिर उसने सदफ को घोड़ी बनाया और अपने लन्ड को पीछे से डालने लगा यूसुफ के लन्ड ने सदफ की चूत पहले ही फाड़ दी थी इसलिए इस बार एक ही बार में पूरा लन्ड अंदर था वो लगातार झटके मार रहा था। उसके हाथ सदफ की चूचियों को मसल रहे थे अब सदफ हर झटके पर उसका साथ दे रही थी। करीब दो मिनट में यूसुफ ने सदफ की पीठ पर सारा वीर्य निकाल दिया।
सदफ के चेहरे पर दर्द और सकून साथ साथ दे। यूसुफ ने सदफ के होठों को चूमा और बोला अब ऊंगली करने का जब भी मन करे याद कर लेना। सदफ ने कुछ नहीं कहा तो उसकी चूची दबाते हुए बोला दिल खुश कर दिया आज तूने।
इधर मैं सदफ को कई बार कॉल कर चुका था उसने करीब दो घंटे बाद कॉल किया और पूरी कहानी मुझे बताई। अब हम दोनों को डर इस बात का था कि ये राज छुपाने के लिए अभी सदफ को और कितना चुदना होगा।
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तीन दिन बीत चुके थे अभी तक यूसुफ ने कुछ नहीं बोला था किसी को न ही सदफ को चोदने का प्रयास किया था हम दोनों ही बेफिक्र हो गये थे। पर यूसुफ रोज सदफ की पेंटी पर अपना वीर्य निकाल रहा था। सदफ जानते हुए भी कुछ नहीं बोल रही थी।
जैसे ही सदफ नहा कर आती थी वो उसकी गीली पैंटी को सूंघता और मूठ मारकर सारा पानी निकाल देता था। सदफ जानती थी कि अगर यूसुफ को रोका तो मैटर बड़ा हो सकता है इसलिए मैंने भी सदफ को उसे रोकने के लिए नहीं कहा।
एक हफ्ता बीत चुका था पर उसने सदफ के कपड़ों पर मूठ मारना नहीं छोड़ा , हम दोनों को सेक्स किए एक महीना होने वाला था हम दोनों तड़प रहे थे, मैने उसको अभिनव के घर चलने के लिए बोला पर उसने वहां जाने को फिर से मना कर दिया। वो जानती थी वहां जाने का मतलब थ्रीसम पक्का है। जगह न मिल पाने की वजह से हम दोनों ही जल बिन मछली की तरह तड़प रहे थे। वासना की आग दोनों इतने अंधे हो चुके थे कि हमें कोई भी मिलता उसके साथ ही सेक्स करने को तैयार थे। सदफ यूसुफ से पारिवारिक संबंध की वजह से बच रही थी। हमने डिसाइड किया कि सदफ बाथरूम और अपने कमरे में कैमरा सेट करेगी जब यूसुफ मूठ मारेगा उसको देखकर सदफ अपनी चूत में ऊंगली करेंगी और उसको देखकर में मूठ मारूंगा। मैने सदफ को बल्ब कैमरा दे दिया। और कैमरे का सॉफ्टवेयर हम दोनों के फोन में डाल अटैच कर दिया। सदफ ने जाकर कैमरा लगा दिया।
कहते है न किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान। कैमरा सदफ को नहाते हुए देखने के लिए, यूसुफ के लिए सदफ को ऊंगली करते देखने के लिए लिया था पर,सोचा क्या था हुआ क्या। उसी रात सदफ की बहन साहिबा भी अपने घर रहने आ गई। अगले दिन मैं जब उठा तो ऐसे ही कैमरा ऑन कर देखने लगा बाथरूम खाली था। मैने सदफ को मैसेज किया और बोला आ जा फटा फट बहुत मन है तुझे देखने का। 11 बजे बोलकर वो गायब हो गई। मै भी कैमरा बंद कर जाने ही वाला था कि कुछ खट की आवाज हुई ओर जो हुआ उसे देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गई, सदफ की बहन अंदर आई और पानी की बाल्टी भरने लगी, उसने गेट बंद किया और अपने कपड़े उतारने लगी उसकी चूचियां मानो तराशा हुआ चमकता हुआ हीरा थी। उसकी शादी को 4 साल हो चुके थे पर जिस्म आज भी किसी कमसिन अप्सरा का ही था। साबुन लगने से उसका जिस्म मोती की तरह चमक रहा था, कब मेरे हाथ मेरे लण्ङ को मसल रहे थे पता ही नहीं चला।
शादी हुए चार साल होने के बाद भी उसकी चूत की फांके ऐसी थी कि अच्छे अच्छों को दीवाना बना दे । उसके जिस्म से गिरता हुआ पानी उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था, उसके जिस्म पर पानी की बूंदे मोती की तरह चमक रही थी। इधर मेरा हाथ मेरे लण्ङ पर जोर जोर से चल रहा था, करीब पांच मिनट बाद मेरे लन्ड ने पिचकारी छोड़ दी। उसको देखकर जन्नत का अहसास हो गया था।
उसके बाद मैं काम करने में व्यस्त हो गया शाम तीन बजे याद आया सदफ से तो बात करना ही भूल गया, फोन देखा तो दो मिस्ड कॉल पड़ी थी, फटा फट उसको मैसेज किया थोड़ी देर में उसका रिप्लाई आया फ़्री हो तो मैं जाती हूं नहाने। उसको हां बोल फटा फट सारा काम निपटा कर कैमरा ऑन कर उसको देखने लगा। हम दोनों ही घबराए हुए थे आज क्योंकि जो हम करने जा रहे थे वो काफी खतरनाक हो सकता था हमारे लिए पर वासना में हमे कुछ नहीं सूझ रहा था सदफ ने अपनी पेंटी को जानकर चूत के अंदर उंगली से डाला ताकि उस पर चूत की मलाई लग जाए। और हुआ भी ऐसा ही उसने नहाने के बाद जान पूछकर उसको वही छोड़ दिया और कपड़े पहन अपने कमरे में आ गई।
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हम दोनों कैमरा ऑन कर इंतजार कर रहे थे कि पांच मिनट बाद यूसुफ बाथरूम में आया और गेट बंद कर सदफ की पैंटी को सूंघने लगा, सदफ की पैंटी पर लगी मलाई उसने अपनी जीभ से चाट ली इधर सदफ ने अपनी सलवार उतार दी थी, उसकी उंगलियां उसकी चूत पर थी। एकाएक यूसुफ ने सदफ की पैंटी को अपने लन्ड पर रखा और मूठ मारने लगा। सदफ की उंगलियां उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थी, उन दोनों को देख मेरा लन्ड भी चूत मारने के लिए मचल रहा था। यूसुफ का मोटा काला मूसल सदफ की लाल पैंटी में हिलता हुआ सदफ को दीवाना बना रहा था। मैने सदफ को कंट्रोल करने को बोला, उसने जल्दी से सलवार पहन ली। इधर दस मिनट में यूसुफ ने पिचकारी छोड़ दी और सारा माल पैंटी पर गिरा हमेशा की तरह घर से बाहर निकल गया ताकि कही उसका नाम न आए।
उसके बाहर जाते ही सदफ बाथरूम की तरफ भागी और गेट बंद कर नंगी हो गई। और हम दोनों फोन सेक्स करने लगे। मैने सदफ को यूसुफ का वीर्य अपने जिस्म पर मलने के लिए कहा, उसने बिना सोचे उसके वीर्य को अपनी चूचियों पर लगाया और उन्हें मसलने लगी इस हरकत से मैं न चाहते हुए भी उत्तेजित हो गया। सदफ ने वीर्य लगी उंगलियों को अपनी चूत में डाल अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। करीब दो मिनट बाद ही सदफ का जिस्म कांपने लगा और उसकी चूत से पानी की धार बह गई, वो बडबडा रही थी प्लीज़ मुझे प्यार कर ले बुलाकर वरना इस तरह तो मैं यूसुफ से फिर चूद जाऊंगी। मै भी बोला जान तुझे पता है में खुद कितना परेशान हूँ तुझे पाने के लिए होटल तुझे जाना नहीं है, अभिनव के घर भी नहीं जाती तू अब बता क्या करूं।
अभी चल तुरंत अभिनव के घर तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगा बोल। वो झल्लाते हुए बोली हां दो लण्ङ से अपनी चूत फड़वा लूं। चल बता दूंगी क्या करना है। फिर हम दोनों बिजी हो गए।
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शाम में मैने उसको फिर से पूछा उसने फिर मना कर दिया। आज जो दिन में हुआ उसको लेकर वो परेशान थी, ज्यादा पूछने पर उसने कहा कि ऐसे ही चलता रहा तो वो यूसुफ से चूद जाएगी जो बेहद गलत होगा। क्योंकि यूसुफ को एक बार और देने के बाद मैं फैमिली में सेफ नहीं हूं। हमने कैमरे वाले प्लान को फिर से नहीं करने का फैसला किया। एक हफ्ता बीत गया हम बस फोन पर नॉर्मल बातें करते थे ।
यूसुफ की हरकते अब सदफ को परेशान कर रही थी, उसने मुझे बिना बताए यूसुफ को सबक सिखाने के लिए अपनी पेंटी मिर्च के पानी में डूबो कर बाथरूम में छोड़ दी जैसे ही यूसुफ ने उसको सूंघा जोर जोर से खांसते हुए बाहर आया। उसको पता चल गया था कि सदफ ने उसको पकड़ लिया है। सदफ ने शाम में ये बात मुझे बताई मैने उसको खूब सुनाया मैं जानता था कि अब उसकी हिम्मत बढ़ सकती हैं। और हुआ भी ऐसा ही अगले दिन उसने सदफ की वॉर्डरोब में रखी पैंटी निकाली और उस पर सारा वीर्य निकाल दिया। जब सदफ ने ये देखा तो वो आग बबूला हो गई उसने यूसुफ को बुलाया और दिखाया ये क्या बतमीज़ी है में घर में सबको बता दूंगी उसने माफ़ी मांगी और कहा अब से ऐसा नहीं होगा। बस जब से मैने तुम्हे चोदा है मेरे हर ख्याल में तुम ही हो बस एक बार मुझे खुद में और समाने दो बस एक बार फिर कभी नहीं। सदफ को यूसुफ से चुदाई करवाए एक महीने से ऊपर हो चुका है। उसके बाद भी उसने उसे मना कर दिया पर मना करने का तरीका रजामंदी वाला ज्यादा था ये अहसास यूसुफ समझ चुका था।
यूसुफ अब जब भी सदफ के सामने जाता अपने लन्ड को दिखाने की कोशिश करता। उसने अंडरवेयर पहनना बंद कर दिया था जिससे सफेद पजामे में उसका काला मूसल बाहर से ही दिख जाता था। सदफ़ कोशिश करती की यूसुफ से ज्यादा सामना न हो। रविवार के दिन मैं ज्यादा हॉर्नी हो रहा था मैंने सदफ़ को मिलने को बुलाया उसके मना करने पर,वीडियो कॉल पर सेक्स करने को बोला । वो पंद्रह मिनट बाद करने को तैयार हो गई। वो अपने कमरे से निकल नीचे गई सबकी लोकेशन देख वापस कमरे में आ गई ये सब यूसुफ भी देख रहा था, सदफ को लगा वो नहीं है पर वो चुप चाप उसके कमरे में संदूक के पीछे छिप गया।
सदफ ने कमरे में वापस आते ही मुझे वीडियो कॉल की। मैने उसको मैसेज कर बताया की यूसुफ कमरे में है अपने कपड़े मत उतरना। उसने कॉल कट की और मैसेज किया देख कर मजे ले और अपने सूट सलवार को उतार दिया।
मै कैमरे से देख रहा था , सदफ़ इस समय सफेद ब्रा और काली पैंटी में थी खूबसूरती ऐसी जैसे संगमरमर से तराशा पत्थर। उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार फेंकी। मुझे लग रहा था कि सदफ आज यूसुफ से चुदेगी। पर सदफ ने तुरंत बुर्का पहना और मुझे पांच मिनट में आने को कहा। उधर यूसुफ सदफ़ को नंगी देख पागल हो रहा था।
मैने तुरंत कार उठाई और सदफ को लेने निकल गया सदफ भी घर से निकल चुकी थी मैने उसको कार मैं बैठाया और हाईवे की तरफ कार को भगा दिया सदफ के चेहरे से ही पता चल रहा था कि वो जम कर चुदना चाहती है। उसने मुझे कार अभिनव के घर की तरह मोड़ने को कहा। मैं समझ गया था तो मैने अभिनव को तुरंत फोन किया वो भी घर नहीं था तो हमने उसे रास्ते से पिक किया।
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करीब पंद्रह मिनट में हम अभिनव के घर थे। दरवाजा खुलते ही सदफ मुझे पर टूट पड़ी वो मेरे होंठों को लॉलिपॉप की तरह चूस रही थी उसके हाथों ने बिना इतंजार करे मेरी पेंट उतार दी और मेरे कान में बोली अब इंतजार नहीं होता समा जा मुझमें बोलकर, उसने बुर्का अभिनव के सामने ही उतार दिया ये देख अभिनव ने भी अपनी पेंट उतार दी और अपने लन्ड को सहलाने लगा। मैने बिना इतंजार करे सदफ को घोड़ी बना कर पीछे से लन्ड घुसा दिया और झटके मारने लगा। उसकी सिसकारियां माहौल बदल रही थी ऊह! आह! ऊह! उई माँ, मर गई रे.... और जोर से , आह..... । मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। सदफ की मादक सिसकारियां सुन अभिनव ने अपना सदफ लौड़ा सदफ के मुंह पर घुमाने लगा।
वासना में डूबी सदफ ने उसके लन्ड को अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी। इतने मैं मेरे लण्ङ ने उसकी चूत में ही पिचकारी छोड़ दी। मैने अभिनव को इशारा किया वो तुरन्त पलटा और अपने लन्ड पर कंडोम चढ़ा कर सदफ की चूत में घुसा दिया और पेलने लगा। सदफ हर झटके का आनंद ले रही थी। लेकिन ज्यादा जोश की वजह से अभिनव दो मिनट में ही झड़ गया। वो दोनों बुरी तरह से हाफ रहे थे।
हमने नाश्ता किया, अभिनव ने दो पेग लगाए। और सिगरेट सुलगाई। मैं सदफ को बाथरूम ले गया और उसके जिस्म को चूम चूम कर साफ किया। मेरे चूमने से सदफ फिर से उत्तेजित हो गई उसको ठंडा करने के लिए मैं उसकी चूत को चूसने लगा मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थी। मेरे इस नए तरीके से सदफ तड़प रही थी, बस करो घुसा दो अन्दर आह..... उफ्फ... मैं रुका नहीं और चूसता रहा करीब दो मिनट बाद सदफ ने अपने हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और अपना सारा पानी मेरे मुंह पर निकाल दिया, उसका नमकीन पानी मैने सारा पी लिया जो बाहर लगा था उसको भी चाट लिया। सदफ़ के चेहरे पर सकून भरी मुस्कान थी। मैं जानता था कि ये संतुष्टि की मुस्कान है। हम बाहर आए तो अभिनव नंगा लेटा बीयर पी रहा था सदफ उसको देखते ही बोली आखिर कर ली अपनी इच्छा पूरी। क्यों मजा नहीं आया क्या और ये तो वॉर्म अप था असली फिल्म तो बाकी हैं। इस पर सदफ बोली जो मिलना था मिल गया अब आज कुछ नहीं मुझे जाना है घर अब । अभिनव सदफ को पीछे हग करने लगा, उसके हाथ सदफ की चूचियों को दबा रहे थे, वो उसकी गर्दन को चूम रहा था मुझे पता था यह सदफ की कमजोरी है।
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अभिनव ने सदफ़ के बुर्के को ऊपर उठाया कर अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसाने वाला ही था कि सदफ ने अपने आप को छुटा कर मुझे घर चलने को कहा ही था कि अभिनव ने सदफ को अपनी और जोर से खींच अपने होंठों को उसके होंठो पर रख दिए और चूसने लगा अभिनव की इस हरकत को सदफ जब तक समझती अभिनव ने सदफ को दीवार से सटा बुर्के पर ही झटके मारने शुरू कर दिया थे । उसके हाथ सदफ की कमर पर थे उसने सदफ की गर्दन को फिर से चूमने लगा, सदफ की पकड़ ढीली होते ही अभिनव ने बुर्का ऊपर कर लन्ड सदफ की चूत में उतार दिया और पेलने लगा। शराब के नशे में उसके झटके अलग ही रफ्तार से लग रहे थे सदफ बेचैन हो अभिनव की गर्दन में दांत गढ़ा रही थी पर रफ्तार में कोई कमी नहीं आई मैने अभिनव को कंडोम चढ़ाने को बोला तो उसने सदफ को जमीन पर लिटा कंडोम चढ़ा फिर से पेलने लगा। मेरा लन्ड सदफ को चोदते देख खड़ा हो गया। मैने सदफ को गांड़ मारने का इशारा किया पर उसके मना करने पर मैने कुछ नहीं कहा।
करीब पंद्रह मिनट बाद अभिनव ने अपना सारा पानी निकाल दिया। और सदफ के बगल में आकर लेट गया। सदफ ने बुर्का पहना और में उसको कार में बैठा उसके घर छोड़ आया।
सदफ अपने कमरे में जाते ही बुर्का उतारा और एक कपड़े से अपने आप को पूछा वीर्य के निशान साफ किए और वापस कपड़े पहन बिस्तर पर लेट गई।
और यही सबसे बड़ी गलती हुई जिस यूसुफ से बचने के चक्कर मे सदफ अभिनव से चूद कर आई थी वो बैठा रूम में सब देख रहा था ।
अगले दिन सुबह की नमाज पूरी होते ही यूसुफ सदफ के कमरे में आया इतनी सुबह यूसुफ को अपने कमरे में देख सदफ सकपका गई, यूसुफ सदफ के बिस्तर पर अपना पजामा उतार लेट गया। और सदफ को लेटने का इशारा किया।
सदफ को लगा शायद उसको कल नंगी देख ये ज्यादा उत्तेजित हो गया होगा, पर वो धीरे आवाज में बोला जल्दी आकर लेट ज्यादा वक्त नहीं है हमारे पास।
सदफ बोली नीचे जाओ तुम अभी पजामा पहन कर। इस पर यूसुफ ने सदफ के हाथ को पकड़ बिस्तर पर लिटाया और उसके कान में कुछ बोला उसके बोलते ही सदफ ने अपनी सलवार का नाडा खोल दिया और बिस्तर में उसके पास जाकर लेट गई।
यूसुफ ने अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रखकर अपना मूसल सदफ की चूत में घुसा दिया। सदफ की चीख उसके मुंह में ही रह गई। करीब पांच मिनट बाद यूसुफ ने पिचकारी सदफ को चूत में मार दी। और निढाल होकर पड़ गया।
इतनी सुबह जबरदस्त चुदाई से सदफ़ का रोम रोम दुःख रहा था। यूसुफ सदफ की चूचियों को दबा रहा था और उसकी पीठ चूम रहा था, सदफ जानती थी कि वो राउंड टू की तैयारी कर रहा है, यूसुफ ने सदफ के पैरों को मोड़ कर उसके पेट पर रख दिया जिससे उसकी चूत की फांके खुल गई यूसुफ नीचे झुककर सदफ की चूत चाटने लगा सदफ का जिस्म काप रहा था थोड़ी देर में सदफ कमर ऊपर कर अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ने लगी, यूसुफ ने दोनों हाथों से सदफ की कमर को पकड़ सदफ को चूत को और जोश से चाटने लगा कुछ ही देर में सदफ ने जिस्म ने छटपटा कर सारा पानी उसके मुंह पर निकाल दिया।
यूसुफ अभी भी सदफ की चूत चाट रहा था , सदफ निढाल हो पड़ी थी पर यूसुफ लगा हुआ था करीब दो मिनट बाद यूसुफ ने अपनी दो उंगलियों को सदफ़ की चूत में घुसा दिया और थोड़ा सा मोड कर अन्दर बाहर करने लगा उसकी जीभ अभी भी सदफ को चूत पर थी, यूसुफ की इस हरकत से सदफ तड़प गई उसके मुंह से मादक स्वर में निकला बस..... आह.... अब रहा नहीं जाता.... आह..... सदफ ने अपने दोनों हाथों को बिच लिया था और सदफ फिर से झड़ गई।
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वो पंद्रह मिनट में दो बार झड़ने की वजह से बुरी तरह से हाफ रही थी , यूसुफ खड़ा हुआ और अपने पजामे की जेब से एक जेल की डब्बी निकाली और उसको सदफ की चूत पर लगा दिया थोड़ा सा जेल उसने अपने लन्ड पर लगाया। उस जेल के लगते ही सदफ की चूत में एक अजीब सी जलन हो रही थी, यूसुफ ने सदफ के पैरों को फिर से उसके पेट पर लगाया और लन्ड सीधे सदफ़ की चूत में उतार दिया, इस बार एक ही बार में पूरा लन्ड सदफ़ की चूत के अंदर था।
वो पूरे जोश में झटके मार रहा था और सदफ उसका साथ दे रही थी, यूसुफ झड़ने वाला था तो उसने अपने लन्ड को बाहर निकाल लिया, सदफ ने उसके कान में धीरे से कहा रुको मत और जोर से करो। ये सुनते ही यूसुफ ने सदफ को घोड़ी बनाया उसकी कमर को बीच से झुका सदफ के बालों को अपने हाथों से पीछे खींच अपना लण्ङ सदफ की चूत में घुसा दिया और तेजी से झटके लगा रहा था सदफ़ दर्द में तड़प रही थीं फिर भी उसका साथ दे रही थी, आह... अम्मी मर गई.... आह.... ओर जोर से.... यूसुफ ओर तेज। सदफ की मादक सिसकारियां यूसुफ को पागल बना रही थी वो सदफ को दर्द मैं तड़पाना चाहता था इसलिए वो सदफ़ के चूतड़ों को जोर जोर से मारने लगा, सदफ की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी। उसने मार मार कर सदफ के दोनों चूतड लाल कर दिये थे।
दोनों बुरी तरह हॉफ रहे थे, यूसुफ वासना में जानवर बन चुका था , वो जानवरों की तरह जगह जगह सदफ की पीठ पर काट रहा था। वासनावश सदफ भी उसको नहीं रोक रही थी। यूसुफ ने सदफ को उसके ऊपर बैठने को कहा, सदफ ने यूसुफ के लन्ड को अपनी चूत पर सेट किया और उस पर बैठ गई, सदफ अपनी कमर को हिला रही थी यूसुफ आराम से लेटा था करीब दो मिनट बाद यूसुफ ने सदफ को अपनी टांगों से थोड़ा ऊपर उठाया और उसको चोदने लगा, उसने सदफ के निप्पलों को अपने मुंह में भरा और चूसने लगा। करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद यूसुफ सदफ़ की चूत में ही झड़ गया और अपने दांत सदफ के निप्पलों में गाढ़ दिए सदफ दर्द से तड़प उठी। उसके निप्पलों से खून निकल आया।
यूसुफ खड़ा हुआ और नीचे अपने कमरे में जाकर सो गया। सदफ ने अपने कपड़े ठीक किए और थक कर सो गई।
सदफ़ जब सो कर उठी तो उसका पूरा जिस्म दुःख रहा था उसकी टांगों पर और चूत के बाहर वीर्य जमा हुआ था, पेट और कमर पर दांतो के निशान बने हुए थे, निपल्स पर खून जम चुका था। चलने पर भी पैरों में दर्द हो रहा था।
वो नीचे जाती तो सबको पता चल जाता इसलिए उसने तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और वापस बिस्तर में लेट गई।
सदफ अच्छे से समझ चुकी थी कि यूसुफ को ओर मौके देना उसके लिए ठीक नहीं है पर आज सुबह की चुदाई उसके दिमाग से जा नहीं रही थी। जिस तरह यूसुफ ने सदफ को चोदा था, वो सदफ के लिए भूल पाना मुश्किल था।
12 बजे तक सदफ सोकर उठी, उसका जिस्म अब भी दुख रहा था , पेशाब करने मैं उसकी चूत में जलन हो रही थी यूसुफ के लन्ड से योनि अंदर से छिल गई थी, अभी भी सदफ चल नहीं पा रही थी उसने बेड पर ही खाना खाया और लेटी रही।
दिन में मेरी सदफ की बात हुई पर उसने मुझे कुछ नहीं बताया बुखार का बहाना बना दिया। शाम में यूसुफ सदफ के लिए हॉट चॉकलेट और पिज्जा लेकर आया साथ में सदफ़ को दर्द निवारक दवाइया भी लाकर दी। दर्द निवारक दवाइयों में उसने वियाग्रा ओर सेक्स इच्छा बढ़ाने वाली गोलियां भी मिला दी थी। क्योंकि यूसुफ फार्मा कंपनी में काम करता था उसने दर्द ठीक करने के नाम पर सदफ को ब्रेमेलानोटाइड इंजेक्शन लगा दिया।
रात तक सदफ लगभग ठीक हो गई थी उसने परिवार में सबके साथ डिनर किया गोली लेने की वजह से उसकी कामुकता बढ़ रही थी पर उसने खुद को नियंत्रित किया हुआ था।
अगले दिन भी यूसुफ ने सदफ को ब्रेमेलानोटाइड इंजेक्शन लगा दिया आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूं ये इंजेक्शन महिलाओं में सेक्स इच्छा को प्रबल करता हैं सदफ दो गोली वियाग्रा और दो इंजेक्शन ले चुकी थी। उसकी चूत से आग निकल रही थी।
सदफ ने यूसुफ को बुलाकर सारी बातें कही यूसुफ ने आंख मारते हुए कहा कहे तो आज शाम सब ठंडी कर दूं। ये कहकर वो चला गया सदफ भी अपना एडमिशन कराने कॉलेज चली गई। उसने मुझे मिलने को कहा पर मैं खुद शहर से बाहर था, मैने अभिनव को फोन कर मिलने को बोला। अभिनव ने जाकर उसके एडमिशन का सारा काम पूरा करवाया। दोनों ने रेस्टोरेंट जाकर खाना खाया, अभिनव ने सदफ को घर चलने को बोला पर सदफ ने मना कर दिया। फिर दोनों मूड ठीक करने के लिए प्लेग्राउंड चले गए ओर खूब एंजॉय किया। बाद में दोनों ने कॉफी पी ओर अभिनव सदफ को उसके घर छोड़ आया।
रात में करीब 12 बजे यूसुफ ने सदफ के कमरे को नॉक किया सदफ़ सो रही थी उसने नींद में ही दरवाजे को खोला, सदफ के जिस्म पर सिर्फ नाइटी थी जिसमें उसकी चूचियां बाहर झाक रही थी।
सदफ ने यूसुफ को कमरे के अंदर बुला लिया और अपनी नाइटी ठीक करते हुए बोली इतनी रात में क्या काम आ गया। यूसुफ हंसते हुए बोला मैं तो तेरी आग बुझाने आया था। सदफ मजाक में बोली पानी की बाल्टी कहा है फिर।
यूसुफ ने अपने लन्ड को बाहर निकालते हुए बोला बाल्टी भरी है कहे तो खाली कर दूं। सदफ़ मुंह बनाते हुए बोली नो थैंक्स। करीब आधे घंटे तक दोनों बाते करते रहे । सदफ ने यूसुफ को नीचे जाकर सोने को बोला, इस यूसुफ ने कहा एक बज चुके है रात के सब सो गए होगे अब जाना खतरे से खाली नहीं मैं अपने कमरे में तकियों को चादर उड़ा कर आया हूं उनके अनुसार मैं अभी भी नीचे हीं हूं। सदफ ने इतराते हुए कहा मैने थोड़े बुलाया था तुम्हे सो जाओ अब छत पर ही, कहकर कमरे से निकल दिया।
और सदफ सो गई करीब तीन बजे सदफ बाथरूम करने उठी तो यूसुफ छत पर खड़ा ठंड में कांप रहा था, सदफ ने फटा फट कमरे का गेट खोला और उसको अंदर बुला लिया, वो ठंड में ठिठुर रहा था उसको कम्बल देकर सदफ बाथरूम चली गई। पाँच मिनट बाद जब सदफ़ आई यूसुफ अभी भी ठिठुर रहा था।
सदफ ने यूसुफ को गले लगाया। यूसुफ ने अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रखा ही था कि सदफ ने मुंह फेर लिया और बोली नहीं। सदफ के जिस्म की गर्मी पाकर यूसुफ का शरीर धीरे धीरे गर्म हो रहा था।
यूसुफ के हाथ सदफ की नाइटी के अंदर थे और सदफ की कमर सहला रहे थे। यूसुफ ने फिर से अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रख दिया और उसको चूमने लगा सदफ ने इस बार उसको रोका नहीं, यूसुफ ने देर नहीं करते हुए सदफ की नाइटी उतार दी सदफ अब यूसुफ के सामने पूरी नंगी खड़ी थी।
सदफ ने यूसुफ को पीछे धक्का दिया। और नाइटी पहन बोली तुम बाहर ही ठीक थे अंदर गलत ही बुला लिया शायद।
सदफ ने यूसुफ को कम्बल में लेटने को बोला। और बिस्तर की दूसरी तरफ जाकर लेट गई। यूसुफ भी आकर लेट गया। थोड़ी देर में ही उसने ठंड लगने का बहाना बनाया।
सदफ कुछ नहीं बोली पर थोड़ी देर बाद सदफ यूसुफ की तरफ हो गई। यूसुफ ने तुरंत अपने हाथों को सदफ की कमर से लगा उससे चिपट गया। यूसुफ ने अपनी एक टांग भी सदफ के ऊपर रख दी। एक दूसरे की गर्मी पाकर दोनों को पसीने आने लगे थे। पर वो दोनों ही अलग नहीं हो रहे थे।
यूसुफ ने अपने पजामे को चुपचाप उतार दिया, उसका लण्ङ पूरा खड़ा हुआ था। यूसुफ ने सदफ के माथे पर आए पसीने को चूम लिया। सदफ़ भी भावनाओं में बहने वाली थी इसलिए उसने करवट बदल ली यूसुफ ने पीछे से उसको जकड़ लिया उसका लण्ङ सदफ को महसूस हो रहा था।
यूसुफ अपने हाथों से सदफ़ की चूचियों को दबा रहा था, सदफ अब सिसकारियां ले रही थी आह.... नहीं रुक... आह...
यूसुफ सदफ की गर्दन को चूम रहा था धीरे धीरे सदफ की सिसकारियां बढ़ रही थी। यूसुफ ने सदफ के ऊपर आकर उसकी नाइटी फिर से उतार दी, सदफ ने अपनी दोनों टांगे खोल दी ये खुला निमंत्रण था यूसुफ के लिए।
यूसुफ ने अपना लण्ङ सदफ की चूत पर लगाया ही था सदफ ने उसके लन्ड को पकड़ लिया और उसको रुकने को बोला, मैं अभी बाथरूम जाकर आई उसने नाइटी उठाई और बाथरूम की तरफ भागी। फटा फट कपड़े पहने खुद को नॉर्मल किया और पांच मिनट बाद बाहर निकली।
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यूसुफ नंगा लेटा हुआ उसका इंतजार कर रहा था सदफ ने आते ही यूसुफ को कपड़े पहने को बोला और कहा मेरे पीरियड्स आ गए है। कपड़े पहनो और चुप चाप सो जाओ।
दोनों ने बैठ कर बातें की नमाज का समय होने वाला था तो यूसुफ चुप चाप नीचे चला गया।
सदफ की क्लासेज शुरू होने वाली थी तो वो दिन में अपने काम निपटाने लगी। मेरी सदफ की दिन में एक बार बात जरूर होती थी, उसके सारे काम अभिनव कर रहा था मेरी कार अभिनव के पास ही थी। मैं अपने गांव गया हुआ था नेटवर्क कम होने की वजह से सदफ से वीडियो कॉल किए पंद्रह दिनों से ज्यादा हो चुके थे।
अभिनव रोज सदफ को अपने साथ कॉलेज ले जाता था, और अधिकतर घर भी छोड़ता था। इसी तरह चार दिन बीत गए, यूसुफ ने रात दो बजे सदफ के दरवाजे को नॉक किया, सदफ जानती थी यूसुफ होगा उसने गेट नहीं खोला। थोड़ी देर में यूसुफ चला गया। इसलिए सदफ ने सुबह की नमाज भी नहीं पढ़ी ।
अगले दिन सुबह ही सदफ नहाकर कॉलेज चली गई, शाम में सदफ जब घर आई तो घर पर उस समय कोई नहीं था। थोड़ी देर में यूसुफ काम से आया। उसने घर पर सदफ को अकेला देख तुरन्त उसके पास आया ओर पूछा में कल रात आया था तुमने गेट ही नहीं खोला था।
सदफ अनजान बनते हुए बोली कही भी नहीं कल तो गेट नॉक नहीं किया किसी ने। यूसुफ ने कहा आज दरवाजा खोल कर रखना 12 बजे के आस पास आऊंगा में। सदफ ने हंसते हुए उसकी बात टाल दी। उसने यूसुफ और अपने लिए चाय बनाई दोनों साथ बैठे चाय पी ही रहे थे सदफ के घरवाले भी वापस आ गए, सबने साथ बैठकर चाय पी, और खूब बाते की।
सदफ और उसकी खाला ने रात का खाना बनाया। सबने साथ बैठकर खाना खाया और टीवी देखते हुए बाते करने लगे। सदफ कॉलेज का काम करने के लिए वापस अपने कमरे में आ गई।
सदफ को पढ़ते पढ़ते कब 12 बज गए पता ही नहीं चला , कमरे का गेट खुला हुआ था यूसुफ अन्दर आते ही बोला क्या बात है मेरा इंतजार हो रहा था। यूसुफ को देख सदफ चौक गई, उसने फोन उठा टाइम देखा ओर यूसुफ को नीचे जाने के लिए बोला। मुझे अभी पढ़ना है , यूसुफ बोला पढ़ लो मैं क्या तुम्हारी किताब फाड़ दूंगा। सदफ ने साफ कहा किसी के सामने मुझसे पढ़ाई नहीं होती तुम जाओ।
यूसुफ गेट के बाहर चला गया लेकिन नीचे नहीं गया वो छत पर ही टहलने लगा। सदफ फिर से पढ़ाई करने में व्यस्त हो गई। करीब 1 बजे सदफ ने किताबें बंद की और वॉशरूम जाने लगी उसने देखा यूसुफ अभी भी छत पर बैठा है।
सदफ जानती थी यूसुफ अन्दर आया तो वो भी बहक जायेगी क्योंकि उसको सेक्स किए लंबा समय हो गया था। उसने कमरे की लाइट बंद की लेकिन गेट बंद करना भूल गई।
कमरे की लाइट बंद देख यूसुफ ने गेट खोल अंदर आ गया और अपने सारे कपड़े उतार सदफ के कम्बल में लेट गया।
सदफ़ उसके कम्बल में घुसते ही थोड़ी दूर होकर लेट गई और अनजान बनते हुए बोली इतनी रात में कैसे आ गए ऊपर। यूसुफ बोला में गया ही कब था ऊपर ही था इतनी देर से।
सदफ बोली ठंड लग रही होगी कम्बल में लेट कर सो जाओ और मुझे भी सोने दो मुझे कल जल्दी कॉलेज जाना है।
यूसुफ ने शरारती अंदाज में कहा पांच दिन से बेचारा लगातार खड़ा है इसके बारे मे भी तो कुछ सोचो।
सदफ बोली तो मूठ मार लेते, यूसुफ ने कहा कुछ दिखे तो मारने को चल तू अपनी चूत में ऊंगली घुसा और मैं तुझे देख कर मूठ मार लूंगा।
सदफ़ ने यूसुफ को चुप चाप सोने के लिए बोला ओर सोने लगी। यूसुफ ने सदफ को पीछे से जकड़ लिया और उसके पजामे को नीचे कर दिया सदफ ने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी।
यूसुफ ने अपना लण्ङ को मसल कर खड़ा करना शुरू किया ही था सदफ ने अपने पजामे को ऊपर किया और यूसुफ को पीछे कर दिया। सदफ की इस हरकत से यूसुफ गुस्सा हो गया ओर अपने लन्ड को जोर जोर मसलने लगा। जैसे ही उसका लण्ङ फांफनाने लगा वो तुंरत सदफ के पास आया ओर उसकी गर्दन पर किस करने लगा।
उसके हाथ सदफ की चूचियों को दबा रहे थे। सदफ ने उसके हाथों को छुड़ाने की कोशिश की पर छुड़ा नहीं पाई। यूसुफ के होंठ सदफ को गर्दन को चूम रहे थे। सदफ भी गरम हो चुकी थी वो पलटी, यूसुफ ने उसको चूमना शुरू कर दिया, वो भी यूसुफ का साथ दे रही थी।
तभी नीचे से कुछ खड़ खड़ की आवाज आई दोनों संभले और फटाफट कपड़े पहन लिए यूसुफ ने आकर देखा कि खाला के कमरे की लाइट ऑन है, तो वो चुप चाप छत पर बैठा गया।
सदफ का डर के मारे बुरा हाल था, करीब आधे घंटे बाद नीचे की लाइट बंद हुई यूसुफ तुरन्त सदफ के कमरे की तरफ भागा।
कमरे में आते ही उसने कुंडी लगाई पर सदफ बहुत डर चुकी थी उसने यूसुफ को जाने के लिए बोला। मौके की नज़ाकत को समझ वो चला गया।
सदफ मॉर्निंग में उठ कर कॉलेज चली गई । सदफ़ मेरे शहर में न होने की वजह से गुस्सा थी। धीरे धीरे सदफ अपनी पढ़ाई में व्यस्त होती जा रही थी। कॉलेज में उनके नए दोस्त बन रहे थे, ओर उसका ध्यान ज्यादातर वही रहता था।
इधर यूसुफ भी अगले हफ्ते अपने गांव वापस जा रहा था। वो सदफ को लपेटने की तैयारी में था। सदफ कॉलेज से घर फिर कॉलेज के काम में इतनी व्यस्त हो गई थी की पांच दिन ऐसे ही बीत गए। यूसुफ की सारी कोशिश बेकार हो रही थी।
यूसुफ ने निर्णय लिया कि वो आज रात में ही सदफ़ के कमरे में जायेगा, डिनर के समय यूसुफ ने सदफ से गेट खुला रखने को कहा, सदफ ने मना किया पर यूसुफ परसो जाने वाला था तो उसने जोर दिया कुछ नहीं होगा। सदफ देखते हैं बोलकर चली गई।
रात एक बजे तक सदफ पढ़ाई कर रही थी, तो यूसुफ ऊपर नहीं आया। पर जैसे ही सदफ के कमरे की लाइट बंद हुई यूसुफ तुरन्त ऊपर गया और देखा सदफ के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। उसने कमरा बंद किया और चटकनी लगा दी। कमरे में कोई नहीं था सदफ की ब्रा पेंटी जमीन में पड़ी थी। यूसुफ देख कर उत्तेजित हो गया। इतने मैं बाथरूम का दरवाजा खुला ओर उसके सामने सदफ ब्लैक स्वेटर और ब्लैक लोअर पहन कर खड़ी थी।
उस टाइट स्वेटर में उनके तने हुए बूब्स और मस्त फिगर दिख रही थी।
यूसुफ ने उसको गले लगा लिया, और सदफ के माथे को चूम लिया। यूसुफ के हाथ सदफ की पीठ को सहला रहे थे। थोड़ी देर में ही यूसुफ ने अपने होंठों को सदफ के होंठों पर रख दिया और उसको चूमने लगा, सदफ यूसुफ का साथ दे रही थी। पाँच मिनट तक दोनों एक दूसरे को चूमते रहे। यूसुफ ने सदफ के स्वेटर को निकाल दिया था, सदफ़ ने नीचे कुछ नहीं पहना था, उसकी चूचियां यूसुफ के हाथ में थी, ओर वो उन्हें मसल रहा था। सदफ की सिसकारियां निकल रही थी आह.... उफ्फ.... । यूसुफ ने सदफ के पजामे को उतार दिया और उसको बिस्तर पर लिटाया।
यूसुफ ने बिंदास कहा- आज बड़ी हॉट लग रही हो! सदफ ने इठलाते हुए कहा- अच्छा जी ?
यूसुफ ने अपनी उंगलियों को सदफ़ की चूत में घुसा दिया और अन्दर बाहर करने लगा , सदफ अपनी टांगें खोल कर उसका साथ दे रही थी। उसकी सिसकारियां माहौल बदल रही थी, आह.... आह.... धीरे धीरे उफ्फ.... यूसुफ..... आह..... । यूसुफ ने उंगलियां निकाल उन्हें चाट ली, और अपने मुंह को सदफ की चूत पर लगा दिया।
सदफ तड़प उठी उसका जिस्म कांप रहा था, सदफ की कमर खुद ही हिल रही थी, यूसुफ अपनी जीभ उसकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था। सदफ बेचैन हो बोली बस यूसुफ आह..... अब डाल दो.... उफ्फ.... हाय अल्लाह.... आह....। यूसुफ ने खड़े हो अपने सारे कपड़े निकाल दिए और अपने लन्ड को सदफ के मुंह में डाल दिया सदफ उसके लण्ङ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
यूसुफ का मोटा काला मूसल सदफ के मुंह में आधा ही जा रहा था । यूसुफ ने सदफ को लेटने का इशारा किया, यूसुफ ने सदफ के पैरों को मोड़ उसके पेट पर रख दिये।
यूसुफ ने लन्ड पर जेल लगाया और सदफ की चूत में एक झटके में उतार दिया सदफ दर्द में तड़प उठी आधे से ज्यादा लन्ड सदफ़ की चूत के अंदर था, यूसुफ जोर जोर झटके लगा रहा था। सदफ की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी आह.... आह ....आह..... यूसुफ..... ऐसे ही यूसुफ... आई लव यू यूसुफ .थोड़ा धीरे........... उफ्फ अम्मी.....
यूसुफ को लन्ड घुसाए हुए एक मिनट भी नहीं हुआ था कि सीढ़ियों से किसी के चढ़ने की आवाज हुई, दोनों घबरा गए लेकिन वासना में डूबे होने की वजह से यूसुफ ने झटके लगाने बंद नहीं किये.... सदफ के मुंह को यूसुफ ने हाथ से बंद कर दिया था और लगातार झटके लगा रहा था।
तभी किसी ने सदफ का गेट खटखटाया, दोनों को हवाइयां उड़ गई थी। लेकिन यूसुफ ने झटके मारने बंद नहीं किये सदफ खुल कर यूसुफ का साथ दे रही थी। करीब दो मिनट बाद फिर से किसी ने गेट पर नॉक किया , यूसुफ अभी भी सदफ को चोद रहा था। तभी सदफ़ ने यूसुफ को पीछे हटने को कहा, दोनों ने फटा फट कपड़े उठाए और चुप चाप बाथरूम की तरफ भागे।
सदफ ने यूसुफ को बाथरूम में छुपा दिया और कपड़े पहन आई और गेट खोला, गेट पर उसकी अम्मी थी उन्होंने पूछा गेट बंद क्यों किया हुआ था।
सदफ ने बाथरूम का बहाना बना दिया। अम्मी को तेज बुखार था तो सदफ ने उन्हें दवा दी और अपने पास ही सुला लिया। यूसुफ बाथरूम में छुपा हुआ बैठा था। ओर वहीं सो गया। सुबह में सदफ ने यूसुफ को नीचे भेज दिया।
दोनों ही कल जो भी हुआ उसके लिए बेचैन थे। सदफ ने आज अम्मी का ध्यान रखने के लिए कॉलेज से छुट्टी ले ली थी। घर पर सदफ को रुका देख यूसुफ ने भी बुखार का बहाना बना छुट्टी ले ली।
सुबह सदफ ने नाश्ता बना अम्मी को खिलाया, फिर सबने मिलकर नाश्ता किया। सदफ़ किचन में बर्तन धो रही थी तभी यूसुफ ने आकर सदफ़ को पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा। सदफ़ ने खुद को उससे छुड़ाया और पीछे करते हुए बोली हटो ना कोई देख लेगा। यूसुफ ने सदफ की चूचियों को दबाते हुए बोला कोई नहीं है नीचे अभी। और सदफ की कमर में चिकोटी काट ली।
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घर के सारे काम निपटा सदफ अपनी अम्मी के पास आ कर बैठ गई घर पर उस समय सिर्फ 4 लोग ही थे। ऐसे ही समय बीत रहा था उधर यूसुफ सदफ़ को चोदने के प्रयास में लगा था। एक घंटे में तीन बार यूसुफ सदफ को देखने ऊपर आ चुका था। ओर अब छत पर धूप में बैठा था।
जैसे ही सदफ की अम्मी सो गई सदफ ने नहाने के लिए कपड़े उठाए और यूसुफ को इशारा कर दिया। दोनों ने यह निर्धारित किया कि सदफ के नहाने जाने के पांच मिनट बाद यूसुफ फ्रेश होने के लिए टॉयलेट जाएगा । नीचे बाथरूम और टॉयलेट अलग बगल में ही थे।
सदफ ने बाथरूम में जाते ही नल चला दिया ताकि आवाज बाहर आती रहे। सदफ की नानी नीचे के कमरे में थी लेकिन चिंता ज्यादा नहीं थी क्योंकि उनको कम सुनाई देता था।
सदफ ने जाते ही अपने कपड़े उतार दिए और यूसुफ के आने का इंतजार करने लगी , थोड़ी देर में यूसुफ ने टॉयलेट का दरवाजा खोलने का नाटक किया और बाथरूम में घुस गया।
सदफ को नंगी देख यूसुफ ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसको चूमने लगा, उसने सदफ को घोड़ी बनाया और अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और चोदने लगा, , उसने सदफ के बालों को अपने हाथों में पकड़ लिया और झटके लगाने लगा। करीब बीस मिनट की धुंआधार चुदाई के बाद यूसुफ ने अपनी पिचकारी सदफ की चूत में ही निकाल दी।
दोनों एक दूसरे को चूमने लगें, यूसुफ ने साबुन सदफ के जिस्म पर लगाने लगा उसके हाथ सदफ के जिस्म पर फिरने से सदफ फिर से तड़पने लगी थी, यूसुफ ने देर न करते हुए उसको झुका कर अपने लन्ड को सदफ की चूत में फिर से घुसा दिया, और उसको पेलने लगा। यूसुफ जानता था कि सदफ इस समय चिल्ला नहीं सकती थी तो उसने अपनी एक ऊंगली सदफ की गान्ड में घुसा दी सदफ उछल पड़ी, उसको दर्द हो रहा था पर वासना में डूबे होने की वजह से उसने उसे रोका ही नहीं, यूसुफ की हिम्मत और बढ़ गई और उसने अपना लण्ङ निकल उसकी गान्ड में घुसाने की कोशिश करने लगा।
उसने सुपारा सदफ की गान्ड पर लगा रगड़ने लगा, ओर एक जोर का झटका मारा, सदफ़ की आंखों से आंसू निकल आये, यूसुफ का सिर्फ टोपा ही अंदर जा पाया था उसने वही रखा नारियल तेल अपने लन्ड पर लगाया और थोड़ा तेल उसकी गांड़ पर लगाया, सदफ दर्द के मारे तड़प रही थी ।
यूसुफ ने फिर से अपना लण्ङ उसकी गान्ड पर लगाया और जोर से झटका मारा इस बार एक चौथाई लन्ड उसकी गांड़ में था, यूसुफ ने सदफ के बालों को पकड़ अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर में ही सदफ़ की गांड़ मैं लन्ड आसानी से जा रहा था। सदफ को भी धीरे धीरे मज़ा आ रहा था। करीब पांच मिनट बाद यूसुफ सदफ़ की गांड़ में ही झड़ गया। दोनों ने एक दूसरे के जिस्म को साफ किया और बाहर आ गए।
सदफ ने पहली बार गांड़ मरवाई थी लेकिन उसको मजा आया था। कल सुबह ही यूसुफ को जाना था, वो अपना बैग तैयार कर रहा था , ऐसे ही दिन बीत गया सबने खाना खाया और सोने चले गए। रात होते ही यूसुफ सदफ के कमरे में आ गया और रात भर सदफ को जम कर चोदा। अगले दिन सुबह यूसुफ गांव चला गया। और शाम में यूसुफ ने सदफ के लिए शादी का रिश्ता भेज दिया, जिसे सदफ ओर उसके परिवार ने स्वीकार कर लिया। कुछ महीनों में उन दोनों की शादी हो गई। शादी से कुछ दिन पहले वो मुझसे मिलने आई और मैने उसको जम कर चोदा, फिर उसने कभी मुझसे बात नहीं की। आज उन दोनों के तीन बच्चे है। सात साल बाद एक दिन उसका फोन आया , उसके बाद क्या हुआ वो अलगी कहानी में।
आशा करता हूं आपको कहानी अच्छी लगी होगी .
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