14-10-2026, 08:09 PM
(14-10-2026, 12:03 AM)rajusethzee Wrote: उस दोपहर का अगला अध्याय
— संतुष्टि के बाद की गर्मी —
सुरेखा अमित की बाँहों में लिपटी हुई थी। उसका शरीर अब भी काँप रहा था, उसकी चूत के अंदर अमित का गरम मल फैला हुआ था। उसने धीरे से अपने पैरों को हिलाया, और वो गाढ़ा सफ़ेद तरल उसकी जाँघों पर बहने लगा। उसने उसे अपनी उँगली से पोंछा और अपने मुँह में डाल लिया। "तुम्हारा स्वाद... मीठा है," उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखों में चमक थी।
अमित ने उसकी ओर देखा। उसकी चुचियाँ अब भी सख़्त थीं, निप्पल गुलाबी और उभरे हुए। उसने धीरे से उसकी एक चुची को अपने अँगूठे और तर्जनी के बीच दबाया। सुरेखा ने कराहते हुए अपनी पीठ झुकाई, अपनी चुचियाँ उसके मुँह के सामने लाकर।
"चूसो मेरी चुचियाँ," उसने हुक्म दिया, उसकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं थी। "मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी चुचियों को चूसो और मुझे फिर से उत्तेजित करो। मेरी चूत तुम्हारे मल से भरी हुई है, लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे और दे दो।"
अमित ने उसकी चुची को अपने मुँह में ले लिया। उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूमी, फिर उसे चूसने लगा, खींचने लगा, काटने लगा। सुरेखा ने एक लंबी कराह निकाली। उसके निप्पल और सख़्त हो गए, उसकी चूत से फिर से नमी बहने लगी, पिछले मल के साथ मिलकर उसकी चूत से निकल रही थी।
"हाँ... ऐसे ही चूसो... मेरी चुचियाँ तुम्हारी हैं," वो बोली, अपने हाथ से उसके सिर को अपनी छाती पर दबाते हुए। "अब मुझे मेरी चूत भी चाटो। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत का हर हिस्सा चाटो।"
अमित धीरे से नीचे की ओर बढ़ा। उसके होंठ उसके पेट पर फिरे, फिर उसकी जाँघों के भीतरी हिस्से पर, उसकी नम, चिकनी त्वचा को चूमते हुए। जब वो उसकी चूत के पास पहुँचा, उसने देखा कि वो अब भी भीगी हुई थी, उसके होंठ सूजे हुए और लाल थे, उसके अंदर का गुलाबी हिस्सा अब भी खुला हुआ था।
"बहुत सुंदर चूत है तुम्हारी," अमित ने कहा, उसकी आवाज़ कामुकता से घुट रही थी। "बिल्कुल कमल की पंखुड़ी जैसी मुलायम।"
उसने अपनी जीभ उसकी चूत के होंठों पर रखी। सुरेखा का शरीर बिजली की तरह हिल गया। उसकी जीभ ने धीरे-धीरे उसकी चूत के होंठों को चाटना शुरू किया, ऊपर से नीचे, फिर गोलाकार। हर बार वो उसकी चूत के ऊपरी हिस्से पर पहुँचता, जहाँ उसकी क्लिट थी—वो छोटी, संवेदनशील गोली जो अब पूरी तरह से उभरी हुई थी।
"आह... वहाँ... वहाँ और ज़ोर से चाटो," सुरेखा चीख़ने लगी। उसने अपने हाथ से अपनी चूत को और खोल दिया, अपनी चूत के होंठों को फैलाकर, ताकि अमित की जीभ उसके अंदर तक जा सके। "मेरी क्लिट चूसो... उसे अपने होंठों में दबाओ... मैं इसे सहन नहीं कर पा रही हूँ।"
अमित ने उसकी क्लिट को अपने होंठों में ले लिया। हल्का सा दबाव, फिर चूसना, फिर जीभ की नोक से हिलाना। सुरेखा का शरीर हिलने लगा, उसके पैर अमित के सिर को जकड़ रहे थे, उसकी एड़ियाँ उसकी पीठ पर दब रही थीं।
"हे भगवान... ये बहुत अच्छा लग रहा है... मैं फिर से आ रही हूँ... मेरी चूत पिघल रही है," वो चीख़ी।
उसके शरीर में ऐंठन शुरू हो गई। उसकी चूत का हर हिस्सा जकड़ गया, उसकी दीवारें फैल गईं, और वो फूट पड़ी। उसकी चूत से गरम तरल निकलकर अमित के मुँह में बह गया। उसने पी लिया, हर बूँद को चाटते हुए, जब तक कि उसकी चूत पूरी तरह से शांत नहीं हो गई।
— दूसरी बार के लिए तैयारी —
सुरेखा ने गहरी साँस ली। उसका शरीर संतुष्टि से काँप रहा था। "अब मुझे अपना लुंड दो," उसने कहा, उसकी आवाज़ में प्यास वापस आ गई थी। "मैं चाहती हूँ कि तू मेरी चूत में अपना लुंड डाले और मुझे फिर से चोदे। मैं पूरी रात तेरे लुंड के बिना नहीं रह सकती।"
अमित का लुंड पहले ही फिर से सख़्त हो चुका था, उसके अंदर की गर्मी और उत्तेजना ने उसे पूरी तरह से तैयार कर दिया था। वो उसके ऊपर आया, उसका सख़्त, लाल, नसों से भरा हुआ लुंड उसकी चूत के ठीक ऊपर था।
"देखो मम्मी, तुम्हारी चूत कैसे मेरे लुंड को पहचान रही है," उसने कहा, धीरे से अपने लुंड की नोक को उसकी चूत के होंठों पर घुमाते हुए। "तुम्हारी चूत मुझे अंदर बुला रही है।"
सुरेखा ने अपने हाथ से उसके लुंड को पकड़ा और उसे अपनी चूत की ओर निर्देशित किया। "अंदर डालो... पूरा अंदर... मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा लुंड मेरी चूत को और चौड़ा करे।"
अमित ने धीरे से अपने कूल्हों को आगे बढ़ाया। उसका लुंड धीरे-धीरे उसकी चूत के अंदर खिसक गया। सुरेखा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वो भरा हुआ महसूस कर रही थी, उसका लुंड उसकी चूत की दीवारों को छू रहा था, हर कोने को भर रहा था।
"पूरा अंदर," उसने फुसफुसाया, जब अमित का लुंड पूरी तरह से उसकी चूत में समा गया। "अब हिलो... मुझे चोदो... मुझे अपनी माँ को चोदने की तरह चोदो।"
अमित ने गति शुरू की। पहले धीमी, फिर तेज़। हर बार वो अपना लुंड पूरा बाहर निकालता और फिर पूरी तरह से अंदर डालता। उसका लुंड उसकी चूत में फिसल रहा था, उसकी चूत की गर्मी और नमी ने उसे पूरी तरह से ढँक लिया था।
"तेज़... और तेज़ चोदो," सुरेखा चीख़ रही थी। उसने अपने पैर उसकी कमर पर लपेट लिए और अपनी जाँघों से उसे और गहराई में खींच लिया। "मेरी चूत फाड़ दो... मुझे दर्द भी दो... मैं तुम्हारी हूँ।"
अमित ने अपनी गति और तेज़ कर दी। अब वो उसे ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था, हर बार उसका लुंड उसकी चूत की गहराई तक जाता, उसके अंदर की दीवारों को रगड़ता। सुरेखा के स्तन हिल रहे थे, उसकी चुचियाँ हवा में उभरी हुई थीं।
"मैं फिर से आ रहा हूँ," अमित ने ज़ोर से साँस छोड़ते हुए कहा। "अंदर ही आने दोगी? क्या मैं तुम्हारी चूत में अपना मल भर दूँ?"
"हाँ... हाँ... अंदर भर दो... मेरी चूत तुम्हारे मल के लिए बनी है," सुरेखा चीख़ी, उसकी आँखों में पागलपन था। "मुझे अपनी माँ को अपने मल से भर दो। मैं चाहती हूँ कि मेरी चूत तुम्हारा मल पिए।"
अमित ने अपने कूल्हों को और ज़ोर से पटका। उसकी साँसें रुक गईं, उसका शरीर सख़्त हो गया, और वो उसके अंदर फूट पड़ा। एक बार, फिर, फिर। हर बार उसके मल की गर्मी उसकी चूत में फैलती गई। सुरेखा ने उसे पूरी तरह से अंदर खींच लिया, अपनी चूत की माँसपेशियों से उसे निचोड़ते हुए, जैसे वो हर बूँद को पी रही हो।
— अगले दिन का इंतज़ार —
दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। पसीने से लथपथ, गर्म, संतुष्ट। सुरेखा ने धीरे से अपना हाथ अपनी चूत पर रखा, जहाँ से अमित का मल धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था। उसने अपनी उँगली से उसे पकड़ा और अपने मुँह में डाल लिया।
"तेरा स्वाद मेरी चूत में मिल गया है," उसने कहा, मुस्कुराते हुए। "अब तू मेरा हिस्सा है।"
अमित ने उसके बालों में हाथ फिराया। "और तू मेरी मम्मी है। मेरी चूत वाली मम्मी। मैं तुझे हमेशा चोदूँगा, जब भी मौका मिलेगा।"
सुरेखा ने उसकी छाती पर सिर रखा और गहरी साँस ली। बाहर शाम ढल रही थी। उसने घड़ी की ओर देखा—पिताजी को आने में दो घंटे बाकी थे।
"दो घंटे," उसने फुसफुसाया। "दो घंटे में हम फिर से कर सकते हैं। मेरी चूत अब भी तुम्हारे लुंड की प्यासी है।"
अमित ने उसे अपनी बाँहों में और कसकर पकड़ लिया। उसका लुंड फिर से सख़्त हो रहा था। उसने अपना हाथ उसकी चूत पर रखा, और उसकी उँगलियाँ उसकी चूत के होंठों को फैलाने लगीं, उसके मल से भरी हुई चूत को महसूस करते हुए।
"रुक मम्मी, मैं पहले तुम्हारी चूत को अपने मल से साफ़ करता हूँ... अपनी जीभ से," उसने कहा, और झुक गया।
सुरेखा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, जब उसकी जीभ उसकी चूत के होंठों पर घूमने लगी। उसके अंदर का मल जीभ पर आ गया, और वो उसे चाट रहा था, उसकी चूत को साफ़ कर रहा था। वो फिर से उत्तेजित हो रही थी।
"अब," उसने कहा, जब अमित ने अपना मुँह उठाया, "अब मुझे अपना लुंड डालो और मुझे फिर से चोदो, इस बार और देर तक। मैं चाहती हूँ कि जब पिताजी आएँ, तब भी मेरी चूत तुम्हारी हो।"
Bhut mast update dete raho bhai image ke sath


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