Yesterday, 01:42 PM
उधर पूजा के चले जाने के बाद माँ घर में आईं तो देखा कि उनके पतिदेव सोने की तैयारी में हैं।
शिल्पा ने धीरे से कमरे में प्रवेश किया और रसिक की तरफ देखते हुए बोली,
“पूजा के पापा, आज भी आपको जल्दी है सोने की?”
रसिक पलंग पर चादर ठीक करते हुए बोले,
“और नहीं तो क्या? सोने के समय पर सोना ही चाहिए। और यह सेहत के लिए भी अच्छा होता है शिल्पा। वैसे पूजा अभी दिखाई नहीं दे रही… कहाँ है वह?”
शिल्पा उनके करीब आई और उनकी कमर पर हाथ रखते हुए धीरे से बोली,
“आप तो घर आते ही सोने के लिए तैयार हो जाते हैं। कभी और कोई इच्छा होती ही नहीं आपको।”
रसिक ने उसकी हथेली को धीरे से हटाते हुए कहा,
“अरे, इतनी रात को अब क्या इच्छा होगी! वैसे भी अब हमें और कौन-सी इच्छाएँ रह गई हैं? उम्र भी तो कुछ है।” मैत्री पटेल का साहस।
शिल्पा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“अरे, क्या हम इतने बूढ़े हो गए कि अब सब इच्छाओं को मार ही देना चाहिए? या फिर उन्हें पैदा ही नहीं होने देना चाहिए? मैं यह कह रही थी कि आज पूजा उस बाबाजी के पास गई है। रात को देर से आएगी। उसके पति की आत्मा की शुद्धिकरण के लिए एक पूजा है। तो मैंने सोचा… आज तो मौका है। लेकिन आप तो आधी नींद में घूम रहे हैं। जैसे कोई नींद की गोली का नशा चढ़ गया हो।”
रसिक ने आश्चर्य से शिल्पा की तरफ देखा और बोले,
“अरे, पूजा को इतनी रात को वहाँ नहीं जाना चाहिए था। उसने तुमसे पूछा भी था क्या? और अगर पूछा तो तुमने जाने क्यों दिया?” उसने बात को बदलते हुए कहा।
शिल्पा ने एक मादक नजर से उनकी आँखों में देखते हुए कहा,
“अरे यार, उसके पति की आत्मा के लिए वह कुछ तो करेगी न! तुम इतने चिंतित क्यों हो जाते हो रसिक? बाबाजी बुरे आदमी नहीं हैं।”
रसिक ने माथा सिकोड़ते हुए कहा,
"अरे, ऐसा कुछ नहीं है। हो सकता है वो बाबाजी अच्छे हों, पर हमारी बेटी भी तो जवान और सुंदर है। नज़र किसी की भी खराब हो सकती है, कोई ऊपर-नीचे हो गया तो हम दुनिया को क्या मुँह दिखाएँगे? उसे जाने देने से पहले तुम्हें ये सब सोचना चाहिए। पता नहीं अब तक क्या हुआ है......फिर अपना मुँह गांड जैसा हो जाएगा। जवानी का कोई भरोसा नहीं, बाबाजी का भी.....आदमी बूढ़ा हो या जवान......छेद देखा नहीं की...." रसिक ने अपनी शंका दिखाई।
शिल्पा ने उनके करीब आकर धोती का किनारा हल्के से पकड़ लिया और बोली,
“मैंने यह सब पूजा से पूछ लिया है। मुझे विश्वास होने के बाद ही मैंने उसे जाने दिया है। तुम क्या समझते हो बेटी की चिंता मुझे नहीं होगी? और वैसे भी… अगर कुछ होता भी है तो जवान शरीर है, अपनी मनमानी करके ही छोड़ेगी। मुझे या आपसे पूछकर करेगी क्या? आपकी बात सही भी है हमें तो कुछ पता नहीं, भगवान् ना करे पर अब तक कुछ हो गया है तो भी हम क्या कर सकते है? जब तक कोई नतीजा सामने ना आये।” संपादिका फनलवर।
रसिक पलंग पर बैठ गए और थोड़ा झुँझलाते हुए बोले,
"कोई बात नहीं। मैं अब सोना चाहता हूँ। तुम्हें जानो, और तुम्हारी बेटी। तुम दोनों अच्छी तरह जानते हो कि मैं किसी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता। जो करना है करो। हम कौन होते हैं उसे रोकने वाले जो वह करना चाहती है? और मैं यह भी समझता हूँ शिल्पा, सबकी ज़रूरतें होती हैं, पूजा की भी....लेकिन तुम्हें सावधान रहना होगा....अगर कुछ गलत हुआ और उसका पेट फूल गया, तो एक और नई मुसीबत....बाकी, तुम दोनों जो भी करो, सोच-समझकर करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं भला और मेरा बिस्तर।"
शिल्पा भी पलंग पर बैठ गई। उसने धीरे से रसिक की जाँघ पर हाथ रखा और हल्की आवाज में बोली,
“तभी तो मैं कह रही हूँ… आज मौका है। चलो कुछ करते हैं। छेद तैयार है… डंडे से मार लो।”
रसिक ने उसकी तरफ देखा और थके स्वर में कहा,
“अरे रानी, अब हम उस वक्त में नहीं जीते जहाँ हर बार डंडा तैयार हो। और वैसे भी आज तो कोई मूड भी नहीं है। थक भी गया हूँ… और डंडा उठेगा भी नहीं। तुम भी सो जाओ। और हाँ, ध्यान रखना कि समय पर पूजा घर आ जाए। जैसी भी आये मुझे कोई तकलीफ नहीं, चाल देख लेना उसकी। जो भी करो तुम माँ-बेटी सोच समज के किया करना, मुझे उसमे भी कोई आपत्ति नहीं।”
शिल्पा कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से बोली,
“मूड तो बनाया जाता है रसिक… बनाया नहीं जाता क्या? सालों से एक ही बात… थक गया हूँ, मूड नहीं है। कभी सोचा है मेरी उम्र में औरत को क्या लगता होगा?”
रसिक ने आँखें बंद करते हुए सिर्फ इतना कहा,
“शिल्पा, प्लीज… आज नहीं। सो जाओ।” लेखन सहायिका सौनी पटेल।
शिल्पा ने लंबी साँस ली। उसने अपना हाथ वापस खींच लिया और धीरे से बोली,
“ठीक है… सो जाओ। लेकिन याद रखना… हर रात नींद नहीं आती किसी-किसी को।”
Xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
यही तक दोस्तों। अगली कड़ी अब दिवाली के बाद।
आप सब को मैत्री पटेल, सौनी पटेल और फनलवर की तरफ से दीपावली और नए साल की ढेर सारी शुभकामनाये।
जय भारत।।
शिल्पा ने धीरे से कमरे में प्रवेश किया और रसिक की तरफ देखते हुए बोली,
“पूजा के पापा, आज भी आपको जल्दी है सोने की?”
रसिक पलंग पर चादर ठीक करते हुए बोले,
“और नहीं तो क्या? सोने के समय पर सोना ही चाहिए। और यह सेहत के लिए भी अच्छा होता है शिल्पा। वैसे पूजा अभी दिखाई नहीं दे रही… कहाँ है वह?”
शिल्पा उनके करीब आई और उनकी कमर पर हाथ रखते हुए धीरे से बोली,
“आप तो घर आते ही सोने के लिए तैयार हो जाते हैं। कभी और कोई इच्छा होती ही नहीं आपको।”
रसिक ने उसकी हथेली को धीरे से हटाते हुए कहा,
“अरे, इतनी रात को अब क्या इच्छा होगी! वैसे भी अब हमें और कौन-सी इच्छाएँ रह गई हैं? उम्र भी तो कुछ है।” मैत्री पटेल का साहस।
शिल्पा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“अरे, क्या हम इतने बूढ़े हो गए कि अब सब इच्छाओं को मार ही देना चाहिए? या फिर उन्हें पैदा ही नहीं होने देना चाहिए? मैं यह कह रही थी कि आज पूजा उस बाबाजी के पास गई है। रात को देर से आएगी। उसके पति की आत्मा की शुद्धिकरण के लिए एक पूजा है। तो मैंने सोचा… आज तो मौका है। लेकिन आप तो आधी नींद में घूम रहे हैं। जैसे कोई नींद की गोली का नशा चढ़ गया हो।”
रसिक ने आश्चर्य से शिल्पा की तरफ देखा और बोले,
“अरे, पूजा को इतनी रात को वहाँ नहीं जाना चाहिए था। उसने तुमसे पूछा भी था क्या? और अगर पूछा तो तुमने जाने क्यों दिया?” उसने बात को बदलते हुए कहा।
शिल्पा ने एक मादक नजर से उनकी आँखों में देखते हुए कहा,
“अरे यार, उसके पति की आत्मा के लिए वह कुछ तो करेगी न! तुम इतने चिंतित क्यों हो जाते हो रसिक? बाबाजी बुरे आदमी नहीं हैं।”
रसिक ने माथा सिकोड़ते हुए कहा,
"अरे, ऐसा कुछ नहीं है। हो सकता है वो बाबाजी अच्छे हों, पर हमारी बेटी भी तो जवान और सुंदर है। नज़र किसी की भी खराब हो सकती है, कोई ऊपर-नीचे हो गया तो हम दुनिया को क्या मुँह दिखाएँगे? उसे जाने देने से पहले तुम्हें ये सब सोचना चाहिए। पता नहीं अब तक क्या हुआ है......फिर अपना मुँह गांड जैसा हो जाएगा। जवानी का कोई भरोसा नहीं, बाबाजी का भी.....आदमी बूढ़ा हो या जवान......छेद देखा नहीं की...." रसिक ने अपनी शंका दिखाई।
शिल्पा ने उनके करीब आकर धोती का किनारा हल्के से पकड़ लिया और बोली,
“मैंने यह सब पूजा से पूछ लिया है। मुझे विश्वास होने के बाद ही मैंने उसे जाने दिया है। तुम क्या समझते हो बेटी की चिंता मुझे नहीं होगी? और वैसे भी… अगर कुछ होता भी है तो जवान शरीर है, अपनी मनमानी करके ही छोड़ेगी। मुझे या आपसे पूछकर करेगी क्या? आपकी बात सही भी है हमें तो कुछ पता नहीं, भगवान् ना करे पर अब तक कुछ हो गया है तो भी हम क्या कर सकते है? जब तक कोई नतीजा सामने ना आये।” संपादिका फनलवर।
रसिक पलंग पर बैठ गए और थोड़ा झुँझलाते हुए बोले,
"कोई बात नहीं। मैं अब सोना चाहता हूँ। तुम्हें जानो, और तुम्हारी बेटी। तुम दोनों अच्छी तरह जानते हो कि मैं किसी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता। जो करना है करो। हम कौन होते हैं उसे रोकने वाले जो वह करना चाहती है? और मैं यह भी समझता हूँ शिल्पा, सबकी ज़रूरतें होती हैं, पूजा की भी....लेकिन तुम्हें सावधान रहना होगा....अगर कुछ गलत हुआ और उसका पेट फूल गया, तो एक और नई मुसीबत....बाकी, तुम दोनों जो भी करो, सोच-समझकर करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं भला और मेरा बिस्तर।"
शिल्पा भी पलंग पर बैठ गई। उसने धीरे से रसिक की जाँघ पर हाथ रखा और हल्की आवाज में बोली,
“तभी तो मैं कह रही हूँ… आज मौका है। चलो कुछ करते हैं। छेद तैयार है… डंडे से मार लो।”
रसिक ने उसकी तरफ देखा और थके स्वर में कहा,
“अरे रानी, अब हम उस वक्त में नहीं जीते जहाँ हर बार डंडा तैयार हो। और वैसे भी आज तो कोई मूड भी नहीं है। थक भी गया हूँ… और डंडा उठेगा भी नहीं। तुम भी सो जाओ। और हाँ, ध्यान रखना कि समय पर पूजा घर आ जाए। जैसी भी आये मुझे कोई तकलीफ नहीं, चाल देख लेना उसकी। जो भी करो तुम माँ-बेटी सोच समज के किया करना, मुझे उसमे भी कोई आपत्ति नहीं।”
शिल्पा कुछ पल चुप रही। फिर धीरे से बोली,
“मूड तो बनाया जाता है रसिक… बनाया नहीं जाता क्या? सालों से एक ही बात… थक गया हूँ, मूड नहीं है। कभी सोचा है मेरी उम्र में औरत को क्या लगता होगा?”
रसिक ने आँखें बंद करते हुए सिर्फ इतना कहा,
“शिल्पा, प्लीज… आज नहीं। सो जाओ।” लेखन सहायिका सौनी पटेल।
शिल्पा ने लंबी साँस ली। उसने अपना हाथ वापस खींच लिया और धीरे से बोली,
“ठीक है… सो जाओ। लेकिन याद रखना… हर रात नींद नहीं आती किसी-किसी को।”
Xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
यही तक दोस्तों। अगली कड़ी अब दिवाली के बाद।
आप सब को मैत्री पटेल, सौनी पटेल और फनलवर की तरफ से दीपावली और नए साल की ढेर सारी शुभकामनाये।
जय भारत।।



![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)