20-10-2026, 05:06 PM
अब आगे..... दोस्त की मम्मी शालिनी सिंह
मैं अनुज दुबे , बात उन दिनों की है जब मैं हाई कॉलेज में था।
तभी मेरी मुलाकात मेरे हाई कॉलेज में पढ़ने वाले शुभम सिंह से हुई, वो मेरी ही क्लास में पढ़ता था। मुझे पता चला कि वो मेरे ही घर के पास, लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर रहता है । धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ती गई और बढ़ती दोस्ती के साथ हम-दोनों का एक दूसरे का लौड़ा मुठयाना , लंड चूसाई और एक दूसरे का गांड़ पेलाई को भी कायम रहा ।
जब मैं हाई कॉलेज पास हुआ तो आगे की पढ़ाई पुरी करने के लिए मुझे रांची से धनबाद आना पड़ा। जिससे हम दोनों के बीच दूरी आ गई।
दो साल बाद.......
मैं अपने पढ़ाई पुरी करके वापस अपने घर रांची लौट आया । एक दिन अचानक मेरी मुलाकात शुभम से मेरे घर के पास हुई । मैंने उसे अपने घर ले आया। हम-दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई । इस दौरान उसने मुझे अपने घर आने को निमंत्रण दिया फिर वह चला गया।
एक दिन उसने पर्सनली मुझे फोन करके अपने घर पर बुलाया ( वैसे भी वह बहुत दिनों से अपने घर पर बुला रहा था। )
एक दिन मैं उसके घर पहुँचे तो दरवाजे पर लगे रिंगबेल बजाया , थोड़ी देर बाद दरवाजा आंटी जी ( शुभम की मम्मी शालिनी ) ने खोला। जैसे ही गेट खुला वैसे ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। क्या सौंदर्य था उसका.. मैं उसे शब्दों में बयान ही नहीं कर सकता।( क्योंकि मैंने उन्हें दो साल पहले देखा था और अब दो साल बाद देख रहा हूं। )
तभी शुभम वहां पहुंचा और उनसे बोला- मम्मी.. यह अनुज है । तो उसकी मम्मी ने हमें अन्दर आने को बोला।
तब जाकर मुझे होश आया कि मैं अपने दोस्त के साथ हूँ और अपने सुनहरे सपनों से बाहर आते हुए मैंने बड़ी हड़बड़ाहट के साथ उनको ‘ नमस्ते आंटी जी ’ बोला और अन्दर जाकर सोफे पर बैठ कर शुभम से बात करने लगा।
तभी अचानक मेरी नज़र उसके घर में एक सुंदर लड़की पर पड़ी । ( जहां तक मुझे मालूम था कि शुभम अपने माता-पिता का एकलौता संतान है ) । जब मैंने शुभम से उस लड़की के बारे पुछा तो शुभम ने कहा " यह मेरी मौसी की बेटी अंकिता सिंह है जो बारहवीं क्लास में पढ़ रही है "। फिर शुभम ने अपने परिवार के बाकी लोगों के बारे में बताया ।
तभी उसकी मम्मी मेरे और शुभम के लिए चाय लाई और मेरी तरफ कप बढ़ाने के लिए जैसे ही झुकी कि अचानक उसका पल्लू नीचे गिर गया, जिससे उसके 40 नाप के मखमली चुचियों और उसकी दरार मेरी आँखों के सामने आ गए और मैं उन्हें देखता ही रह गया।
मेरा मन तो किया कि इन्हें पकड़कर अभी इसका सारा रस चूस कर गुठली बना दूँ। लेकिन मेरी इच्छा दबी रह गई क्योंकि शुभम मेरा साथ में था और हम-दोनों काफी अच्छे दोस्त थे।
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शुभम की मम्मी दिखने में बहुत ही आकर्षक और जवान हुस्न की मल्लिका थी। उसकी उम्र उस समय लगभग 39 या 40 होगी, लेकिन वो अपने आपको इतना संवार कर रखे हुए थी कि लगता ही नहीं था कि वो एक बच्चे की माँ भी है। उसके लम्बे काले बाल उसके नितम्बों तक आते थे और उसके नितम्ब इतने अच्छे आकार में थे कि अच्छे-अच्छों का लौड़ा खड़ा कर दे, फिर मैं क्या था?
फिर उन्होंने पल्लू सही करते हुए मेरी ओर कप लेने का इशारा किया तो मैंने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया, उनका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया। हाय… क्या मुलायम हाथ थे।
उनके स्पर्श मात्र से मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई और अचानक मेरा लौड़ा तनाव में आने लगा।
खैर.. जैसे-तैसे मैंने खुद पर संयम किया लेकिन उसकी मम्मी ने मेरे खड़े लण्ड को देख लिया और एक मुस्कान छोड़कर वहाँ से चली गई।
फिर मेरी और शुभम की बातचीत सामान्य तरीके से होने लगी।
कुछ मिनट बाद हमने चाय खत्म की और मैं उसके घर से सीधे अपने घर की ओर चल दिया।
घर पहुँचते ही मैंने अपने बाथरूम में उसकी मम्मी के नाम की मुट्ठ मारी, तब जाकर मेरे लण्ड को कुछ आराम मिला। शाम हो गई थी लेकिन मेरी आँखों के सामने से शुभम की मम्मी के चेहरे हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
जैसे-तैसे रात हुई, मेरी मम्मी ने मुझे बुलाया और कहा- क्या बात है.. आज कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो?
तो मैंने उन्हें बोला- आज तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है।
इस पर उन्होंने मुझे एक दवाई दी और खाना खिलाकर सोने के लिए बोला, तो मैं चुपचाप आकर अपने कमरे में लेट गया, तब शायद रात 10:30 बजे थे।
कमरे में लेटते ही मुझे फिर से उनके चेहरे परेशान करने लगे और मेरा हाथ कब मेरे लोअर में चला गया मुझे पता ही न चला अगले दिन जब मैं सोकर उठा तो देखा मेरा लोअर फिर से गीला था।
शायद रात को मेरे सपनों में उसकी मम्मी फिर से आ गई होंगी।
फिर मैं सीधे बाथरूम गया और नहा-धोकर सीधा मम्मी के पास गया और उनसे नाश्ता देने के बोला क्योंकि एक जरूरी काम के लिए मुझे अपने पुराने कॉलेज जाना था। फिर मैं नाश्ता करके पुराने कॉलेज पहुँच गया ।
कॉलेज पहुंचने के थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल की घंटी बजी , मैंने मोबाइल निकाला और देखा तो शुभम का कॉल था , मैंने कॉल रिसीव किया।
तो शुभम बोला ( मोबाइल पर ) - तुझे मम्मी ने रात के खाने पर आज बुलाया है। तो मुझे मन ही मन बहुत ही खुशी हुई ।
थोड़ी देर बात करने के बाद शुभम ने फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया
फिर मैं कॉलेज का काम खत्म करके घर वापस लौटा और शाम होने का इंतजार करने लगा।
शाम को मैं तैयार होकर जाने से पहले मम्मी से बोला- " आज रात का खाना मैं अपने दोस्त शुभम के यहाँ से ही खाकर आऊँगा, आप मेरे लिए इन्तजार मत करना " और फिर चला गया।
जैसे ही मैंने उसके घर के दरवाजे की घन्टी बजाई, अन्दर से एक बहुत ही मीठी आवाज़ आई- दरवाज़ा खुला है आप आ जाइए..
मैं समझ गया कि यह जरूर अंकिता ही होगी।
जैसे ही मैं अन्दर गया, देखा सामने वाकयी अंकिता ही खड़ी थी।
आज वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी, उसने स्लीवलेस टॉप और मिनी स्कर्ट पहन रखी थी, जो उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे।
इस टॉप में उसको चुचियों का उभार साफ़ दिख रहा था।
मैं तो उसके चुचियों ही देखता रहा और अभी मन ही मन उन्हें चचोर कर चूस ही रहा था कि तभी उसने मेरी हरकत पकड़ ली और मुझसे बोली- तुम गेट पर ही खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे?
मैं सच मैं बहुत झेंप गया था और बहुत बुरा भी लगा कि मुझे अपने दोस्त की मौसेरी बहन को ऐसे नहीं देखना चाहिए था।
फिर मैं आगे बढ़ा उसने मुझे सोफे पर बैठने का बोला तो मैंने उससे पूछा- शुभम और आंटी जी कहाँ है?
तो उसने बताया- मौसी अपने कमरे में तैयार हो रही हैं और शुभम भईया केक लेने गए हैं।
तो मैंने उससे बहुत ही आश्चर्य के साथ पूछा- केक लेने? वो किस लिए?
तो अंकिता बोली- आज मौसी का जन्मदिन है और इसलिए आपको भी निमंत्रित किया गया है।
मैंने उससे पूछा- सच बताओ..
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वो बोली- सच में.. मैं सच ही बोल रही हूँ।
फिर मुझे शुभम पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे नहीं बोला कि आज आंटी का जन्मदिन है.. नहीं तो मैं खाली हाथ न आता।
मैंने अंकिता से बोला- मैं अभी थोड़ी देर में आता हूँ।
तो वो बोली- तुम कहाँ जा रहे हो? भाई अभी आता ही होगा, केक काटने में पहले ही इतनी देर हो चुकी है और देर हो जाएगी।
मैंने उससे बोला- मैं तुम्हारी मौसी के लिए कुछ गिफ्ट लेने जा रहा हूँ.. मुझे नहीं पता था कि आज उनका जन्मदिन है। नहीं तो मैं साथ लेकर ही आता।
( तब तक शुभम की मम्मी कमरे में आ चुकी थी )
हमारी बातों को सुनकर आंटी हँसी और मुझसे कहने लगी- मैंने ही शुभम को मना किया था कि तुम्हें कुछ न बताए और रही गिफ्ट की तो मैं तुमसे कभी भी मांग लूँगी.. वादा करो जब मैं मांगूगी तो तुम मुझे गिफ्ट दोगे…!
तब मैं शांत हो गया , लेकिन मैं ऐसे खड़ा था, जैसे मैंने कुछ सुना ही न हो और ऐसा हो भी क्यों न… क्योंकि आज तो आंटी ऐसी लग रही थी जैसी अंकिता की खुबसूरती और भरी - पुरी जवानी , वो भी मुझे फीकी लग रही थी।
आज आंटी ने काले रंग की नेट वाली साड़ी पहन रखी थी, उनके चुचियों बहुत ही सख्त और उभरे हुए लग रहे थे। उन्होंने चेहरे पर हल्का सा मेक-अप भी कर रखा था। वो आज पूरी कामसूत्र की देवी लग रही थी।
मैं उसकी सुंदरता के ख़यालों में इतना खो गया कि मुझे होश ही न रहा कि मैं एक लड़की के सामने उसकी मौसी को कामवासना की नज़र से चोदने की इच्छा जता रहा हूँ।
तभी आंटी ने मेरे हाथ को पकड़ते हुए बोला- क्या हुआ अनुज ? तुम कहाँ खो गए…?
तब मैंने हड़बड़ाहट से बोला- हाँ.. आंटी मैं ठीक हूँ।
शायद वो सब कुछ जानते हुए भी मुझसे सुनना चाह रही थी तो मैंने उनके जिस्म की तरफ देखते हुए कहा- आंटी आज तो आप बहुत ही हॉट लग रही हो.. इससे पहले मैंने कभी इतनी सुन्दर लेडी नहीं देखी।
उन्होंने मुस्कराकर ‘धन्यवाद’ दिया और सोफे पर मेरे पास ही आकर बैठ गईं और अंकिता से बोली- अनुज को लाकर कोल्डड्रिंक दो… अभी शुभम भी आता ही होगा.. फिर सब मिलकर पार्टी करेंगे।
अंकिता रसोई की ओर जाने लगी.. तभी आंटी ने मेरे जीन्स में बने तम्बू की ओर इशारा करते हुए कहा- काफी बड़े हो गए हो..।
तो मैंने अपने लंड को दबाकर ठीक करते हुए ‘सॉरी’ बोला तो उन्होंने बोला- इस उम्र में सबके साथ ऐसा ही होता है.. खैर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
तो मैंने उन्हें ‘न’ बोल दिया और मैंने उनके गाल पर एक हल्का सा चुम्बन कर दिया। जिससे वो सोफे पर पीछे की ओर झुक गईं क्योंकि उन्हें इसकी उम्मीद ही नहीं थी।
इतने में आंटी आई और बोली- मैं अपने बच्चों से बस प्यार ही मांगती हूँ और कुछ भी नहीं।
मैंने तुरंत उनको ‘सॉरी’ बोला और कहा - " मैं संयम नहीं कर पाया " । तभी अंकिता कमरे में मुस्कान बिखेरते हुए आ गई, शायद उसने देख लिया था।
आंटी ने बात को संभालते हुए मुझे भी एक चुम्बन किया और बोली- लो मैंने तुम्हारा गिफ्ट स्वीकार कर लिया.. बस तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो और मेरा शुभम भी मेरे जन्मदिन पर मुझे किस कर के ही विश करता हैं और अब तुमने भी कर लिया.. अब ठीक है न..
मैंने भी उनकी हाँ में हाँ मिला दी, जिससे कि अंकिता को शक न हो। हम ठंडा पी ही रहे थे तभी शुभम भी केक और होटल से खाना लेकर आ गया था।
फिर शुभम ने बताया- ट्रैफिक की वजह से जरा देर हो गई।
मैंने बोला- चलता है यार.. ले ठंडा पी.. फिर हम लोग केक काटेंगे।
तो शुभम ने ठंडा पीते हुए मुझसे पूछा- तुझे आए हुए कितनी देर गई?
मैंने बोल दिया- शायद एक घंटा..
तभी पीछे से अंकिता बोली- नहीं , आप यहां साढ़े छह बजे ही आ गए थे और अभी 8 बजे हैं।
इस पर मैंने बोला- अच्छा.. तुम्हें बहुत ध्यान है मेरा और हम सब हंस दिए।
फिर शुभम को मैंने बोला- यार आज आंटी का जन्मदिन था तुम्हें मुझे बताना चाहिए था.. मैं खाली हाथ आया, मुझे बहुत बुरा लगा।
इस पर शुभम बोला- मम्मी ने ही मना किया था।
फिर आंटी ने केक काटा और हम सबको खिलाया।
तभी मेरे दिमाग में एक खुराफात सूझी , फिर मैं अपनी इच्छा को प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी जी.. क्यों न इस पल को और हसीन बनाया जाए..!
तो इस पर उन्होंने मुस्करा कर हामी भरी।
फिर क्या था… मैं झट से उठा और सामने टेबल पर रखे केक से क्रीम उठा कर आंटी जी के चेहरे पर मल दी ( मेरे इस हरकत से मेरा लण्ड जींस के अन्दर अकड़ सा गया था ) और मेरे ऐसा करते ही शुभम और अंकिता ने भी ऐसा ही किया।
फिर आंटी ने भी सबको केक लगाया और हम सब खूब हँसे..
फिर थोड़ी देर मस्ती करने के बाद सभी ने अपने - अपने चेहरों की क्रीम साफ़ की। चेहरे पर से क्रीम साफ करने के बाद आंटी और अंकिता खाना डाइनिंग-टेबल पर लगाने के लिए कमरे से बाहर चली गई , जो कि दूसरे कमरे में था डाइनिंग-टेबल।
आज मैं बहुत ही खुश महसूस कर रहा था कि जल्द ही चोदने की इच्छा पूरी होगी।
कमरे में मैं और शुभम आपस में बात कर रहे थे.. तभी आंटी आईं और बोलीं- खाना लग गया है.. जल्दी से चलकर खा लो.. मुझे तो बहुत जोरों की भूख लगी है।
तभी मैंने देखा कि आंटी के चेहरे और गले में अभी भी हल्का केक लगा है। शायद वो अच्छे से साफ नहीं कर पाई होगी।
मैंने अपनी इच्छा प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी .. आपने तो अभी अपना चेहरा साफ़ ही नहीं किया।
तो वो बोलीं- अरे मैं तो खाना निकालने के चक्कर में भूल ही गई थी.. चलो बढ़िया ही है.. अब तूने ही ये गेम शुरू किया था तो ख़त्म भी तू ही कर…
मैंने आश्चर्य भरी निगाहों से देखते हुए उनसे पूछा- मैं क्या कर सकता हूँ?
तो वो बोलीं- तूने ही पहले क्रीम लगाई थी.. तो साफ़ भी तू ही करेगा।
तब मैंने शुभम की प्रतिक्रिया जानने के लिए उसकी ओर देखा तो वो बोला- उठ न.. मम्मी का कहना मान.. वो भी तो तेरी मम्मी समान हैं।
तो मैंने मन में बोला- ये मम्मी नहीं माल समान है।
फिर आंटी ने बोला- अब सोचता ही रहेगा या साफ़ भी करेगा..
मैंने भी बोला- जैसी आपकी इच्छा..
( मुझे तो बस इसी मौके की तलाश थी जिसकी वजह से आज मुझे उनके गालों को रगड़ने का मौका मिल रहा था। )
फिर मैं और आंटी वाशरूम की ओर चल दिए चलते-चलते आंटी शुभम से बोलीं- जा अंकिता की मदद कर दे..
शुभम ‘हाँ.. मम्मी ’ कहकर दूसरे कमरे में ( जहाँ खाने का प्रोग्राम था ) वहाँ चला गया।
आंटी और मैं जैसे ही वाशरूम पहुँचे.. वैसे आंटी ने मुझसे बोला- बेटा दरवाजे बंद कर ले.. । मैंने दरवाजे को बंद कर लिया, फिर आंटी ने साड़ी जैसे ही उतारनी चालू की, मैंने पूछा- ये आप क्यों कर रही हैं?
तो उन्होंने बोला- ये भीग कर ख़राब हो जाएगी..
फिर उन्होंने साड़ी उतार कर एक तरफ हैंगर पर टांग दी और बोली- जल्दी काम पर लग जा..
मुझे लगता वह बोली रही हो " जल्दी से मुझे चोद दे…'
फिर मैं उनके पास जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे मेरी साँसें भी बढ़ती जा रही थीं।
क्योंकि आज पहली बार मैंने किसी को इस अवस्था में देखा था और मेरा लौड़ा भी जींस के अन्दर टेंट बनाने लगा था।
वो भी क्या लग रही थी..
मैं तो बस देखता ही रह गया, फिर मैं उनसे बोला- आप मेरे आगे आ जाएं.. ताकि मैं अच्छे से आप का चेहरा साफ़ कर सकूँ और आप भी खुद को सामने आईने में देखकर संतुष्ट हो सकें।
मेरा इतना कहते ही वो मुस्कुराते हुए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.. फिर आंटी बोली- पहले थोड़ा क्रीम को हल्के हाथ से रगड़ दे फिर धो देना..
मैंने बोला- जैसी आपकी इच्छा.. आप आँख बंद कर लो.. नहीं तो केक की क्रीम लग सकती है।
वो बोली- ठीक है..
फिर मैंने पीछे से उनको हल्के हाथों से रगड़ना चालू किया..
तभी मेरी नज़र उनके उठे हुए चुचियों पर पड़ी जो कि अभी भी ब्लाउज के अंदर कसाव लिए हुए खूब मस्त लग रही थी। मेरा तो मन कर रहा था, अभी इनको निकाल कर इनका रस चूस लूँ..
पर मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहा था और मेरे हल्के हाथों के स्पर्श से शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं।
उनकी छाती से साफ़ पता चल रहा था क्योंकि उनकी साँसे धीरे-धीरे तेज़ हो चली थीं।
तभी मैंने उनको छेड़ते हुए बोला- आंटी लगता है… आप काफी मजा ले रही हो..
तो वो बोली- हाँ.. तुम्हारे हाथों में तो गजब का जादू है.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. मन करता है इन्हें चूम लूँ।
तो मैंने बोला- आप को रोका किसने है..
फिर उन्होंने मेरे हाथों पर एक चुम्बन कर लिया।
मैंने बोला- अब मुझे भी फ़ीस चाहिए।
तो बोली- कैसी फ़ीस?
मैंने बोला- आपको रगड़न देने की..
वो बोली- वो क्या है?
मैंने भी झट से बोल दिया- आपके गुलाबी गालों पर एक चुम्बन..
बस फिर उन्होंने मेरी ओर गाल करते हुए बोला- इसमें कौन सी बड़ी बात है.. ले कर ले.. चुम्बन..
मैं उन्हें चुम्बन करके झूम उठा, फिर उन्होंने बोला- चल अब मुँह धो दे।
तो मैंने उनकी छाती की ओर इशारा करते हुए बोला- अभी यहाँ आप सफाई कर लेंगी या मैं ही कर दूँ?
तो बोली- तू ही कर दे..
मैं और सटकर खड़ा हो गया जिससे मेरे लंड की चुभन उनकी नाभि के छेद पर होने लगी और मैं धीरे-धीरे साफ़ करते-करते मदहोश होने लगा। शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं क्योंकि उनकी आँखें बंद थीं।
मैंने बोला- ब्लाउज और उतार दो.. नहीं तो गीला हो जाएगा..
तो बोली- हम्म्म.. तेरी बात तो सही है.. तू ही उतार दे..
तो मैंने उतार दिया… क्या गजब के चुचियों थी मैं तो बता ही नहीं सकता और उस पर काली ब्रा.. हय.. क्या कहने.. बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे।
आंटी ने देख लिया कि मेरा ध्यान उनके चुचियों पर है और वो भी यही चाहती थीं कि मैं उनको दबाऊँ.. उनका रस पी लूँ..
तो उन्होंने बोला- इसे भी उतार दे.. अभी कल ही ली है.. ख़राब हो जाएगी।
मेरी तो जैसे इच्छा ही पूरी हो गई हो।
मैंने झट से उनकी ब्रा भी उतार दी और उनके चुचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया और मसक-मसक कर धीरे-धीरे मसाज देने लगा।
आंटी अपनी चूचियाँ मसलवाने में इतनी मस्त हो गईं कि उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी.. जो मुझे और मदहोश करने के लिए काफी थी।
फिर मैंने भी उनके चुचियों को तेज़ रगड़ना चालू कर दिया और वो भी आँखें बंद करके मेरे लंड पर अपनी नाभि रगड़ने लगीं।
अब वो कहने लगीं- अनुज , आज तो तूने मुझे पागल कर दिया.. इतना मजा मुझे पहले कभी नहीं आया. जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था और हाथों से उनके चुचियों को भी रगड़ रहा था।
आंटी तो इतना मस्त हो गई कि पूछो नहीं..
‘आअह अहह वाह… अह्ह… ओह..’ की आवाज़ करने लगीं।
अब उन्होंने बोला- ओह्ह.. मेरी चुची मुँह में लेकर चूस…
वे अपना एक निप्पल मेरी तरफ बढ़ा कर बोली- ले.. इन्हें भी चूस कर हल्का कर दे.. बहुत दिनों से शुभम के पापा ने हल्का नहीं किया.. क्योंकि वो तो अक्सर बाहर ही रहते हैं।
फिर मैंने उनके चुची को चूसना चालू कर दिया और दूसरे को दूसरे हाथ से रगड़ने लगा।
मैंने उनके चुचियों के निप्पलों को जोर-जोर से काटने और चूसने लगा.. जिससे आंटी की सीत्कार बढ़ गई.. वो शायद झड़ रही थी।
फिर वो ‘आआ.. आआआ.. ह्ह्ह्हा.. आआ… ईईईई…’ करती हुई शांत हो गई.. जैसे उनमें जान ही न बची हो। फिर अचानक उन्होंने मेरे लंड को जींस के ऊपर से पकड़ा, जो कि नाभि पर रगड़ खा-खा कर तना हुआ खड़ा था।
उनके स्पर्श से मेरे मुँह से भी एक हल्की ‘आअह’ निकल गई।
उन्होंने बोला- मुझे दिखा.. मैं भी तो देखूँ इसमें दम है भी या नहीं?
तो मैंने भी बोल दिया- एक मौका तो दो.. फिर उन्होंने मेरी जींस को मेरी ‘वी-शेप’ अंडरवियर के साथ एक ही झटके में नीचे कर दी और मेरा लंड भी उन्हें सलामी देने लगा।
उनकी मुस्कान साफ़ कह रही थी कि उनको मेरा ‘सामान’ पसंद आ गया था।
वो अपने हाथों से मुठियाने लगी और मैं उनके चूचियों की घुंडियों को फिर से मसलने लगा और उनसे पूछ भी लिया- आपको मेरी बन्दूक कैसी लगी?
वो बोली- क्यों इसकी बेइज्जती कर रहा है..ये बन्दूक नहीं तोप है.. तेरे दोस्त का पापा की तो सिर्फ पांच इंच का ही है.. यह तो उनसे काफी बड़ा और मोटा है। मेरा तो मन कर रहा है.. इसे खा जाऊँ..
तो मैंने बोला- खा लो.. रोका किसने है?
आंटी घुटनों के बल बैठकर मेरे लौड़े के सुपाड़े को मुँह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी।
यह पहला अनुभव था मेरा.. जो कि मैंने उन्हें बताया।
तो वो बहुत ही खुश हो गईं और बोलने लगीं- मैं तुम्हें सब सिखा दूँगी और मजे भी दूँगी.. मेरे राजा..
वो फिर से मेरे लौड़े को जोर-जोर से चूसने लगी, जिससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और मेरे मुँह से ‘आआह्ह्ह्ह हाआअ’ की सी आवाज़ निकलने लगी।
मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उन्हें बोला- मेरा निकलने वाला है.. आप मुँह हटा लो।
तो वो बोली- मुझे चखना है और देखना है कि इसमें कैसा स्वाद है?
तभी मेरे मुँह से एक जोर की ‘आह’ निकली और मेरा माल आंटी के मुँह में ही झड़ गया..
जिसे आंटी ने बड़े चाव के साथ पी लिया और मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ़ भी कर दिया।
तभी दरवाज़े पर किसी ने नॉक किया तो आंटी होश में आई और बोली - कौन?
तो बाहर से अंकिता की आवाज़ आई- मैं हूँ.. कितनी देर लगा दी आपने.. जल्दी आओ.. खाना ठंडा हो रहा है।
फिर आंटी बोली- बस हो गया.. अभी आई।
फिर आंटी ने जल्दी से वहीं टंगी नाइटी पहन ली और मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए और आंटी को दिखाकर बोला- आंटी मैं ठीक तो लग रहा हूँ न?
तो आंटी रुठते हुए स्वर में बोली- आज से तू मझे अकेले शालिनी ही बुलाएगा.. नहीं तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगी।
तो मैंने भी ‘हाँ’ कह दिया और एकबार फिर से उन्हें बाँहों में भरने और एक चुम्बन के लिए आगे बढ़ा तभी आंटी ने मेरे गाल पर एक जोरदार तमाचा मारा। जिससे मैं पुरी तरह होश में आ गया।
फिर हम दोनों कमरे में पहुँचे, जहाँ खाने की टेबल थी..
वहाँ शुभम और अंकिता काफी देर से हम लोगों का इन्तजार कर रहे थे।
शुभम - आप कर क्या रही थीं.. इतनी देर लगा दी?
तो उन्होंने बात बनाते हुए बोला- मेरे को उलटी होने लगी थी… तो काफी देर लग गई.. जिससे मुझे चक्कर आने लगा था तो थोड़ी देर वहीं बैठ गई।
मेरी साड़ी भी इसी चक्कर में भीग गई.. तभी तो चेंज करके आई हूँ..
तो शुभम बोला- अरे आपको कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है.. नहीं तो डॉक्टर के पास चलें?
वो बोली- नहीं.. अब ठीक है।
तो मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बोला- थैंक गॉड.. वहाँ मेरे साथ अनुज था.. नहीं तो ये न पकड़ता तो मैं गिर ही जाती।
फिर शुभम ने भी अपनी मम्मी के लिए मुझे धन्यवाद दिया..
लेकिन अंकिता मुझे जासूस वाली नज़रों से देख रही थी । शायद अंकिता ने हमारी चोरी पकड़ ली थी इसलिए मुझे घुरते हुए अपने मौसी से बोली- आज तो आपको लगता है हममें से किसी की नज़र लग गई.
फिर हम सबने मिलकर खाना खाया और तभी मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो मेरे चेहरे पर भी 12 बज गए.. मुझे पता ही न चला कि कब रात के 12 बज गए।
फिर मैंने घर जाने की इजाजत ली, तो शालिनी आंटी ने मुझे ‘थैंक्स’ बोला और मैंने उन्हें बोला- आज पार्टी में बहुत मज़ा आया।
तो शुभम भी बोला- हाँ.. आज वाकयी बहुत दिनों बाद ऐसी पार्टी हुई।
फिर सबको ‘बॉय’ बोला और घर की ओर चल दिया। पर मेरा दिल बिल्कुल भी नहीं था कि मैं अपने घर जाऊँ.. लेकिन क्या करता.. जाना तो था ही।
जैसे-तैसे मैं अपने घर की ओर चल दिया लेकिन अभी भी मेरी आँखों से शालिनी के गुलाबी चुचियों और उस पर चैरी की तरह निप्पल हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
खैर जैसे-तैसे मैं अपने घर पहुँचा.. घन्टी बजाई तो मेरे पापा ने गेट खोला और मुझे डाँटते हुए बोले- आ गए नवाब.. वक्त देखा.. 12:30 हो रहा है.. कहाँ रहे इतनी देर?
तो मैंने मम्मी की ओर देखते हुए उनसे बोला- क्या आपने बताया नहीं?
तो पापा बोले- इतनी देर कौन सा डिनर चलता है?
तो मैंने आंटी के ‘बर्थडे पार्टी’ वाली बात बता दी..
तब जाकर पापा शान्त और सामान्य हुए और मेरे भी जान में जान आई।
मैं सच बोलूँ तो मेरी मेरे पिता से बहुत फटती है। फिर मैं अपने कमरे में गया और कपड़े बदलने लगा। और जैसे ही मैंने अपने आप को मिरर पर देखा.. तो मेरे सामने फिर से शालिनी के चुचियों की याद आने लगी .. जिसके कारण पता ही नहीं लगा.. कब मेरा सुस्त लौड़ा फिर से ऊँचाइयों को छूने लगा फिर मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और सो गया।
अगली दिन मम्मी के फ़ोन की घंटी बजने से मेरी नींद खुली । तब तक शायद दिन का एक बजा चुका था मैं उठकर बाथरूम चला गया। जब मैं बाथरूम में अपने चेहरे को मिरर पर देखा तो मैं बहुत ही आत्मग्लानि महसूस करने लगा और सोचने लगा कि मैं अपने दोस्त के साथ गलत कर रहा हूँ जो कि गलत ही नहीं अनैतिक भी है। फिर मैंने जान-बूझकर उसके घर जाना छोड़ दिया ताकि कुछ गलत न हो।
शुभम और मैं अब अक्सर मल्टीप्लेक्स में मिलते या मेरे घर पर और वो अक्सर मुझसे बोलता रहता कि मम्मी ने बुलाया है घर चल.. पर मैं बहाना बना देता !
फिर एक दिन शालिनी आंटी मुझे मार्केट में मिलीं। उन्होंने मुझे डाँटते हुए लहजे में बोली - क्या मैं तुम्हें इतनी बुरी लगी.. जो उस दिन के बाद नहीं आया?
तो मैंने बोला- आंटी ऐसा नहीं है।
वो फिर बोली- फिर कैसा है?
तो मैंने उन्हें बोला- आंटी आप मेरे दोस्त की मम्मी है और वो उस दिन गलत हो गया।
इस पर वो गुस्सा करते हुए बोली- पहले तो तू मुझे शालिनी बोल और रही उस दिन की बात.. तो यह तूने तब नहीं सोचा जब तुम मेरे चुचियों चूस रहा था तब यह ख़याल नहीं आया.. जब अपना लौड़ा मेरे मुँह में देकर बोल रहा था .. शालिनी आज तो बहुत ही मज़ा आ रहा है.. क्यों बोल?
मेरे पास इन सब बातों का कोई जवाब न था.. तो मैं क्या कहता
फिर करीब एक मिनट बाद शालिनी आंटी रोते हुए बोली- पहली बार मुझे कोई इतना सुख दिया मैं बता नहीं सकती और फिर उसने मुझे धोखा दे दिया.. और मैं चुपचाप सुनता रहा ।
फिर मैंने मन में सोचा कि भूखी औरत सिर्फ ‘लंड-लंड’ चिल्लाती है..जैसे शालिनी चिल्ला रही है और अगर मैंने ये मौका खो दिया तो शालिनी के साथ-साथ अंकिता भी हाथ से निकल जाएगी।
यह सोचते-सोचते मैंने तुरंत शालिनी से ‘सॉरी’ बोला और उससे कहा- मैं तो बस ये देख रहा था.. जो तड़प तुम्हारे लिए मेरे अन्दर है.. क्या वो तुम्हारे अन्दर भी है या मैं केवल तुम्हारी प्यास बुझाने का जरिया बनकर रह जाऊँगा।
इस पर उसने बिना देर किए ‘आई लव यू’ बोल दी और बोली- आज से मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है.. फिर मैंने मज़ाक में बोला- बस एक अहसान करना.. बच्चे का बाप न बना देना।
तो वो हँसने लगी, फिर वो बोली- अब ये बोलो.. घर कब आओगे?
तब मैंने बोला- अब मैं तभी आऊँगा.. जब घर पर शुभम नहीं होगा। फिर मैं अपने घर की ओर चल पड़ा।
मैं अनुज दुबे , बात उन दिनों की है जब मैं हाई कॉलेज में था।
तभी मेरी मुलाकात मेरे हाई कॉलेज में पढ़ने वाले शुभम सिंह से हुई, वो मेरी ही क्लास में पढ़ता था। मुझे पता चला कि वो मेरे ही घर के पास, लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर रहता है । धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ती गई और बढ़ती दोस्ती के साथ हम-दोनों का एक दूसरे का लौड़ा मुठयाना , लंड चूसाई और एक दूसरे का गांड़ पेलाई को भी कायम रहा ।
जब मैं हाई कॉलेज पास हुआ तो आगे की पढ़ाई पुरी करने के लिए मुझे रांची से धनबाद आना पड़ा। जिससे हम दोनों के बीच दूरी आ गई।
दो साल बाद.......
मैं अपने पढ़ाई पुरी करके वापस अपने घर रांची लौट आया । एक दिन अचानक मेरी मुलाकात शुभम से मेरे घर के पास हुई । मैंने उसे अपने घर ले आया। हम-दोनों के बीच थोड़ी देर बातचीत हुई । इस दौरान उसने मुझे अपने घर आने को निमंत्रण दिया फिर वह चला गया।
एक दिन उसने पर्सनली मुझे फोन करके अपने घर पर बुलाया ( वैसे भी वह बहुत दिनों से अपने घर पर बुला रहा था। )
एक दिन मैं उसके घर पहुँचे तो दरवाजे पर लगे रिंगबेल बजाया , थोड़ी देर बाद दरवाजा आंटी जी ( शुभम की मम्मी शालिनी ) ने खोला। जैसे ही गेट खुला वैसे ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। क्या सौंदर्य था उसका.. मैं उसे शब्दों में बयान ही नहीं कर सकता।( क्योंकि मैंने उन्हें दो साल पहले देखा था और अब दो साल बाद देख रहा हूं। )
तभी शुभम वहां पहुंचा और उनसे बोला- मम्मी.. यह अनुज है । तो उसकी मम्मी ने हमें अन्दर आने को बोला।
तब जाकर मुझे होश आया कि मैं अपने दोस्त के साथ हूँ और अपने सुनहरे सपनों से बाहर आते हुए मैंने बड़ी हड़बड़ाहट के साथ उनको ‘ नमस्ते आंटी जी ’ बोला और अन्दर जाकर सोफे पर बैठ कर शुभम से बात करने लगा।
तभी अचानक मेरी नज़र उसके घर में एक सुंदर लड़की पर पड़ी । ( जहां तक मुझे मालूम था कि शुभम अपने माता-पिता का एकलौता संतान है ) । जब मैंने शुभम से उस लड़की के बारे पुछा तो शुभम ने कहा " यह मेरी मौसी की बेटी अंकिता सिंह है जो बारहवीं क्लास में पढ़ रही है "। फिर शुभम ने अपने परिवार के बाकी लोगों के बारे में बताया ।
तभी उसकी मम्मी मेरे और शुभम के लिए चाय लाई और मेरी तरफ कप बढ़ाने के लिए जैसे ही झुकी कि अचानक उसका पल्लू नीचे गिर गया, जिससे उसके 40 नाप के मखमली चुचियों और उसकी दरार मेरी आँखों के सामने आ गए और मैं उन्हें देखता ही रह गया।
मेरा मन तो किया कि इन्हें पकड़कर अभी इसका सारा रस चूस कर गुठली बना दूँ। लेकिन मेरी इच्छा दबी रह गई क्योंकि शुभम मेरा साथ में था और हम-दोनों काफी अच्छे दोस्त थे।
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शुभम की मम्मी दिखने में बहुत ही आकर्षक और जवान हुस्न की मल्लिका थी। उसकी उम्र उस समय लगभग 39 या 40 होगी, लेकिन वो अपने आपको इतना संवार कर रखे हुए थी कि लगता ही नहीं था कि वो एक बच्चे की माँ भी है। उसके लम्बे काले बाल उसके नितम्बों तक आते थे और उसके नितम्ब इतने अच्छे आकार में थे कि अच्छे-अच्छों का लौड़ा खड़ा कर दे, फिर मैं क्या था?
फिर उन्होंने पल्लू सही करते हुए मेरी ओर कप लेने का इशारा किया तो मैंने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया, उनका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया। हाय… क्या मुलायम हाथ थे।
उनके स्पर्श मात्र से मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई और अचानक मेरा लौड़ा तनाव में आने लगा।
खैर.. जैसे-तैसे मैंने खुद पर संयम किया लेकिन उसकी मम्मी ने मेरे खड़े लण्ड को देख लिया और एक मुस्कान छोड़कर वहाँ से चली गई।
फिर मेरी और शुभम की बातचीत सामान्य तरीके से होने लगी।
कुछ मिनट बाद हमने चाय खत्म की और मैं उसके घर से सीधे अपने घर की ओर चल दिया।
घर पहुँचते ही मैंने अपने बाथरूम में उसकी मम्मी के नाम की मुट्ठ मारी, तब जाकर मेरे लण्ड को कुछ आराम मिला। शाम हो गई थी लेकिन मेरी आँखों के सामने से शुभम की मम्मी के चेहरे हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
जैसे-तैसे रात हुई, मेरी मम्मी ने मुझे बुलाया और कहा- क्या बात है.. आज कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो?
तो मैंने उन्हें बोला- आज तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है।
इस पर उन्होंने मुझे एक दवाई दी और खाना खिलाकर सोने के लिए बोला, तो मैं चुपचाप आकर अपने कमरे में लेट गया, तब शायद रात 10:30 बजे थे।
कमरे में लेटते ही मुझे फिर से उनके चेहरे परेशान करने लगे और मेरा हाथ कब मेरे लोअर में चला गया मुझे पता ही न चला अगले दिन जब मैं सोकर उठा तो देखा मेरा लोअर फिर से गीला था।
शायद रात को मेरे सपनों में उसकी मम्मी फिर से आ गई होंगी।
फिर मैं सीधे बाथरूम गया और नहा-धोकर सीधा मम्मी के पास गया और उनसे नाश्ता देने के बोला क्योंकि एक जरूरी काम के लिए मुझे अपने पुराने कॉलेज जाना था। फिर मैं नाश्ता करके पुराने कॉलेज पहुँच गया ।
कॉलेज पहुंचने के थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल की घंटी बजी , मैंने मोबाइल निकाला और देखा तो शुभम का कॉल था , मैंने कॉल रिसीव किया।
तो शुभम बोला ( मोबाइल पर ) - तुझे मम्मी ने रात के खाने पर आज बुलाया है। तो मुझे मन ही मन बहुत ही खुशी हुई ।
थोड़ी देर बात करने के बाद शुभम ने फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया
फिर मैं कॉलेज का काम खत्म करके घर वापस लौटा और शाम होने का इंतजार करने लगा।
शाम को मैं तैयार होकर जाने से पहले मम्मी से बोला- " आज रात का खाना मैं अपने दोस्त शुभम के यहाँ से ही खाकर आऊँगा, आप मेरे लिए इन्तजार मत करना " और फिर चला गया।
जैसे ही मैंने उसके घर के दरवाजे की घन्टी बजाई, अन्दर से एक बहुत ही मीठी आवाज़ आई- दरवाज़ा खुला है आप आ जाइए..
मैं समझ गया कि यह जरूर अंकिता ही होगी।
जैसे ही मैं अन्दर गया, देखा सामने वाकयी अंकिता ही खड़ी थी।
आज वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी, उसने स्लीवलेस टॉप और मिनी स्कर्ट पहन रखी थी, जो उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे।
इस टॉप में उसको चुचियों का उभार साफ़ दिख रहा था।
मैं तो उसके चुचियों ही देखता रहा और अभी मन ही मन उन्हें चचोर कर चूस ही रहा था कि तभी उसने मेरी हरकत पकड़ ली और मुझसे बोली- तुम गेट पर ही खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे?
मैं सच मैं बहुत झेंप गया था और बहुत बुरा भी लगा कि मुझे अपने दोस्त की मौसेरी बहन को ऐसे नहीं देखना चाहिए था।
फिर मैं आगे बढ़ा उसने मुझे सोफे पर बैठने का बोला तो मैंने उससे पूछा- शुभम और आंटी जी कहाँ है?
तो उसने बताया- मौसी अपने कमरे में तैयार हो रही हैं और शुभम भईया केक लेने गए हैं।
तो मैंने उससे बहुत ही आश्चर्य के साथ पूछा- केक लेने? वो किस लिए?
तो अंकिता बोली- आज मौसी का जन्मदिन है और इसलिए आपको भी निमंत्रित किया गया है।
मैंने उससे पूछा- सच बताओ..
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वो बोली- सच में.. मैं सच ही बोल रही हूँ।
फिर मुझे शुभम पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे नहीं बोला कि आज आंटी का जन्मदिन है.. नहीं तो मैं खाली हाथ न आता।
मैंने अंकिता से बोला- मैं अभी थोड़ी देर में आता हूँ।
तो वो बोली- तुम कहाँ जा रहे हो? भाई अभी आता ही होगा, केक काटने में पहले ही इतनी देर हो चुकी है और देर हो जाएगी।
मैंने उससे बोला- मैं तुम्हारी मौसी के लिए कुछ गिफ्ट लेने जा रहा हूँ.. मुझे नहीं पता था कि आज उनका जन्मदिन है। नहीं तो मैं साथ लेकर ही आता।
( तब तक शुभम की मम्मी कमरे में आ चुकी थी )
हमारी बातों को सुनकर आंटी हँसी और मुझसे कहने लगी- मैंने ही शुभम को मना किया था कि तुम्हें कुछ न बताए और रही गिफ्ट की तो मैं तुमसे कभी भी मांग लूँगी.. वादा करो जब मैं मांगूगी तो तुम मुझे गिफ्ट दोगे…!
तब मैं शांत हो गया , लेकिन मैं ऐसे खड़ा था, जैसे मैंने कुछ सुना ही न हो और ऐसा हो भी क्यों न… क्योंकि आज तो आंटी ऐसी लग रही थी जैसी अंकिता की खुबसूरती और भरी - पुरी जवानी , वो भी मुझे फीकी लग रही थी।
आज आंटी ने काले रंग की नेट वाली साड़ी पहन रखी थी, उनके चुचियों बहुत ही सख्त और उभरे हुए लग रहे थे। उन्होंने चेहरे पर हल्का सा मेक-अप भी कर रखा था। वो आज पूरी कामसूत्र की देवी लग रही थी।
मैं उसकी सुंदरता के ख़यालों में इतना खो गया कि मुझे होश ही न रहा कि मैं एक लड़की के सामने उसकी मौसी को कामवासना की नज़र से चोदने की इच्छा जता रहा हूँ।
तभी आंटी ने मेरे हाथ को पकड़ते हुए बोला- क्या हुआ अनुज ? तुम कहाँ खो गए…?
तब मैंने हड़बड़ाहट से बोला- हाँ.. आंटी मैं ठीक हूँ।
शायद वो सब कुछ जानते हुए भी मुझसे सुनना चाह रही थी तो मैंने उनके जिस्म की तरफ देखते हुए कहा- आंटी आज तो आप बहुत ही हॉट लग रही हो.. इससे पहले मैंने कभी इतनी सुन्दर लेडी नहीं देखी।
उन्होंने मुस्कराकर ‘धन्यवाद’ दिया और सोफे पर मेरे पास ही आकर बैठ गईं और अंकिता से बोली- अनुज को लाकर कोल्डड्रिंक दो… अभी शुभम भी आता ही होगा.. फिर सब मिलकर पार्टी करेंगे।
अंकिता रसोई की ओर जाने लगी.. तभी आंटी ने मेरे जीन्स में बने तम्बू की ओर इशारा करते हुए कहा- काफी बड़े हो गए हो..।
तो मैंने अपने लंड को दबाकर ठीक करते हुए ‘सॉरी’ बोला तो उन्होंने बोला- इस उम्र में सबके साथ ऐसा ही होता है.. खैर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
तो मैंने उन्हें ‘न’ बोल दिया और मैंने उनके गाल पर एक हल्का सा चुम्बन कर दिया। जिससे वो सोफे पर पीछे की ओर झुक गईं क्योंकि उन्हें इसकी उम्मीद ही नहीं थी।
इतने में आंटी आई और बोली- मैं अपने बच्चों से बस प्यार ही मांगती हूँ और कुछ भी नहीं।
मैंने तुरंत उनको ‘सॉरी’ बोला और कहा - " मैं संयम नहीं कर पाया " । तभी अंकिता कमरे में मुस्कान बिखेरते हुए आ गई, शायद उसने देख लिया था।
आंटी ने बात को संभालते हुए मुझे भी एक चुम्बन किया और बोली- लो मैंने तुम्हारा गिफ्ट स्वीकार कर लिया.. बस तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो और मेरा शुभम भी मेरे जन्मदिन पर मुझे किस कर के ही विश करता हैं और अब तुमने भी कर लिया.. अब ठीक है न..
मैंने भी उनकी हाँ में हाँ मिला दी, जिससे कि अंकिता को शक न हो। हम ठंडा पी ही रहे थे तभी शुभम भी केक और होटल से खाना लेकर आ गया था।
फिर शुभम ने बताया- ट्रैफिक की वजह से जरा देर हो गई।
मैंने बोला- चलता है यार.. ले ठंडा पी.. फिर हम लोग केक काटेंगे।
तो शुभम ने ठंडा पीते हुए मुझसे पूछा- तुझे आए हुए कितनी देर गई?
मैंने बोल दिया- शायद एक घंटा..
तभी पीछे से अंकिता बोली- नहीं , आप यहां साढ़े छह बजे ही आ गए थे और अभी 8 बजे हैं।
इस पर मैंने बोला- अच्छा.. तुम्हें बहुत ध्यान है मेरा और हम सब हंस दिए।
फिर शुभम को मैंने बोला- यार आज आंटी का जन्मदिन था तुम्हें मुझे बताना चाहिए था.. मैं खाली हाथ आया, मुझे बहुत बुरा लगा।
इस पर शुभम बोला- मम्मी ने ही मना किया था।
फिर आंटी ने केक काटा और हम सबको खिलाया।
तभी मेरे दिमाग में एक खुराफात सूझी , फिर मैं अपनी इच्छा को प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी जी.. क्यों न इस पल को और हसीन बनाया जाए..!
तो इस पर उन्होंने मुस्करा कर हामी भरी।
फिर क्या था… मैं झट से उठा और सामने टेबल पर रखे केक से क्रीम उठा कर आंटी जी के चेहरे पर मल दी ( मेरे इस हरकत से मेरा लण्ड जींस के अन्दर अकड़ सा गया था ) और मेरे ऐसा करते ही शुभम और अंकिता ने भी ऐसा ही किया।
फिर आंटी ने भी सबको केक लगाया और हम सब खूब हँसे..
फिर थोड़ी देर मस्ती करने के बाद सभी ने अपने - अपने चेहरों की क्रीम साफ़ की। चेहरे पर से क्रीम साफ करने के बाद आंटी और अंकिता खाना डाइनिंग-टेबल पर लगाने के लिए कमरे से बाहर चली गई , जो कि दूसरे कमरे में था डाइनिंग-टेबल।
आज मैं बहुत ही खुश महसूस कर रहा था कि जल्द ही चोदने की इच्छा पूरी होगी।
कमरे में मैं और शुभम आपस में बात कर रहे थे.. तभी आंटी आईं और बोलीं- खाना लग गया है.. जल्दी से चलकर खा लो.. मुझे तो बहुत जोरों की भूख लगी है।
तभी मैंने देखा कि आंटी के चेहरे और गले में अभी भी हल्का केक लगा है। शायद वो अच्छे से साफ नहीं कर पाई होगी।
मैंने अपनी इच्छा प्रकट करते हुए आंटी से बोला- आंटी .. आपने तो अभी अपना चेहरा साफ़ ही नहीं किया।
तो वो बोलीं- अरे मैं तो खाना निकालने के चक्कर में भूल ही गई थी.. चलो बढ़िया ही है.. अब तूने ही ये गेम शुरू किया था तो ख़त्म भी तू ही कर…
मैंने आश्चर्य भरी निगाहों से देखते हुए उनसे पूछा- मैं क्या कर सकता हूँ?
तो वो बोलीं- तूने ही पहले क्रीम लगाई थी.. तो साफ़ भी तू ही करेगा।
तब मैंने शुभम की प्रतिक्रिया जानने के लिए उसकी ओर देखा तो वो बोला- उठ न.. मम्मी का कहना मान.. वो भी तो तेरी मम्मी समान हैं।
तो मैंने मन में बोला- ये मम्मी नहीं माल समान है।
फिर आंटी ने बोला- अब सोचता ही रहेगा या साफ़ भी करेगा..
मैंने भी बोला- जैसी आपकी इच्छा..
( मुझे तो बस इसी मौके की तलाश थी जिसकी वजह से आज मुझे उनके गालों को रगड़ने का मौका मिल रहा था। )
फिर मैं और आंटी वाशरूम की ओर चल दिए चलते-चलते आंटी शुभम से बोलीं- जा अंकिता की मदद कर दे..
शुभम ‘हाँ.. मम्मी ’ कहकर दूसरे कमरे में ( जहाँ खाने का प्रोग्राम था ) वहाँ चला गया।
आंटी और मैं जैसे ही वाशरूम पहुँचे.. वैसे आंटी ने मुझसे बोला- बेटा दरवाजे बंद कर ले.. । मैंने दरवाजे को बंद कर लिया, फिर आंटी ने साड़ी जैसे ही उतारनी चालू की, मैंने पूछा- ये आप क्यों कर रही हैं?
तो उन्होंने बोला- ये भीग कर ख़राब हो जाएगी..
फिर उन्होंने साड़ी उतार कर एक तरफ हैंगर पर टांग दी और बोली- जल्दी काम पर लग जा..
मुझे लगता वह बोली रही हो " जल्दी से मुझे चोद दे…'
फिर मैं उनके पास जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे मेरी साँसें भी बढ़ती जा रही थीं।
क्योंकि आज पहली बार मैंने किसी को इस अवस्था में देखा था और मेरा लौड़ा भी जींस के अन्दर टेंट बनाने लगा था।
वो भी क्या लग रही थी..
मैं तो बस देखता ही रह गया, फिर मैं उनसे बोला- आप मेरे आगे आ जाएं.. ताकि मैं अच्छे से आप का चेहरा साफ़ कर सकूँ और आप भी खुद को सामने आईने में देखकर संतुष्ट हो सकें।
मेरा इतना कहते ही वो मुस्कुराते हुए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.. फिर आंटी बोली- पहले थोड़ा क्रीम को हल्के हाथ से रगड़ दे फिर धो देना..
मैंने बोला- जैसी आपकी इच्छा.. आप आँख बंद कर लो.. नहीं तो केक की क्रीम लग सकती है।
वो बोली- ठीक है..
फिर मैंने पीछे से उनको हल्के हाथों से रगड़ना चालू किया..
तभी मेरी नज़र उनके उठे हुए चुचियों पर पड़ी जो कि अभी भी ब्लाउज के अंदर कसाव लिए हुए खूब मस्त लग रही थी। मेरा तो मन कर रहा था, अभी इनको निकाल कर इनका रस चूस लूँ..
पर मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहा था और मेरे हल्के हाथों के स्पर्श से शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं।
उनकी छाती से साफ़ पता चल रहा था क्योंकि उनकी साँसे धीरे-धीरे तेज़ हो चली थीं।
तभी मैंने उनको छेड़ते हुए बोला- आंटी लगता है… आप काफी मजा ले रही हो..
तो वो बोली- हाँ.. तुम्हारे हाथों में तो गजब का जादू है.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.. मन करता है इन्हें चूम लूँ।
तो मैंने बोला- आप को रोका किसने है..
फिर उन्होंने मेरे हाथों पर एक चुम्बन कर लिया।
मैंने बोला- अब मुझे भी फ़ीस चाहिए।
तो बोली- कैसी फ़ीस?
मैंने बोला- आपको रगड़न देने की..
वो बोली- वो क्या है?
मैंने भी झट से बोल दिया- आपके गुलाबी गालों पर एक चुम्बन..
बस फिर उन्होंने मेरी ओर गाल करते हुए बोला- इसमें कौन सी बड़ी बात है.. ले कर ले.. चुम्बन..
मैं उन्हें चुम्बन करके झूम उठा, फिर उन्होंने बोला- चल अब मुँह धो दे।
तो मैंने उनकी छाती की ओर इशारा करते हुए बोला- अभी यहाँ आप सफाई कर लेंगी या मैं ही कर दूँ?
तो बोली- तू ही कर दे..
मैं और सटकर खड़ा हो गया जिससे मेरे लंड की चुभन उनकी नाभि के छेद पर होने लगी और मैं धीरे-धीरे साफ़ करते-करते मदहोश होने लगा। शायद आंटी भी मदहोश हो गई थीं क्योंकि उनकी आँखें बंद थीं।
मैंने बोला- ब्लाउज और उतार दो.. नहीं तो गीला हो जाएगा..
तो बोली- हम्म्म.. तेरी बात तो सही है.. तू ही उतार दे..
तो मैंने उतार दिया… क्या गजब के चुचियों थी मैं तो बता ही नहीं सकता और उस पर काली ब्रा.. हय.. क्या कहने.. बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे।
आंटी ने देख लिया कि मेरा ध्यान उनके चुचियों पर है और वो भी यही चाहती थीं कि मैं उनको दबाऊँ.. उनका रस पी लूँ..
तो उन्होंने बोला- इसे भी उतार दे.. अभी कल ही ली है.. ख़राब हो जाएगी।
मेरी तो जैसे इच्छा ही पूरी हो गई हो।
मैंने झट से उनकी ब्रा भी उतार दी और उनके चुचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया और मसक-मसक कर धीरे-धीरे मसाज देने लगा।
आंटी अपनी चूचियाँ मसलवाने में इतनी मस्त हो गईं कि उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी.. जो मुझे और मदहोश करने के लिए काफी थी।
फिर मैंने भी उनके चुचियों को तेज़ रगड़ना चालू कर दिया और वो भी आँखें बंद करके मेरे लंड पर अपनी नाभि रगड़ने लगीं।
अब वो कहने लगीं- अनुज , आज तो तूने मुझे पागल कर दिया.. इतना मजा मुझे पहले कभी नहीं आया. जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था और हाथों से उनके चुचियों को भी रगड़ रहा था।
आंटी तो इतना मस्त हो गई कि पूछो नहीं..
‘आअह अहह वाह… अह्ह… ओह..’ की आवाज़ करने लगीं।
अब उन्होंने बोला- ओह्ह.. मेरी चुची मुँह में लेकर चूस…
वे अपना एक निप्पल मेरी तरफ बढ़ा कर बोली- ले.. इन्हें भी चूस कर हल्का कर दे.. बहुत दिनों से शुभम के पापा ने हल्का नहीं किया.. क्योंकि वो तो अक्सर बाहर ही रहते हैं।
फिर मैंने उनके चुची को चूसना चालू कर दिया और दूसरे को दूसरे हाथ से रगड़ने लगा।
मैंने उनके चुचियों के निप्पलों को जोर-जोर से काटने और चूसने लगा.. जिससे आंटी की सीत्कार बढ़ गई.. वो शायद झड़ रही थी।
फिर वो ‘आआ.. आआआ.. ह्ह्ह्हा.. आआ… ईईईई…’ करती हुई शांत हो गई.. जैसे उनमें जान ही न बची हो। फिर अचानक उन्होंने मेरे लंड को जींस के ऊपर से पकड़ा, जो कि नाभि पर रगड़ खा-खा कर तना हुआ खड़ा था।
उनके स्पर्श से मेरे मुँह से भी एक हल्की ‘आअह’ निकल गई।
उन्होंने बोला- मुझे दिखा.. मैं भी तो देखूँ इसमें दम है भी या नहीं?
तो मैंने भी बोल दिया- एक मौका तो दो.. फिर उन्होंने मेरी जींस को मेरी ‘वी-शेप’ अंडरवियर के साथ एक ही झटके में नीचे कर दी और मेरा लंड भी उन्हें सलामी देने लगा।
उनकी मुस्कान साफ़ कह रही थी कि उनको मेरा ‘सामान’ पसंद आ गया था।
वो अपने हाथों से मुठियाने लगी और मैं उनके चूचियों की घुंडियों को फिर से मसलने लगा और उनसे पूछ भी लिया- आपको मेरी बन्दूक कैसी लगी?
वो बोली- क्यों इसकी बेइज्जती कर रहा है..ये बन्दूक नहीं तोप है.. तेरे दोस्त का पापा की तो सिर्फ पांच इंच का ही है.. यह तो उनसे काफी बड़ा और मोटा है। मेरा तो मन कर रहा है.. इसे खा जाऊँ..
तो मैंने बोला- खा लो.. रोका किसने है?
आंटी घुटनों के बल बैठकर मेरे लौड़े के सुपाड़े को मुँह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी।
यह पहला अनुभव था मेरा.. जो कि मैंने उन्हें बताया।
तो वो बहुत ही खुश हो गईं और बोलने लगीं- मैं तुम्हें सब सिखा दूँगी और मजे भी दूँगी.. मेरे राजा..
वो फिर से मेरे लौड़े को जोर-जोर से चूसने लगी, जिससे मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और मेरे मुँह से ‘आआह्ह्ह्ह हाआअ’ की सी आवाज़ निकलने लगी।
मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उन्हें बोला- मेरा निकलने वाला है.. आप मुँह हटा लो।
तो वो बोली- मुझे चखना है और देखना है कि इसमें कैसा स्वाद है?
तभी मेरे मुँह से एक जोर की ‘आह’ निकली और मेरा माल आंटी के मुँह में ही झड़ गया..
जिसे आंटी ने बड़े चाव के साथ पी लिया और मेरे लंड को चाट-चाट कर साफ़ भी कर दिया।
तभी दरवाज़े पर किसी ने नॉक किया तो आंटी होश में आई और बोली - कौन?
तो बाहर से अंकिता की आवाज़ आई- मैं हूँ.. कितनी देर लगा दी आपने.. जल्दी आओ.. खाना ठंडा हो रहा है।
फिर आंटी बोली- बस हो गया.. अभी आई।
फिर आंटी ने जल्दी से वहीं टंगी नाइटी पहन ली और मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए और आंटी को दिखाकर बोला- आंटी मैं ठीक तो लग रहा हूँ न?
तो आंटी रुठते हुए स्वर में बोली- आज से तू मझे अकेले शालिनी ही बुलाएगा.. नहीं तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगी।
तो मैंने भी ‘हाँ’ कह दिया और एकबार फिर से उन्हें बाँहों में भरने और एक चुम्बन के लिए आगे बढ़ा तभी आंटी ने मेरे गाल पर एक जोरदार तमाचा मारा। जिससे मैं पुरी तरह होश में आ गया।
फिर हम दोनों कमरे में पहुँचे, जहाँ खाने की टेबल थी..
वहाँ शुभम और अंकिता काफी देर से हम लोगों का इन्तजार कर रहे थे।
शुभम - आप कर क्या रही थीं.. इतनी देर लगा दी?
तो उन्होंने बात बनाते हुए बोला- मेरे को उलटी होने लगी थी… तो काफी देर लग गई.. जिससे मुझे चक्कर आने लगा था तो थोड़ी देर वहीं बैठ गई।
मेरी साड़ी भी इसी चक्कर में भीग गई.. तभी तो चेंज करके आई हूँ..
तो शुभम बोला- अरे आपको कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है.. नहीं तो डॉक्टर के पास चलें?
वो बोली- नहीं.. अब ठीक है।
तो मैंने उन्हें देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बोला- थैंक गॉड.. वहाँ मेरे साथ अनुज था.. नहीं तो ये न पकड़ता तो मैं गिर ही जाती।
फिर शुभम ने भी अपनी मम्मी के लिए मुझे धन्यवाद दिया..
लेकिन अंकिता मुझे जासूस वाली नज़रों से देख रही थी । शायद अंकिता ने हमारी चोरी पकड़ ली थी इसलिए मुझे घुरते हुए अपने मौसी से बोली- आज तो आपको लगता है हममें से किसी की नज़र लग गई.
फिर हम सबने मिलकर खाना खाया और तभी मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो मेरे चेहरे पर भी 12 बज गए.. मुझे पता ही न चला कि कब रात के 12 बज गए।
फिर मैंने घर जाने की इजाजत ली, तो शालिनी आंटी ने मुझे ‘थैंक्स’ बोला और मैंने उन्हें बोला- आज पार्टी में बहुत मज़ा आया।
तो शुभम भी बोला- हाँ.. आज वाकयी बहुत दिनों बाद ऐसी पार्टी हुई।
फिर सबको ‘बॉय’ बोला और घर की ओर चल दिया। पर मेरा दिल बिल्कुल भी नहीं था कि मैं अपने घर जाऊँ.. लेकिन क्या करता.. जाना तो था ही।
जैसे-तैसे मैं अपने घर की ओर चल दिया लेकिन अभी भी मेरी आँखों से शालिनी के गुलाबी चुचियों और उस पर चैरी की तरह निप्पल हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
खैर जैसे-तैसे मैं अपने घर पहुँचा.. घन्टी बजाई तो मेरे पापा ने गेट खोला और मुझे डाँटते हुए बोले- आ गए नवाब.. वक्त देखा.. 12:30 हो रहा है.. कहाँ रहे इतनी देर?
तो मैंने मम्मी की ओर देखते हुए उनसे बोला- क्या आपने बताया नहीं?
तो पापा बोले- इतनी देर कौन सा डिनर चलता है?
तो मैंने आंटी के ‘बर्थडे पार्टी’ वाली बात बता दी..
तब जाकर पापा शान्त और सामान्य हुए और मेरे भी जान में जान आई।
मैं सच बोलूँ तो मेरी मेरे पिता से बहुत फटती है। फिर मैं अपने कमरे में गया और कपड़े बदलने लगा। और जैसे ही मैंने अपने आप को मिरर पर देखा.. तो मेरे सामने फिर से शालिनी के चुचियों की याद आने लगी .. जिसके कारण पता ही नहीं लगा.. कब मेरा सुस्त लौड़ा फिर से ऊँचाइयों को छूने लगा फिर मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और सो गया।
अगली दिन मम्मी के फ़ोन की घंटी बजने से मेरी नींद खुली । तब तक शायद दिन का एक बजा चुका था मैं उठकर बाथरूम चला गया। जब मैं बाथरूम में अपने चेहरे को मिरर पर देखा तो मैं बहुत ही आत्मग्लानि महसूस करने लगा और सोचने लगा कि मैं अपने दोस्त के साथ गलत कर रहा हूँ जो कि गलत ही नहीं अनैतिक भी है। फिर मैंने जान-बूझकर उसके घर जाना छोड़ दिया ताकि कुछ गलत न हो।
शुभम और मैं अब अक्सर मल्टीप्लेक्स में मिलते या मेरे घर पर और वो अक्सर मुझसे बोलता रहता कि मम्मी ने बुलाया है घर चल.. पर मैं बहाना बना देता !
फिर एक दिन शालिनी आंटी मुझे मार्केट में मिलीं। उन्होंने मुझे डाँटते हुए लहजे में बोली - क्या मैं तुम्हें इतनी बुरी लगी.. जो उस दिन के बाद नहीं आया?
तो मैंने बोला- आंटी ऐसा नहीं है।
वो फिर बोली- फिर कैसा है?
तो मैंने उन्हें बोला- आंटी आप मेरे दोस्त की मम्मी है और वो उस दिन गलत हो गया।
इस पर वो गुस्सा करते हुए बोली- पहले तो तू मुझे शालिनी बोल और रही उस दिन की बात.. तो यह तूने तब नहीं सोचा जब तुम मेरे चुचियों चूस रहा था तब यह ख़याल नहीं आया.. जब अपना लौड़ा मेरे मुँह में देकर बोल रहा था .. शालिनी आज तो बहुत ही मज़ा आ रहा है.. क्यों बोल?
मेरे पास इन सब बातों का कोई जवाब न था.. तो मैं क्या कहता
फिर करीब एक मिनट बाद शालिनी आंटी रोते हुए बोली- पहली बार मुझे कोई इतना सुख दिया मैं बता नहीं सकती और फिर उसने मुझे धोखा दे दिया.. और मैं चुपचाप सुनता रहा ।
फिर मैंने मन में सोचा कि भूखी औरत सिर्फ ‘लंड-लंड’ चिल्लाती है..जैसे शालिनी चिल्ला रही है और अगर मैंने ये मौका खो दिया तो शालिनी के साथ-साथ अंकिता भी हाथ से निकल जाएगी।
यह सोचते-सोचते मैंने तुरंत शालिनी से ‘सॉरी’ बोला और उससे कहा- मैं तो बस ये देख रहा था.. जो तड़प तुम्हारे लिए मेरे अन्दर है.. क्या वो तुम्हारे अन्दर भी है या मैं केवल तुम्हारी प्यास बुझाने का जरिया बनकर रह जाऊँगा।
इस पर उसने बिना देर किए ‘आई लव यू’ बोल दी और बोली- आज से मेरा सब कुछ तुम्हारा ही है.. फिर मैंने मज़ाक में बोला- बस एक अहसान करना.. बच्चे का बाप न बना देना।
तो वो हँसने लगी, फिर वो बोली- अब ये बोलो.. घर कब आओगे?
तब मैंने बोला- अब मैं तभी आऊँगा.. जब घर पर शुभम नहीं होगा। फिर मैं अपने घर की ओर चल पड़ा।


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