30-10-2026, 01:11 AM
**कल्लू:** *(मम्मी की उस दर्द भरी और उत्तेजित आवाज़ ने कल्लू के भीतर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया। उसे उनकी सिसकियाँ संगीत की तरह लग रही थीं। उसने उनकी पतली कमर को अपने हाथों से इतनी जोर से जकड़ा कि उनकी खाल पर उसकी उंगलियों के नीले निशान उभर आए। अब वह बिना रुके, एक मशीन की तरह पीछे से प्रहार करने लगा। हर धक्के के साथ मम्मी का पूरा शरीर आगे की ओर झुक जाता और फिर कल्लू उसे वापस अपनी तरफ खींच लेता।)*
"फट जाएगा? फटने दीजिए मालकिन! आज मैं आपको इतना भर दूँगा कि आप कुछ और सोच भी नहीं पाएंगी! आह्ह्ह... आपका ये पिछला हिस्सा... कितना टाइट है... कसम से जान निकाल देगा!"
**मम्मी:** *(हर धक्के के साथ उनका शरीर बिस्तर पर ऐसे उछल रहा था जैसे कोई कठपुतली हो। उनके सामने रखे मेज़ पर रखा पानी का गिलास थरथरा रहा था। उनकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था, लेकिन नीचे उठती हुई गर्मी उन्हें होश में रख रही थी। जब कल्लू का अंग अंदर जाकर उनके गर्भाशय ग्रीवा से टकराता, तो उनके गले से ऐसी आवाज़ निकलती जो खुद उनकी नहीं लगती थी।)*
"आह्ह्ह... नहीं! रुक जाओ... प्लीज़... बहुत ज़्यादा... आह्ह्ह! मेरे... मेरे कान बज रहे हैं... सब धुंधला दिख रहा है... कल्लू... तुम पागल हो गए हो... आह्ह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(उनकी इन बातों को सुनकर कल्लू के चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान फैल गई। उसे पता चल गया था कि मम्मी अब हार मान चुकी हैं, और यही जीत उसे सबसे ज़्यादा सुख दे रही थी। उसने अपनी गति और बढ़ा दी, अब उसके वार किसी जंगली जानवर की तरह बेतहाशा और हिंसक हो चुके थे। कमरे में सिर्फ मांस के आपस में टकराने की आवाज़ और मम्मी की बेदम होती चीखें सुनाई दे रही थीं।)*
"धुंधला दिख रहा है? दिखने दीजिए मालकिन! आज आपको दुनिया का कुछ भी दिखाई नहीं देना चाहिए... सिर्फ़ मुझे महसूस करना है! आह्ह्ह... देखो कैसे आपका ये सुंदर शरीर मेरे हर वार के साथ कांप रहा है!"
![[Image: 5.gif]](https://i.ibb.co/G6ZyPns/5.gif)
"फट जाएगा? फटने दीजिए मालकिन! आज मैं आपको इतना भर दूँगा कि आप कुछ और सोच भी नहीं पाएंगी! आह्ह्ह... आपका ये पिछला हिस्सा... कितना टाइट है... कसम से जान निकाल देगा!"
**मम्मी:** *(हर धक्के के साथ उनका शरीर बिस्तर पर ऐसे उछल रहा था जैसे कोई कठपुतली हो। उनके सामने रखे मेज़ पर रखा पानी का गिलास थरथरा रहा था। उनकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था, लेकिन नीचे उठती हुई गर्मी उन्हें होश में रख रही थी। जब कल्लू का अंग अंदर जाकर उनके गर्भाशय ग्रीवा से टकराता, तो उनके गले से ऐसी आवाज़ निकलती जो खुद उनकी नहीं लगती थी।)*
"आह्ह्ह... नहीं! रुक जाओ... प्लीज़... बहुत ज़्यादा... आह्ह्ह! मेरे... मेरे कान बज रहे हैं... सब धुंधला दिख रहा है... कल्लू... तुम पागल हो गए हो... आह्ह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(उनकी इन बातों को सुनकर कल्लू के चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान फैल गई। उसे पता चल गया था कि मम्मी अब हार मान चुकी हैं, और यही जीत उसे सबसे ज़्यादा सुख दे रही थी। उसने अपनी गति और बढ़ा दी, अब उसके वार किसी जंगली जानवर की तरह बेतहाशा और हिंसक हो चुके थे। कमरे में सिर्फ मांस के आपस में टकराने की आवाज़ और मम्मी की बेदम होती चीखें सुनाई दे रही थीं।)*
"धुंधला दिख रहा है? दिखने दीजिए मालकिन! आज आपको दुनिया का कुछ भी दिखाई नहीं देना चाहिए... सिर्फ़ मुझे महसूस करना है! आह्ह्ह... देखो कैसे आपका ये सुंदर शरीर मेरे हर वार के साथ कांप रहा है!"
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