3 hours ago
दूसरे दिन सुबह बाबाजी कमरे में बैठे चाय पी रहे थे। उनके चेहरे पर एक संतुष्ट, शैतानी मुस्कान थी।
“चारा फेंक दिया था… और ऋचा ने उसे चुग भी लिया है। अब देखते हैं आज रात क्या करती है वो।”
उनके मन में ऋचा की छोटी-सी गुदाज चूचियाँ, भीगी टी-शर्ट से उभरे निप्पल और कल रात उसकी शर्माती हुई नजरें घूम रही थीं। लेकिन आज रात का इंतजार भी कम रोमांचक नहीं था।
आज रात पूजा आ रही थी… और बाबाजी ने उसके लिए एक खास सरप्राइज तैयार किया था।
शाम होते-होते बाबाजी मंदिर के काम निपटाकर बाजार की तरफ निकल पड़े। वैसे तो मंदिर में चढ़ावा और भक्तों के दान से उनका सब काम चल जाता था, लेकिन कुछ खास सामान के लिए उन्हें खुद जाना पड़ता था। कथाकार मैत्री पटेल।
वे सीधे इरफान की किराना दुकान पर पहुँचे।
“इरफान भाई… आटा, चावल, थोड़े मसाले और… वो वाली सूजी दे दो।”
दुकानदार इरफान का चेहरा आज उदास और परेशान दिख रहा था। बाबाजी ने तुरंत भाँप लिया।
“अरे इरफान भाई… क्या बात है? तुम आज कुछ ज्यादा ही उदास लग रहे हो। सब ठीक तो है ना?”
इरफान ने गहरी साँस ली और दुख भरे स्वर में बोला,
“क्या कहूँ बाबाजी जी… मेरी किस्मत ही खराब है। आप तो जानते हैं मेरी बेटी नूरी का… पिछले साल ही निकाह हुआ था। वो अक्सर अपने पति से लड़कर यहाँ आ जाती है। कल रात भी वही हुआ। पिछले एक साल में छठी बार है। मैं उसे समझा-बुझाकर वापस भेजता रहा हूँ, लेकिन इस बार वो बिल्कुल मना कर रही है। कहती है कि वो उसके लायक नहीं है। अब आप ही बताइए… मैं क्या करूँ?”
नूरी का नाम सुनते ही बाबाजी के शैतानी दिमाग में एक और चिंगारी सी जल उठी। एक और शीकार उसके लंड के लिए।
नूरी… गोरी, नाजुक, भर-भरी, बड़ी-बड़ी आँखों वाली। पूरी तरह ,., हुस्न की मिसाल। जब भी वह दुकान पर आती थी, बाबाजी से खूब गप्पें मारती थी। हँसते वक्त उसके गालों पर गड्ढे पड़ते थे और छाती का उभार साफ दिखता था।
बाबाजी कुछ पल चुप रहे, फिर बोले,
“देखो इरफान भाई… वैसे तो घरेलू मामलों में मेरा बोलना ठीक नहीं, लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं नूरी से बात कर सकता हूँ। शायद वो मुझ जैसे बाहरी आदमी से अपने दिल की बात खोलकर कह दे। और संभव है की उसकी कोई ऐसी बात बाहर आये और हमें कोई रास्ता मिल जाए।” सहायिका सौनी पटेल।
इरफान के चेहरे पर राहत छा गई।
“बाबाजी जी, अगर आप बात कर लें तो बहुत मेहरबानी होगी। वो अपनी अम्मी के इंतकाल के बाद मुझसे कुछ खुलकर बात नहीं करती। आपसे शायद बोल दे। आप उसे समझाइए… या जो भी समस्या है, उसका पता लगाइए। आपकी बात सही है, अगर वह ऐसा कुछ बोलती है जिस से हमें आगे का रास्ता दिख जाए और उसका घर बस जाए।”
बाबाजी ने अंदर ही अंदर मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
“ठीक है… कल शाम को उसे मेरे पास भेज दो। मैं उससे अकेले में बात कर लूँगा। इंशा अल्लाह, सब ठीक हो जाएगा।” और मन ही मन बुदबुदाया; “ तेरी यह मस्त माल जैसी बेटी को भेज देना, मेरा यह लंड तेरी बेटी की सब समस्याओं का समाधान कर देगा। एक बार तेरी यह बेटी मेरे लंड से खेल लेगी तो समज की तेरी यह बेटी की चूत उसकी पूरी जिंदगी के लिए मेरी चूत बन जायेगी और उसकी गांड भी।“
इरफान ने शुक्रिया अदा किया और सामान पैक करने लगा।
बाबाजी सामान लेकर वापस लौट रहे थे, लेकिन उनके दिमाग में अब तीन नाम घूम रहे थे - पूजा, ऋचा, मयूरी और नूरी।
चारो अलग-अलग उम्र, अलग-अलग स्वाद… लेकिन एक ही भूख। मेरे लंड को तसल्ली और मुझे चैन और क्या चाहिए।
*******************************************************.
मैत्री पटेल की पेशकश।
“चारा फेंक दिया था… और ऋचा ने उसे चुग भी लिया है। अब देखते हैं आज रात क्या करती है वो।”
उनके मन में ऋचा की छोटी-सी गुदाज चूचियाँ, भीगी टी-शर्ट से उभरे निप्पल और कल रात उसकी शर्माती हुई नजरें घूम रही थीं। लेकिन आज रात का इंतजार भी कम रोमांचक नहीं था।
आज रात पूजा आ रही थी… और बाबाजी ने उसके लिए एक खास सरप्राइज तैयार किया था।
शाम होते-होते बाबाजी मंदिर के काम निपटाकर बाजार की तरफ निकल पड़े। वैसे तो मंदिर में चढ़ावा और भक्तों के दान से उनका सब काम चल जाता था, लेकिन कुछ खास सामान के लिए उन्हें खुद जाना पड़ता था। कथाकार मैत्री पटेल।
वे सीधे इरफान की किराना दुकान पर पहुँचे।
“इरफान भाई… आटा, चावल, थोड़े मसाले और… वो वाली सूजी दे दो।”
दुकानदार इरफान का चेहरा आज उदास और परेशान दिख रहा था। बाबाजी ने तुरंत भाँप लिया।
“अरे इरफान भाई… क्या बात है? तुम आज कुछ ज्यादा ही उदास लग रहे हो। सब ठीक तो है ना?”
इरफान ने गहरी साँस ली और दुख भरे स्वर में बोला,
“क्या कहूँ बाबाजी जी… मेरी किस्मत ही खराब है। आप तो जानते हैं मेरी बेटी नूरी का… पिछले साल ही निकाह हुआ था। वो अक्सर अपने पति से लड़कर यहाँ आ जाती है। कल रात भी वही हुआ। पिछले एक साल में छठी बार है। मैं उसे समझा-बुझाकर वापस भेजता रहा हूँ, लेकिन इस बार वो बिल्कुल मना कर रही है। कहती है कि वो उसके लायक नहीं है। अब आप ही बताइए… मैं क्या करूँ?”
नूरी का नाम सुनते ही बाबाजी के शैतानी दिमाग में एक और चिंगारी सी जल उठी। एक और शीकार उसके लंड के लिए।
नूरी… गोरी, नाजुक, भर-भरी, बड़ी-बड़ी आँखों वाली। पूरी तरह ,., हुस्न की मिसाल। जब भी वह दुकान पर आती थी, बाबाजी से खूब गप्पें मारती थी। हँसते वक्त उसके गालों पर गड्ढे पड़ते थे और छाती का उभार साफ दिखता था।
बाबाजी कुछ पल चुप रहे, फिर बोले,
“देखो इरफान भाई… वैसे तो घरेलू मामलों में मेरा बोलना ठीक नहीं, लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं नूरी से बात कर सकता हूँ। शायद वो मुझ जैसे बाहरी आदमी से अपने दिल की बात खोलकर कह दे। और संभव है की उसकी कोई ऐसी बात बाहर आये और हमें कोई रास्ता मिल जाए।” सहायिका सौनी पटेल।
इरफान के चेहरे पर राहत छा गई।
“बाबाजी जी, अगर आप बात कर लें तो बहुत मेहरबानी होगी। वो अपनी अम्मी के इंतकाल के बाद मुझसे कुछ खुलकर बात नहीं करती। आपसे शायद बोल दे। आप उसे समझाइए… या जो भी समस्या है, उसका पता लगाइए। आपकी बात सही है, अगर वह ऐसा कुछ बोलती है जिस से हमें आगे का रास्ता दिख जाए और उसका घर बस जाए।”
बाबाजी ने अंदर ही अंदर मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
“ठीक है… कल शाम को उसे मेरे पास भेज दो। मैं उससे अकेले में बात कर लूँगा। इंशा अल्लाह, सब ठीक हो जाएगा।” और मन ही मन बुदबुदाया; “ तेरी यह मस्त माल जैसी बेटी को भेज देना, मेरा यह लंड तेरी बेटी की सब समस्याओं का समाधान कर देगा। एक बार तेरी यह बेटी मेरे लंड से खेल लेगी तो समज की तेरी यह बेटी की चूत उसकी पूरी जिंदगी के लिए मेरी चूत बन जायेगी और उसकी गांड भी।“
इरफान ने शुक्रिया अदा किया और सामान पैक करने लगा।
बाबाजी सामान लेकर वापस लौट रहे थे, लेकिन उनके दिमाग में अब तीन नाम घूम रहे थे - पूजा, ऋचा, मयूरी और नूरी।
चारो अलग-अलग उम्र, अलग-अलग स्वाद… लेकिन एक ही भूख। मेरे लंड को तसल्ली और मुझे चैन और क्या चाहिए।
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मैत्री पटेल की पेशकश।



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