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Adultery Mother and Son : A taboo affair 3
#6
दुसरा अध्याय.... शुभम सिंह 

मेरा नाम शुभम सिंह , शालिनी सिंह का एकलौता बेटा । ( मदर सीक्रेट अफेयर 2 से ) 20 बरस का हूँ। आज मैं आपको जिसके बारे में बताने जा रहा हूं वह मेरी मौसी है अनिता सिंह । मौसी को एक ही संतान है । मेरे मौसाजी राज सिंह की किरयाने की दुकान है , थोड़ा बहुत होलसेल का काम भी था।

बात थोड़ी पुरानी है, जब मैं 12वीं क्लास पास कर चुका था, माँ बाप चाहते थे कि मैं और पढ़ूँ तो उन्होंने मुझे शहर मौसी के पास भेजने का विचार किया। असली खुशी तो मुझे इस बात की थी कि शहर में रहूँगा, कॉलेज में पढ़ूँगा और शहर में तो सुना है कि लड़कियाँ भी बहुत जल्दी पट जाती हैं।

मैं शहर आ गया और कॉलेज में एड्मिशन भी ले ली, पर 3-4 महीने बीत जाने पर भी कोई भी लड़की नहीं पटी, एक दोस्त तो बन गया पर साली गर्लफ्रेंड कोई नहीं बनी।
रोज़ सुबह जब सोकर उठता तो लंड फुल टाइट तना होता, मगर उसको लेने वाली कोई नहीं मिल रही थी, मूठ मारने का ना मुझे शौक था और ना ही आदत, तो लंड भी एकदम मूसल की तरह सीधा और दमदार था, बस इशारा करते ही तन जाता था।

ऐसे ही दिन बीतते गए पर कोई बात ना बनी।
एक दिन ऐसे ही दोपहर के वक़्त मुझे लेटे लेटे प्यास सी लगी तो मैं उठकर दूसरे कमरे में गया जहाँ मौसी लेटी थी, क्योंकि फ्रिज उनके कमरे में रखा था।

मैंने पानी पीते पीते ध्यान दिया, मौसी शायद टीवी देखते देखते सो गई थी, सोते में उनकी साड़ी उनके सीने से हट गई थी जिस कारण उनके भारी चुचियों उनके ब्लाउज़ से बाहर दिख रहे थे।
बड़े बड़े दो गोल चुचियों और भरा भरा सा उनका पेट, मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गई। फिर मैंने सोचा, बदतमीज़ यह क्या देख रहा है, जिस औरत की तू इतनी इज्ज़त करता है उसका नंगापन देख रहा है?
मैं दूसरे कमरे में चला गया और बेड पे लेट गया। थोड़ी देर बाद मुझे भी नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मुझे मौसी ने जगाया- उठो शुभम चाय पी लो, आज बहुत सो रहे हो?

मैं आँखें मलता हुआ उठा तो देखा- ओ तेरी…लंड ने तो तनकर पायजामे का तम्बू बना दिया था… क्या मौसी ने भी देखा होगा? मुझे बड़ी शर्म आई, पर चलो। मौसी की आदत थी को वो अक्सर दोपहर को सो जाया करती थी।

धीरे धीरे मुझे इस बात की आदत सी पड़ने लगी कि जब भी मौसी सो रही होती, मैं किसी ना किसी बहाने से जाकर उसके अंग को निहार आता। कभी मन में विचार आता नहीं ये तो मेरी माँ जैसी है तो कभी मन में बैठा शैतान कहता, माँ जैसी है पर माँ तो नहीं, उसके चुचियों कितने बड़े हैं, कितने गोल और कितने गोरे, अगर उनसे खेलने का मौका मिल जाए तो, या चूसने का, वाह क्या मज़ा आए, पर मैं हमेशा अपने मन पे क़ाबू पा लेता।

मगर ये भी हो रहा था कि मैं इसी फिराक में रहता के कब और कैसे मौसी के चुचियों के दर्शन कर सकूँ। कभी कभी रात को जब मौसाजी मौसी के साथ सेक्स करते तो मौसी की सिसकारियाँ और कराहटें मैं भी सुनता, मेरा लंड तन जाता पर क्या करता ?

कुछ दिनों बाद ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पे लेटा था और इंतज़ार कर रहा था कि कब मौसी सो जाए और मैं उसके चुचियों के दर्शन कर सकूँ।

जब मैंने थोड़ी देर बाद देखा तो मौसी के हल्के हल्के खर्राटों की आवाज़ मैंने सुनी, मतलब मौसी सो गई थी, मैं उठकर जाने लगा तो मन में से आवाज़ आई ‘रुक जा शुभम, ऐसा मत कर!’
पर दूसरे ही क्षण ये आवाज़ आई ‘ऐसे गोल गोल चुचियों देखने का मौका रोज़ रोज़ नहीं मिलता, चल चलके देखते हैं।’

मैं उठा और सीधा जाके मौसी के बेड पे उनकी बगल में बैठ गया।
मौसी के सांस लेने से उनके बड़े बड़े चुचियों ऊपर नीचे हो रहे थे, मैंने देखा के आसमानी रंग के ब्लाउज़ ने नीचे आज मौसी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो ब्लाउज़ में से उनके चुचियों भी थोड़ा बाहर उभरे हुए दिख रहे थे।

जितना मैं मौसी के चुचियों देख रहा था मेरी हालत उतनी ही खराब होती जा रही थी। फिर न जाने क्या सोचकर मैंने, अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और बड़े ही धीरे से मौसी के ब्लाउज़ का एक हुक खोल दिया। मैंने देखा मौसी उसी तरह बेफिक्र सो रही थी। मैंने फिर हिम्मत की और दूसरा हुक भी खोल दिया। अब मौसी की छाती थोड़ी और खुलकर दिखने लगी।

ऐसे ही करते करते मैंने उनकी ब्लाउज़ के 4 हुक खोल दिये। अब सिर्फ नीचे के 2 हुक बचे थे, अगर मैं ये भी खोल दूँ मौसी ऊपर से पूरी नंगी हो जाएगी मेरे सामने। मगर मन ने मना कर दिया और मैं उठकर फिर अपने कमरे में आ गया।

मगर जितनी छातियाँ मैं मौसी की देख आया था, वो दृश्य बार बार मेरी आखों के सामने घूम रहा था। मेरा मन फिर से बेईमान हो गया और मैं फिर जाकर मौसी के पास बैठ गया। मैंने फिर से हिम्मत की और मौसी के ब्लाउज़ का पांचवा हुक भी खोल दिया और फिर उसके बाद छठा हुक भी खोल दिया।

अब मौसी मेरे सामने नंगी थी, सिर्फ उनके ब्लाउज़ के दोनों पल्ले हटाने थे। मैंने बड़े आराम से दोनों पल्ले उठाकर साइड पे कर दिये।
‘वाह, सृष्टि की सबसे सुंदर चीज़ मेरे सामने थी।’ आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी स्त्री के चुचियों को बिल्कुल नंगा देखा था और वो भी इतनी करीब से।

मैं उन चुचियों को चूसना और सहलाना चाहता था, पर डर लग रहा था के मौसी न जग जाए।

खैर मैंने हिम्मत करके मौसी के बाएँ चूची पर अपना काँपता हुआ हाथ रखा। मौसी वैसे ही सो रही थी, थोड़ा आश्वस्त होने पर मैं चूची पर अपने हाथ से पकड़ बनाई। मौसी का निप्पल मेरी हथेली के बीच में लग रहा था। जब मैंने एक दो बार हल्के से दबा के देखा और मौसी नहीं जगी तो मैंने अपने दोनों हाथों में मौसी के दोनों चुचियों पकड़ लिये और दबाये।

इस बार मौसी थोड़ी कसमसाई, शायद मैंने थोड़ा ज़्यादा दबा दिया। मगर अब दबाने से बात नहीं बन रही थी, मैं तो चूसना चाहता था। जब मैंने मौसी का निप्पल अपने मुँह में लिया तो मौसी हिल पड़ी और मैं भागकर अपने कमरे में जा के बेड पे लेट गया।
डर के मारे मेरी गाँड फटी पड़ी थी, अगर मौसी को पता चल गया, अगर वो गुस्सा कर गई, अगर उन्होंने मौसाजी को और मेरे घर पे बता दिया तो?

मैं बहुत घबरा गया और आँखें बंद करके ऐसे लेट गया जैसे सो रहा हूँ। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई। फिर जब जागा तो मौसी मेरे लिए चाय बनाकर मुझे जगा रही थी, मैं बहुत शर्मिंदा था और मौसी से नज़र नहीं मिला पा रहा था। मैंने उनके चेहरे की तरफ भी नहीं देखा।

अगले दिन दोपहर को देखा कि मौसी तो पंजाबी सूट पहने हुये थी। मतलब अब मैं उनका ब्लाउज़ नहीं खोल सकता था, तो क्या मौसी को सब पता चल गया, मुझे बहुत ग्लानि हुई।

अगले 3-4 रोज़ मैंने देखा कि मौसी हमेशा पंजाबी सूट ही पहनती थी और इसी वजह से मैं कुछ नहीं देख पाता था। हाँ कभी कभी उनके झुकने से उनकी चुचियों के बीच की रेखा ज़रूर दिख जाती थी पर मैं उनके साथ उस दिन की वारदात भूल नहीं पा रहा था।

रात को मौसा जी ने मौसी के साथ सेक्स किया। दोनों की खुसुर पुसुर और कराहटें मैं सुन रहा था। मेरा भी लण्ड पूरा तना हुआ था, पर मैं क्या कर सकता था।

अगले दिन सुबह उठा और तैयार होकर कॉलेज चला गया।

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जब दोपहर को वापिस आया तो देखा के मौसी नाइटी पहने घूम रही थी।
मैंने चलते फिरते उन्हें ध्यान से देखा तो पाया के नाइटी के अंदर उन्होंने न तो कोई ब्रा पहनी थी और न ही कोई पेटीकोट या सलवार।
मतलब नाइटी के नीचे वो बिल्कुल नंगी थी।

मेरा मन तो खुशी से भर गया। खाना खाते खाते मैं सोच रहा था के अगर आज मौका मिल गया तो मौसी की नाइटी उठाकर उसकी चूत के भी दर्शन करूंगा।

खाना खाकर मैं अपने कमरे में लेट गया और मौसी अपने कमरे में टीवी देखने लगी। करीब सवा तीन बजे मैं पानी पीने के बहाने मौसी के कमरे में गया तो देखा मौसी बिस्तर पे फैली पड़ी थी और खर्राटे मार रही थी।
मैं पानी पीकर वही खड़ा हो गया और मौसी को घूरने लगा। मौसी की नाइटी पंखे की हवा से थोड़ी थोड़ी उड़ रही थी। नाइटी के अंदर दोनों चुचियों अगल बगल को बिखरे पड़े थे।
मैं चुपचाप से जाकर मौसी के पांव के पास जाकर बैठ गया। मैंने अपना सर झुका कर उनकी नाइटी के अंदर देखने की कोशिश की। नाइटी के अंदर मुझे दो गोरी गोरी और मोटी, गुदाज टांगें दिखीं, टाँगों पे थोड़े से बाल थे पर फिर भी चिकनी लग रही थी।

उसके ऊपर दो विशाल जांघें, पर जांघें आपस में जुड़ी पड़ी थी, तो चूत नहीं दिख पा रही थी, मैंने मौसी की टांग के नीचे दबी उनकी नाइटी निकालनी शुरू की, धीरे धीरे जितनी नाइटी मैं निकाल सकता था, मैंने निकाल दी।

अब जब मैंने मौसी की नाइटी तम्बू की तरह ऊपर उठाई तो वाह क्या नज़ारा था। दो खूबसूरत मोटी मोटी टांगें, उसके ऊपर ताज़ी शेव की हुई चूत, चूत के ऊपर गोरा गोरा गोल पेट, और पेट के ऊपर दो विशाल छातियाँ।

यह मेरी ज़िंदगी का पहला अनुभव था जब मैंने कोई औरत पूरी नंगी देखी थी। मैंने मौसी की नाइटी उनके पेट तक ऊपर उठाकर रख दी क्योंकि इससे ऊपर नाइटी जा नहीं रही थी।
मैंने अपना चेहरा पास ले जाकर बड़े करीब से चूत के दर्शन किए। शायद मौसी ने कल ही चूत शेव की होगी, क्योंकि रात मौसी मौसा ने अपना प्रोग्राम जो किया था, चूत के आस पास पाउडर लगा था।

मैं इस चूत को चूमना चाहता था पर डर रहा था, फिर भी मैंने हिम्मत करके धीरे से अपने होंठों से चूत की दरार को छुआ।

मौसी थोड़ी सी हिली, मतलब चूत को छू नहीं सकता था। मगर अब हिम्मत बढ़ती जा रही थी, मैंने अपना पायजामा खोलकर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और मौसी के सामने हिला के धीरे से अपने मुँह में फुसफुसाया- उठो अनिता, तुम्हारा यार अपना लंड निकाल के तुम्हारे सिरहाने खड़ा है, इसका अभिवादन करो, अपने मुँह में लेकर इसे प्यार करो, अपनी टांगें फैलाकर इस अपनी चूत में लो, उठो डार्लिंग, उठो।

पर मेरी आवाज़ इतनी धीमी थी कि सिर्फ मैं ही सुन सकता था।

कितनी देर मैं मौसी की चूत देखकर अपना लंड हिलाता रहा, जोश बढ़ता गया और मैं और ज़ोर से लंड हिलाता गया, पता तब चला जब मैं वहाँ खड़ा खड़ा ही झड़ गया।
मेरा जो वीर्य छूटा, उसके छींटे बहुत जगह पर फैल गए, मैंने जल्दी जल्दी सारी जगह से साफ किया, मगर एक बूंद मौसी की चूत के पास उनके पेडू पे गिरी जो बहकर चूत की दरार में समा गई, अब उसे तो मैं साफ नहीं कर सकता था, तो सारी तरफ देखकर के सब साफ हो गया, मैं जाकर अपने कमरे में लेट गया।

अब तो यह रोज़ का ही रूटीन हो गया, शायद गर्मी के कारण पर मौसी रोज़ नाइटी पहनती और रोज़ मैं उसकी नंगी देखता और लंड हिलाता और झड़ जाता… मतलब मौसी के चक्कर में मैं मुट्ठल बन रहा था।
जिस दिन मौसी किसी वजह से न सोती उस दिन मैं बहुत बेकरार महसूस करता।
अब तो मैं मौसी के कमरे में और बाथरूम में भी सुराखकर लिए थे और जब भी मौका मिलता तो मौसी को कपड़े बदलते, नहाते और मौसा से चुदते हुये देखता पर मेरी अपनी इच्छा थी मौसी को चोदने की वो पूरी नहीं हो रही थी।

फिर एक दिन भगवान मेरे पे मेहरबान हो गया, जब मैं मौसी की नाइटी ऊपर उठाकर उसकी चूत देखते हुये लण्ड हिला रहा था तो मौसी की नींद खुल गई।
मुझे तो यह लगता था कि मौसी बहुत गहरी नींद सोती है, सो मैं भी आराम से पूरा नंगा होकर मौसी के बेड के पास खड़ा होता था, पर आज अचानक मौसी जाग गई, मुझे देखकर बोली- यह क्या कर रहे हो?

मुझे काटो तो खून नहीं, मैं जल्दी से अपने कमरे के तरफ दौड़ने लगा गिर गया और मौसी ने उठकर झट से मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं नंग धड़ंग वहीं फर्श पे ही बैठ गया- मौसीजी गलती हो गई, प्लीज़ माफ कर दो। मैंने विनती की।

‘पहले यह बता,क्या रहा था?’ : मौसी जी।
‘बस गलती हो गई, मौसी, आगे से नहीं करूंगा।’ मैं गिड़गिड़ाया।

‘कब से चल रहा है ये सब?’ मौसी ने थोड़ा नरमी से पूछा।

‘पिछले 20 दिन से, पर मौसी अब नहीं करूंगा।’ मेरी रोने वाली हालत हो रही थी।

‘चल उठकर ऊपर बैठ और मुझे सब बता!’ मौसी ने मेरा पकड़ा हुआ हाथ खींच के बोली।

‘मौसी पहले कपड़े पहन लूँ?’ मैं फिर विनती की।

‘क्यों जब मेरे कपड़े उठाकर देख रहा था तब, मुझे बिना कपड़ों के देखता है और खुद नंगा शर्म महसूस करता है, चल बैठ…’ मौसी ने थोड़ा रोआब से कहा तो मैं मौसी के पास बेड पे बैठ गया और अपने लंड को अपने हाथ से ढकने के कोशिश कर रहा था।

मौसी क्योंकि बेड पे बैठी थी तो उनकी नाइटी अभी भी उनके घुटनों तक उठी हुई थी और घुटनों से नीचे उनके टांगें नंगी दिख रही थी। मगर मैं अब उन्हे नहीं देख रहा था।

‘किसने सिखाया तुम्हें ये सब?’ मौसी ने पूछा।
‘किसी ने नहीं।’ मैंने जवाब दिया।
‘तो, क्या देखते थे?’
‘जी कुछ नहीं!’
‘कुछ नहीं तो फिर देखते क्यों थे, अच्छा लगता है?’

मैं चुप रहा।

‘इधर देख और बातकर मुझसे, क्या देखते थे?’ मौसी ने ज़ोर देकर पूछा।
‘जी वो…’ मैंने हकलाते हुए कहा।
‘वो क्या?’ मौसी ने फिर पूछा।

मैं फिर चुप रहा।
मौसी उठकर खड़ी हुई और बिल्कुल मेरे सामने आकर खड़ी हो गई- देख अगर सच बताएगा तो ठीक है, नहीं तो गाँव में तेरे घर में मम्मी को बता दूँगी, कि तूने क्या बदतमीजी की है।’
मैं और डर गया- प्लीज़ मौसी किसी को मत बताना।’ मैं कहा।

‘ठीक हैं नहीं बताऊँगी, अगर तू यह बताएगा कि तो मेरी नाइटी उठा कर क्या देखता था।’
मैंने मौसी से नज़रें मिलाई और बोला- जी वो, आपकी…’
मेरे मुँह से हल्का सा निकला।
‘मेरी वो क्या?’ यह कहकर मौसी ने मेरा हाथ छोड़ा अपनी नाइटी उठाई और उतार के परे फेंक दी, मेरी ठुड्डी को पकड़ के मेरा मुँह ऊपर उठाया और बोली- ले अब देख और बता क्या कहते हैं इसे?

मैं मौसी के इस कारनामे से तो हैरान ही रह गया।
मौसी ने मेरे कंधों से पकड़ के मुझे बेड पे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ लेटी। ‘अब बता हरामखोर, क्या चाहता है मुझसे?’

मैं क्या कहता। मौसी की चूत मेरे लंड पे छू रही थी और उसके दोनों विशाल चुचियों मेरी छाती से सटे थे। मैं तो जैसे हैरानी और आनंद के समंदर में गोते लगा रहा था। मुझे तो जैसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।

‘चोदना चाहता है मुझे?’ मौसी ने पूछा, तो मैंने हाँ में सर हिलाया।

‘तो ऐसे हाथ से करके क्या होता है, तू कहता तो सही मुझे!’
‘मैं क्या कहता?’

‘यही कि मौसी, तुझे चोदना है।’
‘मौसी आपको चोदना है।’ अब जब सब बात खुल गई थी तो मैंने भी खुल के बोल दिया।
मौसी ने करवट ली अब वो खुद नीचे हो गई और मुझे अपने ऊपर ले लिया- तो चल चोद न, किसने रोका है।

अब तो सब कुछ खुल्लम खुल्ला हो गया था, मौसी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पे रखा, मैंने अंदर डालना चाहा तो अंदर गया नहीं, मुझे तकलीफ हो रही थी।

‘क्या हुआ, डालता क्यों नहीं?’ मौसी ने कहा।
‘मौसी दर्द हो रहा है’ मैंने कहा।

‘दर्द, चल दिखा मुझे’ मौसी ने मेरा लंड पकड़ा और अपने हाथ में लेकर देखा- अरे तेरे तो अभी टांके भी नहीं टूटे हैं। तू तो बिल्कुल कुँवारा है, कच्ची कली!और मौसी हंस पड़ी।

मैंने हैरानी से मौसी की तरफ देखा तो वो बोली- डर मत, तेरी सील तोड़नी पड़ेगी।
‘वो कैसे?’ मैंने पूछा।
‘वो मेरा काम है, कल रात को तेरा उदघाटन करना है, यह समझ कल तेरी सुहागरात है।’
‘कल क्यों?’
‘कल तेरे मौसा समान लाने बाहर जा रहे हैं, 2 दिन बाद लौटेंगे।’ वो बोली।
‘तो दो दिन अपनी मौज है फिर तो?’
‘बिल्कुल, खुल्ला खाओ नंगे नहाओ।’ मौसी ने मुझे आँख मार के कहा।

मैं मन ही मन बड़ा खुश हुआ कि ‘चलो ये काम तो सेट हुआ।’

‘तो अब क्या करें?’ मैंने पूछा।
‘अब चुस्का चुस्की करें?’ वो बोली।
‘वो क्या होता है?’ मैंने बेधड़क पूछा।
‘तू मेरी चूत चाटेगा और मैं तेरा लण्ड चूसूंगी, ठीक है?’
मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता था।

मौसी ने मुझे बेड के बिल्कुल बीच में लेटाया, मेरे सर के नीचे सिरहाना दिया, और खुद मेरी छाती पे बैठ गई, उसकी पीठ मेरी तरफ थी उसकी भरी भरकम विशाल गाँड मेरे मुँह के बिल्कुल ऊपर थी।
वो झुकी और और मेरा लंड जो पहले ही तन चुका था, अपने मुँह में ले लिया और खुद थोड़ा पीछे सरककर अपनी चूत मेरे मुँह से सटा दी, बेशक उसकी चूत बिल्कुल साफ थी मगर पानी से भीगी पड़ी थी, मैंने उसकी चूत के होंठों से अपने होंठ लगाए और अपनी जीभ उसकी चूत में फेरी, एक अजब से स्वाद मेरी जीभ पे आया, पर बुरा नहीं था।

धीरे धीरे मैं अपनी पूरी जीभ उसकी चूत फिराने लगा, मुझे उसकी चूत का पानी का स्वाद लगने लगा। वो तो खैर कितने सालों से शादी शुदा थी, सो लंड चूसने की माहिर थी, उसके चूसने से मेरा उन्माद बढ़ता गया, मैं उसकी पीठ पे, चूतड़ों पे हाथ फिरा रहा था, कभी उसके चूची दबाता, कभी उसके निप्पल को मसलता। मैं अनाड़ी खिलाड़ी था सो बस 5 मिनट में ही उसके मुँह में झड़ गया, मेरा वीर्य उसके मुँह, मेरी जांघों और आस पास बिस्तर पर बिखर गया।

मैं तो ठंडा हो गया पर उसका अभी बाकी था, फिर वो उठी- ले तेरा तो हो गया, अब मेरा भी कर दे!

‘जी मौसी!’ मैंने बड़े आज्ञाकारी ढंग से कहा।
वो बेड के किनारे पे लेट गई और मुझे नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठाया, अपनी दोनों टाँगें चौड़ी करके मेरा मुँह अपनी चूत से लगाया और अपनी दोनों जांघें मेरे कंधों पर रख दी।

मैंने चूत चाटनी शुरू की, वो बोली- शुभम अंदर तक जीभ डाल कर चाट!
फिर उंगली लगाकर बताया- यह जो चूत का चना है न इसको भी चाट और अपने होंठो में लेकर चूस!

मैं उसके बताए अनुसार चाटने लगा। वो अपने हाथों से मेरा सर सहला रही थी और अपनी दोनों जांघों में मेरे सर को कस के पकड़े थी। मैं अपना सर हिला नहीं पा रहा था, सिर्फ मेरी जीभ उसकी चूत के ऊपर नीचे और अंदर बाहर चल रही थी, उसकी साँसें तेज़ हो चली थी, अपनी कमर उचका रही थी और मुँह से न जाने क्या ‘ऊह, आह, उफ़्फ़ ‘ जैसे शब्द निकाल रही थी।

और जब मौसी स्खलित हुई तो उसने इतने ज़ोर से अपनी जांघें भींची के मेरा तो जैसे दम ही घुट गया।
उसने एक हाथ से अपना चुची पकड़ रखा था और दूसरे हाथ से मेरा सर अपनी चूत में धकेल रही थी, बदन कमान की तरह अकड़ा हुआ था मगर मैंने चाटना बंद नहीं किया, मौसी की चूत का पानी और मेरा थूक चू कर मेरे गले से नीचे तक बह रहे थे।

जब मौसी थोड़ी ठंडी हुई तो उसने अपनी टाँगें ढीली की तो मुझे खुलकर सांस आई।

‘वाह, मज़ा आ गया, तेरे मौसा तो दो मिनट भी नहीं चाटते!’

उसके बाद तो मौसी जैसी मेरी बीवी ही बन गई हो, मौसा के आने तक सारा समय चुहलबाजी चलती रही। मैंने जी भर के मौसी के मोटे मोटे चुचियों दबाये, चूतड़ सहलाए।
अब तो बस कल का इंतज़ार था।

अगले दिन सुबह मौसा अपना सामान लेने चले गए मैं कॉलेज चला गया, जब दोपहर को आया तो मौसी, नाइटी पहने घूम रही थी, मैंने अंदर दाखिल होते ही उसे बाहों में भर लिया और एक जोरदार चुंबन उसके होंठों पे किया।

‘अरे सब्र करो सैयां, मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही!’
‘अरे पूछो मत मौसी जान निकली जा रही है, रात का इंतज़ार नहीं होता, अभी सील तोड़ दो मेरी, जानेमन!’ मैं कुछ ज़्यादा ही बेतकल्लुफ़ हो रहा था।
‘तोड़ दूँगी, पर रात को, सब्र का फल मीठा होता है, बस हिम्मत रखना, कहीं रो मत पड़ना, लल्ला जी!’
‘नहीं जानेमन, तुम तो मेरा काट के खा भी जाओ तो भी गम नहीं!’ मैं पूरे जोश से बोला।

‘चलो अभी खाना खा लो!’
‘मौसी, एक बात कहूँ?’
‘हूँ…’
‘बिल्कुल नंगे होकर खाना खाएं?’
‘क्या, पागल हो क्या?’
‘प्लीज़ मौसी!’
‘चल ठीक है।’ वो मान गई।

जितनी देर में वो खाना डाल के लाई, मैं बिल्कुल नंगा हो चुका था और लंड तनकर लोहा। मौसी पास आ के जब कपड़े उतारने लगी तो मैं बोला- मौसी, रुको, मैं तुम्हें नंगी करूंगा।

मौसी हंस पड़ी।
सबसे पहले मैंने मौसी की नाइटी उतारी, फिर ब्रा खोली और उसके बाद नीचे पहनी हुई, पेंटी। दोनों ने नंगे होकर खाना खाया, फिर साथ लेटकर टीवी देखते रहे।

मैं मौसी के बदन को सहलाता रहा, जब रहा नहीं गया तो मौसी के ऊपर उल्टा लेट गया- मौसी अब सब्र नहीं होता, और नहीं तो चुसका चुस्की ही कर लेते हैं।’ मैंने कहा तो मौसी मान गई।

दोनों कितनी देर एक दूसरे को चूसते रहे, इस बार मुझे भी काफी टाइम लगा। इसके बाद तो मैं रात का इंतज़ार कर रहा था और रात थी कि आ ही नहीं रही थी।

खैर रात भी आई, 8 बजे ही खाना खा लिया, फिर हम दोनों एक साथ नहाये, फिर अच्छी तरह से सज धजकर तैयार हुये।
मौसी ने ऐसे मेकअप किया जैसे आज उसकी शादी हो।
मैंने कहा- क्या प्रोग्राम है?
वो बोली- आज हम अपनी शादी की सुहागरात मनाएंगे।

उसने अपना बिस्तर बड़े अच्छे से लगाया और बिस्तर पर दुल्हन की तरह बैठ गई। मैं उसके पास गया, बेड पे बैठा और धीरे से उसका घूँघट उठाया।
उसकी आँखें बंद थी- वाह कुदरत का क्या शाहकार है, कितनी सुंदर बीवी मिली है मुझे!
यह कहकर मैंने उसकी होंठों का चुंबन लिया तो उसने मुझे अपने गले लगा लिया। मैंने भी उसे बेड पे लिटाया और उसके साथ लेट गया। उसने अपनी आँखें नहीं खोली, पर मैं उसके चेहरे और होंठों को चूमता हुआ उसके चुचियों तक जा पहुँचा।

‘वाह तुम्हारे चुचियों तो बहुत भारी हैं!’

‘जी स्वामी, सब आपके लिए है।’ उसने शर्मा कर कहा।

‘मुझे देखने हैं।’ यह कहकर मैंने उसके ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए, एक एक करके सब हुक खुल गए तो नीचे उसने सुर्ख लाल ब्रा पहनी थी।
मैंने उसके चुचियों दबाये तो बोली- ऊह स्वामी, मत करो, मुझे कुछ कुछ होता है।
उसने नकली स्वांग रचते हुये कहा।

‘घबराओ मत प्रिये, आज जो होना है उसे हो जाने दो!’ यह कह कर मैंने अपनी कमीज़ और पैंट उतारी और उसके ऊपर लेट गया, उसके दोनों चुचियों पकड़कर दबाये और अपनी जीभ से उसके होंठ, चेहरे और ठुड्डी को चाटा तो मौसी की सिसकारियाँ निकाल गई।

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मैं उठा और उसकी साड़ी, ब्लाउज़, ब्रा, पेटीकोट और कच्छी सब उतार दी और उसे बिल्कुल नंगी कर दिया।

‘स्वामी, मुझे शर्म आ रही है।’ उसने नाटक सा किया।
‘शर्माओ मत, ये लो!’ ये कहकर मैंने अपनी बनियान और चड्डी भी उतार दी।

‘उफ़्फ़, कितना बड़ा है आपका वो!’ यह कहकर उसने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया।
मैं अपना लंड उसके चेहरे के पास लेकर गया और उसके हाथ चेहरे से हटाकर बोला- इसे चूस के देख मेरी जान!

तो उसने बिना किसी हिचकिचाहट के लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। मैंने भी उसे सीधा किया और अपना मुँह उसकी टाँगों में घुसेड़ दिया और उसकी चूत चाटने लगा।
कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, फिर मौसी बोली- स्वामी अब और बर्दाश्त नहीं होता, मेरे अंदर समा जाओ।

मैंने कहा- अभी लो जानेमन।

मैंने उसकी टाँगें खोली और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और अंदर धक्का मारने की कोशिश की, पर दर्द के कारण मैं लड बाहर निकाल लेता।
3-4 बार कभी थूक लगाकर कभी कैसे ट्राई किया पर बात नहीं बनी तो मौसी बोली- स्वामी मैं कोशिश करके देखूँ?

मैंने कहा- हाँ तुम देखो, साला जाता ही नहीं।

वो उठी और किचन में चली गई, वहाँ से तेल की बोतल उठाकर लाई- आप नीचे लेटो।

जब मैं लेट गया तो उसने ढेर सारा तेल मेरे लंड पे लगाया और अपनी चूत के अंदर भी लगाया- अब देखना पिचक से अंदर घुस जाएगा और पता भी नहीं चलेगा।
तेल की बोतल साइड पे रख के मौसी मेरे ऊपर आ बैठी, उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत को लंड के ऊपर सेट किया, थोड़ा सा लंड अंदर बाहर किया, तो मैंने देखा कि लंड और बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा है।

‘ठीक है?’ मौसी ने पूछा।
‘हाँ मौसी, ठीक है।’ मैंने भी जवाब दिया।
‘तो आगे शुरू करें?’
‘हाँ’ मैंने पूरे जोश से कहा।

बस उसके बाद मौसी ने एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में घुस गया पर मैं दर्द से बिलबिला उठा। ‘आह मौसी, मर गया!’ मेरे मुँह से बस इतना ही निकला।
‘कुछ नहीं होता, बस चुपचाप लेटा रह!’ कहकर मौसी ने फिर झटका मारा।

हर झटके के साथ मेरा लंड मौसी की चूत में अंदर जा रहा था और मेरा दर्द बढ़ रहा था, पर मौसी ने मुझे पूरी तरह से अपने क़ाबू में कर रखा था।
तेल ने बड़ी भूमिका निभाई और मेरा लंड 2-3 घस्सों में पूरा मौसी की चूत में समा गया।
जब सारा अंदर चला गया तो मौसी बोली- देख सारा अंदर चला गया, अब तो दर्द नहीं हो रहा।

‘दर्द तो है मौसी, पर मज़ा भी आ रहा है।’

‘तो और मज़ा ले!’ ये कहकर मौसी ज़ोर ज़ोर से घस्से मरने लगी और मेरा लण्ड उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा।
मुझे लग रहा था जैसे उसकी चूत आज कुछ ज़्यादा ही पानी छोड़ रही है, मैंने मौसी से कहा- मौसी आज कुछ ज़्यादा ही पानी छोड़ रही हो’।

‘अच्छा, चलो देखते हैं।’ यह कहकर मौसी ने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाला तो मैं तो देख के हिल गया। मौसी की चूत और मेरा लंड दोनों खून से लथपथ थे, मेरे लंड की सील टूट चुकी थी और उससे खून निकल रहा था।

‘यह क्या कर दिया मौसी, यह तो खून निकाल रहा है।’

‘तो क्या हुआ, अगर हाथ से सील तोड़ता फिर तो निकलता, डर मत सबके निकलता है, चाहे लड़का हो या लड़की।’ खैर कुछ देर मैं वैसे ही लेटा रहा, मौसी ने मेरे लंड पे बर्फ लगाई, थोड़ी देर बाद जब खून बंद हो गया तो मैं लंड पकड़कर लेट गया, मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

मौसी रसोई से एक ग्लास गरम दूध ले आई और मुझे पिलाया।
दूध पीकर थोड़ा ठीक सा हुआ मैं तो मौसी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया- मेरे राजा, यह तो पहली बार सबके साथ होता है।

मगर अब मैं सेक्स के मूड में नहीं था, पर थोड़ी देर की चूमा चाटी के बाद फिर से मूड बन गया। मौसी ने फिर से ढेर साला तेल मेरे लंड पे लगाया, इस बार मैं ऊपर था और जब मैंने डाला तो बड़े आराम से मेरा लंड मौसी की चूत में समा गया।
जब सारा अंदर चला गया तो मौसी ने पूछा- अब दर्द हो रहा है क्या?
‘हाँ, थोड़ा सा, पर मज़ा भी आ रहा है।’

धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और मौसी नीचे से गांड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि शायद चुदाई करने से मेरे लंड से फिर से खून निकलना शुरू हो गया था पर अब मैं इस थोड़े से दर्द के लिए अपने जीवन का सर्वोत्तम आनन्द नहीं छोड़ सकता था।
मैं अपने दर्द की परवाह किए बिना मौसी की चुदाई कर रहा था और मौसी मेरे नीचे लेटी ‘ऊह, आह, ऊफ़्फ़’ और ना जाने क्या क्या बड़बड़ा रही थी।
उसकी सिसकारियाँ मेरा रोमांच बढ़ा रही थी… आज तक जो सिसकारियाँ मैं छुपके सुनता था आज वो सिसकारियाँ मेरी वजह से निकल रही थी, सच पूछो तो मन में मैं बहुत खुश था।

मुझे महसूस हुआ के मौसी मुझसे ज़्यादा नीचे से ज़ोर लगा रही है, मैंने पूछा- क्या हुआ, बहुत ज़ोर लगा रही हो?

‘बस बोलो मत, मेरा होने वाला है।’ यह कहते कहते मौसी ने अपनी कमर ऊपर उठा ली जैसे चाहती हो कि लंड के साथ मैं भी उसकी चूत में घुस जाऊँ।

मैंने भी थोड़ा और ज़ोर लगाया, उसके बाद वो धड़ाम से नीचे गिर गई और अपने हाथ पैर फैला के लेट गई।

‘मज़ा आ गया, उफ़्फ़, बहुत बढ़िया चुदाई करतो हो तुम!’ मौसी ने मेरी पीठ थपथपाई तो मन में अजीब सा हर्ष पैदा हुआ।
अब मैं भी झड़ना चाहता था, मैंने पूरी स्पीड से चुदाई शुरू की और 2 मिनट बाद ही मैंने अपने मर्दांगी के रस से मौसी की चूत को भर दिया।

अपनी पहली और जोरदार चुदाई से मैं थक गया था और मैं ऐसे ही सो गया।

अगली सुबह उठा तो देखा लंड तो सूजा पड़ा था और दर्द भी हो रहा था।
खैर दो दिन तक मैंने आराम किया और मौसी ने मेरी बहुत सेवा की, मुझे दवा खिलाई, मेरी खुराक का ख्याल रखा, मेरे लंड की मालिश भी की।
तीसरे दिन मैं बिल्कुल ठीक था पर उस दिन मौसा जी के आने का दिन था सो मैं सारा दिन मौसी के इर्द गिर्द घूमता रहा। मेरे सर पे तो फिर से कामसूत्र चढ़ा था। मैं तो नाइटी उठाकर मौसी की चूत तो क्या उसकी गांड भी चाट गया पर वो देने को तैयार ही नहीं हुई।

यह अलग बात थी कि जब वो किचन में खड़ी खाना बना रही थी और मैं उसकी नाइटी में घुसा हुआ उसकी गांड के सुराख पर जीभ फेर रहा था और अपने दायें हाथ की दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल रहा था, तो वो पूरी कसमसा रही थी पर चुदवाने के नाम पर हर बार बहाने से बनाती रही।

जब शाम हो गई तब जाके बोली- सब्र रख, तेरे मौसाजी आज नहीं आएंगे, वो कल आएंगे।
मेरे तो जैसे भाग खुल गए, मैंने पूछा- तो फिर?
वो बोली- तो आज फिर मेरी सुहागरात है।
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RE: Mother and Son : A taboo affair 3 - by Raghu - 18-10-2026, 09:22 PM
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