17-10-2026, 03:10 PM
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तीन अध्याय............. पुनम दुबे ( अनुज की मां )
![[Image: RDT-20260530-1521453950657661581703813-1.jpg]](https://i.ibb.co/mCKgwjV9/RDT-20260530-1521453950657661581703813-1.jpg)
यह कहानी है झारखंड के रहने वाली एक बहुत ही संभ्रांत घर की महिला जिसका नाम है पुनम दुबे ।
...............................
मैं, पुनम दुबे , उम्र करीब 40 वर्ष, एक अमीर और रसूखदार परिवार की मालकिन हूँ। एक बेटा है । पति का कारोबार है , मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही परेशानियाँ भी होती हैं।
इन्हीं परेशानियों की वजह से मेरे पति को हाई शूगर हो गई, शूगर का सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, स्किन और सेक्स पावर पर हुआ। जो आदमी मुझे आधा पौना घंटा रगड़ता था वो इंसान अब इस हालत में था कि मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई करार नहीं आता था, ज़िंदा तो है मगर एक मुर्दा के समान था।
अब आप सोचेंगे कि एक औरत होकर मेरी भाषा ऐसे कैसी हो गई?
तो सुनो, आज की बात नहीं है, करीब 2 साल पहले मैं अपनी किट्टी पार्टी में गई थी, वहाँ पर मेरी एक सहेली जो अपने पति की शुगर की प्रॉबलम के वजह से मेरी तरह ही कामवासना में जल रही थी, उसने मुझे बताया कि अगर ज़्यादा आग लगे तो कामवासना को अपने ही हाथ से ही अपनी वासना को शांत कर लिया कर!
अब पिछले 2 साल से मैं यही कर रही हूँ। जब घर पे कोई नहीं होता तो अपने लैपटाप पे अश्लील वीडियो चलाती और कोई भी चीज़ जो मुझे ठीक ठाक लगे लेती और अपने चूत के अंदर डालती और अपनी आग बुझा लेती । किसी को पता भी नहीं चलता, कामुकता भी शांत हो जाती, और बाहर मुँह मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती । और जब पति को बताती तो उन्होंने भी बुरा नहीं लगता , बल्कि मुझे एक प्लास्टिक का लंड लाकर दे दिया।
अब तो हालत यह हो गई कि पतिदेव मेरी चाटते, मैं उनका मरा हुआ लंड चूसती, वो खुद उस नकली लंड को मेरी चूत में पेलते, और जब दोनों शांत हो जाते तो सो जाते।
कभी कभी मैं अकेली भी कर लेती, कभी कभी जब मेरा दिल करता तो पति के सामने ही कर लेती… वो भी हंस देते, उन्हें पता था कि मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ।
बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत पूरी हो रही थी, मगर फिर दिल में एक बात बार बार आती कि अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस डिल्डो (नकली लंड) जितना तगड़ा हो तो उससे चुदकर क्या मज़ा आए!
मगर इसके लिए मुझे बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वो मेरी बदनामी का कारण हो सकता था।
चलो खैर…
शाम को मैं कभी कभार क्लब चले जाती थी , अब जब घर में बेइंतेहा पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। मुझे शराब और सिगरेट की आदत थीं।
दिवाली की रात थी, मैं क्लब में थी , मैंने उस दिन खूब दारू पी।
करीब ढाई बजे रात तक जब मुझे लगा कि ज़्यादा हो गया है तो मैंने अपने सहेली से बोली घर चलने को । मगर वह तो जुआ खेलने में फंसी थे, वो बोली - तुम जाओ घर, मैं तो अभी और खेलूँगी।
मैं क्या करती, क्लब के बाहर आई नशे में और मैं लड़खड़ा रही थी, कार में बैठी और ड्राइवर घर तक ले आया।
कार से उतरकर जाने लगी तो लड़खड़ा के गिर पड़ी। ड्राइवर भागा भागा आया और आकार उसने मुझे उठाया- अरे मैम संभाल कर!
बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई कि साला मौके का फायदा उठा रहा है। वरण संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है किया। मैंने उसका हाथ आराम से हटा दिया।
फिर एक बार सोचा, आज घर में कोई नहीं है, अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो?
फिर सोचा, नहीं नहीं, यह तो पता नहीं किस किस को बताएगा कि मैंने मेंमसाब की चूत चोदी ली है।
छोड़ो इसे, मैं खुद को संभालती अपने बेडरूम में आ गई । एसी ऑन किया, बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतारे, पहले तो शावर के नीचे बैठे के खूब नहाई, फिर वापिस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई!
मगर यह क्या, कमरे की बत्ती क्यों बंद है, मैं तो जलाकर गई थी।
जैसे ही मैं बत्ती जलाने लगी, किसी ने मुझे पीछे से धर दबोचा और मुझे पटखनी देकर नीचे कालीन पे ही गिरा दिया।
उसने एक हाथ से मेरा मुँह बंद किया और बोला- देखो आंटी अगर चुप रहोगी तो जान बच जाएगी।
मैंने उसे इशारे में ' हाँ ' कही।
उसने मेरे मुँह से धीरे से अपना हाथ हटा लिया।
‘क्या चाहते हो?’ मैंने थोड़ा अकड़कर पूछी।
‘मैं एक चोर हूँ और तेरे घर में चोरी करने आया हूँ।’ वो बोला।
मैंने पलटकर उसकी तरफ देखा, उसके मुँह पे कपड़ा बंधा था। मगर मैंने यह भी महसूस किया था कि जैसे उसने मुझे नीचे गिराने में और मुझे दबा के रखने में अपनी ताक़त दिखाई थी, वाकई वो एक तगड़ा मर्द था।
मेरे दिमाग में तभी एक खुराफात ने जन्म ले लिया, मैं बोली- कितने की चोरी करोगे हमारे घर में?
वो बोला- जितने की हो सके!
मैंने कहा- अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ तो क्या तू मेरे लिए एक काम करेगा?
‘क्या काम’ उसने पूछा।
मैंने कहा- पहले छोड़ तो!
वो बोला- अगर तुमने शोर मचा दिया तो… मैं ये चक्कू तुम्हारे आर पार कर दूँगा।
मैंने कहा- अबे चूतिये, जो ये तू हाथ में लिए फिरता है न, इससे बड़े बड़े से खेली हूँ, मैं, दुबे की लड़की हूँ, इन छोटी मोटी चीजों से नहीं डरती।
उसकी पकड़ मुझपर ढीली पड़ गई।
मैंने उसे धक्का दे के नीचे गिरा दिया और उठकर कमरे की बत्ती जलाई।
‘ओ तेरे दी, आप तो नंगी हैं?’ कहकर उसने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया।मैंने कहा- न जब पिछले पाँच मिनट से मुझे नीचे दबा कर लेटा था, तब नहीं पता था कि मैं नंगी हूँ?
‘जी, मैंने ख्याल नहीं किया!’ वो बोला।
‘अच्छा, और ये जो तेरी पेंट में उठा हुआ दिख रहा है, वो क्या?’ कहकर मैं ड्रॉअर के पास गई, उसमें से एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला, एक सिगरेट खुद लगाई एक उस को दी और जाकर बेड पे बैठ गई।
मैंने उसे पास बुलाया और बेड पर बैठने का इशारा किया।
वो आकर बेड के एक किनारे पे बैठ गया और मेरे गुप्तांगों को चोरी चोरी देखने लगा।
‘क्यों, कभी कोई औरत नहीं देखी?’ मैंने एक कश लगाकर उससे पूछा।
वो बोला- जी बहुत देखी हैं, मगर आपकी उम्र की पहली बार देखी है।
‘क्यों, क्या खराबी है मेरी उम्र में?’ मैंने कहा।
वो कुछ न बोल पाया- आप कुछ काम के बारे में कह रही थी।
मैं आलथी पालथी मारकर बैठ गई- देख बात सुन मेरी, ये काम तुम पैसे के लिए करते हो, अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ, तो क्या मेरा कहा काम करोगे?
उसने मेरी शेव की हुई चूत की तरफ देखा- काम क्या है?
मैंने अपनी पीठ बेड से टिकाई और अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके अपनी उंगली से अपनी चूत की तरफ इशारा करके बोली- इसे चोदना है।
‘इसे…?’ कहकर वो हैरानी से उठ खड़ा हुआ।
‘क्यों, तुमने भी औरत को नहीं चोदी , जो इतना हैरान हो रहा है ?’ मैं बोली
‘मगर आंटी, मैंने आज तक कभी इतनी उम्र की औरत के साथ चुदाई नहीं किया।’ वो बोला।
‘देख सबसे पहले तो मुझे आंटी मत बोल, दूसरी बात, अगर तुम्हें मज़ा और पैसे दोनों मिले तो दिक्कत क्या है यार?’ मैंने कहा।
उसने फिर से मेरे नंगे बदन को देखा और बोला- पैसा कितना दोगी?
मैंने कहा- तुझे कितना चाहिए?
वो बोला- 5 हज़ार।
मैंने दराज़ से पैसे निकले और बिना गिने उसकी तरफ फेंक दिये।
उसने पैसे उठाए और गिने- ये तो 9 हज़ार हैं।
‘गो टू बाथरूम और नहा कर आओ!’ मैंने उसको हुकुम सुनाया।
वो बाथरूम में चला गया।
मैंने एक पेग और बना लिया और धीरे धीरे पीने लगी।
पेग लेकर मैं बाथरूम के दरवाजे पे गई, दरवाजा खोला, वो अंदर बिल्कुल नंगा नहा रहा था मेरी तरफ उसकी पीठ थी।
मैंने उसका काला बदन, चौड़ा सीना, मजबूत जांघें निहारी और वहीं से खड़ी खड़ी मैंने कहा- जब नहा लो तो कपड़े मत पहनना, ऐसे ही बाहर आ जाना।
जब वो नहा लिया तो मेरे कहे अनुसार नहा के नंगा ही बाहर आ गया, जब वो बाहर आया तो मैंने उसका लंड भी देखा।
मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया।
वो मेरे पास आया, मैंने उसका लंड पकड़ के उसे अपने पास खींच लिया और उसका लंड सीधे अपने मुँह में ले लिया।
एक मिनट से भी कम समय में उसका लंड तनकर लोहा हो गया।
मैं चाहती थी के उसका लंड मैं चबाकर खा जाऊँ।
‘मेरी चूत चाटेगा?’ मैंने उससे पूछा।
वो बोला- हाँ चाट लूँगा, पैसे जो मिले हैं।
उसने मेरी कमर के दोनों तरफ अपनी बाहें कसी और खुद बेड पर लेट गया और मुझे अपनी ताकत से घूमाकर मुझे अपने ऊपर लेटा लिया।
वाह क्या ताकत थी, उसकी इसी अदा पर मैं निहाल हो गई।
वो मेरी चूत चाटने लगा, मुझे बहुत मज़ा आया तो मैंने भी उसका लंड जितना हो सकता था अपने मुँह के अंदर तक लेकर चूसी।
दो मिनट की चूसा चासी के बाद उसने मुझे नीचे लेटा दिया और खुद ऊपर आ गया, उसने अपना लंड मेरी चूत पे रखा और एक ही धक्के से आधे से भी ज़्यादा लंड मेरे जिस्म में उतार दिया।
मैं दर्द से बिलबिला उठी, मगर उस पर अब कामुकता सवार हो गया था, उसने मेरी दोनों चुचियों अपने सख्त हाथों में पकड़ ली और मसल के रख दी।
ऊपर वो मेरी चूचियों मसल रहा था और नीचे से लोहे जैसे अपने लंड से मेरे जिस्म के दो टुकड़े करने में लगा था।
हर बार उसका लंड मेरी चूत के आखरी सिरे पे जाकर ज़ोर से लगता और मेरी हल्की से चीख निकल जाती।
वो अपना पूरी लंड बाहर निकालकर फिर से अंदर डालता और मेरी चूत के होंठों से लेकर मेरी बच्चेदानी तक उसके सख्त लंड की मार झेल रही थी। मैं तो सिर्फ एक चुदाई चाहती थी, मगर ये तो एक चुदाई से कहीं ज़्यादा थी।
![[Image: RDT-20261017-1005425090092147466921709.jpg]](https://i.ibb.co/1J97XqgG/RDT-20261017-1005425090092147466921709.jpg)
![[Image: RDT-20261017-1005363440265663477884408.jpg]](https://i.ibb.co/bgfsTGgR/RDT-20261017-1005363440265663477884408.jpg)
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![[Image: RDT-20261017-1005294353474056700572797.jpg]](https://i.ibb.co/9HZMZYTv/RDT-20261017-1005294353474056700572797.jpg)
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![[Image: RDT-20261017-1005245645696671586523266.jpg]](https://i.ibb.co/0R8X2crs/RDT-20261017-1005245645696671586523266.jpg)
मेरी तो जान निकली जा रही थी, वो कभी मेरे होंठ चूसता, कभी मेरे गालों को अपने दाँतो से काटता, मेरे चुचियों पर । सभी जगह उसके दाँतों के निशान पड़ चुके थे।
मैं इस ताकतवर संभोग के लिए तैयार नहीं थी, आज मुझे एहसास हो रहा था कि मैं सच में बूढ़ी हो गई हूँ।
एक नौजवान औरत ही इस तरह के ताकतवर संभोग को झेल सकती है, मैं नहीं।
शायद इसी लिए, मैं 3-4 मिनट की जोरदार चुदाई में ही झड़ गई।
मगर मेरे झड़ने से उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो उसी जोश और जुनून से मुझे चोद रहा था। मैं तो बेहाल होकर नीचे पड़ी थी।
करीब सात मिनट उसने मुझे और चोदा और फिर अपनी पूरी ताकत झोंककर वो मेरी चूत में स्खलित हुआ।
उसके वीर्य की धारें मुझे मेरी चूत के अंदर मेरी बच्चेदानी पर पड़ती ऐसे लगी जैसे कोई पिचकारी से पानी की धार मार रहा है।
उस नौजवान मर्द की एक चुदाई ने ही मेरे बदन को तोड़कर रख दिया।
वो मेरी बगल में लेट गया।मैं उठी और मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा, उसमें अब भी बहुत करार था।मैंने उसे अपनी जीभ से चाटा और मुँह में लेकर चूसा, उसके वीर्य को उसके लंड से चाट चाट कर खा गई।
‘क्यों आंटी, मज़ा आया?’ वो बोला।
‘सच कहूँ, तूने तो मेरी माँ चोद के रख दी, बहुत ताकत है रे तुझमें।’ मैंने उसके सीने पे हाथ फिरते हुये कहा।
‘और चुदेगी?’ उसने मेरे निप्पल को अपनी उँगलियों से मसलते हुये पूछा।
‘नहीं, मेरी तो एक बार में ही तसल्ली करवा दी तूने, नाम क्या है तेरा?’ मैंने पूछा।
' अजय ' यह मेरा फोन नंबर है, फिर कभी ज़रूरत पड़ी तो फोन करना, पर एक बात कहूँ, मुझे भी तेरी लेकर बड़ा मज़ा आया, इस उम्र में भी तू बड़ी हॉट है।’ कहकर वो उठा और कपड़े पहनने लगा।
‘अब क्या करेगा’ मैंने उससे पूछा।
‘तुझे तो लूट लिया, अब देखता हूँ किसी और घर में कुछ और मिलता है क्या रोटी भी तो खानी है, केवल चुदाई से ही तो पेट नहीं भरता !’ कहकर वो चला गया और मैं बेड पर लेटी सोच रही थी, क्या वो मुझे लूट के गया या मैंने अपने ज़िंदगी का मज़ा लूट लिया।
उसने मेरे घर में चोरी की या मैंने अपनी बोरिंग ज़िंदगी से अपनी खुशी की अपनी संतुष्टि की कुछ घड़ियाँ चुरा ली, जो भी हुआ, बहुत ही बढ़िया हुआ।
अभी नींद नहीं आ रही थी, मैंने अपना लैपटाप उठाया और फिर एक अश्लील वीडियो देख ली और अश्लील कहानी पढ़ने लगी, तभी मुझे ख्याल आया क्यों न अपनी कहानी भी मैं xossipy पे छपवाऊँ।
तो मैंने जो कहानी सबसे पहले खोली वो थी mother and son : a taboo affair 3 बस उसके लेखक puja3567853 को ई मेल करके पूछी कि क्या वो मेरी कहानी छपवा देगी।
![[Image: RDT-20260530-1521453950657661581703813-1.jpg]](https://i.ibb.co/mCKgwjV9/RDT-20260530-1521453950657661581703813-1.jpg)
यह कहानी है झारखंड के रहने वाली एक बहुत ही संभ्रांत घर की महिला जिसका नाम है पुनम दुबे ।
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मैं, पुनम दुबे , उम्र करीब 40 वर्ष, एक अमीर और रसूखदार परिवार की मालकिन हूँ। एक बेटा है । पति का कारोबार है , मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही परेशानियाँ भी होती हैं।
इन्हीं परेशानियों की वजह से मेरे पति को हाई शूगर हो गई, शूगर का सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, स्किन और सेक्स पावर पर हुआ। जो आदमी मुझे आधा पौना घंटा रगड़ता था वो इंसान अब इस हालत में था कि मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई करार नहीं आता था, ज़िंदा तो है मगर एक मुर्दा के समान था।
अब आप सोचेंगे कि एक औरत होकर मेरी भाषा ऐसे कैसी हो गई?
तो सुनो, आज की बात नहीं है, करीब 2 साल पहले मैं अपनी किट्टी पार्टी में गई थी, वहाँ पर मेरी एक सहेली जो अपने पति की शुगर की प्रॉबलम के वजह से मेरी तरह ही कामवासना में जल रही थी, उसने मुझे बताया कि अगर ज़्यादा आग लगे तो कामवासना को अपने ही हाथ से ही अपनी वासना को शांत कर लिया कर!
अब पिछले 2 साल से मैं यही कर रही हूँ। जब घर पे कोई नहीं होता तो अपने लैपटाप पे अश्लील वीडियो चलाती और कोई भी चीज़ जो मुझे ठीक ठाक लगे लेती और अपने चूत के अंदर डालती और अपनी आग बुझा लेती । किसी को पता भी नहीं चलता, कामुकता भी शांत हो जाती, और बाहर मुँह मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती । और जब पति को बताती तो उन्होंने भी बुरा नहीं लगता , बल्कि मुझे एक प्लास्टिक का लंड लाकर दे दिया।
अब तो हालत यह हो गई कि पतिदेव मेरी चाटते, मैं उनका मरा हुआ लंड चूसती, वो खुद उस नकली लंड को मेरी चूत में पेलते, और जब दोनों शांत हो जाते तो सो जाते।
कभी कभी मैं अकेली भी कर लेती, कभी कभी जब मेरा दिल करता तो पति के सामने ही कर लेती… वो भी हंस देते, उन्हें पता था कि मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ।
बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत पूरी हो रही थी, मगर फिर दिल में एक बात बार बार आती कि अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस डिल्डो (नकली लंड) जितना तगड़ा हो तो उससे चुदकर क्या मज़ा आए!
मगर इसके लिए मुझे बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वो मेरी बदनामी का कारण हो सकता था।
चलो खैर…
शाम को मैं कभी कभार क्लब चले जाती थी , अब जब घर में बेइंतेहा पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। मुझे शराब और सिगरेट की आदत थीं।
दिवाली की रात थी, मैं क्लब में थी , मैंने उस दिन खूब दारू पी।
करीब ढाई बजे रात तक जब मुझे लगा कि ज़्यादा हो गया है तो मैंने अपने सहेली से बोली घर चलने को । मगर वह तो जुआ खेलने में फंसी थे, वो बोली - तुम जाओ घर, मैं तो अभी और खेलूँगी।
मैं क्या करती, क्लब के बाहर आई नशे में और मैं लड़खड़ा रही थी, कार में बैठी और ड्राइवर घर तक ले आया।
कार से उतरकर जाने लगी तो लड़खड़ा के गिर पड़ी। ड्राइवर भागा भागा आया और आकार उसने मुझे उठाया- अरे मैम संभाल कर!
बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई कि साला मौके का फायदा उठा रहा है। वरण संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है किया। मैंने उसका हाथ आराम से हटा दिया।
फिर एक बार सोचा, आज घर में कोई नहीं है, अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो?
फिर सोचा, नहीं नहीं, यह तो पता नहीं किस किस को बताएगा कि मैंने मेंमसाब की चूत चोदी ली है।
छोड़ो इसे, मैं खुद को संभालती अपने बेडरूम में आ गई । एसी ऑन किया, बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतारे, पहले तो शावर के नीचे बैठे के खूब नहाई, फिर वापिस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई!
मगर यह क्या, कमरे की बत्ती क्यों बंद है, मैं तो जलाकर गई थी।
जैसे ही मैं बत्ती जलाने लगी, किसी ने मुझे पीछे से धर दबोचा और मुझे पटखनी देकर नीचे कालीन पे ही गिरा दिया।
उसने एक हाथ से मेरा मुँह बंद किया और बोला- देखो आंटी अगर चुप रहोगी तो जान बच जाएगी।
मैंने उसे इशारे में ' हाँ ' कही।
उसने मेरे मुँह से धीरे से अपना हाथ हटा लिया।
‘क्या चाहते हो?’ मैंने थोड़ा अकड़कर पूछी।
‘मैं एक चोर हूँ और तेरे घर में चोरी करने आया हूँ।’ वो बोला।
मैंने पलटकर उसकी तरफ देखा, उसके मुँह पे कपड़ा बंधा था। मगर मैंने यह भी महसूस किया था कि जैसे उसने मुझे नीचे गिराने में और मुझे दबा के रखने में अपनी ताक़त दिखाई थी, वाकई वो एक तगड़ा मर्द था।
मेरे दिमाग में तभी एक खुराफात ने जन्म ले लिया, मैं बोली- कितने की चोरी करोगे हमारे घर में?
वो बोला- जितने की हो सके!
मैंने कहा- अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ तो क्या तू मेरे लिए एक काम करेगा?
‘क्या काम’ उसने पूछा।
मैंने कहा- पहले छोड़ तो!
वो बोला- अगर तुमने शोर मचा दिया तो… मैं ये चक्कू तुम्हारे आर पार कर दूँगा।
मैंने कहा- अबे चूतिये, जो ये तू हाथ में लिए फिरता है न, इससे बड़े बड़े से खेली हूँ, मैं, दुबे की लड़की हूँ, इन छोटी मोटी चीजों से नहीं डरती।
उसकी पकड़ मुझपर ढीली पड़ गई।
मैंने उसे धक्का दे के नीचे गिरा दिया और उठकर कमरे की बत्ती जलाई।
‘ओ तेरे दी, आप तो नंगी हैं?’ कहकर उसने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया।मैंने कहा- न जब पिछले पाँच मिनट से मुझे नीचे दबा कर लेटा था, तब नहीं पता था कि मैं नंगी हूँ?
‘जी, मैंने ख्याल नहीं किया!’ वो बोला।
‘अच्छा, और ये जो तेरी पेंट में उठा हुआ दिख रहा है, वो क्या?’ कहकर मैं ड्रॉअर के पास गई, उसमें से एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाला, एक सिगरेट खुद लगाई एक उस को दी और जाकर बेड पे बैठ गई।
मैंने उसे पास बुलाया और बेड पर बैठने का इशारा किया।
वो आकर बेड के एक किनारे पे बैठ गया और मेरे गुप्तांगों को चोरी चोरी देखने लगा।
‘क्यों, कभी कोई औरत नहीं देखी?’ मैंने एक कश लगाकर उससे पूछा।
वो बोला- जी बहुत देखी हैं, मगर आपकी उम्र की पहली बार देखी है।
‘क्यों, क्या खराबी है मेरी उम्र में?’ मैंने कहा।
वो कुछ न बोल पाया- आप कुछ काम के बारे में कह रही थी।
मैं आलथी पालथी मारकर बैठ गई- देख बात सुन मेरी, ये काम तुम पैसे के लिए करते हो, अगर मैं तुम्हें कुछ पैसे दूँ, तो क्या मेरा कहा काम करोगे?
उसने मेरी शेव की हुई चूत की तरफ देखा- काम क्या है?
मैंने अपनी पीठ बेड से टिकाई और अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके अपनी उंगली से अपनी चूत की तरफ इशारा करके बोली- इसे चोदना है।
‘इसे…?’ कहकर वो हैरानी से उठ खड़ा हुआ।
‘क्यों, तुमने भी औरत को नहीं चोदी , जो इतना हैरान हो रहा है ?’ मैं बोली
‘मगर आंटी, मैंने आज तक कभी इतनी उम्र की औरत के साथ चुदाई नहीं किया।’ वो बोला।
‘देख सबसे पहले तो मुझे आंटी मत बोल, दूसरी बात, अगर तुम्हें मज़ा और पैसे दोनों मिले तो दिक्कत क्या है यार?’ मैंने कहा।
उसने फिर से मेरे नंगे बदन को देखा और बोला- पैसा कितना दोगी?
मैंने कहा- तुझे कितना चाहिए?
वो बोला- 5 हज़ार।
मैंने दराज़ से पैसे निकले और बिना गिने उसकी तरफ फेंक दिये।
उसने पैसे उठाए और गिने- ये तो 9 हज़ार हैं।
‘गो टू बाथरूम और नहा कर आओ!’ मैंने उसको हुकुम सुनाया।
वो बाथरूम में चला गया।
मैंने एक पेग और बना लिया और धीरे धीरे पीने लगी।
पेग लेकर मैं बाथरूम के दरवाजे पे गई, दरवाजा खोला, वो अंदर बिल्कुल नंगा नहा रहा था मेरी तरफ उसकी पीठ थी।
मैंने उसका काला बदन, चौड़ा सीना, मजबूत जांघें निहारी और वहीं से खड़ी खड़ी मैंने कहा- जब नहा लो तो कपड़े मत पहनना, ऐसे ही बाहर आ जाना।
जब वो नहा लिया तो मेरे कहे अनुसार नहा के नंगा ही बाहर आ गया, जब वो बाहर आया तो मैंने उसका लंड भी देखा।
मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया।
वो मेरे पास आया, मैंने उसका लंड पकड़ के उसे अपने पास खींच लिया और उसका लंड सीधे अपने मुँह में ले लिया।
एक मिनट से भी कम समय में उसका लंड तनकर लोहा हो गया।
मैं चाहती थी के उसका लंड मैं चबाकर खा जाऊँ।
‘मेरी चूत चाटेगा?’ मैंने उससे पूछा।
वो बोला- हाँ चाट लूँगा, पैसे जो मिले हैं।
उसने मेरी कमर के दोनों तरफ अपनी बाहें कसी और खुद बेड पर लेट गया और मुझे अपनी ताकत से घूमाकर मुझे अपने ऊपर लेटा लिया।
वाह क्या ताकत थी, उसकी इसी अदा पर मैं निहाल हो गई।
वो मेरी चूत चाटने लगा, मुझे बहुत मज़ा आया तो मैंने भी उसका लंड जितना हो सकता था अपने मुँह के अंदर तक लेकर चूसी।
दो मिनट की चूसा चासी के बाद उसने मुझे नीचे लेटा दिया और खुद ऊपर आ गया, उसने अपना लंड मेरी चूत पे रखा और एक ही धक्के से आधे से भी ज़्यादा लंड मेरे जिस्म में उतार दिया।
मैं दर्द से बिलबिला उठी, मगर उस पर अब कामुकता सवार हो गया था, उसने मेरी दोनों चुचियों अपने सख्त हाथों में पकड़ ली और मसल के रख दी।
ऊपर वो मेरी चूचियों मसल रहा था और नीचे से लोहे जैसे अपने लंड से मेरे जिस्म के दो टुकड़े करने में लगा था।
हर बार उसका लंड मेरी चूत के आखरी सिरे पे जाकर ज़ोर से लगता और मेरी हल्की से चीख निकल जाती।
वो अपना पूरी लंड बाहर निकालकर फिर से अंदर डालता और मेरी चूत के होंठों से लेकर मेरी बच्चेदानी तक उसके सख्त लंड की मार झेल रही थी। मैं तो सिर्फ एक चुदाई चाहती थी, मगर ये तो एक चुदाई से कहीं ज़्यादा थी।
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मेरी तो जान निकली जा रही थी, वो कभी मेरे होंठ चूसता, कभी मेरे गालों को अपने दाँतो से काटता, मेरे चुचियों पर । सभी जगह उसके दाँतों के निशान पड़ चुके थे।
मैं इस ताकतवर संभोग के लिए तैयार नहीं थी, आज मुझे एहसास हो रहा था कि मैं सच में बूढ़ी हो गई हूँ।
एक नौजवान औरत ही इस तरह के ताकतवर संभोग को झेल सकती है, मैं नहीं।
शायद इसी लिए, मैं 3-4 मिनट की जोरदार चुदाई में ही झड़ गई।
मगर मेरे झड़ने से उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वो उसी जोश और जुनून से मुझे चोद रहा था। मैं तो बेहाल होकर नीचे पड़ी थी।
करीब सात मिनट उसने मुझे और चोदा और फिर अपनी पूरी ताकत झोंककर वो मेरी चूत में स्खलित हुआ।
उसके वीर्य की धारें मुझे मेरी चूत के अंदर मेरी बच्चेदानी पर पड़ती ऐसे लगी जैसे कोई पिचकारी से पानी की धार मार रहा है।
उस नौजवान मर्द की एक चुदाई ने ही मेरे बदन को तोड़कर रख दिया।
वो मेरी बगल में लेट गया।मैं उठी और मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा, उसमें अब भी बहुत करार था।मैंने उसे अपनी जीभ से चाटा और मुँह में लेकर चूसा, उसके वीर्य को उसके लंड से चाट चाट कर खा गई।
‘क्यों आंटी, मज़ा आया?’ वो बोला।
‘सच कहूँ, तूने तो मेरी माँ चोद के रख दी, बहुत ताकत है रे तुझमें।’ मैंने उसके सीने पे हाथ फिरते हुये कहा।
‘और चुदेगी?’ उसने मेरे निप्पल को अपनी उँगलियों से मसलते हुये पूछा।
‘नहीं, मेरी तो एक बार में ही तसल्ली करवा दी तूने, नाम क्या है तेरा?’ मैंने पूछा।
' अजय ' यह मेरा फोन नंबर है, फिर कभी ज़रूरत पड़ी तो फोन करना, पर एक बात कहूँ, मुझे भी तेरी लेकर बड़ा मज़ा आया, इस उम्र में भी तू बड़ी हॉट है।’ कहकर वो उठा और कपड़े पहनने लगा।
‘अब क्या करेगा’ मैंने उससे पूछा।
‘तुझे तो लूट लिया, अब देखता हूँ किसी और घर में कुछ और मिलता है क्या रोटी भी तो खानी है, केवल चुदाई से ही तो पेट नहीं भरता !’ कहकर वो चला गया और मैं बेड पर लेटी सोच रही थी, क्या वो मुझे लूट के गया या मैंने अपने ज़िंदगी का मज़ा लूट लिया।
उसने मेरे घर में चोरी की या मैंने अपनी बोरिंग ज़िंदगी से अपनी खुशी की अपनी संतुष्टि की कुछ घड़ियाँ चुरा ली, जो भी हुआ, बहुत ही बढ़िया हुआ।
अभी नींद नहीं आ रही थी, मैंने अपना लैपटाप उठाया और फिर एक अश्लील वीडियो देख ली और अश्लील कहानी पढ़ने लगी, तभी मुझे ख्याल आया क्यों न अपनी कहानी भी मैं xossipy पे छपवाऊँ।
तो मैंने जो कहानी सबसे पहले खोली वो थी mother and son : a taboo affair 3 बस उसके लेखक puja3567853 को ई मेल करके पूछी कि क्या वो मेरी कहानी छपवा देगी।


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