09-08-2019, 03:44 PM
अब हम तीनों की खड़े-खड़े थ्रीसम चुदाई शुरू हो चुकी थी, कभी श्लोक के हाथ दुखते तो मैं तृप्ति की गांड के नीचे हाथ लगा कर उसे ऊपर नीचे करता। कभी मेरे हाथ दर्द करने लगते तो श्लोक सीमा को उठा उठा कर हमारे लिंग पर दबाता। सीमा ने उत्तेजना में श्लोक के कंधे पर जोरदार काट लिया उसका मुंह उसके कंधे को काटे हुए ही था।
तृप्ति इस चुदाई से अनजान अपने बेड पर पड़ी हुई थी।
श्लोक और मैं एक बार फिर एक ही औरत के दोनों छिद्रों में अपना लिंग घुसा कर एक दूसरे के लिंग पर अपने अपने लिंग की रगड़ महसूस कर रहे थे। अब सीमा भी जोरदार सिसकारियां भरने लगी। सीमा की चूत की चिकनाई हमारे लिंग पर रेंगने लगी थी। तीनों ने इस अवस्था में जोरदार मजा लिया किंतु सहज महसूस नहीं होने के कारण हमने सीमा को अपनी गोद में से थोड़ी देर बाद उतार दिया।
अब मैं बाथटब के किनारे पर बैठ गया, सीमा घोड़ी बनकर मेरे लिंग को मुंह में लेने लगी। पीछे से श्लोक ने आकर उसकी चूत में उसका लिंग डाल दिया और जोरदार झटके देने लगा। अब सीमा अपनी चूत में लिंग खाते हुए मेरे लिंग को चूस रही थी, श्लोक के जोरदार झटके मुझे सीमा के मुंह के जरिए अपने लिंग पर महसूस हो रहे थे। थोड़ी देर बाद श्लोक बाथटब पर बैठ गया, सीमा ने उसका लिंग अपने मुंह में ले लिया तथा घोड़ी बनी हुई सीमा की गांड में मैंने अपना लंड पेल कर उसकी गांड की चुदाई की। इस तरह बारी-बारी से हमने सीमा को चोदा और उससे अपना लिंग चुसवाया। सीमा भी मस्त होकर हमारा लिंग चूस रही थी तथा अपने पिछवाड़े से जोरदार झटके हमारे लिंग पर देकर हमारे लिंग का स्वागत कर रही थी।
फिर हम बाथरुम से बेड पर चले गए जहां तृप्ति अपने आप को साफ कर रही थी। हमें बाहर आता देख तृप्ति बाथरूम में घुस गई। शायद उसे मूत्र त्याग करना था। बेड पर सीमा श्लोक और मेरा द्वंद्व शुरू हुआ, हमने उसी अवस्था में सीमा को चोदा जिस अवस्था में तृप्ति को चोदा था। श्लोक ने नीचे लेट कर सीमा की गांड में अपना लिंग डाला तथा मैंने सामने से आ कर सीमा की चूत में अपना लंड डाला तथा जोरदार चुदाई शुरू की। सीमा ने अति उत्तेजना के साथ उचक उचक कर हमारे लिंगों का स्वागत किया तथा अपनी चूत से नदिया बहा कर यह प्रदर्शित किया कि वह भी उत्तेजना और मजे लेने में तृप्ति से बिल्कुल कम नहीं है। जहां तृप्ति इस तरह की चुदाई में उम्फ़ ... उन्फ़ ... की आवाज निकाल रही थी, वहीं सीमा फक मी हार्ड ... फक मी हार्ड ... की आवाज निकाल रही थी। उसकी इस उत्तेजना भरी बातों से मैंने उत्तेजित होकर उसी की चूत के पानी में सना हुआ मेरा लिंग बीच बीच में उसके मुंह में भी डाल दिया लेकिन उसने बिना किसी ना नुकुर के साथ मजे से चूसा।
श्लोक और मेरे जोरदार झटकों से जब सीमा स्खलित होकर निढाल गिरने लगी। तब पहले मैं स्खलित हुआ था और बाद में श्लोक ने अपने आप को स्खलित करके ठंडा किया। हम तीनों बेड पर बेहद थके हुए निढाल होकर गिर गए।
इतने में तृप्ति बाथरूम से निकल कर आई और बोली- जल्दी तैयार हो जाओ बहनचोदो ... आई एम फीलिंग हॉर्नी।
लेकिन हम तृप्ति के इस निमंत्रण के लिए तैयार नहीं थे, उसे तो काफी समय मिला था आराम करने का लेकिन हमने तो लगातार मेहनत की थी।
इस पर श्लोक ने तृप्ति से कहा- आ जाओ दीदी, हमारे साथ बेड पर लेट जाओ, अगर मेरे लिंग ने साथ दिया तो आपकी मनोकामना पूरा कर देंगे।
सीमा ने अपना हाथ लंबा करके कमरे की लाइट को बिल्कुल धीमा कर दिया। हम चारों बेड पर पूर्ण रूप से नग्न एक दूसरे पर अपने हाथ पांव रखकर चिपके हुए लेटे थे। इस खतरनाक चुदाई ने मेरी नींद को तो बहुत गहरा कर दिया था कि अब तो आंखें खोलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी अतः मैं तो सो गया। जहां तक मुझे पता था बाकी तीनों भी सो गए थे।
बेहद गहरी नींद आने के बाद बेड के हिलने से मेरी नींद हल्की सी टूटी तो देखा कि हमें सोये हुए करीब 2 घंटे हो गए थे। करवट बदल कर देखा कि बेड क्यों हिल रहा है तो पाया कि श्लोक तृप्ति की चुदाई कर रहा है और तृप्ति अपनी टांगें उठा कर श्लोक के धक्के खा रही है। गजब की वासना भरी थी तृप्ति में ... जिसे उसका सगा भाई श्लोक जोरदार तेज झटकों वाली चुदाई से शांत कर रहा था।
मेरी सलहज सीमा गहरी नींद में सोई हुई थी, मैंने उसे उठाना उचित नहीं समझा। क्योंकि हमारे सोते वक्त तृप्ति की सेक्स करने की इच्छा हो गई थी इसलिए श्लोक ने भी अपनी नींद टूटने पर तृप्ति की मनोकामना पूर्ण की।
इस तरह सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो गई थी।
तृप्ति इस चुदाई से अनजान अपने बेड पर पड़ी हुई थी।
श्लोक और मैं एक बार फिर एक ही औरत के दोनों छिद्रों में अपना लिंग घुसा कर एक दूसरे के लिंग पर अपने अपने लिंग की रगड़ महसूस कर रहे थे। अब सीमा भी जोरदार सिसकारियां भरने लगी। सीमा की चूत की चिकनाई हमारे लिंग पर रेंगने लगी थी। तीनों ने इस अवस्था में जोरदार मजा लिया किंतु सहज महसूस नहीं होने के कारण हमने सीमा को अपनी गोद में से थोड़ी देर बाद उतार दिया।
अब मैं बाथटब के किनारे पर बैठ गया, सीमा घोड़ी बनकर मेरे लिंग को मुंह में लेने लगी। पीछे से श्लोक ने आकर उसकी चूत में उसका लिंग डाल दिया और जोरदार झटके देने लगा। अब सीमा अपनी चूत में लिंग खाते हुए मेरे लिंग को चूस रही थी, श्लोक के जोरदार झटके मुझे सीमा के मुंह के जरिए अपने लिंग पर महसूस हो रहे थे। थोड़ी देर बाद श्लोक बाथटब पर बैठ गया, सीमा ने उसका लिंग अपने मुंह में ले लिया तथा घोड़ी बनी हुई सीमा की गांड में मैंने अपना लंड पेल कर उसकी गांड की चुदाई की। इस तरह बारी-बारी से हमने सीमा को चोदा और उससे अपना लिंग चुसवाया। सीमा भी मस्त होकर हमारा लिंग चूस रही थी तथा अपने पिछवाड़े से जोरदार झटके हमारे लिंग पर देकर हमारे लिंग का स्वागत कर रही थी।
फिर हम बाथरुम से बेड पर चले गए जहां तृप्ति अपने आप को साफ कर रही थी। हमें बाहर आता देख तृप्ति बाथरूम में घुस गई। शायद उसे मूत्र त्याग करना था। बेड पर सीमा श्लोक और मेरा द्वंद्व शुरू हुआ, हमने उसी अवस्था में सीमा को चोदा जिस अवस्था में तृप्ति को चोदा था। श्लोक ने नीचे लेट कर सीमा की गांड में अपना लिंग डाला तथा मैंने सामने से आ कर सीमा की चूत में अपना लंड डाला तथा जोरदार चुदाई शुरू की। सीमा ने अति उत्तेजना के साथ उचक उचक कर हमारे लिंगों का स्वागत किया तथा अपनी चूत से नदिया बहा कर यह प्रदर्शित किया कि वह भी उत्तेजना और मजे लेने में तृप्ति से बिल्कुल कम नहीं है। जहां तृप्ति इस तरह की चुदाई में उम्फ़ ... उन्फ़ ... की आवाज निकाल रही थी, वहीं सीमा फक मी हार्ड ... फक मी हार्ड ... की आवाज निकाल रही थी। उसकी इस उत्तेजना भरी बातों से मैंने उत्तेजित होकर उसी की चूत के पानी में सना हुआ मेरा लिंग बीच बीच में उसके मुंह में भी डाल दिया लेकिन उसने बिना किसी ना नुकुर के साथ मजे से चूसा।
श्लोक और मेरे जोरदार झटकों से जब सीमा स्खलित होकर निढाल गिरने लगी। तब पहले मैं स्खलित हुआ था और बाद में श्लोक ने अपने आप को स्खलित करके ठंडा किया। हम तीनों बेड पर बेहद थके हुए निढाल होकर गिर गए।
इतने में तृप्ति बाथरूम से निकल कर आई और बोली- जल्दी तैयार हो जाओ बहनचोदो ... आई एम फीलिंग हॉर्नी।
लेकिन हम तृप्ति के इस निमंत्रण के लिए तैयार नहीं थे, उसे तो काफी समय मिला था आराम करने का लेकिन हमने तो लगातार मेहनत की थी।
इस पर श्लोक ने तृप्ति से कहा- आ जाओ दीदी, हमारे साथ बेड पर लेट जाओ, अगर मेरे लिंग ने साथ दिया तो आपकी मनोकामना पूरा कर देंगे।
सीमा ने अपना हाथ लंबा करके कमरे की लाइट को बिल्कुल धीमा कर दिया। हम चारों बेड पर पूर्ण रूप से नग्न एक दूसरे पर अपने हाथ पांव रखकर चिपके हुए लेटे थे। इस खतरनाक चुदाई ने मेरी नींद को तो बहुत गहरा कर दिया था कि अब तो आंखें खोलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी अतः मैं तो सो गया। जहां तक मुझे पता था बाकी तीनों भी सो गए थे।
बेहद गहरी नींद आने के बाद बेड के हिलने से मेरी नींद हल्की सी टूटी तो देखा कि हमें सोये हुए करीब 2 घंटे हो गए थे। करवट बदल कर देखा कि बेड क्यों हिल रहा है तो पाया कि श्लोक तृप्ति की चुदाई कर रहा है और तृप्ति अपनी टांगें उठा कर श्लोक के धक्के खा रही है। गजब की वासना भरी थी तृप्ति में ... जिसे उसका सगा भाई श्लोक जोरदार तेज झटकों वाली चुदाई से शांत कर रहा था।
मेरी सलहज सीमा गहरी नींद में सोई हुई थी, मैंने उसे उठाना उचित नहीं समझा। क्योंकि हमारे सोते वक्त तृप्ति की सेक्स करने की इच्छा हो गई थी इसलिए श्लोक ने भी अपनी नींद टूटने पर तृप्ति की मनोकामना पूर्ण की।
इस तरह सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो गई थी।