
Real Ghost Story - भूत प्रेत घटनाएँ
पहलवान का भोग
पहलवान का भोग
नमस्कार दोस्तों,
दोस्तों भूत प्रेत से सम्बंधित घटनाओं में ज्यादातर घटनाये रोंगटे खड़ी कर देती हैं। तो कुछ इतनी मार्मिक होती हैं के दिल भर आता है। लेकिन मेरे जीवन से जुड़ी एक घटना ऐसी भी है जिसे याद करके हंसी आ जाती है। जाने अनजाने में मेरी मम्मी के मामा जी के साथ ये घटना घटी थी। बस थोड़े से आलस की वजह से उनके पीछे ऐसी मुसीबत लगी जिससे उन्हें निजात पाने में सालों लग गए।
वो गाँव में रहा करते थे। उनका नाम तो अच्छा खासा है मगर गाँव में अक्सर चिढ़ाने के लिए जो नाम रख दिया जाता है वो नाम पूरी जिंदगी के लिए पीछे लग जाता है। इसी संक्षिप्तिकरण और मजाक में उनका नाम बचपन में ही लाल जी पड़ गया था। वो इसी नाम से पहचाने जाने लगे।
वो जिस गाँव में रहते थे वो अमेठी से करीब पेंतालिस किलोमीटर दूर पड़ता है। उनका घर गाँव में सबसे किनारे पर था। और उनके घर से करीब ढाई सौ मीटर की दूरी पर रेलवे लाइन थी। और रेलवे लाइन के पार एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था और चबूतरा बना था, उन्हें लोग पहलवान बाबा के अर्थान (पूजा का स्थान) के नाम से जानते थे। सबको उनपर बहुत श्रद्धा थी, जिसका परिणाम भी उन्हें अच्छे के रूप मिलता था।
आस पास के गाँव वाले उनकी पूजा अर्चना करते थे और उनकी कृपा भी खूब देखते थे और आज भी ये सिलसिला वहां जारी है। खैर, वहां वास करने वाले बाबा कोई देवता नहीं थे, वो वही थे जिन्हें लोग शहरो में छलावा कहते हैं। लेकिन एक बहुत लम्बे अंतराल से वो वहां वास करते हैं इसलिए वो बहुत अधिक शक्तिशाली हैं। उनकी पूजा जो करता है वो उस पेड पर लंगोट और दारु की एक बोतल चढ़ाता है। भूतप्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति वहां जाकर ठीक हो जाते हैं।
लाल जी भी उन्हें बहुत मानते थे, मगर वे थे थोड़े आलसी किस्म के। जब भी उनकी माता उन्हें उस अर्थान पर चढ़ावा चढाने को कहती तो वे अक्सर टालमटोल करते थे।
वहीँ गाँव में एक पंडित जी भी रहते थे, हष्टपुष्ट शरीर वाले और अखाड़ों में उनका बहुत नाम था।