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देवर भाभी की असली कहानी — हिंदी फ़ॉंट में
#1
दोस्तों - ये मेरी पहली कहानी है । दरसल कहानी नहीं सच्चाई है । इस कहानी में मैं बस नाम बदले है — बाक़ी सब जैसा सच में हुआ वही लिखा है । 

कहानी में बस ३ लोग है - विक्रम (देवर - २७ साल ), प्रिया (भाभी - २६ साल) और आशीष (विक्रम से ५ साल बड़ा भाई ) । कहानी में कई भाग होंगे — क्यूँकि सच में प्रिया और विक्रम के बीच प्रिया की शादी के पहले साल से ही कुछ होने लगा — पर उनके बीच हमेशा एक झिझक रही जो धीरे धीरे कम हुई । 
हमारे बीच हुई हर बात बताऊँगा पर क्रम थोड़ा बदल कर - उससे रोमांच थोड़ा बना रहेगा । 

प्रिया गोरी है - और थोड़ी स्लिम ही । कभी पूछा नहीं पर फ़िगर शायद ३४ - २८ - ३२ होगी ।

कहानी पढ़कर अच्छा लगे तो लाइक कीजिए - आगे लिखने का हौंसला मिलेगा ।

भाग - १
——————————-

उस बार विक्रम देर रात घर पहुँचा । दरवाज़ा प्रिया ने ही खोला - उसने बताया कि बाक़ी सब सो चूके है । चाय पीते समय विक्रम का भाई आशीष थोड़ी देर को उठा पर फिर सो गया । प्रिया और विक्रम उसी डबल बेड पर बैठे थे जहां आशीष सोया था - विक्रम पैरो की तरफ़ था उन दोनो से । जब आशीष फिर से सो गया तब प्रिया और विक्रम बातें ही कर रहे थे । अचानक कम्बल के अंदर दोनो के पैर टकराय - शायद गलती से । पर तब ऐहसास हुआ की कम्बल के अंदर कुछ हो तो आशीष का डर नहीं । ये बहुत रोमांचक था - क्यूँकि प्रिया का पति आशीष बराबर में ही सोया था । फिर भी एक बार टच होने के बाद दोनो में से किसी ने अपना पैर वापस नहीं हटाया । बल्कि दोनो के पैरो की उँगलिया थोड़ी हलचल करने लगी । और धीरे धीरे ऊपर की तरफ़ बढ़ने लगी । 

विक्रम शॉर्ट्स में था और प्रिया साड़ी में । दोनो के पैर अब एक दूसरे के घुटने के पास तक पहुँच गए थे - रोमांच बढ़ रहा था । जब ऐसा लगा की दोनो में से कोई रुकने वाला नहीं - तो दोनो के पैर अब जाँघो के पास टच करने लगे । प्रिया तो विक्रम के शॉर्ट्स के ऊपर से ही टच कर पा रही थी - पर विक्रम का टच तो सीधे प्रिया की स्किन पर था - कपड़ों के अंदर । अचानक प्रिया का पैर वहाँ टच हुआ - जहां शायद सोचा भी नहीं था - पर रुकी नहीं । अब थोड़ा और ज़ोर से आगे बढ़ाया ।  विक्रम ने भी आगे बढ़ते हुए दोनो पैर के बीच में टच किया । दोनो की साँसें तेज होने लगी । लेकिन इससे आगे कुछ करने में डर सा भी लग रहा था । पता नहीं था की एक दूसरे के मन में क्या है । अचानक आशीष नींद में थोड़ा हिला - तो दोनो सम्भाल कर बैठ गए । 

तभी प्रिया बोली की अगर अभी नींद नहीं आ रही तो थोड़ी देर टीवी देख लेते है । टीवी ऑन किया और लाइट बंद करके विक्रम अब प्रिया के बराबर में आकर बैठ गया - उसी कम्बल में । डबल बेड पर तीन लोग थे तो थोड़ा क़रीब ही बैठे थे । दोनो में कोई बात नहीं हो रही थी - पर कुछ तो अंदर चल ही रहा था । लग ही रहा था की अब तो और ज़्यादा क़रीब बैठे है - और आशीष को कुछ दिखेगा भी नहीं । इतने क़रीब बैठे थे तो हाथ तो टकराने ही थे - पर मूड पहले से थोड़ा बना था तो इस बार ज़्यादा देर नहीं लगी हाथों को प्रिया को कमर तक जाने में । प्रिया को भी ये टच अच्छा लगा शायद - उसने आँखें बंद की तो थोड़ा पीछे को होकर लेट गयी । 

विक्रम के हाथ लगातार प्रिया के कमर और पेट को सहला रहे थे और जल्दी ही उसके बूब्स तक पहुँच गए । प्रिया की तरफ़ देखा तो उसकी आँखें अभी भी बंद थी - विक्रम ब्लाउस के ऊपर से बूब्स को मसलने लगा । प्रिया की सांसे तेज चल रही थी - और विक्रम भी प्रिया के बूब्स के टच से उत्तेजित हो रहा था । विक्रम से रहा नहीं गया और उसने ब्लाउस के ऊपर से अंदर हाथ घुसाने की कोशिश की - पर हाथ आसानी से ब्लाउस के अंदर चला गया -- शायद प्रिया ने पहले ही २ हुक खोल दिय थे । बस अब विक्रम अच्छे से प्रिया के नंगे बूब्स को मसलने लगा -- प्रिया आहें भरने लगी । 

दोनो को मज़ा आ रहा था पर आशीष वही था -- और आवाज़ होने का डर लगने लगा । विक्रम को लगा ज़्यादा कंट्रोल खोने से पहले उसे चले जाना चाहिए । विक्रम ने टीवी बंद किया और वह से उठकर जाने लगा -- पर पता नहीं क्या सोचकर वो रुका - और अंधेरे में ही प्रिया के होंठों पर एक किस कर दिया ।
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#2
आगे कहानी और भी सेक्सी और erotic होगी — शुरुआत अच्छी लगी तो रिप्लाई करके हौंसला बढ़ाइए ।
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#3
भाग २ 
—————-

विक्रम प्रिया के होंठों पर किस करने के बाद दूसरे कमरे में आकर लेट गया । रात बहुत हो चुकी थी, वो दिन के लम्बे सफ़र से थका भी था और जो हुआ उसके बारे में सोचते सोचते ही उसे नींद से आ गयी । उधर प्रिया की उत्तेजना बढ़ी हुई थी जब से विक्रम उसे किस करके गया - वो भी उसके पति के सामने ही । विक्रम सुबह फिर चला जाएगा - शायद इसलिए भी थोड़ी बेचैनी थी ।” शायद विक्रम चाहता था की कुछ आगे हो पर उस कमरे में नहीं करना चाहता था इसलिए किस करके गया ।” ये सोचकर प्रिया थोड़ी देर बार अंधेरे में ही उठकर विक्रम के रूम की तरफ़ बढ़ी । प्रिया और विक्रम के बीच हमेशा ये एक अनकही सी बात थी । दोनो को पता नहीं था अच्छे से की दूसरा क्या चाहता है - और एक दूसरे पर कोई दबाव भी नहीं बनाना चाहते थे । बस ज़्यादातर अंधेरे के माहौल में कुछ शुरू हो जाता और फिर मन बहक सा जाता । रात के समय में कुछ ऐसे बहकना दिन के मुक़ाबले ज़्यादा आसान होता है — बस यही होता था और आज फिर यही हुआ था । विक्रम ने जिस तरह से प्रिया के होंठों को चूमा था, बल्कि थोड़ा चूसा भी था — कुछ तो और होना था आज रात ।

प्रिया धीरे से उस रूम में पहुँची जहां विक्रम सोया था । विक्रम सिंगल बेड पर सोया था — पास जाकर प्रिया ने धीरे से विक्रम को अंधेरे में ही हाथों से ढूँढा । प्रिया के हाथ विक्रम के कंधे पर लगे — विक्रम दूसरी तरफ़ चेहरा करके सोया था । एक बार को प्रिया ने सोचा की वो वापस चली जाए - पर पता नहीं क्यू उसने एक बार कंधे को थोड़ा हिला दिया । विक्रम नींद में था — पर थोड़ा जगा शायद । प्रिया को समझ नहीं आया की क्या करे वो - उसने सोचना बस थोड़ा फ़ील लेके - टच करके चली जाए वो । उसने अपना हाथ को कंधे से नीचे हाथ पर सहलाना शुरू किया । थोड़ा विक्रम के सीने की तरफ़ हाथ गया तब विक्रम शायद थोड़ा जाग गया — विक्रम ने अपना हाथ प्रिया के हाथ पर रखा और धीरे से सहलाने लगा । तभी विक्रम की साँसें थोड़ी तेज हुई और उसने पलट कर प्रिया को कमर से पकड़ कर थोड़ा अपनी तरफ़ खींच लिया । प्रिया को समझ नहीं आया की आज विक्रम कैसे इतनी हिम्मत कर गया । पर विक्रम कुछ अलग ही मूड में था — उसने प्रिया के बूब्स पकड़ लिए और ज़ोर से दबाने लगा । बीच बीच में प्रिया के पेट पर ही हाथ फिसलाने लगा । प्रिया को मज़ा आ रहा था और डर भी लग रहा था - क्यूँकि आशीष ज़्यादा दूर नहीं था — विक्रम जिस तरह से आज मूड में था , आगे कुछ भी हो सकता था । विक्रम इतनी ज़ोर से बूब्स दबा रहा था की प्रिया को आवाज़ें कंट्रोल करना मुश्किल होने लगा। विक्रम ने अब ब्लाउस के ऊपर से ही बूब्स को चूसना शुरू कर दिया — इससे प्रिया और डर गयी की ये सब तो नहीं हो सकता यहाँ अभी — जैसे ही विक्रम ने प्रिया का ब्लाउस ऊपर करने की कोशिश की — प्रिया अचानक से खुद को छुड़ाकर वापस अपने रूम में आ गयी — उसे भी कुछ और करने का मन तो था —पर पति बराबर के रूम में होते हुए नहीं । विक्रम ने भी अब कुछ और करने की कोशिश नहीं की - और सो गया ।
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#4
भाग ३

प्रिया अपने उसका देवर विक्रम जब भी क़रीब आए तो अचानक ही — कभी पहले से सोच समझ कर नहीं । पहली बार जब ऐसा हुआ तब विक्रम की शादी नहीं हुई थी । और हर बार की तरह अंधेरे में ही दोनो थोड़ा बहके थे । ये तब की बात है जब प्रिया की शादी को एक साल भी पूरा नहीं हुआ था । प्रिया का पति किसी और शहर में नौकरी करता था और बस संडे को ही घर आता था । विक्रम भी किसी और शहर me पढ़ता था ओर गर्मी की छुटियों में घर आया था । प्रिया और विक्रम दोनो का कमरा ghar की छत par था । रात में बिजली चली जाती थी तो इमर्जन्सी फ़ैन बस प्रिया के कमरे में था । उस रात भी बिजली गयी और बाहर बारिश का मौसम देखकर विक्रम प्रिया के रूम में चला गया । ऐसा अक्सर होता था - वह एक अलग बेड था जाह विक्रम सो जाता था । इस बार प्रिया जगी थी - तो वो दोनो अंधेरे में ही बातें करने लगे । जैसा अक्सर होता है - भाभी देवर से गर्ल्फ़्रेंड के बारे में पूछती हुई हंसी मज़ाक़ करने लगी । विक्रम भी बोला की काश होती मेरी गर्ल्फ़्रेंड  कितना मज़ा आता । प्रिया बोली की मज़ा तो तब ही आता है जब साथ हो कोई - दूर से तो क्या मज़ा । ऐसे ही बातों  थोड़ा मूड सा बन्ने लगा मन ही मन शायद । तभी विक्रम एक  सुनाय पर प्रिया को हंसी नहीं आयी । वो बोली मुझे तोगुदगुदी करने पर भी हंसी  आती - विक्रम बोलाट्राई करते है और वो प्रिया के बेड पर जाके प्रिया को गुदगुदी  करने लगा ।
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#5
एक तो अंधेरा और ऊपर से ऐसे क्लोज़ जाके टच होने लगा । विक्रम को प्रिया को गुदगुदी करने में मज़ा तो आ रहा था पर अभी तो उसके मन में उससे आगे कुछ नहीं था । गुदगुदी करते समय विक्रम के हाथ एक दो बार प्रिया के बूब्स पर भी लगे — जिसमें उसे मज़ा भी आया - और शायद प्रिया को भी । पर तब तक भहि उससे ज़्यादा दोनो ने नहीं सोचा था । वाक़ई प्रिया को गुदगुदी से हंसी नहीं आ रही थी - तब विक्रम बोला की ऐसे जान बूझ कर तो वो भी हंसी रोक सकता है । अब प्रिया विक्रम को गुदगुदी करने लगी — और विक्रम जल्दी ही हंस पड़ा । हंसते हंसते दोनो बेड पर गिर गए और प्रिया का हाथ विक्रम की छाती पर ही रह गया । जब दोनो अपनी साँस सम्भाल रहे थे - तो प्रिया का हाथ विक्रम के ऊपर घूमने लगा । अभी भी वो थोड़ी बातें कर रहे थे - शायद थोड़ा मूड कंट्रोल करने के लिए । प्रिया का हाथ विक्रम के बनियान के ऊपर इधर उधर घूमता रहा । तभी विक्रम प्रिया की गर्दन पर टच करके थोड़ा हंसने की कोशिश करने लगा । अब धीरे धीरे मूड बदलने लगा - विक्रम की ऊँगलिया कभी प्रिया की गर्दन ओर कभी गालों से होती प्रिया के होंठों के पास पहुँची तो प्रिया ने भी होंठ खोल कर उँगली को हल्का से चूस लिया । अब कोई कुछ बोल नहीं रहा था और सांसे थोड़ी भारी होने लगी दोनो की ।
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#6
अब प्रिया भी अपना हाथ विक्रम के चेहरे के पास ले आयी और उसके होंठों पर सहलाने लगी । शायद ये बताने को की उसे अपने होंठों पर विक्रम का टच अच्छा लग रहा है । विक्रम के लिए सब बहुत नया और रोमांचक था - वो भी प्रिया की उँगलीयों को होंठों से हल्का हल्का चूसने लगा । शायद अब दोनो का ही मन एक दूसरे के होंठों से होंठ चूसने का करने लगा था - और ज़्यादा देर नहीं लगी वो होने में । विक्रम प्रिया के होंठ अब अपनी फ़िंगर्ज़ से रगड़ रहा था — और वो दोनो धीरे धीरे पास हो  रहे थे । सांसे तेज हो गयी थी — और फिर दोनो के चेहरे बहुत पास आए और दोनो के दहकते हुए होंठ एक दूसरे से मिल गए ।

अब प्रिया और विक्रम एक दूसरे के होठ चूस रहे थे ! विक्रम के लिये ये पहली बार था -- पर प्रिया तो ये सब हर हफ़्ते करती थी पति के साथ - फिर भी कुछ अलग मज़ा आ रहा था! शायद इसलिए कि पति ज़्यादा टाइम नहीं चूसता था होठ - पर विक्रम के साथ किस चलती ही रही ! कभी ऊपर वाला होठ कभी नीचे वाला । अभी भी डर रहे थे दोनों कुछ और कहने या करने मे । दोनों को ही शायद यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये सच में हो रहा है । पर इतनी लंबी किस होते होते मूड तो दोनों का बनने ही लगा था । प्रिया के हाथ अब विक्रम के सीने को सहलाने लगे तो विक्रम ने भी अपना हाथ प्रिया की कमर पर रख दिया और धीरे धीरे कमर और पेट को सहलाते हुए ब्लाउज के ऊपर आने लगा ! ऐसा होते ही प्रिया की साँसे और तेज़ चलने लगी और वो और ज़ोर से चूसें लगी विक्रम के होठ और विक्रम को अपने ऊपर खींच लिया । अब विक्रम बूब्स दबाने लगा और प्रिया आँखें बंद करके आँहें भरने लगी । विक्रम अब बूब्स दबाते हुए प्रिया की गर्दन और कंधे पर किस करने लगा ! विक्रम ने ये सब सोचा नहीं था पर कभी कभी प्रिया का क्लीवेज दिख तो जाता ही था -- विक्रम को वही याद आ रहा था और वो अब ज़ोर से दबाने लगा प्रिया के बूब्स ! ये पहली बार था जब विक्रम ने किसी लड़की के बूब्स टच किए थे -- भले ही ब्लाउज के ऊपर से पर उसे बहुत मज़ा आ रहा था । पर अचानक से बाहर से आवाज़ आयी -- शायद कोई जाग गया था, आवाज़ सुनते ही विक्रम प्रिया के बेड से हटा और दूसरे बेड पर जाकर लेट गया ! और दोनों ही सोचने लगे उसके बारे में जो होते होते रह गया !
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#7
भाग ४
-----------

काफ़ी दिन ऐसे ही चलता रहा -- कभी मौक़ा होने पर अंधेरे में कुछ होता विक्रम और प्रिया के बीच , पर बात कभी वहाँ तक नहीं पहुची जो पहली बार हुआ था !
पर एक दिन तो होना ही था - और हुआ भी ।

उस रात भी बस विक्रम और प्रिया सोये थे छत वाले कमरे में - बाक़ी सब लोग नीचे सोये थे और सीढ़ियों का दरवाज़ा भी ऊपर से ही बंद था । देर रात हुई और विक्रम जब पानी पीने उठा ! उसे थोड़ी गर्मी लग रही थी ! उसके उठने की आवाज़ से प्रिया भी जाग गई । उसने अंधेरे में ही पूछा की क्या हुआ नींद क्यों खुल गई ! विक्रम बोला थोड़ी गर्मी लग रही थी पानी पीना था ! प्रिया पंखे के ठीक नीचे वाले बेड पर थी अपने बच्चे के साथ । प्रिया ने उसे पानी की बॉटल पास की और धीरे से बोली - वहाँ गर्मी लग रही है तो यही आ जाओ ना ।

थोड़ी देर कोई कुछ नहीं बोला आगे -- और फिर धीरे से विक्रम जाके प्रिया के बराबर में पहुँचा और लेटते हुए प्रिया के कान में बोला -- लो आ गया !

दोनों के अंदर की बेचैनी कई दिनों से दबी हुई थी -- और दोनों को एहसास हो चुका था कि आज कोई नहीं आने वाला ! विक्रम की सांसे प्रिया कि साँसों से टकरा रही थी और विक्रम ने जल्दी ही अपना एक हाथ प्रिया की कमर पर रख दिया और ऐसा होते ही प्रिया ने दोनों होठों के बीच की थोड़ी सी दूरी भी ख़त्म कर दी !! पिछली बार किस बहुत हल्के हल्के हुई थी -- पर आज होठ से होठ मिलते ही बड़े जोश में चूसना शुरू हो गया । साँसों की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी ! जल्दी ही किस के साथ साथ विक्रम के हाथ प्रिया के बूब्स पर पहुँच गये और बूब्स मसलने लगा अच्छे से । फिर से हल्के से कान में बोला -- खोलो ना इसे । प्रिया ने सोचा नहीं था विक्रम ऐसे बोलेगा -- पर उसके मुँह से ऐसे शब्द सुनके प्रिया का रोमांच और बढ़ गया और उसने भी एक रोमांचक जवाब दिया -- तुम ही खोल दो ना ।।
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#8
प्रिया के मुँह से हाँ सुनते ही विक्रम ने देर नहीं की -- और थोड़ा नीचे हुआ और गर्दन पर होठ फिसलाते हुए ब्लाउज के हुक खोलने लगा ।
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#9
आगे भी तो कहो और क्या हुआ, खामोश को हो गए
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#10
Update please
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#11
ये एक अलग भाग है । बाद में दोनों कहानिया जुड़ेंगी । 

उस दिन प्रिया ने घर का दरवाज़ा खोला तो उसका छोटा देवर रवि सामने  खड़ा था । उसने उस अंदर बुलाया और चाय नाश्ता कराने के बाद बोला, आप टीवी देखो तब तक मैं नहाकर आती हूँ । नहाते हुए उस कुछ दिन पहले की बात याद आ गई जब वो होली के त्योहार पर गाँव गई थी जहाँ रवि रहता था ! 

होली खेलने का शौक दोनों को था -- रवि को भी और प्रिया को भी ! वैसे तो रवि उसके साथ हर साल होली खेलता था पर उस होली पर उसने कुछ ऐसा किया जो थोड़ा अलग थोड़ा ग़लत लगा !

इस बार जब वो रंग लगा रहा था तो कुछ अलग ही तरह हाथ से मसल रहा था । चेहरे से  ज़्यादा रंग गर्दन पर और कन्धों पर भी लगा रहा था । फिर अचानक प्रिया बचने के लिए दूसरी तरफ़ मुड़ी तो रवि के हाथ उसके कन्धों से उसके बूब्स पर पहुँच गए । ऐसा नहीं था कि ये पहले बार हुआ था -- होली खेलते हुए ऐसे हाथ लगना आम बात है । पर इस बार रवि ने हाथ हटाए नहीं बल्कि बूब्स दबाए दोनों हाथों से । ये गलती से नहीं हो सकता था ।

रवि प्रिया को छोड़ ही नहीं रहा था । किसी तरह प्रिया ने ख़ुद को अलग किया और दौड़ कर थोड़ी दूर गई । पता नी क्यों उसका ध्यान सीधे रवि के लोअर की तरफ़ गया । और जो देखा उससे उसे कोई शक न्ही था की  जो हुआ उससे रवि उत्तेजित हो गया था !

शायद यही वो पल था जब प्रिया भी मन ही मन एक कदम आगे बढ़ गई -- उसे एहसास हुए की वो भी उत्तेजित हो गई थी ।

उस होली के बार कई बार प्रिया के मन में ये बात आई की ऐसा क्यों हुआ । वो समझ सकती थी की रवि की अभी शादी नहीं हुई है तो उसका मन भटक सकता है ! पर उसे ये जानने का मन करने लगा कि क्या वाकई रवि ऐसा सोचता है उसके बार में या बस एक बार गलती से ऐसा कर बैठा !  आज जब अचानक रवि आया तो फिर से प्रिया को वही बात याद आ गई ! और ये बात आते ही पता न्ही क्यों उसका मन हर बार थोड़ा उत्तेजित हो जाता था । नहाते समय जब ये सब याद याद तो वो अनजाने में ही अपने  बूब्स मसलने लगी -- जैसे उस दिन रवि ने मसले थे !

ख़ुद ही आँखें बंद सी हो गई और हाथ पता नी कब बूब्स से नीचे भी जाने लगे । वैसे प्रिया कभी अपनी चूत में उंगली नी करती थी - पर ये बात याद करके थोड़ा ऊपर ऊपर से हाथ लगाके मजा आता था उसे । इस सब के चलते काफ़ी देर बाद बाहर आई वो नहाकर !

बाहर आई तो देखा रवि सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था । प्रिया को देखते ही उसका ध्यान भी अचानक उसके बूब्स पर गया और उसे भी होली वाली बात याद आ गई शायद । वो अपने साइड में सोफे पर इशारा करते हुए बोला -- आओ आप भी , अच्छी मूवी आ रही है टीवी पर !
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#12
ज्यादातर ऐसे साथ में बैठना होता नहीं था क्यूंकि सबके सामने अजीब लगता । पर आज कोई नी था घर में --  प्रिया ने भी ज़्यादा नी सोचा और उसके बराबर में जाके बैठ गई ।रवि कंबल ओढ़ कर बैठा था क्यूंकि ठंड थी । वो बोला - लो आप भी ओढ़ लो ना कंबल । प्रिया ने थोड़ा सोचा की अजीब तो नहीं ऐसे देवर के साथ एक कंबल में - पर फिर लगा वैसे भी अभी तो कोई है ही नहीं घर में तो फिर कंबल में आ गई  ।और दोनों टीवी देखने लगे । थोड़ी देर बाद प्रिया को लगा की जैसे दोनों के पैर टच हो रहे ! पहले तो उसे लगा शायद गलती से पर जब ध्यान दिया तो लगातार ही टच हो रहे थे । बल्कि हल्का हल्का सहला रहा था रवि उसे पैर को अपने पैर की उँगलियों से ! प्रिया के दिल की धड़कन थोड़ी बढ़ने लगी । पर उसने सोचा कुछ देर इग्नोर करना चाहिए ।

पर जब वो नहीं रुका तो पूछ ही लिया धीरे से । 
"ये क्या कर रहे हो " 
"कुछ भी तो नहीं " 
"कुछ नहीं तो .." वो कंबल से निकालने लगती है ये कहते हुए 
तब वो प्रिया का हाथ पकड़ कर रोकता है । 
"बताओ फिर ये क्या कर रहे हो, होली पर भी ऐसे ही "
"क्यों मजा नी आया था होली पर "
अब प्रिया क्या बोलती - वो कुछ देर चुप रही 
तब उसने हाथ पकड़ के पास खींचा तो दोनों के चेहरे पास आ गए और दोनों की सांसें टकराने लगी । प्रिया फिर बोली हल्के से -- "बोलो ना क्यों ..." इससे आगे कुछ बोलती उससे पहले ही रवि ने हल्के से बोला "क्यूँकि ... " और बस अपने होठ प्रिया के होठों से मिला दिए ।
प्रिया को कुछ समझ नी आया पहले तो - पर वो हटी भी नहीं वहाँ से । शायद उसे अंदर से पता ही था की रवि के मन में ऐसा कुछ है - और बस यही सोचते सोचते उसे लगा की अब वो होठ चूसने लगा है -- और ख़ुद पर यकीन नी हुआ क्यों अब वो भी साथ देने लगी थी किस में ।
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#13
Tina - suno aaj office mai koi nhi hai
Rohit - to kya kare , bc , yhi shuru ho jaye , khol apni chut aur phr dekh kaisa chats hu tujhe
Tina - bkl 1 ghante se phele hat mat jio lodu
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#14
Ek aur devar bhabhi ki kahani 


देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)

घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।

धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…

**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**

सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।

राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"

प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।

राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"

प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"

प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"  
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।

**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**

रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।

प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।

राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"

प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"

राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"

प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"

लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।

राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"

प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"

राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।

**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**

दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"

प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"

राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।

प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"

राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"

लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"

प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"

प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"

राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।

**चौथा मौका -- रात में, एक ही बिस्तर पर, मम्मी-पापा पास वाले कमरे में सोए हुए (ये हिस्सा अब और ज्यादा डिटेल में)**

एक रात अचानक बिजली चली गई। घर में गर्मी बहुत थी। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया और राहुल नीचे एक ही बड़े कमरे में अलग-अलग बिस्तर पर लेटे थे, लेकिन पंखा भी नहीं चल रहा था।

राहुल धीरे से उठा और प्रिया के बिस्तर के पास आ गया। "भाभी, बहुत गर्मी है ना?"

प्रिया (फुसफुसाकर): "हाँ… लेकिन तुम अपने बिस्तर पर सो जाओ।"

राहुल ने प्रिया के बिस्तर पर ही लेटने की कोशिश की। "बस थोड़ी देर… पास में थोड़ी हवा लगेगी।"

प्रिया ने मना किया, "नहीं राहुल, ये गलत है।"

लेकिन राहुल मानने वाला नहीं था। वह धीरे से प्रिया के बगल में लेट गया। अंधेरे में उसका हाथ प्रिया की जाँघ पर पड़ गया। प्रिया सिहर गई।

राहुल के मन में: "भाभी की जाँघ… कितनी मुलायम। बस हल्का स्पर्श कर रहा हूँ, लेकिन मन कर रहा है कि और ऊपर चढ़ जाऊँ।"

प्रिया के मन में: "ये क्या हो रहा है? हाथ जाँघ पर है… मना करूँ, लेकिन अगर आवाज हुई तो मम्मी-पापा जाग जाएँगे। चुप रहूँ तो ये और आगे बढ़ जाएगा।"

राहुल का हाथ धीरे-धीरे जाँघ से ऊपर सरकने लगा। प्रिया ने हल्के से हाथ पकड़कर रोका, लेकिन पूरी ताकत से नहीं। बस फुसफुसाई, "राहुल… बस… बहुत हो गया।"

राहुल ने हाथ नहीं हटाया। उँगलियाँ हल्के-हल्के घुमाने लगा। फिर उसने धीरे से प्रिया की तरफ मुड़कर उसके गाल पर हल्का किस किया।

प्रिया (सिहरते हुए): "राहुल… क्या कर रहे हो? ये गलत है… छोड़ दो मुझे।"

लेकिन राहुल ने दूसरा किस प्रिया के दूसरे गाल पर किया, फिर धीरे-धीरे उसके होंठों के पास आ गया। उसने बहुत हल्के से प्रिया के निचले होंठ को चूमा। प्रिया की साँसें तेज हो गईं। राहुल के मन में: "भाभी के होंठ कितने मीठे हैं… जैसे कोई फूल। और आगे बढ़ना है।"

राहुल ने अब गहरा किस किया। उसकी जीभ प्रिया के होंठों को चाटने लगी। प्रिया पहले तो विरोध कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके होंठ भी थोड़े खुल गए। किस लंबा और गहरा होता गया। राहुल का एक हाथ प्रिया की गर्दन के पीछे था, दूसरा हाथ धीरे से उसके टॉप के अंदर सरक गया और स्तनों को छूने लगा।

प्रिया के मन में: "नहीं… ये बहुत गलत है… लेकिन किस क्यों अच्छा लग रहा है? मेरे स्तन छू रहा है… शरीर में आग लग रही है।"

राहुल ने प्रिया का टॉप ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाने लगा। फिर ब्रा को ऊपर सरकाकर एक स्तन को बाहर निकाला और मुंह से चूसने लगा। वह धीरे-धीरे निप्पल को चूस रहा था, जीभ से घुमा रहा था। प्रिया की आहें निकलने लगीं -- "अ ahhh… राहुल… धीरे… मम्मी-पापा… उफ्फ…"

राहुल दूसरे स्तन पर भी यही किया। दोनों स्तनों को बारी-बारी चूसता रहा, कभी हल्के से काटता, कभी चूसता। प्रिया अब पूरी तरह सिहर रही थी। राहुल का हाथ नीचे सरककर प्रिया की जाँघों के बीच में जाने लगा, लेकिन प्रिया ने जोर से हाथ पकड़ लिया और फुसफुसाई, "बस राहुल… आज इतना ही… आगे मत बढ़ाओ… प्लीज।"

राहुल ने मजबूरन रुक गया, लेकिन प्रिया के स्तनों को एक आखिरी बार चूसकर बोला, "ठीक है भाभी… लेकिन तुम्हें बहुत अच्छा लग रहा था।"  
दोनों अलग हो गए, लेकिन कमरे में उनकी तेज साँसें अभी भी गूँज रही थीं।

**आखिरी स्टेज -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**

एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।

प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"

राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"

प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।

राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"

प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"

राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।

राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"

राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"

राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।

प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"

राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।

प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"

राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"

राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"

प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।

इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।

(अगर तुम्हें कोई खास हिस्सा और भी ज्यादा डिटेल में चाहिए या नई कहानी चाहिए तो बता दो।)



देवर-भाभी की धीरे-धीरे बढ़ती हुई सेक्स स्टोरी (हिंदी में पूरी डिटेल के साथ)

घर में छोटा सा परिवार था। बड़े भाई अक्सर ऑफिस के काम से बाहर रहते थे। मम्मी-पापा ऊपर वाले कमरे में सोते थे। नीचे रहते थे राहुल (देवर -- २४ साल) और प्रिया (भाभी -- २८ साल)। प्रिया बहुत सुंदर थी -- गोरी, पतली कमर, बड़ी-बड़ी आँखें, और साड़ी में उसकी काया देखते ही मन अजीब हो जाता था। राहुल जवान था, थोड़ा शरारती, लेकिन शुरू में सिर्फ भाई-भाभी का रिश्ता था।

धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा…

**पहला टच -- किचन में, सुबह का समय**

सुबह के ७ बजे थे। प्रिया किचन में चाय बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। राहुल नीचे आया, आँखें अभी नींद भरी हुई थीं। उसने भाभी को देखा तो उसके मन में एक हल्की सी करंट दौड़ गई।

राहुल (धीरे से): "भाभी, चाय दे दो ना…"

प्रिया ने मुस्कुराते हुए कप बढ़ाया। जैसे ही राहुल ने कप लिया, उसकी उँगलियाँ प्रिया की उँगलियों से हल्के से छू गईं। बस एक सेकंड का स्पर्श।

राहुल के मन में: "कितनी नरम हैं भाभी की उँगलियाँ… गर्मी जैसी लग रही है।"

प्रिया के मन में: "अरे, ये क्या हुआ? बस उँगलियाँ छू गईं… लेकिन क्यों दिल धड़क रहा है? नहीं, ये तो बस भाई है।"

प्रिया ने तुरंत हाथ खींच लिया और कहा, "जल्दी से पी लो, ठंडी हो जाएगी।"  
लेकिन राहुल ने जानबूझकर कप को थोड़ा और पकड़ रखा, ताकि स्पर्श थोड़ा और लंबा रहे। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप चूल्हे की तरफ मुड़ गई। उसका चेहरा हल्का लाल हो गया था।

**दूसरा मौका -- रात में, सब सोए हुए थे, लेकिन राहुल जाग रहा था**

रात के ११ बजे। पूरे घर में सन्नाटा था। मम्मी-पापा ऊपर सो रहे थे। प्रिया अपने कमरे में लेटी हुई थी। राहुल भी अपने कमरे में था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। वह उठा और पानी पीने के बहाने प्रिया के कमरे के पास गया। दरवाजा आधा खुला था।

प्रिया साड़ी बदलकर नाइट सूट में थी -- हल्का सा ढीला टॉप और पजामा। वह करवट लेकर लेटी थी, जिससे उसकी कमर और कूल्हों का घुमाव साफ दिख रहा था।

राहुल धीरे से अंदर गया। "भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?"

प्रिया (आँखें बंद किए, धीमी आवाज में): "हाँ… तुम भी जाग रहे हो? जाओ सो जाओ।"

राहुल बिस्तर के किनारे बैठ गया। उसने हल्के से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा। "ठंड लग रही है क्या भाभी? कम्बल ठीक से ओढ़ लो।"

प्रिया के मन में: "ये क्या कर रहा है? हाथ कंधे पर… लेकिन भाई है, शायद मासूमियत से कर रहा होगा। मना कर दूँ?"

लेकिन प्रिया ने कुछ नहीं कहा। राहुल का हाथ धीरे-धीरे कंधे से बाँह की तरफ सरकने लगा। स्पर्श बहुत हल्का था, जैसे कोई पर छू रहा हो।

राहुल के मन में: "भाभी का शरीर कितना मुलायम है… बस हल्का सा स्पर्श और पूरा शरीर गर्म हो रहा है। आगे बढ़ूँ या नहीं?"

प्रिया ने धीरे से हाथ हटाने की कोशिश की और बोली, "राहुल, अब सो जाओ। बहुत रात हो गई है।"

राहुल ने मुस्कुराते हुए हाथ हटाया, लेकिन जाते-जाते उसकी उँगलियाँ प्रिया की कमर पर हल्के से फिसल गईं। प्रिया सिहर गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।

**तीसरा मौका -- किचन में फिर, लेकिन इस बार थोड़ा और आगे**

दोपहर का समय। घर में सिर्फ दोनों ही थे। प्रिया रसोई में खाना बना रही थी। राहुल पीछे से आया और बोला, "भाभी, मुझे भूख लग रही है।"

प्रिया: "अभी खाना बन रहा है, थोड़ा इंतजार करो।"

राहुल ने पीछे से प्रिया के बहुत करीब खड़े होकर देखा। उसकी साँस प्रिया की गर्दन पर पड़ रही थी। फिर उसने हल्के से प्रिया की कमर पर हाथ रख दिया -- बहाने से कि कुछ सामान निकालना है।

प्रिया (घबराकर): "राहुल! ये क्या कर रहे हो? हाथ हटाओ।"

राहुल (धीमी आवाज में): "भाभी, बस एक सेकंड… कुछ गिर रहा था।"

लेकिन हाथ हटाने की बजाय उसने हल्का सा दबाव बढ़ाया। प्रिया की कमर नरम और गर्म थी। राहुल के मन में: "काश ये पल रुक जाए… भाभी का शरीर छूने मात्र से ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है।"

प्रिया के मन में: "ये गलत है… बहुत गलत। मना करना चाहिए, लेकिन क्यों शरीर में सिहरन हो रही है? नहीं, बस यहीं तक। आगे कुछ नहीं होने दूँगी।"

प्रिया ने राहुल का हाथ जोर से हटाया और कहा, "अब बस करो राहुल। ये ठीक नहीं है। तुम मेरे देवर हो।"

राहुल पीछे हट गया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई चमक थी।

**नया चौथा मौका -- रात में, एक ही कमरे में कई लोग सोए हुए, पति बराबर में सोया हुआ**

एक गर्मी की रात थी। पूरे परिवार को नीचे एक बड़े हॉल में सोना पड़ा क्योंकि ऊपर का कमरा बहुत गर्म था। मम्मी-पापा एक तरफ सोए थे, प्रिया के पति (बड़े भाई) प्रिया के ठीक बगल में सोए थे, और राहुल प्रिया के दूसरी तरफ थोड़ी दूरी पर लेटा था। अंधेरा था, सिर्फ एक छोटी नाइट लैंप जल रही थी। पंखा चल रहा था लेकिन हवा कम थी।

सबके सो जाने के बाद भी राहुल की नींद नहीं आ रही थी। प्रिया भी करवटें बदल रही थी। राहुल धीरे-धीरे प्रिया की तरफ सरका। अब उसकी जाँघ प्रिया की जाँघ से छू रही थी।

राहुल के मन में: "सामने पति सो रहा है… मम्मी-पापा भी यहीं हैं… अगर कोई जाग गया तो सब खत्म… लेकिन भाभी का शरीर इतना पास है कि रुक नहीं पा रहा। डर भी लग रहा है, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा है।"

राहुल ने बहुत धीरे से अपना हाथ प्रिया की कमर पर रख दिया। प्रिया चौंक गई लेकिन कुछ नहीं बोली। राहुल का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरका और प्रिया के नाइट टॉप के अंदर घुस गया। उसने ब्रा के ऊपर से स्तन को छुआ।

प्रिया के मन में: "ये पागल हो गया है… मेरे पति बिल्कुल बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने आँख खोल दी तो? लेकिन राहुल का हाथ… स्तन छू रहा है… शरीर में सिहरन हो रही है… डर के साथ मज़ा भी हो रहा है।"

राहुल ने ब्रा को थोड़ा ऊपर सरकाया और एक स्तन को पूरा हाथ में ले लिया। वह धीरे-धीरे मसलने लगा। फिर वह करवट लेकर प्रिया की तरफ मुड़ा और बहुत धीरे से मुंह को स्तन के पास ले गया। उसने निप्पल को होंठों में लिया और हल्के-हल्के चूसने लगा। जीभ से घुमाता, कभी हल्का सा काटता।

प्रिया की साँसें तेज हो गईं। वह अपने होंठ काट रही थी ताकि कोई आवाज न निकले। प्रिया के मन में: "उफ्फ… राहुल मेरे स्तन चूस रहा है… पति बगल में हैं… कितना डरावना है… लेकिन चूसने का तरीका… मेरे निप्पल सख्त हो गए हैं… और मज़ा आ रहा है… नहीं रुकना चाहिए लेकिन रुक भी नहीं पा रही।"

राहुल दूसरे स्तन पर भी यही कर रहा था। वह एक हाथ से एक स्तन चूस रहा था, दूसरे हाथ से दूसरा स्तन दबा रहा था। बीच-बीच में वह अपना लंड निकालकर हिलाने लगा। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। वह धीरे-धीरे लंड को हिला रहा था जबकि मुंह से भाभी के स्तन चूस रहा था।

फिर राहुल का हाथ नीचे सरका। उसने प्रिया की पजामी की नाड़ी ढीली की और हाथ अंदर डाल दिया। उँगलियाँ सीधे योनि पर गईं। प्रिया पहले से ही गीली हो चुकी थी। राहुल ने एक उँगली धीरे से अंदर डाली और अंदर-बाहर करने लगा।

प्रिया के मन में: "अब उँगली अंदर कर रहा है… पति बगल में सो रहे हैं… अगर उन्होंने हल्की सी भी आवाज सुनी तो… लेकिन मज़ा इतना है कि शरीर काँप रहा है… डर और उत्तेजना दोनों एक साथ… आह… राहुल धीरे करो…"

राहुल की उँगली तेजी से नहीं, बल्कि बहुत धीमी और गहरी गति से चल रही थी। वह कभी-कभी क्लिटोरिस पर भी उँगली घुमा देता। साथ ही वह अपना लंड भी हिला रहा था। प्रिया की साँसें बहुत तेज हो गई थीं लेकिन वह चुप रहने की कोशिश कर रही थी।

राहुल के मन में: "भाभी पूरी गीली है… पति बगल में हैं… ये डर मुझे और उत्तेजित कर रहा है… मैं भाभी को चोदना चाहता हूँ लेकिन आज इतना ही… बस चूसना और उँगली करना काफी मज़ेदार है।"

लगभग १०-१५ मिनट तक यह सब चलता रहा। आखिरकार प्रिया का शरीर काँप उठा। वह चुपचाप झड़ गई। राहुल भी अपने लंड से वीर्य निकालकर बिस्तर पर ही पोछ लिया।

प्रिया ने राहुल की तरफ देखा, उसकी आँखों में डर और शर्म दोनों थे। राहुल ने बस मुस्कुराकर प्रिया के स्तन पर एक आखिरी किस किया और वापस अपनी जगह लेट गया।

**पाँचवाँ मौका -- अकेले में, पूरे घर में कोई नहीं (ये हिस्सा और लंबा और डिटेल में)**

एक दिन बड़े भाई, मम्मी-पापा सब शादी में बाहर गए। घर में सिर्फ राहुल और प्रिया थे।

प्रिया कमरे में कपड़े बदल रही थी। राहुल बिना दरवाजा खटखटाए अंदर चला गया। प्रिया सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

प्रिया (घबराकर): "राहुल! बाहर जाओ! ये क्या कर रहे हो?"

राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और धीरे से प्रिया के पास आया। "भाभी… अब बहुत दिन हो गए। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ।"

प्रिया पीछे हटी, लेकिन कमरा छोटा था। राहुल ने उसे दीवार से लगा दिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं।

राहुल के मन में: "आज कोई नहीं है… आज भाभी को पूरी तरह अपना बना लूँगा।"

प्रिया के मन में: "ये गलत है… लेकिन शरीर नहीं मान रहा। इतने दिनों से ये स्पर्श… ये चाहत… अब रुक नहीं पा रही।"

राहुल ने पहले प्रिया के होंठों पर हल्का किस किया। प्रिया ने विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ राहुल की पीठ पर आ गए। फिर किस गहरा होता गया। राहुल की जीभ प्रिया की जीभ से खेलने लगी। किस इतना लंबा चला कि दोनों की साँसें उखड़ गईं।

राहुल ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तनों को बाहर निकाला। पहले तो दोनों हाथों से दबाए, मसलें, फिर मुंह लगाकर एक-एक करके चूसने लगा। वह बहुत देर तक स्तनों को चूसता रहा -- निप्पल को जीभ से घुमाता, हल्के से काटता, फिर पूरा मुंह भरकर चूसता। प्रिया की आहें भरने लगीं -- "आह… राहुल… इतना मत चूसो… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…"

राहुल नीचे उतरा। प्रिया की पैंटी उतार दी। उसने प्रिया की जाँघें फैलाईं और योनि को चूमने लगा। जीभ से अंदर-बाहर करता रहा। प्रिया अब जोर-जोर से कराह रही थी -- "राहुल… अ ahhh… क्या कर रहे हो… बस… मैं नहीं सह पा रही…"

राहुल ने खुद के कपड़े उतारे। उसका लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। वह प्रिया के ऊपर आ गया। पहले लंड को योनि पर रगड़ता रहा, फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।

प्रिया (आँखें बंद करके): "धीरे राहुल… उफ्फ… बड़ा है… आह… पूरा मत डालो अभी…"

राहुल ने धीरे से पूरा घुसा दिया। फिर धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। हर थ्रस्ट के साथ प्रिया की आहें बढ़ती गईं। राहुल कभी तेज करता, कभी धीमा। बीच-बीच में झुककर प्रिया के स्तनों को फिर चूसता, होंठों को किस करता।

प्रिया के मन में: "ये पाप है… लेकिन इतना मजा कभी नहीं आया… राहुल मुझे पूरी तरह भर रहा है…"

राहुल की गति धीरे-धीरे तेज होती गई। वह प्रिया की कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमरे में चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं -- "पच… पच… पच…" और प्रिया की कराह -- "आह… राहुल… और जोर से… हाँ… बस… मैं आने वाली हूँ…"

राहुल भी तेजी से धकेलता रहा। आखिरकार दोनों एक साथ झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य प्रिया के अंदर भर गया। दोनों पसीने से तर, साँसें उखड़ी हुई, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

राहुल ने प्रिया के कान में फुसफुसाया, "भाभी… अब तुम पूरी तरह मेरी हो।"

प्रिया कुछ नहीं बोली, बस शर्म से आँखें बंद किए रही, लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि साफ झलक रही थी।

इस तरह कई दिनों की धीमी-धीमी चाहत आखिरकार पूरी हो गई।
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