24-10-2026, 01:19 PM
बाबाजी ने ऋचा का चेहरा अपने हाथ में थामा और बहुत धीरे, लेकिन स्पष्ट शब्दों में बोले,
“ऋचा… देखो, तुम अभी बहुत नादान हो। और मैं समजता हूँ की तुम्हे अब सब समज लेना चाहिए, और मुझे तुम्हे सब समजाना चाहिए, क्यों की मैं तुम और तुम्हारे परिवार की हितेच्छु हूँ। मैं तुम्हें सब कुछ खुलकर बताता हूँ।”
ऋचा ने हाँ में सिर हिला दिया। बाबाजी को इसकी पूरी उम्मीद थी।
बाबाजी ने अपनी उँगली को धीरे से ऋचा की जाँघों के बीच की तरफ इशारा करते हुए पूछा,
“वो जो तुम्हारे नीचे है… शू-शू करने वाली जगह… उसे क्या कहते हैं, पता है?”
ऋचा शर्म से पानी-पानी हो गई। उसने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया।
बाबाजी मुस्कुराए और बोले,
“उसे कहते हैं चूत… और लड़कों के पास जो होता है, उसे कहते हैं लंड।” कहते हुए बाबाजी ने अपनी धोती के ऊपर से अपने खड़े हो रहे मोटे लंड की तरफ इशारा किया।
“जब लड़के का लंड लड़की की चूत में घुसता है… उसे कहते हैं चुदाई। लंड चूत के अंदर घुसता है, अंदर-बाहर होता है, जोर-जोर से धक्के लगता है… और जब दोनों को बहुत मजा आने लगता है, तब लड़के के लंड से गाढ़ा, सफेद रस निकलता है और लड़की की चूत भी गीली होकर अपना रस छोड़ती है। दोनों के रस जब मिलते हैं, तभी बच्चा बनने की संभावनाए बनती है। समझी?”
बाबाजी ने एक ही साँस में पूरा सेक्स ज्ञान दे दिया।
ऋचा आँखें फाड़े, मुंह खोले उनकी बातें सुन रही थी। उसके गाल, गर्दन और कान तक लाल हो चुके थे। उसके मन में सैकड़ों सवाल उबाल खा रहे थे, लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी।
बाबाजी चुप होकर बैठ गए और उसके बोलने का इंतजार करने लगे।
“अब कुछ बोलो भी! तुम्हारे मन में कई सवाल होंगे, मैं हूँ न यहाँ।“ बाबाजी ने उसकी पीठ को संवारते हुए कहा।
आखिरकार ऋचा ने बहुत हिचकिचाते हुए, फुसफुसाती हुई आवाज में पूछा,
“पर बाबाजी जी… वो सब तो एक लड़का और लड़की के बीच होना चाहिए ना… फिर मेरे पिताजी… मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे थे? ये तो पाप है ना…?”
बाबाजी ने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए कहा,
“देखो ऋचा… तुम्हारा कहना एक तरीके से सही है, लेकिन सेक्स की दुनिया में कोई किसी का बाप, बेटी, भाई या रिश्तेदार नहीं होता। वहाँ सिर्फ एक ही रिश्ता होता है, जिस्म का रिश्ता। इसमें उम्र, रिश्ता, रक्त, कुछ भी मायने नहीं रखता। मायने रखता है सिर्फ एक-दूसरे के शरीर के प्रति आकर्षण और अपनी उत्तेजना को शांत करने की भूख। लंड का चूत में जाना और घर्षण पैदा कर के मादा को संतुष्टि देना और खुद को भी संतुष्ट करना।”
बाबाजी ने अपनी उँगली अब ऋचा की जाँघ पर हल्के-हल्के फेरते हुए आगे कहा,
“उस दिन तुम्हारा दिमाग तो डर रहा था, शर्म कर रहा था… लेकिन तुम्हारा जिस्म कुछ और ही चाह रहा था। इसलिए तुम्हारी चूत गीली हुई और उसमें से रस निकला। तुम्हारा शरीर खुद ही पिताजी के स्पर्श का जवाब दे रहा था। ये कोई पाप नहीं… ये प्रकृति का नियम है। जब शरीर में आग लगती है, तो वो राह ढूंढ ही लेती है।”
ऋचा पूरी तरह स्तब्ध थी। उसके छोटे-छोटे स्तन तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं और उसकी जाँघें आपस में हल्के से दब रही थीं।
बाबाजी ने अब उसके कान के पास मुँह ले जाकर बहुत धीमी और कामुक आवाज में पूछा,
“अब बताओ… जब पिताजी ने तुम्हारी चूत को उँगलियों से छुआ था… तब तुम्हें अच्छा लगा था या नहीं?”
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यही तक दोस्तों आगे कहानी जारी रहेगी
जुड़े रहिये
मैत्री पटेल
जय भारत
“ऋचा… देखो, तुम अभी बहुत नादान हो। और मैं समजता हूँ की तुम्हे अब सब समज लेना चाहिए, और मुझे तुम्हे सब समजाना चाहिए, क्यों की मैं तुम और तुम्हारे परिवार की हितेच्छु हूँ। मैं तुम्हें सब कुछ खुलकर बताता हूँ।”
ऋचा ने हाँ में सिर हिला दिया। बाबाजी को इसकी पूरी उम्मीद थी।
बाबाजी ने अपनी उँगली को धीरे से ऋचा की जाँघों के बीच की तरफ इशारा करते हुए पूछा,
“वो जो तुम्हारे नीचे है… शू-शू करने वाली जगह… उसे क्या कहते हैं, पता है?”
ऋचा शर्म से पानी-पानी हो गई। उसने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया।
बाबाजी मुस्कुराए और बोले,
“उसे कहते हैं चूत… और लड़कों के पास जो होता है, उसे कहते हैं लंड।” कहते हुए बाबाजी ने अपनी धोती के ऊपर से अपने खड़े हो रहे मोटे लंड की तरफ इशारा किया।
“जब लड़के का लंड लड़की की चूत में घुसता है… उसे कहते हैं चुदाई। लंड चूत के अंदर घुसता है, अंदर-बाहर होता है, जोर-जोर से धक्के लगता है… और जब दोनों को बहुत मजा आने लगता है, तब लड़के के लंड से गाढ़ा, सफेद रस निकलता है और लड़की की चूत भी गीली होकर अपना रस छोड़ती है। दोनों के रस जब मिलते हैं, तभी बच्चा बनने की संभावनाए बनती है। समझी?”
बाबाजी ने एक ही साँस में पूरा सेक्स ज्ञान दे दिया।
ऋचा आँखें फाड़े, मुंह खोले उनकी बातें सुन रही थी। उसके गाल, गर्दन और कान तक लाल हो चुके थे। उसके मन में सैकड़ों सवाल उबाल खा रहे थे, लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी।
बाबाजी चुप होकर बैठ गए और उसके बोलने का इंतजार करने लगे।
“अब कुछ बोलो भी! तुम्हारे मन में कई सवाल होंगे, मैं हूँ न यहाँ।“ बाबाजी ने उसकी पीठ को संवारते हुए कहा।
आखिरकार ऋचा ने बहुत हिचकिचाते हुए, फुसफुसाती हुई आवाज में पूछा,
“पर बाबाजी जी… वो सब तो एक लड़का और लड़की के बीच होना चाहिए ना… फिर मेरे पिताजी… मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे थे? ये तो पाप है ना…?”
बाबाजी ने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए कहा,
“देखो ऋचा… तुम्हारा कहना एक तरीके से सही है, लेकिन सेक्स की दुनिया में कोई किसी का बाप, बेटी, भाई या रिश्तेदार नहीं होता। वहाँ सिर्फ एक ही रिश्ता होता है, जिस्म का रिश्ता। इसमें उम्र, रिश्ता, रक्त, कुछ भी मायने नहीं रखता। मायने रखता है सिर्फ एक-दूसरे के शरीर के प्रति आकर्षण और अपनी उत्तेजना को शांत करने की भूख। लंड का चूत में जाना और घर्षण पैदा कर के मादा को संतुष्टि देना और खुद को भी संतुष्ट करना।”
बाबाजी ने अपनी उँगली अब ऋचा की जाँघ पर हल्के-हल्के फेरते हुए आगे कहा,
“उस दिन तुम्हारा दिमाग तो डर रहा था, शर्म कर रहा था… लेकिन तुम्हारा जिस्म कुछ और ही चाह रहा था। इसलिए तुम्हारी चूत गीली हुई और उसमें से रस निकला। तुम्हारा शरीर खुद ही पिताजी के स्पर्श का जवाब दे रहा था। ये कोई पाप नहीं… ये प्रकृति का नियम है। जब शरीर में आग लगती है, तो वो राह ढूंढ ही लेती है।”
ऋचा पूरी तरह स्तब्ध थी। उसके छोटे-छोटे स्तन तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं और उसकी जाँघें आपस में हल्के से दब रही थीं।
बाबाजी ने अब उसके कान के पास मुँह ले जाकर बहुत धीमी और कामुक आवाज में पूछा,
“अब बताओ… जब पिताजी ने तुम्हारी चूत को उँगलियों से छुआ था… तब तुम्हें अच्छा लगा था या नहीं?”
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यही तक दोस्तों आगे कहानी जारी रहेगी
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मैत्री पटेल
जय भारत



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