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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
#17
अब...

तो आंटी ने मुझे कार की चाभी दी और बोली- मुझे तो चलानी आती नहीं.. अगर तुम्हें आती हो तो चलो.. नहीं तो फिर हम बाइक से ही चलते हैं।

तो मैंने आंटी से चाभी ली और बोला- मैं बहुत अच्छे से चला लेता हूँ..

तभी आंटी ने कुछ मुस्कुरा कर बोली- तुम बिस्तर पर तो अच्छा चलाते हो.. अब रोड पर भी देखती हूं । फिर उन्होंने एक आँख मारी और मैं और आंटी चल दिए।

जब हम दोनों कमरे से बाहर निकले तो अंकिता ने हमें दोनों को टोकते हुए बोली - आप दोनों कहीं बाहर जा रहे हो किया।

तभी शालिनी आंटी बोली - बहुत दिनों से कहीं बाहर नहीं निकली हुं तो आज मन किया कहीं बाहर जाने को , अगर तुझे भी चलना है तो चल सकती है।

अंकिता बोली - अच्छा ठीक है आप दोनों जाओ , मैं नहीं जाऊंगी क्योंकि आज कॉलेज में कुछ ज्यादा भागदौड़ की वजह से मैं थक गई हूं इस लिए घर पर रह कर आराम करूंगी।

फिर अंकिता अपने कमरे में चली गई।

हम दोनों अपार्टमेंट के नीचे आये और कार में सवार होकर , मैंने गाड़ी स्टार्ट की और चल दिया.. कुछ दूर पहुँचते ही आंटी मुझसे बोली- वैसे हम डिनर पर कहाँ चल रहे हैं?

तो मैंने बोला- जहाँ आप सही समझो।

आंटी बोली- अब तेरी पहली डेट को कुछ स्पेशल तरीके से बनानी है.. तो कुछ स्पेशल करते हैं। एक काम करो लैंडमार्क होटल चलते हैं।

तो मैंने बोला- इतना मेरा बजट नहीं है.. किसी सस्ते और अच्छे होटल में चलते हैं।

तो वो मेरे गालों पर प्यार भरी पप्पी देकर बोली- यार तू कितना भोला है.. मैं इसी कारण तुझ पर मरने लगी हूँ.. पर अभी मैं जैसा बोलती हूँ.. वैसा ही करो, नहीं तो मुझे बुरा लगेगा।

तो मैंने बोला- पर मेरी एक शर्त है।

शालिनी आंटी बोली- कैसी?

मैंने बोला- जो भी बिल होगा उसे मैं ही दूँगा..

शालिनी आंटी बोली - ये क्या.. मैं तुमसे प्यार करती हूँ.. ऐसा नहीं कर सकती.. मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है।

मैंने भी बोला- वो सब ठीक है.. पर मेरी इच्छा है कि मैं भी अपनी गर्ल-फ्रेण्ड को पहली डेट पर अपने पैसों पर ले जाऊँ।

मेरे मुँह से गर्ल-फ्रेण्ड शब्द अपने लिए सुनकर उसकी आँखों में खुशी के आंसू आ गए.. जिसे मैंने भांप लिया और बोला- देखो अब रोने न लगना.. नहीं तो चेहरा अच्छा न लगेगा और मेकअप भी ख़राब हो जाएगा।

मेरी इस प्रतिक्रिया पर उसने मेरे गालों पर एक चुम्मी जड़ दी और मेरा हाथ जो कि गेयर पर था उसके ऊपर अपना हाथ रखकर मुझसे प्यार भरी बातें करने लगी।

बातों ही बातों में कब उसने अपना हाथ उठा कर मेरी जांघ पर रख कर सहलाना चालू कर दिया.. मुझे पता ही न चला। ये सब कुछ मेरे साथ इतने रोमांटिक तरीके से मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

मुझे तब होश आया जब उनके हाथ ने मेरी जींस के ऊपर से ही मेरे लौड़े पर दाब देना चालू किया। यार क्या एहसास था.. बस यही लग रहा था कि ये समय यहीं रूक जाए..

खैर.. हम तब तक लैंडमार्क होटल के पास पहुँच गए तो मैंने उन्हें ठीक से बैठने के लिए बोला और होटल के एंट्री-गेट पर उन्हें उतार कर गाड़ी पार्किंग में लगाने चला गया।

वहाँ मुझे मेरे पापा के दोस्त अपनी फैमिली के साथ मिले तो मैं तो उनको देखकर डर ही गया था.. पर ‘थैंक गॉड’ कि वो वहाँ से जा रहे थे। किसी की बर्थ-डे पार्टी में आए थे.. उन्होंने मुझसे बात की, तो मैंने बोला- अरे मैं यहाँ बाजार में आया था बाहर पार्किंग फुल थी तो मेरे दोस्त ने बोला अन्दर ही पार्क कर दो.. उसकी ये नई कार है।

इसलिए तो वो बोले- ठीक किया.. अच्छा मैं चलता हूँ। वो इतना कहकर जब चले गए.. तब जाकर जान में जान आई। फिर जब मैं एंट्री-गेट पर पहुँचा तो शालिनी बोली- क्यों क्या हुआ.. बड़ा समय लगा दिया तुमने?

तो मैंने उसे पूरा वाकिया बता दिया.. जो उधर हुआ था।

तो शालिनी बोली- चलो बढ़िया हुआ..अब हम चलते हैं।

फिर हम लोग अन्दर गए और लिफ्ट से फ़ूड कोर्ट वाली फ्लोर पर पहुँच गए। वहाँ पर हम लोगों ने एक कपल सीट ली.. वैसे तो वीकेंड पर सीट मिलना कठिन रहता है.. पर उस दिन कोई ख़ास भीड़ नहीं थी।

फिर वेटर आया और मेनू देकर चला गया तो मैंने शालिनी से बोला- जो तुम्हें पसंद हो.. वो मंगवा लो। आज तुम्हारे मन का ही खाऊँगा।

तो शालिनी ने वेटर को बुलाया और उसे आर्डर दिया और आर्डर में पनीर टिक्का मंगवाया।
.....…...

हम लोग एक-दूसरे के हाथों को सहलाते हुए एक-दूसरे से बात कर रहे थे कि तभी वेटर पनीर टिक्का और कोल्ड ड्रिंक देकर चला गया.. जिसे हम लोगों ने खाया और एक-दूसरे को अपने हाथों से भी खिलाया।

तब तक हमारा खाना भी आ चुका था, फिर हम लोगों ने खाना खाया और मैं वाशरूम चला गया।

इसी बीच शालिनी आंटी ने मुझे सरप्राइज़ देने के लिए और मेरे इस दिन को यादगार बनाने के लिए वेटर को बुलाया और उसे शैम्पेन और कुछ स्नैक्स का आर्डर दिया और साथ ही यह भी बोला कि जैसे ही मैं अन्दर आऊँ.. वैसे ही ‘ये शाम मस्तानी.. मदहोश किए जाए..’ वाला गाना बजा देना।

इधर अब मुझे क्या पता कि शालिनी आंटी ने मेरे लिए क्या कर रखा है.. तो मैं जैसे ही अन्दर पहुँचा तो गाना चालू हो गया और रेस्टोरेंट की रोशनी बिल्कुल मद्धिम हो गई.. जो कि काफी रोमांटिक माहौल सा बना रही थी।

मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही न रहा और मैंने जाते ही शालिनी को ‘आई लव यू वेरी मच’ बोलकर चूम लिया।

जिससे वहाँ मौजूद सभी लोग क्लैपिंग करने लगे… उनको ये लग रहा था कि हम अपनी एनिवर्सरी सेलिब्रेट करने आए हैं.. और लगता भी क्यों नहीं.. आज शालिनी कमसिन जो लग रही थी।

उसने अपना फिगर काफी व्यवस्थित कर रखा था और साथ ही पार्लर वगैरह हर महीने जाती थी जिसकी वजह से उसे देखकर उसकी उम्र का पता लगाना काफी कठिन था।

वो बहुत ही आकर्षक शरीर की महिला थी.. फिर मैंने और उसने ‘चीयर्स’ के साथ शैम्पेन का एक-एक पैग पिया.. इसके पहले न ही कभी मैंने वाइन पी थी और न ही उसने..

खैर.. एक गिलास से कोई फर्क तो न पड़ा.. पर एक अजीब सा करेंट दोनों के शरीर में दौड़ गया।

खाना खाने के बाद शालिनी ने बिल पे किया और शालिनी ने वेटर को टिप भी दी। फिर हम दोनों लिफ्ट से नीचे आए और मैं उसे वहीं एंट्री-गेट पर छोड़कर कार लेने चला गया.. पर जब कार लेकर वापस आया तो शालिनी वहाँ नहीं थी।

मेरे दिमाग में तरह-तरह के सवाल आ रहे थे जिसकी वजह से मैं बहुत ही घबरा गया जिससे मेरा शरीर पसीने से भींग गया । मैंने चारों ओर नज़र दौड़ाई.. पर मुझे आंटी नजर नहीं आई।

मैंने उसका फ़ोन मिलाया जो कि नहीं उठा.. तीन-चार बार मिलाने के बाद भी जब फोन नहीं उठा.. तो मैं बहुत परेशान हो गया और सोचने लगा कि अब क्या करूँ.. कहाँ देखूँ..?

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.. मैं सोच में पड़ गया.. कहीं आंटी को नशा तो नहीं चढ़ गया.. कहीं उसका कोई फायदा न उठा ले.. तमाम तरह के विचार मन को सताने लगे।

फिर मैंने गाड़ी को रोड़ साइड पार्क किया और होटल के अन्दर चला गया। वहाँ एक रिसेप्शनिस्ट बैठी हुई थी तो मैंने उससे घबराते हुए पूछा- अभी क्या कोई लेडी अन्दर आई है?

तो वो मेरी घबराहट को देखकर हँसते हुए बोली- अरे सर आप थोड़ा रिलैक्स हो जाइए.. लगता है मैडम से आप कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं। यह कहते हुए उसने अपनी सीट पर रखे पानी के गिलास को मुझे दिया। पानी पीकर मैं भी थोड़ा नार्मल हुआ और उससे पूछा- वैसे वो है कहाँ?

तो वो बोली- मेम ने लगता है पहली बार पी थी.. जिसकी वजह से उनको उलटी और चक्कर आ रहे थे.. तो वो वाशरूम में हैं…

तो मैं भी उसकी हालत को समझते हुए वाशरूम जाने लगा ताकि उसकी कुछ मदद कर सकूँ.. पर मैं जैसे ही उधर की ओर बढ़ा तो उस लड़की ने बोला- सर वो कॉमन वाशरूम नहीं है आप लेडीज़ वाशरूम में नहीं जा सकते।

तो मैंने चिंता जताते हुए उससे पूछा- जब उसकी ऐसी हालत है तो उसे मदद की जरूरत होगी।

रिसेप्शनिस्ट बोली- आपको फ़िक्र करने की कोई जरुरत नहीं है.. मैडम के साथ लेडीज सर्वेंट भी उनकी हेल्प के लिए गई है। तब जाकर मुझे कुछ राहत की सांस मिली.. तब तक शालिनी वहाँ आ चुकी थी।

उसको देखते ही रिसेप्सनिस्ट लड़की ने बोला- मेम आप बहुत लकी हो जो आपको इतना चाहने वाला कोई मिला।

अब उसे क्या पता कि दाल में कितना नमक है..

खैर.. वो शालिनी को बोली- आपके अचानक अन्दर आ जाने पर सर बहुत परेशान से हो गए थे.. उनकी हालत तो देखने वाली थी.. लगता है आपको कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं।

तो शालिनी मुस्कुरा कर मेरे पास आई और मेरे हाथ पकड़कर बोली- तुम इतनी जल्दी क्यों परेशान हो जाते हो? तो मैंने बोला- तुम बिना बताए अचानक यहाँ आ गईं और मुझे नहीं दिखीं.. तो मेरा परेशान होना तो लाजिमी है।

उसने मुझसे ‘सॉरी’ बोलते हुए कहा- मेरी कंडीशन ही ऐसी हो गई थी कि मैं क्या करती? मेरी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?

फिर मैंने बोला- चलो कोई बात नहीं.. अब तुम ठीक हो न? तो आंटी ‘हाँ’ में सर हिलाया.. फिर हम दोनों बाहर आए और गेटमैन से गाड़ी मंगवाई और घर की ओर चल दिए।

रास्ते में मैंने उससे पूछा- शालिनी जब तुम शैम्पेन बर्दास्त नहीं कर सकती थीं तो पीने की क्या जरुरत थी?
तो शालिनी बोली- मैं तो बस तुम्हारे खुशी के लिए ऐसा कर रही थी.. जो आजकल की लड़कियाँ करती हैं। मैंने भी उसके इस प्यार का जवाब शालिनी ‘आई लव यू.. वेरी मच’ बोलकर दिया।

जिस पर आंटी के चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और आँखों में एक अजीब सी चमक साफ़ दिखने लगी।

शायद वो अपने तन-मन से मुझे बहुत चाहने लगी थी.. उसने भी अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और बोली- अनुज सच में.. तुम भी मुझसे प्यार तो करते हो न..

मैंने भी ‘हाँ’ में जवाब दिया.. तो बोली- अनुज मैं तुम्हें वो सारी खुशियाँ दूँगी जिसके तुम हकदार हो.. तुम जैसा चाहोगे मैं वैसा ही करुँगी.. पर मेरे लिए अपने दिल में हमेशा यूँ ही जगह बनाए रखना.. वरना मेरा क्या होगा।

यह कहते हुए वो अपने हाथों को मेरी जाँघों में फिराने लगी।

जिससे मेरा जोश बढ़ने लगा.. मुझे उसका इस तरह से छूना बहुत ही आनन्ददायक लग रहा था।

मैं भी उसके स्पर्श का मज़ा लेते हुए उससे रोमांटिक बातें करने लगा और घर जाने के लिए मैंने लम्बा वाला रास्ता पकड़ लिया ताकि इस रोमांटिक समय को और ज्यादा देर तक एन्जॉय किया जा सके।

मेरे लम्बे रास्ते की ओर गाड़ी घुमाते ही शालिनी मुस्कुराकर मुझसे बोली- क्या बात है.. तुमने लम्बा रास्ता क्यों पकड़ लिया?

तो मैंने उसे बताया- तुम्हारे साथ इस पल को और लम्बा बनाना चाहता था.. बस इसीलिए।

फिर शालिनी मेरी ओर थोड़ा खिसक आई और मेरे लौड़े को जींस के ऊपर से ही रगड़ने मसलने लगी। उसकी इस हरकत से मेरे कल्लू नवाब को एक पल बीतते ही होश आ गया और वो अन्दर ही अन्दर अकड़ने लगा.. मानो जिद कर रहा हो कि बस अब मुझे आज़ाद कर दो।
शालिनी ने जब मेरे लंड का कड़कपन अपनी हथेलियों में महसूस किया.. तो उसने मेरी जींस की ज़िप खोल दी और अन्दर हाथ घुसेड़ कर लंड को मुट्ठी में भरते हुए निकालने लगी.. पर इतनी आसानी से वो कहाँ निकलने वाला था।

इस वक़्त वो अपने पूरे होश ओ हवाश में खड़ा हो चुका था। वो उस वक़्त इतना सख्त हो चुका था कि मेरी वी-शेप की चड्डी में नहीं मुड़ पा रहा था।

शालिनी ने कई बार उसे दबा कर एक बगल से निकालने का प्रयास किया.. पर जब वो न निकाल पाई तो कहने लगी- अनुज क्या बात है.. आज यह मेरा हिरो लगता है मुझसे नाराज हो गया है.. देखो कितनी देर से मैं इसे देखने के लिए तड़प रही हूँ.. पर यह है कि निकल ही नहीं रहा है।

तो मैंने भी मज़ाक में बोल दिया- अरे ये तुम्हारा अनुज है न.. वो इसे निकाल देगा.. पर तुम्हें इसे मनाना खुद ही पड़ेगा।

तो आंटी मुस्कुराते हुए बोली- अरे फिर देर कैसी.. एक बार निकाल दो.. फिर देखो.. इसे मैं कैसे प्यार से मनाती हूँ।

तो मैंने भी गाड़ी एक बगल में ली और जींस का बटन खोलकर नीचे सरका दी और अपनी चड्डी को साइड से पकड़ कर अपने सरियानुमा लौड़े को हवा में लहरा दिया।

वो एकदम ऐसा अकड़ा हुआ किसी झंडे की तरह खड़ा था जिसे शालिनी आंटी देखकर अपनी मुस्कान न रोक सकी।

वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर उसे प्यार से सहलाने लगी और बोली- अरे वाह.. तू तो हर समय तैयार रहता है.. मुझसे नाराज हो गया था क्या?

जो मेरे निकालने पर नहीं निकल रहा था।

मैं फिर से गाड़ी चलाने लगा.. पर अब रफ़्तार धीमी थी.. ताकि कोई दिक्कत न हो।

उधर आंटी लगातार मेरे लौड़े को प्यार किए जा रही थी जो कि मेरे अन्दर की कामुकता को बढ़ने के लिए काफी था।

मैंने बोला- ये आज ऐसे नहीं मानेगा..

आंटी बोली - फिर कैसे?

मैंने बोला- अरे इसे प्यार करो.. चूमो-चाटो.. तब शायद कोई बात बन जाए।

मैंने भी शालिनी आंटी का दायां चूची दबा दिया.. जिसके लिए वो तैयार नहीं थी।

मेरे इस हमले से उसके मुँह से एक दर्द भरी ‘आह्ह्ह्ह्ह्’ निकल गई और उसने भी जवाब में मेरे लौड़े को कसकर दबा दिया.. जिससे मेरे भी मुख से एक ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई।

फिर उसने अपने होंठों से मेरे गाल पर चुम्बन किया और मेरे लौड़े के टोपे पर अपने होंठों को टिकाकर उसे चूसने लगी।

उसकी इतनी मादक चुसाई से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा.. मुझसे अब गाड़ी चलाना मुश्किल हो रहा था.. तो मैंने वहीं एक तरफ गाड़ी खड़ी कर दी और एसी ऑन रखा.. हेड-लाइट बंद कर दी.. ताकि कोई समझ न सके कि क्या हो रहा है और रात के समय वैसे भी भीड़ कम ही रहती है और जो होती भी है वो सिर्फ गाड़ी वालों की होती है.. तो कोई डरने वाली बात भी न थी।

फिर मैंने सीट थोड़ा पीछे को मोड़ दिया ताकि शालिनी और मैं आराम से मज़े ले सकें। फिर आंटी ने अपनी जुबान और होंठों से मेरे टोपे को थूक से नहलाते हुए दूसरे हाथ से मुठियाने लगी।
मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि मैं बता ही नहीं सकता.. ऐसा लग रहा था, जैसे मैं किसी जन्नत में सैर कर रहा हूँ।

फिर उसने धीरे-धीरे मेरे टोपे पर अपनी जुबान चलाई.. जैसे कोई बिल्ली दूध पी रही हो..उसकी यह हरकत इतनी कामुक थी कि मैंने भी उसके भौंपुओं को हाथ में थाम कर बजाने लगा।

उसकी भी चूत पनिया गई थी और वो आंटी से बोली- प्लीज़ अनुज मुझे यहीं चोद दो.. अब और नहीं रहा जाता मुझसे.. प्लीज़ बुझा दो मेरी आग..पर इस तरह खुले में मैंने चुदाई करने से मना कर दिया।

खैर वो मेरे समझाने पर मान भी गई थी।

फिर वो मेरे लौड़े को मुठियाते हुए इतने प्यार से चाट रही थी कि मुझे लगा कि अब मैं और ज्यादा देर टिकने वाला नहीं हूँ।
तो मैंने उससे बोला- जान.. बस अब और दूरी नहीं बची है.. मंजिल आने में.. थोड़ा तेज़ चलो।

तो वो मेरे इशारे को समझ गई और मेरे लौड़े को जहाँ तक उससे हो सका उतना मुँह के अन्दर तक ले जाकर अन्दर-बाहर करने लगी और अपने कोमल होंठों से मेरे लौड़े पर अपनी पकड़ मजबूत करने लगी.. जैसे मानो आज सारा रस चूस लेगी।

उसकी इस क्रिया से मेरे मुख से ‘सीइइइ.. आआह्ह’ की मादक सिसकारियाँ फूटने लगीं। इतना आनन्द आ रहा था कि मानो मेरा लौड़ा उसके मुख में नहीं बल्कि उसकी चूत में हो.. मैंने भी उसके सर को हाथों से सहलाना चालू कर दिया।

वो इतनी रफ़्तार से मुँह ऊपर-नीचे कर रही थी कि उसके मुँह से सिर्फ ‘गूंग्गगुगुगुं’ की ध्वनि आ रही थी जो कि मेरी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए काफी था।

फिर मैंने उसके सर को कसकर हाथों से पकड़ लिया और अपनी कमर को उठा-उठा कर उसके मुँह में लौड़ा ठूँसने लगा..

जिससे शालिनी की आँखें बाहर की ओर आने लगीं और देखते ही देखते मैंने अपना सारा माल उसके गले के नीचे उतार दिया।

माल निकल जाने के बाद मुझे कुछ होश आया तो मैंने अपनी पकड़ ढीली की..

तो शालिनी ने झट से मुँह हटाया और बोली- ऐसे भला कोई करता है.. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि थोड़ी देर और ऐसे ही चला तो मेरी जान ही निकल दोगे तुम.. । मैंने उसके गालों को चूमा और कहा- अपनी जान को भला मैं कैसे मार सकता हूँ शालिनी डार्लिंग.. थैंक्स।

आंटी बोली- अच्छा मेरी हालत खराब करके ‘थैंक्स’?

तो मैंने बोला- इसके लिए नहीं.. वो तो उसके लिए बोला जो तुमने आज मेरे लिए किया..

तो शालिनी आंटी बोली- जानू ये तो कुछ भी नहीं है.. आज तो मैं तुम्हारे लिए वो करने वाली हूँ जो आज तक मैंने कभी न किसी के साथ किया और न ही इस बारे में कभी सोची थी.. पर अनुज मैं अब वो तुम्हारे लिए करुँगी।

तो मैंने उसे बाँहों में भर लिया और उसकी गर्दन में चुम्बन करते हुए उसे ‘आई लव यू आई.. लव यू’ बोलने लगा। जिससे शालिनी का दर्द भरा चेहरा फिर से खिलखिलाने लगा और फिर उसने अपनी पर्स से रुमाल निकाल कर मेरे लौड़े अच्छे से पोंछ कर साफ़ किया।

फिर मुझे आँख मारते हुए कहने लगी- जानू अब जल्दी से घर चलो.. मुझे भी अब कुछ चाहिए.. तुम्हारा तो हो गया.. पर मेरे अन्दर की चीटियाँ अभी भी जिन्दा रेंग रही हैं।

तो मैंने उसके चुचियों मसलकर कहा- अरे आज रात तेरी सारी चींटियों को रौंद-रौंद कर ख़त्म कर दूँगा.. बस तू घर चल.. फिर देख। फिर मैंने उतर कर अपनी जींस वगैरह सही से बंद की और घर की ओर चल दिए।
करीब दस मिनट में हम अपार्टमेंट पहुँच गए.. वहाँ मैंने गार्ड को गाड़ी पार्क करने के लिए चाभी दी और शालिनी से बोला- आप चलो.. मैं चाभी लेकर आता हूँ।

गार्ड ने कुछ ही देर में गाड़ी पार्क की और चाभी दे कर मुझसे बोला- साहब जी देर बहुत लगा दी आने में?

तो मैंने बोला- हाँ.. वो आंटी के किसी रिश्तेदार के यहाँ पार्टी थी तो इसीलिए। मैंने उससे चाभी ली और कमरे की तरफ चल दिया

अन्दर जाते ही पहले मेन गेट को लॉक किया और आंटी को आवाज़ दी- आंटी कहाँ हो आप ?

तो बोली- मैं रसोई में हूँ।

तो मैंने बोला- अब वहाँ क्या कर रही हो आप ?

आंटी बोली- अरे तेरे साथ-साथ मुझे भी अब चाय का चस्का लग गया है और सर भी भारी-भारी सा लग रहा है.. तो मैंने सोचा चाय पी ली जाए।

मैंने भी बोला- चलो अब इस घर में भी मेरी आदतों को ध्यान में रखने वाला कोई हो गया है।

मैं मन ही मन खुश हो गया.. फिर मैंने सोफे पर रखे बैग से अपना लोअर निकाला और सारे कपड़े उतार कर सिर्फ टी-शर्ट और लोअर में आ गया।

अब मेरे बदन पर मात्र तीन ही कपड़े थे लोअर.. हाफ टी-शर्ट और वी-शेप की चड्डी..

फिर मैंने उससे पूछा- कार की चाभी कहाँ रखनी है?

तो आंटी बोली- अरे टीवी के नीचे वाली रैक में डाल दो।

जब मैं टीबी वाले कमरे की तरफ जा रहा था तो मैंने उस दौरान अंकिता के कमरे में झांक कर देखा वह सो रही थी।

फिर मैंने चाभी रखी और टीवी ऑन करके टीवी देखने बैठ गया।

तभी मेरी मम्मी का फोन आ गया.. मैंने रिसीव किया तो बोलीं- खाना वगैरह खा लिया?

तो मैंने बोला- हाँ मम्मी.. बस अभी ही खाया है.. वैसे इतनी रात को क्यों फोन किया?

तो बोलीं- बस ऐसे ही तेरे हाल लेने के लिए।

मैंने बोला- मम्मी इतनी फिक्र मत किया करो.. मैं यहाँ बिल्कुल अपने घर की तरह से ही रह रहा हूँ।

इतने में शालिनी आंटी आ गई और चाय देते हुए बोली- अरे शुभम से बात हो रही है क्या?

तो मैं बोला- नहीं मेरी मम्मी से..

शालिनी आंटी ने बोली - अरे मुझे भी बात करवाओ..

तो मैंने उनको फोन दिया और अब बस आंटी की ही आवाज़ सुन रहा था।

वो बोल रही थी- अरे भाभी जी, आप बिल्कुल चिंता न करें.. इसे भी घर ही समझें.. पर एक बात बताइए.. क्या ये चाय बहुत पीता है?

फिर शांत हो गई..

अब मम्मी ने जो भी बोला हो..

फिर आंटी बोली- अरे कोई नहीं जी.. इसी बहाने मैं भी पी लेती हूँ।

वो झूट ही बोल गई.. मुझे भी चाय पीने का शौक है.. इसलिए पूछा।

फिर आंटी कहने लगी- वैसे भी कल से अनुज को मिस करूँगी..

उधर से मम्मी ने कुछ कहा होगा। ‘अच्छा भाभी जी ( शालिनी आंटी को ) अब हम फोन रखते हैं।’

फिर आंटी ने फोन जैसे ही काटा तो मैंने उसे बाँहों में भरकर किस करते हुए बोलने लगा- झूठी.. मम्मी से झूठ क्यों बोली.. मुझे भी चाय पसंद है?

तो आंटी बोली- अरे तो उनसे क्या कहती.. अपने राजाबाबू से सीखी हूँ..

यह कहते हुए आंटी ने आँख मारकर लिपलॉक करके मेरे होंठों को जी भरकर चूसने लगी और मैं भी उसके चुचियों को कपड़ों के ऊपर से मसलने लगा.. जिससे उसकी ‘आह्ह्ह्हह्ह’ निकलने लगी और साँसे भी गति पकड़ने लगीं।

वो मुझसे बोली- जान श्ह्ह्ह्ह इतनी तेज़ से न भींचा करो.. दु:खता है..

फिर वो मुझसे अलग हुई तो मैंने लपककर उसके हाथों को पकड़ा.. तो आंटी बोली- रुको.. पहले कपड़े बदल लूँ और शुभम से भी बात कर लूँ.. फिर हम अपनी लीला में मन को रमायेंगे।

तो मैंने भी उसके बालों के क्लचर को खोल दिया और उसके सर को पकड़कर गर्दन पर चुम्बन करने लगा।

जिससे शालिनी आंटी का पारा चढ़ने लगा और वो ‘श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. बस.. बस्स्स्स्स.. आआह.. रुको भी..यार एक तो पहले ही आग लगी हुई है.. तुम और हवा दे रहे हो.. कपड़े चेंज कर लेने दो.. नहीं तो अगर ख़राब हुए तो अंकिता को बहुत जवाब देने पड़ेंगे..’

तो मैंने बोला- ये उसके कपड़े हैं?

आंटी बोली- नहीं.. पर मुझे इस तरह की ड्रेस वही दिलाती है.. प्लीज़ अब जाने दो.. बस 5 मिनट और मैं यूँ गई और आई.. तब तक तुम शुभम से बात करों , मैं बस अभी आई..

यह कहते हुए मेरे गालों पर चुम्मा देते हुए चली गई।

मैं मन ही मन बहुत खुश था कि आज मेरी एक अनचाही इच्छा भी पूरी होने वाली है।

तभी फिर मैंने ख्यालों से बाहर आते हुए शुभम को कॉल लगाया ।शुभम ने फोन उठाया और मेरे बोलने के पहले ही.. वो फ़ोन उठाते ही बोलने लगा - मम्मा आई मिस यू सो मच.. लव यू अभी मैं आपकी ही याद करके फोन मिलाने जा रहा था..

फिर जब वो शांत हुई तो कुछ देर मैं भी नहीं बोला.. तो वो हैलो.. हैलो.. करने लगी।

तो मैंने ‘उम्म्महह उम्म्ह्ह्ह्ह्ह’ करके हल्का सा खांसा.. तो वो समझ गया कि उसने क्या किया..

तो शुभम बोला - अरे सॉरी.. मैंने सोचा मम्मी हैं।

हम्म..’

‘और तुम भी कुछ नहीं बोले..’

तो मैंने बोला- अरे तुमने तो मौका ही नहीं दिया.. वर्ना मैं भी कुछ बोल देता।

तो शुभम बोला - अरे सॉरी मैं तो भूल ही गया था कि घर पर तुम भी हो..

थोड़ी देर में आंटी भी आ गई । फिर मैंने शुभम से ट्रेन की डिटेल पूछी और ‘हैप्पी जर्नी’ बोलकर शालिनी आंटी को फोन दे दिया।

फिर शुभम , आंटी से बात करने लगी । और इधर मेरे दिल में आंटी की गांड़ के छेद ने हलचल सी मचा रखी थी.. चड्डी के अन्दर ही मेरे लौड़े ने उसकी गांड़ की छेद को महसूस करके फड़फड़ाने लगा था.. जिसे आंटी बहुत गौर से देखकर मुस्कुरा रही थी.।

फिर आंटी बोली - अच्छा जब ट्रेन में बैठ जाना.. तो फोन करना ओके..

आंटी ने फोन काट दिया और मेरे पास आकर मेरे सामान को पकड़ते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी। जैसे उसे मेरे होंठों में शहद का रस मिल रहा हो.. फिर मैं भी उसके होंठों को उसी तरह चूसते हुए अपनी बाँहों में दबोच लिया .. इस समय उसने क्रीम कलर का बहुत ही हल्का और मुलायम सा गाउन पहन रखा था।
उसकी पीठ पर सहलाते समय ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने कुछ पहना ही न हो।

उसको मैं अपनी बाँहों में कसकर जकड़कर जोर-जोर से उसके होंठों का रस चूसने लगा। उसकी कठोर चूचियाँ मेरे सीने से रगड़कर साफ़ बयान कर रही थी कि आज वो भी परिंदों की तरह आज़ाद हैं.. इसी मसली-मसला के बीच एक बार फिर से फ़ोन की घंटी बजी।

आंटी ने शुभम की कॉल देखकर तुरंत ही फोन रिसीव किया।

शायद वो लोग ट्रेन में बैठ चुके थे। यही बताने के लिए फोन किया था.. पर उसके फ़ोन पर बात करते समय मैं उसके पीछे खड़ा होकर उसकी जुल्फों को एक तरफ करके.. उसकी गर्दन पर चाटते हुए चूमे जा रहा था.. जिससे आंटी की आवाज़ में कंपकंपी और आँखें बंद होने लगी थीं।

तभी आंटी अचानक बोली- अरे क्या हो गया..?

तो मैं भी रुक गया कि पता नहीं क्या हो गया.. उधर शुभम क्या बोल रहा था मुझे नहीं मालूम.. पर तभी आंटी बोली- मना करती हूँ.. ज्यादा उलटी-सीधी चीज़ न खाया करो.. लेकिन तुम मानते कहाँ हो..

ये कह कर उसने फोन काट दिया और मेरे पूछने पर आंटी ने बताया- शुभम को उलटी आने लगी है.. शुभम ने चाउमिन खाई थी.. जो कि शायद उसे सूट नहीं की..

मैंने पूछा- अब कैसी है?

तो आंटी बोली- अभी वो ट्रेन में वाशरूम गया है।

फिर मैंने आंटी से बोला- अरे कोई बात नहीं.. कभी-कभी हो जाता है.. कोई बड़ी बात नहीं.. इसी बहाने उसका पेट भी साफ़ हो जायेगा ।

ये कहते हुए मैंने उसके गले में हाथ डाला और कमरे की ओर चल दिया।

शालिनी मेरी पीठ सहलाते हुए बोली- क्या बात है.. आज बड़े मूड में लग रहे हो?

तो मैंने उसकी गांड दबाते हुए बोला- अरे आज मेरी ये इच्छा जो पूरी होने जा रही है..

तो शालिनी आंटी बोली- अरे तेरी इस ख़ुशी के आगे ये तो कुछ भी नहीं है.. मैं तो अब तुम्हें इतना चाहने लगी हूँ कि मैं तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. अनुज आई लव यू सो मच..

फिर मैंने उसके पीछे खड़े होकर उसकी गर्दन आगे की ओर झुकाई और उसकी रेशमी जुल्फों को उसके कंधों के एक तरफ करके आगे की ओर कर दिया और फिर उसके पीछे से ही खड़े होकर गर्दन पर चुम्बन करते हुए अपने हाथों को उसके बाजुओं के अगल-बगल से ले जाकर.. उसके चुचियों को सहलाते हुए रगड़ने लगा।

मेरी इस हरकत से शालिनी के अन्दर अजीब से नशे की लहर दौड़ गई और वो अपनी आँखें बंद करके अपने होंठों को दातों से चबाते हुए मदहोशी में सिसियाते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में बोलने लगी- श्ह्ह्ह ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म.. अनुज आई लव यू..

.......


मैं लगातार यूँ ही उसकी चूचियों को रगड़ते हुए उसके नुकीले निप्पल को मसले जा रहा था और जिससे उसकी आवाजों में मादकता के साथ-साथ कम्पन भी बढ़ने लगी थी।
उसी अवस्था में उसने अपना हाथ पीछे की ओर ले जाकर मेरे तने हुए लौड़े पर रख दिया और उस सहलाते हुए अपने सर को थोड़ा बाएं मोड़ कर मेरे माथे पर चुम्बन जड़ दी ।

उसकी इस क्रिया के जवाब में मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पर लगा दिया और एक बार पुनः एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे।

इतना आनन्द आ रहा था दोस्तो.. जिसकी कल्पना करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

उसके मुख से लगातार ‘उम्म्म फच उम्म्म्म्’ के नशीले स्वर निकल रहे थे और शालिनी अपने हाथों से मेरे लौड़े को सहलाते हुए अपनी गांड के छेद पर दबाकर रगड़ रही थी..
जिससे ऐसी अनुभूति हो रही थी कि मानो मेरे लौड़े से कह रही हो- जान आज तेरा यही घर है.. कर ले जी भर के अपनी इच्छा पूरी.. मैं तैयार हूँ.. तेरी इस दर्द भरी ठुकाई के लिए मैं तैयार हूं।

फिर मैंने उसके बदन की सुलगती आग को महसूस करते हुए उसके चुचियों को सहलाते हुए अपने हाथों को उसके आगे किए और रसीले चुचियों को ऊपर-नीचे सहलाते हुए उसके बदन से खेलने लगा। साथ ही मैं उसके कानों के बीच में चुम्बन करते हुए कान के निचले हिस्से को भी दांतों से रगड़ने लगा.. जिससे शालिनी के बदन में सिहरन दौड़ने लगी।

वो अपना काबू खोकर मेरे लौड़े को सख्ती के साथ भींचने लगी.. जिससे मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं उसकी गर्दन में अपने होंठों को गड़ाकर चूसने लगा।

मेरे इस वार को शायद शालिनी बर्दास्त न कर सकी और अपनी चूत की सब्र का बांध तोड़ते हुए, ‘अह्ह्ह आआह्ह्ह शह्ह्ह..’ की आवाज़ के साथ अपनी गांड को मेरे लौड़े पर दबाते हुए अपनी पीठ को मेरे सीने से चिपकाकर अपनी गर्दन दाएं-बाएं करने लगी।

दोस्तों इस अद्भुत आनन्द की घड़ी में मैंने महसूस किया जैसे मैं बिना पंख के ही आसमान में सबसे तेज़ उड़ रहा हूँ।

मुझे भी होश न रहा और मैं बिना लोअर उतारे ही उसकी गांड मैं लण्ड रगड़ते हुए झड़ गया।

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जब मुझे मेरे ही वीर्य की गर्म बूंदों का अहसास मेरी जाँघों पर हुआ.. तो मुझे होश आया और तब मुझे अहसास हुआ कि कोई इतना भी बहक सकता है।

और ऐसा हो भी क्यों न.. जब शालिनी जैसी कामुकता की देवी साथ हो।

मैं भी झड़ने के बाद कुछ देर बाद तक उसके कंधे पर सर रखकर उसके अपने होंठों से सटे गाल पर चुम्बन करते हुए उसके चुचियों को प्यार से मसले जा रहा था और मेरे मुख से ‘उम्म्म्म चप्प-चप्प’ के साथ बस यही शब्द निकल रहे थे, ‘ शालिनी आई लव यू.. आई लव यू सो मच..’

जिससे शालिनी के बदन की आग फिर से दहकने लगी और वो भी अपने होंठों को मेरे होंठों में देकर कहते हुए बोलने लगी, ‘आई लव यू टू.. आई लव यू टू.. जान मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है.. ले लो अपनी जानू की जिंदगी का रस.. आज तो मज़ा आ गया.. ऐसी घड़ी आज के पहले मेरे जीवन में कभी न आई..’

ये कहते हुए आंटी ने अपना हाथ फिर से पीछे ले जाकर मेरे लौड़े पर रख दिया। वो हाथ रखते ही बोली- अरे ये क्या आज तुम भी भावनाओं के सागर में बह गए क्या..?

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RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Raghu - 18-10-2026, 09:22 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 31-10-2026, 11:19 AM
Mother secret Affair episode 2 - by Puja3567853 - 19-04-2025, 10:01 PM



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