28-10-2026, 01:49 PM
**कल्लू:** *(मम्मी की इन मीठी शिकायतों और उनकी कांपती हुई आवाज़ ने कल्लू के भीतर की वासना को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। उसने अपना चेहरा उनके स्तनों के बीच में रगड़ा और फिर अचानक ऊपर उठकर उनकी आँखों में देखा। उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी।)*
"शरारत तो अभी शुरू हुई है मालकिन... आपने तो अभी तक मेरा असली रूप देखा ही नहीं।"
*(कहते ही कल्लू ने अपना हाथ उनके पेट के नीचे ले जाकर उनकी कमर को कसकर पकड़ा और उन्हें अपनी तरफ खींचा। उसकी नज़रें अब उनके चेहरे से हटकर नीचे की ओर बढ़ रही थीं, जहाँ उनकी साड़ी के पल्लू के नीचे से उनकी जांघों की झलक दिख रही थी।)*
"अब मैं देखना चाहता हूँ कि आपके शरीर के बाकी हिस्सों में कितनी गर्मी है..."
**कल्लू:** *(मम्मी की दुविधा को भांपते हुए कल्लू ने अब और इंतज़ार करने की हिम्मत नहीं दिखाई। उसने अपनी उंगलियों का खेल जारी रखते हुए अपना दूसरा हाथ उनकी साड़ी के पल्लू की ओर बढ़ाया। जैसे ही उसने पल्लू को कंधे से नीचे गिराया, मम्मी के शरीर का एक बड़ा हिस्सा उसके सामने खुल गया।)*
*(उसकी नज़रें अब उनकी कमर पर बँधी पेटीकोट की गाँठ पर टिकी थीं। कल्लू ने बिना किसी हिचकिचाहट के पेटीकोट के किनारे को पकड़कर उसे नीचे की ओर खींचना शुरू कर दिया।)*
"देखिये मालकिन... आपका शरीर कितना बेताब है। इसे छुपाने की ज़रूरत नहीं है।"
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**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू ने पेटीकोट को नीचे की ओर खींचा, मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उन्होंने घबराहट में अपने दोनों हाथों से पेटीकोट को रोकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की पकड़ बहुत मजबूत थी। उनके चेहरे पर शर्म और उत्तेजना का मिला-जुला भाव था।)*
"नहीं कल्लू... रुको... अभी नहीं... अगर किसी ने देख लिया तो? मेरा अपमान हो जाएगा..."
*(लेकिन उनके शब्द उनकी क्रियाओं का साथ नहीं दे रहे थे। जैसे-जैसे पेटीकोट उनके नितंबों से नीचे खिसकता जा रहा था, उनकी सांसें तेज होती जा रही थीं।)*
**कल्लू:** *(मम्मी की छटपटाहट और डर को देखते हुए कल्लू थोड़ा और करीब आया। उसने उनके कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसों को उनकी गर्दन पर महसूस होने दिया और धीमी, मखमली आवाज़ में कहा।)*
"मालकिन, आप भी जानती हैं कि घर में इस वक्त मैं और आप हैं, तीसरा कोई नहीं है... तो फिर कैसे कोई देख लेगा? आप फालतू में ही डरी हुई हैं। बस खुद को ढीला छोड़ दीजिये और इस कामुक पल का पूरा मज़ा लीजिये। आज रात आपको सिर्फ अपनी खुशियों के बारे में सोचना है।"
*(कहते ही उसने पूरी ताकत से पेटीकोट को उनके पैरों के पास तक नीचे धकेल दिया, जिससे उनका निचला शरीर अब पूरी तरह से कल्लू की नज़रों के सामने था।)*
**मम्मी:** *(पेटीकोट के पूरी तरह नीचे गिरने और अपने निचले शरीर के खुले होने के अहसास से मम्मी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उन्होंने जल्दी से अपने हाथों से अपने अंगों को ढकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की नज़रों की गर्मी उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी। उनकी साँसें अब फूलने लगी थीं।)*
"तुम... तुम बहुत बदतमीज होते जा रहे हो कल्लू। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा नौकर मेरे साथ ऐसा करेगा..."
*(उनके स्वर में गुस्सा कम और समर्पण ज़्यादा झलक रहा था। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो बता रही थी कि वो मना तो कर रही हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस रोमांच का आनंद ले रही हैं।)*
**कल्लू:** *(उनकी इन बातों पर कल्लू खिलखिलाकर हंसा, एक ऐसी हंसी जिसमें शरारत और अधिकार दोनों थे। उसने धीरे से उनके हाथों को हटाकर उनके ऊपर रखे ताकि वो खुद को ढक न सकें।)*
"बदतमीजी ही तो असली मजा है मालकिन! और ये देखिए, आपके ये हाथ मुझे रोक नहीं पा रहे, बल्कि थरथरा रहे हैं। मतलब आपका दिल भी वही चाहता है जो मेरा चाह रहा है।"
*(उसने उनके उभरे हुए स्तनों की तरफ इशारा करते हुए आगे बढ़ाया और अपनी नज़रें उनकी आँखों में गड़ा दीं।)*
"मैं तो बस आपकी सेवा कर रहा हूँ। आपने ही तो सिखाया था कि हर काम पूरी शिद्दत से करना चाहिए। तो फिर आज इस बिस्तर पर पूरी शिद्दत से 'सेवा' क्यों न करूँ?"
**मम्मी:** *(कल्लू की तीखी और हाज़िरजवाबी सुनकर उनके होंठों पर एक फीकी सी मुस्कान आ गई जिसे वो दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं। उनकी आँखों में पानी भर आया था, मानो वो हार मान चुकी हों।)*
"तुम... तुम वाकई बड़े चालाक हो गए हो। पहले क्या कहते थे कि 'हाँ जी मालकिन', 'जी हुज़ूर'... और अब देखो तुम्हारी बातें!"
*(उन्होंने लंबी गहरी साँस ली और धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे खुद को उस प्रवाह में बह जाने की अनुमति दे रही हों।)*
"ठीक है कल्लू... जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा करो। वैसे भी अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है।"
**कल्लू:** *(मम्मी के समर्पण भरे शब्दों को सुनते ही कल्लू के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान फैल गई। उसने बिना देर किए अपना सिर नीचे झुकाया और धीरे-धीरे उनके खुले हुए संवेदनशील हिस्सों की ओर बढ़ा। उसकी उंगलियां उनके उभरे हुए कूल्हों को सहलाते हुए नीचे की ओर सरकने लगीं।)*
"अब देखना मालकिन... आज आपको कैसा सुकून मिलता है।"
*(उसके होंठ पहली बार उनकी कोमल त्वचा को छू रहे थे। जैसे ही उसकी गर्म जीभ ने उनकी चूत को स्पर्श किया, मम्मी के पूरे शरीर में बिजली जैसी लहर दौड़ गई। उनकी चीख गले में ही दब गई और उन्होंने बेड की चादर को कसकर पकड़ लिया।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... क... कल्लू... उफ़्फ़!"
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**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू की जीभ ने उनके सबसे संवेदनशील हिस्से को छुआ, उनके शरीर में एक जोरदार झटका सा लगा। उनकी कमर अपने आप धनुष की तरह तन गई और उन्होंने बेबस होकर अपना सिर पीछे की ओर झटक दिया। उनकी आँखें आधी बंद हो गईं और उनमें एक अकल्पनीय सुखद दर्द उभर आया।)*
"ओह्ह्ह खुदा... आह्ह्ह... कल्लू... ये... ये क्या कर रहे हो तुम... उफ़्फ़!"
*(उनकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी। जिस तरीके से कल्लू उनकी चूत को चाट रहा था, उससे उनके भीतर एक अनियंत्रित प्यास जाग रही थी। उनके पैर अब खुद ब खुद खुलने लगे थे ताकि कल्लू को और गहराई तक पहुँचने का मौका मिल सके।)*
**कल्लू:** *(मम्मी के पैरों के स्वतः ही खुल जाने और उनकी बेबस कराहों ने कल्लू के अंदर के जानवर को और भी उत्तेजित कर दिया। उसने अपनी पकड़ उनके जाँघों पर और मजबूत कर ली ताकि वो हिल न सकें, और अपनी जीभ की गति को और तेज कर दिया। वह जानबूझकर उनके क्लिटोरिस (clitoris) पर जोर-जोर से दबाव डाल रहा था।)*
"मालकिन... आपकी ये आवाज... ये कैसी आवाज निकाल रही है आपकी? लगता है आपको मेरी ये 'सेवा' बहुत पसंद आ रही है।"
*(उसने बीच में रुककर अपनी गीली जीभ से उनके उस हिस्से को लपेटा जहाँ से रस टपक रहा था, और फिर वापस उसी जुनून के साथ चाटना शुरू कर दिया।)*
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**मम्मी:** *(कल्लू की जीभ की उस तीव्र गति और उसके क्लिटोरिस पर पड़ रहे दबाव ने उन्हें पूरी तरह से सुन्न कर दिया था। उनका पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था और उनकी सांसें बहुत तेज चलने लगी थीं। जब कल्लू ने उनके रसों को महसूस किया, तो उनकी चीख निकल गई।)*
"आह्ह्ह! कल्लू... रुको... नहीं... मत रुको! उफ़्फ़... मेरे पेट में कुछ... कुछ अजीब सा हो रहा है... आह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(मम्मी की उन बेबस और मदहोश कर देने वाली चीखों ने कल्लू के भीतर के जोश को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। उसे समझ आ गया था कि वो अब पूरी तरह से उनके वश में हैं। उसने अपनी जीभ की रफ्तार को और भी बढ़ा दिया और अब वो और भी गहराई से उनकी चूत के भीतर अपनी जीभ घुमाने लगा, जिससे उनके निकलने वाले रस की मात्रा और बढ़ती जा रही थी।)*
"ये अजीब एहसास ही तो असली मज़ा है मालकिन... इसे ही तो चरम सुख कहते हैं। घबराइए मत, बस खुद को मुझ पर छोड़ दीजिए।"
*(उसने अपनी नाक को उनकी गीली और महकती हुई चूत के पास रगड़ना शुरू किया और फिर अचानक से अपनी जीभ से उनके क्लिटोरिस को जोर से खींच लिया।)*
**मम्मी:** *(कल्लू द्वारा उनके क्लिटोरिस को जोर से खींचते ही मम्मी के शरीर में एक ऐसा करंट दौड़ा कि उनकी रीढ़ की हड्डी तक कांप उठी। उनके मुंह से एक ऐसी दबी हुई लेकिन तीव्र चीख निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर लौट आई। उन्होंने अपने हाथ बेड के सिरहाने पर इतनी जोर से जमा दिए कि उनकी उंगलियों के नाखून चादर को फाड़ने लगे।)*
"आह्ह्ह्ह्ह! कल्लू... ओ गॉड! मैं... मैं मर जाऊंगी... आह्ह्ह! रुक जाओ... नहीं... और जोर से... उफ़्फ़!"
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**कल्लू:** *(मम्मी की इस बेकाबू हालत और उनकी बातों के विरोधाभास ने कल्लू को और भी ज्यादा पागल बना दिया। "रुक जाओ" और "और जोर से" के बीच का वो महीन अंतर उसे बता रहा था कि वो जीत चुका है। उसने अपनी जीभ को थोड़ा और लंबा किया और सीधे उनके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) की तरफ निशाना साधते हुए अंदरूनी हिस्सों को सहलाना शुरू कर दिया।)*
"मरिए मत मालकिन... अभी तो मैंने सिर्फ शुरुआत की है। देखिए आपका शरीर कैसे मेरे लिए तड़प रहा है..."
**मम्मी:** *(कल्लू की जीभ की उस गहरी और साहसी हरकत ने मम्मी के होश पूरी तरह उड़ दिए। जैसे ही उसकी जीभ उनके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) के करीब पहुँची, उनके पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उनके होंठ थरथराने लगे। वो अब चाहकर भी खुद को रोक नहीं पा रही थीं।)*
"आह्ह्ह्ह! कल्लू... नहीं... वहाँ नहीं... उफ़्फ़! मेरा शरीर... मेरा सब कुछ पिघल रहा है... आह्ह्ह! मुझे लग रहा है मैं फटने वाली हूँ... कल्लू... प्लीज़... कुछ करो... मुझे बचा लो... आह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(मम्मी की इस बेबसी और उनकी मांग ने कल्लू के दिमाग की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। "कुछ करो" शब्द उसके कान में किसी आदेश की तरह गूंजा। उसने अपनी जीभ को एक पल के लिए हटाया और तुरंत ऊपर उठकर उनके चेहरे के पास आया। उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी और उसके होंठ मम्मी के रसों से पूरी तरह भीगे हुए थे।)*
"बचाना चाहती हूँ मालकिन... पर ऐसे नहीं। अब आपको वो चाहिए जो मैं दे सकता हूँ।"
**मम्मी:** *(कल्लू के चेहरे पर उस गीलेपन और उसकी आँखों की उस जंगली चमक को देखकर मम्मी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उनके शरीर में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी थी—एक ऐसी भूख जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था। उन्होंने अपनी धुंधली होती आँखों से कल्लू को देखा, जो अब उनके बिल्कुल करीब था।)*
"क्या... क्या मतलब तुम्हारा? आह्ह्ह... कल्लू, तुम मुझे पागल कर दोगे... मेरा शरीर आग की तरह जल रहा है... मुझे... मुझे वो चाहिए जो तुम कह रहे हो... जल्दी करो... उफ़्फ़!"
*(उन्होंने बेबसी में अपने हाथ नीचे की ओर किए और कल्लू की शर्ट को कसकर पकड़ लिया, मानो वो खुद को गिरने से बचाना चाहती हों।)*
"शरारत तो अभी शुरू हुई है मालकिन... आपने तो अभी तक मेरा असली रूप देखा ही नहीं।"
*(कहते ही कल्लू ने अपना हाथ उनके पेट के नीचे ले जाकर उनकी कमर को कसकर पकड़ा और उन्हें अपनी तरफ खींचा। उसकी नज़रें अब उनके चेहरे से हटकर नीचे की ओर बढ़ रही थीं, जहाँ उनकी साड़ी के पल्लू के नीचे से उनकी जांघों की झलक दिख रही थी।)*
"अब मैं देखना चाहता हूँ कि आपके शरीर के बाकी हिस्सों में कितनी गर्मी है..."
**कल्लू:** *(मम्मी की दुविधा को भांपते हुए कल्लू ने अब और इंतज़ार करने की हिम्मत नहीं दिखाई। उसने अपनी उंगलियों का खेल जारी रखते हुए अपना दूसरा हाथ उनकी साड़ी के पल्लू की ओर बढ़ाया। जैसे ही उसने पल्लू को कंधे से नीचे गिराया, मम्मी के शरीर का एक बड़ा हिस्सा उसके सामने खुल गया।)*
*(उसकी नज़रें अब उनकी कमर पर बँधी पेटीकोट की गाँठ पर टिकी थीं। कल्लू ने बिना किसी हिचकिचाहट के पेटीकोट के किनारे को पकड़कर उसे नीचे की ओर खींचना शुरू कर दिया।)*
"देखिये मालकिन... आपका शरीर कितना बेताब है। इसे छुपाने की ज़रूरत नहीं है।"
![[Image: 1.gif]](https://i.ibb.co/Kjs4hm1Z/1.gif)
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**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू ने पेटीकोट को नीचे की ओर खींचा, मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उन्होंने घबराहट में अपने दोनों हाथों से पेटीकोट को रोकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की पकड़ बहुत मजबूत थी। उनके चेहरे पर शर्म और उत्तेजना का मिला-जुला भाव था।)*
"नहीं कल्लू... रुको... अभी नहीं... अगर किसी ने देख लिया तो? मेरा अपमान हो जाएगा..."
*(लेकिन उनके शब्द उनकी क्रियाओं का साथ नहीं दे रहे थे। जैसे-जैसे पेटीकोट उनके नितंबों से नीचे खिसकता जा रहा था, उनकी सांसें तेज होती जा रही थीं।)*
**कल्लू:** *(मम्मी की छटपटाहट और डर को देखते हुए कल्लू थोड़ा और करीब आया। उसने उनके कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसों को उनकी गर्दन पर महसूस होने दिया और धीमी, मखमली आवाज़ में कहा।)*
"मालकिन, आप भी जानती हैं कि घर में इस वक्त मैं और आप हैं, तीसरा कोई नहीं है... तो फिर कैसे कोई देख लेगा? आप फालतू में ही डरी हुई हैं। बस खुद को ढीला छोड़ दीजिये और इस कामुक पल का पूरा मज़ा लीजिये। आज रात आपको सिर्फ अपनी खुशियों के बारे में सोचना है।"
*(कहते ही उसने पूरी ताकत से पेटीकोट को उनके पैरों के पास तक नीचे धकेल दिया, जिससे उनका निचला शरीर अब पूरी तरह से कल्लू की नज़रों के सामने था।)*
**मम्मी:** *(पेटीकोट के पूरी तरह नीचे गिरने और अपने निचले शरीर के खुले होने के अहसास से मम्मी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उन्होंने जल्दी से अपने हाथों से अपने अंगों को ढकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की नज़रों की गर्मी उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी। उनकी साँसें अब फूलने लगी थीं।)*
"तुम... तुम बहुत बदतमीज होते जा रहे हो कल्लू। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा नौकर मेरे साथ ऐसा करेगा..."
*(उनके स्वर में गुस्सा कम और समर्पण ज़्यादा झलक रहा था। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो बता रही थी कि वो मना तो कर रही हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस रोमांच का आनंद ले रही हैं।)*
**कल्लू:** *(उनकी इन बातों पर कल्लू खिलखिलाकर हंसा, एक ऐसी हंसी जिसमें शरारत और अधिकार दोनों थे। उसने धीरे से उनके हाथों को हटाकर उनके ऊपर रखे ताकि वो खुद को ढक न सकें।)*
"बदतमीजी ही तो असली मजा है मालकिन! और ये देखिए, आपके ये हाथ मुझे रोक नहीं पा रहे, बल्कि थरथरा रहे हैं। मतलब आपका दिल भी वही चाहता है जो मेरा चाह रहा है।"
*(उसने उनके उभरे हुए स्तनों की तरफ इशारा करते हुए आगे बढ़ाया और अपनी नज़रें उनकी आँखों में गड़ा दीं।)*
"मैं तो बस आपकी सेवा कर रहा हूँ। आपने ही तो सिखाया था कि हर काम पूरी शिद्दत से करना चाहिए। तो फिर आज इस बिस्तर पर पूरी शिद्दत से 'सेवा' क्यों न करूँ?"
**मम्मी:** *(कल्लू की तीखी और हाज़िरजवाबी सुनकर उनके होंठों पर एक फीकी सी मुस्कान आ गई जिसे वो दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं। उनकी आँखों में पानी भर आया था, मानो वो हार मान चुकी हों।)*
"तुम... तुम वाकई बड़े चालाक हो गए हो। पहले क्या कहते थे कि 'हाँ जी मालकिन', 'जी हुज़ूर'... और अब देखो तुम्हारी बातें!"
*(उन्होंने लंबी गहरी साँस ली और धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे खुद को उस प्रवाह में बह जाने की अनुमति दे रही हों।)*
"ठीक है कल्लू... जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा करो। वैसे भी अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है।"
**कल्लू:** *(मम्मी के समर्पण भरे शब्दों को सुनते ही कल्लू के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान फैल गई। उसने बिना देर किए अपना सिर नीचे झुकाया और धीरे-धीरे उनके खुले हुए संवेदनशील हिस्सों की ओर बढ़ा। उसकी उंगलियां उनके उभरे हुए कूल्हों को सहलाते हुए नीचे की ओर सरकने लगीं।)*
"अब देखना मालकिन... आज आपको कैसा सुकून मिलता है।"
*(उसके होंठ पहली बार उनकी कोमल त्वचा को छू रहे थे। जैसे ही उसकी गर्म जीभ ने उनकी चूत को स्पर्श किया, मम्मी के पूरे शरीर में बिजली जैसी लहर दौड़ गई। उनकी चीख गले में ही दब गई और उन्होंने बेड की चादर को कसकर पकड़ लिया।)*
**मम्मी:** "आह्ह्ह... क... कल्लू... उफ़्फ़!"
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**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू की जीभ ने उनके सबसे संवेदनशील हिस्से को छुआ, उनके शरीर में एक जोरदार झटका सा लगा। उनकी कमर अपने आप धनुष की तरह तन गई और उन्होंने बेबस होकर अपना सिर पीछे की ओर झटक दिया। उनकी आँखें आधी बंद हो गईं और उनमें एक अकल्पनीय सुखद दर्द उभर आया।)*
"ओह्ह्ह खुदा... आह्ह्ह... कल्लू... ये... ये क्या कर रहे हो तुम... उफ़्फ़!"
*(उनकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी। जिस तरीके से कल्लू उनकी चूत को चाट रहा था, उससे उनके भीतर एक अनियंत्रित प्यास जाग रही थी। उनके पैर अब खुद ब खुद खुलने लगे थे ताकि कल्लू को और गहराई तक पहुँचने का मौका मिल सके।)*
**कल्लू:** *(मम्मी के पैरों के स्वतः ही खुल जाने और उनकी बेबस कराहों ने कल्लू के अंदर के जानवर को और भी उत्तेजित कर दिया। उसने अपनी पकड़ उनके जाँघों पर और मजबूत कर ली ताकि वो हिल न सकें, और अपनी जीभ की गति को और तेज कर दिया। वह जानबूझकर उनके क्लिटोरिस (clitoris) पर जोर-जोर से दबाव डाल रहा था।)*
"मालकिन... आपकी ये आवाज... ये कैसी आवाज निकाल रही है आपकी? लगता है आपको मेरी ये 'सेवा' बहुत पसंद आ रही है।"
*(उसने बीच में रुककर अपनी गीली जीभ से उनके उस हिस्से को लपेटा जहाँ से रस टपक रहा था, और फिर वापस उसी जुनून के साथ चाटना शुरू कर दिया।)*
![[Image: 7.gif]](https://i.ibb.co/qY0gNRD3/7.gif)
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**मम्मी:** *(कल्लू की जीभ की उस तीव्र गति और उसके क्लिटोरिस पर पड़ रहे दबाव ने उन्हें पूरी तरह से सुन्न कर दिया था। उनका पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था और उनकी सांसें बहुत तेज चलने लगी थीं। जब कल्लू ने उनके रसों को महसूस किया, तो उनकी चीख निकल गई।)*
"आह्ह्ह! कल्लू... रुको... नहीं... मत रुको! उफ़्फ़... मेरे पेट में कुछ... कुछ अजीब सा हो रहा है... आह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(मम्मी की उन बेबस और मदहोश कर देने वाली चीखों ने कल्लू के भीतर के जोश को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। उसे समझ आ गया था कि वो अब पूरी तरह से उनके वश में हैं। उसने अपनी जीभ की रफ्तार को और भी बढ़ा दिया और अब वो और भी गहराई से उनकी चूत के भीतर अपनी जीभ घुमाने लगा, जिससे उनके निकलने वाले रस की मात्रा और बढ़ती जा रही थी।)*
"ये अजीब एहसास ही तो असली मज़ा है मालकिन... इसे ही तो चरम सुख कहते हैं। घबराइए मत, बस खुद को मुझ पर छोड़ दीजिए।"
*(उसने अपनी नाक को उनकी गीली और महकती हुई चूत के पास रगड़ना शुरू किया और फिर अचानक से अपनी जीभ से उनके क्लिटोरिस को जोर से खींच लिया।)*
**मम्मी:** *(कल्लू द्वारा उनके क्लिटोरिस को जोर से खींचते ही मम्मी के शरीर में एक ऐसा करंट दौड़ा कि उनकी रीढ़ की हड्डी तक कांप उठी। उनके मुंह से एक ऐसी दबी हुई लेकिन तीव्र चीख निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर लौट आई। उन्होंने अपने हाथ बेड के सिरहाने पर इतनी जोर से जमा दिए कि उनकी उंगलियों के नाखून चादर को फाड़ने लगे।)*
"आह्ह्ह्ह्ह! कल्लू... ओ गॉड! मैं... मैं मर जाऊंगी... आह्ह्ह! रुक जाओ... नहीं... और जोर से... उफ़्फ़!"
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**कल्लू:** *(मम्मी की इस बेकाबू हालत और उनकी बातों के विरोधाभास ने कल्लू को और भी ज्यादा पागल बना दिया। "रुक जाओ" और "और जोर से" के बीच का वो महीन अंतर उसे बता रहा था कि वो जीत चुका है। उसने अपनी जीभ को थोड़ा और लंबा किया और सीधे उनके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) की तरफ निशाना साधते हुए अंदरूनी हिस्सों को सहलाना शुरू कर दिया।)*
"मरिए मत मालकिन... अभी तो मैंने सिर्फ शुरुआत की है। देखिए आपका शरीर कैसे मेरे लिए तड़प रहा है..."
**मम्मी:** *(कल्लू की जीभ की उस गहरी और साहसी हरकत ने मम्मी के होश पूरी तरह उड़ दिए। जैसे ही उसकी जीभ उनके गर्भाशय ग्रीवा (cervix) के करीब पहुँची, उनके पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उनके होंठ थरथराने लगे। वो अब चाहकर भी खुद को रोक नहीं पा रही थीं।)*
"आह्ह्ह्ह! कल्लू... नहीं... वहाँ नहीं... उफ़्फ़! मेरा शरीर... मेरा सब कुछ पिघल रहा है... आह्ह्ह! मुझे लग रहा है मैं फटने वाली हूँ... कल्लू... प्लीज़... कुछ करो... मुझे बचा लो... आह्ह्ह!"
**कल्लू:** *(मम्मी की इस बेबसी और उनकी मांग ने कल्लू के दिमाग की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। "कुछ करो" शब्द उसके कान में किसी आदेश की तरह गूंजा। उसने अपनी जीभ को एक पल के लिए हटाया और तुरंत ऊपर उठकर उनके चेहरे के पास आया। उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी और उसके होंठ मम्मी के रसों से पूरी तरह भीगे हुए थे।)*
"बचाना चाहती हूँ मालकिन... पर ऐसे नहीं। अब आपको वो चाहिए जो मैं दे सकता हूँ।"
**मम्मी:** *(कल्लू के चेहरे पर उस गीलेपन और उसकी आँखों की उस जंगली चमक को देखकर मम्मी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उनके शरीर में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी थी—एक ऐसी भूख जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था। उन्होंने अपनी धुंधली होती आँखों से कल्लू को देखा, जो अब उनके बिल्कुल करीब था।)*
"क्या... क्या मतलब तुम्हारा? आह्ह्ह... कल्लू, तुम मुझे पागल कर दोगे... मेरा शरीर आग की तरह जल रहा है... मुझे... मुझे वो चाहिए जो तुम कह रहे हो... जल्दी करो... उफ़्फ़!"
*(उन्होंने बेबसी में अपने हाथ नीचे की ओर किए और कल्लू की शर्ट को कसकर पकड़ लिया, मानो वो खुद को गिरने से बचाना चाहती हों।)*


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