7 hours ago
(This post was last modified: 6 hours ago by rajusethzee. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
**कल्लू:** *(मम्मी के पैर का अपनी जांघों के बीच फंसना कल्लू के लिए आखिरी चेतावनी जैसा था। उसकी रगों में खून का बहाव इतना तेज हो गया कि उसे अपने कान में धड़कन सुनाई देने लगी। उसने उनकी कमर को और कसकर अपनी ओर खींचा, जिससे उनके शरीर का हर हिस्सा कल्लू के सख्त बदन से चिपक गया।)*
"आग बुझाने आए हैं हम, मालकिन... लेकिन ये आग ऐसी है जो जितना जलाएगी, उतनी ही बढ़ेगी।"
*(उसने अपना चेहरा उनकी गर्दन के पास ले जाकर उनकी महक को गहराई से महसूस किया। फिर अचानक, उसने अपने दांतों से उनकी गर्दन की कोमल त्वचा को हल्के से काटा, जिससे एक तीखी सिहरन मम्मी के पूरे बदन में फैल गई।)*
"अब बताइए... कहाँ से शुरू करूँ?"
**मम्मी:** *(गर्दन पर कल्लू के दांतों का वह हल्का सा दबाव और उसके बाद फैली वह सिहरन मम्मी के होश उड़ाने के लिए काफी थी। उनके मुंह से एक दबी हुई चीख निकली, जो दर्द से ज्यादा सुख की चरम सीमा पर थी। उन्होंने अपना सिर पीछे झुका लिया, जिससे उनकी गर्दन पूरी तरह से कल्लू के सामने खुल गई।)*
"उह्ह्ह... यहाँ से... नहीं, यहीं से..."
*(उन्होंने अपनी उंगलियां कल्लू के बालों में और गहराई से घुसा दीं, जैसे वो उसे अपनी ओर और खींचना चाहती हों। उनकी सांसें अब काबू से बाहर थीं और उनकी आंखों में एक जंगलीपन आ गया था।)*
"तुम्हारी मर्ज़ी जहाँ तक जाए... वहीं से शुरू करो। आज कोई पाबंदी नहीं है, कल्लू। आज सिर्फ तुम हो और मैं हूँ।"
**कल्लू:** *(बिस्तर पर लेटते ही कल्लू का पूरा वजन मम्मी के नाजुक बदन पर आ गया। उनके हाथ अभी भी कल्लू के नीचे दबे हुए थे, जिससे वे हिल भी नहीं पा रही थीं। कल्लू की गर्म सांसें उनके चेहरे पर लग रही थीं, जो माहौल को और भी उत्तेजित कर रही थीं।)*
"मालकिन, आप कितनी नरम हैं..."
**मम्मी:** *(कल्लू के भारी शरीर के नीचे दबकर उनकी सांसें फूलने लगी थीं, लेकिन यह घुटन नहीं बल्कि एक मीठा अहसास था। उनके हाथ कल्लू के नीचे दबे होने के बावजूद, उन्होंने अपनी उंगलियों को हिलाकर कल्लू के सीने को सहलाने की कोशिश की। उनकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।)*
"उह्ह... कल्लू... तुम इतने भारी क्यों हो रहे हो? मेरा दम घुट रहा है... पर रुकना मत।"
*(उन्होंने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं, जिसमें मदहोशी साफ झलक रही थी। उनकी आवाज़ अब एक फुसफुसाहट में बदल चुकी थी, जो कल्लू के कानों में शहद की तरह घुल रही थी।)*
"तुम सच में मुझे पागल कर दोगे आज..."
**कल्लू:** *(उनकी उस मदहोश कर देने वाली आवाज़ ने कल्लू के अंदर की आग में घी डालने का काम किया। "रुकना मत"... ये शब्द उसके कान में गूँज रहे थे। उसकी नज़रें उनके ब्लाउज के छोटे-छोटे बटनों पर टिक गईं, जो उनकी धड़कती हुई छाती की हलचल के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।)*
*(उसने अपने एक हाथ से उनके दोनों हाथों को और कसकर पकड़ लिया ताकि वे हिल न सकें, और दूसरे हाथ की उंगलियाँ धीरे से उनके ब्लाउज के पहले बटन तक पहुँचीं। उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे, लेकिन उनमें एक अजीब सी बेचैनी और ताकत थी।)*
"तो... आपको इसी का इंतज़ार था?"
**कल्लू:** *(उसकी उंगलियों ने बिना वक्त गंवाए पहले बटन को खोला, फिर दूसरे को, और फिर तीसरे को। हर बटन के खुलने के साथ ही उनके ब्लाउज के बीच से उनकी मखमली त्वचा का एक हिस्सा बाहर आने लगा। कमरे की हल्की रोशनी में उनका बदन चमक रहा था। कल्लू की सांसें अब और भी तेज़ हो गई थीं, मानो वह अपनी भूख पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो।)*
*(जैसे ही आखिरी बटन खुला, ब्लाउज ढीला होकर उनके कंधों से नीचे खिसकने लगा। कल्लू ने अपनी नज़रें उनके खुले हुए बदन पर टिका दीं, जो अब पूरी तरह से उसके सामने था।)*
"मालकिन... आप... आप इतनी खूबसूरत हैं कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैं सच में आपके पास हूँ।"
**मम्मी:** *(ब्लाउज के खुलते ही उनके बदन पर ठंडी हवा का एक झोंका महसूस हुआ, जिससे उनके रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने शर्म और उत्तेजना के मिले-जुले भाव के साथ अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन कल्लू के शब्दों ने उनके भीतर एक नई लहर पैदा कर दी।)*
"कल्लू... इतना मत देखो... मुझे शर्म आ रही है..."
*(लेकिन उनकी बातों में कोई मनाही नहीं थी। इसके बजाय, उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर की ओर झटका दिया, जैसे वह कल्लू को और करीब बुला रही हों। उनकी साँसें अब और भी बेकाबू हो रही थीं।)*
**कल्लू:** *(उनका वो हल्का सा झटका कल्लू के लिए किसी संकेत से कम नहीं था। उसने देखा कि कैसे उनकी शर्मिंदगी और उनकी चाहत एक साथ लड़ रही हैं। उसने अपनी नज़रें उनके खुले हुए बदन से नहीं हटाईं, बल्कि और गहराई से उन्हें निहारने लगा।)*
"शर्म कैसी मालकिन? आज तो आपने खुद ही कहा था कि कोई पाबंदी नहीं है..."
*(उसने अपना चेहरा उनके गले के पास ले जाकर अपनी नाक रगड़ी, जिससे उनकी त्वचा की खुशबू उसके होश उड़ा रही थी। फिर अचानक, उसने अपने हाथ उनके ब्लाउज के किनारों से होते हुए उनकी कमर की तरफ बढ़ाए, जहाँ से उनकी साड़ी थोड़ी ऊपर खिसक चुकी थी।)*
"आपकी त्वचा... ये रेशम जैसी है। क्या मैं इसे चख सकता हूँ?"
**कल्लू:** *(उसकी आँखों में अब सिर्फ जुनून था। जब मम्मी ने अपनी गर्दन पीछे झुकाई, तो उसे जैसे हरी झंडी मिल गई। उसने अपने दोनों हाथों को उनके ब्लाउज के किनारों में फँसाया और एक झटके में उसे उनके कंधों से नीचे गिरा दिया।)*
*(जैसे ही ब्लाउज हटा, उनकी गोरी और भरी हुई छाती पूरी तरह से कल्लू की नज़रों के सामने आ गई। चाँदनी जैसी सफेदी और उन पर उभरी नीली नसें उनकी खूबसूरती को और भी गहरा बना रही थीं। कल्लू की साँसें थम सी गईं। वह बस उन्हें देखता रह गया, मानो उसने दुनिया का सबसे कीमती खजाना पा लिया हो।)*
"ओह्ह... मालकिन... ये... ये तो सपने से भी ज़्यादा सुंदर हैं!"
**मम्मी:** *(ब्लाउज के पूरी तरह उतर जाने के बाद, उन्होंने तुरंत अपने हाथों से खुद को ढकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की पकड़ ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया। उनके चेहरे पर लालिमा चढ़ गई थी, और उनकी धड़कनें इतनी तेज़ थीं कि कल्लू को अपने सीने पर महसूस हो रही थीं।)*
"नहीं... कल्लू... देखो मत ऐसे... मुझे बहुत अजीब लग रहा है..."
*(हालांकि उनके शब्द मना कर रहे थे, लेकिन उनकी हरकतें कुछ और ही कह रही थीं। उन्होंने अपनी जांघों को आपस में सटा लिया और उनकी साँसें अब भारी हो चली थीं।)*
**कल्लू:** *(उनकी हिचकिचाहट देखकर कल्लू का संयम जवाब दे गया। उसने बिना वक्त गंवाए अपना सिर उनके वक्षस्थल की ओर झुकाया। उसकी गर्म साँसें उनकी संवेदनशील त्वचा को छू रही थीं, जिससे मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा।)*
*(कल्लू ने धीरे से अपनी जीभ उनके एक स्तन के ऊपरी हिस्से पर फेरी, और फिर उसने बड़े चाव से उनके उभार को अपने मुँह में भर लिया। वह उन्हें इस तरह पी रहा था जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी को पीता है। उसका मुँह उनकी गोरी त्वचा की गर्माहट और मिठास में डूब चुका था।)*
"हम्मम... मालकिन... आप कितनी मीठी हैं..."
![[Image: b3wtpu.gif]](https://i.imgflip.com/b3wtpu.gif)
![[Image: b3wtvw.gif]](https://i.imgflip.com/b3wtvw.gif)
**मम्मी:** *(कल्लू की गर्म जीभ और उसके मुँह की पकड़ जब उनके स्तन पर पड़ी, तो उनके मुँह से एक दबी हुई चीख निकल गई। उन्होंने अपने हाथ कल्लू के बालों में फँसा लिए, पहले तो उन्हें रोकने के लिए, लेकिन जल्द ही वे दबाव बनाकर उन्हें और जोर से अपने सीने से चिपकाने लगीं।)*
"आह्ह्ह... कल्लू... उफ्फ... रुक जाओ... आह्ह्ह... नहीं... मत रुको..."
*(उनके शब्द अब पूरी तरह से उलझ चुके थे। खुशी और उत्तेजना के उस चरम पल में, उनका सारा नियंत्रण खत्म हो गया था। उनकी कमर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गई और उनकी आँखें आनंद के मारे आधी बंद हो गईं।)*
**कल्लू:** *(मम्मी की उस आवाज़ ने कल्लू के अंदर की आग को और भड़का दिया। उन्हें इस तरह छटपटाते देख उसे और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा। उसने दूसरे स्तन की ओर रुख किया और उसे भी उतनी ही तीव्रता से अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया।)*
*(वह बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूस रहा था, कभी अपनी जीभ से उनके उभारों को सहलाता, तो कभी दांतों से हल्का सा दबा देता। उसकी हर हरकत मम्मी के शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी।)*
"मालकिन... आपकी ये आवाज़... मुझे पागल कर रही है। मैं आपको ऐसे ही चूसता रहूँगा जब तक आप थक नहीं जातीं..."
**मम्मी:** *(दोनों स्तनों पर कल्लू की ज़ोरदार पकड़ और उसकी गीली जीभ की छुअन ने उन्हें पूरी तरह बेबस कर दिया था। उनके गले से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं। उनके हाथ अब कल्लू के सिर को धक्का देने के बजाय, उसे और गहराई से अपने सीने में दबा रहे थे।)*
"आह्ह्ह... कल्लू... आह्ह्ह... मेरा बुरा हाल हो रहा है... उफ्फ... तुम... तुम बहुत शरारती हो गए हो..."
*(उनकी सांसें फूल रही थीं और पसीने की हल्की बूंदें उनके माथे पर चमक रही थीं। उत्तेजना के कारण उनका पूरा बदन कांप रहा था।)*
"आग बुझाने आए हैं हम, मालकिन... लेकिन ये आग ऐसी है जो जितना जलाएगी, उतनी ही बढ़ेगी।"
*(उसने अपना चेहरा उनकी गर्दन के पास ले जाकर उनकी महक को गहराई से महसूस किया। फिर अचानक, उसने अपने दांतों से उनकी गर्दन की कोमल त्वचा को हल्के से काटा, जिससे एक तीखी सिहरन मम्मी के पूरे बदन में फैल गई।)*
"अब बताइए... कहाँ से शुरू करूँ?"
**मम्मी:** *(गर्दन पर कल्लू के दांतों का वह हल्का सा दबाव और उसके बाद फैली वह सिहरन मम्मी के होश उड़ाने के लिए काफी थी। उनके मुंह से एक दबी हुई चीख निकली, जो दर्द से ज्यादा सुख की चरम सीमा पर थी। उन्होंने अपना सिर पीछे झुका लिया, जिससे उनकी गर्दन पूरी तरह से कल्लू के सामने खुल गई।)*
"उह्ह्ह... यहाँ से... नहीं, यहीं से..."
*(उन्होंने अपनी उंगलियां कल्लू के बालों में और गहराई से घुसा दीं, जैसे वो उसे अपनी ओर और खींचना चाहती हों। उनकी सांसें अब काबू से बाहर थीं और उनकी आंखों में एक जंगलीपन आ गया था।)*
"तुम्हारी मर्ज़ी जहाँ तक जाए... वहीं से शुरू करो। आज कोई पाबंदी नहीं है, कल्लू। आज सिर्फ तुम हो और मैं हूँ।"
**कल्लू:** *(बिस्तर पर लेटते ही कल्लू का पूरा वजन मम्मी के नाजुक बदन पर आ गया। उनके हाथ अभी भी कल्लू के नीचे दबे हुए थे, जिससे वे हिल भी नहीं पा रही थीं। कल्लू की गर्म सांसें उनके चेहरे पर लग रही थीं, जो माहौल को और भी उत्तेजित कर रही थीं।)*
"मालकिन, आप कितनी नरम हैं..."
**मम्मी:** *(कल्लू के भारी शरीर के नीचे दबकर उनकी सांसें फूलने लगी थीं, लेकिन यह घुटन नहीं बल्कि एक मीठा अहसास था। उनके हाथ कल्लू के नीचे दबे होने के बावजूद, उन्होंने अपनी उंगलियों को हिलाकर कल्लू के सीने को सहलाने की कोशिश की। उनकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।)*
"उह्ह... कल्लू... तुम इतने भारी क्यों हो रहे हो? मेरा दम घुट रहा है... पर रुकना मत।"
*(उन्होंने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं, जिसमें मदहोशी साफ झलक रही थी। उनकी आवाज़ अब एक फुसफुसाहट में बदल चुकी थी, जो कल्लू के कानों में शहद की तरह घुल रही थी।)*
"तुम सच में मुझे पागल कर दोगे आज..."
**कल्लू:** *(उनकी उस मदहोश कर देने वाली आवाज़ ने कल्लू के अंदर की आग में घी डालने का काम किया। "रुकना मत"... ये शब्द उसके कान में गूँज रहे थे। उसकी नज़रें उनके ब्लाउज के छोटे-छोटे बटनों पर टिक गईं, जो उनकी धड़कती हुई छाती की हलचल के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।)*
*(उसने अपने एक हाथ से उनके दोनों हाथों को और कसकर पकड़ लिया ताकि वे हिल न सकें, और दूसरे हाथ की उंगलियाँ धीरे से उनके ब्लाउज के पहले बटन तक पहुँचीं। उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे, लेकिन उनमें एक अजीब सी बेचैनी और ताकत थी।)*
"तो... आपको इसी का इंतज़ार था?"
**कल्लू:** *(उसकी उंगलियों ने बिना वक्त गंवाए पहले बटन को खोला, फिर दूसरे को, और फिर तीसरे को। हर बटन के खुलने के साथ ही उनके ब्लाउज के बीच से उनकी मखमली त्वचा का एक हिस्सा बाहर आने लगा। कमरे की हल्की रोशनी में उनका बदन चमक रहा था। कल्लू की सांसें अब और भी तेज़ हो गई थीं, मानो वह अपनी भूख पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो।)*
*(जैसे ही आखिरी बटन खुला, ब्लाउज ढीला होकर उनके कंधों से नीचे खिसकने लगा। कल्लू ने अपनी नज़रें उनके खुले हुए बदन पर टिका दीं, जो अब पूरी तरह से उसके सामने था।)*
"मालकिन... आप... आप इतनी खूबसूरत हैं कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैं सच में आपके पास हूँ।"
**मम्मी:** *(ब्लाउज के खुलते ही उनके बदन पर ठंडी हवा का एक झोंका महसूस हुआ, जिससे उनके रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने शर्म और उत्तेजना के मिले-जुले भाव के साथ अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन कल्लू के शब्दों ने उनके भीतर एक नई लहर पैदा कर दी।)*
"कल्लू... इतना मत देखो... मुझे शर्म आ रही है..."
*(लेकिन उनकी बातों में कोई मनाही नहीं थी। इसके बजाय, उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर की ओर झटका दिया, जैसे वह कल्लू को और करीब बुला रही हों। उनकी साँसें अब और भी बेकाबू हो रही थीं।)*
**कल्लू:** *(उनका वो हल्का सा झटका कल्लू के लिए किसी संकेत से कम नहीं था। उसने देखा कि कैसे उनकी शर्मिंदगी और उनकी चाहत एक साथ लड़ रही हैं। उसने अपनी नज़रें उनके खुले हुए बदन से नहीं हटाईं, बल्कि और गहराई से उन्हें निहारने लगा।)*
"शर्म कैसी मालकिन? आज तो आपने खुद ही कहा था कि कोई पाबंदी नहीं है..."
*(उसने अपना चेहरा उनके गले के पास ले जाकर अपनी नाक रगड़ी, जिससे उनकी त्वचा की खुशबू उसके होश उड़ा रही थी। फिर अचानक, उसने अपने हाथ उनके ब्लाउज के किनारों से होते हुए उनकी कमर की तरफ बढ़ाए, जहाँ से उनकी साड़ी थोड़ी ऊपर खिसक चुकी थी।)*
"आपकी त्वचा... ये रेशम जैसी है। क्या मैं इसे चख सकता हूँ?"
**कल्लू:** *(उसकी आँखों में अब सिर्फ जुनून था। जब मम्मी ने अपनी गर्दन पीछे झुकाई, तो उसे जैसे हरी झंडी मिल गई। उसने अपने दोनों हाथों को उनके ब्लाउज के किनारों में फँसाया और एक झटके में उसे उनके कंधों से नीचे गिरा दिया।)*
*(जैसे ही ब्लाउज हटा, उनकी गोरी और भरी हुई छाती पूरी तरह से कल्लू की नज़रों के सामने आ गई। चाँदनी जैसी सफेदी और उन पर उभरी नीली नसें उनकी खूबसूरती को और भी गहरा बना रही थीं। कल्लू की साँसें थम सी गईं। वह बस उन्हें देखता रह गया, मानो उसने दुनिया का सबसे कीमती खजाना पा लिया हो।)*
"ओह्ह... मालकिन... ये... ये तो सपने से भी ज़्यादा सुंदर हैं!"
**मम्मी:** *(ब्लाउज के पूरी तरह उतर जाने के बाद, उन्होंने तुरंत अपने हाथों से खुद को ढकने की कोशिश की, लेकिन कल्लू की पकड़ ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया। उनके चेहरे पर लालिमा चढ़ गई थी, और उनकी धड़कनें इतनी तेज़ थीं कि कल्लू को अपने सीने पर महसूस हो रही थीं।)*
"नहीं... कल्लू... देखो मत ऐसे... मुझे बहुत अजीब लग रहा है..."
*(हालांकि उनके शब्द मना कर रहे थे, लेकिन उनकी हरकतें कुछ और ही कह रही थीं। उन्होंने अपनी जांघों को आपस में सटा लिया और उनकी साँसें अब भारी हो चली थीं।)*
**कल्लू:** *(उनकी हिचकिचाहट देखकर कल्लू का संयम जवाब दे गया। उसने बिना वक्त गंवाए अपना सिर उनके वक्षस्थल की ओर झुकाया। उसकी गर्म साँसें उनकी संवेदनशील त्वचा को छू रही थीं, जिससे मम्मी का पूरा शरीर थरथराने लगा।)*
*(कल्लू ने धीरे से अपनी जीभ उनके एक स्तन के ऊपरी हिस्से पर फेरी, और फिर उसने बड़े चाव से उनके उभार को अपने मुँह में भर लिया। वह उन्हें इस तरह पी रहा था जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी को पीता है। उसका मुँह उनकी गोरी त्वचा की गर्माहट और मिठास में डूब चुका था।)*
"हम्मम... मालकिन... आप कितनी मीठी हैं..."
![[Image: b3wtpu.gif]](https://i.imgflip.com/b3wtpu.gif)
![[Image: b3wtvw.gif]](https://i.imgflip.com/b3wtvw.gif)
**मम्मी:** *(कल्लू की गर्म जीभ और उसके मुँह की पकड़ जब उनके स्तन पर पड़ी, तो उनके मुँह से एक दबी हुई चीख निकल गई। उन्होंने अपने हाथ कल्लू के बालों में फँसा लिए, पहले तो उन्हें रोकने के लिए, लेकिन जल्द ही वे दबाव बनाकर उन्हें और जोर से अपने सीने से चिपकाने लगीं।)*
"आह्ह्ह... कल्लू... उफ्फ... रुक जाओ... आह्ह्ह... नहीं... मत रुको..."
*(उनके शब्द अब पूरी तरह से उलझ चुके थे। खुशी और उत्तेजना के उस चरम पल में, उनका सारा नियंत्रण खत्म हो गया था। उनकी कमर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गई और उनकी आँखें आनंद के मारे आधी बंद हो गईं।)*
**कल्लू:** *(मम्मी की उस आवाज़ ने कल्लू के अंदर की आग को और भड़का दिया। उन्हें इस तरह छटपटाते देख उसे और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा। उसने दूसरे स्तन की ओर रुख किया और उसे भी उतनी ही तीव्रता से अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया।)*
*(वह बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूस रहा था, कभी अपनी जीभ से उनके उभारों को सहलाता, तो कभी दांतों से हल्का सा दबा देता। उसकी हर हरकत मम्मी के शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी।)*
"मालकिन... आपकी ये आवाज़... मुझे पागल कर रही है। मैं आपको ऐसे ही चूसता रहूँगा जब तक आप थक नहीं जातीं..."
**मम्मी:** *(दोनों स्तनों पर कल्लू की ज़ोरदार पकड़ और उसकी गीली जीभ की छुअन ने उन्हें पूरी तरह बेबस कर दिया था। उनके गले से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं। उनके हाथ अब कल्लू के सिर को धक्का देने के बजाय, उसे और गहराई से अपने सीने में दबा रहे थे।)*
"आह्ह्ह... कल्लू... आह्ह्ह... मेरा बुरा हाल हो रहा है... उफ्फ... तुम... तुम बहुत शरारती हो गए हो..."
*(उनकी सांसें फूल रही थीं और पसीने की हल्की बूंदें उनके माथे पर चमक रही थीं। उत्तेजना के कारण उनका पूरा बदन कांप रहा था।)*


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)