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Gay/Lesb - LGBT ट्रेन की रात: एक अनोखा सफर
#1
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[img=464x3400][Image: RDT-20261017-0716453871404370744362843.jpg][/img]

ट्रेन की रात: एक अनोखा सफर
एक व्यस्त शहर से दूर, दिल्ली से मुंबई की ओर जा रही स्लीपर ट्रेन में, अमित और उसकी पत्नी प्रिया सफर कर रहे थे। अमित एक 30 साल का इंजीनियर था, मजबूत कद-काठी वाला, लेकिन घरेलू किस्म का आदमी। प्रिया 28 साल की थी, गोरी-चिट्टी, भरी हुई फिगर वाली, पतली कमर और उभरे हुए स्तनों वाली। दोनों की शादी को दो साल हो चुके थे, और ये उनका हनीमून का लेट प्लान था। ट्रेन की स्लीपर कोच में उनकी बर्थ ऊपर-नीचे थी। अमित नीचे की बर्थ पर लेटा हुआ था, प्रिया ऊपर। ट्रेन रात के अंधेरे में सरपट दौड़ रही थी, और बाहर बारिश की बूंदें खिड़की पर टपक रही थीं।ट्रेन स्टेशन से चली ही थी कि अमित की नजर सामने वाली बर्थ पर पड़ी। वहाँ दो खूबसूरत लड़कियाँ बैठी थीं—एक का नाम था रिया, दूसरी का शीला। दोनों 25-26 साल की लग रही थीं, लंबे बाल, मेकअप से चमकते चेहरे, और टाइट जींस-टॉप में उनके बदन की हर वक्र साफ नजर आ रही थी। रिया की आँखें बड़ी-बड़ी थीं, होंठ गुलाबी, और शीला की कमर इतनी पतली कि अमित की नजरें ठहर गईं। "कितनी सुंदर हैं ये," अमित ने मन ही मन सोचा। प्रिया ने भी देखा और मुस्कुराई। "ट्रेन में अच्छी कंपनी मिल गई," उसने अमित से कहा।बातचीत शुरू हुई। रिया और शीला मुंबई जा रही थीं, मॉडलिंग का काम करती थीं। वे दोनों हँस-हँसकर बातें कर रही थीं, और अमित-प्रिया को भी शामिल कर लिया। रात गहराने लगी। ट्रेन की लाइट्स डिम हो गईं। अमित और प्रिया अपनी बर्थ पर लेटे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अचानक रिया नीचे उतरी और अमित के पास आई। "भैया, ठंड लग रही है, क्या आपकी शॉल दे सकते हो?" उसने मीठी आवाज में पूछा। अमित ने शॉल दी, लेकिन उसकी नजर रिया की टाइट टॉप पर पड़ी, जहाँ उसके स्तन उभरे हुए थे। प्रिया ऊपर से देख रही थी और हँस पड़ी। "ये लड़कियाँ कितनी बोल्ड हैं," उसने फुसफुसाया।रात के 12 बज चुके थे। ट्रेन एक छोटे स्टेशन पर रुकी। बाहर अंधेरा था। शीला ने प्रिया को नीचे बुलाया। "दीदी, आओ न, हम लोग गेम खेलें। ट्रेन में बोरिंग लग रहा है।" प्रिया नीचे आई, और चारों बैठकर बातें करने लगे। रिया ने एक बोतल निकाली—वाइन की। "चलो, थोड़ा मज़ा करें," उसने कहा। अमित हिचकिचाया, लेकिन प्रिया ने हामी भर दी। "क्यों नहीं, सफर है।" वे सबने शॉट्स लिए। वाइन का असर होने लगा। बातें पर्सनल होने लगीं। रिया ने पूछा, "भाभी, आपका हसबैंड कितना रोमांटिक है?" प्रिया शरमा गई, लेकिन हँसकर बोली, "बहुत।" शीला ने अमित की ओर देखा और कहा, "दिखता तो है।"असर बढ़ा। रिया अमित के करीब आ गई। उसकी जांघ अमित की जांघ से छू रही थी। अमित का बदन गर्म हो रहा था। प्रिया ने देखा, लेकिन वो भी नशे में थी। अचानक रिया ने प्रिया का हाथ पकड़ा और कहा, "दीदी, आप कितनी सेक्सी हो। आपका फिगर देखकर जलन होती है।" प्रिया हँसी, लेकिन रिया ने उसकी कमर छू ली। "वाह, कितनी सॉफ्ट।" अमित स्तब्ध था, लेकिन उत्साहित भी। शीला ने अमित के कंधे पर हाथ रखा। "भैया, आप भी हैंडसम हो।" ट्रेन फिर चल पड़ी। पर्दे बंद थे, कोच में सन्नाटा।रिया ने प्रिया को अपनी बर्थ पर बुलाया। "आओ न, लेटकर बात करें।" प्रिया चली गई। अमित और शीला अकेले रह गए। शीला अमित के करीब आई। "भैया, क्या आपने कभी थ्रीसम ट्राई किया?" अमित चौंक गया। "नहीं..." शीला हँसी। "ट्राई करो न।" और उसने अमित के होंठों पर चुंबन दे दिया। अमित विरोध नहीं कर सका। शीला की जीभ उसके मुँह में थी, हाथ उसके सीने पर। अमित का हाथ शीला की कमर पर गया, नीचे की ओर। लेकिन तभी उसे कुछ अजीब लगा। शीला की जींस में उभार था—एक सख्त उभार। अमित पीछे हटा। "ये क्या?"उधर, रिया प्रिया के साथ थी। रिया ने प्रिया की टी-शर्ट ऊपर की, उसके स्तनों को छुआ। "वाह, कितने सॉफ्ट।" प्रिया नशे में थी, सिहर उठी। रिया ने अपना टॉप उतारा। उसके स्तन नकली लग रहे थे, लेकिन आकर्षक। रिया ने प्रिया को चूमना शुरू किया—गले पर, स्तनों पर। प्रिया की आह निकली। "आह... रिया..." लेकिन रिया ने अपनी जींस खोली, और प्रिया की आँखें फैल गईं। रिया के पास लिंग था—बड़ा, सख्त। "तुम... तुम लड़की नहीं हो?" प्रिया ने पूछा। रिया हँसी। "हम शीमेल हैं, डार्लिंग। लेकिन मज़ा दोगुना।"अमित ने शीला को देखा। शीला ने भी अपनी जींस उतारी। उसका लिंग बाहर आ गया—लंबा, मोटा, उत्तेजित। "हाँ, हम ट्रांस हैं। लेकिन देखो, कितना मज़ा आएगा।" अमित डर गया, लेकिन नशा और उत्सुकता ने उसे रोका। उधर रिया प्रिया को दबोच रही थी। प्रिया विरोध कर रही थी, लेकिन कमजोर। रिया ने प्रिया की पैंट उतारी, उसकी जांघें फैलाईं। "चुप रहो, एंजॉय करो।" और रिया ने अपना लिंग प्रिया की योनि में घुसा दिया। प्रिया चीखी—"आह... नहीं..." लेकिन रिया की गति तेज़ हो गई। प्रिया का बदन हिल रहा था, उसके स्तन उछल रहे थे। रिया ने उसके स्तनों को चूसा, काटा। "कितनी टाइट हो तुम।"अमित देख रहा था। शीला ने अमित को पकड़ा। "देखो, तेरी बीवी कितना मज़ा ले रही है। अब तू हमारा ले।" शीला ने अमित को घुटनों पर बैठाया, अपना लिंग उसके मुँह के पास लाया। "चूस इसे।" अमित ने मना किया, लेकिन शीला ने उसके बाल पकड़े। "चूस, वरना तेरी बीवी को और जोर से चोदेंगे।" अमित ने आँखें बंद कीं और शीला का लिंग मुँह में लिया। वो गर्म था, सख्त। शीला ने अमित का सिर दबाया, अंदर-बाहर करने लगी। अमित घुट रहा था, लेकिन जारी रहा। उधर रिया प्रिया को चोद रही थी, तेज़-तेज़। प्रिया की आहें अब खुशी में बदल रही थीं—"ओह... हाँ... और जोर से।"रिया और शीला ने जगह बदली। अब शीला प्रिया के पास गई। शीला ने प्रिया को डॉगी स्टाइल में किया, पीछे से घुसाया। प्रिया की चीख निकली, लेकिन वो अब सरेंडर कर चुकी थी। शीला की गेंदें प्रिया की जांघों से टकरा रही थीं। रिया अमित के पास आई। "अब तू मेरा चूस।" रिया का लिंग और बड़ा था। अमित ने चूसा, जीभ से सहलाया। रिया सिसकारी—"आह... अच्छा चूसता है तू।" ट्रेन की रफ्तार जैसे उनके मिलन की रफ्तार से मैच कर रही थी।फिर दोनों शीमेल्स ने अमित और प्रिया को साथ लाया। रिया ने प्रिया को अपनी गोद में बिठाया, नीचे से चोदा। शीला ने अमित को चूसवाया। प्रिया अब पूरी तरह खुल गई थी। "अमित... ये कितना अच्छा है... आह..." अमित भी अब उत्साहित था, अपना लिंग बाहर निकालकर हिलाने लगा। रिया ने प्रिया के स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। शीला ने अमित के मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया। अमित निगल गया, घृणा के साथ लेकिन मज़े में।रात भर ये खेल चला। सुबह ट्रेन मुंबई पहुँची। रिया और शीला ने नंबर एक्सचेंज किया। "फिर मिलेंगे," वे बोलीं। अमित और प्रिया स्तब्ध थे, लेकिन उनकी आँखों में नई चमक थी। घर जाकर वे इस रात को याद करते, और अपनी सेक्स लाइफ में नया ट्विस्ट लाते। शायद अगली ट्रेन में फिर ऐसा सफर।

कहानी का विस्तार
अमित और प्रिया की शादी अरेंज्ड थी। अमित ऑफिस में व्यस्त रहता, प्रिया घर संभालती। उनकी सेक्स लाइफ नॉर्मल थी—सप्ताह में एक-दो बार, मिशनरी स्टाइल। लेकिन ट्रेन का सफर सब बदल देगा। ट्रेन में एंट्री से पहले, अमित ने प्रिया से कहा, "ये सफर स्पेशल होगा।" प्रिया मुस्कुराई।रिया और शीला की बैकस्टोरी: वे दोनों ट्रांस वुमन थीं, मॉडलिंग में। शहर में वे ओपन लाइफ जीतीं, लेकिन गाँव या ट्रेन में छुपातीं। रिया की आवाज मीठी थी, शीला की बोल्ड। वाइन पीने के बाद, रिया ने प्रिया को छुआ—पहले हाथ, फिर कमर, फिर जांघ। प्रिया सिहर उठी। "रिया, ये क्या?" लेकिन नशा था। रिया ने प्रिया की ब्रा खोली, स्तनों को मसला। "कितने बड़े हैं तेरे।" प्रिया की निप्पल्स सख्त हो गईं।शीला अमित को चूम रही थी। अमित का लिंग सख्त हो गया। शीला ने उसका पैंट खोला, सहलाया। "वाह, तेरा भी अच्छा है।" लेकिन फिर शीला ने अपना दिखाया। अमित शॉक में। "तुम... मर्द हो?" शीला हँसी, "नहीं, शीमेल। दोनों का मज़ा।"मिलन का डिटेल: रिया ने प्रिया को लिटाया, उसकी योनि चाटी। प्रिया पागल हो गई—"आह... मत रुको।" फिर घुसाया। प्रिया की दीवारें फैलीं, दर्द और मज़ा। रिया की गति—धीरे, फिर तेज़। प्रिया के कूल्हे हिल रहे थे। शीला अमित के मुँह में जोर-जोर से। अमित की आँखों में आँसू, लेकिन वो जारी रहा।जगह बदलकर: शीला ने प्रिया को चोदा, पीछे से। प्रिया की गांड पर थप्पड़ मारे। "चिल्ला, साली।" प्रिया चिल्लाई। रिया ने अमित को चूसा—उसका लिंग मुँह में। अमित चरम पर पहुँचा। फिर दोनों शीमेल्स ने प्रिया को सैंडविच किया—एक आगे, एक पीछे। प्रिया बीच में, दो लिंगों से भरी। "आह... मार डालोगे..." लेकिन वो एंजॉय कर रही थी। अमित देखता रहा, अपना हिलाता।सुबह: वे थक गए। रिया ने कहा, "ये हमारा सीक्रेट।" अमित और प्रिया ने हामी भरी। मुंबई पहुँचकर, वे होटल गए, और वहाँ फिर से उस रात को रीक्रिएट किया—लेकिन अब अकेले। प्रिया बोली, "अमित, वो मज़ा अलग था।" अमित मुस्कुराया। शायद अगली बार रिया-शीला को बुलाएँ।
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#2
(06-09-2025, 12:04 PM)Fuckuguy Wrote: [img=539x1152][Image: 638030720_20250906_120037.jpg][/img]



Haaa re......inke lundo ko mumbai ke local train me dekhi thi....ssale bhikh mangte hai....aaaur agar koi paise nahi dete to apne sari ko upar utha kar apne lundo ko dikhte hai.....kaaasam se maja aa gaya tha unke lundo ko dekh kar....r

ट्रेन की रात: एक अनोखा सफर
एक व्यस्त शहर से दूर, दिल्ली से मुंबई की ओर जा रही स्लीपर ट्रेन में, अमित और उसकी पत्नी प्रिया सफर कर रहे थे। अमित एक 30 साल का इंजीनियर था, मजबूत कद-काठी वाला, लेकिन घरेलू किस्म का आदमी। प्रिया 28 साल की थी, गोरी-चिट्टी, भरी हुई फिगर वाली, पतली कमर और उभरे हुए स्तनों वाली। दोनों की शादी को दो साल हो चुके थे, और ये उनका हनीमून का लेट प्लान था। ट्रेन की स्लीपर कोच में उनकी बर्थ ऊपर-नीचे थी। अमित नीचे की बर्थ पर लेटा हुआ था, प्रिया ऊपर। ट्रेन रात के अंधेरे में सरपट दौड़ रही थी, और बाहर बारिश की बूंदें खिड़की पर टपक रही थीं।ट्रेन स्टेशन से चली ही थी कि अमित की नजर सामने वाली बर्थ पर पड़ी। वहाँ दो खूबसूरत लड़कियाँ बैठी थीं—एक का नाम था रिया, दूसरी का शीला। दोनों 25-26 साल की लग रही थीं, लंबे बाल, मेकअप से चमकते चेहरे, और टाइट जींस-टॉप में उनके बदन की हर वक्र साफ नजर आ रही थी। रिया की आँखें बड़ी-बड़ी थीं, होंठ गुलाबी, और शीला की कमर इतनी पतली कि अमित की नजरें ठहर गईं। "कितनी सुंदर हैं ये," अमित ने मन ही मन सोचा। प्रिया ने भी देखा और मुस्कुराई। "ट्रेन में अच्छी कंपनी मिल गई," उसने अमित से कहा।बातचीत शुरू हुई। रिया और शीला मुंबई जा रही थीं, मॉडलिंग का काम करती थीं। वे दोनों हँस-हँसकर बातें कर रही थीं, और अमित-प्रिया को भी शामिल कर लिया। रात गहराने लगी। ट्रेन की लाइट्स डिम हो गईं। अमित और प्रिया अपनी बर्थ पर लेटे, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अचानक रिया नीचे उतरी और अमित के पास आई। "भैया, ठंड लग रही है, क्या आपकी शॉल दे सकते हो?" उसने मीठी आवाज में पूछा। अमित ने शॉल दी, लेकिन उसकी नजर रिया की टाइट टॉप पर पड़ी, जहाँ उसके स्तन उभरे हुए थे। प्रिया ऊपर से देख रही थी और हँस पड़ी। "ये लड़कियाँ कितनी बोल्ड हैं," उसने फुसफुसाया।रात के 12 बज चुके थे। ट्रेन एक छोटे स्टेशन पर रुकी। बाहर अंधेरा था। शीला ने प्रिया को नीचे बुलाया। "दीदी, आओ न, हम लोग गेम खेलें। ट्रेन में बोरिंग लग रहा है।" प्रिया नीचे आई, और चारों बैठकर बातें करने लगे। रिया ने एक बोतल निकाली—वाइन की। "चलो, थोड़ा मज़ा करें," उसने कहा। अमित हिचकिचाया, लेकिन प्रिया ने हामी भर दी। "क्यों नहीं, सफर है।" वे सबने शॉट्स लिए। वाइन का असर होने लगा। बातें पर्सनल होने लगीं। रिया ने पूछा, "भाभी, आपका हसबैंड कितना रोमांटिक है?" प्रिया शरमा गई, लेकिन हँसकर बोली, "बहुत।" शीला ने अमित की ओर देखा और कहा, "दिखता तो है।"असर बढ़ा। रिया अमित के करीब आ गई। उसकी जांघ अमित की जांघ से छू रही थी। अमित का बदन गर्म हो रहा था। प्रिया ने देखा, लेकिन वो भी नशे में थी। अचानक रिया ने प्रिया का हाथ पकड़ा और कहा, "दीदी, आप कितनी सेक्सी हो। आपका फिगर देखकर जलन होती है।" प्रिया हँसी, लेकिन रिया ने उसकी कमर छू ली। "वाह, कितनी सॉफ्ट।" अमित स्तब्ध था, लेकिन उत्साहित भी। शीला ने अमित के कंधे पर हाथ रखा। "भैया, आप भी हैंडसम हो।" ट्रेन फिर चल पड़ी। पर्दे बंद थे, कोच में सन्नाटा।रिया ने प्रिया को अपनी बर्थ पर बुलाया। "आओ न, लेटकर बात करें।" प्रिया चली गई। अमित और शीला अकेले रह गए। शीला अमित के करीब आई। "भैया, क्या आपने कभी थ्रीसम ट्राई किया?" अमित चौंक गया। "नहीं..." शीला हँसी। "ट्राई करो न।" और उसने अमित के होंठों पर चुंबन दे दिया। अमित विरोध नहीं कर सका। शीला की जीभ उसके मुँह में थी, हाथ उसके सीने पर। अमित का हाथ शीला की कमर पर गया, नीचे की ओर। लेकिन तभी उसे कुछ अजीब लगा। शीला की जींस में उभार था—एक सख्त उभार। अमित पीछे हटा। "ये क्या?"उधर, रिया प्रिया के साथ थी। रिया ने प्रिया की टी-शर्ट ऊपर की, उसके स्तनों को छुआ। "वाह, कितने सॉफ्ट।" प्रिया नशे में थी, सिहर उठी। रिया ने अपना टॉप उतारा। उसके स्तन नकली लग रहे थे, लेकिन आकर्षक। रिया ने प्रिया को चूमना शुरू किया—गले पर, स्तनों पर। प्रिया की आह निकली। "आह... रिया..." लेकिन रिया ने अपनी जींस खोली, और प्रिया की आँखें फैल गईं। रिया के पास लिंग था—बड़ा, सख्त। "तुम... तुम लड़की नहीं हो?" प्रिया ने पूछा। रिया हँसी। "हम शीमेल हैं, डार्लिंग। लेकिन मज़ा दोगुना।"अमित ने शीला को देखा। शीला ने भी अपनी जींस उतारी। उसका लिंग बाहर आ गया—लंबा, मोटा, उत्तेजित। "हाँ, हम ट्रांस हैं। लेकिन देखो, कितना मज़ा आएगा।" अमित डर गया, लेकिन नशा और उत्सुकता ने उसे रोका। उधर रिया प्रिया को दबोच रही थी। प्रिया विरोध कर रही थी, लेकिन कमजोर। रिया ने प्रिया की पैंट उतारी, उसकी जांघें फैलाईं। "चुप रहो, एंजॉय करो।" और रिया ने अपना लिंग प्रिया की योनि में घुसा दिया। प्रिया चीखी—"आह... नहीं..." लेकिन रिया की गति तेज़ हो गई। प्रिया का बदन हिल रहा था, उसके स्तन उछल रहे थे। रिया ने उसके स्तनों को चूसा, काटा। "कितनी टाइट हो तुम।"अमित देख रहा था। शीला ने अमित को पकड़ा। "देखो, तेरी बीवी कितना मज़ा ले रही है। अब तू हमारा ले।" शीला ने अमित को घुटनों पर बैठाया, अपना लिंग उसके मुँह के पास लाया। "चूस इसे।" अमित ने मना किया, लेकिन शीला ने उसके बाल पकड़े। "चूस, वरना तेरी बीवी को और जोर से चोदेंगे।" अमित ने आँखें बंद कीं और शीला का लिंग मुँह में लिया। वो गर्म था, सख्त। शीला ने अमित का सिर दबाया, अंदर-बाहर करने लगी। अमित घुट रहा था, लेकिन जारी रहा। उधर रिया प्रिया को चोद रही थी, तेज़-तेज़। प्रिया की आहें अब खुशी में बदल रही थीं—"ओह... हाँ... और जोर से।"रिया और शीला ने जगह बदली। अब शीला प्रिया के पास गई। शीला ने प्रिया को डॉगी स्टाइल में किया, पीछे से घुसाया। प्रिया की चीख निकली, लेकिन वो अब सरेंडर कर चुकी थी। शीला की गेंदें प्रिया की जांघों से टकरा रही थीं। रिया अमित के पास आई। "अब तू मेरा चूस।" रिया का लिंग और बड़ा था। अमित ने चूसा, जीभ से सहलाया। रिया सिसकारी—"आह... अच्छा चूसता है तू।" ट्रेन की रफ्तार जैसे उनके मिलन की रफ्तार से मैच कर रही थी।फिर दोनों शीमेल्स ने अमित और प्रिया को साथ लाया। रिया ने प्रिया को अपनी गोद में बिठाया, नीचे से चोदा। शीला ने अमित को चूसवाया। प्रिया अब पूरी तरह खुल गई थी। "अमित... ये कितना अच्छा है... आह..." अमित भी अब उत्साहित था, अपना लिंग बाहर निकालकर हिलाने लगा। रिया ने प्रिया के स्तनों को दबाया, निप्पल्स चूसे। शीला ने अमित के मुँह में अपना वीर्य छोड़ दिया। अमित निगल गया, घृणा के साथ लेकिन मज़े में।रात भर ये खेल चला। सुबह ट्रेन मुंबई पहुँची। रिया और शीला ने नंबर एक्सचेंज किया। "फिर मिलेंगे," वे बोलीं। अमित और प्रिया स्तब्ध थे, लेकिन उनकी आँखों में नई चमक थी। घर जाकर वे इस रात को याद करते, और अपनी सेक्स लाइफ में नया ट्विस्ट लाते। शायद अगली ट्रेन में फिर ऐसा सफर।

कहानी का विस्तार
अमित और प्रिया की शादी अरेंज्ड थी। अमित ऑफिस में व्यस्त रहता, प्रिया घर संभालती। उनकी सेक्स लाइफ नॉर्मल थी—सप्ताह में एक-दो बार, मिशनरी स्टाइल। लेकिन ट्रेन का सफर सब बदल देगा। ट्रेन में एंट्री से पहले, अमित ने प्रिया से कहा, "ये सफर स्पेशल होगा।" प्रिया मुस्कुराई।रिया और शीला की बैकस्टोरी: वे दोनों ट्रांस वुमन थीं, मॉडलिंग में। शहर में वे ओपन लाइफ जीतीं, लेकिन गाँव या ट्रेन में छुपातीं। रिया की आवाज मीठी थी, शीला की बोल्ड। वाइन पीने के बाद, रिया ने प्रिया को छुआ—पहले हाथ, फिर कमर, फिर जांघ। प्रिया सिहर उठी। "रिया, ये क्या?" लेकिन नशा था। रिया ने प्रिया की ब्रा खोली, स्तनों को मसला। "कितने बड़े हैं तेरे।" प्रिया की निप्पल्स सख्त हो गईं।शीला अमित को चूम रही थी। अमित का लिंग सख्त हो गया। शीला ने उसका पैंट खोला, सहलाया। "वाह, तेरा भी अच्छा है।" लेकिन फिर शीला ने अपना दिखाया। अमित शॉक में। "तुम... मर्द हो?" शीला हँसी, "नहीं, शीमेल। दोनों का मज़ा।"मिलन का डिटेल: रिया ने प्रिया को लिटाया, उसकी योनि चाटी। प्रिया पागल हो गई—"आह... मत रुको।" फिर घुसाया। प्रिया की दीवारें फैलीं, दर्द और मज़ा। रिया की गति—धीरे, फिर तेज़। प्रिया के कूल्हे हिल रहे थे। शीला अमित के मुँह में जोर-जोर से। अमित की आँखों में आँसू, लेकिन वो जारी रहा।जगह बदलकर: शीला ने प्रिया को चोदा, पीछे से। प्रिया की गांड पर थप्पड़ मारे। "चिल्ला, साली।" प्रिया चिल्लाई। रिया ने अमित को चूसा—उसका लिंग मुँह में। अमित चरम पर पहुँचा। फिर दोनों शीमेल्स ने प्रिया को सैंडविच किया—एक आगे, एक पीछे। प्रिया बीच में, दो लिंगों से भरी। "आह... मार डालोगे..." लेकिन वो एंजॉय कर रही थी। अमित देखता रहा, अपना हिलाता।सुबह: वे थक गए। रिया ने कहा, "ये हमारा सीक्रेट।" अमित और प्रिया ने हामी भरी। मुंबई पहुँचकर, वे होटल गए, और वहाँ फिर से उस रात को रीक्रिएट किया—लेकिन अब अकेले। प्रिया बोली, "अमित, वो मज़ा अलग था।" अमित मुस्कुराया। शायद अगली बार रिया-शीला को बुलाएँ।
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#3
मुंबई पहुँचने के बाद अमित और प्रिया होटल के कमरे में पहुँचे। शरीर थके हुए थे, पर मन में वह रात बार-बार घूम रही थी। प्रिया ने दरवाज़ा बंद करते ही अमित को दीवार से सटा दिया। उसकी साँसें तेज़ थीं।
“अमित… वो दोनों… रिया और शीला… उनका स्पर्श अभी भी मेरे शरीर पर है,” प्रिया ने फुसफुसाया। उसकी आवाज़ में लज्जा और उत्तेजना दोनों मिली हुई थीं। अमित ने उसके होंठों को पकड़ लिया। चुंबन गहरा था, जीभें एक-दूसरे से लिपटीं। प्रिया का हाथ नीचे गया और अमित के पैंट के ऊपर से उसके कठोर लिंग को दबाने लगा।
उन्होंने जल्दी से कपड़े उतारे। प्रिया बिस्तर पर लेटी, जांघें फैलाए। अमित उसके ऊपर चढ़ा, पर प्रिया ने उसे रोक लिया। “नहीं… आज तुम नीचे। मुझे वही अहसास चाहिए जो रिया ने दिया था।” उसने अमित को पलट दिया और खुद ऊपर बैठ गई। धीरे-धीरे उसके लिंग को अपनी योनि में समाहित किया। दोनों की आँखें बंद हो गईं। प्रिया की कमर घूमने लगी—पहले धीरे, फिर तेज़। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमित ने दोनों हाथों से उन्हें पकड़कर निप्पलों को मरोड़ा।
तभी मोबाइल बजा। अमित ने देखा—रिया का मैसेज था।
“होटल का रूम नंबर भेजो। हम आ रहे हैं। रात अभी खत्म नहीं हुई।”
अमित ने प्रिया की ओर देखा। प्रिया की आँखों में एक अजीब चमक थी। उसने सिर हिला दिया। दस मिनट बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई। रिया और शीला अंदर आईं। दोनों ने टाइट ब्लैक ड्रेस पहने थे, बाल खुले, होंठ चमकदार। दरवाज़ा बंद होते ही रिया ने प्रिया को कमर से पकड़कर अपने शरीर से सटा लिया।
“दीदी, दिन भर तुम्हारा स्वाद याद आ रहा था,” रिया ने कहा और प्रिया के गले पर दाँत गड़ा दिए। शीला अमित के पास गई। उसने बिना बात किए अमित के पैंट का ज़िप खोला और उसके लिंग को बाहर निकाल लिया। एक लंबी जीभ से नीचे से ऊपर तक चाटा, फिर पूरा मुँह में ले लिया। अमित की साँस अटक गई।
रिया ने प्रिया की ड्रेस ऊपर की और ब्रा खोल दी। दोनों बड़े, मुलायम स्तन उसके हाथों में आ गए। रिया ने एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसा, दाँतों से हल्का काटा। प्रिया की कमर सिहर उठी। रिया का दूसरा हाथ नीचे गया, प्रिया की पैंटी के अंदर घुसकर उसकी गीली योनि में दो उंगलियाँ धकेल दीं। “इतनी गीली… ट्रेन में भी इतनी टाइट थी।”
शीला ने अमित को घुटनों पर बैठाया। उसका लंबा, मोटा लिंग अमित के मुँह के सामने था। “खोल मुँह। आज पूरा लेना है।” अमित ने विरोध किया, पर शीला ने उसके बाल कसकर पकड़ लिए और अपना लिंग उसके गले तक धकेल दिया। अमित की आँखों से पानी निकलने लगा, पर उसने चूसना जारी रखा। गले की मांसपेशियाँ सिकुड़ रही थीं, लार टपक रही थी।
रिया ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया। उसने अपनी ड्रेस उतारी। उसका कठोर लिंग बाहर निकल आया—नसों से भरा, चमकीला। प्रिया की आँखें बड़ी हो गईं, पर उसने जांघें और फैला दीं। रिया ने पहले उसकी योनि को जीभ से चाटा, क्लिटोरिस को चूसा, फिर एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। प्रिया चीख पड़ी। “आह… बहुत गहरा… रुको…” पर रिया नहीं रुकी। उसकी कमर तेज़ गति से चलने लगी। हर धक्के पर प्रिया के स्तन उछल रहे थे। रिया ने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए और और जोर से ठोकरें मारने लगी।
शीला ने अमित का मुँह छोड़ा और उसे खड़ा किया। “अब तेरी बारी।” उसने अमित को प्रिया के पास लाया। रिया ने प्रिया को साइड में घुमाया। शीला ने अमित के लिंग पर थूक लगाकर प्रिया की योनि के किनारे रखा, जहाँ रिया पहले से अंदर था। दोनों लिंग एक साथ प्रिया के अंदर घुसने लगे। प्रिया की चीखें कमरे में गूँज उठीं। “नहीं… दोनों एक साथ… फट जाएगी मैं…” पर उसका शरीर विरोध के बावजूद आगे बढ़ रहा था। दोनों शीमेल्स ने ताल मिलाकर धक्के मारने शुरू किए। प्रिया बीच में दब गई थी—एक लिंग योनि में, दूसरा धीरे-धीरे उसकी गांड की ओर बढ़ रहा था।
रिया ने प्रिया के कान में कहा, “आज तुझे पूरा खोलना है। कल सुबह तक कोई जगह खाली नहीं रहेगी।”

रात और गहरी हो गई। कमरे की लाइट्स मंद कर दी गई थीं। प्रिया अब पूरी तरह से समर्पित थी। उसके शरीर पर पसीने की परत चमक रही थी। रिया और शीला ने उसे कुर्सी पर बैठाया। रिया उसके सामने खड़ी हो गई और अपना लिंग प्रिया के मुँह में ठूँस दिया। शीला पीछे से आई और उसकी गांड को फैलाकर अपना मोटा लिंग धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगी। प्रिया की आँखें बंद थीं, गले से आवाज़ें निकल रही थीं—आधी दर्द की, आधी आनंद की। हर धक्के पर उसका शरीर आगे-पीछे हिल रहा था। रिया उसके बाल पकड़कर और गहराई तक ले जा रही थी।
अमित किनारे खड़ा देख रहा था। उसका लिंग फिर से सख्त हो चुका था। शीला ने उसकी ओर देखा और इशारा किया। “आओ। अब तुम भी शामिल हो।” अमित पास आया। रिया ने प्रिया का मुँह छोड़ा और अमित को प्रिया के सामने खड़ा कर दिया। प्रिया ने खुद अमित का लिंग मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी, जबकि पीछे से शीला उसकी गांड को बिना रुके चोद रही थी। रिया ने प्रिया के स्तनों को दोनों हाथों से दबाया, निप्पलों को मरोड़ा और काटा।
फिर उन्होंने पोजीशन बदली। प्रिया को बिस्तर के किनारे घुटनों के बल बैठाया गया। शीला उसके मुँह में अपना लिंग डाले हुए थी। रिया पीछे से उसकी योनि में घुस गई और तेज़ गति से ठोकरें मारने लगी। अमित प्रिया के नीचे लेट गया। रिया ने थोड़ा ऊपर उठाया और अमित के लिंग को भी प्रिया की योनि में समाहित करने का रास्ता बनाया। दो लिंग एक साथ उसकी योनि को फैला रहे थे। प्रिया की चीख अब खुली हुई थी। “आह… बहुत… बहुत भरा हुआ… मार डालोगे…” पर उसके कूल्हे खुद पीछे की ओर धकेल रहे थे।
रिया और अमित ने ताल मिलाकर धक्के मारे। हर बार प्रिया का शरीर काँप उठता। शीला ने प्रिया के बाल खींचकर उसका मुँह और खोला और अपना वीर्य उसके गले में उड़ेल दिया। प्रिया ने निगल लिया, कुछ बाहर टपक गया। शीला तुरंत पलट गई और अमित के मुँह में अपना अभी भी कठोर लिंग ठूँस दिया। “चूस। साफ कर।”
रिया ने गति बढ़ा दी। प्रिया का शरीर सिहरने लगा। उसकी योनि सिकुड़ने लगी। “आ रही हूँ… रिया… अह्…” वह चरम पर पहुँची। उसके अंदर की दीवारें दोनों लिंगों को कसकर दबा रही थीं। रिया भी उसी समय झड़ गई। गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। अमित भी अधिक देर नहीं रोक सका। उसने भी प्रिया के अंदर उड़ेल दिया।
वे थोड़ी देर के लिए रुके। साँसें तेज़ थीं। पर रिया और शीला अभी शांत नहीं हुई थीं। उन्होंने प्रिया को पलटकर पीठ के बल लिटाया। दोनों ने उसके पैर कंधों तक उठाए। रिया ने फिर से उसकी योनि में प्रवेश किया, शीला ने उसकी गांड में। इस बार गति पहले से भी तेज़ थी। प्रिया के स्तन दोनों तरफ से दबे जा रहे थे। अमित उसके सिर के पास बैठा था। प्रिया ने उसका लिंग फिर से मुँह में ले लिया और चूसने लगी, भले ही शरीर पूरी तरह से दो लिंगों से भरा हुआ था।
रात भर यह क्रम चलता रहा। कभी प्रिया को दीवार से सटाकर, कभी खिड़की के पास खड़ा करके जहाँ नीचे शहर की रोशनी चमक रही थी, कभी बाथरूम में शीशे के सामने। रिया और शीला बारी-बारी से प्रिया और अमित दोनों का उपयोग करती रहीं। अमित को कई बार घुटनों पर बैठाया गया, गला भरा गया, चेहरे पर वीर्य उड़ेल दिया गया। प्रिया को बार-बार सैंडविच बनाकर दोनों तरफ से भरा गया। उसकी आवाज़ धीरे-धीरे सिर्फ कराहों और सहमति की आहों में बदल गई थी।
सुबह चार बजे जब थकान हावी हुई, चारों बिस्तर पर बिखरे पड़े थे। शरीर पसीने, वीर्य और लार से चमक रहे थे। रिया ने प्रिया के कान के पास धीरे से कहा, “अगली बार और लंबा रखेंगे। और जगहें भी आज़माएँगे।”
प्रिया की आँखें आधी खुली थीं। उसने सिर्फ सिर हिलाया। अमित चुपचाप छत की ओर देख रहा था। उसके मन में एक बात साफ हो चुकी थी—यह सफर अब सिर्फ ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगा।
Fuckuguy
albertprince547;
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#4
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#5
रात का समय था। होटल के कमरे में केवल मंद रोशनी जल रही थी। अमित बिस्तर पर半नग्न लेटा था। प्रिया उसके बगल में बैठी उसके सीने पर उंगलियाँ फेर रही थी। रिया और शीला सोफे पर बैठी शराब के गिलास घुमा रही थीं।
प्रिया ने अमित के होंठों को धीरे से चूमा, फिर उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए। “तुम थके हुए लग रहे हो,” उसने कहा। उसका हाथ नीचे सरकते हुए अमित के लिंग तक पहुँचा और धीरे-धीरे सहलाने लगा। अमित की साँस तेज़ हो गई। प्रिया ने उसके लिंग को मुँह में लिया, जीभ से नीचे से ऊपर तक चाटा, फिर पूरा अंदर ले लिया। रिया और शीला चुपचाप देख रही थीं।
थोड़ी देर बाद प्रिया ने मुँह हटाया और रिया की ओर देखा। रिया उठकर आई। उसने अमित के पैर फैलाए और उसकी गुदा पर जीभ फेरने लगी। अमित सिहर उठा। शीला ने उसका मुँह अपने लिंग से भर दिया। तीनों ने बारी-बारी से अमित का उपयोग किया—मुँह, लिंग, गुदा। प्रिया उसके लिंग को चूसती रही, जबकि रिया और शीला बारी-बारी से उसकी गुदा में प्रवेश करती रहीं। अमित बार-बार चरम पर पहुँचा, पर वे रुके नहीं। जब वह पूरी तरह ढीला पड़ गया, तब जाकर वे रुकीं।
शरीर पसीने से भीगा हुआ था। अमित आँखें मूंदे पड़ा था। तभी प्रिया ने धीरे से कहा, “हमें एक योजना सूझी है।”
रिया मुस्कुराई। “हाँ। तुम्हें एक बार पूरी तरह लड़की की तरह महसूस कराना है।”
शीला ने अमित के बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “कपड़े, मेकअप, नकली स्तन, विग… सब कुछ। फिर तुम्हें क्लब ले जाएँगे। लड़के तुम्हें देखकर छेड़ेंगे। तुम मना करते हुए भी मज़ा लोगे। उसके बाद घर आकर तुम्हें दुल्हन बनाएँगे।”
अमित की आँखें खुल गईं। वह कुछ कहने वाला था, पर प्रिया ने उसके होंठों पर उंगली रख दी। “तुम केवल अनुभव करना। बाकी हम सँभाल लेंगे।”
तीनों ने विस्तार से योजना बनाई। प्रिया ने कहा कि मेकअप और कपड़े वह खुद सँभालेगी। रिया नकली स्तन और विग का प्रबंध करेगी। शीला क्लब की व्यवस्था करेगी। अमित चुपचाप सुनता रहा। उसके लिंग में फिर से हलचल होने लगी थी।


अगली शाम। कमरे में अमित खड़ा था। उसके शरीर पर टाइट काली स्कर्ट और छोटे से टॉप में नकली स्तन भरे हुए थे। लंबे घुंघराले विग ने उसके चेहरे को ढँक रखा था। मेकअप पूरा था—बड़ी आँखें, लाल होंठ, चमकदार गाल। लिपस्टिक की एक पतली रेखा उसके होंठों को और मोटा दिखा रही थी। वह दर्पण में खुद को देखकर स्तब्ध था। सामने खड़ी तीनों महिलाएँ संतुष्ट थीं।
“बिल्कुल लड़की लग रही हो,” प्रिया ने कहा और उसके नितंब पर हल्के से थपकी दी।
वे क्लब पहुँचे। धुँधली रोशनी, तेज़ संगीत, भीड़। अमित के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। स्कर्ट हर कदम के साथ उसकी जांघों से रगड़ खा रही थी। नकली स्तन टॉप के अंदर हिल रहे थे। कई पुरुषों की निगाहें उस पर ठहर गईं। एक ने पास आकर कहा, “कितनी हसीन हो। डांस करोगी?” अमित ने सिर हिलाया, पर आवाज़ नहीं निकली। प्रिया ने उसके कमर में हाथ डालकर उसे डांस फ्लोर पर खींच लिया।
डांस के दौरान एक युवक पीछे से सट गया। उसका कठोर लिंग अमित की स्कर्ट से टकरा रहा था। अमित आगे झुकना चाहता था, पर शरीर खुद पीछे की ओर दबा रहा था। दूसरे ने सामने आकर उसके नकली स्तनों को निहारा और मुस्कुराया। अमित के मन में लज्जा और उत्तेजना एक साथ उठ रहे थे। प्रिया उसके कान में फुसफुसाई, “देखो, सब तुम्हें लड़की समझ रहे हैं। तुम्हें भी अच्छा लग रहा है, है न?”
अमित ने जवाब नहीं दिया, पर उसकी साँसें तेज़ थीं। क्लब में एक घंटे तक वे रहे। कई हाथ उसके शरीर से रगड़ खा गए, कई निगाहें उसके नितंबों और स्तनों पर टिकी रहीं। जब वे निकले, तो अमित के गाल लाल थे और स्कर्ट के नीचे उसका लिंग पूरी तरह तन चुका था।

घर लौटकर प्रिया ने अमित के क्लब वाले कपड़े उतारे। नकली स्तन हटाए, पर विग और मेकअप वैसा ही रहने दिया। फिर उसने लाल साड़ी निकाली। अमित को खड़ा करके साड़ी की प्लीट्स सजाईं, पल्लू उसके सीने पर लाया, कमर में कसकर बाँधा। माथे पर सिंदूर का टीका लगाया, गले में मंगलसूत्र पहनाया, हाथों में चूड़ियाँ और पैरों में पायल बाँधे। जब अमित दर्पण के सामने खड़ा हुआ, तो वह पूर्ण दुल्हन लग रहा था।
प्रिया ने उसे बिस्तर पर बैठाया। “अब तुम्हारी सुहागरात शुरू होती है।”
शीला आगे आई। उसने अपना गाउन उतारा। उसका लंबा, मोटा लिंग पहले से कठोर था। उसने अमित के सामने घुटने टेके और उसके लाल होंठों को चूमा। फिर अमित को पीठ के बल लिटाया, साड़ी को कमर तक उठाया और उसकी गुदा पर थूक लगाकर उंगलियाँ घुमाने लगी। अमित की पेशियाँ तन गईं।
“दर्द होगा पहले,” शीला ने कहा। “फिर मज़ा आएगा।”
उसने अपना लिंग अमित की गुदा के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डाला। सिरा अंदर गया। अमित की आँखें बंद हो गईं, दाँत भींच लिए। शीला और अंदर धकेलती गई। आधा, फिर और गहरा। अमित की कराह निकल पड़ी। “आह… दर्द… निकालो…”
शीला रुकी नहीं। उसने पूरा लिंग अंदर तक धकेल दिया और फिर धीमी गति से चलाना शुरू किया। हर धक्के पर अमित का शरीर हिलता। साड़ी की प्लीट्स बिखर रही थीं, चूड़ियाँ खनक रही थीं। धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा। अमित की साँसें बदलने लगीं। शीला ने गति बढ़ाई। अब हर ठोकर पर अमित की कराह में दर्द के साथ आनंद भी मिल रहा था।
प्रिया और रिया बगल में बैठी देख रही थीं। प्रिया अमित के बालों में उंगलियाँ फेर रही थी और कह रही थी, “अच्छी दुल्हन… ले रही हो… और खोलो खुद को…”
शीला ने अमित के पैर उसके कंधों तक उठा लिए और और तेज़ ठोकरें मारने लगी। कमरा कराहों और मांस की टकराहट की आवाज़ से भर गया। अंत में शीला ने गहरी साँस ली और अमित की गुदा के अंदर ही अपना वीर्य छोड़ दिया। गर्म तरल अंदर भर गया। अमित का शरीर सिहर उठा।
रिया की बारी
शीला ने अपना लिंग बाहर निकाला। वीर्य अमित की गुदा से रिसकर साड़ी पर फैल गया। अमित अभी भी पैर फैलाए लेटा था, साँसें उखड़ी हुई। तभी रिया उसके ऊपर आ गई।
रिया की आँखों में एक अलग चमक थी। उसने अमित के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा और कहा, “अब मैं तुम्हें लेती हूँ। आज तुम पूरी तरह मेरी रांड हो।”
उसने बिना किसी देरी के अपना कठोर लिंग अमित की अभी भी खुली गुदा में धकेल दिया। इस बार कोई नरमी नहीं थी। रिया ने शुरू से ही तेज़ और गहरा हमला बोला। हर धक्के पर अमित का शरीर बिस्तर में धँसता। साड़ी पूरी तरह बिखर गई थी। विग बिखरी हुई थी, लिपस्टिक मुँह के आसपास फैली हुई थी।
रिया ने अमित के बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और उसके कान में गंदी बातें कहने लगी, “लड़की बनकर मज़ा ले रही हो… तुम्हारी गांड कितनी टाइट है… और खोलो… रांड की तरह चिल्लाओ…”
अमित की आवाज़ निकलने लगी। पहले दबी हुई, फिर खुली। दर्द अब पूरी तरह आनंद में बदल चुका था। उसका लिंग साड़ी के नीचे तनकर हिल रहा था। प्रिया ने उसे सहलाया और मुँह में ले लिया। शीला ने अमित के मुँह में अपने लिंग के अवशेष डाल दिए।
रिया ने पोजीशन बदली। उसने अमित को घुटनों के बल कर दिया, साड़ी का पल्लू उसके चेहरे पर डाल दिया और पीछे से और तेज़ गति से चोदने लगी। हर ठोकर पर अमित का शरीर आगे झुकता। रिया उसके नितंबों पर थप्पड़ मारती और कहती, “दुल्हन… रांड… आज तुम केवल लेने के लिए हो।”
रात लंबी चली। रिया ने अमित को कई बार विभिन्न अवस्थाओं में लिया—पीठ के बल, घुटनों के बल, खड़े होकर दर्पण के सामने। हर बार वह उसे लड़की और रांड कहकर पुकारती रही। जब रिया ने अंत में अमित की गुदा के अंदर वीर्य छोड़ा, तो अमित का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था।
तीनों महिलाएँ उसके चारों ओर बैठी थीं। प्रिया ने उसके गाल पर हाथ फेरा और धीरे से कहा, “अब तुम जान गई हो कि लड़की होना कैसा लगता है।”
अमित आँखें मूंदे पड़ा रहा। उसके शरीर पर साड़ी के टुकड़े, वीर्य और मेकअप के निशान थे। सुहागरात अभी समाप्त नहीं हुई थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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