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Thriller रश्मि का आरंभ- रश्मि मंडल
#1
5 फुट 10 इंच की ऊँचाई, 33 वर्षीय, काम की देवी रश्मि मंडल वर्तमान में इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी की एक जांबाज एजेंट है. भरा-भरा, कसा हुआ बदन, एक-एक अंग गोलाईयां और कठोरता लिए हुए. खरबूजे की तरह कठोर और बड़े वक्ष, उन गोलाइयों से नीचे उसका सपाट और कसा हुआ उदर भाग. तरबूज से गोल, चिकने और कठोर नितंभ. केले के तने जैसी कन्दली जांघें. जब वह साड़ी पहनती है, साक्षात सुन्दरता की देवी प्रतीत होती है. उसके शरीर का एक-एक हिस्सा, एक-एक कटाव ऐसा था कि लोग उसे निहारते रह जाते. और जिसे रश्मि छूने को मिल जाए वह पागल हुए बिना नही रह सकता था. खैर, रश्मि को कोई ऐसे ही छू भी नही सकता था. इतनी खुबसूरत और मांसल बदन वाली रश्मि जितनी सुन्दर थी, उतनी ही तेज तर्रार और घातक भी. मार्शल आर्ट और कराटे की ज्ञाता, किक बॉक्सिंग की चैम्पियन. रश्मि मंडल इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी की जान थी और ताकत भी. इतने कम समय में उसने कितने ही केस निपटाए थे और कितने ही मिशनों को अंजाम दिया था.

यह कहानी तब की है जब रश्मि 22 साल की थी. रश्मि अपने कॉलेज के दोस्तों अमर, सचिन, रीमा, आलिया और शाहीन के साथ गोवा से लौट रही थी.
रश्मि मैडम आज किस सोच में डूबी हुईं हैं तभी अमर ने मजाक करते हुए कहा.
रश्मि दीदी का आज एग्जाम रिजल्ट आ रहा है- आलिया ने चहकते हुए कहा.
कौन से एग्जाम का रिजल्ट? रीमा ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा. कही तूने आई.आई.ए. (इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी) वाला एग्जाम दे तो नही दिया था?
हाँ, वही दीदी आलिया ने कहा. 
क्या सच में, और हमें पता है तेरा सलेक्सन हो ही जायेगा, रीमा ने हसते हुए कहा.
तब रश्मि हमें तुम मारोगे तो नहीं ? अमर ने कहा.
रश्मि: वह तो तुम्हारे हरकतों पर डिपेंड करता है.


अमर 5 फुट 10 इन्च का जवान हैंडसम लड़का है. उसके मन में रश्मि के लिए कामुक भाव था.
आप तो पक्का किसी दिन रश्मि दीदी से मार खाओगे: आलिया ने तपाक से कहा.
पूरे ग्रुप में आलिया बस थी जो उन सब के साथ नही पढ़ी थी. आलिया, शाहीन की छोटी बहन थी. 18 साल की आलिया दिखने में रश्मि से पूरी तरह अलग थी. जहाँ रश्मि-लम्बी तगड़ी तगड़ी, भरे-भरे बदन, खरबूजे के तरह बड़े और सुडौल वक्ष वाली है. वक्ष के नीचे से उसके सपाट और मुलायम उदर का सफ़र शुरू होता था. खरबूजे से बड़े और गोल नितंभ, केले की तने से गोल और कठोर जांघें और पैर. पूरे बदन का एक-एक हिस्सा सुडौल और कसा हुआ. जवानी उसके शरीर में कूट-कूट कर भरी हुई है. जो उसे देखता, बस देखता ही रह जाता. जिसे उसे छूने का मौका मिले वह पागल हो जाये. पर उसके मजबूत और एक-एक स्पष्ट कटाव वाले 5 फीट 10 इंची तगड़े शरीर को देख लोग उससे डरते भी थे.

उसके विपरित आलिया 5 फुट की स्लिम पर खूबसूरत लड़की है. उसका यौवन अभी फूट रहा है. वह छरहरी और नाजुक है. आलिया एकदम गोरी चिट्टी, अल्फ़ान्सो आम जैसा नुकीला वक्ष, जिसे देख कर लगता है जैसे टी-शर्ट से एक तिकोना आकृति बाहर आने को बेताब है. वैसे ही छोटा पर सुडौल मुलायम नितंभ. आलिया बहुत चंचल स्वाभाव की है. हमेशा जीन्स और टी-शर्ट पहनती है. वह रश्मि के शरीर, सुन्दरता, बनावट, उसके दिमाग और उसके विभिन्न कलाओं से अत्यधिक प्रभावित थी. रश्मि को ताईक्वान्डों, मार्शल आर्ट और कराटे की जानकारी थी और वह किक बॉक्सिंग की चैम्पियन थी.

पूरे गोवा ट्रिप में आलिया, रश्मि के साथ और आस-पास ही चिपकी रही. और अमर को इस बात से चिढ़ हो गयी थी. वह कॉलेज में तो कभी रश्मि मंडल के उतने पास जाने की हिम्मत नहीं कर सका, पर उसने सोचा था गोवा में वह रश्मि को पाकर रहेगा. पर उसकी योजना धरी की धरी रह गयी थी. रश्मि को इस बात का अंदाजा था. अगर अमर हिम्मत करता तो शायद वह भी वह वहाँ उसे प्यास बुझाने के लिए उपयोग कर सकती थी. अमर की ना हिम्मत हुई और ना ही मौका मिला.

ट्रिप में रश्मि ने ध्यान दिया, आलिया उसे अजीब से नजरों से देखती थी. रश्मि ने सोचा हो सकता है यह उसकी जिज्ञासा हो. उसे याद है जब वह 18 की थी तो उसकी कॉलेज की एक मैडम के लिए उसके मन में बहुत जिज्ञासा थी. मैडम क्या बोलती थी, उसे लगता था ये कितनी ज्यादा इंटेलीजेंट हैं. शायद वैसा ही आलिया के मन में उसके लिए जिज्ञासा हो. रश्मि का पेपर अच्छा गया था और उसे पूरा भरोसा था उसका सलेक्सन इंटरव्यू के लिए हो जायेगा पर फिर भी उसे मन में अजीब सी कशमकश थी. उसे पूरे शिद्दत से इंडियन इंटेलीजेंट एजेंसी ज्वाइन करना था. उदयपुर पहुंचते ही उसका रिजल्ट आ गया. रश्मि के हाथ में मोबाइल था और बाकि पांचों उसके पास, सबकी नजर रश्मि के टाइप करते उंगली पर.
शाहीन ने कहा, रश्मि अब ओपन भी कर, हमें पता है तेरा सलेक्सन हो ही गया होगा. रश्मि ने उसकी ओर देखा और कांपती हुई उँगलियों से रोल नंबर टाइप करने लगी. जैसे ही लॉग इन हुआ. उसका नाम खुला, सबने देखा. नीचे लिखा था, इंटरव्यू के लिए आमंत्रित. रीमा ख़ुशी से जोर से चिल्लाते हुए उससे गले से लग गयी.
रीमा भी रश्मि की तरह भरे पूरे और सुडौल बदन वाली लड़की है. वह रश्मि से हर मामले में 19-20 ही है. उसका वक्ष रश्मि से थोड़ा छोटा, शानदार गोलाई लिए हुए और कड़क है. जब वह रश्मि से गले लगी तो आलिया ने ध्यान से देखा, दोनों के वक्ष एक दूसरे से टकरा कर, एक दूसरे पर दबाव डाल रहे थे. रश्मि और रीमा तो सामान्य दोस्त से, अब उनका वहां ध्यान कहाँ थे. वो तो ख़ुशी से चीख-चिल्ला रहे थे.

रश्मि बोली, मेरी तरफ से सबको पार्टी. हुर्रे, सबने एक साथ चिल्लाया. पर फाइनल सलेक्सन के बाद रश्मि ने थोडा रुक कर बोला. नही, हमें तो अभी चाहिए, क्यों साथियों- अमर ने नेता बनते हुए कहा.
जिस पर उसे आलिया और सचिन का सहयोग मिला. शाहीन हमेशा की तरह शांत ही थी और रीमा ने गंभीर होते हुए कहा- नहीं, पार्टी इसके इंटरव्यू के बाद ही, अभी उसे तैयारी भी करना होगा. डेट के हिसाब से बस 20 दिन ही है इसके पास. इसलिए तुम मुझे बहुत समझदार लगती हो- रश्मि ने मुस्कुराते हुए कहा. बाकि सब थोडा निराश हुए पर मान गए.

बस अपने गंतव्य पर पहुँच गयी, सब अपना-अपना सामान ले कर उतरने लगे. नीचे सबने एक जगह पर अपना सामान रखा. अब सबको अलविदा कहने का समय था. यह उनके कॉलेज समाप्त होने के बाद बचे हुए कुछ दिनों में टाइम-पास करके के लिए ट्रिप था. इसके बाद अब ये सब कब मिलेंगे, कौन कहाँ होगा कहा नही जा सकता है. अमर ने सबको बाय बोला और अपनी बाइक के लिए स्टैंड की ओर चल पड़ा. सचिन का घर रीमा के घर की तरफ  था तो वह रीमा के साथ उसके कार में वहां तक जाने वाला था. शाहीन और आलिया को रश्मि अपनी गाड़ी से उनके घर छोड़ने वाली थी. सबने वादा किया कि वे समय निकाल कर बीच-बीच में जरूर मिलेंगे. और सब वहां से चल पड़े. शाहीन थोड़ी सांवली सी लड़की थी. बहुत ज्यादा खूबसूरत नही, फिगर भी कुछ खास नही. अधिकतर वह शांत रहती थी. रश्मि उसे जबरदस्ती उसकी अम्मी से बात करके गोवा लेकर गयी थी ताकि वह थोड़ा खुले. और उसके साथ आलिया को फ्री में ट्रिप मिल गया.

आलिया और शाहीन के घर पहुँचने के बाद आलिया और उसकी अम्मी ने रश्मि को बहुत कहा थोड़ी देर रुक जाओ पर उसने नहीं माना. वह उन्हें छोड़कर तुरंत वहां से जाना चाहती थी. उसे अपने लिए अरेंजमेंट करना था. रश्मि ड्राइविंग सीट पर ही थी. आलिया, शाहीन और उनकी माँ नीचे खड़े थे. तभी आलिया ने कहा पिछला टायर पंचर है. क्या कहते हुए मैं बाहर आ गयी. मुझे तुरंत याद आया स्टेपनी भी गाड़ी से बाहर है. मैं फंस गयी. आंटी ने अब आदेश की तरह कहा, अब आज रुक जाओ, कल सुबह गाड़ी बनवा कर चले जाना. काफी रात हो चुकी थी. मेरे पास और कोई चारा नही था.
हम सब अन्दर गये, हाथ मुह धोकर हम सबने खाना खाया. शाहीन के पापा अहमद अंकल भी डिनर पर थे. रुखसाना आंटी 45 के आस पास थोड़ी मोटे बदन की औरत थी. पर उनकी जवानी अब भी अनछुई लगती थी. अंकल की उम्र 50 से ऊपर थी. वो बहुत ही कम मिलते थे. खाना खाते समय आंटी ने मुझसे खूब बात की और गोवा ट्रिप के बारे में पूछा.

खाने के बाद मुझे आलिया के कमरे में सोने के लिए कहा गया. वहां एक एक्स्ट्रा बेड रखा हुआ था. मैं काफी थकी हुई थी. मैं रूम पर आई, बाथरूम में गयी. जीन्स निकाल कर लोअर पहना और अपने टी-शर्ट के २ बटन को खोल दिया. आह, कितना आराम है. मैं जल्दी से सो जाना चाहती थी. मैं बाथरूम से निकली. मेरे हाथ में एक टावेल है जिससे मैं अपना मुंह और हाथ पोछ रही हूँ. आलिया बेड के पास वाले कुर्सी पर बैठी है. मैने ध्यान दिया, अलिया मुझे चुपके से बीच-बीच में देख रही थी. मैंने सोचा, ऐसा क्या देखते रहती है यह लड़की? क्या चल रहा है इसके मन में?. उसे गोवा की वह बात याद आई जब वो दोनों शराब के नशे में धुत्त थे, आलिया ने उससे कहा था दीदी आप इतनी गजब की क्यों हैं?और फिर आलिया उससे गले से लग कर सो गयी थी. रश्मि उससे छोटी बहन जैसा ही व्यवहार करती थी.
क्या देख रही है रे लड़की, मैने कहा.
कुछ नहीं दीदी, आलिया झेंपते हुए इधर उधर देखते हुए बोली.
कहाँ सोना है मुझे, बहुत थकी हुईं हूँ मैं, मैंने कहा. उसने बेड की तरफ उंगली दिखाई. मै कूद कर बेड में पहुँच गयी, आलिया मुझे देख ही रही थी. मैंने कहा तुझे नहीं सोना? बस दीदी लाइट बंद करके नाईट लाईट ऑन करके सो ही रही हूँ. आलिया ने कहा.


मैं गहरी नींद में थी, तभी मुझे लगा कोई मुझे छू रहा है. किसी का हाथ मेरे पेट पर रेंग रहा है. वह भी मेरे नंगी पेट पर मेरे टी-शर्ट के अन्दर. मैं सतर्क हो गयी, मैंने तुरंत सोचा यहाँ आलिया को छोड़कर कौन आ सकता है. धीरे से मैंने आँख को थोड़ा सा खोला. आलिया मेरे बदल में बेड से चिपक कर सो रही थी. वह बाएं करवट लिए हुई थी और उसका मुंह मेरी ओर था, आधी नींद में लग रही थी. उसका दायाँ हाथ मेरी कमर में बंधे लोअर और टी-शर्ट के लोअर बार्डर के बीच से मेरी टी-शर्ट के अन्दर है और वह हौले-हौले मेरी नंगी पेट को सहला रही है. आलिया की आँख बंद है. अपना दूसरा हाथ वह टी-शर्ट के ऊपर से अपने छोटे आकर के सुडौल दायें वक्ष पर रखी है. धीरे से वह अपने वक्ष को सहला रही है. उसके दूसरे वक्ष का बस किनारा दिख रहा है. बाकि हाथ के नीचे दबा हुआ है. आलिया अपना आँख बंद रखी है. ध्यान से देखने से समझ आया आलिया टी-शर्ट के नीचे ब्रा नही पहनी है. मैं उसके सीने के गोलाइयों को परख रही थी. तभी उसका हाथ हल्का सा खिसका और उसके हलके पारदर्शी टी-शर्ट के ऊपर बाएं वक्ष का मटर के दाने जैसा अग्रभाग मुझे दिखने लगा. मैं उसके सीने को ध्यान से देख रही हूँ. उसका हाथ अब भी मेरे पेट में मचल रहा था. अब मुझे समझ आया कि वह नीन्द में थी. उसे ऐसे देखकर पता नही मुझे क्या होने लगा. मै भावनाओं में बहने लगी. मुझे तरलता का अहसास हुआ. आलिया परी की तरह सुन्दर लग रही थी. उसके पारदर्शी टी-शर्ट के अन्दर का सीना मुझे भा रहा था. मैं आलिया को अब तक छोटी बहन की तरह देखती थी. ऐसी भावना मेरे अन्दर उसके लिए कभी नही आई. हाँ, गोवा में मैंने आलिया को चोरी छिपे अपने वक्षों को, उदर को, जांघों आदि को देखते पाया था. पर मुझे लगा था वह बस जिज्ञासा से मुझे देखती है. मैं सुन्दर हूँ, और हॉट भी. कौन मुझे नही देखना चाहेगा? पर मुझे नही पता था आलिया ऐसी है. उस नाईट लाइट में वह मासूम परी लग रही थी. उसकी हरकतें देखकर मैं उसे पकड़ कर अपने सीने से लगा लेना चाहती थी.
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#2
aage likho bhai
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#3
मेरा लेस्बियन संभोग का ज्यादा अनुभव तो नहीं था पर था थोड़ा बहुत. आलिया को ऐसे देख कर मेरी आँखों में लाल डोरे तैरने लगे. आलिया को ऐसे मैंने पहली बार देखा. आलिया परी. मैंने उसे ध्यान से देखा. नाईट लाईट में वह सोती हुई परी लग रही थी. उसकी करवट मेरी तरफ थी. उसका चेहरा तकिये में धंसा हुआ था. आँख बंद थी. उसने हल्के नीले रंग का टी-शर्ट पहना हुआ था जो कि काफी हद तक पारदर्शी था. वह आलिया के छोटे अलफांसों आम जैसे वक्षों को पूरी तरह से ढंकने में असफल था. मैंने पूरी तरह से आँख खोल दी. अब वह गहरे नींद में सो रही थी या फिर नाटक कर रही थी. उसके स्तन का मटर के दाने जैसा अग्र भाग कड़ा होकर टी-शर्ट के ऊपर से उभरा हुआ दिख रहा था. मैं उसका टीशर्ट पकड़ कर निकाल देना चाहती थी और उसके छोटे स्तनों को ध्यान से देखना चाहती थी. आलिया पूरी तरह से आंटी पर गयी है. आंटी का बदन भी आलिया जैसे स्लिम है और ऊंचाई लगभग आलिया जितनी ही. 39 की उम्र में भी, स्तन आलिया जैसे छोटे-छोटे और कड़े थे जो सलवार सूट के ऊपर से दिखाई देता था. आलिया को देख कर मुझे कुछ याद आ गया. मैं 18 की थी और जवानी की दहलीज में कदम रख रही थी. उस समय मैं थोड़ी मोटी थी. मैं शाहीन से मिलने उसके घर गयी. शाहीन थोड़ी देर में घर आने वाली थी इसलिए दरवाजा आंटी ने खोला. उस समय ही वो नहा कर बाहर निकली थीं. उनका कमीज पानी से लगभग भींग गया था और जल्दबाजी में शायद उन्होंने ब्रा नहीं पहना था. उन्होंने दरवाजा खोला मैंने नमस्ते किया.

आंटी: अन्दर आओ बेटा.
रश्मि: जी आंटी.

मेरी नजरें बार-बार आंटी के गीले सीने में जा रही थी. एक वह दिन और एक आज का दिन. आलिया का स्तन बिलकुल आंटी के वक्षों जैसा था. मै काफी थकी हुई थी. यह सब बात सोचते और आलिया को देखते कब मुझे नींद आई मुझे पता ही नही चला.  सुबह मैं उठी फ्रेश होकर नाश्ता करके मैं गाडी बनवा कर अपने घर के लिए निकलने लगी. रात की बातें अभी भी मेरे दिमाग में चल रही थी. मेरी नजर अब भी आलिया के स्तनों पर जा रही थी. अब उसने अन्तःवस्त्र पहन लिया था. मैंने उस बात को अपने दिमाग से निकाला और सबको बाय कह कर वहां से चली गयी.

रश्मि घर पर अकेले रहती थी. उसका परिवार दूसरी जगह रहता था. घर जाकर नहाने के बाद वह आदमजात अवस्था में अपने रूम में खड़े होकर आईने में आपने गोरे गोरे गुदाज बदन को निहार रही थी. वह सिर से पांव तक क़यामत लग रही थी. अपना दोनों हाथ अपने वक्षों में ले जा कर वह उन्हें छू रही थी. रश्मि के बड़े-बड़े उभार सामने तने हुए थे. उसने अपने बड़े खरबूजे जैसे उभार की तुलना आलिया के छोटे स्तनों से की. उसने पाया आलिया के दो स्तन उसके एक के बराबर हैं. वह फिर से आलिया की हरकत को याद करने लगी. उसका दायाँ हाथ अब उसके उभार से उतर कर उसके नाभि प्रदेश में था. बायाँ हाथ अभी भी वह अपने बाएं वक्ष पर रख कर उसका जाएजा ले रही थी. आलिया के बारे में सोच कर उसे कुछ कुछ हो रहा था. अपना दायाँ हाथ अब वह अपने दोनों जांघों के बीच अपने कटि प्रदेश की ओर ली जाने लगी. आलिया की हरकत याद करके उसे कुछ होने लगा. उसे अपनी प्यास बुझाए काफी दिन हो गया था. पर अभी उसे अपना पूरा ध्यान अपने इंटरव्यू पर लगाना था. वह अपने उस जन्नत की गहराई को बस छूने ही वाली थी कि तभी डोरबेल बजा.

पक्का सचिन होगा, रश्मि ने सोचा. सचिन थोड़ा स्लिम लगभग साढ़े पांच फुट का लड़का था. सचिन को रश्मि ने अपने फाइल्स और पेपर लाने को कहा था जो उसके कॉलेज में जमा था. रश्मि जानती थी सचिन मेरे कहने पर इतना काम तो कर ही देगा. उसने फटाफट लोअर और टी शर्ट पहना. अन्दर उसने कुछ भी नहीं पहना, वह जानती थी कैसे सचिन से अपना काम करवाना है. सचिन थोड़ा शर्मिला था पर रश्मि की थोड़ी सी झलक पाने के लिए उसका कोई भी काम करने के लिए तत्पर रहता था.
रश्मि ने झट से कपड़ा पहना और गेट खोलने चली गयी. दरवाजे पर सचिन ही था.

सचिन: हाय, रश्मि. ये रहा तुम्हारा पूरा समान. कब जाना है तुम्हें इंटरव्यू के लिए.
रश्मि: अभी डेट नही आया. अन्दर आएगा तू? या बाहर ही खड़ा रहेगा?
सचिन: हाँ आ गया सचिन ने झेंपते हुए कहा.

रश्मि के पीछे मुड़ते ही सचिन की निगाहें रश्मि के बड़े-बड़े गोल कठोर नितम्भों में जा टिकी. रश्मि को उसे परेशान करने में मजा आता था इसलिए वह जानबूझकर मटकाते हुए कामुक अंदाज में चल रही थी. अन्दर आकर उसने सचिन को सोफे में बैठने के लिए कहा और खुद किचन में चली गयी. रश्मि को अंदाजा हो गया था सचिन की नजरें उसके बदन में इधर उधर फिसल रही थी. खैर रश्मि यह चाहती भी थी, उसके थोड़ी सी कोशिश से उसे फ्री का नौकर मिल जाता था. पानी लेकर आने के बाद उसे सचिन को देते हुए. वह उसके सामने वाले सोफे पर आकर बैठ गयी. उसके बड़े गले वाले टी-शर्ट से उसका ऊपरी उभार नुमाया हो रहा था. रश्मि ने जानबूझकर वह टीशर्ट पहना था. सचिन का गला उसे देखकर सूख रहा था. रश्मि, सचिन से उंचाई में और शारीरिक रूप से पूरी तरह बड़ी थी. उसने मन ही मन सोचा, देख तो ऐसे रहा है जैसे खा जाएगा, मैं गलती से इसके ऊपर आ गयी तो इसका कचूमर बन जायेगा. रश्मि से सब डरते तो बहुत थे पर उसके बाद भी उस पर से नजरें हटाना बहुत मुश्किल काम था. और रश्मि को अपने रूप और शबाब का उपयोग करने बहुत अच्छे से आता था. सिर्फ उसके साथ पढ़ने वाले ही नही, अपने टीचरों पर भी उसने यह पैंतरा अपनाया था और उसे इसका काफी फायदा मिला था. पुरुष क्या, स्त्रियों को भी उसने अपने रूप जाल में फंसाया था. ऐसी बनावट, ऐसा मर्दाना शरीर, बहुत सारे लड़के उससे उंचाई में छोटे थे और उसके शरीर के सामने कमजोर नजर आते थे, रश्मि के क़यामत बदन को देखकर लड़कियां भी मोहित हो जाती थीं. ऐसा नहीं था कि रश्मि किसी से भी अपनी प्यास बुझा लेती थी पर उसे अपना काम कैसे कराना है यह बहुत अच्छे से आता था. 

ठीक है चल अभी मुझे निकलना है, रश्मि ने सचिन की तरफ देखते हुए कहा. वह उसे अभी ज्यादा भाव देने की मूड में नहीं थी.
सचिन: इतनी जल्दी? कहाँ? अभी तो मैं आया ही हूँ.
रश्मि: अरे भई, मुझे जाना है ना, शाम को मिलने हैं ना पक्का, मैं आती हूँ उधर. रश्मि ने उसे टरकाने के लिए कहा.
सचिन: ठीक है अब तुम कह ही रहे हो तो क्या कर सकते हैं. सचिन ने थोड़ा मायूश होते हुए कहा, पर उसे ख़ुशी थी कि रश्मि शाम को मिलने वाली है.

सचिन वहां से चला गया. रश्मि अब अपने इंटरव्यू के लिए तैयारी शुरू करना चाहती थी. उसे पता था उसके पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है. वह अन्दर जाकर अपने अलमारी से पुस्तकों को नोट्स को लेकर स्टडी टेबल पर बैठ गयी. पेन पकड़ आकार वह प्रश्न सॉल्व करने में लग गयी.
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#4
Achchha start
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#5
aage update do bhai
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#6
Shurwat achhi lag rahi hai .. lekhan bhi achha hai apka
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#7
Photo 
आज मेरा इंटरव्यू है वैसे मेरी तैयारी जोरदार है. मैंने अपने जिंदगी में जो सहा है और मुझे जो पता लगाना है उसके लिए किसी भी हालत में मुझे सलेक्ट होना है.

मैंने पीले रंग का एक फॉर्मल सलवार सूट पहना जिसका पैजामा सफ़ेद रंग का था. मेरे सीने की गोलाइयों का अंदाजा सूट के ऊपर से लगाया जा सकता था. मेरे बदन का एक-एक तराशा हुआ सुडौल अंग जोर का कहर ढा रहा था. पर मुझे कौन सा आज किसी पर जादू चलाना था, मुझे तो इंटरव्यू देना था. घर से निकलने से पहले मैंने खुद को आईने के सामने जा कर निहारा. अपने हाहाकारी बदन को देख कर मैं फुले नहीं समा रही थी. मैंने दुपट्टा हटाया और दोनों हाथों को अपने उभारों पर रखा, मुझे इन पर बहुत नाज है. थोड़ी देर तक अपने शरीर के एक-एक हिस्से, एक-इक कटाव को निहारने के बाद मैं मुस्कुराते हुए बाहर आई. कार की चाबी उठाई और आकर मैंने पोर्च से चार बाहर निकाली. सिगरेट का कश लेते हुए मैं कार ड्राइव करने लगी. 10 बजे मुझे आई.आई.ए. के ऑफिस पहुंचना था. मैं 9:55 में ऑफिस के पार्किंग में गाड़ी पार्क कर रही थी. आई.आई.ए. का ऑफिस मुझे देखने में काफी छोटा लगा मुझे लगा था बड़ी सी बिल्डिंग होगी, खैर मुझे क्या? मुझे तो जाना ही था. मैंने जगह को ध्यान से देखा और एंट्री गेट की तरफ बढ़ गयी. मुझे वहां पर कुछ और लड़कियां दिखाई दीं, उम्र में वो सभी मेरी तरह ही थीं और खूबसूरत भी. मैं समझ गयी सभी इंटरव्यू के लिए आई हैं.
अन्दर घुसते ही सामने दो आर्मी के जवान खड़े थे. मुझसे मेरा परिचय पत्र और एडमिट कार्ड मांगा. उसने मुझे एक नंबर लिखा हुआ कार्ड दिया, फिर उनमे से एक ने मुझे लिफ्ट की और जाने के लिए इशारा इशारा किया. लिफ्ट का बटन प्रेस करते ही उसका गेट खुला, अन्दर एक हथियार बंद आर्मी मेन था. बहार के दोनों के पास भी गन थी. मेरे अन्दर घुसते ही गेट बंद हुआ और आर्मी मेन ने बटन दबा दिया. बटन दबते ही मुझे समझ आया कि हेड ऑफिस बहार से इतना छोटा क्यों दिखता है, हम ऊपर जाने की बाजए नीचे जा रहे थे. सारे ही आर्मी मेन बहुत ही सतर्क और ट्रेंड दिख रहे थे. नीचे पहुँचने पर लिफ्ट का दरवाजा खुला. वह बड़ा सा हाल था, बिल्डिंग ऊपर से जितना बड़ा दिखता है, नीचे से उसके कई गुना बड़ा है. सामने कुछ जवानों ने मुझे एक तरफ बढ़ने के लिए इशारा किया. मैं हाल क्रॉस करके किनारे के एक दरवाजे में चली गयी. अन्दर सलीके से बहुत सारी कुर्सियां रखीं थी. और लगभग 30-40 मेरे ही उम्र की लड़कियां वहां बैठी थीं. सारे के सारे एक से बढ़कर एक खूबसूरत. मैं समझ गयी, मुकाबला तगड़ा होने वाला है. मैं आगे बढ़ी और अपने नंबर वाली सीट पर बैठ गयी, मेरे दायें तरफ वाली खूबसूरत लड़की ने मुझे देखा और मुस्कुराई, बदले में मैंने भी मुस्करा दिया. वह 28 की लग रही है. चुस्त जींस-टीशर्ट पहने वह क़यामत लग रही थी.

मैंने सामने देखा एक स्क्रीन पर कैंडिडेट का नंबर आता और वह उठ कर अन्दर की और चली जाती. एक इंटरव्यू लगभग आधे घंटे चलता फिर वह निकलकर एक और कमरे की और चली जाती जहाँ फिजिकल टेस्ट लिखा था. मैं आराम से थी, मेरा नंबर काफी बाद में था. ऑफिस अन्दर से किसी फाइव स्टार होटल की तरह खुबसूरत था. मैंने अपने दायें वाली लड़की को फिर से देखा. वह शायद उत्तर पूर्व की थी, उसकी बनावट को देखकर मुझे अहसास हुआ. कम ऊँचाई की वह गोल मुखड़ा और थोड़ा चपटा नाक वाली लड़की थी. एक चुस्त टी-शर्ट जिसमे उसका सम्पूर्ण गोलाई लिए स्तन बहार आने के लिए स्पष्ट बेताब दिखाई दे रहा था. और नीचे एक चुस्त जींस जो उसके नितम्भों की गोलाइयों की स्पष्ट रेखा बना रही थी. शायद उसे अहसास हुआ मैं उसे देख रही हूँ, उसने मेरी तरफ देख कर फिर एक कातिल मुस्कान दी. प्रत्युत्तर में मैंने फिर मुस्करा दिया. उसने इशारे से मुझे हाय किया, मैंने मुझे उसे हाय कहा. समय गुजर रहा था. लड़कियां एक के बाद एक इंटरव्यू के लिए जाती और फिर वापस आ जाती. कुछ उदास और कुछ खुश और कॉंफिडेंट. कुछ समय बाद स्क्रीन पर मेरा नंबर आया. मैं अपनी जगह से उठी, मेरे दायें तरफ वाली लड़की ने मुझे इशारे से आल थे बेस्ट कहा, मैंने सर हिला कर उसे धन्यवाद कहा और उठ कर आगे बढ़ गयी.
दरवाजे के पास जाकर उसे खोल कर मैंने अन्दर आने की इजाजत मांगी. अन्दर बैठे एक वृद्ध इंटरव्यूवर ने मुझे कहा, आइये बैठिये. अन्दर सात लोग बैठे थे, जिसमें से 3 महिलाएं और 4 पुरुष थे. मैं आश्चर्यचकित थी, महिलाओं में एक भारतीय नहीं जबकि ब्रिटिश लग रही थी. उनकी उम्र 40-42 की रही होगी. उनको देखते ही मेरा सारा गुरूर जाता रहा. मैं खुद को बहुत स्ट्रोंग और मजबूत लड़की समझती थी और मेरा शरीर भी वैसा ही है. मेरे 5 फुट 10 इंच की ऊँचाई और भरा-भरा, गयम में भरपूर मेहनत से बनाया हुआ शरीर कई लड़कों पर भी भारी है. पर वो ब्रिटिश मैम की तो बात ही अलग थी. वो बैठी थीं, पर उनको देखकर समझा जा सकता था की उनकी ऊँचाई 6 फुट से ज्यादा थी. वह ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर के ड्रेस में थी. एक चुस्त शर्ट और पेंट, उनका वक्ष अवश्य ही मुझसे भी बड़ा और उस उम्र में भी कठोर और गोलाईयां लिए हुए थीं. मैं उन्हें तरबूज के आकर का बोलूं तो कुछ गलत नहीं होगा. मैंने उन्हें बहुत ही कम समय के लिए पर गौर से देखा, उनके भुजाओं में उनके बाइसेप्स के कटाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे. उन्हें देख कर समझा जा सकता ता की वो जिम जाने और कसरत करने की अभ्यस्त थी. उनके शरीर का एक-एक अंग पुष्ट और कठोर था. उन्हें देख कर मेरे अन्दर एक अजीब से रोमांच की लहर दौड़ गयी. तभी एक 34-35 साल के आकर्षक, हैण्डसम शर्ट और पेंट पहने मूंछों वाले व्यक्ति ने मुझसे कहा. अगर आप जूलिया मैम को यहाँ देख कर आश्चर्यचकित हैं तो मैं आपको बता दूँ "सलेक्सन के बाद आपका पहला ऑपरेशन सी.आई.ए. के साथ एक जॉइंट मिशन पर होगा, उसके लिए आपको देश के बाहर भी जाना पड़ सकता है. क्या आप उसके लिए तैयार हैं?"
मैंने उनकी ओर देखा और कहा "यस सर, पूरी तरह से". वेरी गुड उन्होंने कहा.

इंटरव्यूवर में बाकि दो वृद्ध ओल्ड एजेंट लग रहे थे, जिनमें से एक शायद आई.आई.ए. के चीफ थे. एक और व्यक्ति अवश्य ही उत्तर-पूर्व का था. कम ऊंचाई पर चुस्त और चौकन्ना. महिलाओं में एक वृद्ध और अनुभवी थी और एक और जवान सी लड़की थी. जवान लड़की काफी तेज तर्रार एजेंट लग रही थी और एक और थीं जूलिया मैंम. प्रश्नों का सिलसिला आरम्भ हुआ. मुझसे मेरे विषय से लेकर मेरे सामान्य ज्ञान और अन्य अनेक सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विषयों पर प्रश्न पूछे गये. मैंने सबका उत्तर आत्मविश्वास से दिया. इंटरव्यू लगभग आधे घंटे चला. जूलिया मैम को छोड़कर लगभग सभी ने मुझसे प्रश्न पूछा. अंत में वृद्ध व्यक्ति में से एक ने मुझसे कहा, "मेरा नाम आर.के.सिंह है और मैं आई.आई.ए. का चीफ हूँ". मेरा अंदाजा सही था, वो 60-62 के व्यक्ति आई.आई.ए. के चीफ ही थे. उन्होंने फिर कहा, "आपका पर्सनल इंटरव्यू हमने ले लिया है, आपका परफोर्मेंस हम जाचेंगे. अब आपको अपने फिजिकल राउंड के लिए जाना होगा. वैसे मैं उसके लिए आश्वस्त हूँ फिर भी यह निर्णय जूलिया मैडम को लेना है कि आपको फिजिकल राउंड के लिए भेजा जाये या नहीं". ऐसा कहते ही उन्होंने जूलिया मैम की ओर देखा.
मैंने भी अपनी नजरें जूलिया मैम की तरफ की. वह अपनी गंभीर और पैनी निगाहों से मेरे पूरे बदन के एक-एक अंग को देख रही थीं. उनकी तीक्ष्ण नजरों ने मेरे शरीर को ऊपर से निचे तक पूरी तरह भेद लिया. उनकी नजरों को देखकर लग रहा था जैसे वह मेरे शरीर को कपड़ों से अन्दर से भांप रही थी. शायद यही उनका काम था, लड़कियों के फिजिकल फिटनेस को देखना फिर निर्णय लेना की उन्हें आगे के राउंड में भेजना है या नहीं. उनकी नजरें काफी देख तक मेरे वक्षों पर टिकी थी, मेरा दुपट्टा ऊपर गले में चिपका हुआ था. मुझे लगा जैसे वह कुर्ते के ऊपर से मेरे निप्पल्स को तलाशने का प्रयास कर रही हैं. मुझे थोड़ा अटपटा लगा और रोमांचित भी. फिर उन्होंने अचानक से कहा "पीछे घूम जाओ". सुनते ही मैं 180 अंश में पीछे घूम गयी. 1 मिनट बाद उन्होंने कहा. "सब ठीक है, घूम जाओ". मैं फिर से उनकी तरफ मुंह करके कड़ी हो गयी. उन्होंने मुझसे पूछा "तुमने अपने शरीर पर कहीं टैटू तो नहीं बनवा कर रखा है?" मैंने तुरंत कहा नहीं मैम. उन्होंने कहा "वह तो हमारे जाँच का विषय है, वह हम कर ही लेंगे. ठीक है अभी तुम जाओ अगले राउंड के लिए". थैक्यू मैम कहकर मैं बाहर निकली.

मैंने बाहर निकलते हुए देखा वह उत्तर-पूर्व वाली लड़की जो बाहर मेरे दायें ओर बैठी थी वह अब इंटरव्यू के लिए अन्दर जा रही थी. वह अंतिम कैंडीडेट थी. मैंने अपने थम्ब ऊपर करके उसे आल द बेस्ट कहा. उसने मुस्कुराते हुए मुझे धीरे से थैंक्स कहा. उसकी आवाज काफी पतली थी. मैं वहां से बाहर निकल कर फिजिकल राउंड की ओर आगे बढ़ गयी. वहां पहुँचने पर एक जवान लड़की एजेंट ने मुझे कहा आप अपना ड्रेस चेंज कर ये बाजू वाले कमरे में जाकर लोअर टी-शर्ट पहन लें. मैंने वैसा ही किया. बाहर आने पर कुछ यंग एजेंट्स ने मेरे शरीर का वजन, उचांई, मोटाई आदि नापना शुरू किया. यह लड़कियां अभी-अभी रिक्रूट हुई एजेंट लग रही थीं. लगभग आधे घंटे के कुछ कठिन फिजिकल टेस्ट के बाद मैं वापस वहीँ पर जहाँ मैं सबसे पहले आई थी, खड़े होकर अपने अगले निर्देश का इन्तजार कर रही थी. तभी मुझे सामने से जूलिया मैम आते हुए दिखाई दी. 40-42 की जूलिया मैम, ब्रिटिश आर्मी का ड्रेस पहने, क़यामत की तरह, साक्षात देवी की तरह दिखाई दे रही थी. उनके बैठे होने के बाद भी मैंने जो अंदाजा लगाया था वह बिलकुल सही था, वह लगभग साढ़े 6 फुट की महिला थी. चुस्त आर्मी ड्रेस के ऊपर से दो बड़े तरबूज जैसे कठोर और बड़े वक्ष मुझे अपनी ओर आते उए दिखाई दिए. दोनों वक्षों के बीच उनके शर्ट का बटन लाचार और परेशान सा प्रतीत हो रहा था. उनका बड़ा और सुडौल कमर, मोटी और स्पष्ट किसी बॉडी-बिल्डर की तरह कटाव लिए जांघें. सामने से भी मैं उनके टाईट और तराशे हुए गोल और बड़े नितम्भों का अंदाजा लगा पा रही थी. उन्होंने अत्यंत गंभीर नजरों से मुझे देखा फिर वहां खड़े एक जवान एजेंट की ओर देख कर कहा. "कामिनी क्या इस लड़की के शरीर पर टैटू ना होने की पुष्टि हो चुकी है?" वह ब्रिटिश टोन में ही पर बहुत ही स्पष्ट हिंदी बोलती थी. कामिनी ने थोड़ा सा घबराते हुए कहा, "नहीं मैम अब तक नहीं, नेक्स्ट मैं इसे उसके लिए भेजने वाली थी". "अच्छा" जूलिया मैम ने कहा. "अभी कौन सी एजेंट इस काम के लिए अधिकृत है?" जूलिया मैम ने फिर पूछा. "जी एजेंट पूजा" कामिनी ने कहा. "ओके" जूलिया मैम ने मुझे अपने पीछे आने के लिए इशारा करते हुए कहा. और वह एक जाने लगी. मैं उनके पीछे चलने लगी. पीछे से मैंने उनके टाईट पेंट में से उभरते भरी भरकम नितम्भों को देखा. जूलिया मैम का शरीर कमाल का था. इतना भरी भरकम और कसा हुआ बदन, वह साक्षात अमेज़न के देवी जैसी प्रतीत होती थीं. मेरी नजरें उनकी भरी नितम्भों से नही हट रही थी. उनके शरीर में एक-एक कटाव स्पष्ट नुमाया था. बाइसेप्स ऐसा जैसे किसी पुरुष का भी ना हो. वह किसी को अपने हाथों में पकड़ कर मसल दे तो सामने वाले का कचूमर ही निकल जाये. वह परफेक्ट मैच्योर औरत थीं. उनकी बदन उनकी उम्र के हिसाब से बहुत ही ज्यादा मेन्टेन किया हुआ था. उनका हिलता हुआ नितम्भ वहां कम्पन पैदा करता हुआ प्रतीत हो रहा था. मैंने देखा अब वह अपना आई-कार्ड पहने हुई थीं, जिसमें उनका पूरा नाम जूलिया एन और उसके नीचे सीआईए लिखा हुआ था. मैं उनके कम्पन करते नितम्भों को ही लगातार देखते हुए उस कमरे तक पहुँच गयी जहाँ एजेंट पूजा बॉडी एक्सामिन कर रही थी. एजेंट पूजा कोई 34-35 साल की पतले शरीर की एजेंट थी. अन्दर पहुँचते ही उसने जूलिया मैम को सैलूट किया.
"लास्ट दो ही बचे हैं अब?"जूलिया मैम ने वहां पहुँचते ही एजेंट पूजा से पूछा. "एस मैम" एजेंट पूजा ने कहा. "ठीक है तुम सलेक्सन लिस्ट ले जाकर कमिटी को दे दो, इन दोनों को मैं खुद जाँच कर वहां पहुँचती हूँ थोड़ी देर से" उन्होंने कहा. "यस मैम" कहते हुए वहां रखे कुछ फॉर्म्स उठाते हुए एजेंट पूजा वहां से बाहर चली गयी.
अब जूलिया मैम की नजरें फिर से मेरे शरीर के अंगों को ताड़ रही थी. मुझे थोडा अजीब लगा. फिर उन्होंने कहा "यहाँ आकर खड़े हो जाओ और एक-एक करके अपने सारे कपड़े निकाल दो" मैंने थोड़ा सा संकोच किया फिर मुझे लगा यही रूटीन है और मैं वहां पर आकर खड़ी हो गयी. जूलिया मैम सामने एक कुर्सी पर बैठी थी, उनका भारी शरीर किसी को भी मदहोश कर देने वाला था. गोल चेहरा, सुनहरे बाल, पुष्ट और बड़े वक्ष. वह कुर्सी पर अपनी एक टांग दूसरे पर क्रॉस करके बैठी थी.

मैंने ध्यान से देखा उनके शर्ट के ऊपर का एक बटन अब खुला हुआ था और उनके बड़े तरबूजों के बीच का क्लीवेज अब नुमाया हो रहा था. मुझे लगा वह गलती से खुल गया होगा और मैं धीरे से कपड़े निकालने लगी. जूलिया मैम लगातार, एकटक मुझे देख रही थी. उनके गंभीर चेहरे पर मैंने पहली बार थोड़ी सी मुस्कान देखी. मैंने अपना टी-शर्ट नीचे से उठाते हुए सर से बाहर निकाल दिया. मेरे हाहाकारी स्तन अब ब्रा में कैद छटपटा रहे थे. हाथ नीचे ले जाकर अब मैं धीरे से लोअर भी नीचे उतारने लगी. मेरा 22 वर्षीय हाहाकारी बदन, जिसपर मुझे बहुत घमंड था. जूलिया मैम के सामने बच्ची जैसा प्रतीत हो रहा था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में जूलिया मैम के सामने खड़ी थी. जूलिया मैम की निगाहें मुझे अपने बदन को चीरती हुई लग रही थी. वह उठ कर मेरे पास आई, मैं उनके सामने सावधान मुद्रा में खड़ी थी. मुझे सामने से ऊपर से नीचे तक पूरी तरह शरीर के एक-एक अंग को ध्यान से देखने के बाद जूलिया मैम मेरे पीछे चली गयीं. मुझे अहसास ओ रहा था कि वो मेरे पीछे मुझसे काफी सट कर खड़ी हैं.

अचानक से मुझे उनका मजबूत हाथ अपने पीठ पर महसूस हुआ. उन्होंने अपने हाथ से मेरी ब्रा की पट्टी को जोर से खिंचा और छोड़ दिया. चट्ट से जाकर पट्टी मेरे पीठ से टकराया, आह मैं दर्द से कराह उठी. मैंने सोचा ये क्या चेकअप है. पर फिर भी मैं सावधान उसी मुद्रा में खड़ी रही. मेरे ह्रदय की धड़कने जोर-जोर से धड़क रही थी. मुझे उनका दोनों हाथ अपने दोनों नितम्भों पर महसूस हुआ. वह पैंटी के ऊपर से,पीछे से मेरे दोनों नितंभ गोलाइयों को अपने हाथ में लेकर हल्का-हल्का दबा कर महसूस कर रही थीं. मेरे पूरे शरीर में रोमांच का लहर दौड़ गया. मुझे लगा शायद वह मेरे बदन की कसावट को समझने का प्रयास कर रही हैं. फिर वो धीरे से सामने आयीं, उनकी आँखों में एक अजीब से चमक थी. उन्होंने कहा "बाकी कपड़े भी निकाल दो" मैंने थोड़ी सी हिचकिचाहट से उनकी ओर देखा. मैं बहुत सी अजीब अनुभव कर रही थी. मेरे दिमाग में अचानक ही आलिया के साथ वाली घटना का स्मरण हो गया. पर क्या मैं गलत सोच रही हूँ? जूलिया मैम बस वह काम कर रही हैं जो प्रक्रिया के लिए जरूरी है. यही सब सोचते हुए मैंने धीरे से अपनी ब्रा का स्ट्रिप खोल दिया और मेरे नंगे तरबूज से कठोर और हाहाकार गोलाईयां लिए सुडौल दूध अब जूलिया मैम के सामने था. मैंने उनकी ओर देखा, वह सामने खड़े बस लगातार मेरे तरबूजों को घूर रही थीं. मैं बाजू से दोनों हाथ नीचे ले जाकर पैंटी उतारने लगी. तभी जूलिया मैंम का हाथ मेरे दूध पर पहुच गया. मैं अपना पैंटी पूरा उतार भी नहीं पायी थी, वह वैसे ही हल्का दबाकर मेरे दूध का भी जायजा लेने लगी जैसे वह मेरे पीछे के उभारों का ले रही थी. मेरे शरीर में वासना के लहर की शुरुवात होने लगी. मैं कुछ सोचने समझने में असमर्थ होने लगी, मैंने पैंटी पूरी तरह नीचे कर दिया. अब मैं पूरी तरह से मादरजात नंगी जूलिया मैम के सामने खड़ी थी. जूलिया मैम मेरे सामने थीं, उनका हाथ अभी भी मेरे उभारों पर था. मैं समझ नहीं पा रही थी यह सिर्फ जाँच है या उससे कुछ अलग ही. सामने जूलिया मैम के बड़े-बड़े खरबूज मेरे सामने ही थे. मेरी हालत ऐसी थी, मुझे अचानक मन हुआ कि मैं जूलिया मैम के दोनों स्तनों को अपने हाथ में लेकर उनके बलिष्ट शरीर से चिपक जाऊं पर मैं तुरंत संभल गयी. मेरा मकसद अभी आई.आई.ए. में सलेक्ट होना है, ना कि यह. हो सकता है यह सिर्फ एक टेस्ट हो. जूलिया मैम मेरे नंगे बदन के एक-एक अंग को ध्यान से देख रही थी. शायद वह आश्वश्त हो रही थी कि मैंने कोई टैटू नहीं बनवाया है.

जूलिया मैम के साथ इस पल ने मेरे दिमाग में अचानक रुखसाना आंटी का ख्याल ला दिया. मुझे वो पल याद आने लगा जब जब मेरी नजर बार-बार आंटी के गीले सीने में जा रही थी. उम्र में रुखसाना आंटी जूलिया मैंम से 3-4 साल ही बड़ी होंगी. पर जहाँ रुखसाना आंटी पतली दुबली और कम ऊँचाई वाली औरत थीं तो वहीँ जूलिया मैम 6 फुट 2 इंच की भरे-पूरे बदन वाली एक शक्तिशाली औरत थी. गलती से कभी जूलिया मैम रुखसाना आंटी के ऊपर आ गयी तो रुखसाना आंटी का तो कचूमर निकल जायेगा. यह सब क्या सोचने लगी मैं, अभी मुझे अपना पूरा ध्यान अपने टेस्ट पर लगाना है. जूलिया मैम अब गंभीर मुद्रा में मेरे सामने कुछ सोचते हुए खड़ी थी. मैं उनके सामने सावधान मुद्रा में पूरी तरह से नंगी होकर खड़ी थी. तभी दरवाजे पर किसी पतली आवाज की लड़की ने मे आई कमिंग मैम कहा. मैंने तुरंत दरवाजे की ओर अपनी नजर घुमाई. वह छोटे कद की लड़की जो मेरे दायें ओर बैठी थी, दरवाजे पर खड़ी थी. वह चोरी-छिपे बीच-बीच में मुझे भी देख रही थी. जूलिया मैम ने "अन्दर आ जाओ कहा". अब यह अन्दर आएगी और मैं यहाँ नंगी खड़ी हूँ मैंने सोचा.
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#8
[Image: s-l1600.jpg]
json parser validator online
जूलिया मैम
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#9
[Image: R.jpg]
जूलिया मैम
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#10
achha update, par bahut din baad aaya.. thoda jaldi update karo bhai please
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#11
(24-06-2022, 01:37 PM)longindian_axe Wrote: achha update, par bahut din baad aaya.. thoda jaldi update karo bhai please

han, i will try
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#12
वह लड़की अपने छोटे क़दमों से आगे बढ़ते हुए वहां तक आ गयी, जहाँ हम खड़े थे. जूलिया मैम ने उसे ऊपर से नीचे तक निहारा. वह लड़की सावधान मुद्रा में वहां खड़ी थी, वह काफी अलर्ट नजर आ रही थी. "तो तुम ही हो माया मैम की भतीजी लिली?" जूलिया मैम ने उसकी ओर देखते हुए कहा. यस मैम उसने स्माइल करते हुए कहा. तो इसका नाम लिली है मैंने सोचा. "ठीक है यहाँ खड़े हो जाओ" जूलिया मैम ने मेरे बाजू के खाली स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा. फिर जूलिया मैम कुछ पेपर्स देखने लगी. लिली अपना सर बाएं मोड़ कर मुझे देख रही थी. उसने मेरी नंगी बदन को ऊपर से नीचे तक निहारा और जब हमारी नजरें मिली तो लिली ने फिर से एक स्माइल दी. मैंने भी अपने चेहरे पर बनावटी मुस्कान ला दिया. जूलिया मैम के सामने तो ठीक भी था क्यूंकि यह तो उनका काम था पर लिली के सामने ऐसे नंगी खड़े रहना मुझे अजीब लग रहा था. अब तक मै समझ चुकी थी कि लिली किसी आई.आई.ए. एजेंट माया की भतीजी थी.
मेरे दिमाग में बहुत सारे उधेड़बुन चल रहे थे. मैंने सोचा क्या अब जूलिया मैम लिली को भी मेरे सामने ही नंगी होने कहेगी? मैंने ध्यान से लिली को देखा. लिली 28 साल की क़यामत थी. गोल मुखड़ा, चपटी नाक, जीन्स टी-शर्ट पहने लिली के स्तन छोटे पर एकदम गोल थे. उसके दोनों स्तन टी-शर्ट में कसा हुआ दिखाई दे रहा था.
तभी जूलिया मैम हमारी ओर मुड़ी और मुझे देखते हुआ कहा, "ठीक है रश्मि तुम अब जा सकती हो. इट्स आल फॉर यू". मै आश्चर्यचकित थी, ऐसे अचानक जूलिया मैम मुझे जाने क्यों कह रही है? पर मै क्या कर सकती थी? मैं गयी और अपने कपड़े पहनने लगी. लिली मुझे अभी भी बीच-बीच में कपड़े पहनते देख रही थी. पर मुझे क्या, मेरा तो हो गया. अब मैं यहाँ से घर जाउंगी और जाकर सो जाउंगी, बहुत थकान है मैंने सोचा. और फिर मै कपड़े पहन कर वहां से बाहर निकल आई.



मेरे इंटरव्यू को हुए 10 दिन हो चुके थे. आज मेरा रिजल्ट आने वाला था. मैं थोड़ा सहमी हुई थी. वैसे मुझमे आत्मविश्वास पूरा था पर वहां के अन्य लड़कियों को देख कर मुझे अहसास हुआ था कि सबके सब जांबाज लड़कियां थीं.  अमर, सचिन, रीमा और शाहीन को भी मेरे रिजल्ट का इंतजार था. आज मेरे सलेक्सन होने पर मेरी तरफ से सबके लिए पार्टी थी. मैं जानती थी अमर और सचिन को मेरे सलेक्सन का इन्तजार था क्यूंकि उन्हें मुझसे पार्टी चाहिए थी. शाहीन कम बात करने वाली और ज्यादा एकांत में रहने वाली लड़की थी, वो क्या सोचती थी ज्यादा कुछ समझ नहीं आता था. रीमा के बारे में मुझे पता है कि वह सही मायने में मेरा भला चाहती है और वो मेरी शुभचिंतक है.

आज सन्डे है और मैं अब तक सो ही रही थी. मैं उठी, उठने से बाद ब्रश करके नहाने चली गयी. बाथरूम में जाकर मैंने अपने हाहाकारी बदन के ऊपर से कपड़ों को परे करना शुरू कर दिया. पहले टी-शर्ट निकाली, फिर शॉर्ट्स. अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में आईने के सामने खड़ी खुद को निहार रही थी. ब्रा मेरे बड़े और सुडौल स्तनों को ढंकने का असफल प्रयास कर रहा था. और फिर मैंने पीछे हाथ ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दिया. आईने में मैं अपने सुडौल वक्षों को देखकर खुद ही मंत्रमुग्ध हो गयी. अपने दोनों हाथ ऊपर ले जाकर मैंने अपने दोनों दूध अपने हाथों में ले कर हौले से सहलाया. फिर मैंने एक झटके से अपनी पैंटी भी निकाल फेंकी. अब मैं अपने पूरे नग्न बदन को आईने में निहार रही थी. मैं सोच रही थी कि ऐसी ही नंगी मैं जूलिया मैम के सामने टेस्ट के लिए खड़ी थी. मैं जूलिया मैम से बहुत प्रभावित थी, क्या शानदार व्यक्तित्व था उनका. मैं अपने स्तनों का वैसे ही छू कर जायजा ले रही थी जैसा जूलिया मैम ने लिया था. मेरे शरीर में आनंद की हल्की-हल्की लहर दौड़ रही थी. सहसा मैंने एक हाथ अपने स्तनों से नीचे अपने उदर प्रदेश में अपने नाभि को छूते हुए और नीचे की ओर ले जाने लगी. मैं खुद को कामुक भाव से आईने में देखे जा रही थी. मेरा वह हाथ अब दोनों जंघाओं के मिलन स्थल के पास पहुँच गया था. मेरी पूर्ण रूप से बालों से रहित चिकनी कटि प्रदेश पर उँगलियाँ जाते ही मेरे पूरे बदन में अजीब सा करेंट दौड़ गया. मैंने अपने टेस्ट के कारण काफी दिनों से इस प्यासी बिल्ली की प्यास नहीं बुझाई थी.
तभी अचानक मेरे मोबाईल का रिंगटोन बजना शुरू हुआ, मैं हड़बड़ाकर वैसे ही नंगी बाथरूम से बाहर निकली. रीमा का फ़ोन था, मैंने रिसीव किया. सामने से रीमा ने कहा, "रश्मि रिजल्ट आ गया है तेरा, क्या हुआ? देखा तूने?". नहीं, पर तुझे कैसे पता मैंने तुरंत कहा. "हमें सब पता चल जाता है" रीमा ने हँसते हुए कहा. फिर वह बोली "चल जल्दी से चेक कर और फिर मुझे बता. मैं पार्टी के लिए तैयार होती हूँ" वह चहकते हुए बोली.
फ़ोन कट होते ही, मैं भागी-भागी अपने बेडरूम में गयी. टेबल से एडमिट कार्ड उठाई और कूद कर बेड पर बैठ गयी. मेरी उँगलियाँ मोबाइल के कीबोर्ड में तेजी से चल रही थी. मैंने तुरंत वेबसाईट खोला, एडमिट कार्ड सामने बेड पर रखा हुआ था. अब सामने वह स्पेस आ गया था जहाँ मुझे अपना रोल नंबर डालना था. मेरी धड़कने बहुत तेजी से धड़क रही थी. मैंने एक-एक करने नंबर डालना शुरू किया. पूरे नंबर डालते ही मैंने इंटर बटन दबाया. रिजल्ट मेरे सामने था, मैं वह देख कर आवाक थी. इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी में 5 एजेंट्स की पोस्ट आई थी. पाँचों लड़कियों के लिए थी और मेरा पोजीसन टॉप पर आया था. जी हाँ, मैं पूरे टेस्ट में प्रथम आई थी और मुझे टॉप एजेंट के लिए चुना गया था. मैं ख़ुशी से फूली नहीं समायी. मैंने तुरंत रीमा ओ फ़ोन किया और बताया. वो बहुत खुश हुई, उसने कहा 'मुझे तो पहले से ही पता था, इसलिए मैं पहले ही पार्टी के लिए तैयार हो गयी हूँ, चल अब जल्दी पहुँच. मजा आ गया, क्या शानदार खबर दी है तूने" थैंक यू-थैंक यू, मैंने हस्ते हुए कहा.
मैंने रीमा से  कहा तू अमर, सचिन और शाहीन से बात कर ले और वहीं अपने पुराने अड्डे में पहुँच. शाहीन को कहना, आलिया होगी तो वो उसे भी लेते हुए आये. मैं बस जल्दी से तैयार होकर पहुँच रही हूँ. "जी मैडम" रीमा ने मजाक करते हुए कहा. फ़ोन कटते ही मैं फुर्ती से वाशरूम पहुच गयी. मैं जल्दी से नहा कर, तैयार होकर अपने गंतव्य पर पहुँच जाना चाहती थी.
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#13
good update, but a little short one.. waiting for more..
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#14
फर्राटे से कार ड्राइव करते हुए मै हमारे पार्टी वेन्यू में पहुँच गयी. वेन्यू मुंबई के शानदार पब में से एक था, हम कॉलेज टाइम  कभी-कभी वहां जाते थे. किसी को बड़ी पार्टी देनी हो तो यह जगह हमारे लिए फिक्स थी. मैं 22 की उम्र में अकेली क्यों रहती हूँ? मेरा घर कहाँ है? और मेरे मम्मी-पापा कहाँ हैं? क्या करते हैं? ये सब एक लम्बी कहानी  है. समय ने और मेरे जीवन के अनुभव ने मुझे अत्यधिक प्रैक्टिकल इन्सान बनाया है. मैं भावनाओं में नहीं बहती. कब,कहाँ,कैसे, क्यों की समझ मुझे अच्छी थी क्यूंकि भावनात्मक भटकाव मुझमें नहीं था. मैंने अपने जिंदगी में इतना कुछ देखा था, समझा था इसलिए अब मैं 22 की उम्र में भी बहुत गंभीर और समझदार थी. शायद यही कारण है मेरे आई.आई.ए. में पहला स्थान प्राप्त होने का. उन्हें जो चाहिए था वो सब मुझमें है. मैं बला की खूबसूरत हूँ, ऐसा फिगर की किसी की भी लार टपका दे, प्रक्टिकल हूँ. चालाक हूँ, समझदार हूँ, तेज तर्रार और किसी से ठन जाए तो उतनी ही घातक भी. मार्शल आर्ट, कराटे और किक बॉक्सिंग की चैम्पियन भी. कोई लड़की क्या, कोई  लड़का भी मुझसे भिड़े तो मैं मार-मार के उसका कचूमर निकाल दूँ. कॉलेज में मेरी दो-तीन भिडंत हुई थी, इसलिए यह सब जानते थे. मुझे 7 भाषाओँ का ज्ञान था और अभी 3 और सीख रही थी. मैं आई.आई.ए. को जैसा चाहिए वैसा एक परफेक्ट एजेंट थी.

[अपने घर की बात करूँ तो मेरे पिता उदय प्रताप सिंह राणा जैसलमेर के राज परिवार से नाता रखते थे. उन्हें मेरी माँ स्वाति मंडल से कॉलेज में इश्क हुआ और उन्होंने उनसे प्रेम विवाह कर लिया. जिसका उनके परिवार ने पहले खूब विरोध किया पर बाद में अपना लिया. शादी के बाद उन दोनों की जिंदगी में काफी दिनों तक सब कुछ बहुत अच्छे से चला. मैं पैदा हो गयी और बड़ी होने लगी. बड़ी होने के बाद मैंने कई बार अपने पापा और मम्मी को लड़ते हुए देखा, बहुत पूछने पर भी मुझे कुछ नहीं बताया गया. फिर मुझे पढ़ने यहाँ भेज दिया गया. 5 साल पहले जब मैं छुट्टियों में घर गयी तो एक रात मैंने पापा और मम्मी को बहुत ज्यादा लड़ते हुए पाया. मैंने बीच बचाओ की, उसके बाद मम्मी हम जिस घर में रहते थे वहां से हमारा एक और घर था वहां चली गयी. दूसरे दिन सुबह 12 बजे मम्मी की एक्सीडेंट में मारे जाने की खबर आई. वो यहाँ के लिए आ रही थी और एक ट्रक से कार टक्कर होने के कारण घटनास्थल पर ही वो चली बसीं थी. मैं खबर सुन कर आवाक रह गयी. मैं बहुत रोई पर पापा को कोई फर्क नहीं पड़ा, वो वैसे के वैसे ही थे. हमने उनका संस्कार किया. इस बात के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी उनकी मौत कैसे हुई, क्या हुआ कुछ पता नहीं चला. पापा हमेशा की तरह अपने काम में बिजी रहते और घर लेट से आते. इस बीच ढूढ़ने पर मुझे  मम्मी के रूम से एक डायरी मिली थी, जिसे पढ़ कर मुझे पता चला कि दोनों के लड़ाई का मुख्य कारण पापा के अफेयर्स और मामा और उनके बीच कुछ जमीन का प्रॉब्लम थी. और मम्मी ने यह भी लिख रखा था कि बात इतनी पढ़ गयी है कि मुझे इनसे जान का खतरा है.

पापा के आने के बाद यह बात मैंने  उनसे पूछी. उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया और उल्टा मम्मी को बुरा भला कहने लगे. मैंने उन्हें चिल्ला कर कहा "मुझे  समझ नहीं आता आप यह जानने का प्रयास ही नहीं कर रहे हैं कि क्या हुआ था, क्यों?" उसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. हमारे बीच खूब बहस हुई. और अब यह आए दिन होने लगा. इसी बीच मुझे लगा कि शायद मेरी माँ की मृत्यु में मेरे बाप का ही हाथ है. मैं अपने बाप के प्रति नफरत की आग में जलने लगी. हमारे बीच सिर्फ बहस होती थी. एक महीने बाद मैं फिर कभी घर वापस ना जाने की कसम खा कर वापस मुंबई आ गयी. मैंने अपने बाप से बात करना, यहाँ तक की पैसे लेना भी बंद कर दिया और अपने नाम से अपने बाप का सरनेम हटा कर अपनी मां का सरनेम लिखना शुरू कर दिया. मेरा काम मम्मी द्वारा मेरे अकाउंट में जमा किये गये पैसे से चल जाता था. यहाँ आ कर मैं अपने कॉलेज के क्रियाकलापों व्यस्त हो गयी. पर मेरे दिमाग में हमेशा उस बात को जानने की इच्छा रही. इस तरह दो साल बीत गये. एक दिन एक वकील मेरे पास आया और बताया कि मेरे पापा की भी बिलकुल उसी तरह कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गयी है जब वो दूसरे घर से आ रहे थे और अपने जाने के बाद उन्होंने अपनी सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम कर दी थी. मैं कुछ दिनों तक व्यथित रही और अब मुझे क्या हुआ था क्यों हुआ था हर हाल में जानना था. वहां से मैंने ठाना आई.आई.ए. ज्वाइन करना और मैं पूरी तैय्यारी में लग गयी]-------------------------------(यह कहानी हम दुसरे भाग में पूरी पढेंगे)

पब में पहुँचते ही रीमा, अमर, सचिन और शाहीन ने गरमजोशी से मेरा स्वागत किया और मुझे बधाई दी. मैंने एक डार्क ग्रीन रंग की मिनी स्कर्ट और सफ़ेद रंग की फुल स्लीव शर्ट पहन रखी थी. पैरों में सफ़ेद रंग का ही एक सैंडल थी. स्कर्ट मेरे घुटनों के थोड़े ऊपर से शुरू हो रहा था. मेरी कन्दली गोरी और मांसल जांघों का निचला भाग जहाँ से नुमाया था. पीछे से देखने पर मेरे गोल और पुष्ट नितंभ स्कर्ट से उभरते नजर आ रहे थे. सामने शर्ट के तीन बटनों में से ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जहाँ से मेरे खरबूजे जैसे वक्षों का नजारा दिख रहा था. शर्ट के नीचे सफ़ेद इनर और फिर उसके नीचे सफ़ेद ब्रा मेरे स्तनों को बांध कर रखने का प्रयास कर रहीं थीं. शर्ट और स्कर्ट के बीच में मेरी चिकनी पेट दिखाई दे रही थी. स्कर्ट मैंने नाभि के ऊपर से पहना हुआ था. बाल मेरे खुले हुए दोनों कन्धों पर फैले हुए थे. मैं शानदार और कामुक लग रही, पब के अन्दर घुसते ही सबकी नजरें मुझ पर टिक गयीं.

मैंने ध्यान दिया अमर जब मुझसे गले मिला तो उसने अपना दायाँ हाथ ले जाकर हौले से मेरी नितम्भों को छुआ. अमर 5 फुट 10 इंच की ऊंचाई का जवान, हैंडसम बंदा है. मेरे लिए उसकी नजर कैसी थी मैं सब जानती थी. उसका बस चले तो वह अभी मुझे पकड़ कर मेरे सारे कपड़े फाड़ डाले. पर उसकी हिम्मत मेरे साथ ज्यादा कुछ कर पाने की हो नहीं पाती थी. मैं कभी-कभी सोचती थी, कितना फट्टू है यह. वह शानदार और बलिष्ठ जवान लड़का था, वह हिम्मत करता तो शायद मैं भी उसके सामने अपनी टांगें फैला देती. वैसे भी मेरी प्यारी बिल्ली बहुत दिनों से प्यासी थी.

सचिन हमेशा की तरह उससे बहुत खुश होते हुए जल्दी आकर गले मिला और फिर अलग हो गया. उसके चेहरे पर बेइन्तहां ख़ुशी अभी भी थी. रश्मि से गले मिलना उसके लिए अपने आप में एक उपलब्धि थी. चूँकि सचिन रश्मि से ऊँचाई में छोटा था, रश्मि से गले मिलते समय सचिन हमेशा अपने मुंह के निचले हिस्से पर टकराते हुए रश्मि के खरबूज जैसे गोल मांसल भागों को महसूस करता. रश्मि उसके लिए एक सपना ही थी. शाहीन हमेशा की तरह सलवार सूट पहने हुई आई और रश्मि से गले मिली. उसने रश्मि को बधाई भी दी.
एक लॉन्ग प्लाजो और एक स्लीवलेस टॉप पहने रीमा अब रश्मि के सामने आई. टॉप के ऊपर से रीमा के गोल और कड़क उभार स्पष्ट दिखाई दे रहे थे. उसकी मांसल खुली चिकनी बाहें लौकी की तरह सुडौल और गोल थी. रीमा ने भी अपनी जुल्फें सामने कन्धों पर राखी थी. रीमा आकर रश्मि से गले मिली. रश्मि को अहसास हुआ कि रीमा शर्मा उसकी सफलता से सच में बहुत खुश है और उसने अपनत्व के साथ उसे अपनी बाँहों में भर लिया. रीमा उसे बधाई दे रही थी, उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे.
ऐसा नहीं था कि अमर सिंह की कामुक नजरें सिर्फ रश्मि के लिए थी. वह थोड़ा ऐय्याश किस्म का आदमी था. मौका मिले तो वह किसी को ही दबोच ले. अमर की एकटक नजरें अभी अभी गले मिलती हुईं रश्मि और रीमा के सीने के बीच थी, जहाँ उन दोनों के कयामती और पुष्ट स्तन एक दूसरे से टकरा कर सामने वाले को हटाने का प्रयास कर रही थीं. अमर सिंह अपने नीचे कुछ कड़ापन महसूस करने लगा. उसका बस चले तो वो दोनों को एक साथ दबोच ले. पर रश्मि के कारण उसकी हिम्मत होती नहीं थी. रश्मि और रीमा बहुत अच्छे दोस्त थे इसलिए वह रीमा पर भी हिम्मत नहीं कर पता था. अमर सिंह ने सोचा आज वह किसी न किसी तरह मौका निकाल कर रहेगा. आज आर या पार.
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#15
Lovely kadak story keep it up.. Update pls
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#16
Excellent Writing... A different plot.... Please continue your story.
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#17
पब में शराब और श़बाब दोनों अपने चरम पर था. मुलाक़ात होने के बाद सब, एक जगह पर अपनी जगह बुक करके बैठ गये. एंट्री फीस के बाद शराब तो फ्री ही था. रश्मि बीच में और सब उसे घेर कर बैठे हुए थे. सबको जानना था सलेक्शन प्रोसेस में क्या हुआ. एक-एक करके सब उससे कुछ सवाल पूछते और वह उसका जवाब देती. सबके हाथ में अपना-अपना पेग था, धीरे धीरे सब अपना सिप लगाते रश्मि को मंत्रमुग्ध होकर सुन रहे थे. रश्मि के ठीक सामने शाहीन अपनी आंख्ने बड़ी करके आश्चर्य से रश्मि को देखते हुए बैठी थी. वह सोच रही थी हमारे बीच की रश्मि ने कितना बड़ा काम कर दिया है और एक मैं हूँ जो ढंग से बात भी नहीं कर पाती हूँ. शाहीन बहुत ज्यादा पीती नहीं थी, कभी-कभी 1-2 पेग, उतना ही उसके लिए काफी था. अमर सिंह ने फटाफट अपना दूसरा पेग ख़त्म किया और उठ कर अगला पेग लेने काउंटर की और बढ़ गया. उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था. पहले उसे ज्यादा पता नहीं था रश्मि ने क्या तीर मारा है. पहले उसे बस लगता था रश्मि को एक नौकरी मिली है. उसने ना पहले कभी जानने का प्रयास किया और ना ही कभी ध्यान दिया. पर आज सबकी बातें सुनकर उसे समझ आया कि रश्मि बड़ी जगह पहुँच गयी है. रश्मि को पाने की उसके मन में जो कामना थी उसको वह रश्मि के डर से पहले भी पूरी नहीं कर पाया, अब तो उसे लगा यह असंभव हो गया. काउंटर पहुँचते ही उसने पहले उसने तुरंत एक काउंटर शॉट लगाया और फिर अगला पेग लेकर वह लौट गया. अमर अब हलके नशे में झूम रहा था, शराब उसके दिमाग में बातें बहुत तेजी से चला रही थी. फिर उसने वैसे ही नशे की हालत में अपना अंतिम निर्णय लिया, जो भी हो जाये मौका मिलते ही मैं आज किसी ना किसी पर प्रयास तो करूँगा ही. चाहे वो शाहीन ही क्यों हो, उसने सोचा. फिर उसने खुद से ही कहा, शाहीन? नहीं. फिर वह अपने आप को समझाते हुए आया, शाहीन भी चलेगी. मुझे जो चाहिए वो तो मिलेगा ही. यह सब सोचते वह वापस आकर अपनी जगह पर बैठ गया.

मैंने, रीमा शर्मा को अपने इंटरव्यू राउंड के बारे में बताते हुए अपना पेग ख़त्म किया. यह शायद मेरा तीसरा पेग था, मैं हल्के-हल्के सुरूर में थी. मैं रीमा को बता रही थी कि इंटरव्यू पैनल में 7 लोग थे, जिनमें से सभी  मुझसे लगातार एक के बाद एक प्रश्न पूछ रहे थे. जिनमें से एक आई.आई.ए. के चीफ भी थे. यह सब बताते हुए मैं अपना अगला पेग लेने के लिए उठने लगी. उठने के लिए जैसे ही मैं थोड़ा झुकी सामने शाहीन के बगल में बैठा सचिन श्रीवास्तव मेरे सफ़ेद शर्ट में से  ऊपर के दो खुले हुए बटनों में से झांकते वक्षों को निहार रहा था. वैसे तो मुझे उसे ललचाने में बड़ा ही मजा आता था. बहुत बार मैं जानबूझकर ऐसी हरकत उसे तड़फाने के लिए करती थी, कभी-कभी उससे अपना काम निकलवाने के लिए तो कभी-कभी तरस खाकर उसके साथ मजे लेने के लिए. पर आज मुझे उसका मेरी स्तनों की ओर झांकते हुए पाए जाने पर बड़ा गुस्सा आया. शायद यह सबके बीच में होने के कारण था. पतले-दुबले शरीर और साढ़े पांच फुट की ऊंचाई का सचिन, थोड़ा शर्मीला टाइप का लड़का है. उसका खुद का कुछ नहीं है, ना कोई प्लान, ना कोई सोच, वह बस हम जो करते उसमें शामिल हो जाता. मैंने उसकी आँखों में ऑंखें डाली और कहा, "सचिन, मेरे लिए एक पेग ले आएगा क्या?"

वह बिना कोई पल गंवाए अपनी जगह से उठ गया. दायाँ हाथ जिससे वह अपना पेग पी रहा था उससे उसने अपने गिलास को बाएं हाथ में लिया और दायाँ हाथ मेरी और बढ़ाते हुए कहा "हाँ, मैं ले आता हूँ ना, मैं खुद के लिए पेग लेने जाने ही वाला था". मुझसे गिलास लेकर वह काउंटर की ओर बढ़ गया. रीमा ने मुझे मुस्कुराते हुए देखा, फिर वह खिलखिला कर हंस दी. रीमा काफी समझदार लड़की थी. भले ही इस मामले में हमारी बात नहीं हुई थी पर उसे बखूबी पता था मैं कैसे सचिन से अपना काम निकलवाती हूँ. और शायद वह जानती थी मैं उससे काम निकलवाने के लिए क्या हथकंडे अपनाती हूँ. मैंने रीमा को ध्यान से देखा, रीमा ने पीते हुए अपनी स्लीवलेस टॉप के ऊपर पीते हुए थोड़ा शराब गिरा दिया था. भींगे हुए कपड़ों से उसकी काली रंग की ब्रा और उसके ऊपर का नज़ारा हल्का सा दिख रहा था. 5 फुट 9 इंच की रीमा अपने आप में क़यामत थी. उसके गोल, सुडौल और पुष्टता से परिपूर्ण गोलाइयों का अहसास ऊपर से हो रहा था. मुझे हमेशा से पता था कि रीमा बेइंतहा खूबसूरत है पर फिर भी मेरी ऐसी नजरें उस पर कभी नहीं गयी. यह शायद शराब के इस हल्के-हल्के सुरूर की करामात थी. इतने में ही सचिन वहां मेरे लिए पेग लेकर हाजिर हुआ. मैंने उससे पेग लिया और हम सब फिर से अपनी बातों में लग गये.

कुछ देर के गप और मस्ती के बाद, शाहीन को छोड़ कर लगभग हम सब नशे में धुत्त थे. मैंने कुछ ज्यादा ही पी लिया था. हम सब एक के बाद एक डांस फ्लोर की तरफ बढ़े. मैं खूब मस्त होकर नाच रही थी, पूरी तरह से फ्री. नाचते समय मेरे मादक यौवन से भरे स्तनयुगल बेतरतीब कम्पन कर रहे थे. फ्लोर पर सबकी नजर मेरे गदराये बदन पर थी. लड़के क्या लड़कियां भी मेरे मखमली पेट और और कठोर, पुष्ट टांगों को देखकर जल भुन रही थीं. कुछ लड़के पास आकर मेरे गदराये हुए,  हाहाकारी, अप्रतिम बदन को छूने और मुझसे बात करने का प्रयास करने लगे. वैसे तो मैं किसी भी उल्टी-सीधी हरकत से खुद का ध्यान रख सकती हूँ पर यहाँ अमर मेरा रक्षक बना हुआ था. वह मेरे साथ-साथ मेरे आस पास ही नाच रहा था. बीच-बीच में वह मेरे साथ ऐसे चिपक जाता था जैसे वह मेरा बॉयफ्रेंड हो. अमर तगड़ा और बलिष्ठ शरीर का मालिक है. इसलिए किसी की उसके बाद हिम्मत भी नही हो रही थी. इस नशे के सुरूर में मैंने अपनी गर्दन घुमा कर बाकी तीनों को देखने का प्रयास किया. रीमा, शाहीन कुरैशी और सचिन एक अलग जगह थे. उनकी शायद कुछ और ग्रुप के लोगों से दोस्ती हो गयी थी, जहाँ वे साथ में किसी बात पर जोर-जोर से हंस रहे थे.


मुझे क्या!! मैं तो मदमस्त होकर अपने अंग-अंग हिलाते हुए डांस कर रही थी. शराब का भरपूर नशा, डिम और नशीली  लाईट  और पैरों को थिरका देने वाला म्यूजिक मुझे मस्त कर दे रहा था. अमर भी मेरे सामने ही मस्त था. उसने अपनी कमर हिलाते हुए, अपना मुंह मेरे कान के एकदम पास लाकर कहा. "रश्मि, आर यू ओके ?" भरपूर नशे में डूबी मैं, मुझे अहसास हो रहा था कि मैंने हद से ज्यादा पी ली है. मैंने उससे लड़खड़ाते हुए  कहा "मैं ठीक हूँ, बस थोड़ा ज्यादा हो गया है आज. टाइम कितना हुआ? रात नहीं हुई अभी तक?" मैं बेफिक्र थी पूरी तरह से, इतने दिनों की व्यस्तता इसका कारण था. "रात काफी हो गयी है मैडम" उसने कहा. "अच्छा", मैंने कहा. अमर खुद भी काफी नशे में था. उसने पास आकर अपने बाएं हाथ से मेरी दायें हाथ को पकड़ लिया. वह मुझसे काफी पास मुझसे चिपक कर कर खड़ा था. मैं उसके कठोर सीने को अपने गदराई गोलाईयों के अग्र बिंदुओं पर महसूस कर रही थी. धीरे से मैंने उसका दायाँ हाथ अपने बाएं नितंभ पर सरसराता हुआ पाया. वह बड़े इत्निनान से मेरी कठोर नितंभ पर स्कर्ट के ऊपर से अपना हाथ फेर रहा था. उसकी उँगलियाँ अब थोड़ा ऊपर जहाँ स्कर्ट और शर्ट के बीच का भाग था, मेरे कमर के निचले हिस्से में मेरे नंगी मुलायम और चिकने शरीर पर था. वह स्त्रियों को छूने में दक्ष था. उसकी छुवन से मेरे शरीर पर मादकता की लहरें हिलोरें मारने लगी.
हौले से उसने अपनी हथेली  मेरे स्कर्ट के इलास्टिक के भीतर डालना प्रारंभ किया. उसकी उँगलियाँ मेरे स्कर्ट के अन्दर, मेरी मांसल और पुष्ट नितंभ के ऊपर जाकर मेरी पैंटी पैंटी के ऊपरी बॉर्डर को छूने लगा. मैं अपनी आँखें बंद कर उसकी हरकतों को अपने पीछे के उभारों पर महसूस कर रही थी. उसकी छुवन ने मेरे रोम-रोम में मीठा सा तरंग प्रवाहित करना आरम्भ कर दिया. अपनी दो उँगलियाँ मेरी पैंटी के अन्दर डालकर अमर मेरी नंगी, चिकनी और गदराई नितम्भों पर गोलाकार गति से फेरने लगा. फिर अचानक उसने अपनी पूरी हथेली मेरे पैंटी के अन्दर डाल कर मेरी मांसल और कठोर नितंभ को मसल दिया. "आहहहह" मेरे मुंह से निकला.

तभी मुझे एक आवाज सुनाई दी "रश्मि". यह रीमा की आवाज थी. मैं अमर से तुरंत अलग हुई और आंख्ने खोली. अपने चारों तरफ देखा. रीमा काफी दूर थी, उसे शायद हमारी स्थिति का ज्ञान नहीं था. "हाँ" मैंने कहा और रीमा हमारी ओर आने लगी. मैंने अपने आस-पास देखा तो वहां कई जोड़े एक-दूसरे से लिपटे परस्पर यौन अग्नि में जल रहे थे. मेरे पीछे तो एक जवान सा लड़का अपनी साथ वाली लड़की के टी-शर्ट के ऊपर से उसके एक स्तन को एक हाथ से बेरहमी से दबा रहा था और दुसरे वक्ष को ऊपर से ही अपने मुंह के अन्दर समा लेने को आतुर था. मैं काफी नशे में थी और अमर की हरकतों ने मेरे रोम-रोम में आग लगा दी थी. नशे की गिरफ्त में दिखती रीमा अब हमारे पास पहुँच चुकी थी. उसने कहा "चलते हैं यार, काफी टाइम हो गया, सोना है अब मुझे". मैंने उसकी ओर देखते हुए कहा "ठीक है बेबी". मेरी जुबान लड़खड़ा रही थी. "बाकी दोनों कहाँ हैं" मैंने उसे कहा. "बाहर" उसने जवाब दिया.
मैंने अमर की तरफ देखा, वह आँखों में लाल डोरे लिए अभी भी मुझे निहार रहा था. हमारी नजरें मिलने ही उसने कहा "थोड़ी देर और रुक जाते हैं". "नहीं, अब हम घर जायेंगे मैंने चिल्ला कर कहा" और रीमा की तरफ मुड़ गयी. रीमा आगे आगे और मैं उसके पीछे. अमर अब क्या ही कर पाता? वह भी मेरे पीछे आने लगा.

रीमा के पीछे चलती मेरी नजर रीमा के मटकते हुए कूल्हों पर पड़ी. मैं खुद को बोलने से नहीं रोक पाई "क्या शानदार फिगर का रीमा का". बाहर सचिन और शाहीन हमारा इन्तजार कर रहे थे. सचिन, रीमा के साथ और शाहीन मेरे साथ जाने वाली थी. मेरी लड़खड़ाहट को देखते हुए अमर ने कहा "घर तक गाड़ी ड्राइव कर लेगी?" मैंने होंठों पर कटीली मुस्कान लाते हुए  कहा "नहीं, तू छोड़ दे". उसने अचंभित होकर मेरी और देखते हुए कहा "हाँ, मुझे कोई दिक्कत नहीं है". हमने निर्णय लिया, सचिन मेरी कार ले जायेगा और शाहीन को उसके घर छोड़ देगा. रीमा अकेली चली जाएगी और अमर मुझे छोड़ देगा. हमने एक दूसरे को सी ऑफ़ किया और अपनी-अपनी मंजिल की और चल पड़े.
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#18
great.. waiting for more...
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#19
अमर मेरी बी.एम.डब्लू. चला रहा था. मैं बाजू वाले सीट पर बैठी हुई थी.नशे के कारण हम दोनों आधे बेसुध थे. अमर सिंह  की छुवन ने मेरे पूरे शरीर में खलबली मचा दी थी. हम दोनों की आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे. अमर रह-रह कर तिरछी नज़रों से मेरी खुले हुए बटन से झांकते उभारों को देखने का प्रयास कर रहा था. इतने सालों में अमर ने आज पहली बार मुझे इस तरह से छूने की हिम्मत की थी. और मैं बीच मंजधार में उससे अलग हो गयी थी. जब वह मुझसे चिपक कर खड़ा था, मैंने उसके कमर के नीचे कड़े होते अंग को महसूस किया था. मैं उससे अलग हुई तो बेचारा पक्का जलभुन गया होगा. मुझे पक्का यकीन है अगर वहाँ मैं थोड़ी देर और उसके साथ रहती तो वह अपना हाथ पीछे से आगे की ओर ले जाकर मेरी जांघों के बीच के मुलायम, चिकनी और प्यासी बिल्ली को भी छू लेता. यह ख्याल आते ही मुझे नीचे अपनी टांगों के बीच गीलेपन का अहसास हुआ. मैं तुरंत अपने विचारों से बाहर निकली. यह मैं क्या सोचने लगी, मैंने अपने आप से कहा. मै वैसे खुले विचारों वाली लड़की थी, ये सब मेरे लिए बड़ी बात नहीं थी. पर अमर मुझे पहले कुछ खास पसंद नहीं था.
मैंने अपने दिमाग में चलते उधेड़बुन से बाहर निकल कर अमर की ओर देखा. वैसे अमर में एक सम्पूर्ण मर्दों वाली सारी बात थी. वह ताकतवर था, बलिष्ट था पर थोड़ा सा चेंप और अय्याश टाइप का लड़का था. अमर और सचिन दोनों की नज़रों को मैं अच्छी तरह जानती थी और सचिन को मैंने कई बार जानबूझकर अपने मादक कहर ढाते अंगों की झलक दिखाई थी. मुझे बड़ा मजा आता था जब सचिन मेरी नशीली अंगों को देखकर लार टपकाता था.
तभी मुझे अमर ने कहा "रश्मि, तू ठीक है? हम तेरे घर पहुँच गये". "मेरे घर!! कहाँ?" मुझे सब पता था पर मैंने जानबूझकर कहा. उसने मेरी और देखा और कहा "ये तो सामने तेरा घर है, लगता है तुझे ज्यादा ही चढ़ गयी है, दे मुझे चाबी उसने मेरी दूधिया गोलाइयों पर एक नजर फेरते हुए कहा" उसकी आँखों में वासना के डोरे तैर रहे थे. मेरे भरे हुए कठोर उभारों को देखने से वह अपने आप को रोक नहीं पा रहा था. मैंने उसे चाबी दी, उसने जाकर सामने का दरवाजा खोला. फिर आकर वह कार में बैठ कर उसे स्टार्ट कर पोर्च में ले गया.

अपनी सीट से उतर कर, मेरी ओर आकर मेरी तरफ का दरवाजा खोल कर उसने मुझे पूछा "अन्दर चली जाएगी?" "हाँ, बिलकुल" मैंने अपनी भौं उठाते हुए कहा. मैं कार से नीचे उतरी, उसने गेट बंद किया. मैं घर की ओर मुड़ी तभी अचानक वह मेरे बाएँ बाजू में आकर अपना एक हाथ मेरे दायें कंधे पर रखकर मुझे सहारा देते हुए चलने लगा. मैं आराम से घर जा सकती थी, पर मैंने उसे कुछ नहीं कहा. मेरी कन्धों पर रखे उसके दायें हाथ को दो तीन बार मैंने बगल से आहिस्ता, जैसे गलती से ओ रहा हो, अपने वक्षों को छूते हुए पाया. मैं मंद-मंद मुस्कुरा उठी. हम दोनों थोड़ा लड़खड़ाते हुए घर के गेट तक पहुंचे. अमर ने ताला खोला. वह मुझे लेकर सीधे मेरी बेडरूम की तरफ बढ़ने लगा. उसे पता था मैं कहाँ सोती हूँ, वह पहले मेरे घर आ चुका था. मेरे बिस्तर पर मखमली चादर बिछा हुआ था, हम पास आए. उसने अपने मजबूत हाथों से मेरे दोनों बाजुओं को पकड़ कर मुझे बेड पर बैठा दिया. बेड पर बैठते समय मेरे घुटनों के ऊपर से शुरू होता मिनी स्कर्ट थोड़ा और ऊपर खिसक गया. अमर लगातार मेरे केले की तने जैसी गदराई जांघों को निहारे जा रहा था.

अभी से पहले तक वह मुझे चोर नजरों से देखने की कोशिश कर रहा था. पब वाली घटना के बाद भी उसके मन में अपने आप को मुझसे ना पकड़े जाने का अहसास था. पर यहाँ मेरे घर में, मेरे बेडरूम पर, मैं बैठी थी और वह मेरे सामने खड़े होकर ललचाई नजरों से मेरे दोनों पैरों के बीच के मांसल हिस्से को निहार रहा था. मैंने उसकी आँखों में वासना के चरम को लहराते हुए देखा. "अमर" मैंने कहा, वह थोड़ा सकपकाया फिर मेरी ओर देखते हुए कहा "लगता है मुझे अब चलना चाहिए". मैंने अपना दोनों हाथ ऊपर  उठाया  और अपने सीने को तानते हुए  भरपूर अंगड़ाई लेते हुए कहा "रात काफी हो गयी है, यहाँ गेस्ट रूम में ही सो जा, वैसे भी नशे की हालत में कहाँ इतनी दूर जायेगा अभी!!". "हूँ" उसने धीरे से कहा. मेरे अंगड़ाई लेते ही उसकी नजरें नीचे से मेरे शर्ट के ऊपर के खुले बटनों से झांकते दूधिया उभारों पर टिक गयी. मेरा शर्ट थोड़ा अस्त व्यस्त हो गया था. दो बटन पहले से खुले थे, तीसरा बटन मेरे उभारों को बांधने का असफल प्रयास कर रहा था. मैं अब भी बिस्तर पर बैठी थी और अमर अब भी मेरे सामने चकित सा खड़ा था. वह मेरे बड़े-बड़े ठोस गुदाज उभारों का जायजा ले रहा था. उसकी आँखों में लाल डोरे थे, उसकी नजरें मुझे अपने बदन में छूती हुई महसूस हो रही थी. और अब मैं भी उस प्यास की खेल में बहक रही थी.

मैंने उसकी ओर देखा, उसने अपनी नजर मेरे सीने से हटाई. हमारी नजरें मिली, दोनों शांत थे और शराब के नशे का प्रभाव ने ज्यादा सोचने भी नहीं दे रहा था. मैं बेड के एकदम किनारे पर अपनी दोनों टांग नीचे रख कर बैठी थी. दोनों पैरों के बीच थोड़ा फासला था, जहाँ से वह मेरी चिकनी जांघों को पहले निहार रहा था. मैं थोड़ा पीछे खिसक कर, बेड में और ऊपर की तरफ बैठ गयी. मेरे पैर अभी भी बेड के नीचे थे पर अब मेरे ऊपर खिसकते ही फैले हुए पैरों के बीच से मांसल जांघें अब ज्यादा नुमाया थीं. मैंने उसे देखा, वह ललचाई नजरों से मेरी गदरायी, सुडौल और पूर्णतः तराशी हुई जांघों को फिर से देख रहा था. मैंने धीरे से अपना दोनों हाथ उठाया, दायाँ हाथ दायीं जांघ की दायीं ओर, बायाँ हाथ बायीं जांघ की बायीं ओर, और अपने डार्क ग्रीन रंग के मिनी स्कर्ट को दोनों जांघों के बगल से पकड़ कर धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगी. अमर एक टक, बुत बना हुआ मेरे अनावृत्त होते कन्दली, चिकनी, सुडौल जांघों को देख रहा था. मैंने स्कर्ट को खिसकाते-खिसकाते वहाँ तक ऊपर ला दिया जहाँ से उसे अब मेरी दोनों जांघों के कटाव के पास सफ़ेद रंग का मखमली पैंटी दृष्टिगोचर होने लगा.
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#20
Story achi ja rhi h

Plz continue
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