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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
#22

अब आगे बढ़ कर मैंने उससे बोला- तुम्हें क्या लग रहा है?

तो अंकिता मुझसे बोली- वही तो समझने की कोशिश कर रही हूँ कि मुझे क्यों सब कुछ गड़बड़ लग रहा है या फिर बात कुछ और है?

तो मैंने उसे बोला- जो तुम्हें लग रहा है पहले वो बोलो.. फिर अगर सही होगा तो मैं ‘हाँ’ या ‘न’ में जवाब दूँगा और तुम गलत हुई.. तो मैं बता दूँगा.. पर ये बात मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगी।

मैं उस दिन बहुत डर गया था.. घबराहट के मारे मेरे माथे से पसीना बहने लगा था। पर जैसे ही उसकी बात सुनी तो मेरी जान में जान आई और मैंने सोचा इसे अपनी बात पूरी कर लेने दो फिर तो मैं इसे हैंडल कर लूँगा।

मैं दरवाजा बंद करने लगा तो उसने कहा- ये क्यों किया तुमने?

मैंने बोला- ताकि कोई यहाँ न आए.. फिर मैं उसी बिस्तर पर जाकर बैठ गया.. और उससे बोला- मेरे पास न सही.. पर चाहो तो सामने वाले बिस्तर पर बैठ जाओ.।

तो अंकिता मुँह बनाते हुए बोली - ज्यादा हमदर्दी दिखाने की कोशिश मत करो..वो यह कहते हुए बैठ गई।

फिर मैंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- अच्छा अब बोलो.. तुम क्या सोच रही थी?

मैंने उसके हाथ की ओर इशारा करते हुए पूछा.. जिसमें वो शालिनी के रस से सनी चड्डी को पकड़े हुए थी।

तो अंकिता बोली- तुम कितने गंदे हो.. मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि तुम मौसी के अंदरूनी कपड़ों को लेकर सोओगे और ये सब करोगे..

तो मैं समझ गया कि ये अभी नादान है.. इसे ज्यादा कुछ नहीं पता लगा।

मैंने भी थोड़ी बेशर्मी दिखाते हुए बोला- क्या.. इस सबसे तुम्हारा क्या मतलब है?

तो वो चड्डी में लगे हुए रस को छूते हुए बोली- ये..

तो मैंने पूछा- तुम्हें नहीं पता कि ये क्या है.. तो तुम मुझे गन्दा कैसे कह सकती हो?

मुझे पता चल गया था कि वो क्या कहना चाह रही थी.. पर उसके मुँह से सुनने के लिए मैंने उसे उकसाया.. तो अंकिता बोली- बेवकूफ मत समझो मुझे.. आपको नहीं मालूम.. ये आपका स्पर्म है। मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि लड़कों का स्पर्म चिकना होता है.. और आपको मैं पहले दिन से नोटिस कर रही हूँ कि आप मेरी मौसी को मौका पाकर छेड़ते रहते हो।

तो मैंने बोला- और क्या?

अंकिता बोली- और.. अब तो हद ही हो गई.. आपने हम लोगों की गैरहाज़िरी का फायदा उठाते हुए मेरी मौसी पर गन्दी नज़र रखते हुए.. उनके अंडरगार्मेंट्स को अपने साथ लेकर सोने लगे और न जाने मन में क्या क्या करते होंगे.. जिससे आपका स्पर्म निकल जाता होगा..

तो मैंने उससे बोला- तुम्हें पता है.. स्पर्म कैसे निकलता है?

अंकिता बोली- हाँ.. गन्दा सोचने पर..

मैंने हंसकर बोला- उतनी देर से तुम भी तो मेरे बारे मैं गन्दा सोच रही हो.. तो क्या तुम्हारा भी ‘स्पर्म’ निकल रहा है?

अंकिता यह सुनकर बोली- अरे मेरे कहने का मतलब ऐसा नहीं है..

तो मैंने बोला- फिर कैसा है?

अंकिता बोली- मैं अभी जाती हूँ.. और बाहर जाकर सबको बताती हूँ.. फिर वही तुम्हें समझा देंगे..

ये कह उठने सी लगी तो मैंने उसके कंधे पर हाथ रखे और उसे बैठने को कहा और बोला- पहले ठीक से हमें समझ तो लें.. फिर जो मन में आए.. वो करना।

तो अंकिता बोली- नहीं.. अब मुझे कुछ नहीं समझना.. मैं आपको बहुत अच्छा समझती थी.. पर आप बिलकुल भी ठीक इंसान नहीं हो..

मैंने बोला- अभी सब समझा दूँगा.. पर पहले ये बताओ.. तुम मेरी किस सोच को गन्दा बोल रही हो।

तो अंकिता कुछ हकलाते हुऐ बोली- मैं सब सब समझती हूँ.. अब मैं छोटी नहीं रही.. जो तुम मुझे बेवकूफ बना लोगे.. तुमसे सिर्फ दो ही साल छोटी हूँ।

तो मैंने बोला- तुम्हें कुछ पता होता.. तो अब तक बता चुकी होतीं.।

तो अंकिता बोली- ज्यादा होशियारी मत दिखाओ.. जब मन में सेक्स करने के ख़याल आते हैं तो स्पर्म निकलता है और वही तुम करते थे।

मैंने बोला- ऐसा नहीं है।

तो अंकिता बोली- इस उम्र में ये सब होना बड़ी बात नहीं है.. पर मेरी मौसी को लेकर तुम्हारी नियत खराब हो गई.. ये बहुत गलत बात है.. मैं अभी मौसी को बताती हूँ।

तो मैंने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे बैठाया और उसी के बगल में बैठ गया और उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाया।

तो अंकिता बोली- ये तुम क्या कर रहे हैं?

तो मैंने बोला- अभी कहाँ कुछ किया.. और जब तक तुम ‘हाँ’ नहीं कहती.. मैं कुछ भी नहीं करूँगा।

तो अंकिता बोली- मैं समझी नहीं.. तुम कहना क्या चाहते हो?

तो मैंने उसे बुद्धू बनाते हुए बोला- प्लीज़ तुम किसी को भी ये बात मत बोलना.. मगर मेरी अब एक बात सुन लो.. फिर तुम अगर चाहोगी तो मैं यहाँ दोबारा आऊँगा.. वर्ना कभी भी अपनी शक्ल तक नहीं दिखाऊँगा।

तो अंकिता बोली- तुम पहले मेरे ऊपर से अपने गंदे हाथ हटाएं.. और यहाँ से जल्दी अपनी बात खत्म करके निकल जाएं।

फिर मैं उसे उल्लू बनाते हुए बोला- जो ये तुम्हारे हाथ में चड्डी है..

अंकिता बोली- हाँ तो?

तो मैंने बोला- यह मैं नहीं जानता था कि ये तुम्हारी है या आंटी की.. क्योंकि ये मुझे यहीं मिली थी।

तो अंकिता हैरानी से बोली- मतलब क्या है तुम्हारा? किसी की भी चड्डी में अपना रस गिरा देते हो?

तो मैंने बोला- नहीं.. ऐसा नहीं है..

अंकिता बोली- फिर कैसा है?

मैंने उससे बोला- मैंने जबसे तुमको देखा है.. मैं बस तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूँ और तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.. और मुझे सच में यह नहीं मालूम कि यह किसकी थी.. मैंने तो तुम्हारी समझ कर ही अपने पास रख ली थी और आंटी को लेकर मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। मैं तो सोते जागते बस तुम्हारे बारे में ही सोचता था.. इसीलिए मैंने सोने के लिए बिस्तर भी तुम्हारा ही पसंद किया था.. जिसमें मुझे तुम्हारे बदन की मदहोश कर महक अपना स्पर्म निकालने के लिए मजबूर कर देती थी.. और अगर तुम्हें ये गलत लगता है.. तो आज के बाद मैं तुम्हें कभी मुँह नहीं दिखाऊँगा.. पर मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ.. आगे तुम्हारी मर्ज़ी…

यह कहते हुए मैं शांत होकर उसके चेहरे के भावों को पढ़ने लगा।

उसका चेहरा साफ़ बता रहा था कि अब वो कोई हंगामा नहीं खड़ा करेगी.. तो मैंने फिर से उससे बोला- क्या तुम भी मुझे अपना सकती हो?

तो अंकिता उलझन में आ गई… जो कि उसके चेहरे पर दिख रही थी..

मैं उठा और उससे बोला- कोई जल्दी नहीं है.. आराम से सोचकर जवाब देना.. पर हाँ.. तब तक के लिए मैं तुम्हारे घर जरूर आऊँगा.. पर बाहर ही बाहर तक.. मुझे तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा।

मेरी बात समाप्त होते ही दरवाज़े पर शुभम आ गया और खटखटाने लगा तो अंकिता ने मुझे फिर से इशारे से बाथरूम का रास्ता दिखा दिया और मैं अपनी चड्डी की जगह जल्दबाज़ी में शालिनी की ले आया और बाथरूम अन्दर से बंद करके बाहर की आवाज़ सुनने लगा।

शुभम घर में घुसते ही पूछा- अनुज किधर है.. माँ ने बोला है कि कमरे में होगा?

तो अंकिता बोली- भैया.. वो तो नहा रहे हैं मैंने जब बाथरूम खोलना चाहा तो वो अन्दर से लॉक था.. फिर अन्दर से उसकी आवाज़ आई कि " मैं नहा रहा हूँ.." तब मैंने सोचा कि चलो तब तक कपड़ों को ही अलमारी में एक सा जमा दूँ।

शुभम बोला - तू बहुत पागल है.. इस तरह से पूरे बिस्तर में कपड़े फ़ैलाने की क्या जरुरत थी? चल जल्दी से निपटा ले।

तभी मैं अन्दर से निकला और मैंने शो करने के लिए शावर से थोड़ा नहा भी लिया था।

मैंने निकलते ही पूछा- अरे शुभम तुम्हारा एग्जाम कैसा रहा?

तो शुभम बोला - अच्छा रहा..

फिर मैंने शुभम से पूछा- यार नींद पूरी नहीं हुई क्या.. जो आते ही सो गए।

तो शुभम बोला- हाँ यार.. ट्रेन में सही से सो नहीं पाया।

तब तक आंटी ने आवाज़ देते हुए बोला- अरे सुनो सब.. तुम लोग आ जाओ.. नाश्ता रेडी है।

शुभम बोला- अंकिता पहले तू फ्रेश होने जाएगी या मैं जाऊँ?

वो अंकिता बोली- आप हो आइए.. मैं कपड़े रखकर जाऊंगी।

मैं मंद-मंद मुस्कुरा रहा था। तो अंकिता मेरी तरफ देखते हुए बोली- तब तक तुम नाश्ता करो , हम दोनों आते हैं।

अब मुझे यकीन हो गया था कि ये चिड़िया भले ही मेरे जाल में न फंसी हो.. पर यह बात ये किसी को भी नहीं बोलेगी..
यह सोचता हुआ बाहर आ गया।

शालिनी ने जैसे ही मुझे देखा कि मैं अकेला ही आ रहा हूँ.. तो वो जोर से बोलते हुए बोली- वो लोग कहाँ हैं?

फिर मेरे पास आई और बोली- कुछ अन्दर गड़बड़ तो नहीं हुई न?

तो मैंने उनके गालों को चूमते हुए कहा- आप परेशान न हों.. किसी को कुछ भी शक नहीं हुआ है।

ये कहते हुए मैं डाइनिंग टेबल पर बैठ गया।

.........................

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करीब 10 मिनट बाद शुभम आया और उसके कुछ ही देर बाद र
अंकिता भी आ गई।

हम बैठे.. इधर-उधर की बात करते-करते नाश्ता करने लगे , थोड़ी देर में मेरा और शुभम का नाश्ता हो चुका था.. तो हम उठे.. और हाथ धोकर करके सोफे पर बैठ गए बात करने के लिए , थोड़ी देर बात करने के बाद शुभम से मैं बोला - अच्छा भाई.. अब मैं चलता हूँ.. मुझे नहीं लगता कि अब मेरी यहाँ कोई जरूरत है। अब तो तुम आ गए हो.. वैसे तुमसे बिना पूछे तुम्हारे कमरे का इस्तेमाल करने के लिए सॉरी..

तब शुभम बोला- अरे तो कोई बात नहीं.. वैसे भी हमें बुरा नहीं लगा..?

तो मैंने मन में सोचा चलो भाई अब तो हो चुका जो होना था.. अब तो वो करना है.. जो बाकी है..
यही सोचते हुए मैंने अंकिता की आँखों में झांकते हुए कहा- वैसे यार सच बोलूँ इतना मज़ा तो कभी खुद के बिस्तर पर नहीं आया.. जितना यहाँ के बिस्तर में आया है.. यार वास्तव में मज़ा आ गया।

तो अंकिता का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसके चेहरे पर मुस्कान छा गई जो कि उसके अंतर्मन को दर्शाने के लिए काफी थी।

तब तक शुभम बोला- " ऐसा क्या हो गया " ?

मैं बोला- यार यहाँ सुबह जल्दी नहीं उठना पड़ता था न.. इसलिए..

मैंने बात को घुमा दिया.. ताकि शुभम अपना ज्यादा दिमाग न लगाए.. और मैंने बात यहीं ख़त्म कर दी।

फिर मैंने बोला- मुझे मेरा जवाब चाहिए.. जितनी जल्दी हो सके दो..

यह मेरा अंकिता से पूछा गया सवाल था.. जो कि कुछ देर पहले ही कमरे में मेरी और अंकिता के बहस से सम्बंधित था।

तो शुभम बोला- कैसा जवाब?

मैं बोला- अब मैं घर जा सकता हूँ..
तो वो बोला- थोड़ी देर में चले जाना..
मैं बोला- नहीं यार.. घर में भी देखना पड़ेगा.. दो दिन से यहीं हूँ.. आंटी के साथ.. अब तुम आ ही गए हो तो..

इतने में शालिनी आंटी पीछे से आते हुए बोलीं- मुझे बहुत खलेगा अनुज तुमने मेरा बहुत ध्यान रखा.. हो सके तो शाम को आ जाना.. तुम्हारी याद आएगी।

तो मैंने अंकिता की ओर देखते हुए बोला- " आंटी मैं नहीं आऊँगा " पर आपके साथ बिताए हुए एक एक पल मुझे बहुत याद आयेगा। क्योंकि आप ने मुझे बेटे से बढ़कर प्यार और सम्मान दिया।

( ये मैंने केवल अंकिता को झांसे में लेने के लिए तीर छोड़ा था.. जो कि ठीक निशाने पर लगा.. क्योंकि उसका चेहरा उतर चुका था )

इतने में शालिनी आंटी बोली- जब तुम मेरी इतनी प्रवाह करते हो तो.. क्या मेरे कहने पर आ नहीं सकते।

तो मैं बिना बोले ही अंकिता की आँखों में आँखे डालकर शांत होकर देखने लगा.. जिससे उसे ऐसा लगा.. जैसे मैं उससे ही पूछ रहा होऊँ कि मैं आऊँ या न आऊँ..

तब तक शुभम भी बोला- बोल ना , शाम को आ जा..

पर अब भी मुझे शांत देखकर अंकिता ने अपनी चुप्पी तोड़ी और बोली- क्यों न आप आज भी यहीं रुक जाएँ.. हम मिलकर मस्ती करेंगे और कल फिर आपको देर तक सोने को मिलेगा।

( सच बोलूँ तो उसकी ये बात सुन तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही न रहा। )

मेरी ख़ुशी को देखकर अंकिता बोली- देखना मौसी अनुज जरूर मान जायेंगे.. क्योंकि लगता है.. उनको सोने का बहुत शौक है और ये शौक वो अपने घर में पूरा नहीं कर पाते हैं।

तो शुभम बोला- हाँ यार.. चल अब जल्दी से ‘हाँ’ बोल दे.. सबकी जब यहीं इच्छा है.. तो तू आज रात यहीं रुक जा..

तो मैंने भी बोला- चलो ठीक है.. जैसी आप लोगों की इच्छा.. पर मुझे अभी घर जाना ही होगा। फिर शाम तक आ जाऊँगा।

( मैं मन में सोचने लगा कि मैंने तो सोचा था कि अब आना ही कम हो जाएगा.. पर यहाँ तो खुद अंकिता ही मुझे रुकने के लिए बोल रही है। ये मैं कैसे हाथ से जाने दूँ। )

इतने में अंकिता बोली- अब क्या सोच रहे हो.. तुम जल्दी से तुम अपने घर होकर आओ।

मैंने बोला- अब घर पर क्या बोलूँगा कि आज क्यों रुक रहा हूँ?
तो कोई कुछ बोलता.. उसके पहले ही अंकिता बोली- अरे आप परेशान न हों.. मैं खुद ही आंटी जी को फ़ोन करूँगी।
तो मैंने बोला- वो तो ठीक है.. पर बोलोगी क्या?

तब उसने जो बोला उसे सुन कर तो मैं हैरान हो गया और मुझे ऐसा लगा कि ये तो शालिनी से भी बड़ी चुदैल रंडी बनेगी। साली मेरे साथ नौटंकी कर रही थी। उसकी बात से केवल मैं ही हैरान नहीं था बल्कि शालिनी और शुभम भी बहुत हैरान थे।

उसने बोला ही कुछ ऐसा था कि आप अभी अपने घर जाओ और आंटी पूछें कि हम आए या नहीं.. तो तुम बोलना मैं जब निकला था.. तब तक तो वो लोग नहीं आए थे और उनका फ़ोन भी स्विच ऑफ था..। फिर आप अपने काम में लग जाना.. जैसे आप सही कह रहे हों और फिर 6 बजे के आस-पास मैं ही आपकी मम्मी को काॅल करूँगी और उनसे बोलूँगी कि आंटी अगर अनुज घर पर ही हों तो आप उनसे बोल दीजिएगा कि शुभम भैया आज नहीं आ पा रहे हैं। उनकी ट्रेन कैंसिल हो गई है.. तो वह कल घर पहुँच पायेंगे..

फिर अपनी बात को समाप्त करते हुए बोली- क्यों कैसा लगा सबको मेरा आईडिया?

तो सब ने एक साथ बोला- बहुत ही बढ़िया..

मैंने मन में सोचा- यार इससे तो संभल कर रहना पड़ेगा.. ये तो अपनी मौसी से भी ज्यादा चालाक लड़की है।

फिर हमने एक साथ बैठकर चाय पी। इस बीच अंकिता बार-बार मुझे ही घूरते हुए हँसे जा रही थी.. पर कुछ बोल नहीं रही थी। जबकि मैं उससे सुनना चाहता था कि वो ऐसा क्यों कर रही है.. पर मुझे कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।

इतने में शुभम उठा और वहीं सोफे के पास पड़े दीवान पर लेटते हुए बोला- मैं तो चला सोने.. अब मुझे कोई डिस्टर्ब न करना।
मैंने भी सोचा.. चलो अब तो बात करने का मौका मिल ही जाएगा।
मैं वक़्त की नजाकत को समझते हुए बोला- अच्छा शुभम.. तुम सो.. मैं चला अपने घर.. फिर शाम को मिलते हैं।

तो शुभम बोला- ठीक है।

आंटी भी वहीं बैठी थीं.. वो तुरंत बोलीं- शाम को क्या खाओगे?
तो मैंने उनके रसभरे चूची की ओर घूरते हुए कहा- जो आप पिला और खिला पाओ?
तो वो मेरी निगाहों को समझते हुए बोलीं- ठीक है.. देखते हैं फिर क्या बना सकती हुं।
फिर मैंने बोला- अब आप सोचती रहो.. शाम तक.. मैं चला अपनी पैकिंग करने.. घर जल्दी ही पहुँचना पड़ेगा।

तो अंकिता भी खुद ही बोली जैसे वो भी मुझसे बात करना चाह रही हो, खैर.. वो मुझसे बोली- हाँ अनुज चलिए मैं भी तुम्हारी कुछ मदद कर देती हूँ ताकि तुम्हारा ‘काम’ जल्दी हो जाए।

वो ‘काम’ तो ऐसे बोली थी.. जैसे कामशुत्र की प्रोफेसर हो और मुझे नीचे लिटाकर ही मेरा काम-तमाम कर देगी।
लेकिन फिर भी मैंने संभलते हुए बोला- अरे मैं कर लूँगा.. तुम परेशान न हो।
तो अंकिता बोली- अरे कोई बात नहीं.. आखिर मैं कब काम आऊँगी।

मैंने भी सोचा.. चलो ‘हाँ’ बोल दो.. नहीं तो ये काम-काम बोल कर मेरा काम बढ़ा देगी।
फिर मैंने भी मुस्कुराते हुए बोल दिया- ठीक है.. जैसी तेरी इच्छा..

हालांकि अभी मैं उससे दो अर्थी शब्दों में बात नहीं कर रहा था.. पर अपने नैनों के बाणों से उसके शरीर को जरूर छलनी कर रहा था। जिसे वो देखकर मुस्कुरा रही थी।

शायद वो ये समझ रही होगी कि मैं उसे प्यार करता हूँ। मुझे वो उसकी अदाओं और बातों से लगने भी लगा था ।

फिर वो अपने भारी चूतड़ों को मटकाते हुए मेरे आगे चलने लगी।
उसकी इस अदा से साफ़ लग रहा था कि वो मुझे ही अपनी अदाओं से मारने के लिए ऐसे चल रही है.. क्योंकि वो बार-बार साइड से देखने का प्रयास कर रही थी कि मेरी नज़र किधर है।

साला इधर मेरा लौड़ा इतना मचल गया था कि बस दिल तो यही कर रहा था कि अपने लौड़े को छुरी समान बना कर इसके दिल समान चूतड़ों में गाड़ कर ठूंस दूँ। पर मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था.. क्योंकि मेरे मन में ये भी ख़याल आ रहे थे कि हो सकता है कि अंकिता अभी कुंवारी हो.. और न भी हो..
पर यदि ये कुवांरी हुई.. तो सब गड़बड़ हो जाएगी और वैसे भी उसकी तरफ से लाइन क्लियर तो थी ही.. ये तो पक्का हो ही गया था कि आज नहीं तो कल इसको चोदकर मेरी इच्छा पूरी हो ही जाएगी।

फिर ये सब सोचते-सोचते हम दोनों कमरे में पहुँचे तो अंकिता बोली- अनुज तुम दरवाज़ा बंद कर दो ।
तो मैंने प्रश्नवाचक नज़रों से उसकी ओर देखा तो बोली- अरे तुम परेशान न हों.. मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ।
तो मैंने भी तुरंत ही सवाल दाग दिया- क्या मेरी तरह.. मेरी तरह.. लगा रखा है।

वो बिस्तर की ओर इशारा करते हुए बोली- यही.. जो आप दरवाज़ा बंद करके मेरे बिस्तर और मौसी की चड्डी से करते थे।

मैंने भी बोला- मैं कैसे समझाऊँ कि मुझे नहीं मालूम था कि वो तेरी मौसी की चड्डी है।
अंकिता तुरंत ही बोली- और ये बिस्तर..
मैंने बोला- हाँ.. ये तो मालूम था।
तो अंकिता बोली- बस यही तो मैं बोली कि आप दरवाज़ा बंद करो.. मैं तूम्हारी तरह तुमको मुठयानि नहीं करूँगी।

साली बोल तो ऐसे रही थी.. जैसे बोल रही हो कि अनुज आओ जल्दी से.. और मेरा चोद दो और मेरे शरीर को मसलते हुए कोई रहम न करना।
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Messages In This Thread
Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 18-04-2025, 02:37 PM
Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 13-10-2026, 08:09 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 14-10-2026, 06:40 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 17-10-2026, 03:10 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 17-10-2026, 03:15 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 18-10-2026, 03:15 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Raghu - 18-10-2026, 09:22 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 20-10-2026, 05:06 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 20-10-2026, 05:15 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 22-10-2026, 01:10 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 22-10-2026, 06:45 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 22-10-2026, 06:57 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 27-10-2026, 11:51 AM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 31-10-2026, 11:19 AM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 31-10-2026, 11:23 AM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 31-10-2026, 11:31 AM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Dhamakaindia108 - 31-10-2026, 11:52 AM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 10 hours ago
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 10 hours ago
Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 19-04-2025, 08:57 AM
Mother secret Affair episode 2 - by Puja3567853 - 19-04-2025, 10:01 PM
Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 20-04-2025, 10:20 AM



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