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Adultery Mother Secret Affair..2
#1
Heart 
:- Role play :-


  मैं शालिनी सिंह  , पति - अरविंद सिंह  , बेटा - शुभम सिंह ।

 हमेशा की तरह, मैं अपने पाठकों से सुनना चाहूँगी। सुझाव/आलोचना/राय और वास्तविक प्रतिक्रिया मेरे लेखन को और बेहतर बनाएगी। धन्यवाद।


भाग 1 

1) शादी के बाद मेरी दुसरी चुदाई ( अनजान व्यक्ति )
2) शादी समारोह में अनजान औरत की चुदाई ( अनजान औरत )
3) शादी से पहले मेरी चुदाई ( बॉयफ्रेंड )
4) कच्चा केला
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#2
Heart 
भाग 1.................. शादी के बाद मेरी दुसरी चुदाई अनजान मर्द से 


मैं शालिनी सिंह , 42 साल की गोरी चिट्टी और बहुत ही खूबसूरत औरत हूँ, हर वक़्त मेकअप करके रखना और हर वक़्त हॉट और सेक्सी दिखना मुझे अच्छा लगता है।

मैं शादीशुदा हूँ, एक बच्चे हैं, पति का अच्छा बिज़नस है, किसी बात की कोई कमी नहीं।पति बहुत प्यार करते हैं, कोई प्रोब्लम नहीं। तो फिर प्रोब्लम है क्या जो मैं यह कहानी लिखने बैठी हूँ।

मेरी प्रोब्लम है " सेक्स "।

जब से होश संभाला है और मुझे सेक्स के बारे में पता चला है, तब से ही मैं सेक्स की दीवानी रही हूँ।

जब दसवीं क्लास में थी तब मैं अपनी क्लास की सबसे सुंदर और सेक्सी लड़की थी, सारे लड़के मुझपे मरते थे।
तो मैंने भी 10+1 के एक लड़के को अपना दिल दे दिया और उसने मेरा सब कुछ ले लिया। बस यह समझ लो कि तब से लेकर अब तक मेरी सेक्स के लिए तड़प कम नहीं हुई।

यह नहीं कि मैं हर ऐरे गैरे के नीचे लेट जाती हूँ, पर अगर किसी पे दिल आ गया तो मैंने उसे ना भी नहीं करती ।

मुझे पता है कि सुंदर और सेक्सी औरतों के मर्द हमेशा दीवाने होते हैं, और मुझे यह भी पता है कि भगवान ने दो टाँगों के बीच में जो सुराख किया है वो सिर्फ़ पेशाब करने के लिए नहीं दिया है।

अपनी रिश्तेदारी में, आस पड़ोस में, पति के बिज़नेस पार्टनर्स, यहाँ तक की जहाँ भी जाती हूँ, मुझे पता होता है कि सामने वाला मर्द मेरे बारे में क्या सोच रहा है और मेरे जिस्म पे उसकी नज़रें कहाँ और क्या देख रही हैं।
अक्सर मर्दों की नज़रें मेरी चूचियों की घाटी में ही अटक के रह जाती हैं। मैं भी क्या करूँ मेरे चूची हैं ही इतने बड़े कि जितना भी छोटा गला पहन लूँ, पर मेरा वक्षरेखा दिख ही जाती है।
तो मैंने छोटे गले पहनने छोड़ ही दिये और बड़े गले के सूट्स और ब्लाऊज़ पहनती हूँ ताकि मर्द आराम से मेरे विशाल चूची के दर्शन कर सकें और सच कहूँ मुझे एक आत्मिक संतुष्टि मिलती है कि आज 42 साल की उम्र में भी लोग मेरे हुस्न पर फिदा हैं और मुझ पर मरते हैं।

शादी से पहले और शादी के बाद भी मैंने बहुत से लोगों से सेक्स किया है मगर एक बात मैं जो आपको बताना चाहूँगी वो उस सेक्स के बारे में हैं जो मैंने एक शादी में किया था।

बात 22 फरवरी 2018 की है, उस दिन इनके एक दोस्त की बेटी की शादी थी और बहुत करीबी दोस्त होने के कारण हमने पूरी शादी में उनके साथ ही रहना था।

शहर के एक बहुत ही बढ़िया होटल में शादी थी, इंडोर शादी होने की वजह से मैंने स्लीवलेस ब्लाऊज़ वाली साड़ी पहनी थी।
शादी होटल के अंदर थी तो सर्दी की कोई टेंशन नहीं थी।

सही टाइम पर हम सब तैयार होकर होटल पहुँच गए, सबसे मिले, सब मर्दों की निगाहें मेरी झीनी साड़ी में से दिख रहे दो चुचियों के बीच की रेखा पर थी। मैं भी सबकी निगाहें ताड़कर मज़े ले रही थी और पूरी तरह से गर्म थी।

हमने खूब खाया पिया और मज़ा किया। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, बारात आई और सब शादी की रस्मों में लग गए। खाना पीना, शराब के दौर, डीजे, सब का प्रोग्राम चल रहा था। खाते पीते एंजॉय करते मुझे बाथरूम जाने की ज़रूरत महसूस हुई।

मैंने वेटर से पूछा और बाथरूम की तरफ गई, वहाँ जाकर देखा कि लेडीज बाथरूम के दरवाजे पे तो ताला है।
पूछा तो पता चला कि पाइप टूट जाने की वजह से बंद है, सिर्फ मर्दों वाला बाथरूम ही खुला था।

अब क्या करूँ, पर जाना तो था, मैं हिम्मत करके जैंट्स बाथरूम में घुस गई। अंदर देखा तो खाली था। मैंने अंदर जाकर दरवाजा लाककर लिया ताकि कोई अंदर न आ सके।

अंदर देखा तो खड़े हो के पेशाब करने के कई कमोड थे, और दो सेक्शन थे जिनके दरवाजे बंद थे, एक इंग्लिश और एक इंडियन।

मैं इंडियन वाले में घुस गई, साड़ी उठाई, पेंटी नीचे की। मैं पेंटी हमेशा पहनती हूँ, चाहे पीरियड आ रही हो या नहीं।
और पेशाब करने बैठ गई। पेशाब किया, कपड़े ठीक किए और बाहर वाश बेसिन पर हाथ धोने आई। जब मैं हाथ धोने ही लगी थी तभी दूसरी सेक्शन जिसमे इंग्लिश कमोड लगी थी, उसमें से एक नौजवान बाहर निकला।

मैं तो एकदम घबरा गई। और जब मैंने उसके नीचे देखा, हे भगवान करीब 9 या 10 इंच का उसका लण्ड उसने अपनी पेंट से बाहर ही निकाल रखा था। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में किसी मर्द का इतना बड़ा लण्ड नहीं देखा था। सच कहती हूँ, लण्ड देख के मेरी तो चूत में झुनझुनाहट सी हो गई।

फिर भी मैंने थोड़ा कड़क के उस से कहा- यह क्या बदतमीजी है?

वो बिना डरे बोला- क्यों मैडम क्या हुआ?

‘नीचे देखो, तुम्हारा वो बाहर ही है।’

‘तो क्या हुआ, क्या आप ऐसी चीज़ पहली बार देख रही हैं?’

मुझे थोड़ा अजीब लगा पर सच कहूँ उसने बात बिल्कुल सच कही थी और मेरे दिल में यह ख़्वाहिश जागी कि मैं उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ के देखूँ, तो मैंने कहा- नहीं पहली बार तो नहीं देखा, पर इतना बड़ा आज पहली बार देखा है।

शायद मेरी बात से उसकी हिम्मत बढ़ गई, वो बोला- अगर इतना बड़ा पहली बार देखा है तो इसका मतलब आपके पति का इतना बड़ा नहीं है, शायद इसका आधा ही हो, क्या आप इसे छू के देखना चाहेंगी?

बात तो उसने बिल्कुल सच कही थी, अब तक जितने भी लण्ड मैंने खाये थे वो सब 5 या 6 इंच से ज़्यादा नहीं थे, पर यह तो अब तक का सबसे बड़ा और मोटा लण्ड था।

मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई, मेरे चेहरे से गर्मी निकल रही थी, सांस तेज़ हो गई, पता नहीं क्यों मैं बिना कुछ कहे आगे बढ़ी और मैंने उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया।

‘उफ़्फ़ क्या एहसास था, एक गर्म मोटा और लंबा लण्ड…’ जब मैंने पकड़ा तो वो थोड़ा और पास आया और उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ के अपना लण्ड मेरे दूसरे हाथ में भी पकड़वा दिया।

अब तक मैंने सिर्फ एक हाथ में पकड़े जाने वाले लण्ड ही पकड़ कर देखे थे पर यह तो दो हाथों में पकड़ने के बाद भी बाहर दिखता था।मेरे दोनों हाथों में लण्ड पकड़वा के वो अपनी कमर आगे पीछे करने लगा जिससे उसका लण्ड तन गया और मैं यह नज़ारा देख कर सुन्न सी हो गई। मेरी निगाह सिर्फ उसके लण्ड पे ही अटक के रह गई थी, मैं सब कुछ भूल चुकी थी, मुझे कुछ दिख रहा था तो सिर्फ उसका लण्ड और मैं चाहती थी की यह लण्ड मेरे मुँह मेरी चूत दोनों को भेद दे।

शायद मेरी मानो स्थिति उसने भी भाँप ली थी, उसने मेरे कंधों पर हाथ रखके मुझे नीचे दबाया। मैंने भी उसका इशारा समझा और नीचे बैठ गई।

उसने कहा- मेरे लौड़े को प्यार नहीं करोगी?

मैंने उसकी तरफ देखी , हम दोनों की नज़रें एक दूसरे को बहुत कुछ कह रही थी, उसने अपना लण्ड मेरे होठों से लगाया और मैंने अपना मुँह खोल के उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया।ऐसा मोटा और तगड़ा लण्ड मैंने आज तक नहीं चूसा था।उसके लण्ड के सुपाड़े से मेरा मुँह भर गया था। मैंने उसका लण्ड चूसा, जीभ से उसके सुपाड़े को चाटा।

दो तीन मिनट की चुसाई के बाद वो बोला- शायद कोई दरवाजा खटखटा रहा है, हमें जाना होगा।

यह कहकर उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाल लिया पर मैंने उसका लण्ड अपने दोनों हाथों में कस के पकड़ लिया और बोली- नहीं अभी मेरा दिल नहीं भरा, मुझे यह चाहिए और अभी चाहिए।

वो बोला- ठीक है पर अभी नहीं थोड़ी देर बाद, मैं कोई इंतजाम करता हूँ, हम आराम से करेंगे पर यहाँ लोग आएँगे तो मुश्किल हो सकती है।

‘ठीक है, पर जल्दी कोई इंतजाम करो, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा, प्लीज़…’

‘तो ऐसा करते हैं, आधे घंटे बाद यहीं मिलते हैं, ठीक हैं।’

‘ठीक है, पर जाने से पहले एक काम करके जाओ।’

यह कहकर मैंने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और बोली- प्लीज़ एक बार अंदर डाल दो ! मैं मरी जा रही हूँ।

वो मेरे पीछे आया, मेरी एक टांग ऊपर उठाकर मेरा घुटना वाश बेसिन पर रखा, अपना लण्ड मेरी चूत पर रखा जिसे मैंने अपने हाथ से पकड़ के एडजस्ट किया, जब उसने धक्का मारा तो उसके लण्ड का सुपाड़ा मेरी भीगी हुई चूत में घुस गया।

क्या तस्सली मिली दिल को !

मैंने उससे कहा- और डालो, जितना डाल सकते हो डाल दो, मैं पूरा लेना चाहती हूँ।

वो बोला- अगर अभी सारा ले लोगी तो बाद में क्या लोगी?

‘प्लीज़, वहाँ भी लूँगी पर अभी भी पूरा लेना है, तुम डालो बस!’

उसने एक और धक्का मारा जिससे उसका आधे के करीब लण्ड मेरी चूत में घुस गया, इतने साइज़ के तो कई लण्ड मेरी चूत में घुस चुके थे, पर उसके और दो चार जोरदार धक्कों से उसका पूरे का पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया।

उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर से फिराते हुये मेरे पेट के ऊपर से सहलाते हुये मेरे ब्लाउज़ और ब्रा के अंदर डाल दिये और मेरे दोनों चुचियों बाहर निकाल लिया।

‘तेरी बहन की चूत, मादरचोद, तेरे चुची कितने बड़े हैं, मैंने आज तक इतने बड़े चुचियों नहीं देखे!’

‘हाँ बहुत बड़े हैं, तुमने इतने बड़े चुचियों नहीं देखे और मैंने इतना बड़ा लण्ड नहीं लिया।’

हम दोनों हंस दिये।

बातों बातों में वो अपना पूरा लण्ड मेरे अंदर डाल के बाहर निकाल रहा था, और आज मैंने यह पहली बार जाना कि मर्द का लण्ड चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, औरत की चूत से बड़ा नहीं होता।

वो धक्के पे धक्का मार रहा था और मैं बेहाल हुई जा रही थी।

वो बहुत ही बेदर्दी से मेरे चूची दबा रहा था जैसे इनके जूस निकालना हो पर मुझे उस दर्द में भी मज़ा आ रहा था।

2-3 मिनट की चुदाई के बाद उसने अपना लण्ड बाहर निकाला तो मैं झट से नीचे बैठ गई और अपनी चूत के पानी से भीगे उसके लण्ड को अपने मुख में ले लिया।

वो बोला- अरे मेरी जान, छोड़ो इसे, मैं बाहर देखता हूँ, तुम छुप जाओ, मैं देखता हूँ अगर बाहर कोई न हुआ तो तुम पहले निकल जाना, मैं बाद में बाहर आऊँगा।

यह कहकर उसने अपना लण्ड खींच के मेरे मुंह से बाहर निकाला और मुझे ज़बरदस्ती कमोड सेक्शन में धकेल दिया।

मैंने अपने कपड़े ठीक किए, फिर उसकी आवाज़ आई- जल्दी करो कोई नहीं है, जल्दी से निकाल जाओ और आधे घंटे बाद यहीं मिलना। मैं झट से बाहर निकाल गई और शादी के समारोह में घुल मिल गई, पर उस शादी में अब मुझे कोई दिलचस्पी नहीं थी।
मुझे अब सिर्फ उस लड़के का इंतज़ार था।

करीब 20-25 मिनट बाद वो मुझे दिखा, मैंने अपने पति और उनके दोस्त से बातें कर रही थी। उसके हाथ में एक चाबी थी जो उसने मुझे दिखाई, मतलब उसने कमरे का इंतजाम कर लिया था।

मैंने अपने पति के कान में कहा ‘मैं अभी आई!’ और उसकी तरफ बढ़ी। वो आगे चल पड़ा और मैं उसके पीछे।

ऊपर जाकर वो एक कमरे में घुसा तो मैं भी उसके पीछे कमरे में चली गई। बस दरवाजा बंद होते ही उसने मुझे बाहों में भर लिया, मैं भी उससे लिपट गई। अब तो वो मेरा था और मैं उसकी।

बिस्तर तक पहुँचते पहुँचते हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे।

बिस्तर पे लेटते ही मैंने अपनी टांगे चौड़ी कर दी। चूत तो मेरी पहले ही पानी छोड़ रही थी, उसका लण्ड भी एकदम कड़क हो रहा था।
बस बड़े ही आराम से उसका लण्ड मेरी चूत में समा गया।

मैंने उसे अपनी बाहों में भींच लिया और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये।

एक लंबे से चुम्बन के बाद मैंने उसे कहा- जितनी जल्दी हो सके मुझे चोद लो, मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है।

मेरी बात सुनकर उसने अपनी जीभ निकली और मेरे मुँह में डाल दी और अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसा कर अंदर बाहर करने लगा।

मेरे ऊपर वाले होंठों में उसकी जीभ थी और नीचे वाले होंठों में उसका लण्ड यानि कि मैं दोनों तरफ से उसको चूस रही थी और वो दोनों तरफ से मुझे चोद रहा था।

वो बड़े ज़ोर से चोद रहा था और उतनी ही ज़ोर से मेरे बूब्स दबा रहा था।

मैंने कहा- दबा राजा, और ज़ोर से दबा, सच कहती हूँ तुम्हारा लण्ड लेकर ज़िंदगी का लुत्फ आ गया। ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारा लण्ड मेरे अंदर से मेरे दिल तक पहुँच गया हो, मार डालो मुझे आज!

‘सही कहती हो मेरी जान, मैंने भी आज तक तुम्हारे जितनी गर्म औरत नहीं देखी, लण्ड लेने की इतनी तड़प मैंने इससे पहले किसी औरत में नहीं देखी, मेरी किस्मत के मुझे तुम जैसी एक सम्पूर्ण औरत की गीली और गर्म फ़ुद्दी को चोदने का मौका मिला!

उसकी बात सुनकर मैंने भी नीचे से कमर उचकानी शुरू कर दी।
और ऐसे ही ताबड़तोड़ चुदाई करते करते मैं तो झड़ गई, मेरा सारा बदन अकड़ गया। मैंने अपने नाखून उसके सीने में गड़ा दिये।

जब मैं शांत हुई तो उसने पूछा- क्या तुम मेरा वीर्य पीना पसंद करोगी? मैं तुम्हारे मुँह में झड़ना चाहता हूँ।

मैंने झट से हामी भर दी। फिर उसने मुझे बड़ी बेदर्दी और पूरी ताकत लगाकर चोदा।

जब उसका झड़ने वाला हुआ तो उसने एकदम से अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुँह में घुसेड़ दिया, थोड़ा सा चूसने पर ही उसके लण्ड से वीर्य के गरम फुव्वारे मेरे मुँह में छुट गए जिस से मेरा सारा मुँह भर गया, उसका बहुत सा वीर्य मैंने पी लिया पर फिर भी बहुत सा मेरे मुँह से बाहर चू गया।

मेरी लिपस्टिक के निशान उसके लण्ड पे लगे थे, मैंने उसका लण्ड चूसती रही और वो मेरी छातियों पे बैठा रहा, उसका बदन पसीने से भीगा पड़ा था।

वो बहुत ही संतुष्ट लगा रहा था।

मैंने कहा- अगर मुझे आज जाना न होता तो मैं सारी रात तुमसे अपनी फ़ुद्दी की रगड़ाई करवाती, पर जाना तो है, हो सका तो फिर मिलेंगे।

उसने भी हामी भरी, उसके बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने, मैंने अपने मेकअप ठीक किया फिर से जाकर शादी के समारोह में ऐसे शामिल हो गई, जैसे कुछ हुआ ही न हो।

मगर मन ही मन में मैं एक परम आनन्द महसूस कर रही थी।
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#3
बहुत जल्दी पार्ट 3 भी लाकर आउंगी ,..........
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#4
Nice start
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#5
अब आगे.... शादी समारोह में अनजान औरत की चुदाई 

मेरा नाम मोनु सिंह है, मैं 28 साल के एक नौजवान हूँ।
शादी हो चुकी है, एक बेटी है, पत्नी बहुत सुंदर है।
सरकारी नौकरी है, तनख्वाह अच्छी है, बस एक छोटी सी दिक्कत है कि मेरी पत्नी का सेक्स के परती झुकाव बहुत कम है।

मेरी एक खूबी यह है कि मेरा लण्ड साढ़े नौ इंच का है और मुझे सेक्स करना बहुत पसंद है।
बस यह समझो कि सेक्स के लिए तो मैं हर वक़्त तैयार रहता हूँ। यह भी हो सकता है कि मेरे बड़े लण्ड से शायद बीवी को तकलीफ होती होगी, तभी वो सेक्स कम करती हो। पर जब एक मर्द अपनी पत्नी की वजह से भूखा हो तो वह दूसरी औरत खोजेंगा ही।

मुझे सब तरह की औरतें पसंद है , काली , गोरी, मोटी , पतली, बस चूत लगी होनी चाहिए। शुरू से ही मैं अपने दोस्तों के बीच चुदाई को लेकर मशहूर रहा हूँ। बहुत से तो मुझे गधे के लण्ड वाला भी कहते हैं।

मैंने जिस भी औरत या लड़की को एकबार चोद दिया, वो आज तक याद करती है और जब मिलती है तो सीधा लण्ड को झपटती है। यकीन मानो अपने तीन दोस्तों की बीवियाँ, 4 दोस्तों की गर्ल फ़्रेंड्स, ऑफिस में एक सफाई वाली, दो क्लर्क्स, अपनी एक बॉस के अलावा तीन स्टाफ गर्ल्स को चोद चुका हूँ

घर में जितनी भी नौकरी काम करने अभी तक आई हैं उनमें से ज़्यादातर को तो चोद चुका हूं , इसके अलावा एक हिजड़े की गाँड भी मार चुका हूँ ।

मैंने एक बात और भी नोट की है कि जहाँ भी जाता हूँ, औरतें हमेशा मेरे आस पास होती हैं, जैसे वो मेरे टाइट जीन्स में से मेरे लण्ड का साइज़ भाँप लेती हैं और सिर्फ मज़े लेने के लिए मेरे आस पास रहती हैं, कि चलो ले नहीं सकती तो पास खड़े हो होकर ही ठर्क मिटा लो।

ऐसा ही एक शादी में मैंने एक बिल्कुल अंजान औरत को चोदा, मैंने उसका नाम पुछा तो उसने शालिनी सिंह बताया , न ही फिर कभी उससे मिला हूँ, पर उस जैसी गर्म औरत मैंने आज तक नहीं देखी।

मेरे भाई के दोस्त की शादी थी, तारीख थी 22 फरवरी, 2018
मेरा उस शादी में जाने का कोई मन नहीं था क्योंकि भाई के दोस्त की शादी थी, पर दूल्हे ने ज़ोर दिया कि भैया ज़रूर आना तो सोचा चलो जा आता हूँ। मैं शादी में जीन्स और टी शर्ट पहन कर ही शादी में चला गया।

दूल्हे ने शादी के लिए एक होटल किया हुआ था मैं होटल पहुंचा तो वहां पहले से ही माहौल बना हुआ था, शराब और शवाब की नदियाँ बह रही थी। मूड बनाने के लिए मैंने भी एक दो पेग गटक लिए।

जब थोड़ा सुरूर हुआ तो मेरा दिल किसी हसीना की तलाश करने लगा मगर कोई साली लाइन ही नहीं पकड़ रही थी, तो मैंने यह सोचकर छोड़ दिया कि शिकार भी नहीं मिलता, मैं व्हिस्की वाले काउंटर की तरफ चला गया और 2 पेग और खींच दिये।

तभी मुझे एहसास हुआ जैसे मुझे पैखाना आ रही हो।
मैं बाथरूम में गया, वहाँ पर दो सेक्शन थे, इंग्लिश कमोड और इंडियन स्टाइल कमोड।

मैं इंग्लिश वाले में घुस गया और पैखाना करने लगा।

अभी पैखाना करना चालू ही हुआ था कि बाहर से आवाज़ आई जैसे किसी ने बाथरूम का दरवाजा अंदर से लॉक किया हो और उसके साथ ही झुमके चूड़ी पायल की झन झन झंकार सुनाई दी।

मैं कान लगा कर सुनने लगा। मेरे नाक में ढेर सारी पर्फ्यूम की खुशबू आई। मतलब यह कि मर्दों के बाथरूम में कोई औरत आई है। फिर मैंने आवाज़ ध्यान से सुनी। वो मेरे बगल वाली इंडियन स्टाइल कमोड सेक्शन में घुसी, जब उसके पेशाब करने की आवाज़ आने लगी तो मैंने उत्सुकतावश बिना कोई आवाज़ किए कमोड के ऊपर चड़ा और दीवार के ऊपर से दूसरी तरफ देखा।

वाकयी दूसरी तरफ तो एक गोरी चिट्टी औरत बैठी थी, साड़ी ऊपर उठी होने की वजह से उसके बड़े बड़े और गोरे गोरे चूतड़ भी दिख रहे थे।

मेरे तो लण्ड ने अंगड़ाइयाँ लेनी शुरू कर दी। उसने भी ढेर सारा पेशाब किया।

मैं चुपचाप उतरकर बैठ गया और सोचने लगा कि क्या करूँ। तभी ख्याल आया कि अगर मैं इसको अपना लण्ड निकालकर दिखा दूँ, अगर मान गई तो मारने को चूत मिल जाएगी।

जब वो हाथ धोने गई तो मैंने भी अपनी पैंट से अपना लण्ड बाहर निकाला और बाहर आ गया।

जब उसने शीशे में मुझे देखा तो थोड़ा घबराई सी मगर जब उसने मेरा लण्ड पैंट से बाहर निकला हुआ देखा तो एकदम से अकड़कर बोली- यह क्या बदतमीजी है?

‘क्यों मैडम… क्या हुआ?’ मैंने पूछा।

‘नीचे देखो, तुम्हारा वो बाहर ही है।’

‘तो क्या हुआ, क्या आप ऐसी चीज़ पहली बार देख रही हैं?’ मैंने थोड़ा बेशर्मी से कहा, लेकिन मेरी भी फटी पड़ी थी, क्योंकि अगर वो शोर मचा देती तो मेरी तो बैंड बज जाती।

‘नहीं पहली बार तो नहीं देखा, पर इतना बड़ा आज पहली बार देखी हुं ।’

उसकी इस बात से मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैं बोला- अगर इतना बड़ा पहली बार देखा है तो इसका मतलब आपके पति का इतना बड़ा नहीं है, शायद इसका आधा ही हो, क्या आप इसे छूकर देखना चाहेंगी।

अब मेरे मन में डर कम हो गया था, क्योंकि वो लगातार मेरे लण्ड को ही घूरे जा रही थी। यह बात पक्की हो रही थी कि अगर उसने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया तो फिर तो वो मुझसे चुद कर ही जाएगी। तभी वो थोड़ा आगे बढ़ी और उसने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया। बहुत ही सुंदर और नर्म हाथ था उसका। गोरा हाथ, नाखूनों पे गुलाबी नेल पालिश और उसके हाथ में पकड़ा मेरा काला लण्ड।

जब उसने ठीक से पकड़ लिया तो मैं थोड़ा उसके पास हुआ और उसका दूसरा हाथ पकड़कर उसमें भी अपना लण्ड पकड़ा दिया।
उसकी गालों का रंग गुलाबी हो गया था, सांस तेज़ चल रही थी और नज़र तो उसकी बस लण्ड पे जम गई थी।

मैंने मौका देखकर अपनी कमर आगे पीछे करनी शुरू की ताकि वो मेरे लण्ड की हरकत देख सके और मेरा लण्ड उसको गुलाबी होंठों तक पहुँच सके।

जब मैंने उसके दोनों गोरे गोरे हाथों में अपना लण्ड चलाना शुरू किया तो मेरा लण्ड पूरी तरह से अकड़ गया। जब लण्ड तन गया तो मैंने उसके दोनों कंधों पे हाथ रखे और उसे नीचे बैठने के लिए दबाया।

उसने दो तीन बार अपने होंठों पर जीभ फेरी जैसे उसका गला सूख रहा हो। जब वो मेरे लण्ड के सामने बैठ गई तो मैंने कहा।

‘मेरे लंड को प्यार नहीं करोगी?’

यह सुनकर उसने अपनी निगाह मेरे लण्ड से हटाकर मेरी तरफ देखा। मैंने उसकी आँखों में देखते हुये अपना लण्ड उसके होंठों से लगाया तो उसने भी बिना कोई विरोध किए मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।

‘उफ़्फ़ !’ उसके नर्म होंठों का स्पर्श कितना प्यारा था।

उसके बाद खुद ही उसने मेरे लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया, जैसे वो कोई लॉलीपोप या सोफ़्टी खा रही हो।

मैं आनन्द से सरोबार था कि तभी मुझे लगा शायद किसी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया है।

मैंने उससे कहा- शायद कोई दरवाजा खटखटा रहा है, हमें जाना होगा।

यह कहकर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाला मगर उसने तो मेरे लण्ड को दोनों हाथों से कस के पकड़ लिया और बोली- नहीं, अभी मेरा दिल नहीं भरा, मुझे यह चाहिए और अभी चाहिए।

मैं बोला- ठीक है, पर अभी नहीं थोड़ी देर बाद, मैं कोई इंतजाम करता हूँ, हम आराम से करेंगे, यहाँ लोग आएँगे तो मुश्किल हो सकती है।

‘ठीक है, पर जल्दी कोई इंतजाम करो, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा, प्लीज़!’

‘तो ऐसा करते हैं, आधे घंटे बाद यहीं मिलते हैं, ठीक है?’

‘ठीक है, पर जाने से पहले एक काम करके जाओ।’ यह कहकर उसने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और बोली- प्लीज़, एक बार अंदर डाल दो , मैं मरी जा रही हूँ।

मैं उसके पीछे गया और उसकी एक टांग उठाकर वाश बेसिन पे रखी, अपना लण्ड उसकी चूत पे रखा जिसे उसने अपने हाथ से पकड़ के अपनी चूत के सुराख पर एडजस्ट किया, जब मैंने धक्का मारा तो मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस गया।

शायद वो इस एहसास में पागल हो चुकी थी और बोली- और डालो, जितना डाल सकते हो डाल दो, मैं पूरा लेना चाहती हूँ।

मैं बोला- अगर अभी सारा ले लोगी तो बाद में क्या लोगी?

‘प्लीज़, वहाँ भी लूँगी पर अभी भी पूरा लेना है, तुम डालो बस!’

एक और धक्का, जिससे आधे के करीब लण्ड उसकी चूत में घुस गया, मैं उसके दोनों बड़े बड़े चूतड़ अपने पेट पर महसूस कर रहा था।

मगर मैं उसके बड़े बड़े चूची भी दबाना चाहता था तो मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर से फिराते हुये पेट के ऊपर से लेजा कर उसके ब्लाउज़ और ब्रा के अंदर घुसा दिये और उसका ब्लाउज़ और ब्रा ऊपर उठा कर उसके दोनों विशाल चुचियों बाहर निकाल लिए।

जब सामने शीशे में मैंने उसके चुचियों का आकार देखा ‘हे भगवान… कितने बड़े, गोल और नर्म नर्म चुचियों थे उसके!’
‘तेरी बहन की चूत, मादरचोद, तेरे चुच्चे कितने बड़े हैं, मैंने आज तक इतने बड़े चुचियों नहीं देखे!’

‘हाँ बहुत बड़े हैं, तुमने इतने बड़े चुचियों नहीं देखे और मैंने इतना बड़ा लण्ड नहीं लिया।’

मैं अपना लण्ड उसकी चूत में ठेलता रहा और पूरा लण्ड उसकी चूत के पानी से भीग चुका था।

आज पता चला कि मर्द का लण्ड चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो औरत की चूत से बड़ा नहीं होता।

मैंने कुछ जोरदार शॉट्स मारे और बहुत ही बेदर्दी से उसके चुचियों को दबाया।

जी तो कर रहा था कि उसके चुचियों का जूस निकाल दूँ, उसे दर्द हो रहा था और मुझे मज़ा आ रहा था।

करीब 2-3 मिनट की चुदाई के बाद मैंने लण्ड बाहर निकाल तो बिजली की स्पीड से नीचे बैठ गई और अपनी चूत के पानी से भीगे मेरे लण्ड को फिर से अपने मुँह में ले लिया।

इतनी गर्मी एक औरत में मैंने तो आज तक नहीं देखी थी।
उससे अपना लण्ड छुड़वाने के लिए मैंने कहा- अरे छोड़ो मेरी जान, छोड़ो इसे, मैं बाहर देखता हूँ, तुम छुप जाओ, मैं देखता हूँ अगर बाहर कोई न हुआ तो तुम पहले निकाल जाना, मैं बाद में बाहर आऊँगा।

यह कहकर मैंने अपना लण्ड खींच कर उसके मुँह से बाहर खींचा और उसे कमोड सेक्शन में धकेल दिया।

मैंने अपने अपना लण्ड अंदर डाला और बाहर झांक कर देखा, बाहर सब खाली था, मैंने कहा- जल्दी करो, कोई नहीं है, जल्दी से निकल जाओ और आधे घंटे बाद यहीं मिलना।

वो जल्दी से बाहर निकल गई और मैं वहाँ से सीधा होटल की रेसेप्शन पर गया और एक रूम बुक करवाया।

रूम की चाबी ले के वापिस शादी वाली जगह पे आ गया और उसको ढूंढने लगा।

थोड़ी देर बाद ही मैंने उसे कुछ लोगों में खड़े बातें करते देखा।

जब उसकी नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने उसे कमरे चाबी दिखाई और वो भी तभी उन लोगो से अलग हो कर मेरी तरफ आई।

उसे आते देख मैं आगे आगे चल पड़ा और उसे ऊपर अपने कमरे में ले गया।

मैंने जैसे ही कमरे का दरवाजा बंद किया वो मुझसे लिपट गई।

बस उसके बाद हम दोनों ने बिना कोई समय गंवाए सबसे पहले अपने कपड़े उतारने शुरू किए, एक मिनट में ही हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे।

कपड़े उतारने के बाद वो और भी शानदार लग रही थी, बहत गोरा और भरपूर बदन था उसका।

वो खुद ही जा कर बेड पे लेट गई और अपनी टांगें चौड़ी करदी, जिससे उसकी चूत एकदम से खुलकर सामने आ गई।

मैं भी जाकर उसकी टाँगो के बीच में उसके ऊपर लेट गया, मैंने उसके बड़े बड़े बूब्स का स्पर्श अपने सीने पर महसूस कर रहा था।
उसने कसके मुझे अपनी बाहों में भर लिया, ऐसे लग रहा था जैसे मुझसे ज़्यादा उसे चुदने की जल्दी थी।

मैंने उसके होंठों पे एक लंबा सा चुम्बन लिया तो उसने खुद ही मेरा लण्ड अपनी चूत पे सेट किया और बोली- जितनी जल्दी हो सके मुझे चोद लो, मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है।

मैंने भी अपने लण्ड को धक्का मारा और वो उसकी पहले से ही पानी से भीगी चूत में घप्प से घुस गया।

मैंने अपनी जीभ निकली और उसके मुँह में डाल दी जिसे वो बड़े प्यार से चूसने लगी।

मैं भी चुदाई करते वक़्त अपना पूरा बदन उसके बदन से रगड़ रहा था, मैं चाहता था कि मैं उसके बदन को अंदर बाहर दोनों तरफ से छील के रख दूँ।

मैंने उसके दोनों स्तन अपनी दोनों हाथों में पकड़े और बड़े ज़ोर से दबाये, शायद उसको दर्द हुआ पर फिर भी वो खुश होकर बोली- दबा राजा, और ज़ोर से दबा, सच कहती हूँ तुम्हारा लण्ड लेके ज़िंदगी का लुत्फ आ गया। ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारा लण्ड मेरे अंदर से मेरे दिल तक पहुँच गया हो, मार डालो मुझे आज!

मैंने भी जवाब दिया- सही कहती हो मेरी जान, मैंने भी आज तक तुम्हारे जितनी गर्म औरत नहीं देखी, लण्ड लेने की इतनी तड़प मैंने इससे पहले किसी औरत में नहीं देखी, मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे तुम जैसी एक सम्पूर्ण औरत को चोदने का मौका मिला।

धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई तो वो भी नीचे से कमर उचका कर मेरा साथ देने लगी।

मैं पूरा लण्ड उसके अंदर तक डाल के अपनी पूरी ताकत लगा कर उसे चोद रहा था कि थोड़ी देर की चुदाई के बाद ही वो अकड़ गई।

मैंने उसे बड़ी मजबूती से पकड़ रखा था और उसने अपने नाखून मेरे सीने में गड़ा दिये।

मैंने अपना पूरा लण्ड उसके अंदर तक ठेल रखा था।

जब वो निढाल हो कर लेट गई तो मैंने अपनी स्पीड फिर से बढ़ाई।

एक सफल चुदाई की खुशी उसके चेहरे से झलक रही थी।

मेरा काम भी होने वाला था, मैंने उससे पूछा- क्या तुम मेरा वीर्य पीना पसंद करोगी? मैं तुम्हारे मुँह में झड़ना चाहता हूँ।

उसने हाँ में सर हिलाया तो मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया।

दो-एक मिनट की चुसवाई के बाद ही मेरा वीर्य छुट गया।

कुछ वो पी गई बाकी मुँह से बाहर टपक गया, मैंने अपना लण्ड उसके चेहरे पे फिराया।

वो मुस्कुरा कर बोली- अगर मुझे आज जाना न होता तो मैं सारी रात तुमसे सेक्स करती, पर जाना तो है, हो सका तो फिर मिलेंगे।
उसके बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने, एक दूसरे को गुड बाय किस की और वापिस आकर शादी में शामिल हो गए।
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#6
अब आगे....... शादी से पहले मेरी चुदाई 

मेरा नाम शालिनी सिंह है और मैं झारखंड में रहती हूँ, कहाँ रहती हूँ यह जानकर आपने क्या करना है।

तो बात तब की है जब मैं 10वीं क्लास में थी। हमारी क्लास में ही आशीष नाम एक लड़का पढ़ता था, मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी।

कभी-कभार वो बदतमीज़ी करता और दोस्ती से आगे बढ़ जाता था, पर मैंने भी कभी उसके गंदे मज़ाक़ को सीरियसली नहीं लिया और इग्नोर कर देती थी।

इसी तरह से हमारा दोस्ताना चलता रहा।
बारहवीं तक आते-आते मेरी जवानी भी बहुत उभर कर सामने आई और आशीष भी मर्दानगी से भरने लगा, पर अब वो मुझसे बदतमीज़ी नहीं करता था, हम दोनों एक-दूसरे से हर बात खुल कर करते थे, हम दोनों की बातचीत में कोई परदा नहीं था, पर हम कभी एक-दूसरे के सामने नंगे भी नहीं हुए थे।

हाँ.. चूमा-चाटी को कभी मैंने मना नहीं किया, दसवीं क्लास में उसने मुझे पहली बार चुम्बन किया था और तब से जब भी मौक़ा मिलता है, वो मुझे चुम्मी कर लेता, या जब मेरा दिल करता मैं उसे चुम्मी कर लेती थी।

एक-दूसरे को ज़ोर से बाँहों में भरना, जफ्फियाँ डालना आदि ये सब नॉर्मल था।
जब हम सामने से गले मिलते तो उसके सख़्त मर्दाना सीने को मैं अपने नर्म-नर्म चूची पर महसूस करती और सोचती कि काश मैं इसकी बाँहों में हमेशा ऐसे ही क़ैद रहूँ।
जब वो पीछे से मुझे बाँहों में भरता तो उसका लंड मैं अपने चूतड़ों के बीच में महसूस करती।

आते-जाते पीठ पर मुक़्क़ा मारना या एक-दूजे के कूल्हों पर चपत लगाना तो आम था। वो अक्सर शरारत से मेरी स्कर्ट के अन्दर झाँकने की कोशिश करता था।
वैसे भी हमारे कॉलेज में स्कर्ट घुटनों के ऊपर होती थी, तो गोरी-गोरी जांघें देखकर अक्सर लड़कों की पैन्ट टाइट हो जाती थी, मुझे आशीष से कभी शर्म नहीं आई थी।

फिर जवानी के बढ़ते-बढ़ते हमारी दोस्ती प्यार में बदलने लगी और एक दिन आशीष ने मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया, जिसे मैंने भी मान लिया।

सारी क्लास को पता चल गया कि मैं आशीष की आफीशियल गर्ल-फ्रेंड हूँ।

गर्ल-फ्रेंड होने की वजह से अब हम अक्सर साथ-साथ घूमने भी जाते थे, सिनेमा में, पार्क में, रेस्टोरेंट में हम अक्सर मिलते और इन जगहों पर मौक़ा पाकर आशीष मेरे चूची को खूब दबाता, होंठ चूसता, पैन्टी में हाथ डाल कर मेरी चूत के दाने को मसलता।

उसका हाथ लगते ही मैं तड़प उठती। हम दोनों सेक्स करना चाहते थे, पर कोई ऐसी सुरक्षित जगह नहीं थी जहाँ हम कर पाते।

उधर +2 की वार्षिक परीक्षा आ गई।

जिस दिन हमारा गणित का पेपर था, आशीष ने मुझे कहा- शालिनी , तू ऐसा कर कि घर पर बोल देना, मैथ्स की स्पेशल क्लास है, पेपर से पहले सुबह को हो कॉलेज जाना है। हम मेरे घर पर थोड़ी प्रैक्टिस कर लेंगे।

मैंने कहा- तेरे घर पर क्यों? मेरे घर आ जा, वहीं पढ़ लेंगे..!
‘अरे नहीं.. मेरे घर आना!’
बस यह कहकर चला गया।

क्योंकि हमारे घर भी ज़्यादा दूर नहीं थे, सो मैं घर पर बोल आई कि सहेली के घर पढ़ने जा रही हूँ, वहीं से खाना खाकर कॉलेज जाऊँगी।

तो मम्मी ने भेज दिया।

मैंने रुटीन की तरह तैयार होकर, कॉलेज यूनिफॉर्म में ही घर से निकली और सीधी आशीष के घर जा पहुँची। आशीष घर पर ही मिला, पर उसके घर में कोई नहीं था।

मैंने पूछा तो बोला सब एक शादी में गए हैं, शाम तक वापिस आएँगे। हम दोनों अन्दर जाकर आशीष के रूम में बैठ गए। आशीष गया और चाय बना लाया। हमने चाय पी।

मैं बेड पर बैठी थी और आशीष मेरे सामने चेयर पर बैठा था।
मेरी स्कर्ट मेरे घुटनों से 2-3 इंच ऊपर थी। जो अक्सर ऐसे ही रहती थी, पर आज मुझे आशीष के सामने ऐसे बैठने में शर्म आ रही थी।
मैं बार-बार अपनी स्कर्ट नीचे खींच रही थी कि मेरी टाँगें ना दिखें।

यह देख कर आशीष बोला- क्यों साली को नीचे खींच रही है, ज़्यादा शर्मीली बन रही है।

‘अरे नहीं, वो बात नहीं यार… बस वैसे ही मुझे लगता है कि यह स्कर्ट कुछ ज़्यादा ही छोटी है।’

‘ये छोटी है, मैं तो चाहता हूँ कि तुम इतनी ऊँची स्कर्ट पहनो…!’ ये कह कर आशीष ने मेरी स्कर्ट का पल्ला उठाया और मेरी जांघों के बिल्कुल ऊपर ले जाकर रख दिया।

हाय राम… मेरी तो पूरी जांघें ही उसके सामने नंगी हो गईं और मैं तो शर्मा गई..!

मैंने झट से अपनी स्कर्ट ठीक की और खड़ी हो कर बोली- चल बुक्स निकाल और पढ़ाई शुरू कर… शरारतें मत कर..!

कहने को तो मैंने कह दिया, पर मेरा दिल इतने ज़ोर से धड़का कि मुझे पसीना आ गया। मैं डर गई कि अकेले पा कर क्या आशीष मेरा फायदा उठाना चाहता है..!

मेरे खड़े होते ही आशीष भी उठ खड़ा हुआ और उसने मुझे बेड पर धक्का दे दिया। मैं बेड पे गिर पड़ी और मेरी स्कर्ट उठकर मेरे पेट पर आ गई।

अब तो मेरी चड्डी भी साफ़ दिख रही थी।

इससे पहले कि मैं संभलती, आशीष मेरे ऊपर आ गिरा, मेरे दोनों हाथ पकड़कर ऊपर उठा दिए और मुझे किस करने लगा।

बेशक़ मैंने किस में उसका साथ दिया, पर मैं अन्दर से डर रही थी। थोड़ी देर मेरे होंठ चूसने के बाद उसने मेरे हाथ छोड़ दिए और अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को पकड़ लिया।

वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया।

हम फिर से किस करने लगे। वो मेरा ऊपर वाला होंठ चूस रहा था और मैं उसका नीचे वाला होंठ चूस रही थी।
साथ ही साथ हम एक-दूसरे के होंठों पर अपनी-अपनी जीभ भी फेर रहे थे, कभी एक-दूसरे की जीभ भी चूस लेते थे।

फिर आशीष ने मेरी टाई ढीली की और निकाल दी, उसके बाद मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। मैंने झट से उसके हाथ पकड़ लिए।

‘नहीं आशीष, आज नहीं फिर कभी..!’
‘क्यों, आज क्यों नहीं?’

‘अरे आज एग्जाम है, प्लीज़.. फिर कभी सही..!’
‘नहीं.. आज ही मौक़ा है, आज ही करेंगे और अभी करेंगे…!’

मैं कुछ बोलती इस से पहले ही आशीष ने फिर मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए। कमीज़ के सारे बटन खुल चुके थे।
मैंने उस दिन अंडर-शर्ट भी नहीं पहनी थी, कमीज़ के नीचे सिर्फ़ ब्रा था।

सो आशीष ने ब्रा में ही पकड़ कर मेरे चूची को दबाना शुरू कर दिया।
मैं भी समझ चुकी थी कि आज मेरी कौमार्य का आख़िरी दिन है, सो जो होना है होने दो, अगर आज मुझे चुदना है तो क्यों ना इस पल का मज़ा लूँ.. बजाए बेकार का विरोध करके उसकी भी मुश्किल बढ़ाऊँ।

मैंने भी अपनी टाँगों को आशीष की कमर की गिर्द कस दिया और अपनी पूरी जीभ बाहर निकाल कर उसके मुँह में दे डाली। आशीष ने भी मेरी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

मुझे लगा जैसे मेरी चूत में से कुछ गीला-गीला सा निकलकर मेरी पैन्टी को भिगो रहा है और ऊपर से आशीष अपना तना हुआ लंड मेरे पेट पर रगड़ रहा था, जो मुझे बेक़ाबू कर रहा था।

मेरा दिल चाह रहा था कि उसे कहूँ कि इसे बाहर निकालकर दिखा, पर एक लड़की होने के कारण चुप ही रही। जब उसने देख लिया कि मैं उसे पूरा सहयोग दे रही हूँ तो उसने मुझे छोड़ा और उठ कर खड़ा हो गया।

मैं भी खड़ी हो गई।
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#7
मोम - शालिनी सिंह[Image: 20241209-054756-030204.jpg]
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#8
मेरी शर्ट सामने से पूरी खुली थी और ब्रा में से मेरे आधे से ज़्यादा चूची बाहर झाँक रहे थे। आशीष ने मेरी बेल्ट खोली और फिर स्कर्ट उतार दी, मेरी पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत को किस किया, चाटा.. सहलाया और फिर मेरी शर्ट भी उतार दी।

अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में थी।

मैंने कहा- अच्छा जी.. मेरे कपड़े उतार दिए और अपने पहने हो.. अपने भी उतारो।

‘अरे जानेमन, तू उतार दे.. ले शर्ट और बनियान मैं उतार देता हूँ..!’ ये कह कर उसने अपनी टाई, शर्ट और बनियान भी उतार दी।

मैंने अपने जूते और ज़ुराबें भी उतार दीं और नीचे बैठकर उसकी बेल्ट ढीली की और पैन्ट की हुक और ज़िप खोली।
पैन्ट ढीली हो कर नीचे गिर गई। उसकी चड्डी में उसका तना हुआ लंड साफ़ दिख रहा था।
उसने एक झटके से अपनी चड्डी नीचे की, तो खटाक से उसका लंड बाहर निकला और मेरी नाक पे लगा।

हम दोनों हँस पड़े।

आशीष ने मेरा हाथ पकड़कर अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ाया और बोला- पकड़ इसे.. कैसा लगा..!

जैसे कोई लकड़ी के डंडे पे रबर चढ़ा दी हो। मैं 1-2 मिनट उससे खेलती रही तो आशीष बोला- इसे मुँह में लेकर चूस..!

‘नहीं… मुझे अच्छा नहीं लगता..!’
‘अरे ट्राइ तो कर..!’
‘नहीं..!’

पर उसने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर लगा दिया। मैंने भी ट्राइ करने के लिए मुँह खोला और उसका लंड मुँह में लिया। बड़ा ही बकबका, गंदा सा स्वाद और अजीब सी फीलिंग थी।

मैंने सिर्फ़ मुँह में लिया तो आशीष बोला- सिर्फ़ मुँह में मत रख… इसे चूस.. जैसे बच्चा अपनी माँ का दुद्धू चूसता है.. और मुँह को आगे-पीछे चलाओ..!

मैंने वैसा ही किया, पर मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा था। खैर 2-3 मिनट चूसने के बाद उसे मुँह से निकाल दिया। आशीष ने मुझे खड़ा किया और मेरी ब्रा उतार दी और पैन्टी भी उतार दी।

अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।
आशीष ने मेरे चूची को हाथों में पकड़ लिया और निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा। उसने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। फिर मेरे ऊपर लेट गया और मेरे चूची को चूसने लगा।

मेरी चूत पूरी तरह से पानी से भीग चुकी थी। फिर आशीष उठा और रसोई में जाकर मक्खन ले आया, लाकर उसने मेरे चूची पर लगाया और चाटने लगा।

मेरी तो हालत ही खराब हो रही थी। मुझे लग रहा था कि जैसे आशीष मुझे तड़पा रहा है कि मैं खुद ही उसे सेक्स के लिए कह दूँ। मैं चादर को मुठ्ठियों में भींच रही, एड़ियाँ रगड़ रही थी, कमर उचका रही थी।

‘एक और मज़ा दूँ..!’ ये कहकर आशीप ने काफ़ी सारा बटर मेरी चूत पर लगा दिया और मुँह लगाकर चाटने लगा।

ये तो बहुत ही नजारेदार, मज़ेदार और ना-काबिले बर्दाश्त चीज़ थी।
उसने अपना पूरा मुँह मेरी टाँगों के बीच में घुसा दिया और अपनी लंबी जीभ मेरी चूत के दाने और छेद पर फिरा कर चाटने लगा।

वो सारा बटर चाट गया और मेरी चूत से रिसता पानी भी चाट गया।

मैंने आशीष को अपने ऊपर खींच लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। मेरी टाँगें पूरी तरह से खुली हुई थीं। आशीष मेरी टाँगों के बीच में फिट हो गया। अब उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत के छेद पर टिका हुआ था।

यह मेरी जिन्दगी का पहला सेक्स था, सो आशीष बोला- आर यू रेडी फॉर टीज.. जान..!

मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया, तो आशीष ने अपने लंड और मेरी चूत पर और बटर लगाया तो उसका लंड बिल्कुल चिकना हो चुका था।

उसके कहने पर मैंने उसका लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर सैट किया।

आशीष ने मेरे होंठ अपने होंठों में लेकर अपने लंड को ज़ोर लगा कर मेरी चूत में घुसेड़ा।

मेरी दर्द के मारे चीख निकल गई, पर मेरे होंठ आशीष के होंठों में होने के कारण मेरी चीख आशीष के मुँह में ही दब गई।

मेरी आँखों से आँसू निकल गए, पर आशीष ने मेरी हालत पर कोई तरस नहीं किया। थोड़ा सा पीछे हुआ और फिर ज़ोर लगाकर अपना लंड मेरे अन्दर घुसेड़ा।

उफ़फ्फ़, कितना तकलीफ़देह था…!

पर आशीष अपनी ही धुन में लगा रहा और अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा। सिर्फ़ 5-6 झटकों में ही उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया।

मैं दर्द के मारे बुरी तरह से रो रही थी।

‘प्लीज़ जान… प्लीज़.. मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़ बाहर निकाल लो… बहुत बड़ा है.. प्लीज़ जान.. कल कर लेंगे… प्लीज़ निकाल लो..!’

पर वो अपना लंड अन्दर डालता रहा, जब मैं दर्द से फिर चीखी तो उसने मेरी ही टाई से मेरा मुँह बाँध दिया।

मेरे बार-बार रिक्वेस्ट करने पर उसने अपना लंड बाहर निकाला।

मैंने देखा उसका लंड खून से भीगा हुआ था। मैं अपनी वर्जिनिटी खो चुकी थी, मेरी चूत से काफ़ी खून निकला था जिस कारण, बेड पर भी खून के दाग लग गए थे।

मैं अपनी चूत को दोनों हाथों से पकड़कर साइड में लेट गई और रोती रही। आशीष मुझे चुप करता रहा और मुझे पानी पिलाया।

जब मैं कुछ ठीक हुई तो आशीष फिर मुझे प्यार करने लगा।

मैं नहीं चाहती थी, पर आशीष ने प्यार से मुझे समझाया- देखो जान.. फर्स्ट-टाइम सबको पेन होता है, इट्स नॉर्मल, बट हमें इस पेन को पार करके ही आगे जाना है और ज़िंदगी के मज़े लेने हैं, सो दर्द को भूल जाओ और ट्राइ टू एंजाय..!’

‘मुझे इतना दर्द हो रहा है और तुम्हें अपने मज़े की पड़ी है, साला.. कुत्ता, इतना दर्द तुम्हें होता तो पता चलता.. नहीं.. मुझे नहीं करना…!’

पर आशीष ने बड़े संयम से मुझे समझाया और आख़िर मैंने उसकी बात मान ली। आशीष ने फिर मेरी चूत और अपने लौड़े पर बटर लगाया और दोबारा, अपने लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

इस बार पहले जितना दर्द तो नहीं हुआ, पर जहाँ से मेरी स्किन फटी थी जब वहाँ पर लंड की रगड़ लगती थी तो दर्द होता था।

बेशक़ मुझे दर्द हो रहा था, पर आशीष ने बड़े प्यार से मेरे साथ चुदाई करता रहा। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज़ फिर और तेज़।

करीब 12-13 मिनट मेरे साथ सेक्स करता रहा, मेरे चूची को चूसता रहा, मेरे होंठ, मेरी जीभ चूसता रहा। आख़िर में तो वो मेरा सारा दर्द भूल कर पूरे ज़ोर से स्ट्रोक्स मारने लगा।

ये मेरे लिए बहुत असहनीय था, वो अपना पूरा लंड मेरे अन्दर डाल और बाहर निकाल रहा था।

हम दोनों को पसीना आ रहा था, दिल की धड़कने तेज़ हो रही थीं। साँस तेज़ हो गई थीं।

फिर अचानक उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और आगे आ कर मेरी छाती पर रख दिया, वो अपने हाथ से अपनी मुठ मारने लगा।

तभी पिचकारी की तरह से उसके लौड़े से गरम गाड़ा सफेद सा लिक्विड निकाला और मेरे चूत पर गिरा दिया।

सारे चूत पर सफ़ेद छींटे यहाँ-वहाँ गिरे पड़े थे।

चूत मेरे ऊपर ही गिर पड़ा।

कुछ देर आराम करने के बाद वो उठा, मैं भी उठी, हम दोनों बाथरूम में गए, एक साथ नहाए।

वापिस आकर अपनी अपनी यूनिफॉर्म पहनी और तैयार हो कर, कॉलेज चले गए।

दर्द की वजह से एग्जाम भी अच्छा नहीं हुआ। एग्जाम के बाद घर आई तो सीधे अपने बाथरूम में गई, वहाँ कपड़े बदलते हुए, पैन्टी उतार कर देखा तो चूत पूरी सूजी हुई थी।

मम्मी ने पूछा- क्या हुआ शालिनी , तू चल कैसे रही है?

मैंने झूठ ही कह दिया, मम्मी कॉलेज में सीड़ियों पर गिर गई थी।
माँ ने मुझे घूर कर देखा, जैसे डॉक्टर कोई एग्ज़ॅमिनेशन कर रहा हो।
मुझे उनका इस तरह से घूरना बड़ा अजीब लगा, पर वो कुछ नहीं बोलीं।

मैंने चाय पी और अपने कमरे में जाकर लेट गई।
अपनी पैन्टी पर हाथ लगाया और मन में बोली- साली आज तू भी चुद गई, मुबारक हो..!
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#9
अब आगे......... कच्चा केला 

यह बात तब की है जब मैं अपनी शादी के करीब छः महीने बाद अपनी छोटी मौसी के घर कुछ दिन रहने के लिए गई थी। मेरे पति को काम के सिलसिले में उड़ीसा जाना पड़ गया था और वो करीब दस दिन बाद आने वाले थे। इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई और चार दिन बाद ही मेरी छोटी मौसी मुझे लेने आ गई और बोली शालिनी कुछ दिन हमारे साथ भी रह जा ! मैं भी फ्री थी सोची चलो मौसी के घर ही चलते हैं।

जब हम मौसी के घर पहुंचे तो मेरी स्वागत मौसी के बेटे अभिषेक और उसकी छोटी बेटी लुसी ने किया। मैं भी सभी से बड़ी गर्मजोशी से मिली, शाम को मौसा जी आये उन्होंने भी बड़ा प्यार दिया।

3 दिन बाद मौसी कपड़े धो रही थी तो उन्होंने कहा- अरे शालिनी ज़रा यह कपड़े छत पर सुखा आ !

मैं भी खाली बैठी थी, सोचा कि चलो थोड़ा काम ही कर लूं ! मैंने कपड़ों वाली बाल्टी उठाई और सुखाने के लिये छत पर चली गई। छत पर अभिषेक बैठा पढ़ रहा था। मैं बाल्टी से कपड़े निकाल निकाल कर लोहे की तार पर डाल रही थी। अचानक मुझे अहसास हुआ कि जैसे कोई मुझे बहुत घूर घूर के देख रहा हो।

मैंने देखा तो ये अभिषेक ही था। जब भी मैं कपड़े उठाने के लिए झुकती तो अभिषेक मेरे भरे भरे गुन्दाज चूची को बड़े धयान से देखता।

कपड़े सुखाते सुखाते मैंने अभिषेक से इधर उधर की बातें शुरू की तो वो भी पढ़ाई छोड़कर के मुझसे दिलचस्पी लेकर बातें करने लगा। जब कपड़े सूखने के लिए डाल दिए तो मैं जानबूझ कर अभिषेक के पास जा कर बैठ गई। मैंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखी थी इसलिए मेरी वक्ष-रेखा स्पष्ट रूप से दिख रही थी और अभिषेक की आँखें मेरे चूची पे गड़ी हुई थी। मैं भी शर्म न करते हुए उसके सामने ही चटाई पर उलटी लेट गई और उससे बातें करने लगी।

अब मेरे चूची को वो बड़े आराम से देख सकता था और मैं भी देख रही थी कि उसकी आँखें मेरे चूची से नहीं हट रही थी। फिर मैंने एक और शरारत की और बोली,” अभिषेक, तुम्हारा दिल १ मिनट में कितनी बार धड़कता है?”
वो बोला- 72 बार !
“पर मुझे लगता है जैसे मेरा दिल ज्यादा धड़कता है, कहीं मुझे हार्ट-अटैक तो नहीं आ जायेगा !” मैं बोली।
“अरे दीदी पागल हो गई हो क्या? इतनी छोटी सी उम्र में भी कहीं हार्ट-अटैक हो सकता है !” उसने जवाब दिया।
“अच्छा चलो, मुझे अपनी दिल की धड़कन सुनाओ !”
यह कहकर मैं अपना कान उसके सीने पर लगाकर उसके दिल की धड़कन सुनने का नाटक करने लगी।
एक मिनट बाद मैंने सर हटाकर कहा,” बिलकुल ठीक ! पूरे ७२ बार ! अब मेरी सुनो !”

जबकि मुझे उसके दिल की धड़कन बढ़ी हुई लगी थी। मैंने जानबूझ कर उसका सर पकड़कर अपने सीने पर इस तरह से रखा कि उसके होंठ मेरे चूची-रेखा को छूते रहें।
उसने कान मेरे सीने से लगा तो लिया पर मैं जानती थी कि उसकी हालत खराब हो रही थी।
उसके बाद सारा दिन कोई ख़ास बात नहीं हुई, पर अभिषेक बात-बे-बात मेरे आस पास ही मंडराता रहा।

रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले दूध लेकर जब मौसी ऊपर अभिषेक के कमरे में जाने लगी तो मैंने उन्हें कहा,”मौसी ! लाइए, दूध मैं ले जाती हूँ और हाँ मेरा गिलास भी इसके साथ ही रख दीजिये, दूध पीकर मैं भी लुसी के साथ ही सो जाउंगी।” “ओ के बेटी ! ये लो, और गुड नाईट !”

“गुड नाईट !” कहकर तीन गिलास दूध लेकर मैं ऊपर चौबारे में अभिषेक और लुसी के कमरे में चली गई। ऊपर कमरे में बैठे दोनों अपने अपने बिस्तर पर बैठे पढ़ रहे थे। मैंने जाकर ऊंची आवाज़ में कहा,”दूध पियो भाई दूध पियो !”

दोनों ने मुस्कुराकर मेरी और देखा फिर हमने इकट्ठे बैठ कर दूध पिया और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करके लाईट बंद कर दी और सोने लगे। पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। अभी शादी को सिर्फ छः महीने ही हुए थे और पति दस दिन के लिए बाहर चले गए थे, अभी तो मेरा दिल भी नहीं भरा था।

मैं लेटी लेटी सोच रही थी और मेरे साथ लेटी लुसी तो गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि अभिषेक उठकर बाथरूम गया है और खिड़की से अन्दर आ रही चाँद की रौशनी उसके सारे बिस्तर पर पड़ रही थी। मैं चुपके से उठी और जाकर उसके बिस्तर पर लेट गई। जब अभिषेक आया तो मुझे वहां देखकर बोला,” अरे दीदी ! आप यहाँ? लुसी के पास नींद नहीं आई क्या?”

मैं बोली,”नहीं, पर मुझे चांदनी में सोना अच्छा लगता है।”
तो वो बोला,”ठीक है ! आप यहाँ सो जाओ, मैं वहां सो जाता हूँ।”
मैंने तभी पलटकर कहा,”अरे नहीं ! तुम भी यहीं आ जाओ मेरे पास !”
तो अभिषेक भी उसी बेड पर मेरे साथ लेट गया पर कुछ फासला बना कर !
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#10
मैंने जो नाईटी पहन रखी थी उसका गला बहुत गहरा था और नाईटी के नीचे मैंने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहन रखी थी। गहरे गले के कारण मेरे चूची का ज्यादातर हिस्सा दिख रहा था, यहाँ तक कि मेरी आधी ब्रा भी गले से बाहर झांक रही थी और मैं जानती थी कि चांदनी में नहाया हुआ मेरा बदन अभिषेक को अपनी तरफ खींच रहा था।

थोड़ी देर हम दोनों फुसफुसाकर इधर उधर की बातें करते रहे ताकि कहीं लुसी की नींद न खुल जाये। फिर मैंने जानबूझ कर बहाना बनाया,”बड़ी गर्मी सी लग रही है ! क्या तुम्हें नहीं लग रही?”
“नहीं दीदी, मुझे तो मौसम ठीक लग रहा है।” अभिषेक बोला।

पर मैं तो बहाना बना रही थी इसलिए मैं उठकर बाथरूम में गई और एक मिनट बाद अपनी ब्रा उतार कर और अपनी सारी नाईटी आगे की तरफ खींच कर वापिस आकर बिस्तर पर लेट गई।

“अब ठीक है, असल में मेरी ब्रा बहुत कसी थी, शायद इसीलिए मुझे घुटन महसूस हो रही थी !” कहकर मैं फिर अभिषेक की तरफ मुंह कर के लेट गई। अब ब्रा न होने की वजह से अभिषेक मेरे चूची के कट्स ज्यादा अच्छी तरह देख सकता था क्योंकि सिर्फ मेरे चूचुक को छोड़ के तकरीबन मेरा दायाँ चूची उसे सारा का सारा दिख रहा था।

मैंने फिर उसकी गर्लफ्रेंड की और आलतू फालतू की सेक्सी बातें करनी शुरू की ताकि उसमे थोड़ी गर्मी आये और उसका हाथ पकड़कर अपने चूची के साथ लगाकर रख लिया। पहले तो वो थोड़ा डर रहा था पर मैं महसूस कर सकती थी कि उसकी मर्दानगी जागने लगी थी। मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया पर उसने अपना हाथ अब भी मेरे वक्ष से सटा रखा था वो हल्के हल्के हाथ हिलाने के बहाने मेरे चूची को दबाकर देख रहा था।

मैंने सोचा कि अब ज्यादा औपचारिकता की ज़रुरत नहीं, सीधा मुद्दे पे आ जाना चाहिए, तो मैंने सीधे-सीधे ही अभिषेक से पूछ डाला- अभिषेक क्या तुम्हें इन्हें दबाना अच्छा लग रहा है?

उसने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और बोला,” हाँ दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है !”

मैंने अपनी नाईटी का गला एक तरफ से हटा कर अपना दायाँ चूची पूरा बाहर निकालकर उसके सामने कर दिया और बोली,”लो, अब आराम से इसे दबाकर देखो।”

वो हिचकिचाया तो मैंने उसका हाथ पकड़कर खुद ही अपने चूची पर रख दिया। उसने धीरे से दो एक बार मेरा चूची दबाया पर शायद यही उसके सब्र की आखरी हद थी, उसने बिना कुछ कहे अपना मुंह आगे किया और मेरा निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगा। मैंने भी समझ लिया कि गाड़ी अब पटरी पर चल पड़ी है। मैंने अपना दूसरा चूची भी नाईटी से बाहर निकाला और हाथ उसके पायजामे के ऊपर से उसके लण्ड पे फेरने लगी जो पहले से ही अकड़ा हुआ था।
“दीदी, सीधी होकर लेटो !” अभिषेक बोला।

जब मैं सीधी होकर लेटी तो अभिषेक ने उठकर मेरी दोनों छातियाँ अपने हाथों में पकड़ी और बारी बारी से चूसने लगा और मैं उसकी पीठ सहलाने लगी। थोड़ी देर चूची चूसने के बाद अभिषेक ने मेरे गालों और होंटों को चूमना शुरू किया, मैंने भी मज़े लेते हुए उसका भरपूर साथ दिया। हम दोनों बारी बारी से अपनी जीभें एक दूसरे के मुंह में डाल कर चूस रहे थे।
फिर मैंने उससे कहा,”अभिषेक, पजामा उतारो !”

अभिषेक ने अपने पायजामा और अंडरवियर उतारा और अपना लण्ड लाकर मेरे मुंह के पास कर दिया और मैंने भी उसका इशारा समझते हुए उसका पत्थर जैसा अकड़ा हुआ लण्ड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। लण्ड चूसते-२ अभिषेक ने अपनी शर्ट और मेरी नाईटी भी उतार कर फ़ेंक दी। कुछ देर लण्ड चुसवाने के बाद अभिषेक टेढा होकर लेट गया और अपने हाथों के दोनों अंगूठों से मेरी पेंटी उतार दी। अब उसने मेरे पेट, कमर और जांघों को चूमना-चाटना शुरू किया और धीरे-२ मेरी टाँगें चौड़ी करके अपनी जीभ मेरी चूत में फिराने लगा। मैं भी चूत से टप-टप पानी छोड़ रही थी और उसका लण्ड चूस रही थी।
फिर मैंने कहा,”अभिषेक, अब ऊपर आ जाओ !”

यह सुनकर अभिषेक मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गया और अपना लण्ड मेरी चूत के होठों में फिराने लगा, जिससे मेरी चूत के पानी से उसके लण्ड का सुपाड़ा गीला और चिकना हो गया। जब उसने अपना लण्ड अन्दर डालना चाहा तो उसके मुंह से हल्की सी “ऊऽऽऊऽऽहऽऽ” करके चीख सी निकल गई। मैं समझ गई कि शालिनी तुझे तो कच्चा कुँवारा लौड़ा मिल गया। उसने ३-४ बार कोशिश की पर हर बार तकलीफ के साथ उसे अपना लण्ड बाहर निकालना पड़ा।
वो बोला,”दीदी मुश्किल है, ये अन्दर ही नहीं जा रहा, और डालता हूँ तो दर्द होता है !”
मैंने कहा,”ऐसे नहीं जायेगा, मैं तुम्हें तरीका बताती हूँ !”

मुझे पता था कि अगर इससे ना डाला गया तो मैं तो प्यासी रह जाउंगी, इसलिए मैंने उसको अपने ऊपर लिटाया, अपनी टांगों का घेरा उसकी कमर के चारों तरफ बना कर अपनी एडियाँ उसके चूतडों पे रखीं, फिर अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ा और उससे बोली,” अब धीरे धीरे से घस्से मारते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करो और अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दो ताकि मैं उसे चूस सकूं !”

उसने ऐसा ही किया और धीरे धीरे लण्ड चूत में डालने की कोशिश करने लगा, पर तकलीफ उसे अब भी हो रही थी। मैं भी मौक़ा देख रही थी, जब उसने कमर थोड़ी ढीली की तो मैंने पूरा जोर लगा अपने पांव से उसके चूतड़ और हाथों से उसकी कमर अपनी ओर खींची जिससे एक ही झटके में उसका लण्ड मेरी चूत में आधे से ज्यादा घुस गया।

अपने होंठों से मैंने उसके होंठ पकड़ रखे थे जिस वजह से वो चीख भी ना सका और उसकी चीख मेरे मुंह में ही दब गई। मुझसे अपने होंठ छुड़वा कर बोला,”दीदी प्लीज़ ! बाहर निकलने दो, बहुत दर्द हो रहा है, मुझे लगता है शायद खून निकल रहा है !”

मैं बोली- रुको ! ऐसे नहीं निकालते ! तुम्हें और ज्यादा दर्द होगा, मैं बताती हूँ, धीरे धीरे आगे पीछे करके निकालना !

वो जब दर्द से तड़पता हुआ आगे पीछे हो रहा था तो मैंने उसे दूसरा झटका मारा जिससे उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में समां गया और वो दर्द से तड़प उठा,”नहीं दीदी, अब नहीं सहा जाता, प्लीज़ निकाल दो !” अभिषेक बोला।

“बेवकूफ, मर्द बन ! ज़रा से दर्द से डर गया? सिर्फ आज ये दर्द होगा उसके बाद सारी उम्र का आराम है, मुझे भी पहली बार में बहुत दर्द हुआ था मैं लड़की होकर सह गई और तू लड़का होकर रोता है? डर मत ! चुपचाप चोदता रह !”

मेरे कहने पे वो धीरे-२ लगा रहा। मैंने उसके साथ पूरा सहयोग करके उससे सम्भोग करवाया और उसे अपने चूची और चूमा-चाटी से बांध के रखा। सेक्स करते-करते वो मेरे होंट और चूचियां चूसता रहा। मैं जानती थी कि उसे दर्द हो रहा है पर मर्द का बच्चा लगा रहा ! पीछे नहीं हटा ! और फिर तो स्पीड बढ़ा कर मुझे चोदने लगा।

जब उसे मज़ा आने लगा तो वो भी दर्द भुला के मुझे चोदने का स्वाद लेने लगा और ५-६ मिनट बाद हम दोनों बारी बारी से झड़ गए। मैं तृप्त हो कर सो गई और वो बाथरूम में अपना लण्ड धोने चला गया। अक्सर मर्द अपनी छाती फुलाकर कहते हैं,”अरे मैंने तो कच्ची कली फाड़ दी !” आज मैं भी अपनी छातियाँ फुलाकर कह सकती हूँ,”अरे मैंने तो कच्चा केला छील दिया !
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#11
अगला भाग - ""    Mother and Son : A taboo affair 3 "" बहुत जल्दी.........
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#12
sex sex Iex sex sex
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#13
मॉम फ्रेंड - आस्था सिंह[Image: 20241208-155718.jpg]
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#14
मॉम - शालिनी सिंह 

[Image: He-S5o-Rw-Rv-MV-UQH8v-XJDGkt.jpg]
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#15
banana banana banana D:) 


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#16
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#17
Sleepy Namaskar cool2 happy cool2 happy happy cool2
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#18
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#19
thanks thanks thanks thanks thanks thanks
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#20
achi story hai
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