1 hour ago
*(घर के मुख्य द्वार के बंद होने की आवाज़ गूँजी। पापा की कार दूर जाते हुए धीरे-धीरे शांत हो गई। घर के अंदर सन्नाटा पसर गया, जो अचानक से काफी भारी लगने लगा।)*
**मम्मी:** *(मम्मी ने गहरी साँस ली और दरवाज़े की कुंडी लगा दी। उन्होंने अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ा, जैसे खुद को दिलासा दे रही हों।)*
"चलो, शुक्र है दोनों चले गए। अब शांति रहेगी।"
*(लेकिन जैसे ही उन्होंने मुड़कर हॉल की तरफ देखा, उनकी नज़र कोने में खड़े कल्लू पर पड़ी। कल्लू चुपचाप खड़ा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जिसे देखकर मम्मी को थोड़ी बेचैनी होने लगी।)*
**कल्लू:** *(कल्लू के चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कान तैर गई। वह धीरे-धीरे चलकर मम्मी के करीब आया, मानो वह उनकी बेचैनी का मज़ा ले रहा हो। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।)*
"मालकिन? इतनी घबरा क्यों रही हैं? आखिर अब तो घर में कोई बड़ा बचा भी नहीं है... सिर्फ हम दोनों ही तो हैं।"
**मम्मी:** *(मम्मी ने थोड़ा पीछे हटते हुए अपने पल्लू को कसकर पकड़ लिया। कल्लू का इतने करीब आना और उसका लहजा उन्हें असहज कर रहा था। उन्होंने कोशिश की कि उनकी आवाज़ सामान्य रहे।)*
"क्या मतलब तुम्हारा? जाओ, जाकर अपना कमरा साफ करो या कुछ काम करो। ऐसे खड़े होकर बातें मत बनाओ।"
**कल्लू:** *(कल्लू ने एक कदम और आगे बढ़ाया, जिससे मम्मी के बीच की दूरी और कम हो गई। उसने अपनी नज़रें नीचे झुकाकर उनके चेहरे की घबराहट को गौर से देखा, फिर धीमी और गहरी आवाज़ में बोला...)*
"मालकिन? इतनी घबरा क्यों रही हैं? आखिर अब तो घर में कोई बड़ा बचा भी नहीं है... सिर्फ हम दोनों ही तो हैं।"
*(उसकी बातों में एक तरह की चुनौती थी, जिसने मम्मी के दिल की धड़कन बढ़ा दी।)*
*(अचानक कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया। मम्मी के चेहरे से डर और झिझक गायब हो गई। उनकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई, जैसे उन्होंने कोई खेल खेलना शुरू कर दिया हो। उन्होंने अपनी घबराहट को एक पल में त्याग दिया और बड़े ही अंदाज़ में अपनी बाहें फैला दीं।)*
**मम्मी:** *(उनकी आवाज़ अब डरी हुई नहीं, बल्कि बेहद मदहोश और आमंत्रित करने वाली थी। उन्होंने कल्लू की आँखों में सीधे देखते हुए कहा...)*
"तो क्या हुआ अगर कोई नहीं है? तुम अकेले ही काफी हो मेरे लिए... आओ कल्लू, इतना दूर क्यों खड़े हो? पास आओ..."
*(उन्होंने अपनी बाहें और चौड़ी कर लीं, मानो वो कल्लू को अपनी ओर खींचना चाहती हों।)*
**कल्लू:** *(कल्लू की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसे उम्मीद तो थी कि मालकिन गुस्सा करेंगी या डांटेंगी, लेकिन इस तरह खुलेआम आमंत्रण मिलने की उसने कल्पना भी नहीं की थी। उसके चेहरे पर हैरानी के साथ-साथ एक जंगली सी उत्तेजना उभर आई।)*
"आप... आप ये क्या कह रही हैं मालकिन? कहीं मेरा भ्रम तो नहीं?"
*(उसने एक बार फिर उनकी आँखों में देखा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह सच बोल रही हैं। जब उसे यकीन हो गया, तो उसने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया और एक शिकारी की तरह उनकी ओर बढ़ने लगा।)*
"अगर आपने बुला लिया है... तो अब मैं पीछे नहीं हटूंगा।"
**मम्मी:** *(मम्मी ने कल्लू को अपनी तरफ आते देख अपने होंठों पर एक शरारती मुस्कान ला ली। उनकी सांसें अब तेज़ चलने लगी थीं, लेकिन इस बार डर से नहीं, बल्कि उस रोमांच से जो उन्हें महसूस हो रहा था। उन्होंने अपनी बाहें समेट लीं और अपना हाथ धीरे से अपनी कमर पर रखा, जैसे वो उसका इंतज़ार कर रही हों।)*
"भ्रम नहीं है कल्लू... जो तुम चाहो, वो सब तुम्हारा है। बस अब और देर मत करो, मुझे इंतज़ार करना पसंद नहीं।"
*(उनकी आवाज़ में एक अधिकार था, लेकिन उसमें एक समर्पण भी छिपा था।)*
**कल्लू:** *(कल्लू अब बिल्कुल उनके करीब पहुँच चुका था। उसकी भारी साँसें मम्मी के चेहरे को छू रही थीं। उसने अपना एक हाथ उनके कंधे पर रखा और दूसरे हाथ से धीरे से उनके गाल को सहलाया। उसकी आँखों में अब केवल वासना और जीत की चमक थी।)*
"इतनी बेताबी? मालकिन, आपको पता भी है कि आप क्या मांग रही हैं? एक बार अगर मैंने शुरुआत कर दी, तो फिर रुकना मुश्किल होगा..."
*(उसने अपना चेहरा उनके कान के पास ले जाकर फुसफुसाया, जिससे मम्मी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई।)*
**मम्मी:** *(मम्मी ने अपनी आँखें मूँद लीं और कल्लू के स्पर्श को गहराई से महसूस किया। उनकी गर्दन थोड़ी पीछे झुक गई, जिससे उनके गले की नब्ज साफ़ दिखाई दे रही थी। उन्होंने धीरे से अपना सिर घुमाया और कल्लू के कान के पास ही अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बोलीं...)*
"रुकने की बात कौन कर रहा है? मैंने तो तुम्हें रोकने के लिए बुलाया ही नहीं है... आज तो बस तुम और तुम्हारी मर्ज़ी चलेगी।"
*(उन्होंने अपना हाथ कल्लू के सीने पर रखा, जहाँ उसकी धड़कनें बहुत तेज़ चल रही थीं। उनकी उंगलियों ने हल्के से उसकी शर्ट के खुले हुए बटनों को छुआ।)*
**कल्लू:** *(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर के संयम को पूरी तरह तोड़ दिया। उनके हाथों का स्पर्श उसके सीने पर आग की तरह लग रहा था। उसने एक झटके में मम्मी की कमर को अपनी ओर खींचा, जिससे उनका बदन उसके सख्त सीने से जा टकराया।)*
"फिर ठीक है मालकिन... अब शिकायत का मौका भी नहीं मिलेगा आपको।"
*(उसकी आवाज़ अब पहले से कहीं ज़्यादा भारी और गहरी हो चुकी थी। उसने बिना वक्त गंवाए अपना चेहरा उनके गले की ओर झुकाया और उनकी त्वचा पर अपनी गरम साँसें छोड़ने लगा। उसकी नाक उनकी गर्दन के पास धीरे-धीरे रगड़ रही थी, जिससे मम्मी के मुँह से एक दबी हुई आह निकल गई।)*
"आज रात आपकी सारी मर्यादाएँ यहीं खत्म हो जाएंगी..."
**मम्मी:** *(मम्मी की कमर कल्लू के मजबूत हाथों में जकड़ी हुई थी। जब कल्लू ने उनकी गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं, तो उनके शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अनजाने में ही अपने नाखून कल्लू के कंधों में थोड़ा गहरा गाड़ दिए, मानो खुद को गिरने से बचा रही हों।)*
"आह्ह... कल्लू..."
*(उनके मुँह से निकली वो दबी हुई आह कमरे की खामोशी को चीर गई। उन्होंने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, ताकि कल्लू को और जगह मिल सके। उनकी आवाज़ अब लड़खड़ा रही थी, जिसमें एक अजीब सी प्यास थी।)*
"तो फिर देर किस बात की? दिखाओ मुझे..."
**कल्लू:** *(मम्मी की उस 'आह' और उनकी चुनौती भरे लहजे ने कल्लू के भीतर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया। उसने उनकी कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली, जैसे वो उन्हें अपनी गिरफ्त से कभी छूटने ही नहीं देना चाहता। उसकी आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, सिर्फ एक भूखा जुनून था।)*
"बस इतना ही कहना था?"
*(उसने अचानक उन्हें अपनी गोद में उठा लिया, जिससे मम्मी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकली। वो उन्हें सीधे बिस्तर की ओर ले जाने लगा, उसकी चाल में एक अजीब सी ताकत और जल्दबाजी थी। बिस्तर पर लिटाते ही उसने खुद को उनके ऊपर झुका लिया, उनका बदन पूरी तरह से अपने नीचे दबा लिया।)*
**मम्मी:** *(मम्मी ने गहरी साँस ली और दरवाज़े की कुंडी लगा दी। उन्होंने अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ा, जैसे खुद को दिलासा दे रही हों।)*
"चलो, शुक्र है दोनों चले गए। अब शांति रहेगी।"
*(लेकिन जैसे ही उन्होंने मुड़कर हॉल की तरफ देखा, उनकी नज़र कोने में खड़े कल्लू पर पड़ी। कल्लू चुपचाप खड़ा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जिसे देखकर मम्मी को थोड़ी बेचैनी होने लगी।)*
**कल्लू:** *(कल्लू के चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कान तैर गई। वह धीरे-धीरे चलकर मम्मी के करीब आया, मानो वह उनकी बेचैनी का मज़ा ले रहा हो। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।)*
"मालकिन? इतनी घबरा क्यों रही हैं? आखिर अब तो घर में कोई बड़ा बचा भी नहीं है... सिर्फ हम दोनों ही तो हैं।"
**मम्मी:** *(मम्मी ने थोड़ा पीछे हटते हुए अपने पल्लू को कसकर पकड़ लिया। कल्लू का इतने करीब आना और उसका लहजा उन्हें असहज कर रहा था। उन्होंने कोशिश की कि उनकी आवाज़ सामान्य रहे।)*
"क्या मतलब तुम्हारा? जाओ, जाकर अपना कमरा साफ करो या कुछ काम करो। ऐसे खड़े होकर बातें मत बनाओ।"
**कल्लू:** *(कल्लू ने एक कदम और आगे बढ़ाया, जिससे मम्मी के बीच की दूरी और कम हो गई। उसने अपनी नज़रें नीचे झुकाकर उनके चेहरे की घबराहट को गौर से देखा, फिर धीमी और गहरी आवाज़ में बोला...)*
"मालकिन? इतनी घबरा क्यों रही हैं? आखिर अब तो घर में कोई बड़ा बचा भी नहीं है... सिर्फ हम दोनों ही तो हैं।"
*(उसकी बातों में एक तरह की चुनौती थी, जिसने मम्मी के दिल की धड़कन बढ़ा दी।)*
*(अचानक कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया। मम्मी के चेहरे से डर और झिझक गायब हो गई। उनकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई, जैसे उन्होंने कोई खेल खेलना शुरू कर दिया हो। उन्होंने अपनी घबराहट को एक पल में त्याग दिया और बड़े ही अंदाज़ में अपनी बाहें फैला दीं।)*
**मम्मी:** *(उनकी आवाज़ अब डरी हुई नहीं, बल्कि बेहद मदहोश और आमंत्रित करने वाली थी। उन्होंने कल्लू की आँखों में सीधे देखते हुए कहा...)*
"तो क्या हुआ अगर कोई नहीं है? तुम अकेले ही काफी हो मेरे लिए... आओ कल्लू, इतना दूर क्यों खड़े हो? पास आओ..."
*(उन्होंने अपनी बाहें और चौड़ी कर लीं, मानो वो कल्लू को अपनी ओर खींचना चाहती हों।)*
**कल्लू:** *(कल्लू की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसे उम्मीद तो थी कि मालकिन गुस्सा करेंगी या डांटेंगी, लेकिन इस तरह खुलेआम आमंत्रण मिलने की उसने कल्पना भी नहीं की थी। उसके चेहरे पर हैरानी के साथ-साथ एक जंगली सी उत्तेजना उभर आई।)*
"आप... आप ये क्या कह रही हैं मालकिन? कहीं मेरा भ्रम तो नहीं?"
*(उसने एक बार फिर उनकी आँखों में देखा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह सच बोल रही हैं। जब उसे यकीन हो गया, तो उसने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया और एक शिकारी की तरह उनकी ओर बढ़ने लगा।)*
"अगर आपने बुला लिया है... तो अब मैं पीछे नहीं हटूंगा।"
**मम्मी:** *(मम्मी ने कल्लू को अपनी तरफ आते देख अपने होंठों पर एक शरारती मुस्कान ला ली। उनकी सांसें अब तेज़ चलने लगी थीं, लेकिन इस बार डर से नहीं, बल्कि उस रोमांच से जो उन्हें महसूस हो रहा था। उन्होंने अपनी बाहें समेट लीं और अपना हाथ धीरे से अपनी कमर पर रखा, जैसे वो उसका इंतज़ार कर रही हों।)*
"भ्रम नहीं है कल्लू... जो तुम चाहो, वो सब तुम्हारा है। बस अब और देर मत करो, मुझे इंतज़ार करना पसंद नहीं।"
*(उनकी आवाज़ में एक अधिकार था, लेकिन उसमें एक समर्पण भी छिपा था।)*
**कल्लू:** *(कल्लू अब बिल्कुल उनके करीब पहुँच चुका था। उसकी भारी साँसें मम्मी के चेहरे को छू रही थीं। उसने अपना एक हाथ उनके कंधे पर रखा और दूसरे हाथ से धीरे से उनके गाल को सहलाया। उसकी आँखों में अब केवल वासना और जीत की चमक थी।)*
"इतनी बेताबी? मालकिन, आपको पता भी है कि आप क्या मांग रही हैं? एक बार अगर मैंने शुरुआत कर दी, तो फिर रुकना मुश्किल होगा..."
*(उसने अपना चेहरा उनके कान के पास ले जाकर फुसफुसाया, जिससे मम्मी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई।)*
**मम्मी:** *(मम्मी ने अपनी आँखें मूँद लीं और कल्लू के स्पर्श को गहराई से महसूस किया। उनकी गर्दन थोड़ी पीछे झुक गई, जिससे उनके गले की नब्ज साफ़ दिखाई दे रही थी। उन्होंने धीरे से अपना सिर घुमाया और कल्लू के कान के पास ही अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बोलीं...)*
"रुकने की बात कौन कर रहा है? मैंने तो तुम्हें रोकने के लिए बुलाया ही नहीं है... आज तो बस तुम और तुम्हारी मर्ज़ी चलेगी।"
*(उन्होंने अपना हाथ कल्लू के सीने पर रखा, जहाँ उसकी धड़कनें बहुत तेज़ चल रही थीं। उनकी उंगलियों ने हल्के से उसकी शर्ट के खुले हुए बटनों को छुआ।)*
**कल्लू:** *(मम्मी के इन शब्दों ने कल्लू के अंदर के संयम को पूरी तरह तोड़ दिया। उनके हाथों का स्पर्श उसके सीने पर आग की तरह लग रहा था। उसने एक झटके में मम्मी की कमर को अपनी ओर खींचा, जिससे उनका बदन उसके सख्त सीने से जा टकराया।)*
"फिर ठीक है मालकिन... अब शिकायत का मौका भी नहीं मिलेगा आपको।"
*(उसकी आवाज़ अब पहले से कहीं ज़्यादा भारी और गहरी हो चुकी थी। उसने बिना वक्त गंवाए अपना चेहरा उनके गले की ओर झुकाया और उनकी त्वचा पर अपनी गरम साँसें छोड़ने लगा। उसकी नाक उनकी गर्दन के पास धीरे-धीरे रगड़ रही थी, जिससे मम्मी के मुँह से एक दबी हुई आह निकल गई।)*
"आज रात आपकी सारी मर्यादाएँ यहीं खत्म हो जाएंगी..."
**मम्मी:** *(मम्मी की कमर कल्लू के मजबूत हाथों में जकड़ी हुई थी। जब कल्लू ने उनकी गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं, तो उनके शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अनजाने में ही अपने नाखून कल्लू के कंधों में थोड़ा गहरा गाड़ दिए, मानो खुद को गिरने से बचा रही हों।)*
"आह्ह... कल्लू..."
*(उनके मुँह से निकली वो दबी हुई आह कमरे की खामोशी को चीर गई। उन्होंने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, ताकि कल्लू को और जगह मिल सके। उनकी आवाज़ अब लड़खड़ा रही थी, जिसमें एक अजीब सी प्यास थी।)*
"तो फिर देर किस बात की? दिखाओ मुझे..."
**कल्लू:** *(मम्मी की उस 'आह' और उनकी चुनौती भरे लहजे ने कल्लू के भीतर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया। उसने उनकी कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली, जैसे वो उन्हें अपनी गिरफ्त से कभी छूटने ही नहीं देना चाहता। उसकी आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, सिर्फ एक भूखा जुनून था।)*
"बस इतना ही कहना था?"
*(उसने अचानक उन्हें अपनी गोद में उठा लिया, जिससे मम्मी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकली। वो उन्हें सीधे बिस्तर की ओर ले जाने लगा, उसकी चाल में एक अजीब सी ताकत और जल्दबाजी थी। बिस्तर पर लिटाते ही उसने खुद को उनके ऊपर झुका लिया, उनका बदन पूरी तरह से अपने नीचे दबा लिया।)*


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