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*(कल्लू अब बिल्कुल काबू से बाहर हो चुका था। उसके शरीर की नसें फूल गई थीं और माथे से पसीने की बूंदें टपककर मम्मी के पेट पर गिर रही थीं। वह किसी मशीन की तरह, बिना रुके, पूरी ताकत और जोश के साथ मम्मी के भीतर वार कर रहा था। हर प्रहार इतना जोरदार था कि मम्मी का पूरा शरीर बिस्तर पर हिल रहा था और उनकी चीखें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं।)*
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*(जैसे-जैसे समय बीतता गया, कल्लू को महसूस होने लगा कि उसका शरीर अब उस अंतिम बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी संभव नहीं। उसकी साँसें बहुत भारी हो गई थीं और उसका अंग मम्मी के भीतर और भी अधिक गर्म और सख्त होता जा रहा था। उसे पता चल गया था कि 'झरना' फूटने ही वाला है।)*
![[Image: 37665]](https://cdn.porngifs.com/img/37665)
"आह्ह्ह..."
*(कल्लू का शरीर अब बुरी तरह कांप रहा था। उसका वेग अब नियंत्रण से बाहर था और उसे महसूस हो रहा था कि बस कुछ ही सेकंडों में उसका वीर्य ज्वालामुखी की तरह फटने वाला है। उसने एक आखिरी, बहुत ही गहरा और जबरदस्त झटका लगाया और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर हांफते हुए पूछा।)*
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"मालकिन... आह्ह्ह... मेरा झरना... निकलने ही वाला है... क्या मैं इसे आपके चेहरे पर निकाल दूँ? आपका चेहरा देखूँगा तो मज़ा दोगुना हो जाएगा... क्या बोलती हैं आप?"
*(मम्मी की हालत भी अब बेहाल थी। उनकी आँखें आधी खुली थीं और उनमें वासना की चमक साफ़ दिख रही थी। कल्लू के सवाल ने उनके भीतर की कामुकता को और बढ़ा दिया। उन्होंने हाँ में सिर हिलाया और अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरते हुए एक उत्तेजित आवाज़ निकाली।)*
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"हाँ... हाँ कल्लू! जो तेरा मन करे वो कर... मेरे पूरे चेहरे को तेरे गरम वीर्य से भर दे... मुझे देखना है कि तू मुझ पर कैसे बरसता है! जल्दी कर... अब और इंतज़ार मत करा!"
*(मम्मी के इन उत्तेजित शब्दों ने कल्लू के संयम के आखिरी धागे को भी तोड़ दिया। कल्लू ने तुरंत अपना शरीर पीछे खींचा, लेकिन पूरी तरह अलग नहीं हुआ। उसने मम्मी के दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के पास बिस्तर पर दबा दिया ताकि वे हिल न सकें।)*
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*(कल्लू ने अपने अंग को मम्मी की योनि से बाहर निकाला, जो चिकनाई के कारण फिसलकर बाहर आया। उसने अपना अंग मम्मी के चेहरे के ठीक ऊपर हवा में लहराया। कल्लू की आँखों में एक अजीब सी जीत की चमक थी। उसने एक लंबी और गहरी साँस ली और अपनी कमर को आगे की ओर झटका दिया।)*
![[Image: 34114]](https://cdn.porngifs.com/img/34114)
"ये लो मालकिन... ये रहा मेरा असली खजाना!"
*(अगले ही पल, कल्लू के शरीर में एक भयानक कंपन हुआ। उसके पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आया और उसके अंग के मुहाने से सफेद, गाढ़ा और बेहद गर्म वीर्य एक धार की तरह फूट पड़ा।)*
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*(वह पहली बौछार सीधे मम्मी की नाक और गालों पर गिरी। फिर दूसरी, तीसरी और चौथी... मानो कोई नल खुल गया हो। कल्लू का 'झरना' रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। सफेद रंग का गाढ़ा तरल मम्मी की बंद आँखों के कोनों में जाने लगा, उनके होंठों को भिगोने लगा और उनके गले तक बहने लगा।)*
*(कल्लू जोर-जोर से हांफ रहा था, उसका पूरा शरीर झटकों के साथ कांप रहा था क्योंकि वह अपना सारा जमा हुआ वीर्य मम्मी के चेहरे पर उगल रहा था।)*
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*(जैसे-जैसे समय बीतता गया, कल्लू को महसूस होने लगा कि उसका शरीर अब उस अंतिम बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी संभव नहीं। उसकी साँसें बहुत भारी हो गई थीं और उसका अंग मम्मी के भीतर और भी अधिक गर्म और सख्त होता जा रहा था। उसे पता चल गया था कि 'झरना' फूटने ही वाला है।)*
"आह्ह्ह..."
*(कल्लू का शरीर अब बुरी तरह कांप रहा था। उसका वेग अब नियंत्रण से बाहर था और उसे महसूस हो रहा था कि बस कुछ ही सेकंडों में उसका वीर्य ज्वालामुखी की तरह फटने वाला है। उसने एक आखिरी, बहुत ही गहरा और जबरदस्त झटका लगाया और मम्मी की आँखों में आँखें डालकर हांफते हुए पूछा।)*
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"मालकिन... आह्ह्ह... मेरा झरना... निकलने ही वाला है... क्या मैं इसे आपके चेहरे पर निकाल दूँ? आपका चेहरा देखूँगा तो मज़ा दोगुना हो जाएगा... क्या बोलती हैं आप?"
*(मम्मी की हालत भी अब बेहाल थी। उनकी आँखें आधी खुली थीं और उनमें वासना की चमक साफ़ दिख रही थी। कल्लू के सवाल ने उनके भीतर की कामुकता को और बढ़ा दिया। उन्होंने हाँ में सिर हिलाया और अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरते हुए एक उत्तेजित आवाज़ निकाली।)*
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"हाँ... हाँ कल्लू! जो तेरा मन करे वो कर... मेरे पूरे चेहरे को तेरे गरम वीर्य से भर दे... मुझे देखना है कि तू मुझ पर कैसे बरसता है! जल्दी कर... अब और इंतज़ार मत करा!"
*(मम्मी के इन उत्तेजित शब्दों ने कल्लू के संयम के आखिरी धागे को भी तोड़ दिया। कल्लू ने तुरंत अपना शरीर पीछे खींचा, लेकिन पूरी तरह अलग नहीं हुआ। उसने मम्मी के दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के पास बिस्तर पर दबा दिया ताकि वे हिल न सकें।)*
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*(कल्लू ने अपने अंग को मम्मी की योनि से बाहर निकाला, जो चिकनाई के कारण फिसलकर बाहर आया। उसने अपना अंग मम्मी के चेहरे के ठीक ऊपर हवा में लहराया। कल्लू की आँखों में एक अजीब सी जीत की चमक थी। उसने एक लंबी और गहरी साँस ली और अपनी कमर को आगे की ओर झटका दिया।)*
"ये लो मालकिन... ये रहा मेरा असली खजाना!"
*(अगले ही पल, कल्लू के शरीर में एक भयानक कंपन हुआ। उसके पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आया और उसके अंग के मुहाने से सफेद, गाढ़ा और बेहद गर्म वीर्य एक धार की तरह फूट पड़ा।)*
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*(वह पहली बौछार सीधे मम्मी की नाक और गालों पर गिरी। फिर दूसरी, तीसरी और चौथी... मानो कोई नल खुल गया हो। कल्लू का 'झरना' रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। सफेद रंग का गाढ़ा तरल मम्मी की बंद आँखों के कोनों में जाने लगा, उनके होंठों को भिगोने लगा और उनके गले तक बहने लगा।)*
*(कल्लू जोर-जोर से हांफ रहा था, उसका पूरा शरीर झटकों के साथ कांप रहा था क्योंकि वह अपना सारा जमा हुआ वीर्य मम्मी के चेहरे पर उगल रहा था।)*


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