1 hour ago
*(कल्लू ने अपनी सांसों को काबू में करने की कोशिश की, लेकिन मम्मी के शरीर की गर्मी और उनकी मांग ने उसे और भी उत्तेजित कर दिया था। उसने अपनी गति थोड़ी धीमी की, लेकिन पकड़ ढीली नहीं की। उसने अपना चेहरा मम्मी के कान के पास लाया और गहरी, भारी आवाज़ में फुसफुसाया।)*
**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ) अरे मालकिन... आप भी क्या बात करती हैं? हमने तो पहले भी कई बार आपकी गांड में अपना ये काला लंड डाल के आपको चोदा है... तो फिर आज पहली बार कैसे हो सकती है? आपको तो याद होना चाहिए कि हम आपकी गांड के कितने पुराने खिलाड़ी हैं!"
*(मम्मी ने कल्लू की बात सुनकर खिलखिलाते हुए अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, जिससे उनके बाल बिखर गए और उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने अपनी आँखें आधी बंद कीं और कल्लू की ओर देखते हुए प्यार भरी डांट लगाई।)*
**मम्मी:** "अरे पागल, मुझे पता है! मैं तो ये कह रही हूँ कि आज इतने दिनों बाद पहली बार मेरी गांड में लंड जा रहा है, इसीलिए बोली कि धीरे से डालना... काफी दिनों बाद ऐसा हो रहा है ना!"
*(मम्मी की ये बात सुनकर कल्लू और रामू दोनों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई। कल्लू ने मम्मी की इस मासूमियत और उनकी इच्छा को समझते हुए अपना हाथ उनकी कमर पर और मजबूती से टिका दिया।)*
*(कल्लू ने मम्मी की बात सुनी तो उसकी हँसी छूट गई, लेकिन उसकी आँखों में वासना और बढ़ गई। उसने मम्मी की कमर को ज़ोर से जकड़ लिया और अपना लंड उनके अंदर थोड़ा और गहराई तक उतार दिया।)*
**कल्लू:** "(मज़ाकिया लहजे में) अच्छा! तो मालकिन को इतनी याद आ रही थी हमारी? अब जब इतना इंतज़ार कर लिया है, तो अब धीरे-धीरे कैसे होगा? अब तो पूरा आनंद लेना पड़ेगा!"
*(उधर रामू भी चुप नहीं बैठा था। उसने मम्मी के सीने को अपने हाथों में भर लिया और उनके होंठों को चूमते हुए बोला।)*
*(रामू ने मम्मी के सीने को अपनी हथेलियों में जोर से दबाया, जिससे उनका मांस उंगलियों के बीच दब गया। उसने मम्मी की गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बहुत ही कामुक स्वर में कहा।)*
**रामू:** "मालकिन, अगर आपने हमें इतना इंतजार कराया है, तो अब हमें भी तो चैन मिलना चाहिए ना? कल्लू सही कह रहा है... अब तो हम आपकी गांड को पूरी तरह से निचोड़ लेंगे!"
*(इतना कहते ही रामू ने मम्मी के होंठों को बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ चूमना शुरू कर दिया। मम्मी की एक लंबी आह निकली और उनका शरीर थरथराने लगा। कल्लू ने भी इसी मौके का फायदा उठाया और मम्मी के पिछले हिस्से पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।)*
*(कल्लू ने रामू और मम्मी के बीच के उस जुनून को देखकर अपनी गति को और तेज़ कर दिया। उसने मम्मी के कूल्हों को अपने हाथों से ऊपर की ओर खींचा ताकि उसका लंड और भी गहराई से उनकी गांड के अंदर समा सके। कमरे में सिर्फ उनके हाफने की आवाज़ें और बिस्तर के चरचराने की आवाज़ गूँज रही थी।)*
**कल्लू:** "(हाँफते हुए और उत्तेजना में चिल्लाकर) आह्ह्ह! मालकिन... आपका ये पिछवाड़ा सच में कमाल का है! इतने दिनों बाद भी इसमें वही गर्माहट और कसावट है... मेरा तो दिमाग घूम रहा है!"
*(तभी मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें डाल दीं और रोते हुए जैसी आवाज़ निकाली, जिसमें दर्द कम और सुख ज़्यादा महसूस हो रहा था।)*
*(मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें कस लीं और कल्लू के झटकों के बीच अपनी आँखें खोलकर दोनों लड़कों को एक गहरी, शरारती नज़र से देखा। उनके चेहरे पर पसीना था और सांसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन उनकी बातों में एक अजीब सा सवाल और अधिकार था।)*
**मम्मी:** "(हाँफते हुए और शरारत भरे अंदाज़ में) उफ़्फ़... आह्ह्ह... जब तुम्हारे साहब घर पे थे... तो तुम दोनों आपस में भी एन्जॉय किए होगे ना? सच बताना..."
*(कल्लू ने यह सुनते ही एक ठहाका लगाया, जो उसकी भारी और उत्तेजित आवाज़ में गूँज उठा। उसने मम्मी के शरीर के भीतर अपने लंड की गति को और भी बेतहाशा बढ़ा दिया, जैसे वह उनकी इस बात पर और भी ज़्यादा जोश में आ गया हो।)*
**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ और हाँफते हुए) हाँ मालकिन! बिल्कुल सही पकड़ा आपने! जब साहब घर पर होते थे, तो हम दोनों अकेले बोर क्यों होते? हम दोनों एक-दूसरे की गांड मारते थे... मज़ा आता था बहुत!"
*(यह सुनकर रामू भी मुस्कुराने लगा और उसने मम्मी के कान के पास झुककर अपनी जीभ फेरते हुए कहा।)*
*(रामू ने मम्मी के कान के निचले हिस्से को अपने दांतों से हल्का सा काट लिया, जिससे मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी उंगलियां मम्मी के बालों में फंसाईं और अपनी आवाज़ को और भी गहरा करते हुए बोला।)*
**रामू:** "बिल्कुल मालकिन! कल्लू का लंड जब मेरी गांड में जाता था, तो कसम से कलेजा मुँह को आ जाता था... पर फिर तुम्हारी याद आती थी, तो हम दोनों मिलकर तुम्हें ही याद करते थे कि कब साहब जाएंगे और कब हम तुम्हारा ये सुहाना शरीर पाएंगे।"
*(मम्मी की इस बात ने कमरे के माहौल को एकदम बदल दिया। उनकी आँखों में एक नई तरह की प्यास और हुक्म देने वाली चमक आ गई। उन्होंने कल्लू के कंधे पर अपना हाथ रखा और उसे इशारा किया, मानो वो उन्हें कोई नया खेल खेलने का आदेश दे रही हों।)*
**मम्मी:** "(अपनी आवाज़ में एक अजीब सा नशा लाते हुए) उफ़्फ़... अच्छा? तो तुम दोनों को एक दूसरे के साथ खेलना पसंद है? ठीक है... कल्लू, अब तुम रामू की गांड मारो... और रामू, तुम मेरी चूत को चाटो! मुझे देखना है कि तुम दोनों मिलकर मुझे कितना सुख दे सकते हो!"
*(मम्मी के आदेश मिलते ही कल्लू और रामू की आँखों में एक जंगलीपन छा गया। कल्लू ने तुरंत मम्मी के शरीर से खुद को अलग किया और बिना एक पल गंवाए रामू की तरफ झपटा। उसने रामू को बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसके कूल्हों को हवा में उठाकर अपनी पोजीशन बना ली। दूसरी तरफ, रामू ने मम्मी के पैरों को फैलाया और पूरी तड़प के साथ उनके गीले अंगों की ओर बढ़ गया।)*
**कल्लू:** "(गुस्से और कामुकता के मिश्रण वाली आवाज़ में) जैसा आप कहें मालकिन! आज तो मैं रामू की ऐसी गांड मारूँगा कि इसे सारा हिसाब याद आ जाएगा! तैयार हो जा छोटे, आज तेरा बाप तुझे चैन नहीं लेने देगा!"
**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ) अरे मालकिन... आप भी क्या बात करती हैं? हमने तो पहले भी कई बार आपकी गांड में अपना ये काला लंड डाल के आपको चोदा है... तो फिर आज पहली बार कैसे हो सकती है? आपको तो याद होना चाहिए कि हम आपकी गांड के कितने पुराने खिलाड़ी हैं!"
*(मम्मी ने कल्लू की बात सुनकर खिलखिलाते हुए अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, जिससे उनके बाल बिखर गए और उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने अपनी आँखें आधी बंद कीं और कल्लू की ओर देखते हुए प्यार भरी डांट लगाई।)*
**मम्मी:** "अरे पागल, मुझे पता है! मैं तो ये कह रही हूँ कि आज इतने दिनों बाद पहली बार मेरी गांड में लंड जा रहा है, इसीलिए बोली कि धीरे से डालना... काफी दिनों बाद ऐसा हो रहा है ना!"
*(मम्मी की ये बात सुनकर कल्लू और रामू दोनों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई। कल्लू ने मम्मी की इस मासूमियत और उनकी इच्छा को समझते हुए अपना हाथ उनकी कमर पर और मजबूती से टिका दिया।)*
*(कल्लू ने मम्मी की बात सुनी तो उसकी हँसी छूट गई, लेकिन उसकी आँखों में वासना और बढ़ गई। उसने मम्मी की कमर को ज़ोर से जकड़ लिया और अपना लंड उनके अंदर थोड़ा और गहराई तक उतार दिया।)*
**कल्लू:** "(मज़ाकिया लहजे में) अच्छा! तो मालकिन को इतनी याद आ रही थी हमारी? अब जब इतना इंतज़ार कर लिया है, तो अब धीरे-धीरे कैसे होगा? अब तो पूरा आनंद लेना पड़ेगा!"
*(उधर रामू भी चुप नहीं बैठा था। उसने मम्मी के सीने को अपने हाथों में भर लिया और उनके होंठों को चूमते हुए बोला।)*
*(रामू ने मम्मी के सीने को अपनी हथेलियों में जोर से दबाया, जिससे उनका मांस उंगलियों के बीच दब गया। उसने मम्मी की गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बहुत ही कामुक स्वर में कहा।)*
**रामू:** "मालकिन, अगर आपने हमें इतना इंतजार कराया है, तो अब हमें भी तो चैन मिलना चाहिए ना? कल्लू सही कह रहा है... अब तो हम आपकी गांड को पूरी तरह से निचोड़ लेंगे!"
*(इतना कहते ही रामू ने मम्मी के होंठों को बड़े ही बेरहमी और भूख के साथ चूमना शुरू कर दिया। मम्मी की एक लंबी आह निकली और उनका शरीर थरथराने लगा। कल्लू ने भी इसी मौके का फायदा उठाया और मम्मी के पिछले हिस्से पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।)*
*(कल्लू ने रामू और मम्मी के बीच के उस जुनून को देखकर अपनी गति को और तेज़ कर दिया। उसने मम्मी के कूल्हों को अपने हाथों से ऊपर की ओर खींचा ताकि उसका लंड और भी गहराई से उनकी गांड के अंदर समा सके। कमरे में सिर्फ उनके हाफने की आवाज़ें और बिस्तर के चरचराने की आवाज़ गूँज रही थी।)*
**कल्लू:** "(हाँफते हुए और उत्तेजना में चिल्लाकर) आह्ह्ह! मालकिन... आपका ये पिछवाड़ा सच में कमाल का है! इतने दिनों बाद भी इसमें वही गर्माहट और कसावट है... मेरा तो दिमाग घूम रहा है!"
*(तभी मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें डाल दीं और रोते हुए जैसी आवाज़ निकाली, जिसमें दर्द कम और सुख ज़्यादा महसूस हो रहा था।)*
*(मम्मी ने रामू के गले में अपनी बाहें कस लीं और कल्लू के झटकों के बीच अपनी आँखें खोलकर दोनों लड़कों को एक गहरी, शरारती नज़र से देखा। उनके चेहरे पर पसीना था और सांसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन उनकी बातों में एक अजीब सा सवाल और अधिकार था।)*
**मम्मी:** "(हाँफते हुए और शरारत भरे अंदाज़ में) उफ़्फ़... आह्ह्ह... जब तुम्हारे साहब घर पे थे... तो तुम दोनों आपस में भी एन्जॉय किए होगे ना? सच बताना..."
*(कल्लू ने यह सुनते ही एक ठहाका लगाया, जो उसकी भारी और उत्तेजित आवाज़ में गूँज उठा। उसने मम्मी के शरीर के भीतर अपने लंड की गति को और भी बेतहाशा बढ़ा दिया, जैसे वह उनकी इस बात पर और भी ज़्यादा जोश में आ गया हो।)*
**कल्लू:** "(एक शरारती मुस्कान के साथ और हाँफते हुए) हाँ मालकिन! बिल्कुल सही पकड़ा आपने! जब साहब घर पर होते थे, तो हम दोनों अकेले बोर क्यों होते? हम दोनों एक-दूसरे की गांड मारते थे... मज़ा आता था बहुत!"
*(यह सुनकर रामू भी मुस्कुराने लगा और उसने मम्मी के कान के पास झुककर अपनी जीभ फेरते हुए कहा।)*
*(रामू ने मम्मी के कान के निचले हिस्से को अपने दांतों से हल्का सा काट लिया, जिससे मम्मी के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी उंगलियां मम्मी के बालों में फंसाईं और अपनी आवाज़ को और भी गहरा करते हुए बोला।)*
**रामू:** "बिल्कुल मालकिन! कल्लू का लंड जब मेरी गांड में जाता था, तो कसम से कलेजा मुँह को आ जाता था... पर फिर तुम्हारी याद आती थी, तो हम दोनों मिलकर तुम्हें ही याद करते थे कि कब साहब जाएंगे और कब हम तुम्हारा ये सुहाना शरीर पाएंगे।"
*(मम्मी की इस बात ने कमरे के माहौल को एकदम बदल दिया। उनकी आँखों में एक नई तरह की प्यास और हुक्म देने वाली चमक आ गई। उन्होंने कल्लू के कंधे पर अपना हाथ रखा और उसे इशारा किया, मानो वो उन्हें कोई नया खेल खेलने का आदेश दे रही हों।)*
**मम्मी:** "(अपनी आवाज़ में एक अजीब सा नशा लाते हुए) उफ़्फ़... अच्छा? तो तुम दोनों को एक दूसरे के साथ खेलना पसंद है? ठीक है... कल्लू, अब तुम रामू की गांड मारो... और रामू, तुम मेरी चूत को चाटो! मुझे देखना है कि तुम दोनों मिलकर मुझे कितना सुख दे सकते हो!"
*(मम्मी के आदेश मिलते ही कल्लू और रामू की आँखों में एक जंगलीपन छा गया। कल्लू ने तुरंत मम्मी के शरीर से खुद को अलग किया और बिना एक पल गंवाए रामू की तरफ झपटा। उसने रामू को बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसके कूल्हों को हवा में उठाकर अपनी पोजीशन बना ली। दूसरी तरफ, रामू ने मम्मी के पैरों को फैलाया और पूरी तड़प के साथ उनके गीले अंगों की ओर बढ़ गया।)*
**कल्लू:** "(गुस्से और कामुकता के मिश्रण वाली आवाज़ में) जैसा आप कहें मालकिन! आज तो मैं रामू की ऐसी गांड मारूँगा कि इसे सारा हिसाब याद आ जाएगा! तैयार हो जा छोटे, आज तेरा बाप तुझे चैन नहीं लेने देगा!"


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)