Thread Rating:
  • 0 Vote(s) - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
भाई की शादी में मिली बुआ की
#1
भाई की शादी में मिली बुआ की










वि



सी

बात अब से 5 साल पहले की है जब मैं अपने सगे फुफेरे भाई की शादी में अलीगढ़ गया हुआ था। 

तो , जैसा कि आप सब जानते हैं कि शादी वाले घर में बहुत से मेहमान आते हैं.

उन्हीं में मेरे भाई की शादी में एक मियां खलीफा जैसी दिखने वाली बड़ी गांड और बड़े बड़े चूचों की मालकिन शलाका भी आई थी.
मैं तब तक उसे नहीं जानता था कि वह कौन है, मुझे तो वह बस एक माल दिखाई दे रही थी।


फिर और भी मेहमान आये और फिर शाम में बुआ जी ने सबसे मेरा परिचय कराया.

तब मुझे पता चला कि यह माल मेरे पापा की मौसी की बेटी शलाका है जिसे मैं नहीं जानता था और जिसकी शादी 2 साल पहले ही हुई है।
लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं है।


शाम में लोग खाना खाने लगे.

और इसी बीच मैं शलाका पर नजर रख रहा था, मैंने देखा कि शलाका ने खाना नहीं खाया है.
तब मैंने शलाका को खाना खाने के लिए कहा.
तो वह बोली कि तुम खाओगे तो तुम्हारे साथ ही खा लूंगी.


मुझे यह बात अजीबी सी लगी कि यार यह आज ही मिली है और मेरे साथ खाना खायेगी।

लेकिन फिर मैंने कुछ नहीं कहा और उसके साथ खाना खाकर टहलने लगे।

उसने मुझसे अचानक पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड है?
मैं यह सुनकर एकदम चौंक गया।


फिर मैंने अपने आपको संभाल और मना कर दिया कि अभी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
शलाका इस पर मुस्कुरा कर चली गयी।


फिर रात को सभी अपने अपने बिस्तर में जाकर सो गए।

अगले दिन फिर और भी कई सारे मेहमान आ गए और मैं भी अपने काम मे लग गया.

फिर दोपहर में शलाका मेरे लिए और अपने लिए खाना लगा कर ले आयी।

हमने साथ मे खाना खाया और बहुत सी बातें भी की।

इस दौरान मुझे लगने लगा कि शलाका मुझसे चुदने के लिए बिल्कुल तैयार है.
लेकिन मैं पहल नहीं कर सकता था क्योंकि वह मेरी रिश्ते में बुआ ही लगती थी।


अब शाम को सभी लोग खाना खाने के बाद अपने अपने बिस्तर में सोने चले गए क्योंकि जानवरी का महीना था ठंड भी बहुत थी।

मैं और बुआ जी व शलाका हम तीनों ही सोने के लिए बचे थे.
फिर बुआ जी ने कहा- जगह की थोड़ी दिक्कत है. तो तू और शलाका दोनों स्टोर वाले रूम में सो जाओ और मैं बैठक में सो जाती हूं।


शलाका मेरा और अपना बिस्तर लेकर स्टोर रूम में आ गयी और मैं भी उसके साथ आ गया.

अब तक भी मेरे मन में कोई भी विचार ऐसा नहीं आया था कि मुझे शलाका की चूत चोदने के लिए मिल सकती है।

मैं और शलाका जमीन पर बिस्तर लगाकर लेट गए और मोबाइल चलाने लगे.

तभी मैंने कुछ देर बाद देखा कि किसी का हाथ मेरा हाथ पकड़ लिया था।
मैंने शलाका की तरफ देखा तो शलाका मुझे देखकर मुस्कुराते हुए देख रही थी और उसने मुझे आंख मार दी।


मैं समझ गया कि आज की रात मेरे लिए सुहागरात की रात होने वाली है.

मैंने भी मुस्कुराते हुए शलाका को अपनी बांहों में भर लिया और फिर उसने पहल करते हुए अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए.
लगभग 5 मिनट शलाका मेरे होंठों को ऐसे चूसती रही जैसे कई जन्मों की प्यासी है।


मैंने भी शलाका का बखूबी साथ दिया.
अब मैं गर्म हो चुका था और शलाका भी जवानी का मजा लूटना चाहती थी।




मैंने शलाका का ब्लाऊज उतार कर फेंक दिया और उसकी साड़ी और पेटिकोट भी उसके शरीर से अलग कर दिया।

दोस्तो … क्या नजारा था!

काले रंग की ब्रा और पेंटी में वह पूरी काम की देवी लग रही थी.

मैंने देर न करते हुए तुरंत उसके चूचो को चूसना शुरू किया और पता ही नहीं चला कि कब शलाका की कामुक सिसकारियों के बीच शलाका की चिकनी चूत ने पानी छोड़ दिया।

अब शलाका थोड़ी शांत हो गयी.
और उसने मेरे सभी कपड़े उतार कर फेंक दिए.
वह मेरा 5″ का लन्ड तुरंत अपने मुख में लेकर चूसने लगी।


मेरा पहला अनुभव था यह!

दोस्तो, आप जानते हैं कि अगर पहली बार लन्ड चुसवाने में कितना मजा आता है।

अब शलाका एक रांड की तरह मेरा लन्ड गटक रही थी.

लगभग 10 मिनट लन्ड चुसवाने के बाद मैं शलाका के मुख में ही झड़ गया।
इस बीच शलाका का भी पानी निकाल चुका था।


अब मेरा नम्बर था.
मैंने शलाका की पेंटी निकल फेंकी और उसकी चिकनी मलाई जैसी जांघों को चाटना चूमना शुरू कर दिया.


दोस्तो, जैसे जैसे मैं जांघों को चूमता हुआ ऊपर आ रहा था, वैसे ही शलाका बिना पानी की मछली की तरह तड़प रही थी।

अब मैं उसकी चूत के पास आ गया और शलाका ने तुरंत मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया।

क्या बताऊं ,

 उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

मैंने जैसे ही चूत पर अपनी जीभ लगाई, शलाका एकदम तड़प उठी.
लेकिन मैंने अपनी जीभ शलाका की चूत में डालकर चोदना चालू रखा।


इसे शलाका ज्यादा देर नहीं सह पाई और तुरंत ही उसने मेरे मुख में ही पानी छोड़ दिया।

दोस्तो, क्या मस्त स्वाद था रंडी बुआ की चूत का … मैंने एक एक बूंद चटकार साफ कर दी।

अब थोड़ी देर बाद हमने ने फिर से चुम्मा चाटी शुरू की और मेरा लन्ड फिर से फुंफ़कार मारने लगा।

शलाका मुझसे बोली- यार अब मत तड़पाओ, मुझे चोदो अब!

मैंने भी ज्यादा देर न करते हुए शलाका की दोनों टांगें फैला कर पहले उसकी चिकनी चूत पर एक जोरदार किस किया.
शायद इसके लिए शलाका तैयार नहीं थी!
जैसे ही मैंने किस किया, वैसे ही शलाका की तेज सिसकारियों से कमरा गूंज उठा।
नंगी बुआ आह … उह … ओह … इस्स … यस … सी … करके मजा लेने लगी।


अब मैंने भी देर न करते हुए अपना लन्ड शलाका की चूत पर सेट किया और एक जोर का धक्का मारा।

शलाका इस तरह के हमले के लिए तैयार नहीं थी.
वह जोर से चिल्लाने लगी- आह … मार डाला … हरामी … फाड़ दी मेरी चूत!


उसके मुंह से गली सुनकर मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं भी उसे ‘साली रंडी … रांड’ कहकर जोर से चोदने लगा।

फिर 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मैंने रंडी बुआ नंगी घोड़ी बनाया.
10 मिनट तक मैंने उसे घोड़ी बनाकर ही चोदा।
उसके बाद मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में ही भर दिया।

चुदाई के बाद शलाका मुझसे लिपट गयी और बोली- आज से मैं तुम्हारी ही माल हूँ, जब चाहे बुला लेना।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.




Users browsing this thread: