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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
#12
अब.......

फिर क्या था.. मैं भी शालिनी को चोदने की इच्छा रखते हुए बेसब्री के साथ उस दिन का इंतज़ार करने लगा।

इसी इन्तजार में धीरे-धीरे दो हफ्ता बीत गया। इस बीच मेरी और शालिनी की लगभग रोज मोबाइल पर बात होने लगी। फिर एक सुबह शालिनी ने मोबाइल से मुझसे सुचना दी शुभम बैंक का एग्जाम देने के लिए अगले दिन दूसरे शहर जा रहा हैं।

खैर.. जैसे-तैसे शाम हुई और मेरे मन उलझन में फंसता चला गया.. यह सोचकर कि अब कल क्या होगा.. मेरी इच्छा कल पूरी हो भी पाएगी या नहीं? यही सोचते-सोचते कब रात हुई.. पता भी न चला।

मैं शालिनी के ख्यालों में इस कदर खो जाऊँगा.. मुझे यकीन ही न था।

फिर मैंने रात खाना खाया और सीधे अपने कमरे में जाकर आने वाले कल का बेसब्री के साथ इंतज़ार करते-करते कब आँख लग गई.. पता ही न चला।

फिर मैं सुबह उठकर अच्छे से तैयार होकर ढेर सारे अरमानों को समेटे हुए शालिनी के घर की ओर चल दिया।

जब मैं उनके घर पहुँच गया.. तब मेरे फोन पर शुभम का कॉल आ या । फिर मैंने दरवाजे की घन्टी बजाई… तो थोड़ी देर बाद आंटी आई और उसने दरवाजा खोला। जैसे ही दरवाजा खुला.. मेरा तो हाल बहुत ही खराब हो गया। वो आज इतनी गजब की लग रही थी जो कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।

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बिल्कुल किसी अप्सरा की तरह उसने आज काले रंग का अनारकली सूट पहन रखा था.. बालों को खोलकर हेयरपिन से बाँधा हुआ था..जो कि उसकी सुंदरता को चार चाँद लगाने के लिए काफी थे।

शायद आंटी काफी फैशनेबुल थीं.. बाकायदा मेकअप वगैरह सब कर रखा था। उन्हें देखकर लग ही नहीं रहा था कि 39 वर्ष की हैं और एक बच्चे की माँ है। मैं तो उनको 10 मिनट तक आँखें फाड़े देखता ही रहा।

फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ते हुए.. मुझसे बोला- कहाँ खो गए?

तो मैं अपने आपको सम्हाल.. नहीं पाया मेरी हालत ऐसी हो गई.. जैसे मैं अभी नींद से जागा हूँ…
मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मेरा नया फ़ोन जो कि मेरी बर्थ-डे पर मेरे पापा ने गिफ्ट किया था… अचानक गिर गया.. जिससे उसका डिस्प्ले ख़राब हो गया,फिर उन्होंने मुझे अपने कमरे में जाने को बोला और खुद चाय बनाने के लिए रसोई की तरफ चल दी।


जब मैं कमरे में पहुंचा , जहाँ मैंने देखा काफी अच्छा और बड़ा सा डबल-बेड पड़ा था.. उस पर डनलप का गद्दा और अच्छी सी कॉटन की चादर बिछी हुई थी.. काफी अच्छा कमरा था। फिर बिस्तर के बगल वाली टेबल पर बड़ा सा शीशा लगा था.. टेबल पर जैतून के तेल की बोतल देखकर मैं समझ गया कि आज तेरी इच्छा जरूर पूरी होगी।

फिर मैं उनके बिस्तर पर बैठकर गहरी सोच में चला गया.. थोड़ी देर बाद शालिनी आई और मुझे चाय देकर मेरे बगल में ही सटकर बैठ गई.. जिससे उसके बदन की मादक महक मुझे तड़पाने लगी।

उसके बदन की गर्मी से मेरा मन विचलित हो गया.. जिससे मेरा लंड कब खड़ा हुआ.. मुझे पता ही न चला।फिर मैंने उसके चेहरे की ओर देखा तो वो हँसते हुए मुझे घूरे जा रही थी।

तो मैंने बोला- तड़पा तो चुकी हो.. अब क्या मारने का इरादा है?

इस पर वो मेरे मुँह पर ऊँगली रखते हुए बोली- ऐसा अब मत बोलना.. क्योंकि जिससे प्यार होता है.. उसे कभी मारा नहीं जा सकता। इतना कहकर वो अपने मुलायम मखमली होंठों को मेरे होंठों पर रखकर चूसने लगी। मैं और वो दोनों कम से कम 10 मिनट तक एक-दूसरे को यूं ही चूमते रहे।

फिर मैंने उससे अलग होते हुए कहा- आज नहीं.. कहीं अंकिता आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी।

तो शालिनी ने किलकारी मारकर हँसना चालू कर दिया। मैंने पूछा- इसमें हंसने कि किया बात है ?

तो वो बोली- आज और कल तुम चिल्लाओगे तो भी कोई नहीं आने वाला , रही बात अंकिता की तो मैं उसे संभाला लुंगी।
फिर मुझसे लिपट कर मेरे होंठों पर अपने होंठों को रखकर चूमने लगी।
क्या मस्त फीलिंग आ रही थी.. मैं बता ही नहीं सकता.. मैं तो जन्नत की सैर पर था। फिर मैं भी उसके पंखुड़ियों के समान कोमल होंठों को धीरे-धीरे चूसने लगा हम एक-दूसरे को चूसने में इतना खो गए कि हमें होश ही न रहा। करीब 20 मिनट की चुसाई के बाद मैंने उनके शरीर पर होंठों को चूसते हुए हाथ चलाने चालू किए.. जिससे वो और बहकने लगी और मेरे होंठों को चूसते-चूसते काटने लगी।

फिर उसने एकदम से मुझे अलग किया और बोली- तुम मुझे बहुत पसंद हो.. आज हर तरह से मुझे अपना बना लो और मुझे जिंदगी का असली मज़ा दे दो… मैं इस मज़े के लिए बहुत दिनों से तड़प रही हूँ.. अब मुझे अपना बना लो..।

उसने अपनी कुर्ती को उतार दिया और मुझसे बोली- तुम भी अपने कपड़े उतार दो.. आज हम बिना कपड़ों के ही रहेंगे।

फिर उसने अपनी सलवार भी उतार दी और तब तक मैं भी अपने सारे कपड़े उतार चुका था। अब मैं और शालिनी सिर्फ अंडरगार्मेंट्स में थे। ( मैं उसके बदन का दीवाना तो पहले से ही था, पर आज जब उसे इस अवस्था में देखा तो देखता ही रह गया। ) क्या गजब का माल लग रही थी वो..उसका शरीर किसी मखमली गद्दे की तरह मुलायम लग रहा था और उसकी आँखें बहुत ही मादक लग रही थीं.. जिसे देखकर कोई भी उसका दीवाना हो जाता।

फिर आंटी मेरे पास आई और मेरे गालों को प्यार से चूमते हुए कहने लगी- यह हकीकत है.. मेरे हीरो ख्वाबों से बाहर आओ..

फिर हम दोनों एक-दूसरे को फिर से चूमने लगे।

यह मेरा पहला मौका था जब मैंने किसी महिला को इतनी करीब से देखा था.. मेरे तो समझ के बाहर था कि मैं क्या करूँ।

फिर मैं और वो एक-दूसरे को चुम्बन करते-करते बिस्तर की तरफ चले गए और मैं उसको बिस्तर पर आहिस्ते से लिटाकर उसके बगल में लेट गया।

अब उसकी आँखों में चुदाई का नशा साफ़ दिखने लगा था।

मैंने धीरे से उसके बालों की लटों को सुलझाते हुए उसके सर को सहलाना चालू किया और उसके होंठों का रसपान करने लगा..
जिससे उसके शरीर में सिहरन पैदा हो गई..
मानो कामदेव ने हज़ारों काम के तीरों से उसके शरीर को छलनी कर दिया हो।

इधर मेरा भी लौड़ा एकदम हथौड़ा बन चुका था जो कि उनकी जांघ पर रगड़ मार रहा था। मैंने धीरे से उसको इशारे में ब्रा खोलने को बोला..‌तो वो समझ गई और सीधे लेटकर अपनी पीठ उचका ली ताकि मैं आसानी से ब्रा का हुक खोल सकूँ।

फिर मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके शरीर से उस काले रंग की ब्रा को अलग कर दिया और उसके उठे हुए मस्त चूचियां जो बहुत ही मदमस्त करने वाले थे.. उनको हाथों में लेकर दबाने लगा.. मसलने लगा.. चुचियों पर मेरे हाथों का दबाव पड़ते ही उसकी मादक आवाज़ निकल गई। ‘आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. थोड़ा धीरे करो.. मैं कहीं भागी थोड़ी न जा रही हूँ..’

मैंने आराम से उसके चुचियों को रगड़ना और मसलना चालू किया..जिससे उसके मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं- आआअह्हह्हह.... ऊऊह्ह्हुउउउउउउहु......ऊऊओह्हह.. बहुत अच्छा लग रहा है.. अनुज ऐसे ही रगड़ डाल इन्हें.. आज तक ऐसा अनुभव कभी नहीं मिला है.. हाय.. जरा इनको मुँह से भी चूसो न.. शुभम के बाद से इसे किसी ने भी मुँह में ही नहीं लिया है..

मैंने यह सुनते हो उनके निप्पल को एक-एक करके मुँह से चूसना शुरू कर दिया।

क्या मखमली एहसास था.. कभी-कभी उनके चुचियों के निप्पलों को चूसते-चूसते काट भी लेता.. जिससे शालिनी के मुँह से ‘आअह’ निकल जाती और मुझे आनन्द आता। मैंने इसी तरह उनको तड़पाना चालू कर दिया.. फिर वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मैंने और उन्होंने एक बार फिर से एक-दूसरे को लॉलीपॉप की तरह चूसने की प्रक्रिया दोहराई।

फिर मैं टेबल पर रखे जैतून के तेल की शीशी को लिया और उन्हें पेट के बल लेटने को बोला और उनकी पीठ पर ऊपर से नीचे की ओर तेल की बूँदें गिराईं। उनकी कमर तक और फिर अपनी हथेलियों में भी थोड़ा सा तेल लगा कर उनकी पीठ पर मालिश करना चालू किया।

धीरे-धीरे मालिश करने से महिलाऐं काफी मस्त हो जाती हैं और इससे चुदाई की आग भी बढ़ जाती है। यह आप चाहे कभी अज़मा कर देख लेना। उसको मालिश में इतना मज़ा आ रहा था कि पूछो ही मत.. वो किसी मादा अज़गर की तरह बस आँखें बंद किए हुए.. मेरे कामुक स्पर्श का आनन्द ले रही थी।

फिर उसकी पीठ को चूमते हुए उसके कान में धीरे से बोला- जरा घूम जाओ.. पीछे हो गया। तब जाकर उन्होंने आँख खोली और मेरे गालों में पप्पी जड़ते हुए बोली- आज तक मैं ऐसे प्यार के लिए तड़प रही थी.. जो मुझे तुमसे मिल रहा है.. आई लव यू अनुज..

यह कहकर वो पीठ के बल लेट गई..

फिर मैंने उनके चुचियों पर तेल डाला और थोड़ा सा नाभि के पास और थोड़ा हथेलियों में लेकर उनके चुचियों की हलके हाथों से मालिश शुरू कर दी..जिससे उसके मुँह से एक सिसकारी निकली- आआआहह.... आह....आआअहह..

शायद वो मेरी मालिश से इतना कामुक हो गई थी कि वो झड़ने लगी..जिसका एहसास उनके हाथ व पैरों की अकड़ी नसों और पैन्टी के अगले हिस्से को देखकर लगाया जा सकता था..

लेकिन मैंने उन्हें यह एहसास नहीं होने दिया क्योंकि मैं उनके अन्दर की आग और भड़काना चाहता था ताकि वो खुद चिल्ला-चिल्ला कर भिखारी की तरह मुझसे लंड मांगें।

जब उसके शरीर की ऐंठन थोड़ी कम हुई तो उसने मेरे हाथों को पकड़कर चूम लिया और बुदबुदाते हुए कहने लगी- अनुज , तुम्हारे हाथों में तो जादू है.. किसी को एक बार प्यार से छू लो तो वो तुम्हारी दीवानी हो जाए।

तो मैंने उन्हें चूमते हुए बोला- मेरी जान.. अभी तो बस तुम्हारा दीवाना बनने का दिल है.. तुम मुझे पहले दिन से ही बहुत पसंद थीं। मैं इस घड़ी के लिए कब से बेकरार था।
यह कहते हुए मैं उसकी जांघ की तरफ गया और थोड़ा सा तेल लेकर उसकी जांघों में मलने लगा.. जिससे उसका जोश दुगना हो गया और वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

‘अहा.. अम्मह… उम्माह… बस्स्स आहह..आहह.. ऐसे ही करते रहो.. अच्छा लग रहा है।’

फिर मैंने उसकी पैन्टी को बगल से पकड़ कर नीचे खींच दिया और उसकी फूली हुई चिकनी फ़ुद्दी को देखकर मन ही मन झूम उठा।

क्या क़यामत ढा रही थी.. एक भी बाल न था जो कि शायद आज ही मेरे लिए उसने साफ़ किए थे।

मैंने आव देखा न ताव और झट से उसके चिकने भाग को चूम लिया जिससे शालिनी किलकारी मार कर हँसने लगी।

मैंने बोला- हँसो मत..

ऐसे हसीन पल को मैं हाथ से नहीं जाने दे सकता था इसलिए खुद को रोक नहीं पाया। मैंने थोड़ा सा हाथों में तेल लिया और उसकी चूत की मालिश चालू कर दी.. जिससे पहले ही काफी तेल निकल चुका था।

धीरे धीरे मैं उसकी आग भड़काने के लिए उसके चूत के दाने को मसलने लगा.. जिसके परिणाम स्वरूप उसने आँखें बंद करके बुदबुदाना चालू कर दिया.. जो काफी मादक था और माहौल को रंगीन कर रहा था। ‘आआआईईस्स्सस्स.. और जोर से आअह्हह हाँ.. ऐसे ही आआआह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है..’

वो एकदम से अकड़कर फिर से झड़ गई उसके कामरस से मेरी ऊँगलियाँ भी भीग गई थीं जो मैंने उसकी पैन्टी से साफ़ कीं और फिर उसकी चूत को भी अच्छे से पौंछकर साफ किया।

फिर वो जब शांत लेटी थी तो मैं ऊपर की ओर जाकर फिर से उसके चुचियों को चूसने लगा जिससे थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी.. पर अब मेरी ‘आअह्ह्ह्ह’ निकलने की बारी थी जो कि मुझे मालूम ही न था। फिर धीरे से उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरी वी-शेप चड्ढी को थोड़ा उठाकर किनारे से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया।

मेरा लौड़ा पहले से ही सांप की तरह फन काढ़े खड़ा था।
उसको देखते ही उनके चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और बड़े प्यार के साथ वो मेरे लंड को मुठियाने लगी.. जिससे मुझे और उन्हें अब दुगना मजा आने लगा था।

फिर हम 69 की अवस्था में आ गए और वो मेरे लंड को छोटे बच्चों की तरह लॉलीपॉप समझकर चूसने लगी और जीभ से रगड़ने लगी। जिससे मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और मैं भी उनकी चूत को आइसक्रीम की तरह चूसने चाटने लगा।

जिससे दोनों चरमोत्कर्ष पर पहुँच गए और सारे कमरे में एक प्रकार का संगीत सा बजने लगा। ‘आआह्ह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह…’

देखते ही देखते दोनों शांत हो गए.. शालिनी को तो होश ही न था क्योंकि वो तीन बार झड़ चुकी थी.. जबकि मैं अभी एक ही बार झड़ा था।

बहुत से लोग समझते हैं कि लड़कियाँ देर से झड़ती हैं.. उनके लिए यह सन्देश है.. वो देर से नहीं झड़ती हैं.. अगर वो किसी के साथ आत्मबंधन में बंधकर सेक्स करती हैं, तो उन्हें चरमोत्कर्ष में पहुँचने में समय नहीं लगता है।

मैं उनके बगल में जाकर लेट गया और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर प्यार करने लगा। जिससे वो भी अपने आप को रोक न पाई और मुझे चूमते हुए बोलने लगी- अनुज आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. मैंने इतना मज़ा पहले कभी भी न लिया था.. इस खेल में, पर तुम तो पूरे खिलाड़ी निकले.. कहाँ थे अभी तक…

वो पागलों की तरह मुझे चूमने और काटने लगी।

फिर से चुम्बनों का दौर शुरू हो चला था जिससे हम दोनों ही मज़े से एक-दूसरे का सहयोग कर रहे थे ।अब मैंने भी समय को ध्यान में रखते हुए देर करना ठीक न समझा क्योंकि मुझे अपने घर से निकले तीन घंटे से ऊपर हो गए थे।

मेरे मन में यह चिंता सता रही थी कि मम्मी फ़ोन कर रही होंगी तो मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा होगा पता नहीं वो कैसा महसूस कर रही होंगी और मैं भी उन्हें फोन नहीं कर सकता था..

आंटी के घर से भी नहीं और मेरा तो मोबाइल पहले ही टूट चुका था..तो मैंने कामसूत्र को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुम्बन करते हुए उनके चुचियों को भी मसलना चालू किया और धीरे-धीरे उनका और मेरा जोश दुगना होता चला गया।

पता नहीं कब हम दोनों के हाथ एक-दूसरे के जननांगों को रगड़ने लगे..जिससे एक बार फिर से ‘आह्ह ऊऊओह्ह ह्ह…’ का संगीत कमरे में गूंजने लगा।

मेरा लौड़ा अपने पूर्ण आकार में आ चुका था और उसकी चूत से भी प्रेम रस बहने लगा था। तभी मैंने देर न करते हुए उनके ऊपर आ गया और उनके चुचियों को रगड़ते और चुम्बन करते हुए अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा..जिससे आंटी का जोश और बढ़ गया।

अब वो जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लौड़े पर अपनी चूत रगड़ने लगी और अब वो किसी भिखारिन की तरह गिड़गिड़ाने लगी- अनुज अब और न तड़पा… डाल दे अन्दर.. और मुझे अपना बना ले..

उसके कामरस से मेरा लौड़ा पूरी तरह भीग चुका था। फिर मैंने उसकी टांगों को उठाकर अपने कन्धों पर रख लीं, जिससे उसकी चूत का मुहाना ऊपर को उठ गया। फिर अपने लौड़े से उसकी चूत पर दो बार थाप मारी.. जिससे उसके पूरे जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।

एक जोर से ‘आअह्ह्ह्ह्ह’ निकालते हुए वो मुझसे बोली- और कितना तड़पाएगा अपनी शालिनी आंटी को.. डाल दे जल्दी से अन्दर.. फिर मैंने उसकी चूत के मुहाने पर लौड़े को सैट करके हल्का सा धक्का दिया.. तो लंड ऊपर की तरफ फिसल गया।
शायद अधिक चिकनाई के कारण या फिर वो काफी दिन बाद चुद रही थी इसलिए..

फिर मैंने उसके चुचियों को पकड़ते हुए बोला- शालिनी जरा मेरी मदद तो करो। तो उसने मेरे लौड़े को फिर से अपनी चूत पर सैट किया और अपने हाथों से चूत के छेद पर दबाव देने लगी।

अब मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझते हुए एक जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई में करीब 2 इंच अन्दर जाकर सैट हो गया।

इस धक्के के साथ ही शालिनी के मुँह से एक दर्द भरी आवाज़ निकल पड़ी- आअह्ह्ह्ह्ह्ह... श्ह्ह्ह्ह...ह्ह्हह्ह…

उसके चेहरे पर दर्द के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे..
तो मैंने उसके पैरों को कन्धों से उतारकर फैला दिए और झुककर उसे चुम्बन करते हुए पूछने लगा- क्या हुआ आंटी.. तुम कहो तो मैं निकाल लेता हूँ.. हम फिर कभी कर लेंगे..

तो शालिनी ने धीरे से अपनी आँखों को खोलते हुए प्यार भरी आवाज़ रुआंसे भाव लेकर मुझसे बोली- काश तुम्हारे जैसा मेरा पति होता.. जो मुझे इतना प्यार देता.. मेरी इज्जत करता.. मेरे दर्द को अपना दर्द समझता.. पर आजकल ऐसा नसीब वाले को ही मिलता है।

फिर मैंने अपनी बात दोहराई- चुदाई हम बाद में कर सकते हैं.. अभी तुमको दर्द हो रहा है.. मुझे क्या मालूम कि इस दर्द के बाद ही असली मज़ा आता है..
तो वह हँसते हुए बोला- अरे मेरे भोले राजा.. जब काफी दिनों बाद या पहली बार कोई लड़की या औरत लौड़ा अपनी चूत में लेती है.. तो उसे दर्द ही होता है.. फिर थोड़ी देर बाद यही दर्द मीठे मज़े में बदल जाता है और जिसकी चूत का पहली बार उदघाटन होता है.. उसको तो खून भी निकलता है.. किसी को ज्यादा या किसी को कम और एक बात और कभी कभी किसी के नहीं भी बहता है.. पर दर्द खून बहाने वाली लड़कियों की तरह ही होता है।

मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मैं इस मामले में अनाड़ी जो था कि ‘एक्सपीरिएंस होल्डर’ के साथ चुदाई करने पर चलो कुछ तो ज्ञान प्राप्त हुआ..

मैं उनके चुचियों को फिर से चूसने और रगड़ने लगा.. जिससे शालिनी को फिर से आनन्द मिलने लगा। ‘आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह्ह्ह…’फिर वो कामुक आवाज़ करते हुए अपनी कमर ऊपर को उठाने लगी और बोलने लगी- चल अब दूसरी पारी भी खेल डाल.. डाल दे अपने लौड़े को अन्दर तक..

तो मैंने भी अपने दिमाग और संयम का प्रयोग करते हुए लौड़े को धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा और बीच-बीच में थोड़ा अन्दर दबाव देकर लौड़े को अन्दर कर देता।

इस तरह मान लो कि जैसे बोरिंग की मशीन काम करती हैं।

उसी मशीन की तरह मैंने उनकी चूत की बोरिंग करते हुए अपने लौड़े को कब उनकी चूत की जड़ तक पहुँचा दिया.. उनको एक बार भी दर्द का अहसास न हुआ और अब तो वो मस्तियां कर कमर चलाने लगी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब मेरा लौड़ा शालिनी की चूत में अपनी जगह बना चुका है तो मैंने भी गति बढ़ा दी..

मेरे गति बढ़ाते ही वो मेरी पीठ पर हाथ रगड़ने लगी- आअह्ह... आआअह्हह्ह.... उउउह्ह्ह.... और जोर से श्ह्ह्ह्हीईईई.. बस ऐसे ही.. करते रहो जान.. बहुत दिनों से ये चूत प्यासी है.. आज बुझा दो इसकी सारी प्यास.. और वो मेरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात करने लगी.. जिससे मेरा भी जोश बढ़ने लगा।

वो मेरी पीठ पर नाख़ून रगड़ रही थी.. जिसका पता मुझे बाद में चला।उस समय मैं इतने आनन्द में था कि मुझे खुद अपना होश भी नहीं था। बस मैं हर हाल में उसे और खुद को चरम की ओर ले जाने में लगा हुआ था।

अब उसने अपने पैरों को मेरी कमर पर कसकर नीचे से गांड उठा-उठा कर ठुकाई करवाना चालू दी थी। शायद वो फिर से झड़ने वाली थी। ‘हाआंणन्न् हाआआआआआ हाआआआआ अनुज ऐसे ही.. और तेज़ मेरा होने वाला है.. बस ऐसे ही करते रहो..’

वो सिसयाते हुए शांत हो गई और अपने पैरों को फिर से मेरी कमर से हटाकर फैला दिया और आँखें बंद करके निढाल सी हो गई।
शायद इतने दिनों बाद इतना झड़ी थी.. जिसकी वजह से वो काफी रिलैक्स फील कर रही थी। मैंने फिर उसके चुचियों को जैसे ही छुआ तो उसने ऑंखें खोलीं और मेरी ओर प्यार भरी निगाहों देखते हुए कहने लगी- आई लव यू अनुज.. तुम न होते तो आज मैं इतना ख़ुशी कभी भी न प्राप्त कर पाती..

तो मैंने बोला- अब मुझे भी ख़ुशी दे दो.. मेरा भी होने के करीब है।

वो एक बार फिर से अपनी टांगों को उठाकर मेरा सहयोग देने लगी जिससे मेरा चरमोत्कर्ष बढ़ने लगा और मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाकर उनकी ठुकाई चालू कर दी।

उनके चूतरस से रस टपक कर उनकी जांघों के नीचे तक बह रहा था जिससे ‘फच्च-फच्च’ की आवाजें आने लगी और देखते ही देखते शालिनी भी आनन्द के सागर में गोते लगाने लगी और दोनों ही बिना किसी की परवाह किए आनन्द के साथ सम्भोग का सुखद अनुभव लेते हुए मुँह से आवाज़ करने लगे- आआआआह्ह्ह्ह.....अह्ह्ह्ह्ह.... इइइइइइस्स्स्स्स्स्स्स..... इस्स्स्स्स्स्स्स.... आआअह.... आआअह…

इसी के साथ मेरा और शालिनी के प्रेम-सागर का संगम होने लगा।

मैं अपने वीर्य के निकलने के साथ ही साथ अपना शरीर ढीला करके शालिनी की बाँहों में चिपक गया।आज मुझे भी पहली बार बहुत आनन्द मिला था जो मुट्ठ मारने से लाख गुना बेहतर था।

मेरी और उसकी साँसें काफी तीव्र गति से चल रही थीं जिसे सामान्य होने में लगभग दस मिनट लगे।

फिर मैंने उसकी बंद आँखों में एक-एक करके चुम्मी ली और उसे प्यार करते हुए ‘आई लव यू’ बोला, जो शालिनी को बहुत ही अच्छा लगा।उसने मुझे फिर से अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मुझ पर चुम्मों की बरसात करते हुए ‘आई लव यू.. आई लव यू.. आई लव यू.. बोलने लगी।

वो मुझसे चिपकते हुए कहने लगी- आज तक इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया.. जो कि मुझे सिर्फ और सिर्फ तुमसे ही मिला है.. मैंने अपने जीवन में सिर्फ दो ही के साथ सेक्स किया है.. एक मेरा पति और एक तुम..
तो मैंने उनसे बोला- अब इतना बोल ही चुकी हो तो रेटिंग भी दे दो।
उसने बोला- यार तेरा तो 10 में 10 है.. क्योंकि सम्भोग के दौरान पहली बार में दो बार झड़ी और उसके पहले 3 बार झड़ चुकी थी.. तुम में जरूर कोई जादू है और एक मेरा पति है जो सिर्फ ठुकाई से ही शुरू कर देता है.. मुझे अच्छा लग रहा है या नहीं.. इससे उसको कोई लेना-देना नहीं होता.. कभी-कभी तो मुझे कुछ भी नहीं हो पाता बल्कि मेरी चूत में जलन होने लगती है.. पर तेरे साथ तो आज सच में मज़ा आ गया.. अब वादा करो मुझे यूं ही हमेशा अपना बनाकर रखोगे।

तो मैंने उनके माथे को चूमते हुए ‘हाँ’ बोल दिया । फिर मैं उठा और उसकी पैन्टी से अपने लंड को अच्छी तरह से पौंछ कर साफ़ किया। फिर उसकी चूत की भी सफाई की.. जो कि हम दोनों के कामरस से सराबोर थी।

फिर मैं उठा और अपने कपड़ों को पहनने लगा तो आंटी मुझसे बहुत ही विनम्रता के साथ देखते हुए बोलीं- प्लीज़ आज यहीं रुक जाओ न..
मैंने बोला- मैं अपने घर में क्या बोलूँगा.. इतनी देर से मैं कहाँ था? और अब मैं कहाँ रहूँगा रात भर.. आप तो इतनी बड़ी और एक बच्चे की माँ हो.. आप मेरी मज़बूरी को समझ सकती हो.. मैं खुद तुम्हें छोड़कर जाना नहीं चाहता.. पर क्या करूँ.. मेरे आगे भी मज़बूरी है प्लीज़.. इसे समझो आप कोई लड़की नहीं हो.. एक माँ भी हो.. आप एक माँ-बाप की फीलिंग समझ सकती हो।

तो वो अचानक उठकर बिस्तर से जैसे ही उतरी तो उसके पैरों में इतनी ताकत नहीं बची थी कि वे आराम से खड़ी हो सकें।
तो सीधे ही मेरे सीने पर आकर रुक गईं..

मैंने भी उसे संभालते हुए अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर उसके होंठों का रसपान करने लगा।

उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी… आज पहली बार मैंने किसी की आँखों में अपने लिए इतना प्यार और समर्पण देखा था। उसकी आँखों में आंसू भर आए थे.. जो बस गिरना बाकी थे।

शालिनी का इतना प्यार देखकर मैंने फिर से उसे अपनी बाँहों में लेकर चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर चुमने के बाद शालिनी मुझे रोककर बोली- अभी तो पूरी रात पड़ी है.. जी भर के प्यार कर लेना.. अभी जाओ जल्दी..

( क्या करूँ यार मुझे जाना पड़ा.. पर उसे छोड़ने का मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था। )

मैं उसके घर से निकल कर मॉल रोड गया और नोकिया सेंटर पहुंच कर मैंने अपना वाला हैंडसेट भी रिपेयरिंग सेंटर में रिपेयरिंग होने दें दिया फिर मैं अपने घर कि ओर चल दिया। मैं जैसे ही घर पहुँचा तो मम्मी ने सवालों की झड़ी लगा दी- कहाँ थे.. क्या कर थे?

मैं खामोशी से सुन रहा था..

थोड़ी देर बाद जब वे शांत हुईं तो प्यार से बोलीं- तूने कुछ बताया नहीं?

तो मैंने उन्हें बोला- मम्मी.. अब मैं कॉलेज का नहीं.. यूनिवर्सिटी का छात्र हूँ और मैं अपने दोस्तों के साथ मूवी देखने गया था.. इस वजह से देर हो गई.. आप प्लीज़ ये पापा को मत बोलना

खैर.. जैसे-जैसे समय बीतता गया.. मेरे दिल की भी धड़कनें बढ़ती ही जा रही थी और मेरा लौड़ा भी पैन्ट में टेन्ट बने खड़ा था फिर मैंने अपने लौड़े को अपने कंट्रोल में ले लिया।

फिर मैं बाथरूम में चला गया फ्रेश होने तभी मम्मी की फोन की रिंग बजी.. मम्मी ने फ़ोन उठाया और किसी से हंस हंसकर बातचीत कर रही थी।

......................................….................


अभी करीब रात के सवा आठ बजे होंगे। मैंने शुभम के घर की घण्टी बजाई।
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RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Raghu - 18-10-2026, 09:22 PM
RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Puja3567853 - 20-10-2026, 05:15 PM
Mother secret Affair episode 2 - by Puja3567853 - 19-04-2025, 10:01 PM



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