Today, 08:33 AM
**मम्मी:** *(बिस्तर की नरम सतह पर लेटते ही मम्मी का पूरा बदन थरथरा गया। कल्लू का भारी शरीर जब उनके ऊपर आया, तो उन्हें महसूस हुआ कि वो कितनी छोटी पड़ गई हैं। उनकी साँसें फूल रही थीं और दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि उन्हें डर लग रहा था कि कहीं कल्लू उसे सुन न ले।)*
"उम्म्म... कल्लू..."
*(उन्होंने अपनी दोनों हथेलियाँ कल्लू के चौड़े कंधों पर टिका दीं। उनकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक गहरी तड़प और समर्पण था। उन्होंने अपनी टाँगों को हल्का सा फैलाया, मानो उन्हें और करीब बुला रही हों।)*
"तुम... तुम सच में पागल कर दोगे मुझे आज..."
**कल्लू:** *(मम्मी के इस समर्पण ने कल्लू के होश उड़ा दिए। उनकी फैली हुई टाँगें और उनकी आँखों में छिपी वो तड़प देख कल्लू का खून उबलने लगा। उसने एक हाथ से उनकी कलाई पकड़कर बिस्तर के पास दीवार से सटा दी, जबकि दूसरा हाथ उनकी साड़ी के पल्लू पर चला गया।)*
"पागल तो मैं कब का हो चुका हूँ मालकिन... बस इंतज़ार था आपके इस इशारे का।"
*(उसने बड़ी बेरहमी और जुनून के साथ उनकी साड़ी का पल्लू खींच लिया, जिससे उनका बदन आधा खुला रह गया। उसकी नज़रें उनके उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं। उसने अपना चेहरा उनके सीने के पास लाया और अपनी जीभ से उनकी त्वचा को हल्के से सहलाया, जिससे मम्मी का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया।)*
**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू की गरम जीभ उनकी त्वचा को छूई, मम्मी के पूरे शरीर में एक तीव्र लहर दौड़ गई। उन्होंने अपनी आँखें मूँद लीं और उनके गले से एक बहुत ही बारीक, लेकिन गहरी आह निकल पड़ी। उनका बदन कल्लू के स्पर्श के प्रति इतना संवेदनशील हो गया था कि हर हरकत उन्हें अंदर तक झकझोर रही थी।)*
"अह्ह्ह... कल्लू... रुकना मत..."
*(उन्होंने अपनी कलाई को कल्लू के हाथ से छुड़ाने की कोशिश नहीं की, बल्कि उल्टा अपनी कलाई को उसके हाथ की तरफ और ज़ोर से दबाया, मानो वो चाहती हों कि वो उन्हें और भी बेबस कर दे। उनकी सांसें अब बहुत तेज़ चलने लगी थीं और उनके चेहरे पर एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान आ गई थी।)*
"मुझे..."
**कल्लू:** *(उनकी इस बेताबी ने कल्लू के सब्र का बांध तोड़ दिया। "मुझे..." शब्द उनके मुँह से निकलते ही कल्लू ने समझ लिया कि अब और इंतज़ार करना गुनाह होगा। उसने अपनी पकड़ ढीली नहीं की, बल्कि उनकी कलाई को और मजबूती से पकड़े हुए उनके दूसरे हाथ को उनके बालों में फंसा लिया, जिससे उनका सिर थोड़ा पीछे की ओर झुक गया।)*
"आपको क्या चाहिए मालकिन? बोलिए ना... जो आप चाहेंगी, वही मिलेगा।"
**मम्मी:** *(गर्दन पीछे की ओर खिंचने से उनकी छाती और भी उभर आई, जो कल्लू की नज़रों के ठीक सामने थी। उनकी साँसें अब कल्लू के चेहरे से टकरा रही थीं। उन्होंने अपनी धुंधली पड़ती नज़रों से कल्लू की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ वासना और अधिकार झलक रहा था।)*
"वही... जो तुम हमेशा से चाहते थे..."
*(उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जिससे उनके शरीर का उभार कल्लू के पेट से रगड़ने लगा। उनकी आवाज़ अब फुसफुसाहट में बदल चुकी थी, जिसमें एक किस्म का आदेश और पुकार दोनों थे।)*
"सब कुछ... मुझे तुम्हारा सब कुछ चाहिए, कल्लू। अभी इसी वक्त!"
**कल्लू:** *(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर सोए हुए ज्वालामुखी को विस्फोट कर दिया। "सब कुछ चाहिए"... ये शब्द उसके कानों में किसी मंत्र की तरह गूंज रहे थे। उसने उनकी कलाई छोड़ दी और झपटकर उनकी कमर को अपने हाथों में भर लिया, जैसे वो उन्हें निगल जाना चाहता हो।)*
"फिर तैयार हो जाइए मालकिन... क्योंकि आज मैं आपको चैन से सोने नहीं दूँगा।"
**मम्मी:** *(कल्लू की बाहों में खुद को कैद महसूस करते ही मम्मी के भीतर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। जब उसने उनकी कमर को इतनी मजबूती से जकड़ा, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका सारा नियंत्रण खत्म हो गया है और अब वो पूरी तरह से कल्लू के हवाले हैं। उन्होंने अपनी आँखें खोलकर उसे देखा, उनकी आँखों में प्यास और समर्पण का मिला-जुला भाव था।)*
"चैन तो वैसे भी मुझे कभी मिलता नहीं, कल्लू... आज तो बस इस आग को बुझा दो।"
*(उन्होंने अपना एक पैर उठाकर कल्लू की जांघों के बीच फंसा लिया, जैसे वो उसे अपने और करीब खींचना चाहती हों। उनकी उंगलियां कल्लू के कंधों को जोर से जकड़ने लगीं, मानो वो उस पल को थाम लेना चाहती हों।)*
"उम्म्म... कल्लू..."
*(उन्होंने अपनी दोनों हथेलियाँ कल्लू के चौड़े कंधों पर टिका दीं। उनकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक गहरी तड़प और समर्पण था। उन्होंने अपनी टाँगों को हल्का सा फैलाया, मानो उन्हें और करीब बुला रही हों।)*
"तुम... तुम सच में पागल कर दोगे मुझे आज..."
**कल्लू:** *(मम्मी के इस समर्पण ने कल्लू के होश उड़ा दिए। उनकी फैली हुई टाँगें और उनकी आँखों में छिपी वो तड़प देख कल्लू का खून उबलने लगा। उसने एक हाथ से उनकी कलाई पकड़कर बिस्तर के पास दीवार से सटा दी, जबकि दूसरा हाथ उनकी साड़ी के पल्लू पर चला गया।)*
"पागल तो मैं कब का हो चुका हूँ मालकिन... बस इंतज़ार था आपके इस इशारे का।"
*(उसने बड़ी बेरहमी और जुनून के साथ उनकी साड़ी का पल्लू खींच लिया, जिससे उनका बदन आधा खुला रह गया। उसकी नज़रें उनके उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं। उसने अपना चेहरा उनके सीने के पास लाया और अपनी जीभ से उनकी त्वचा को हल्के से सहलाया, जिससे मम्मी का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया।)*
**मम्मी:** *(जैसे ही कल्लू की गरम जीभ उनकी त्वचा को छूई, मम्मी के पूरे शरीर में एक तीव्र लहर दौड़ गई। उन्होंने अपनी आँखें मूँद लीं और उनके गले से एक बहुत ही बारीक, लेकिन गहरी आह निकल पड़ी। उनका बदन कल्लू के स्पर्श के प्रति इतना संवेदनशील हो गया था कि हर हरकत उन्हें अंदर तक झकझोर रही थी।)*
"अह्ह्ह... कल्लू... रुकना मत..."
*(उन्होंने अपनी कलाई को कल्लू के हाथ से छुड़ाने की कोशिश नहीं की, बल्कि उल्टा अपनी कलाई को उसके हाथ की तरफ और ज़ोर से दबाया, मानो वो चाहती हों कि वो उन्हें और भी बेबस कर दे। उनकी सांसें अब बहुत तेज़ चलने लगी थीं और उनके चेहरे पर एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान आ गई थी।)*
"मुझे..."
**कल्लू:** *(उनकी इस बेताबी ने कल्लू के सब्र का बांध तोड़ दिया। "मुझे..." शब्द उनके मुँह से निकलते ही कल्लू ने समझ लिया कि अब और इंतज़ार करना गुनाह होगा। उसने अपनी पकड़ ढीली नहीं की, बल्कि उनकी कलाई को और मजबूती से पकड़े हुए उनके दूसरे हाथ को उनके बालों में फंसा लिया, जिससे उनका सिर थोड़ा पीछे की ओर झुक गया।)*
"आपको क्या चाहिए मालकिन? बोलिए ना... जो आप चाहेंगी, वही मिलेगा।"
**मम्मी:** *(गर्दन पीछे की ओर खिंचने से उनकी छाती और भी उभर आई, जो कल्लू की नज़रों के ठीक सामने थी। उनकी साँसें अब कल्लू के चेहरे से टकरा रही थीं। उन्होंने अपनी धुंधली पड़ती नज़रों से कल्लू की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ वासना और अधिकार झलक रहा था।)*
"वही... जो तुम हमेशा से चाहते थे..."
*(उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जिससे उनके शरीर का उभार कल्लू के पेट से रगड़ने लगा। उनकी आवाज़ अब फुसफुसाहट में बदल चुकी थी, जिसमें एक किस्म का आदेश और पुकार दोनों थे।)*
"सब कुछ... मुझे तुम्हारा सब कुछ चाहिए, कल्लू। अभी इसी वक्त!"
**कल्लू:** *(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर सोए हुए ज्वालामुखी को विस्फोट कर दिया। "सब कुछ चाहिए"... ये शब्द उसके कानों में किसी मंत्र की तरह गूंज रहे थे। उसने उनकी कलाई छोड़ दी और झपटकर उनकी कमर को अपने हाथों में भर लिया, जैसे वो उन्हें निगल जाना चाहता हो।)*
"फिर तैयार हो जाइए मालकिन... क्योंकि आज मैं आपको चैन से सोने नहीं दूँगा।"
**मम्मी:** *(कल्लू की बाहों में खुद को कैद महसूस करते ही मम्मी के भीतर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। जब उसने उनकी कमर को इतनी मजबूती से जकड़ा, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे उनका सारा नियंत्रण खत्म हो गया है और अब वो पूरी तरह से कल्लू के हवाले हैं। उन्होंने अपनी आँखें खोलकर उसे देखा, उनकी आँखों में प्यास और समर्पण का मिला-जुला भाव था।)*
"चैन तो वैसे भी मुझे कभी मिलता नहीं, कल्लू... आज तो बस इस आग को बुझा दो।"
*(उन्होंने अपना एक पैर उठाकर कल्लू की जांघों के बीच फंसा लिया, जैसे वो उसे अपने और करीब खींचना चाहती हों। उनकी उंगलियां कल्लू के कंधों को जोर से जकड़ने लगीं, मानो वो उस पल को थाम लेना चाहती हों।)*


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