04-08-2019, 01:38 AM
हालांकि रोहन कमरे के बाहर बेचैन हो रहा था अंदर जाने के लिए लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वास्तव में उसकी मां कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगी होकर कमरे में घूम रही है। अगर इस बात का उसे पता चल जाता तो शायद उसका लंड पानी छोड़ देता क्योंकि जिस इसलिए मैं उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और वह भी अपनी मां के ही चलते तो जाहिर सी बात थी कि अगर ऐसी अवस्था में वह अपनी मां को संपूर्ण व्यवस्था की हालत में दर्शन करने का तो उसके लंड से पानी छुट ही जाता। वह अंदर देखने का जुगाड़ बना रहा था लेकिन कोई भी जुगाड़ उसका सफल नहीं हो पा रहा था,,,,। अभी भी उसके पेंट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था।,,,,,
और कमरे के अंदर सुगंधा अलमारी खोलकर अपनी पैंटी ढूंढ रही थी।,,,,, और आलमारी का ड्राइवर खोल कर वह अपनी गुलाबी रंग की पैंटी बाहर निकाल ली और वापस अलमारी को बंद कर दी,,,,, सुगंधा बिस्तर के करीब आकर फर्श पर गिरी हुई पेंटिं को उठा कर बिस्तर के नीचे छुपा दी,,,, और अपनी गुलाबी रंग की पैंटी को इधर उधर घुमा कर देखने सकी गुलाबी रंग की पैंटी सुगंधा को बेहद पसंद थी और अलमारी में गुलाबी रंग की ढेर सारी पैंटी रखी हुई थी हालांकि अब यह शौक उसे ज्यादा पसंद नहीं था क्योंकि अपने अंतर्वस्त्र,,,, दिखाने का शोक अपने पति के बेरुखेपन की वजह से खत्म हो चुका था।,, लेकिन आज अपनी फुली हुई बुर को देखकर ना जाने कि उसका मन गुलाबी रंग की पैंटी पहनने को हो गया था।
इसलिए वह नीचे की तरफ झुक कर अपने एक पैर को पेंटी के एक छेद में डाल दी और अगला पैर उठा कर दूसरे छेद में डाल दी,,,, रोहन का जुगाड़ सफल होता नजर आने लगा। उसे कमरे की खिड़की के बारे में याद आ गया क्योंकि हमेशा हल्की सी खुली हुई रहती थी और वह मन में प्रार्थना करके उस खिड़की की तरफ आगे बढ़ा कि आज भी वह हल्की सी खुली हुई हो,,, ओ खिड़की के पास पहुंचते ही वह खुशी से झूम उठा जैसे कि सच में उसकी प्रार्थना स्वीकार कर दी गई हो,,,, खिड़की आज भी हल्की सी खुली हुई थी रोहन तुरंत खुली हुई खिड़की के पल्ले की ओट से अंदर की तरफ झांकने लगा,,,,, पहले तो वो अंदर इधर उधर नजर दौड़ा या उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था अंदर ट्यूबलाइट की रोशनी फैली हुई थी कुछ ना नजर आने पर उसे निराशा महसूस होने लगी लेकिन तभी बात नहीं टूटा बदलकर देखने की कोशिश करने लगा तो बिस्तर के पास उसकी मां खड़ी नजर आ गई
सुगंधा की पीठ रोहन की तरफ थी रोहन की नजरें अपनी मां की पेट की तरह की गई और जब उसकी नजरें उसकी मां के हाथों की हरकत की तरफ पहुंची तब तक देर हो चुकी थी,,, पेंटी पहनकर वाह अपनी साड़ी को नीचे गिरा चुकी थी,,,, रोहन को बस उसकी मां की गोरी गोरी हल्किसी पिंडलिया ही नजर आई,,,
लेकिन इसका आभास उसे हो गया था कि उसकी मां ने साड़ी को नीचे की तरफ छोडी थी,,,, जिससे उसे समझ में आने लगा कि उसकी मां ने कुछ तो जरूर कर रही थी हो सकता है कि वह नंगी हुई हो या कुछ और भी करती हो लेकिन नंगी होने का आभास होते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,
रोहन की नजर एक बार फिर से साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर पहुंच गई और उस अंग को कल्पना करके लगना वस्था में देखने की कोशिश करने लगा लेकिन रोहन अभी भी साड़ी के अंदर के अंग के नग्न वास्तविकता से अनजान था वह नहीं जानता था कि औरत नंगी होने पर कैसी दिखती है उसके अंग कीस इस तरह के नजर आते हैं,,,,,
रोहन अपनी मां को देखते हुए कुछ और कल्पना कर पाता इससे पहले ही उसकी मां दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और रोहन तुरंत भाग कर कमरे से दूर चला गया इसके बाद सुगंधा खुद ही अपने लिए और अपने बेटे के लिए खाना निकाल कर लेकर आई और दोनों बिना बात किए भोजन करने लगे सुगंधा इस वजह से खामोश होकर खाना खा रही थी कि उसके जेहन में अभी भी टूटी हुई झोपड़ी के अंदर के संभोगनिक दृश्य घूम रहे थे,,,,
और रोहन शांत होकर इसलिए खाना खा रहा था कि आज सुबह-सुबह बेला की झूलती हुई चुचीयो को देखकर,,, कामोत्तेजना वश अपनी मां को देखने का नजरिया बदल गया था।
और कमरे के अंदर सुगंधा अलमारी खोलकर अपनी पैंटी ढूंढ रही थी।,,,,, और आलमारी का ड्राइवर खोल कर वह अपनी गुलाबी रंग की पैंटी बाहर निकाल ली और वापस अलमारी को बंद कर दी,,,,, सुगंधा बिस्तर के करीब आकर फर्श पर गिरी हुई पेंटिं को उठा कर बिस्तर के नीचे छुपा दी,,,, और अपनी गुलाबी रंग की पैंटी को इधर उधर घुमा कर देखने सकी गुलाबी रंग की पैंटी सुगंधा को बेहद पसंद थी और अलमारी में गुलाबी रंग की ढेर सारी पैंटी रखी हुई थी हालांकि अब यह शौक उसे ज्यादा पसंद नहीं था क्योंकि अपने अंतर्वस्त्र,,,, दिखाने का शोक अपने पति के बेरुखेपन की वजह से खत्म हो चुका था।,, लेकिन आज अपनी फुली हुई बुर को देखकर ना जाने कि उसका मन गुलाबी रंग की पैंटी पहनने को हो गया था।
इसलिए वह नीचे की तरफ झुक कर अपने एक पैर को पेंटी के एक छेद में डाल दी और अगला पैर उठा कर दूसरे छेद में डाल दी,,,, रोहन का जुगाड़ सफल होता नजर आने लगा। उसे कमरे की खिड़की के बारे में याद आ गया क्योंकि हमेशा हल्की सी खुली हुई रहती थी और वह मन में प्रार्थना करके उस खिड़की की तरफ आगे बढ़ा कि आज भी वह हल्की सी खुली हुई हो,,, ओ खिड़की के पास पहुंचते ही वह खुशी से झूम उठा जैसे कि सच में उसकी प्रार्थना स्वीकार कर दी गई हो,,,, खिड़की आज भी हल्की सी खुली हुई थी रोहन तुरंत खुली हुई खिड़की के पल्ले की ओट से अंदर की तरफ झांकने लगा,,,,, पहले तो वो अंदर इधर उधर नजर दौड़ा या उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था अंदर ट्यूबलाइट की रोशनी फैली हुई थी कुछ ना नजर आने पर उसे निराशा महसूस होने लगी लेकिन तभी बात नहीं टूटा बदलकर देखने की कोशिश करने लगा तो बिस्तर के पास उसकी मां खड़ी नजर आ गई
सुगंधा की पीठ रोहन की तरफ थी रोहन की नजरें अपनी मां की पेट की तरह की गई और जब उसकी नजरें उसकी मां के हाथों की हरकत की तरफ पहुंची तब तक देर हो चुकी थी,,, पेंटी पहनकर वाह अपनी साड़ी को नीचे गिरा चुकी थी,,,, रोहन को बस उसकी मां की गोरी गोरी हल्किसी पिंडलिया ही नजर आई,,,
लेकिन इसका आभास उसे हो गया था कि उसकी मां ने साड़ी को नीचे की तरफ छोडी थी,,,, जिससे उसे समझ में आने लगा कि उसकी मां ने कुछ तो जरूर कर रही थी हो सकता है कि वह नंगी हुई हो या कुछ और भी करती हो लेकिन नंगी होने का आभास होते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,
रोहन की नजर एक बार फिर से साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर पहुंच गई और उस अंग को कल्पना करके लगना वस्था में देखने की कोशिश करने लगा लेकिन रोहन अभी भी साड़ी के अंदर के अंग के नग्न वास्तविकता से अनजान था वह नहीं जानता था कि औरत नंगी होने पर कैसी दिखती है उसके अंग कीस इस तरह के नजर आते हैं,,,,,
रोहन अपनी मां को देखते हुए कुछ और कल्पना कर पाता इससे पहले ही उसकी मां दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और रोहन तुरंत भाग कर कमरे से दूर चला गया इसके बाद सुगंधा खुद ही अपने लिए और अपने बेटे के लिए खाना निकाल कर लेकर आई और दोनों बिना बात किए भोजन करने लगे सुगंधा इस वजह से खामोश होकर खाना खा रही थी कि उसके जेहन में अभी भी टूटी हुई झोपड़ी के अंदर के संभोगनिक दृश्य घूम रहे थे,,,,
और रोहन शांत होकर इसलिए खाना खा रहा था कि आज सुबह-सुबह बेला की झूलती हुई चुचीयो को देखकर,,, कामोत्तेजना वश अपनी मां को देखने का नजरिया बदल गया था।