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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
#13
अब......

मेरे घण्टी बजाते ही दरवाज़ा खुला..

मुझे ऐसा लगा जैसे शालिनी आंटी घंटों से मेरे आने का इंतज़ार कर रही हो।दरवाज़ा खुलते ही मेरी नजर आंटी पर पड़ी जो कि बला की खूबसूरत लग रही थी।

मैंने आज उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक महसूस की.. जो कि शायद उसकी वर्षों बाद यौन-लालसा की तृप्ति का सन्देश दे रही थी।

फिर मैंने घर के अन्दर प्रवेश किया और दरवाज़ा बंद करके उसको अपनी बाँहों में कैद कर लिया और वो भी मेरे बाँहों में कुछ इस तरह सिमटी की जैसे हम वर्षों के बिछड़े हों।

फिर कुछ देर इसी तरह खड़े रहने के बाद मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए उसकी ढेर सारी तारीफ़ की.. जिससे उसको चरमानन्द प्राप्त हुआ और खुश होकर प्यार से मुझे चुम्बन करते हुए अनुज ‘आई लव यू’ बोलने लगी। मुझे भी कुछ समझ न आ रहा था कि ये सब सच है या मात्र एक कल्पना…

क्योंकि लड़कियों के बारे में तो सोचना अलग बात होती है, पर जब आपको एक एक्सपीरिएंस्ड औरत गर्ल-फ्रेंड के रूप में मिल जाए और वो भी शालिनी जैसी.. तो जिन्दगी ही बदल जाए।

वो मुझे इस तरह खोया हुआ देखकर बोली- कहाँ खो जाते हो जान..तो मैंने बोला- तुम हो ही इतनी सुन्दर.. समझ ही नहीं आता कि तुझे प्यार करूँ या तुम्हारे रूप को ही देखता रहूँ।

तो इस पर वो बोली- तुम्हें पूरी छूट है.. कुछ भी करो.. बस मुझे अब छोड़ के न जाना.. वर्ना मैं मर जाऊँगी.. तुम्हें एक पल के लिए भी अपने से दूर नहीं देख सकती । उसके दिल में शायद मेरे लिए अपने पति से भी ज्यादा प्यार जाग चुका था।

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तो मैंने बोला- शालिनी ये सब तो ठीक है.. पर जब मेरे माँ-बाप मेरी शादी कर देंगे तब?

तो वो कहने लगी- मैं भी तो शादीशुदा हूँ.. कोई बात नहीं.. बस अपने दिल से मुझे कभी अलग मत करना.. तुम जो चाहोगे वो मैं दूंगी और जो चाहोगे मैं वैसा ही करुँगी।

तो मैंने उसे फिर से अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गालों और आँखों को चूमने लगा। उसकी ख़ुशी की झलक उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर मैंने उसके चूतड़ों को मसलना प्रारम्भ कर दिया.. जिससे उसकी ‘आह’ निकलने लगी।

मैंने जैसे ही उसके चुचियों को आजाद करने के लिए उसकी कुर्ती उठाई तो वो बोली- जरा सब्र भी करो.. आज तो पूरी रात अपनी है.. जैसे चाहो वैसे प्यार कर लेना.. जरा देख लेने दो अंकिता सोई गई किया।

तो मैंने पूछा- अंकिता अभी तक जाग रही है किया ?

उन्होंने बोला- शायद हां / नहीं भी , क्योंकि मैंने उसके खाने में नींद कि दवा मिला दीं थीं।

तो मैंने कहा- आपको कैसे पता.. वह सो चुकी होगी ?

तो वो बोली- मैं देखकर आती हुं।

फिर मैं बोला- चलो बढ़िया है.. जल्दी लाओ.. आपने तो मेरे लौड़े में लगी आग को हवा दे दी हो ।

फिर आंटी जल्दी से चेक करके मेरे पास आ गई और बोली अंकिता सो चुकी है । मैं उस समय टीवी देख रहा था.. फिर मैंने आंटी से बोला- मेरी एक आदत और है.. अगर आपको बुरा न लगे तो मेरे लिए एक कप चाय बना दीजिएगा।

तो शालिनी मुस्कुराते हुए अपनी भौंहें तानकर बोली- अरे ये क्या.. मैं भला.. बुरा क्यों मानूंगी.. मुझे तो अपने नवाब का कहना मानना ही पड़ेगा।

तो मैंने बोला- मैं कोई नवाब नहीं हूँ।

आंटी बोली- तो क्या हुआ.. शौक तो नवाबों वाले हैं।

फिर वो रसोई गई और मेरे लिए चाय ले आई और मुझे चाय का कप पकड़ाते हुए हँसने लगी।

मैंने कारण पूछा- अब क्या हुआ?

तो बोली- और कोई हुक्म..?

मैंने बोला- यार प्लीज़.. मेरा मजाक मत उड़ाओ नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगा।

वो बोली- अरे ऐसा मत करना.. भला अपनी दासी से कोई नाराज़ होता है.. नहीं न.. बल्कि हुक्म देता है।

मैंने बोला- अच्छा अगर यही बात है.. तो क्या मेरी इच्छा पूरी करोगी?

तो बोली- मैं तो तुम्हारी हर इच्छा पूरी करने के लिए तैयार हूँ।

मैंने बोला- मेरे मन में बहुत दिन से था कि जब मेरी शादी हो जाएगी तो अपनी बीवी को रात भर निर्वस्त्र रखूँगा.. क्या आप मेरे लिए अपने सारे कपड़े उतार सकती हैं।

वो बोली- बस.. इत्ती सी बात.. अनुज मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ।

यह कहते हुए शालिनी ने एक-एक करके सारे कपड़े निकाल दिए।

उसके जोश और मादकता से भरे शरीर को देखकर मेरे लौडे़ पहलवान में भी जान आने लगी और धीरे-धीरे लौड़े के अकड़ने से मेरे लोअर के अन्दर टेंट सा बन गया..
जिसे शालिनी ने देख लिया और मुस्कराते हुए बोली- मेरा असली राजकुमार तो ये है.. जो मुझे देखते ही नमस्कार करने लगता है और एक तुम हो जो हमेशा मेरे राजाबाबू को दबाते और मुझसे छिपाते रहते हो।

मैंने बोला- अरे ऐसा नहीं है.. आओ मेरे पास आकर बैठो।

वो मुस्कुराते हुए मेरे बगल में बैठ गई तो मैंने उसके गाल पर चुम्बन दिया और अपनी गोद में लिटा लिया।
हम दोनों की प्यार भरी बातें होने लगी जिससे हम दोनों को काफी अच्छा महसूस हो रहा था.. ऐसा मन कर रहा था कि जैसे बस इसी घड़ी समय रुक जाए और ये पल ऐसे ही बने रहें।

मैं कभी उसके बालों से खेलता तो कभी उसकी नशीली आँखों में झांकते हुए उसके होंठों में अपनी उँगलियों को घुमाता.. जिससे दोनों को ही मज़ा आ रहा था।मुझे तो मानो जन्नत सी मिल गई थी, क्योंकि ये अहसास मेरा पहला अहसास था।
मैं और वो इस खेल में इतना लीन हो गए थे कि मुझे पता ही न चला कि मैंने कब उसके चूतड़ को नग्न कर दिया और उसको भी कोई होश न था कि उसके चुचियों अब कपड़ों की गिरफ्त से आज़ाद हैं।

जब मैंने उसके कोमल संतरों और गेंद की तरह सख्त चूतड़ों को मल-मल कर रगड़ना और सहलाना प्रारम्भ किया तो उनके मुख से एक आनन्दमयी सीत्कार “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह” निकल पड़ी।
जिसके कारण मेरा रोम-रोम खिल उठा और मैंने शालिनी के किशमिशी (निप्पलों) को अपने अंगूठों से मसलने लगा। जिससे शालिनी को अहसास हुआ कि उसके गेंदनुमा चुचियों कपड़ों की गिरफ्त से छूटकर मेरे हाथों में समा चुके हैं।

उसके मुख की सीत्कार देखते ही देखते बढ़ती चली गई- आआअहह.... श्ह्ह्हह्ह्... ह्ह्ह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है अनुज.. इनको मुँह से चूसो.. चूस लो इनका रस.. निकाल दो इसकी सारी ऐंठन..

मैंने उसी अवस्था में झुककर उनके माथे को चूमा और उनकी आँखों में आनन्द की झलक देखने लगा।

एकाएक शालिनी ने अपने हाथों से मेरे सर को झुका कर मेरे होंठों को अपने होंठों से लगाकर रसपान करने लगी। जिसका मैंने भी मुँहतोड़ जवाब देते हुए करीब 15 मिनट तक गहरी चुम्मी ली।

जैसे हम जन्मों के प्यासे.. एक-दूसरे के मुँह में पानी ढूँढ़ रहे हों और इस प्रक्रिया के दौरान उसके चुचियों की भी मालिश जारी रखी जिससे शालिनी के अन्दर एक अजीब सा नशा चढ़ता चला गया जो कि उसकी निगाहों से साफ़ पता चल रहा था।

फिर धीरे से उसने मेरे होंठों को आज़ाद करते हुए अपने चुचियों को चूसने का इशारा किया तो मैंने भी बिना देर करते हुए ही उसके सर को अपनी गोद से हटाकर कुशन पर रखा और घुटनों के बल जमीन पर बैठकर उसके चुचियों का रस चूसने लगा।

क्या मस्त चूचियां थे यार.. पूछो मत।

मैं सुबह तो इतना उत्तेजित था कि मैंने इन पर इतना ध्यान ही न दिया था।

लेकिन हाँ.. इस वक़्त मैं उसको चूसते हुए एक अज़ब से आनन्द के सागर में गोते लगाने लगा था। उसके चुचियों इतने कोमल कि जैसे मैं किसी स्ट्रॉबेरी को मुँह में लेकर चूस रहा हूँ..

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इस कल्पना को शब्दों में परिणित ही नहीं कर सकता कि क्या मस्त अहसास था उसका..

मैं अपने दूसरे हाथ से उसके निप्पल को मसल रहा था, जिससे शालिनी के मुँह से आनन्दभरी सीत्कार ‘आआअह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल जाती जिससे मैं अपने आप आनन्द में डूब कर उसके चुचियों को और जोर से चूसने और रगड़ने लगता।

शालिनी को भी इस खेल में इतना आनन्द आ रहा था जो कि उसके बदन की ऐंठन से साफ़ पता चल रहा था और हो भी क्यों न… जब इतना कामोत्तेजक माहौल होगा.. तो कुछ भी हो सकता था।

इधर मेरा ‘लंड’ भी पैन्ट में खड़े-खड़े इठने लगा था.. मैंने भी पारी बदलते हुए उसके चुचियों को हाथों में जकड़ते हुए उसके सलवार के नाड़े की ओर नज़र दौड़ाई तो देखा की सलवार के आगे का हिस्सा गीला हो चुका था।

मैंने शालिनी के चेहरे की ओर आश्चर्य भरी निगाहों से देखा तो शालिनी ने पूछा- क्या हुआ मेरे नवाब.. ऐसे क्यों देख रहे हो?

तो मैंने उसकी सलवार की ओर देखते हुए उससे पूछा- क्या बात है.. इस समय इतना पानी निकल रहा है.. कि तुम्हारी सलवार के ऊपर से ही साफ़ झलक रहा है।

तो वो मुस्कुराते हुए बोली- जब मथानी इतने अच्छे से चलेगी तो मक्खन तो निकलेगा ही..

मैंने बोला- आज सुबह भी तो मथा था.. तब तो ऐसा नहीं हुआ था?

तो वो बोली- इस समय पैन्टी नहीं पहनी है और उस समय पैन्टी पहन रखी थी।

मैंने बोला- हम्म्म.. क्या बात है शालिनी रानी.. लगता है आज रात का मेरे लिए तुमने पूरा मायाजाल बिछा रखा है।

तो वो हँसते हुए अपने हाथों से मेरे सर को पकड़कर अपने होंठों से चुम्बन करते हुए बोलने लगी- अब मैं बस तुम्हारी हूँ.. तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी.. तुमने मेरी बरसों पुरानी इच्छा को पूरा किया है।

तभी उनका फोन पर घन्टी बजी.. जो कि शुभम का था।

मैंने शालिनी को फोन दे दिया और शालिनी फोन ऑन करके बात करने लगी।

उसने मेरे बारे में पूछा तो बोली- वो बाहर कमरे में टीवी देख रहा है.. जबकि तब तक सीन बदल चुका था मैं शालिनी की सलवार उतार कर उसकी मखमली जांघों को सहला रहा था और अपने मुख से उसके गोल और सुडौल चूत का रसपान कर रहा था।

फिर मैंने धीरे से उनकी मखमली पाव सी चूत में ऊँगली घुसेड़ दी।
यह इतने अचानक से हुआ कि उसके मुँह से ‘आआआआह’ जोर की चीख निकल पड़ी।

शायद वो इस आघात के लिए तैयार नहीं थी। उसकी चीख सुनकर शुभम ने कुछ बोला होगा.. जिसके उत्तर में शालिनी ने बोला- अरे वो.. मैं न कल के लिए सब्जी काट रही थी तो चाकू लग गया।

तो उसने बोला होगा आराम से काम किया करो तो वो बोली- आराम से तो सिर्फ सोया जा सकता है.. पर कोई काम आराम से नहीं कर सकती.. नहीं तो सारे दिन बस आराम ही करती रहूँगी..

यह बोलकर वो मेरी ओर देखकर हँसने लगी और मैं भी उसकी चूत के दाने को रगड़ने और मसलने लगा.. जिससे उसकी चूत से रस का रिसाव प्रारम्भ हो गया और उसकी आवाज़ में भी कंपकंपी सी आने लगी।

थोड़ी देर शालिनी से बात करने के बाद शुभम ने बोला- अनुज से बात कराओ मैं उससे बोल दूँ कि मेरी मम्मी का ध्यान अच्छे से रखे।

तो शालिनी ने बहाना बनाया.. पर उस पर कोई प्रभाव न पड़ा।

फिर उसने मुझसे बात की और मुझसे बात की कि कब आए और मेरे मम्मी का ख्याल रखना.. उनके चोट भी लग गई है.. वगैरह वगैरह..
मैं शांत से उसकी बातें सुन रहा था और ‘हाँ.. हूँ’ कर रहा था।

इतने में शालिनी ने अपना बदला लेने के लिए मेरा लोअर नीचे किया और मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर कर जोर-जोर से चूसने लगी। जिससे मेरी आवाज़ में भी कंपकंपी आ गई।

तो उसने बोला- ऐसे क्यों बोल रहे हो..? अब तुम्हें क्या हुआ?

तो मैंने बोला- एसी की वजह से ठण्ड बढ़ गई है।

मैंने बातों को विराम देते हुए फोन कटकर दिया।

फिर शालिनी को देखा तो देखता ही रह गया..
वो मेरी ओर बड़ी-बड़ी आँखों से बड़ी ही कामुक निगाहों से देखते हुए मेरे लौड़े को उसकी जड़ तक चूसने के प्रयास में लगी थी।
जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके सर को हाथों में कस लिया और उससे बोला- जान अब जीभ से चाटो.. उसने बिल्कुल ऐसा चाटा.. जैसे कोई छोटा बच्चा आइसक्रीम चाटता है.. जिससे मेरा आनन्द और दुगना हो गया।

फिर मैंने उससे बोला- इसको अपने थूक से गीला करो।

तो वो आश्चर्य से देखने लगी.. शायद सोच रही होगी कि अब क्या होने वाला है..

शायद आप भी यही सोच रहे होंगे।

फिर शालिनी ने नज़रें झुकाईं और मेरे गर्म लोहे की रॉड के समान लौड़े को बिना कुछ कहे ही गीला करने लगी।
जब मैंने देखा कि शालिनी ने अब अच्छे से गीला कर दिया है.. तो मैंने उसे अपने सामने सोफे के नीचे बैठाया और उसके चुचियों के बीच अपने लंड को सैट करने लगा।

उसको देखकर साफ़ लग रहा था कि इस तरह से उसने कभी नहीं किया है और मेरी भी एक अनचाही इच्छा पूरी होने वाली थी।

फिर मैंने उसको बोला- अब अपने चुचियों को दोनों तरफ से दबा कर मेरे लौड़े की चुदाई ऐसे करो.. जैसे मालिश की जाती है।

एक बार मैंने उसे बताया और फिर उसको ये कार्य सौंप दिया। वो बड़े अच्छे तरीके के साथ इस कार्य में तल्लीन थी.. जिससे मुझे काफी मज़ा आ रहा था।

यह मैंने केवल पोर्न फिल्म में ही देखा था जो कि आज मेरे साथ हकीकत में हो रहा था। मेरे शरीर में एक अजीब सा करंट दौड़ रहा था जैसे हज़ारों चीटिंयाँ मेरे शरीर पर रेंग रही हों।

कुछ ही मिनटों के बाद मैंने शालिनी से बोला- अब मेरा होने वाला है.. मुझे कुछ अजीब सी मस्ती हो रही है।

तो शालिनी मेरे सख्त लौड़े को पुनः अपने मुलायम होंठों में भरकर चूसने लगी और कुछ ही देर में एक ‘आह्ह्ह्ह्ह्’ के साथ मेरा गर्म लावा उसके मुँह में समा गया जिसे शालिनी बड़े ही चाव से चखते हुए पी गई और आँख मारते हुए बोली- कैसा लगा?

तो मैंने उसे अपनी बाँहों में लेकर बोला- सच शालिनी… आज तो तूने मुझे जन्नत की सैर करा दी।

फिर वो बोली- ये कहाँ से सीखा था?

तो मैंने बोला- पोर्न फिल्म में ऐसे करते हुए देखा था।

तब शालिनी आंटी ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा- तुम कब से ऐसी फिल्म देख रहे हो?

तो मैंने सच बताया हाई कॉलेज से ही मैं और शुभम थिएटर में दो-चार ऐसी पोर्न मूवी देख चुके हैं।

तो आंटी ने आश्चर्य से पूछा- तो शुभम भी जाता है तेरे साथ?

तो मैंने ‘हाँ’ बोला.. फिर उसने पूछा- उसकी कोई गर्ल-फ्रेंड है कि नहीं?

तो मैंने बोला - नहीं , वह भी बेचारा मेरी तरह कुंवारापन से जुझ रहा है।

तो आंटी बोली- तु उसकी कोई गर्लफ्रेंड क्यूं नहीं बनवा देता है।

मैंने आंटी को चीड़ाते हुए बोला- अरे.. जिसकी मम्मी इतनी हॉट और सेक्सी हो उसको गर्लफ्रेंड की किया ज़रूरत है।

तो आंटी बोली- " धत् पगले कुछ भी बोलते हो " ।

फिर आंटी ने पूछी - अच्छा एक बात बताओ.. तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया। इस पर शालिनी आंटी रोने लगी और मुझसे रूठ कर दूसरी ओर बैठ गई।

मैंने फिर उसके गालों पर चुम्बन करते हुए बोला- यार तुम भी न.. रोने क्यों लगीं?

तो आंटी बोली - काश , मैं तेरी गर्लफ्रेंड होती।

मैंने बोला- अरे तो क्या हुआ.. माना कि तुम मेरी गर्लफ्रेंड नहीं हो , पर तुमने मुझे उससे ज्यादा दिया है और तुम उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और आनन्द देने वाली लगती हो।

यह कहते हुए मैं उसके होंठों का रसपान करने लगा.. जिसमें शालिनी आंटी ने मेरा पूरा साथ दिया।

करीब पांच मिनट बाद शालिनी आंटी बोली - तुम परेशान मत होना.. अब मैं तुम्हें तुम्हारी गर्लफ्रेंड से ज्यादा प्यार दुंगी ।

मैंने बोला - चलो अब इस टॉपिक को चेंज करते हैं।

फिर मैंने शालिनी को अपने सीने से चिपका लिया.. जिससे उसकी मस्त उन्नत मुलायम चूचियों की चुभन मेरे सीने में होने लगी.. जिसका अहसास काफी अच्छा था।

मैं उसे अपने शब्दों से बयान ही नहीं कर सकता था.. मेरा हाथ उनकी नंगी पीठ पर धीरे-धीरे चलने लगा.. जिससे शालिनी आंटी को मेरे प्यार के एहसास का नशा चढ़ने लगा और उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए।

ऐसा लग रहा था मानो हज़ारों आनन्द की तरंगें उसके शरीर में दौड़ने लगी थीं। यह शायद मेरे प्रति उसके प्यार का असर था या वो भावनात्मक तरीके से मुझसे जुड़ गई थी, जिसकी वजह से ऐसा हो रहा था।

फिर मैंने उसके आनन्द को बढ़ाने के लिए उसके गर्दन में अपने होंठों को लगाकर चुम्बन करने लगा और उसके कान पर ‘लव-बाइट’ करने लगा.. जिससे उसकी मदहोशी और बढ़ती ही चली जा रही थी। उसे इस क्रिया में बहुत आनन्द आ रहा था जो कि उसकी बंद आँखें और मुस्कराता चेहरा साफ़-साफ़ बता रहा था।

फिर मैंने धीरे से शालिनी आंटी को सोफे पर लिटाया और चुम्बन करते हुए उसके चुचियों को दबाने लगा.. जिससे शालिनी आंटी की कामुक आवाज ‘आआह्ह अह्ह्ह्ह’ निकलनी आरम्भ हो गई और उसे आनन्द आने लगा।

अब उसने मुझसे बोला- अब और कितना तड़पाओगे.. चलो कमरे में चलते हैं। फिर मैंने उससे बोला- नहीं.. आज मुझे सोफे पर ही चुदाई करना है। मैंने कई पोर्न फिल्मों में सोफे पर चुदाई देखी है।

तो वो बोली- अरे यहाँ जगह कम है। मैंने बोला- वो सब मुझपर छोड़ दो.. पूरी रात बाकी है.. अगर मज़ा न आए तो कहना।
ये कहते हुए उसके चुचियों को चूसने और रगड़ने लगा।

वो सिसियाने लगी- अह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह काटो मत.. दर्द होता है.. आराम से करो.. देखो सुबह की लाल निशान अब भी चुचियों पर पड़े हैं।

तो मैंने उसे प्यार से चूसना चालू कर दिया और उसका जोश दुगना होता चला गया। मैं भी उसके निप्पल को बड़े प्यार से चाट रहा था.. जैसे उसमें मुझे मिश्री का स्वाद मिल रहा हो।

वो अब चरमसुख के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी। अब बस उसकी आग को बस हवा देना बाकी रह गया था…

मैंने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए अपना हाथ धीरे से उसकी चूत पर ले गया और अपनी दो ऊँगलियों से उसकी चूत की मालिश करने लगी और बीच-बीच में उसकी चूत के दाने को भी रगड़ देता.. जिससे वो और कसमसा उठती।

इस तरह धीरे-धीरे वो चरम पर पहुँचने लगी और अपने हाथों से अपने चुचियों को मसलते हुए बड़बड़ाने लगी- आआह... शह्ह्ह्ह..... शाबाश.. आह्ह्ह्ह्ह मेरी जान.. ऐसे ही और जोर से…

शायद वो झड़ने के मुकाम पर पहुँच चुकी थी, तभी मैंने उसे और तड़पाने के लिए उनकी चूत से तुरंत ऊँगली निकालकर उनके मुँह में डाल दी। जिसे उन्होंने चाट-चाट कर साफ कर दिया।

‘अनुज प्लीज़ मत तड़पाओ.. अब आ भी जाओ.. मुझे तुम्हारे लौड़े की जरूरत है।’

तो मैंने उनके मुँह पर चुम्बन किया और उन्हें कुछ इस तरह होने को बोला कि वो सोफे की टेक को पकड़कर घोड़ी बन जाएं.. ताकि मैं जमीन पर खड़ा रहकर उनको पीछे से चोद सकूँ।
ठीक वैसा ही जैसा मैंने फिल्मों में देखा था।

शालिनी आंटी ने वैसे ही किया फिर मैंने शालिनी के गोल चूतड़ों को पकड़कर उसकी पीठ पर चुम्बन लिया और उसके चूतड़ों पर दाब देकर थोड़ा खुद को ठीक से सैट किया ताकि आराम से चुदाई की जा सके।

फिर मैंने उसकी चूत में दो ऊँगलियां घुसेड़ दीं और पीछे से ही उँगलियों को आगे-पीछे करने लगा..
जिससे शालिनी आंटी को भी आनन्द आने लगा और वह बहुत ही मधुर आवाज़ में सिसियाने लगी- आआअह.... ऊऊओह्ह्ह्ह्ह..... उउम्म... आआअह.... अनुज.. आई लव यू.. आई लव यू..’ कहते हुए झड़ गई, जिससे मेरी ऊँगलियां उसके कामरस से तर-बतर हो गईं..

पर मैं उसकी चूत के दाने को अभी भी धीरे-धीरे मसलता ही रहा और उसकी पीठ पर चुम्बन करते हुए उसे एक बार फिर से लंड खाने के लिए मज़बूर कर दिया।

......

इस तरह जैसे ही मैंने दुबारा शालिनी की तड़प बढ़ाई तो शालिनी से रहा नहीं गया और ऊँचे स्वर में मुझसे बोली- जान और न तड़पाओ अब.. बुझा दो मेरी प्यास को..

तो मैंने भी देर न करते हुए थोड़ा सा उसे अपने ठोकने के मुताबिक़ ठीक किया और अपने लौड़े को हाथ से पकड़कर उसकी चूत के ऊपर ही ऊपर घिसने लगा.. ताकि उसके कामरस से मेरे लंड में थोड़ी चिकनाई आ जाए..

अब शालिनी आंटी और बेहाल हो गई और गिड़गिड़ाते स्वर में मुझसे जल्दी चोदने की याचना करने लगी।
जिसके बाद मैंने उसके सुन्दर कोमल चूतड़ों पर एक चांटा जड़ दिया और उससे बोला- बस अभी शुरू करता हूँ।

मेरे द्वारा उसके चूतड़ों पर चांटा मारने से उसका चूतड़ लाल पड़ गया था और उसके मुख से एक दर्द भरी ‘आह्ह्ह... ह्ह्ह’ सिसकारी निकल गई जो कि काफी आनन्दभरी थी।

मुझे उसकी इस ‘आह’ पर बहुत आनन्द आया था.. इसीलिए मैंने बिना सोचे-समझे.. उसके दोनों चूतड़ों पर एक बार फिर से चांटे मारे.. जिससे उसकी फिर से मस्त ‘आआआअह’ निकल गई।

वो बोलने लगी- प्लीज़ अब और न तरसाओ.. जल्दी से पेल दो..

फिर मैंने अपने लौड़े को धीरे से उसकी चूत के छेद पर सैट किया और उसके चूतड़ को नीचे की ओर दबाकर अपने लंड को उसकी चूत में धकेला जिससे शालिनी के मुख से एक सिसकारी ‘श्ह्ह्ह्ह्ह्ह’ निकल गई और मेरा लौड़ा लगभग आधा.. शालिनी की चूत में सरकता हुआ चला गया और मैंने फिर से अपने लौड़े को थोड़ा बाहर निकालकर फिर थोड़ा तेज़ अन्दर को धकेल दिया..

जिसे शालिनी बर्दास्त न कर पाई और फिर से उसके मुख से एक चीख निकल गई।

‘आआअह्हा.... आआआ... हाआआआ.. श्ह्ह्ह्ह ’

मैंने इस बार बिना रुके शालिनी आंटी की चुदाई चालू रखी। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था मैंने पोर्न फिल्म देखते वक़्त भी सोचा था कि जीवन में इस तरह एक बार जरूर चोदूँगा.. पर मेरी इच्छा इतनी जल्द पूरी हो जाएगी, इसकी कल्पना न की थी।

अब मैं धीरे-धीरे शालिनी आंटी की चूत में अपना लंड आगे-पीछे करने लगा.. जिससे आंटी को भी थोड़ी देर में आनन्द आने लगा और वो भी प्रतिक्रिया में अपनी गांड पीछे दबा-दबा कर सिसियाते चुदवाने लगी ‘अह्ह्हह्ह्ह्ह उउउह्ह्ह्ह्ह् श्ह्ह्ह्ह’

सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने आनन्द को और बढ़ाने के लिए उसके चूतड़ों पर फिर से चांटे मारे.. जिससे शालिनी कराह उठती ‘आआआह..... दर्द होता है जान..’

इस मरमरी अदा से उसने अपनी गर्दन घुमाकर मेरी ओर देखा था कि मैं तो उसका दीवाना हो गया और मैंने अपने हाथों को उसके चुचियों पर रख दिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाते हुए दबाने लगा और कभी-कभी उसके निप्पलों को अपने अंगूठों से दबा देता.. जिससे आंटी का कामजोश दुगना हो जाता और वो तेज़-तेज़ से चुदवाने लगती।

फिर शालिनी को मैंने उतारा और अब मैं सोफे पर बैठ गया और उसे मैंने अपने ऊपर बैठने को बोला। वो समझ गई और मेरी ओर पीठ करके मेरे लंड को हाथ से अपनी चूत पर सैट करके धीरे से पूरा लंड निगल गई.. जैसे कोई अजगर अपने शिकार को निगल जाता है।

फिर मैंने उसके चुचियों को रगड़ना और मसलना चालू किया.. जिससे वो अपने आप का काबू खो बैठी और तेज़-तेज़ से चुदाई करने लगी। मुझे इतना आनन्द आ रहा था कि पता ही न चला कि हम दोनों का रस कब एक-दूसरे की कैद से आज़ाद होकर मिलन की ओर चल दिया।

उसकी और मेरी.. हम दोनों की साँसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि दोनों की साँसों को थमने में 10 मिनट लग गए और फिर हम दोनों एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे।

फिर उसने मेरी ओर बहुत ही प्यार भरी नज़रों से देखते हुए एक संतुष्टि भरी मुस्कान फेंकी.. तो मैंने भी उसकी इस अदा का जवाब उसकी आँखों को चूमकर दिया और पूछा- तुम्हें कैसा लगा?

तो वो बोली- सच अनुज … आज तक मुझे ऐसी फीलिंग कभी नहीं हुई.. तुमने तो सच में मुझे बहुत आनन्द दे दिया.. मैं आज बहुत खुश हूँ.. आई लव यू अनुज।

वो ये सब बोलते हुए मेरे लौड़े को सहलाने लगी जो कि उस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई घोड़ा लम्बी दौड़ लगाकर सुस्ता रहा हो और मैं भी उसके शरीर में अपनी ऊँगलियां दौड़ा रहा था.. जिससे दोनों को अच्छा लग रहा था।

मैंने आंटी से बोला- अच्छा मेरे इस खेल में तो तुम मज़ा ले चुकी और तुमने मेरी बात मानकर मेरी इच्छा भी पूरी की है.. तो अब मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि तुम जो कहो मैं वो करूँ।

तो शालिनी आंटी बोली- यार मुझे क्या पता था इसमें उससे कहीं ज्यादा मज़ा आएगा.. पर तुम अगर जानना चाहते हो कि मेरी इच्छा क्या थी.. तो तुम मेरे साथ मेरे कमरे में चलो..

इतना कहकर आंटी उठी और मेरा हाथ थाम कर साथ चलने का इशारा किया.. तो मैं भी खड़ा हो गया और मैंने अपना बायाँ हाथ उसकी पीठ की तरफ से कन्धों के नीचे ले जाकर उसके बाएं चूंचियां को पकड़ लिया।

उसने मेरी इस हरकत पर प्यार से अपने दायें हाथ से मेरे गाल पर एक हलकी थाप देकर बोली- बहुत बदमाश हो गए हो.. कोई मौका नहीं छोड़ते.. तो मैंने धीरे से बोला- तुम हो ही इतनी मस्त.. कि मेरी जगह कोई भी होता तो यही करता..

यह कहते हुए एक बार फिर से मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर कर जोरदार तरीके से चूसा.. जिससे उसके होंठ लाल हो गए।

होंठ छूटते ही आंटी बोली- सच अनुज तुम्हारी यही अदा मुझे तुम्हारा दीवाना बनने में मजबूर कर देती है.. खूब अच्छे से रगड़ लेते हो.. लगता नहीं है कि तुम इस खेल में नए हो।

तब तक हम दोनों कमरे में आ चुके थे.. फिर आंटी और मैं दोनों वाशरूम गए.. वहाँ उसने गीजर ऑन किया।

अभी तक मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आंटी चाहती क्या है.. तो मैंने उससे पूछा- गीजर क्यों ऑन किया?

तो बोली- आज मुझे भी अपनी एक इच्छा पूरी करनी है।

तो मैंने आश्चर्य से उससे पूछा- कैसी इच्छा?
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RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Raghu - 18-10-2026, 09:22 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 22-10-2026, 01:10 PM
Mother secret Affair episode 2 - by Puja3567853 - 19-04-2025, 10:01 PM



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