24-07-2019, 12:00 PM
Update 44
सुबह नाश्ते पर है किसी को मेरी गर्दन पर काटने के निशान, मेरे होंठों पर सूखे भूरे पदार्थ के निशान और मेरे बालों में सूखे वीर्य के थक्के साफ़ दिख रहे होंगें। दोनों मामाओं को जब नानू , दादी और दादू ने घूर कर देखा तो दोनों ऐसे भोले बन गए जैसे मक्खन भी न पिघले उनके मुँह में।
दादी ने मुझसे प्यार से पूछा , "नेहा बिटिया तुझे नहलाये हुए तो मुझे वर्ष बीत गए। चल आज तुझे बचपने जैसे नहला दूँ। "
मुझे चोरी चोरी दादी माँ के नंग्न सौंदर्य की याद बिलकुल ताज़ा थीं। उनके शरीर को पास से देखने और छूने का लालच से मैं बेचैन हो उठी।
दादू दौड़ने के लिए चले गए और नानू मम्मी के साथ गोल्फ खेलने चल दिए। पापा ने बुआ को खरीदारी और बाहर खाना खिलाने के लिए शहर चल पड़े। मेरे दोनों मामाओं ने पारो को बुलवाया मालिश के लिए। मैंने मन ही मन छोटी से प्रार्थना की पारो चाची के लिए। आजकल मेरे दोनों मामा बौराये सांड की तरह थे।
मैं दादी के साथ उनके सुइट की तरफ चल पड़ी। दादी ने मुझसे कोई भी सवाल नहीं पूछा। जैसे ही उन्होंने मेरी सोने वाली टी-शर्ट उतारी तो लाल नीले थक्के से मेरा बदन भरा हुआ था। दादी ने मुस्कुरा कर कहा ,"बेटी तेरे मामू तुझे देख कर सब्र खो देतें हैं। "
मैं शर्मा गयी, "दादी नानू भी। "
दादी ने अपना सोने वाला गाउन उतार फेंका। उनका उज्जवल सौंदर्य अब सिर्फ एक तंग सफ़ेद कच्छी में छुपा हुआ था। उनकी कांघें घने बालों से भरी थीं। और उनकी झांटें ना केवल उनकी कच्छी से बाहर झांक रहीं थीं बल्कि उनकी जांघों तक फैली थीं।
"नेहा बेटी नहाने से पहले कुछ करना है ?" दादी ने मुस्करा के पूछा
मैंने फुसफुसा कर मन की बात बता दी दादी को।दादी ने मेरे मुँह के ऊपर अपनी चूत लगा कर भर दिया मेरा मुँह अपने सुनहरी शर्बत से। मैं गटक गयी दादी के अमृत को। दादी ने दस बार भरा मेरा नदीदा मुँह और मैं सटक गयी हर बून्द दादी के कीमती सुनहरी शर्बत की। दादी ने मेरे सुनहरी शर्बत को भी उतने चाव से पिया तो मैं मानों स्वर्ग में पहुँच गयी।
फिर हुआ मेरे और दादी के बीच वोह आदान प्रदान जिसे काफी लोग विकृत कहें पर हम दोनों को तो वह बिलकुल प्राकृतिक और नैसगिक लगा। पर मैंने दक्षता से दादी को मन भर हलवा परोसा। दादी ने भी मुझे मेरा मन भर हलवा परोसा। फिर मुझे दांत साफ़ कर दादी ने टब भर के अपनी गोद में बिठा लिया। दादी ने पानी में सुगन्धित नमक और एलो-वीरा का तेल मिला दिया था। दादी के हाथ मेरे चूचियों के ऊपर मचल रहे थे। दादी के कहने पर मैंने शुरू से सारो अपनी संसर्ग की यात्रा सूना दी।बड़े मामू, सुरेश चाचू, अकबर चाचू, राजू काका और भूरा, रामू चाचू और रज्जो और बाकि सब कुछ।
दादी के हाथ मेरी जांघों के बीच मचल रहे थे, "बेटी पहली बार वाकई बहुत खास होती है।तेरे बड़े मामू बहुत ही सौभाग्यशाली हैं। "
मैं शर्मा के सर हिलने लगी ,"दादी आपका पहली बार किसने किया था ?"
"क्या किया था मेरी बेटी खुल कर बोलै न ,"दादी ने मेरे भग-शिश्न को मसलते हुए कहा।
"दादी माँ आपकी पहली चुदाई किसने की थी ,"मैंने खुल कर पूछा।
"नेहा याद है तुझे मेरी बड़ी बहन के पति यजुवेंद्र सिंह की। शांति दीदी मुझसे छह साल बड़ी थीं। उनकी शादी तो पन्द्रह साल होते ही तय हो गयी थी पर उनका कॉलेज खत्म होने का इन्तिज़ार था,” दादी ने कहानी की शुरुआत की।
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सुबह नाश्ते पर है किसी को मेरी गर्दन पर काटने के निशान, मेरे होंठों पर सूखे भूरे पदार्थ के निशान और मेरे बालों में सूखे वीर्य के थक्के साफ़ दिख रहे होंगें। दोनों मामाओं को जब नानू , दादी और दादू ने घूर कर देखा तो दोनों ऐसे भोले बन गए जैसे मक्खन भी न पिघले उनके मुँह में।
दादी ने मुझसे प्यार से पूछा , "नेहा बिटिया तुझे नहलाये हुए तो मुझे वर्ष बीत गए। चल आज तुझे बचपने जैसे नहला दूँ। "
मुझे चोरी चोरी दादी माँ के नंग्न सौंदर्य की याद बिलकुल ताज़ा थीं। उनके शरीर को पास से देखने और छूने का लालच से मैं बेचैन हो उठी।
दादू दौड़ने के लिए चले गए और नानू मम्मी के साथ गोल्फ खेलने चल दिए। पापा ने बुआ को खरीदारी और बाहर खाना खिलाने के लिए शहर चल पड़े। मेरे दोनों मामाओं ने पारो को बुलवाया मालिश के लिए। मैंने मन ही मन छोटी से प्रार्थना की पारो चाची के लिए। आजकल मेरे दोनों मामा बौराये सांड की तरह थे।
मैं दादी के साथ उनके सुइट की तरफ चल पड़ी। दादी ने मुझसे कोई भी सवाल नहीं पूछा। जैसे ही उन्होंने मेरी सोने वाली टी-शर्ट उतारी तो लाल नीले थक्के से मेरा बदन भरा हुआ था। दादी ने मुस्कुरा कर कहा ,"बेटी तेरे मामू तुझे देख कर सब्र खो देतें हैं। "
मैं शर्मा गयी, "दादी नानू भी। "
दादी ने अपना सोने वाला गाउन उतार फेंका। उनका उज्जवल सौंदर्य अब सिर्फ एक तंग सफ़ेद कच्छी में छुपा हुआ था। उनकी कांघें घने बालों से भरी थीं। और उनकी झांटें ना केवल उनकी कच्छी से बाहर झांक रहीं थीं बल्कि उनकी जांघों तक फैली थीं।
"नेहा बेटी नहाने से पहले कुछ करना है ?" दादी ने मुस्करा के पूछा
मैंने फुसफुसा कर मन की बात बता दी दादी को।दादी ने मेरे मुँह के ऊपर अपनी चूत लगा कर भर दिया मेरा मुँह अपने सुनहरी शर्बत से। मैं गटक गयी दादी के अमृत को। दादी ने दस बार भरा मेरा नदीदा मुँह और मैं सटक गयी हर बून्द दादी के कीमती सुनहरी शर्बत की। दादी ने मेरे सुनहरी शर्बत को भी उतने चाव से पिया तो मैं मानों स्वर्ग में पहुँच गयी।
फिर हुआ मेरे और दादी के बीच वोह आदान प्रदान जिसे काफी लोग विकृत कहें पर हम दोनों को तो वह बिलकुल प्राकृतिक और नैसगिक लगा। पर मैंने दक्षता से दादी को मन भर हलवा परोसा। दादी ने भी मुझे मेरा मन भर हलवा परोसा। फिर मुझे दांत साफ़ कर दादी ने टब भर के अपनी गोद में बिठा लिया। दादी ने पानी में सुगन्धित नमक और एलो-वीरा का तेल मिला दिया था। दादी के हाथ मेरे चूचियों के ऊपर मचल रहे थे। दादी के कहने पर मैंने शुरू से सारो अपनी संसर्ग की यात्रा सूना दी।बड़े मामू, सुरेश चाचू, अकबर चाचू, राजू काका और भूरा, रामू चाचू और रज्जो और बाकि सब कुछ।
दादी के हाथ मेरी जांघों के बीच मचल रहे थे, "बेटी पहली बार वाकई बहुत खास होती है।तेरे बड़े मामू बहुत ही सौभाग्यशाली हैं। "
मैं शर्मा के सर हिलने लगी ,"दादी आपका पहली बार किसने किया था ?"
"क्या किया था मेरी बेटी खुल कर बोलै न ,"दादी ने मेरे भग-शिश्न को मसलते हुए कहा।
"दादी माँ आपकी पहली चुदाई किसने की थी ,"मैंने खुल कर पूछा।
"नेहा याद है तुझे मेरी बड़ी बहन के पति यजुवेंद्र सिंह की। शांति दीदी मुझसे छह साल बड़ी थीं। उनकी शादी तो पन्द्रह साल होते ही तय हो गयी थी पर उनका कॉलेज खत्म होने का इन्तिज़ार था,” दादी ने कहानी की शुरुआत की।
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