13-09-2019, 06:18 PM
बीते सप्ताह में तृप्ति ने विक्रम से और मैंने उपासना से इतनी चुदाई की थी कि हम पति-पत्नी के मन में चुदाई का ख्याल बिल्कुल न था। मुझे नहीं पता कि यह मेरे साथ ही हो रहा था या तृप्ति भी ऐसा ही सोच रही थी। किंतु सोने से पहले जब तृप्ति ने अपने सारे कपड़े उतारे तो उसकी गोरी पतली कमर पर चमकदार कुल्हे देख कर मेरा लन्ड हिचकोले खाने लगा।
दोस्तो, तृप्ति को जब मैंने देखा तो उसकी चुदाई का ख्याल मन में आखिरकार जाग ही गया। जैसे ही सफेद व गुलाबी देह की मालकिन मेरे बिस्तर में आकर गिरी तो उसे चूमे बिना नहीं रहा गया। मैंने अपना मुंह अति आकर्षण पैदा कर रहे कूल्हों में घुसा दिया और उसके कूल्हों को दांतों से काट कर लाल कर दिया। उसने मेरी उत्तेजना को समझते हुए अपनी गांड का छेद मेरे मुंह पर दबा दिया. अतः मैंने उसके उभरे हुए गांड के छेद को अपनी जीभ से ऊपरी भाग तक चोदना शुरू कर दिया।
तृप्ति अपनी गांड को मेरे मुंह पर जोर-जोर से दबाने लगी। हम दोनों इतने उत्तेजित हो गए थे कि एक दूसरे में समाने के लिए बेसुध हो पड़े थे। तृप्ति ने मुझे बिस्तर पर गिरा कर मेरे तने हुए लन्ड को चूसना शुरू कर दिया और अपने थूक से लपेटते हुए उसे चूस-चूस कर उसे चिकना बना दिया। उसके बाद उसने मुझे पीठ के बल सीधा लेटा दिया और ऐसा करने के बाद मेरी रानी ने मेरे खड़े लिंग को अपनी गांड के छेद के अंदर लेते हुए उसको आहिस्ता से हौले-हौले भीतर लेते हुए बैठ गई और धीरे-धीरे ऊपर नीचे हो कर लपालप ... लप-लप की आवाज करते हुए मेरे लिंग का भोज अपनी गांड को कराने लगी। मेरी हुस्न परी बीवी के गोरे गुलाबी स्तन मेरे सामने उचकते हुए एक अलग ही दृश्य पैदा कर रहे थे। अतः मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें दबाकर मसलना शुरू कर दिया। उसके आकर्षक शरीर ने मुझे इतना दीवाना बनाया कि मैं जाहिल और हवस के प्यासे मर्द की तरह उसके स्तनों को नोंचने लगा। तृप्ति ने सिसकारियां भरते हुए अपने स्तनों को मेरे मुंह पर जोर डालते हुए दबाया और अपना एक स्तन मेरे मुंह में दे दिया। इसका अर्थ यह था कि अब तृप्ति की जोरदार चुदाई चालू हो गई और तेज पट-पट की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी। करीब 15 से 20 मिनट की चुदाई के बाद मैं तृप्ति की गांड में ही झड़ गया। दोनों बेसुध होकर एक दूसरे की बांहों में गिर गए और पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।
दोस्तो, तृप्ति को जब मैंने देखा तो उसकी चुदाई का ख्याल मन में आखिरकार जाग ही गया। जैसे ही सफेद व गुलाबी देह की मालकिन मेरे बिस्तर में आकर गिरी तो उसे चूमे बिना नहीं रहा गया। मैंने अपना मुंह अति आकर्षण पैदा कर रहे कूल्हों में घुसा दिया और उसके कूल्हों को दांतों से काट कर लाल कर दिया। उसने मेरी उत्तेजना को समझते हुए अपनी गांड का छेद मेरे मुंह पर दबा दिया. अतः मैंने उसके उभरे हुए गांड के छेद को अपनी जीभ से ऊपरी भाग तक चोदना शुरू कर दिया।
तृप्ति अपनी गांड को मेरे मुंह पर जोर-जोर से दबाने लगी। हम दोनों इतने उत्तेजित हो गए थे कि एक दूसरे में समाने के लिए बेसुध हो पड़े थे। तृप्ति ने मुझे बिस्तर पर गिरा कर मेरे तने हुए लन्ड को चूसना शुरू कर दिया और अपने थूक से लपेटते हुए उसे चूस-चूस कर उसे चिकना बना दिया। उसके बाद उसने मुझे पीठ के बल सीधा लेटा दिया और ऐसा करने के बाद मेरी रानी ने मेरे खड़े लिंग को अपनी गांड के छेद के अंदर लेते हुए उसको आहिस्ता से हौले-हौले भीतर लेते हुए बैठ गई और धीरे-धीरे ऊपर नीचे हो कर लपालप ... लप-लप की आवाज करते हुए मेरे लिंग का भोज अपनी गांड को कराने लगी। मेरी हुस्न परी बीवी के गोरे गुलाबी स्तन मेरे सामने उचकते हुए एक अलग ही दृश्य पैदा कर रहे थे। अतः मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें दबाकर मसलना शुरू कर दिया। उसके आकर्षक शरीर ने मुझे इतना दीवाना बनाया कि मैं जाहिल और हवस के प्यासे मर्द की तरह उसके स्तनों को नोंचने लगा। तृप्ति ने सिसकारियां भरते हुए अपने स्तनों को मेरे मुंह पर जोर डालते हुए दबाया और अपना एक स्तन मेरे मुंह में दे दिया। इसका अर्थ यह था कि अब तृप्ति की जोरदार चुदाई चालू हो गई और तेज पट-पट की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी। करीब 15 से 20 मिनट की चुदाई के बाद मैं तृप्ति की गांड में ही झड़ गया। दोनों बेसुध होकर एक दूसरे की बांहों में गिर गए और पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।